Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई

 Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


हाय . मैं फिर से हाजिर हूं।मैं आपके समक्ष एक नई कहानी बताता हूँ जब कि मै बिलासपुर से तिरुवन्तमपुरम ट्रेन मैं यात्रा कर रहा था। इस अंकल की गांड मराई तो बड़ी ही साधारण सी थी।


मै 22 वर्षीय युवक हूँ । ये अंकल रायपुर से ट्रेन में चढ़े थे। वो अपनी 2 वर्ष के बेटे के साथ इस कम्पार्टमैंन्ट में चढ गए। उसकी सीट बिलकुल मेरे साथ की थी। ये सीट मात्र दो जनों के लिये पर्याप्त थी , मतलब आप समझ सकते है।


अब होना क्या था मैंने उसके बेटे को अपने गोद में लिया और खूब प्यार करने लगा। फिर अंकल ने कहा कि मैं कपड़े बदल कर आता हूँ तो तब तक मैं उसके बेटे का ख्याल रखूं। जब वो कपड़े बदलकर आये तब मैंने देखा उसके बनियान थोड़ी पारदर्शी थी। मैं उसको देखता रह गया। थोड़ी देर बाद मुझे जब होश आया तो मैंने उसका पूरा परिचय लिया. तब मैंने जाना कि वो चैनई मैं रहते है और उसके पत्नी रायपुर के किसी बैंक में काम करती हैं और छुट्टी के वक्त वो चैन्नई आते थे।


तब मैंने तुरंत सोच लिया कि ये शायद लड़कों के साथ सेक्स नहीं करते होगे। अचानक उसके बेटे ने मेरे लिप्स को किस किया जिसका मैंने भी उसे प्यार से उत्तर दिया। और वो हम दोनो के किस को बड़े गौर से देख रहे थे।

जब सोने का वक्त आया तो मैंने देखा उसका बेटा मेरे साथ सोने की ज़िद कर रहा है.अंकल ने मुझे अपना बेटा मुझे दे दिया। मैं उपर सो रहा था और अंकल नीचे सो रहे थे। पर मैं कहाँ सो पा रहा था. उसके मस्त जवानी को देख देख कर मैं उसके दो साल के बेटे को किस पे किस किये जा रहा था। तब आधे घन्टे बाद अंकल उठकर अपने बेटे को उठा रहे थे कि  मैं थोड़ा सा उदास होने का नाटक करने लगा। मैंने कहा कि प्लीज अपने बेटे को मेरे पास सोने दे। तो उसने तुरंत मुझे अपना बेटा दे दिया ।


वैसे मैं उस कम्पार्टमेन्ट के बारे मैं बता दूं। वैसे तो हमारे बगल वाला खाली था। और हम ए सी में यात्रा कर रहे थे तो उसमें परदे लगे होते हैं जिससे कोई हमें देख नहीं सकता था।


मैंने उससे बातचीत शुरू कर दी.


“अब तक शादी नहीं की तुमने?” उसने पूछा.


“मुझे लड़कियों में इंटरेस्ट नहीं है”मैंने साफ़ साफ़ बता दिया.सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी.बोले”इंटरेस्ट ना होते हुए भी कभी कभी करनी पड़ जाती है”

“जैसे आपने कर ली ?”मैंने बेधड़क पूछ लिया.उसका बेटा मेरी जांघ पर सर रखकर सो रहा था.उसके सर पर हाथ फेरने के बहाने से अंकल मेरे लंड को टच करने की कोशिश लगे..मैंने मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड के सही ठिकाने पर रख दिया.वो थोड़ी हिम्मत करके मेरा लंड मसलने लगे.वो खड़ा होता जा रहा था.मैंने उसकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया.मैं उसके निप्पल को फ़ील कर रहा था, तो उसने धीरे से कहा दिया “चलो अब बेटे से प्यार खतम हो गया हो तो उसके बाप को प्यार करो। “


मैंने पहले उसके माथे पर किस किया फिर मैंने उसके कानों को फिर नाक को फिर उसके गालों को मैंने अच्छी तरह से चाटा और फिर उसके मुलायम से होठ को किस करने लगा। वो थोड़े गरम हो गए थे।

मैंने उससे कहा “तुम सो जाओ”

उसने कहा- क्यूं ?

मैंने कहा “तुम पहले लेट जाओ फिर देखो मेरा जादू।”


वो तुरंत मुस्कुराया और लेट गया। मैं तुरंत बाथरूम गया और अपना चड्डी निकाल कर मैं सिर्फ़ अपना लोवर पहनकर वापस आया। वो मेरा बेसब्री से इन्तज़ार कर रहा था। मैं उसकी आंखो में प्यास देख सकता था। मैं अन्दर बैठ गया और मैंने परदा गिरा दिया ताकि हमें कोई ना देख सके। मै अब धीरे से उसके निप्पलों को मसल रहा था।


वो बेचारा ज़ोर जोर से चिल्लाना चाहता था पर वो चिल्ला ना सका और अपने आवाज़ पे उसने कन्ट्रोल किया। मैंने धीरे से उसके पायजामे के अन्दर हाथ डालकर उसका लंड हाथ में ले लिया और उसका बनियान उतार दिया । उसने कहा कि मुझे नंगा कर दो। तो ये बात सुनकर मैं और गरम हो गया। मैंने बड़े आराम से उसके पायजामे को उतारा और उसके लंड और उसके लिप्स के साथ प्यार करता रहा।

मैंने भी अपने कपड़े उतारे. मैं सिरफ़ बनियान और अपने लोवर में था। और वो सिरफ़ अपने पायजामे और अंडरवियर में था। मैं उसके निप्पलों के साथ 15 मिनट तक प्यार करता रहा। फिर मैंने अपना हाथ उसके पाजामें के अन्दर डालकर उसके गांड को अंडरवियर के बाहर से सहला रहा था। वो मुझे पागलो की तरह देख रहा था। फिर उसने मेरे लिप्स को प्यार से काटा जिस्से मैं और मेरा नटराज पेन्सिल और गरम हो गये। मैंने अपना हाथो से उसका नाड़ा खोला और उसके अंडरवियर को थोड़ा नीचे कर दिया और अब मैं उसे धीरे धीरे उसके गांड के अन्दर अपनी अंगुली घुसा रहा था। उसकी  गांड तो पहले से तैयार थी।


अब मैंने अपनी दो अंगुली से उसके गांड को टटोला तो उसकी  सांसे तेज़ हो गयी .मुझे वो नज़ारा देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं अचानक तीन अंगुली उसके छेद में ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करने लगा.


Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई हाय . मैं फिर से हाजिर हूं।मैं आपके समक्ष एक नई कहानी बताता हूँ जब कि मै बिलासपुर से तिरुवन्तमपुरम ट्रेन मैं यात्रा कर रहा था।

अब तो वो बेकाबू हो गया था। वो मेरा साथ देने लगा था। मैं उसे किस भी कर रहा था और एक हाथ से उसके लंड को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी गांड में ज़ोर ज़ोर से घुसा रहा था। ठीक पांच मिनट के बाद उसने अपना ज्यूस बाहर निकाला और मैं उसके सामने उसे चाटने लगा तो उसने कहा – ऐसा तो मेरी पत्नी भी नहीं करती है।

मैंने कहा “प्लीज इस वक्त अपने पत्नी को मत याद करो”

वो थोड़ा मुस्कुराया . मैंने उसे कहा “अब मेरा क्या होगा? ”

तो उसने कहा – चलो बाथरूम मे चलें।

Hindi Gay sex story – मेरा पहला अनुभव शीमेल के साथ

 Hindi Gay sex story – मेरा पहला अनुभव शीमेल के साथ


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


मेरा नाम अनमोल है और मेरी उम्र २५ साल है | मै एक सेल्स मे हु और एक शहर से दुसरे शहर काफी आता जाता रहता हु | मै अधिकतर रात मे सफ़र करता हु, ताकि मेरा दिन बच जाये | अभी कुछ ही महीने पहले की बात है, कि मै शहर से दुसरे शहर मे जा रहा था और मैने रात वाली बस ली थी | मेरे सीट के बराबर वाली सीट खाली थी और उसपर कोई नहीं बैठा था | बस मे, कोई ज्यदा सवारिया भी नहीं थी; केवल कुछ ही लोग थे और सब के सब सो रहे थे | मुझे देर से सोने के आदत थी, इसलिए मै जाग रहा था और बोर हो रहा था |

पहले स्टॉप से कुछ सवारिया चड़ी और एक ३४-३५ साल की हसीन औरत मेरे बराबर वाली सीट पर आ कर बैठ गयी | मुझे लगा, चलो सफ़र अच्छा कट जायेगा | एक प्यारी से मुस्कराहट के साथ हम दोनों ने बातचीत शुरू की और आपस मे एक दुसरे को जाना | बात करते-करते काफी वक़्त निकल गया; काफी दिलचस्प मैडम थी वो | रात काफी हो चुकी थी और मुझे नीद आने लगी थी; तो, मैने उनको सोने के लिए बोला और काफी गहरी नीद मे सो गया |


आधी रात के बाद, उन्होंने मुझे काफी जल्दी मे उठाया और बोली बस ख़राब हो गयी है | रास्ते मे बारिश के कारण, काफी पानी भर गया है और बस पानी मे चलने के कारण ख़राब हो गयी है और कल सुबह १०:०० बजे चलेगी | इतनी रात मे कोई दूसरा जाने का जरिया मिलना मुश्किल था | उन मैडम का नाम सवि था | सवि ने मुझे से पूछा, कि क्या करना चाहिए | मैने कहा, इतनी रात मे कहाँ जायेंगे; यहीं होटल ढूंढ़कर कमरा ले लेते है और सुबह इसी बस से आगे चलेंगे | सवि ने भी मेरे साथ हामी भर दी और मेरे साथ ही होटल ढूंढने चल दी | काफी मुश्किल एक होटल मिला और हमने वहा २ रूम मांगे | लेकिन, उनके पास एक ही रूम था; मैने सवि को रूम लेने के लिए बोला और खुद दूसरा होटल देखने के लिए चलने लगा | सवि ने बोला, एक ही रूम ले लेते है, कुछ ही घंटो की बात है मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है | उसकी हां के बाद हम दोनों ने एक ही रूम ले लिया और रूम मे चले गये | हम दोनों ही काफी भीग चुके थे | सवि बाथरूम मे चली गयी और उसने मुझे तोलिया दे दिया | मैने अपने सारे भीगे कपडे उतार दिए और तोलिये को अपनी कमर पे लपेट लिया |

मुझे सुसु जाना था और मुझे ये ध्यान नहीं रहा, कि कमरे मे सवि भी है | मैने एक ही झटके के साथ बाथरूम ले दरवाजा खोल दिया और देखा, कि सवि ने भी केवल कमर पर तोलिया लपेट रखा है और वो ऊपर से नंगी है | मैने उसको सॉरी बोला, और बाहर निकलने लगा | उसने मुझे बोला, ठीक है और खुद बाहर आ गयी | मै सुसु करके कमरे मे आ गया; तो सवि बोली मेरे पास और कुछ नही है पहने के लिए; इसलिए मुझे ऐसे हे रहना पड़ेगा | तुम्हे कोई ऐतराज़ तो नहीं, मै ख़ुशी से मारा जा रहा था, मैने कहा नहीं |

हम दोनों टीवी देख रहे थे और मै कनखियों से सवि के बड़े चूचो को निहार रहा था और मेरा लंड जोर मार रहा था | मुझे उसे संभालना मुश्किल हो रहा था | मैने उसको हाथ से दबा रखा था | सवि ने शायद वो नोटिस कर लिया था और उसने सीधे न पूछकर, घुमाफिराकर बात शुरू की | उसने मुझे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे मे पूछा, तो मैने मना कर दिया और फिर उसने मुझे से पूछा, कि आखरी बार मैने कब सेक्स किया था | मैने उसको कुछ नहीं बोला, लेकिन उसके काफी पूछने के बाद उसको बोला, करीब ६ महीने पहले |

सवि मेरे पास उठकर आई और मेरे दोनों तरफ टांग फसाकर बैठ गयी और मेरे होटो को चूसने लगी | वो पूरी तरह से मेरे ऊपर नहीं बैठी थी | मुझे कुछ समझ नहीं आया, लेकिन मेरी साँसे तेज़ चल रही थी और मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और संभल नहीं रहा था | कुछ देर मस्त होटो को चूसने के बाद, उसने मेरा लंड अपने मुह मे ले लिया और मस्ती मे उसको चूसने लगी | जिस तरह से वो चूस रही थी, कुछ ही मिनटों मे, मैने अपना वीर्य उसके मुह मे छोड़ दिया और उसने पूरा वीर्य गटक लिया | वो फिर से मेरे होटो पर आ गयी और उसको चूसने लगी | उसने मुझे पूछा, कभी किसी लड़के साथ सेक्स किया है ? मैने कहा नहीं, लेकिन करने की इच्छा है | वो मुस्कुराई और उसने मेरे हाथ नीचे कर दिए और अपना तोलिया खोल दिया | अरे ये क्या, उसके पास तो एक लंड भी था | उसने मुझे उसका लंड हाथ मे पकड़ा दिया |

उसने मुझे बोला, मेरे पास दोनों है और मेरे ऊपर चढ़ बैठी | उसका लंड मेरे लंड से टकरा रहा था और वो मेरे लंड को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही थी | फिर, उसने मेरे हाथ अपनी कमर पर रख दिए और बोला जैसे मै करती हु, बिलकुल वैसे ही करना | वो अपने हाथ मेरी कमर पर फिराने लगी और मै भी वैसे ही करने लगा |

फिर उसने अपने हाथ मेरी गांड पर चलाने शुरू किया और मेरी गांड के छेद को रगड़ना शुरू कर दिया | और फिर उसने फिर एक ऊँगली मेरी गांड के छेद मे डाल दी | और उसके अन्दर फिराने लगा | मैने भी वही किया और मुझे उसकी ऊँगली अपने गांड मे लेने मे मज़ा आने लगा | मेरे लंड ने उठाना शुरू कर दिया, लेकिन अभी पूरा तनाव नहीं आया था | उसने मुझे पलग के किनारे से लगा दिया | अब मेरा आधा शरीर पलंग के ऊपर लेटा था और टाँगे जमीन से चिपकी हुई थी | वो पलग के किनारे पे चढ़ गयी और अपना लंड मेरी गांड मे डाल दिया |

उसने डालने से पहले मेरी गांड को और अपने लंड को अपने थूक से पूरा गीला कर लिया, ताकि को दिक्कत न हो | उसके एक ही जोरदार धक्के ने मेरी गांड फाड़ दी और उसका पूरा लंड मेरी गांड मे घुस गया | मै दर्द से चिल्ला उठा, लेकिन सवि कुछ सुन ही नहीं रही थी | वो तो बस कुते की तरह चड़ी हुई मेरी गांड मारे जा रही थी | कुछ समय बात मैने कुछ तेज़ झटको को महसूस किया और एक गरम-गरम पिचकारी अपनी गांड मे महसूस की | सवि झड चुकी और सवि ने भी मुझे अपनी गांड मारने के लिए बोला, लेकिन मेरे अन्दर हिम्मत नहीं थी और मैने बोला थोड़े देर मे |

कुछ देर आराम करने के बाद मैने भी बिलकुल वैसे ही किया | उसकी गांड बहुत कसी थी और मेरे लंड के जाने के बाद मेरे लंड की पूरी खाल नीचे खीच गयी | कुछ देर मे, मैने अपना पानी छोड़ दिया | उस दिन मुझे बड़ा मज़ा आया | और हम अपने-अपने रास्ते चल पड़े |

Gay sex story Hindi font – गोशाईंगंज का लण्ड

 Gay sex story Hindi font – गोशाईंगंज का लण्ड


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


आज आपको मैं एक ट्रेवल एजेंसी का किस्सा बताता हूँ। ये ट्रेवल एजेंसी हमारी माया नगरी मुम्बई के अँधेरी नगर इलाके में थी। इस ट्रेवल एजेंसी कि ख़ास बात ये थी कि इसे एक गे (समलैंगिक) उद्यमी ने शुरू किया था, व इसके सारे


कर्मचारी- चपरासी से लेकर मालिक तक, सब ‘गे’ थे।


ईशान भी इसी ट्रेवल एजेंसी में काम करता था। उसका ज़िम्मा था ग्रुप टूअर्स करवाना। अब तक वो कई गे लड़को के ग्रुप टूअर्स करवा चुका था।


उसे इस ट्रेवल एजेंसी में उसके बॉयफ्रेंड विशाल ने नौकरी दिलवायी थी। वैसे तो उस ट्रेवल एजेंसी में हर कोइ एक दूसरे के बारे में जानता था, लेकिन ईशान और विशाल एक दूसरे के बहुत करीब थे। ईशान बहुत सुन्दर लड़का था – दुबला


पतला, गोरा चिट्टा, काली, बड़ी बड़ी आँखें, पतले-पतले नाज़ुक होठ कि सामने वाले का मन करता था कि चूस ले। उम्र लगभग चौबीस साल। उसके पीछे बहुत लोग थे- उसके दफ्तर में भी और बाहर भी। लेकिन ईशान किसी को घास नहीं


डालता था। वो विशाल से बहुत प्यार करता था, सिर्फ उसी का लौड़ा चूसता था, उसी से गाण मरवाता था

उस ट्रेवल एजेंसी का पियोन, यानी चपरासी, अभिषेक था। पूरा नाम अभिषेक तिवारी था, लेकिन सब उसे ‘पिंकू’ कहकर बुलाते थे। उसकी उम्र थी लगभग छब्बीस साल, इकहरा बदन, लम्बा कद, रंग गेहुँआ, चेहरे पर हलकी हलकी मूँछे।


पिंकू का सबसे बड़ा हथियार था उसका लण्ड। उस ट्रेवल एजेंसी में हर कोइ उसका दीवाना था। यहाँ तक कि उसका मालिक भी पिंकू के लण्ड का कायल था। वहाँ जो लोग गाण मारते थे , वो भी उसके लण्ड का लोहा मानते थे। पिंकू का


लण्ड साढ़े दस इन्च का था और भयंकर मोटा था।


पिंकू ईशान को बहुत पसन्द करता था। उसका बड़ा मन था ईशान को चोदने का। उसको दफ्तर में रह-रह कर घूरा करता था। उसको लाइन मारता था, उसके सामने अपना लण्ड खुजाता था। लेकिन ईशान उसको बिलकुल घास नहीं


डालता था। वो सिर्फ विशाल का था। इसी बात को लेकर पिंकू परेशान रहता था।


इसके अलावा ईशान और पिंकू एक ही जगह के रहने वाले थे। ईशान फैज़ाबाद का था और पिंकू फैज़ाबाद के करीब एक छोटे से कस्बे गोशाईंगंज का था। लेकिन ईशान फिर भी पिंकू से दूर रहता था। इसका कारण यह भी था कि ईशान


पिंकू को देहाती-गँवार समझता था। उसे मालूम था कि गोशाईंगंज महज़ एक छोटा सा क़स्बा था।


यद्यपि उसने पिंकू के महा प्रचंड लौड़े के बारे में सुन रखा था, और वो ये भी जानता था कि पिंकू उसके पीछे था।


एक दिन कि बात है, किसी ज़रूरी काम से ईशान और विशाल को किसी ज़रूरी काम से रविवार के दिन ट्रेवल एजेंसी आना पड़ा। दौड़ भाग करने के लिए पिंकू को भी बुलाया गया। बाकी लोग रविवार कि वजह से छुट्टी पर थे। दफ्तर में


उन तीनो के अलावा और कोइ नहीं था


विशाल थोड़ी देर बाद किसी काम से बहार निकल गया। अब दफ्तर में सिर्फ पिंकू और ईशान थे।


पिंकू हमेशा कि तरह ईशान को ताड़ रहा था। लेकिन ईशान पिंकू को नज़रअंदाज़ किये, अपने लैपटॉप में मशगूल था।


“पिछली बार घर कब गए थे ?’ पिंकू ने बातचीत शुरू की।


“दीवाली पर” ईशान ने बिना उसकी और देखे संक्षिप्त सा जवाब दिया।


पिंकू को मालूम था ईशान उसपर ध्यान नहीं दे रहा था, लेकिन फिर भी वो बातचीत में लगा रहा।


“मैं नए साल पर गया था। बहुत ठण्ड थी। ”


ईशान ने कोइ जवाब नहीं दिया।

पिंकू आकर उसकी डेस्क पर खड़ा हो गया।


“चाय पियोगे?” उसने पूछा


ईशान ने उसी तरह, बिना उसे देखे ‘ना’ बोल दिया।


पिंकू कि समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे। उसका लण्ड मचल रहा था। इतना सुन्दर, चिकना लड़का उसके सामने अकेला था, लेकिन वो कुछ नहीं कर पा रहा था। न जाने पिंकू के दिमाग में क्या आया, उसने दफ्तर का दरवाज़ा


अंदर से बंद कर दिया। वैसे भी रविवार के दिन कोइ नहीं आने वाला था। उसे मालूम था कि विशाल लम्बे काम से बाहर गया हुआ है और देर से लौटेगा।


ईशान इससे अनभिज्ञ, अपने काम में जुटा हुआ था। तभी पिंकू आकर उसके करीब खड़ा हो गया। ईशान चौंक गया।


पिंकू ने अपनी जींस और चड्ढी नीचे खींची हुई थी। वो अपना लण्ड खोलकर ईशान के सामने खड़ा था।


ईशान बुरी तरह सकपकाया। एक पल उसने पिंकू के महा भयंकर लौड़े को देखा और एक पल पिंकू को। ठिठक कर पीछे खसक गया।


“इसे एक बार चूस दो ईशान … ” पिंकू ने बड़े दयनीय लहज़े में कहा। उसकी आवाज़ में बेइन्तहा हवस की वजह से बेबसी का पुट था। जैसे कोइ बहुत भूखा आदमी किसी खाना खाते हुए आदमी के सामने रोटी के एक टुकड़े के लिए


भीख माँग रहा हो।


ईशान स्तब्ध था। वो इसकी उम्मीद नहीं कर रहा था, दूसरे वो पिंकू का लण्ड-मुसंड देख कर हिल गया था।


उसने उसके लौड़े के बारे में सुन तो रखा था, लेकिन देख अब रहा था और वाकई में अचम्भित था।


पिंकू का विकराल लण्ड साढ़े दस इन्च लम्बा था और ज़बरदस्त मोटा था, जितना पिंकू की अपनी कलाई । ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उसकी जांघों के बीच से काले-गेहुँए रँग का मोटा सा खीरा लटका हो।

ईशान उसका लण्ड मुसंड देखता ही रह गया। उसपर मोटी-मोटी नसें उभर आयीं थीं , रंग गहरे सांवले से अब काला पड़ने लगा था। उसका सुपारा बड़े से गुलाब जामुन कि तरह फूल कर मोटा हो गया था और उसमे से प्री-कम चू रहा था।


उसके मोटे मोटे गोले उसके पीछे, झांटो में उलझे लटक रहे थे


इतना बड़ा तो सिर्फ ब्लू फिल्मों में अफ्रीकियों का होता है। इतना बड़ा मुसंड गोशाईंगंज में कहाँ से आ गया ?


एक पल को ईशान को घिन आयी – साला गँवार अपनी झाँटे भी नहीं साफ़ करता था, न ही काट कर छोटा करता था। लेकिन इससे वो और मर्दाना और रौबीला लग रहा था।


ईशान उसके भयंकर मुसंड को घूर ही रहा था कि पिंकू उसके और करीब आ गया। ईशान के चेहरे और उसके लण्ड में कुछ ही इंचों का फैसला था। लण्ड कि गन्ध ईशान के नथुनों में भर गयी थी


पिंकू का तो मन था कि अपना लौड़ा सीधे उसके मुंह में घुसेड़ दे। उसने देखा जितना लम्बा उसका लण्ड था, उतना लम्बा तो ईशान का सर था। लेकिन उसके लिए ये कोइ नयी बात नहीं थी।


“चूसो … ” पिंकू ने ईशान का ध्यान भंग करते हुए कहा। उसके लहज़े में हवस की बेबसी थी।


“पिंकू … कोई आ गया तो ?” ईशान उसका विकराल लण्ड देख कर पिघल चुका था। उसके मुँह में पानी आ गया था।


“अरे कोई नहीं आएगा। मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया है। ”


“और विशाल ?” ईशान ने पूछा।


“अरे वो देर से आयेगा। ओबेरॉय (होटल) गया हुआ है क्लाएँट से मिलने। देर से लौटेगा। ” उसकी लहज़े में अब बेसब्री थी। वो जान गया था कि ईशान अब पिघल गया है ।


उसके लण्ड से इतना प्री-कम टपक रहा था कि अब ईशान कि जींस पर गिरने लगा था।


इससे पहले कि ईशान उसका लण्ड मुंह में लेता, पिंकू ने खुद ही उसका सर पकड़ कर अपना लंड उसके मुंह में घुसेड़ दिया . और ईशान ने मानो सहजवृत्ति से, अपने आप ही फ़ौरन उसका गदराया लण्ड-मुसंड चूसने लगा, जैसे कोइ बच्चा

माँ का दूध पीता हो । पिंकू ले लण्ड से वीर्य और मूत की तेज़ गंध आ रही थी, लेकिन बजाये घिन आने के, ये गंध ईशान को और आकर्षित कर रही थी।


ईशान मस्त होकर पिंकू का लौड़ा चूसने लगा। वैसे इतना भीमकाय लौड़ा किसी को भी मिल जाये तो मस्त होकर चूसेगा।


“आज चूस लो गोशाईंगंज का लण्ड …। ” पिंकू बोला


ईशान अपनी कुर्सी पर बैठा, अपने सामने खड़े पिंकू का लण्ड ऐसे चूस रहा था जैसे उसे दोबारा कभी लण्ड चूसने को मिलेगा। कभी उसको अगल-बगल से चाटता, कभी उसका सुपारा चूसता , कभी पूरा मुँह में लेने कि कोशिश करता


(हालाकि पिंकू का पूरा लण्ड मुंह में लेना असम्भव था) .


इधर पिंकू अपने हाथ कमर पर टिकाये, ईशान के सामने खड़ा लण्ड चुसवाने का आनंद ले रहा था और ईशान को अपने सामने झुके हुए लण्ड चूसता हुआ देख रहा था।


“एक मिनट रुको ” पिंकू ईशान कि मेज़ पर बैठ गया। “अब चूसो ”


ईशान कुर्सी सरका कर पिंकू की जांघों तक आ गया और फिर से चुसाई में लग गया। इतना मस्त, सुन्दर, लम्बा, मोटा और रसीला लण्ड लाखों में एक होता है, अपने मन में सोच रहा था और लपर-लपर उसका लण्ड चूस रहा था। उसका मन


था कि वो पिंकू के लण्ड के हर एक कोने का स्वाद ले, पूरा का पूरा अपने मुँह में भर ले, लेकिन इतना बड़ा लण्ड किसी के भी मुँह में लेना असम्भव था।


पिंकू भी इसी चेष्टा में था कि ईशान के मुँह पूरा घुसेड़ दे, लेकिन उसका गला चोक हो रहा था। ईशान ऊपर से नीचे तक, अगल-बगल, हर जगह से, यथा सम्भव उसके लौड़े को चूस रहा था और चाट रहा था। जब पिंकू अपना लौड़ा लेकर


ईशान के सामने आया था, लण्ड आधा खड़ा था। अब उसके मुँह कि गर्मी पाकर पूरा का पूरा तनकर कर खड़ा हो गया था।

पिंकू का तो मन था की अभी ईशान को पकड़ कर चोद दे। विशाल ने उसे ईशान कि गाण्ड के बारे में बता रखा था – बहुत मुलायम, चिकनी गोल-गोल और कसी हुई थी साले की।


लेकिन पिंकू अभी थोड़ी देर लौड़ा चुसवाने का आनन्द लेना चाहता था। एक पल को पीछे झुक कर ईशान को अपना लण्ड चूसता हुआ देखने लगा। उसने ईशान के पतले-पतले नाज़ुक होटों के बीच अपने सांवले मुसंड को देखा।


बहुत मज़ा आ रहा था उसे। उसने ईशान के हलक में लण्ड और अंदर घुसेड़ने कि कोशिश की, लेकिन बेचारे का गला चोक होने लगा. उसका पूरा लण्ड ईशान की थूक से सराबोर हो गया था।


ईशान एक हाथ से उसका लण्ड थामे, और दूसरा उसकी जाँघ पर टिकाए चूसे पड़ा था। उस साले को बहुत मज़ा आ रहा था- ईशान कि नरम मुलायम गीली जीभ उसके लण्ड का दुलार कर रही थी। उसके मुँह कि गर्मी पाकर पिंकू का गँवार


लण्ड ऐश कर रहा था।


“इसे होटों से दबा कर ऊपर नीचे करो” पिंकू अब ईशान आदेश देने लगा था, और ईशान मानने भी लगा था । ट्रेवल एजेंसी के बाकी लोगों कि तरह वो भी उसके लौड़े का गुलाम बन चुका था।


पिंकू अपनी आँखें बंद किये, ईशान के बाल सहलाता, लण्ड चुसवाने का आनंद ले रहा था, और ईशान भी अपनी आँखें बंद किये, दोनों हाथों से पिंकू का हथौड़े जैसा लंड चूसने का आनंद ले रहा था।


दोनों ऑंखें बंद किये आनन्द के सागर में डूबे जा रहे थे।


करीब बीस मिनट तक वो दोनों उसी अवस्था में पड़े रहे। फिर ईशान थक गया। उसका जबड़ा दर्द करने लगा।


उसने सुस्ताने के लिए अपना सर अलग कर लिया।


“थक गए क्या?” पिंकू ने पूछा


“हाँ यार। तुम्हे कितनी देर लगती है झड़ने में ?”


“मुझे तो बहुत देर लगती है … एक घण्टा तक लग जाता है। ” पिंकू ने गर्व से कहा।


बहुत हेवी-ड्यूटी लौड़ा था।


“थोड़ी देर और चूसो ईशान ” पिंकू ने आग्रह किया।

“यार मेरा जबड़ा दर्द कर रहा है। और नहीं कर पाउँगा ” ईशान ने जवाब दिया।


“गाण में लोगे?” पिंकू ने प्रस्ताव रखा।


“बिलकुल नहीं। मुझे अभी कुछ दिन और जीना है। ” ईशान चिल्लाया।


“क्यूँ ? इसमें जीने-मरने कि बात कहाँ से आ गयी?”


“अरे … ये तुम्हारा इतना बड़ा मेरे अंदर जायेगा तो मेरी गाण फटेगी नहीं क्या?” ईशान उससे चुदवाने कि बात को लेकर डर गया था।


लेकिन पिंकू अभी सन्तुष्ट नहीं हुआ था। ईशान ने उसका लण्ड इतने प्यार से चूसा था कि उसके अंदर कि आग और भड़क गयी थी। उसकी हालत अब एक कामातुर गधे कि तरह हो गयी थी। कैसे न कैसे उसे अपना लौड़ा झाड़ना ही था।


लेकिन ईशान राज़ी ही नहीं था।


उसने ईशान को फिर से फुसलाना शुरू किया: “ईशान मेरी बात सुनो … इतना दर्द नहीं होगा जितना तुम सोच रहे हो। एक बार लेकर तो देखो ”


“बिलकुल नहीं। सवाल ही नहीं होता। जाओ बाथरूम में सड़का मार लो। ”


“अच्छा एक बात सुनो। अगर दर्द हुआ तो मैं नहीं करूँगा। बिलकुल धीरे-धीरे घुसेड़ूँगा। बस एक बार कोशिश तो करो। ”


ईशान ने कुछ सोच कर हामी भर दी।


“एक काम करो। मैं तुम्हारी कुर्सी पर बैठ जाता हूँ, तुम मेरे लण्ड पर अपनी गांड टिका कर बैठो। अगर दर्द हुआ तो उठ जाना। ” पिंकू ने सुझाव दिया। ईशान को पिंकू कि बात जँच गयी।


अगले ही पल ईशान उठा और पिंकू कुर्सी पर अपना खम्बे कि तरह खड़ा, और खम्बे के ही आकार का लण्ड लेकर बैठ गया। साला हरामी बहुत उतावला हो रहा था। इतना कि उसका लण्ड सलामी देने लगा था।


ईशान ने अपनी जींस और चड्ढी नीचे खींची। पिंकू ने पहली बार ईशान कि गोरी-गोरी, चिकनी गाण के दर्शन किये। विशाल ने बिलकुल सही वर्णन किया था – क्या मस्त गाँड़ थी ईशान की !!! मज़ा आ गया। और बाकी का मज़ा और आगे आने


वाला था।


ईशान ने अपनी गोरी गोरी, मुलायम, चिकनी गाण्ड का छेद पिंकू लण्ड सुपारे टिकाया और अंदर लेने लगा, और लेते-लेते हलकी हलकी आहेँ लेने लगा :

“आह … अहह … हआ … !!”


शायद बेचारे को दर्द हो रहा था। वैसे दर्द तो लाज़मी था। ईशान ने किसी तरह आधा लण्ड अपनी गाण्ड में लिया। इसके बाद उसकी गाण्ड चिरने लगी।


“पिंकू बस …. ” दर्द के मारे इतना ही कह पाया।


पिंकू ने आगे झुक कर ईशान को देखा। बेचारे आँखे बाहर थी।


“अच्छा और नहीं घुसेड़ूँगा। ” पिंकू ने कह तो दिया, लेकिन उससे रहा नहीं जा रहा था। उसका तो मन था कि ईशान की गोरी-गोरी गांड में अपना लौड़ा पूरा-का-पूरा घुसेड़ दे, अंदर तक।


इधर हमारे ईशान कि वाकई में गांड फट गयी थी। ज़रा सोचिये, अगर आपकी गांड में पिंकू जितना बड़ा लण्ड घुस जाये, तो क्या आपकी गांड नहीं फटेगी?


बेचारे को वो पल याद आ गया जब उसने पहली बार अपनी गांड में लण्ड लिया था – उसके दोस्त के बड़े भाई ने उसे पहली बार चोदा था। बड़ा दर्द हुआ था बेचारे को। लेकिन उसके बाद से ईशान पक्का गाण्डू बन गया था। वो अपने दोस्त


के बड़े भाई के आगे हाथ जोड़ता था अपनी गांड कि खुजली शांत करवाने के लिए।


अब पिंकू ने लण्ड हिलना शुरू किया। अभी तक तो वो सिर्फ अपना लण्ड घुसेड़े, ईशान की प्रतिक्रिया देख रहा था।

अब ईशान ने छटपटाना और चिल्लाना शुरू किया :


” अह्ह्ह्ह …. आह्ह्ह … !!!”


” पिंकू … नहीं… ऊऊह्ह्ह्ह !!”


ईशान चाहता था पिंकू अपना लण्ड निकाल ले, लेकिन पिंकू समझा कि ईशान चाहता है वो उसे धीरे-धीरे चोदे। वैसे पिंकू अब उसे नहीं छोड़ने वाला था। शेर के मुँह में खून लग जाये तो वो अपने शिकार को कहीं छोड़ता है भला?पिंकू ने उसे


जाँघो से पकड़ा हुआ था और अपनी कमर उछाल-उछाल उसे चोद रहा था। कुर्सी खबड़-खबड़ फर्श पर आवाज़ कर रही थी।


ईशान से कुछ बोला ही नहीं जा रहा था , आहें भरे जा रहा था :


“उह्ह … आह्ह … उह्ह … आह … उह्ह !!”


ईशान कि सिस्कारियों ने पिंकू का मज़ा दुगना कर दिया था


ईशान ने हिम्मत जुटाई और हटने की कोशिश करने लगा. पिंकू ने उसे जाँघों से पकड़ा हुआ था, इसीलिए उसकी पकड़ थोड़ा ढीली थी । किसी तरह ईशान खड़ा हो गया। पिंकू भाँप गया था की ईशान भागने के चक्कर मे है . जैसे ही ईशान


उठा, पिंकू उसकी जाँघे पकड़े-पकड़े, उसकी गाण्ड में अपना लौड़ा घुसेड़े, उसके साथ खड़ा हो गया। ईशान भागने कि कोशिश करने लगा, लेकिन उसकी जीन्स उसके टखनो तक सरक आयी थी, इसीलये उससे चला भी नहीं जा रहा था,

सिर्फ छोटे-छोटे कदम ले चल रहा था। पिंकू अभी भी उसे चोदे जा रहा था – उसी अवस्था में, चलते-चलते। साला बहुत हरामी था। और उसका लौड़ा तो उससे भी ज्यादा हरामी था।


पिंकू को डर लगा कि कहीं इस भागा-दौड़ी में उसका लण्ड बाहर न निकल आये। उसे मालूम था कि अगर एक बार उसका लण्ड निकला तो ईशान फिर नहीं लेने वाला और वो इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। वो


ईशान को धकेल कर डेस्क के पास ले आया जिससे वो कहीं भाग न जाये। ईशान ने अपने हाथ डेस्क पर टिका दिए। ये सब उसने बड़ी कुशलता पूर्वक किया। अब ईशान भाग नहीं सकता था। पिंकू तो वैसे भी चोदने का रसिया था। अभी


तक उसने कुल मिला कर 126 अलग-अलग गाण्ड मारी थी। एक सौ सत्ताईसवाँ ईशान था।


पिंकू अभी तक ईशान को मज़े-मज़े, धीरे-धीरे चोद रहा था। लेकिन अब उससे रहा नहीं जा रहा। इस खयाल से की ईशान को दर्द होगा, वो ईशान को आराम से चोद रहा था और अभी भी उसका लण्ड आधा बाहर था।


लेकिन अब उसके सब्र का बाँध टूट गया। उसने अपना पूरा का पूरा, दस इन्च का, मोटा-गदराया लौड़ा बेरहमी से ईशान की गाण में घुसेड़ दिया।


“मम्मी …!!!!” ईशान ज़ोरों से चीख उठा।

आखिर घुस ही गया गोशाईंगंज का गँवार देहाती लौड़ा ईशान की चिकनी शहर की गाण्ड में। पिंकू उसके कूंकने की परवाह किये बिना उसकी गाण्ड मारने में लगा हुआ था। उसने उसने मज़बूती से जाँघो से दबोचा हुआ था और गपा-गप,


गपा-गप अपनी कमर हिलाता चोदे जा रहा था। इधर हमारा चिकना छोकरा ईशान मार खाते कुत्ते की तरह कूंक रहा था :


“उउउउं … आऊँ … उउउं …. !!!”


बेचारा। उसकी आँखों में आँसू आ गए थे। ऐसी शकल बना ली थी जैसे कोई उसे यातना दे रहा हो।


“चुप भोसड़ी का …. ऊँ न पूँ … चुप-चाप चुदवा !” पिंकू उसे हड़काता हुआ बोला। लण्ड चुसवाने समय पिंकू कैसा निरीह बनकर उसके सामने खड़ा था और अब उसको दरोगा की हड़का-हड़का कर चोद रहा था।


ईशान वैसे ही छटपटा-तड़प रहा था, अब तो उसने सर भी झटकना शुरू दिया था। मन ही मन वो उस पल को कोस रहा था जब वो उससे गाण्ड मरवाने को राज़ी हुआ था।


“ईशान मेरी जान …. ” पिंकू उसकी गाण्ड मारते हुए बोला ” बहुत मस्त गाण्ड है तुम्हारी. बहुत दिनों अरमान था तुम्हे पेलने का। आज जाकर तुम चुदे ।.”

पिंकू का लण्ड ईशान की मुलायम, चिकनी गांड नश्तर कि तरह छलनी कर रहा था. ईशान बीच-बीच में अपनी बाँह पीछे बढ़ा कर को पिंकू रोकने की कोशिश करता , लेकिन पिंकू लपक कर उसकी कलाई पकड़ लेता और चोदता रहता.


हारकर ईशान अपनी बाँह वापस कर लेता।


बहुत देर बाद जाकर बेचारा कुछ कहने की हिम्मत जुटा पाया:


“पिंकू मुझे छोड़ दो …. दर्द हो रहा है … !!”


“छोड़ दूँ कि चोद दूँ ?” पिंकू व्यंग्य भरे स्वर में बोला.


“बस जान … मैं झड़ने वाला हूँ .. . पिंकू चरम सीमा पर पहुँचने लगा, उसके शॉट तेज़ होते गए और ईशान की आँहें भी:


“अहह ..!!”


“उह्ह्ह … अह्ह .. उह्ह्ह … अहह … !!”


पिंकू अब झड़ने वाला था। चोदते-चोदते रुक गया और अपना लौड़ा गाण्ड से निकाल लिया। उसका मन था की ईशान के चेहरे पर अपना माल गिराए। वो अपने लण्ड को ईशान के सुन्दर चेहरे पर अपना वीर्य छिड़कते हुए देखना चाहता था।

पिंकू की पकड़ ढीली हो गयी. ईशान ने अपने आप को सम्भाला और खड़ा होकर सुस्ताने लगा . तभी पिंकू बोला ” यार नीचे बैठ जाओ … तुम्हारे चेहरे पर अपना पानी गिराऊँगा … जल्दी करो .”


ईशान मरियल कुत्ते कि तरह लग रहा था। उसने ‘न’ में सर हिला दिया। लेकिन अब पिंकू बस झड़ने ही वाला था. उसने ईशान को कन्धों से पकड़ कर ज़मीन पर बैठने की कोशिश कि और अपनी कमर उचका कर लण्ड ऊपर कर दिया ,


कि किसी तरह से उसका लण्ड ईशान के चेहरे से छू जाये और वो उसके चेहरे पर अपना वीर्य गिरा दे।


लेकिन ईशान संभल संभल चुका था , नहीं झुका और इस सब चक्कर के बीच पिंकू ने ईशान कि टी शर्ट गन्दी कर दी . उसके लौड़े कि पिचकारी इतनी तेज़ थी वीर्य की एक-आध धार ईशान की ठोड़ी पर भी आ गिरी .


“ओह्ह …!!” ये ‘ओह’ पिंकू कि थी. अब उसने रहत कि साँस ली, ईशान के कंधे पर सर टिकाए हुए. उसके लौड़े से अभी भी वीर्य की एक छोटी सी बूँद टपक रही थी , जो ईशान कि नीचे सिमटी जींस पर जा गिरी .


ईशान अपनी टी शर्ट ख़राब होने से खीज गया था. उसने पिंकू को झटके से अलग किया और बाथरूम की तरफ भागा .इस सब से ईशान का मूड तो ख़राब हो गया था, लेकिन ये तो शुरुआत थी। आगे जाकर उसने पिंकू से कई बार गाण्ड

मरवाई , पिंकू ने अपनी सारी इच्छाएँ ईशान से पूरी की – ईशान के चेहरे पर अपना वीर्य गिराना, उसे हर पोज़ में चोदना, उसके मुँह में मुँह डाल कर जीभ लड़ाना, और न जाने क्या-क्या .


बाकी सबकी तरह ईशान भी गोशाईंगंज के लण्ड का गुलाम बन चुका था।

Gay sex story Hindi – सुशील और चरणदास 2

 Gay sex story Hindi – सुशील और चरणदास 2


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


चरणदास : आओ पुत्र।तुम्हें किसी ने देखा तो नहीं।अगर कोई देख लेगा तो तुम्हारी पूजा का कोई लाभ नहीं।


सुशील: नहीं चरणदास जी।किसी ने नहीं देखा।आप मुझे आज्ञा दे।


चरणदास : पुत्र।आज तुम्हें पूरी तरह शुद्ध होना होगा।सबसे पहले तुम्हें कच्चे दूध का स्नान करना होगा।शुद्ध वस्त्र पहनने होंगे ।


सुशील: जो आज्ञा चरणदास जी।


चरणदास : अब तुम स्नानगृह में जा के कच्चे दूध का स्नान करो। मैंने वहां पर कच्चा दूध रख दिया है क्योंकि तुम्हारे लिये कच्चा दूध घर से लना मुश्किल है।और हाँ ।तुम्हारे वस्त्र भी स्नानगृह में ही रखे हैं।


चरणदास ने लुंगी बाथरूम में रखा था।

सुशील दूध से नहा कर आया ।सिर्फ बनियान और लुंगी में ।


चरणदास : आओ पूजा शुरु करें।

वो दोनो अग्नि के पास बैठ गये।चरणदास ने मन्त्र पढ़ने शुरु किये।थोड़ी गर्मी हो गई थी इसलिये चरणदास ने अपना कुरता उतार दिया।उसकी बॉडी मस्कुलर थी ।अब वो केवल लुंगी में था। दोनो चौकड़ी मार के बैठे थे।


चरणदास : पुत्र।यह नारियल अपनी झोली में रख लो।इसे तुम प्रसाद समझो।तुम दोनो हाथ सिर के ऊपर से जोड़ के भगवान् का ध्यान करो।


सुशील सिर के ऊपर से हाथ जोड़ के बैठा था।चरणदास उसकी झोली में फ़ल डालता रहा।



सुशील की इस पोजीशन में उसका नंगा पेट और गुलाबी होंट चरणदास के लौड़े को खड़ा कर रहे थे


चरणदास : सुशील।पुत्र।यह मौलि तुम्हें पेट पे बाँधनी है। विधि के अनुसार इसे पुजारी को बाँधना चाहिए ।

थोड़ी गर्मी हो गई थी इसलिये चरणदास ने अपना कुरता उतार दिया।उसकी बॉडी मस्कुलर थी ।अब वो केवल लुंगी में था। दोनो चौकड़ी मार के बैठे थे।


चरणदास : पुत्र।यह नारियल अपनी झोली में रख लो।इसे तुम प्रसाद समझो।तुम दोनो हाथ सिर के ऊपर से जोड़ के भगवान् का ध्यान करो।


सुशील सिर के ऊपर से हाथ जोड़ के बैठा था।चरणदास उसकी झोली में फ़ल डालता रहा।सुशील की इस पोजीशन में उसका नंगा पेट और गुलाबी होंठ चरणदास के लौड़े को खड़ा कर रहे थे

चरणदास : सुशील।पुत्र।यह मौलि तुम्हें पेट पे बाँधनी है।


सुशील: चरणदास जी।विधि का पालन करना मेरा धरम है।जैसा विधि में लिखा है आप वैसा ही कीजिये ।


चरणदास : मौलि बाँधने से पहले जल से वो जगह साफ़ करनी होती है।


चरणदास ने सुशील के पेट पे जल छिड़का और उसका नंगा पेट जल से धोने लगा।सुशील की पेट की स्किन बहुत स्मूथ थी ।चरणदास उसके पेट को रगड़ रहा था।फिर उसने तौलिये से सुशील का पेट सुखाया।


सुशील के हाथ सिर के ऊपर थे।चरणदास सुशील के सामने बैठ कर उसके पेट पे मौलि बाँधने लगा।पहली बार चरणदास ने सुशील के नंगे पेट को छुआ।बाँधते समय चरणदास ने अपनी अंगुली सुशील के नाभि पे रखी।


अब चरणदास ने अंगुली पे टीका लगाया और सुशील के पेट पे टीका लगाने लगा।उसने सुशील के पेट पर त्रिशूल बनाया।


सुशील की नाभि पर आ कर चरणदास रुक गया।अब अपनी अंगुली उसकी नाभि में घुमाने लगा।वह सुशील की नाभि में टीका लगा रहा था।सुशील के दोनो हाथ ऊपर थे।वह भोला था।वह इन सब चीज़ों को धरम समझ रहा था।लेकिन यह सब उसे भी कुछ कुछ अच्छा लग रहा था। फिर चरणदास घूम कर सुशील के पीछे आया।उसने सुशील की पीठ पर जल छिड़का और हाथ से उसकी पीठ पे जल लगाने लगा।

चरणदास : जल से तुम्हारी देह और शुद्ध हो जाएगी।

सुशील की नंगी पीठ को छूकर चरणदास का लौड़ा टाइट हो गया था।


चरणदास : तुम्हारी राशि क्या है?


सुशील: कुम्भ।


चरणदास : मैं टीके से तुम्हारी पीठ पर तुम्हारी राशि लिख रहा हूँ।जल से शुद्ध हुई तुम्हारी पीठ पे तुम्हारी राशि लिखने से तुम्हारे ग्रहों की दिशा लाभदायक हो जाएगी।


चरणदास ने सुशील की नंगी पीठ पे टीके से कुम्भ लिखा।


फिर चरणदास सुशील के पैरों के पास आया।


चरणदास : अब अपने चरण सामने करो।

सुशील ने पैर सामने कर दिये।चरणदास ने उसकी लुंगी थोड़ा ऊपर चढ़ाई ।उसकी टांगों पे जल छिड़का और उसकी टांगें हाथों से रगड़ने लगा।


चरणदास : हमारे चरण बहुत सी अपवित्र जगहों पर पड़ते हैं।जल से धोने के पश्चात अपवित्र जगहों का हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।तुम भगवान् का ध्यान करो।


सुशील: जी चरणदास जी।

चरणदास ने सुशील का लुंगी घुटनो के ऊपर चढ़ा दिया।अब सुशील की टांगें जांघें तक नंगी था।


चरणदास ने उसकी जांघें पे जल लगया और उसकी जांघें हाथों से धोने लगा।सुशील ने टांगें जोड़ रखी था।

चरणदास ने कहा।


चरणदास : सुशील।अपनी टांगें खोलो।


सुशील ने धीरे धीरे अपनी टांगें खोल दी ।अब सुशील चरणदास के सामने टांगें खोल के बैठा था।उसकी अंडरवियर चरणदास को साफ़ दिख रही थी ।चरणदास ने सुशील की इन्नर जांघें को छुआ।और उन्हें जल से रगड़ने लगा।


इस वक़्त चरणदास के हाथ सुशील के लंड के नज़दीक थे।कुछ देर सुशील के इन्नर जांघें धोने के बाद अब वो उन्हें तौलिये से सुखाने लगा।फिर उसने अंगुली में टीका लगाया और सुशील के इन्नर जांघें पे लगाने लगा।


सुशील: चरणदास जी।यहाँ भी टीका लगाना होता है?


चरणदास : हाँ सुशील।लज्जा ना करना।


सुशील: नहीं चरणदास जी।


जैसे अंगुली से माथे पर टीका लगाते हैं चरणदास अंडरवियर के ऊपर से ही सुशील के लंड पे भी टीका लगाने लगा।सुशील गरम भी हो रहा था।चरणदास टीका लगाने के बहाने 5-6 सेकंड तक अंडरवियर के ऊपर से सुशील का लंड रगड़ता रहा।


लंड से हाथ हटाने के बाद चरणदास बोला।


चरणदास : विधि के अनुसार मुझे भी जल लगाना होगा।अब तुम इस जल को मेरी छाती पे लगाओ।

चरणदास लेट गया।


चरणदास ने चेस्ट शेव कर रखी था।और पेट भी ।उसकी चेस्ट और पेट बिलकुल स्मूथ थे।सुशील जल से उसकी चेस्ट और पेट रगड़ने लगा।सुशील को अंदर ही अंदर चरणदास का बदन आकर्षित कर रहा था।उसके मन में आया की कितना स्मूथ और चिकना है चरणदास का बदन।ऐसे ख्याल सुशील के मन में पहले कभी नहीं आये थे।


चरणदास : अब तुम मेरी छाती पे टीके से सतिया बना दो।सतिया इस प्रकार बनना चाहिये कि मेरे ये दोनो निप्पल सतिया के ऊपर के दोनो खानो की बिन्दु हो।


निप्पलों का नाम सुन कर सुशील शरमा गया।


सुशील ने सतिया बनाया।लेकिन उसने सिर्फ सतिया के नीचे के दो खानो की बिन्दु ही बनायी टीके से।


चरणदास : सुशील।सतिया में चार बिन्दु डलती हैं।


सुशील: चरणदास जी।लेकिन ऊपर की दो बिन्दु तो पहले से ही बनी हुई हैं।


चरणदास : परंतु टीका उन पर भी लगेगा।


सुशील चरणदास के निप्पलों पर टीका लगाने लगा।

चरणदास : मानव की नाभि उसकी ऊर्जा का स्रोत होता है।अत: यहाँ भी टीका लगाओ।

सुशील: जो आज्ञा चरणदास जी।


सुशील ने अंगुली में टीका लगाया।चरणदास की नाभि में अंगुली डाली टीका लगाने लगा।चरणदास ने सुशील को आकर्षित करने के लिये अपना पेट और चेस्ट शेव करने के साथ साथ अपनी नाभि में थोड़ी क्रीम लगाई थी इसलिये उसकी नाभि चिकनी हो गया था।सुशील सोच रहा था कि इतनी चिकनी नाभि तो उसकी खुद की भी नहीं है।सुशील चरणदास के बदन की तरफ़ खिचा चला जा रहां था।ऐसे ख्याल उसके मन में पहले कभी नहीं आये थे।सुशील ने चरणदास की नाभि में से अपनी अंगुली निकाली ।चरणदास ने अपने थैले से एक लौड़े की शेप की लकड़ी निकाली ।लकड़ी बिलकुल चिकनी और 5 इंच लंबी और 1 इंच मोटी थी ।


लकड़ी के एंड में एक छेद था।चरणदास ने उस छेद में डाल कर मौलि बाँधी ।


चरणदास : यह लो।यह पवित्र यंत्र है।


सुशील ने पवित्र यंत्र को प्रणाम किया।


चरणदास : इस पवित्र यंत्र को अपनी कमर में बाँध लो।यह हमेशा तुम्हारे सामने आना चाहिये।तुम्हारे पेट के नीचे।


सुशील: चरणदास जी।इस्से क्या होगा?


चरणदास : इससे भगवान् तुम्हारे साथ रहेगा।यदि किसी और ने इसे देख लिया तो भगवान् नाराज़ हो जायेगा।अत:।यह किसी को दिखाना या बताना नहीं।और तुम्हें हर समय यह बाँधे रखना है।सोते समय भी।

सुशील: जैसा आप कहें चरणदास जी।


चरणदास : लाओ।मैं बाँध दूँ।

दोनो खड़े हो गये।चरणदास ने वो यंत्र सुशील की कमर में डाला और उसके पीछे आ कर मौलि की गाँठ बाँधने लगा।उसके हाथ सुशील की नंगी कमर को छू रहे थे।गाँठ लगाने के बाद चरणदास बोला।


चरणदास : अब इस यंत्र को अंदर डाल लो।


सुशील ने यंत्र को अपनी लुंगी के अंदर कर लिया।यंत्र सुशील की टांगों के बीच में आ रहा था।


चरणदास : बस।अब तुम वस्त्र बदल कर घर जा सकते हो।जो टीका मैंने लगाया है उसे ना हटाना।


सुशील: परंतु स्नान करते समय तो टीका हट जायेगा।


चरणदास : उसकी कोई बात नहीं।

सुशील कपड़े बदल कर अपने घर आ गया।उसने टांगों के बीच यंत्र पहन रखा था।यंत्र उसकी टांगों के बीच हिलता रहा।उसकी स्किन को टच करता रहा।जब रात को सुशील सोने के लिये लेटा हुआ था तो यंत्र सुशील की गांड के डायरेक्ट कांटेक्ट में था।सुशील यंत्र को दोनो टांगें टाइट जोड़ के दबाने लगा।उसे अच्छा लग रहा था।उसने यंत्र को हाथ में लिया और यंत्र को हलके हलके अपनी गांड पे दबाने लगा।फिर यंत्र को अपने लंड पे रगड़ने लगा।वह गरम हो रहा था।तभी उसे खयाल आया “सुशील, यह तु क्या कर रहा है।यंत्र के साथ ऐसा करना बहुत पाप है।”।यह सोच कर सुशील ने यंत्र से हाथ हटा लिया और सोने की कोशिश करने लगा।तकरीबन आधी रात को सुशील की आँख खुली।उसे अपनी चूतड़ के बीच में कुछ चुभ रहा था।हाथ चूतड़ के बीच में ले गया तो पाया की यंत्र उसकी गांड के बीच में फंसा हुआ था।यंत्र का मुंह सुशील के एस होल से चिपका हुआ था।सुशील को पीछे से यह चुभन अच्छी लग रही थी ।उसने यंत्र को अपने गांड पे और दबाया।उसे मज़ा आया।और दबाया ।और मज़ा आया।उसके गांड में आग सी लगा हुई थी ।उसका दिल क्र रहा था कि पूरा यंत्र एस होल में दबा दे।तभी उसे फिर खयाल आया कि यंत्र के साथ ऐसा करना पाप है।डर के उसने यंत्र को टांगों के बीच में कर दिया और सो गया।


अगले दिन सुशील वही पिछले रास्ते से चरणदास के पास गया।


चरणदास : आओ सुशील।जाओ दूध से स्नान कर आओ और वस्त्र बदल लो।

सुशील दूध से नहा कर कपड़े पहन रहा था तो उसने देखा की आज जोगिया बनियान और लुंगी के साथ जोगिया रंग की अंडरवियर भी पड़ा था।उसने अपनी अंडरवियर उतार के जोगिया अंडरवियर पहन ली।नहा के बाहर आया।


चरणदास अग्नि जला कर बैठा मन्त्र पढ़ रहा था।


सुशील भी उसके पास आ कर बैठ गया।


चरणदास : सुशील।आज तो तुम्हारे सारे वस्त्र शुद्ध हैं ना?

सुशील: जी चरणदास जी।


वह जानता था की चरणदास का मतलब अंडरवियर से है।


चरणदास : तुम चाहो तो वो यंत्र फिलहाल निकाल सकते हो।


सुशील खड़ा होकर यंत्र की मौलि खोलने लगा।लेकिन गाँठ काफी टाइट लगा था।चरणदास ने यह देखा।


चरणदास : यंत्र ने तुम्हें परेशान तो नहीं किया।खास कर रात में सोने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई?


सुशील कैसे कहता कि रात को यंत्र ने उसके साथ क्या किया है।


सुशील: नहीं चरणदास जी।कोई परेशानी नहीं हुई।


सुशील गाँठ खोल नहीं पा रहा था ।

चरणदास : सुशील।पूजा में विलम्ब हो रहा है।लाओ मैं निकालूँ


चरणदास सुशील के सामने आया और गाँठ खोलने लगा।


चरणदास : यह ऐसे नहीं निकलेगा।तुम ज़रा लेट जाओ

सुशील लेट गया।चरणदास गाँठ खोलने पे लगा हुआ था।


चरणदास : सुशील।लुंगी की गाँठ खोलनी पड़ेगी ।पूजा में विलम्ब हो रहा है।


सुशील: जी।

चरणदास ने लुंगी की गाँठ खोल दी ।गाँठ खोलने से लुंगी ढीली हो गई और सुशील की अंडरवियर से थोड़ा नीचे आ गई ।मौलि निकालते वक़्त चरणदास की कोहनी सुशील की लंड के पास लग रही थी ।कुछ देर बाद मौलि कि गाँठ खुल गयी ।


चरणदास : यह लो।निकल गया।


फिर दोनो चौकड़ी मार के बैठ गये और चरनदास पूजा का नाटक करने लगा।


पूजा के बाद सुशील ने पहले जैसे यंत्र को अपनी टांगों के बीच बाँध लिया।

सारे दिन यंत्र सुशील के टांगों के बीच चुभता रहा।लेकिन अब यह चुभन सुशील को अच्छी लग रही था।सुशील रात को सोने लेटा ।यंत्र सुशील की गांड को टच कर रहा था।सुशील ना चाहते हुए भी एक हाथ अंडरवियर के ऊपर से ही यंत्र पे ले गया।और यंत्र को अपनी गांड पे दबाने लगा।उसका दिल कर रहा था की वो पूरा का पूरा यंत्र अपनी गांड में डाल दे।लेकिन इसे गलत मानते हुए और अपना मन मारते हुए उसने यंत्र से हाथ हटा लिया।आधी रात को उसकी आँख खुली तो उसे अपनी चूतड़ के बीच में कुछ लगा।यंत्र कल की तरह सुशील की चूतड़ में फंसा हुआ था।

सुशील यंत्र को अपनी चूतड़ के बीच में ले गया और अपने गांड पे दबाने लगा।उसे मज़ा आ रहा था लेकिन डर की वजह से वो यंत्र को गांड से हटा कर टांगों के बीच ले आया।उसने यंत्र को हलका सा लंड पे रगड़ा।

फिर उसने वापस यंत्र को अपनी जगह बाँध दिया।और गरम गांड ही ले के सो गया।

Gay sex story Hindi – सुशील और चरणदास 3

 Gay sex story Hindi – सुशील और चरणदास 3


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


चरणदास : सुशील।भगवान् को सुंदर भक्त आकर्षित करता हैं। अत: तुम्हें श्रृंगार करना होगा।परंतु विधि के अनुसार यह श्रृंगार शुद्ध हाथों से होना चाहिये।मैंने ऐसा पहले इसलिये नहीं कहा कि शायद तुम्हें लज्जा आये।


सुशील: चरणदास जी।मैंने तो आपसे पहले ही कहा था कि मैं भगवान के काम में कोई लज्जा नहीं करूँगा।


चरणदास : तो मैं तुम्हारा श्रृंगार खुद अपने हाथों से करूँगा।


सुशील: जी चरणदास जी।


चरणदास : तो जाओ।पहले दूध से स्नान कर आओ।


सुशील दूध से नहा आया।


चरणदास ने श्रृंगार का सारा सामान तैयार कर रखा था।सुशील ने बनियान और लुंगी पहना था।

चरणदास : आओ सुशील।


चरणदास और सुशील आमने सामने ज़मीन पर बैठ गये।चरणदास सुशील के बिलकुल पास आ गया


चरणदास : तो पहले आँखों से शुरु करते हैं।


चरणदास सुशील के काजल लगाने लगा।


चरणदास : सुशील।एक बात कहूँ?


सुशील: कहिये चरणदास जी।


चरणदास : तुम्हारी आँखें बहुत सुंदर हैं।तुम्हारी आँखों में बहुत गहराई है।



सुशील शरमा गया।


चरणदास : इतनी चमकीली।जीवन से भरी। प्यार बिखेरती।कोई भी इन आँखों से मन्त्र मुग्ध हो जाये।


सुशील कुछ बोला नहीं।थोड़ा मुसकुरा रहा था ।उसे अच्छा लग रहा था।

काजल लगाने के बाद अब गालों पे पाउडर लगाने की बारी आई ।


चरणदास ने सुशील के गालों पे पाउडर लगाते हुए कहा।


चरणदास : सुशील।एक बात कहूँ?


सुशील: जी।कहिये चरणदास जी।


चरणदास : तुम्हारे गाल कितने कोमल हैं।जैसे की मखमल के बने हो।इन पे कुछ लगाते हो क्या।


सुशील: नहीं चरणदास जी।केवल नहाते वक़्त साबुन लगाता हूँ।

चरणदास सुशील के गालों पे हाथ फेरने लगा।

चरणदास : सुशील।तुम्हारे गाल छूने में इतने अच्छे हैं कि.. इन्हें..

सुशील: इन्हें क्या चरणदास जी?

चरणदास : इन गालों का चूमने को दिल करे।

सुशील थोड़ा सा मुसकुराया ।अंदर से उसे बहुत अच्छा लग रहा था।


चरणदास : और एक बार चूमने ले तो छोड़ने का दिल ना करे..एक बात पूछूं?

सुशील: पूछिए चरणदास जी।

चरणदास : क्या किसी ने आज तक तुम्हें चूमा है?

सुशील: नहीं चरणदास जी

चरणदास : मैंने तुम्हारे लिये खास जड़ी बूटियों का तेल बनाया है। इससे तुम्हारी त्वचा में निखार आयेगा।तुम्हारी त्वचा बहुत मुलायम हो जाएगी।तुम अपने बदन पे कौनसा तेल लगाते हो।?

सुशील ‘बदन’ का नाम सुनके और सेंसुअस फ़ील करने लगा।


सुशील: जी।मैं बदन पे कोई तेल नहीं लगाता।


चरणदास : चलो कोई नहीं।अब ज़रा घुटनो के बल खड़ा हो जा


अब सुशील घुटनो पे था।चरणदास भी घुटनो पे हो गया।सुशील के पेट पे तेल लगाने लगा।अब वो सुशील के पीछे आ गया।और सुशील की पीठ और कमर पे तेल लगाने लगा।

चरणदास : सुशील तुम्हारी कमर कितनी लचीली है।तेल के बिना भी कितनी चिकनी लगती है।


चरणदास सुशील के बिलकुल पीछे आ गया।दोनो घुटनो पे थे।


सुशील के चूतड़ और चरणदास के लंड मैं मुश्किल से 1 इंच का फ़ासला था।चरणदास पीछे से ही सुशील के पेट पर तेल लगाने लगा।वो उसके पेट पर लंबे लंबे हाथ फेर रहा था।


चरणदास : सुशील।तुम्हारा बदन तो रेशमी है।तुम्हारे पेट को हाथ लगाने में कितना आनंद आता है।ऐसा लग रहा है की शनील की रजायी पर हाथ चला रहा हूँ।


चरणदास पीछे से सुशील के और पास आ गया।उसका लंड सुशील की चूतड़ को टच कर रहा था।चरणदास सुशील की नाभि में अंगुली घुमाने का लगा।


चरणदास : तुम्हारी नाभि कितनी चिकनी और गहरी है।


चरणदास एक हाथ सुशील के पेट पर फेर रहा था।और दूसरे हाथ की अंगुली सुशील की नाभि में घुम्मा रहा था।सुशील के पेट पर लंबे लंबे हाथ मारते वक़्त चरणदास दो तीन अंगुलियाँ सुशील के बनियान के अंदर भी ले जाता।तीन चार बार उसकी अंगुलियाँ सुशील के निप्पलों को टच करी ।सुशील गरम होता जा रहा था।

चरणदास : सुशील।अब हमारी पूजा आखरी चरनो में है।विधि के अनुसार ज्ञानियों ने  कुछ आसन बताये हैं।लेकिन यह आसन तुम्हें मेरे साथ लेने होंगे ।परंतु हो सकता है मेरे साथ आसन लेने में तुम्हें लज्जा आये।

सुशील: आपके साथ मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

चरणदास : तो तुम मेरे साथ आसन लोगे ?

सुशील: जी चरणदास जी।

चरणदास : लेकिन आसन लेने से पहले मुझे भी बदन पर तेल लगाना होगा और यह तुम्हें लगाना है।

सुशील: जी चरणदास जी।

यह कह कर चरणदास ने तेल की बोतल सुशील को दे दी और वो दोनो आमने सामने आ गये।दोनो घुटनो पर खड़े थे।

सुशील ने चरणदास की चेस्ट पर तेल लगाना शुरु किया.

सुशील पहले भी चरणदास के बदन से आकर्षित हो चूका था।आज चरणदास के बदन पर तेल लगाने से उसका बदन और चिकना हो गया।वो चरणदास की छाती , पेट, बाहों और पीठ पर तेल लगाने लगा।वह अंदर से चरणदास के बदन से लिपतना चाह रहा था।सुशील भी चरणदास के पीछे आ गया।और उसकी पीठ पर तेल मलने लगा।फिर पीछे से ही उसके पेट और छाती पर तेल मलने लगा।सुशील का लंड हलके हलके चरणदास की गांड से टच हो रहां था ।सुशील ने भी चरणदास की नाभि में दो तीन बार अंगुली घुमायी।


चरणदास : चलो।अब आसन ले।।पहले आसन में हम दोनो को एक दूसरे से पीठ मिला कर बैठना है।


चरणदास और सुशील चौकड़ी मार के और एक दूसरे की तरफ़ पीठ करके बैठ गये।फिर दोनो पास पास आये जिससे कि दोनो की पीठ मिल जाये।चरणदास की पीठ तो पहले ही नंगी था क्योंकि उसने सिर्फ लुंगी पहनी था।सुशील बनियान और लुंगी में था।उसने भी बनियान उतार दिया था.दोनो पीठ से पीठ मिला कर बैठ गये।


चरणदास : सुशील।अब हाथ जोड़ लो।


चरणदास हलके हलके सुशील की पीठ को अपनी पीठ से रगड़ने लगा।दोनो की पीठ पर तेल लगा था।इसलिये दोनो की पीठ चिकनी हो रही था।सुशील भी हलके हलके चरणदास की पीठ पर अपनी पीठ रगड़ने लगा।

चरणदास : चलो।अब घुटनो पर खड़े होकर पीठ से पीठ मिलानी है।


दोनो घुटनो के बल हो गये।एक दूसरे की पीठ से चिपक गये।इस पोजीशन में सिर्फ पीठ ही नहीं दोनो के चूतड़ भी चिपक रहे थे ।


चरणदास : अब अपनी बाहें मेरी बाहों में डाल के अपनी तरफ़ हलके हलके खींचो।


दोनो एक दूसरे की बाहों में बाहों डाल के खींचने लगे।दोनो की नंगी पीठ और चूतड़ एक दूसरे की पीठ और चूतड़ से चिपक गए ।चरणदास अपनी चूतड़ सुशील की चूतड़ पर रगड़ने लगा।सुशील भी अपनी चूतड़ चरणदास की चूतड़ पर रगड़ने लगा।

सुशील की गांड गरम होता जा रही था।


चरणदास : सुशील।क्या तुम्हें मेरी पीठ का स्पर्श सुखदायी लगा रहा है?

सुशील: हाँ चरणदास जी।आपकी पीठ का स्पर्श बहुत सुखदायी है।


चरणदास : और नीचे का?

सुशील समझ गया चरणदास का इशारा चूतड़ की तरफ़ है।


सुशील: हाँ चरणदास जी।

दोनो एक दूसरे के चूतड़ को रगड़ रहे थे।

चरणदास : सुशील।तुम्हारे चूतड़ भी कितने कोमल लगते हैं।मेरे चूतड़ तो थोड़े कठोर हैं।

सुशील: चरणदास जी। बड़े आदमियों के थोड़े कठोर ही अच्छे लगते हैं।

चरणदास : अब मैं पेट के बल लेटता हूँ .तुम मेरे ऊपर पेट के बल लेट जाना।

सुशील: जी चरणदास जी।


चरणदास ज़मीन पर पेट के बल लेट गया और सुशील चरणदास के ऊपर पेट के बल लेट गया।सुशील का नंगा पेट चरणदास की नंगी पीठ से चिपका हुआ था।सुशील खुद ही अपना पेट चरणदास की पीठ पर रगड़ने लगा।

चरणदास : सुशील।तुम्हारे पेट का स्पर्श ऐसे लगता है जैसे की मैंने शनील की रजायी ओढ़ ली हो। अब मैं सीधा लेटता हूँ और तुम मुझ पर पेट के बल लेट जाओ।लेकिन तुम्हारा मुंह मेरे चरणो की और मेरा मुंह तुम्हारे चरणो की तरफ़ होना चाहिये।


चरणदास पीठ के बल लेट गया और सुशील चरणदास के ऊपर पेट के बल लेट गया।सुशील की टांगें चरणदास के चेहरे की तरफ़ थी ।सुशील की नाभि चरणदास के लंड पर था।वह उसके खड़ा लंड को महसूस कर रहा था।चरणदास सुशील की टांगों पर हाथ फेरने लगा।

चरणदास : सुशील।तुम्हारी टांगें कितनी अच्छी हैं।


चरणदास ने सुशील का लुंगी ऊपर चढ़ा दिया और उसकी जांघें मलने लगा।उसने सुशील की टांगें और चौड़ी कर दी ।सुशील का अंडरवियर साफ़ दिख रहा था।चरणदास सुशील के लंड के पास हलके हलके हाथ फेरने लगा।लंड के पास हाथ लगने से सुशील और भी गरम हो रह  था।


चरणदास : चलो।अब मैं बैठता हूँ।और तुम्हें सामने से मेरे कंधों पर बैठना है।मेरा सिर तुम्हारी टांगों के बीच में होना चाहिये।


सुशील: जी।


सुशील ने चरणदास का सिर अपनी टांगों के बीच लिया और उसके कंधों पर बैठ गया।


इस पोजीशन में सुशील की नाभि चरणदास के लिप्स पर आ रही था।चरणदास अपनी जीभ बाहर निकाल के सुशील की नाभि में घुमाने लगा।सुशील को बहुत मज़ा आ रहा था।


चरणदास : सुशील।तुनहारि नाभि कितनी मीठी और गहरी है।।क्या तुम्हें यह आसन अच्छा लग रहा है।

सुशील: हाँ चरणदास जी।यह आसन बहुत अच्छा है।

चरणदास : क्या किसी ने तुम्हारी नाभि में जीभ डाली है।

सुशील: आह्ह।नहीं चरणदास जी।आप पहले हैं।

चरणदास : अब तुम मेरे कंधों पर रहके ही पीछे की तरफ़ लेट जाओ।हाथों से ज़मीन का सहारा ले लो।


सुशील चरणदास के कंधों का सहारा लेकर लेट गया।अब चरणदास के लिप्स के सामने सुशील का लंड था।चरणदास धीरे से अपने हाथ सुशील के निप्पलों पर ले गया।और बनियान के ऊपर से ही दबाने लगा।सुशील यही चाह रहा था।सुशील ने एक हाथ से अपना लुंगी ऊपर चढ़ा दिया और अपने लंड को चरणदास के लिप्स पर लगा दिया।चरणदास अंडरवियर के ऊपर से ही सुशील के लंड पर जीभ मारने लगा।

चरणदास : सुशील।अब तुम मेरी झोली मैं आ जाओ।

सुशील फ़ौरन चरणदास के लंड पर बैठ गया।उससे लिपट गया।चरणदास सुशील के लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा।सुशील बार बार अपनी गांड चरणदास के लंड पर दबाने लगा।चरणदास ने सुशील का बनियान उतार के फेंक दिया और उसके निप्पलों को अपने मुंह में ले लिया।चरणदास ने बैठे बैठे ही अपनी लुंगी खोल के अपने अंडरवियर से अपना लंड निकला।सुशील ने भी बैठे बैठे ही अपनी अंडरवियर थोड़ी नीचे कर दी ।सुशील चरणदास के खड़े लंड पर बैठ गया।लंड पूरा उसकी गांड में चला गया।सुशील चरणदास के लंड पर ऊपर नीचे होने लगा।चुदाई ज़ोरो पर थी ।चरणदास : आह्हह। तेरी गांड कितनी अच्छी है।मेरी बांसुरी को बहुत मज़ा आ रहा है।

सुशील: चरणदास जी।आपकी बांसुरी मेरी गांड में बड़ी मीथा धुन बजा रही है।

चरणदास : अब उस यंत्र को छोड़।पहले मेरे लंड की जय कर ले।बहुत मज़ा देगा यह तेरे को।

सुशील: ऊऊआअ।प्प।चरणदास जी रात को तो आपके यंत्र ने कहाँ कहाँ घुसने की कोशिश की ।


चरणदास : मेरे राजा ।आअ।फ़िकर मत कर।स्स।तुझे जहां जहां घुसवना है मैं घुसाऊंगा


अब सुशील लेट गया और चरणदास उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा।साथ साथ वो सुशील के लंड को भी दबा रहा था।


चरणदास : आअह्ह।उस्स।आज के लिए तेरा पति बन जाऊ।बोल।

सुशील: आऐए।स्सस।ई।हाअन्न।बन जाओ।


चरणदास : मेरा बाण आज तेरी गांड को चीर देगा।


सुशील: आअह्हह।चीर दो।आआअह्हह्हह्हह्हह्ह।चीएर दो नाअ।आआह्ह


चरणदास : आअह्हह।ऊऊऊऊ

दोनो एक साथ झड गये और चरणदास ने सारा वीर्य सुशील की गांड के ऊपर झाड दिया।चरणदास सुशील के साथ लेट गया और उसके गालों को चूमने लगा।सुशील कपड़े पहन के घर चला आया।आज चरणदास ने उसे यंत्र बाँधने को नहीं दिया था।

रात को सोते वक़्त सुशील यंत्र को मिस कर रहा था।उसे चरणदास के साथ हुई चुदाई याद आने लगी ।सुशील ने अपना शोर्ट खोला और अपनी गांड को रगड़ने लगा।’चरणदास जी।मुझे क्या हो रहा है’।यह सोचने लगा।


गांड से हटा के अंगुली लंड पर ले गया।और लंड को रगड़ने लगा।’यह मुझे कैसा रोग लग गया है।टांगों के बीच में भी चुभन।चूतड़ के बीच में भी चुभन।ओह।’।

अगले दिन रोज़ की तरह 12:45 बजे वो चरणदास के घर पहुंचा ।दरवाज़ा खुलते ही वो चरणदास से लिपट गया।चरणदास ने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और सुशील को लेकर ज़मीन पर बिछी चादर पर ले आया।सुशील ने चरणदास को कस के बाहों में ले लिया। चरणदास के चेहरा पर किस्स पर किस्स किये जा रहा था।अब दोनो लेट गये थे और चरणदास सुशील के ऊपर था।दोनो एक दूसरे के होटों को कस कस के चूमने लगे।चरणदास सुशील के होटों पर अपनी जीभ चलाने लगा।सुशील ने भी मुंह खोल दिया।अपनी जीभ निकल के चरणदास की जीभ को चाटने लगा।चरणदास ने अपनी पूरी जीभ सुशील के मुंह में डाल दी ।सुशील चरणदास के दाँतों पर जीभ चलाने लगा।


चरणदास : ओह।सुशील।मेरी जान ।तेरी जीभ।तेरा मुंह तो मिल्क केक जैसा मीठा है।


सुशील: चरणदास जी।आअ।आपके होंठ बड़े रसीले हैं।आपकी जीभ शरबत है।आआह्ह।

चरणदास : ओह्हह।सुशील।


चरणदास सुशील के गले को चूमने लगा।चरणदास सुशील की शर्ट हटा के उसके निप्पल को दबाने लगा।उसके निप्पलों को कस कस के चूसने लगा।फिर चरणदास नीचे की तरफ़ आ गया।उसने सुशील की पेंट उतार दी


चरणदास : सुशील।आज अंडरवियर पहनने की क्या ज़रूरत थी ।


सुशील: चरणदास जी।आगे से नहीं पहनूंगा ।


चरणदास ने सुशील की अंडरवियर निकाल दी ।


चरणदास : मेरी जान ।अपनी गांड के द्वार का सेवन तो करा दे।

यह कह कर चरणदास सुशील की गांड चाटने लगा।सुशील के बदन में करंट सा दौड़ गया।सुशील पहली बार गांड चटवा रहा था।चरणदास ने सुशील को पेट के बल लिटा दिया और सुशील के चूतड़ पर किस्स करने लगा।सुशील के चूतड़ थोड़ी बड़े थे बहुत मुलायम थे ।


चरणदास : सुशील।मैं तो तेरे चूतड़ पर मर जाऊ।


सुशील: चरणदास जी।आह्ह।मरना ही है तो मेरे चूतडों के असली द्वार पर मरो।आपने जो यंत्र दिया था वो मेरे चूतडों के द्वार पर आकर ही फसता था।।

चरणदास : तु फ़िकर मत कर।तेरे हर एक द्वार का भोग लगाऊगा।


यह कह कर चरणदास ने सुशील को घोडा बनाया।और उसकी गांड चातने लगा।


सुशील को इसमें बहुत अच्छा लग रहा था।चरणदास सुशील का एस होल चाटने के साथ साथ उसके लंड को रगड़ रहा था।


सुशील: आअह्हह।चलो।चरणदास जी।अब सवाहा कर दो।ऊस्सशह्हह्हह्ह


चरणदास : चल।अब मेरा प्रसाद लेने के लिये तैयार हो जा।


चरणदास ने धीरे धीरे सुशील की गांड में अपना पूरा लंड डाल दिया।


चरणदास ने गांड में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी ।


चरणदास : ।आह्हह।ओह्हह।सुशील।।मैं छूटने वला हूँ।

सुशील: आअह्हह्ह।मैं भी।आआ।ई।ऊऊऊ।अंदर ही ।गिरा।द।दो अपना।परसाद।


चरणदास : आअह्हह्हह।।


सुशील: आआह्हह्हह।अ।अह।

अह।अह।।अह।

प्रचण्ड मुसण्ड लौड़ा-2 - Gay Hindi story

 Gay Hindi story – प्रचण्ड मुसण्ड लौड़ा-2


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


पिंकू अब ईशान आदेश देने लगा था और ईशान मानने भी लगा था। ट्रेवल एजेंसी के बाकी लोगों की तरह वो भी उसके लौड़े का गुलाम बन चुका था। पिंकू अपनी आँखें बंद किये, ईशान के बाल सहलाता, लण्ड चुसवाने का आनंद ले रहा था और ईशान भी अपनी आँखें बंद किये, दोनों हाथों से पिंकू का हथौड़े जैसा लंड चूसने का आनन्द ले रहा था।


दोनों आँखें बंद किये आनन्द के सागर में डूबे जा रहे थे।


करीब बीस मिनट तक वो दोनों उसी अवस्था में लगे रहे, फिर ईशान थक गया, उसका जबड़ा दर्द करने लगा।


उसने सुस्ताने के लिए अपना सर अलग कर लिया।


“थक गए क्या?” पिंकू ने पूछा।


“हाँ यार, तुम्हें कितनी देर लगती है झड़ने में?”

“मुझे तो बहुत देर लगती है… एक घण्टा तक लग जाता है।” पिंकू ने गर्व से कहा।


बहुत हैवी-ड्यूटी लौड़ा था।


“थोड़ी देर और चूसो ईशान !” पिंकू ने आग्रह किया।


“यार मेरा जबड़ा दर्द कर रहा है। अब और नहीं कर पाऊँगा।” ईशान ने जवाब दिया।


“गान्ड में लोगे?” पिंकू ने प्रस्ताव रखा।


“बिल्कुल नहीं, मुझे अभी कुछ दिन और जीना है।” ईशान चिल्लाया।


“क्यूँ? इसमें जीने-मरने की बात कहाँ से आ गई?”


“अरे… ये तुम्हारा गधा छाप, इतना बड़ा मेरे अंदर जायेगा तो मेरी गान्ड फटेगी नहीं क्या?” ईशान उससे चुदवाने की बात को लेकर डर गया था।


लेकिन पिंकू अभी सन्तुष्ट नहीं हुआ था। ईशान ने उसका लण्ड इतने प्यार से चूसा था कि उसके अंदर की आग और भड़क गई थी। उसकी हालत अब एक कामातुर गधे की तरह हो गई थी। कैसे न कैसे उसे अपना लौड़ा झाड़ना ही था। लेकिन ईशान राज़ी ही नहीं था।


उसने ईशान को फिर से फुसलाना शुरू किया, “ईशान मेरी बात सुनो… इतना दर्द नहीं होगा जितना तुम सोच रहे हो। एक बार लेकर तो देखो !”


“बिल्कुल नहीं। सवाल ही नहीं होता। जाओ बाथरूम में सड़का मार लो।”


“अच्छा एक बात सुनो, अगर दर्द हुआ तो मैं नहीं करूँगा। बिल्कुल धीरे-धीरे घुसेड़ूँगा। बस एक बार कोशिश तो करो।”


ईशान ने कुछ सोच कर हामी भर दी। जी तो ईशान का भी कर रहा था पर वो डर रहा था पर असल में इतना बड़ा लण्ड देखकर उसकी गाण्ड में खुजली होने लगी थी।


“एक काम करो। मैं तुम्हारी कुर्सी पर बैठ जाता हूँ, तुम मेरे लण्ड पर अपनी गाण्ड टिका कर बैठो। अगर दर्द हुआ तो उठ जाना।” पिंकू ने सुझाव दिया।


ईशान को पिंकू की बात जँच गई।


अगले ही पल ईशान उठा और पिंकू कुर्सी पर अपना खम्बे की तरह खड़ा और खम्बे के ही आकार का लण्ड लेकर बैठ गया। साला हरामी बहुत उतावला हो रहा था, इतना कि उसका लण्ड सलामी देने लगा था। ईशान ने अपनी जींस और चड्डी नीचे खींची, पिंकू ने पहली बार ईशान की गोरी-गोरी, चिकनी गाण्ड के दर्शन किये।


विशाल ने बिल्कुल सही वर्णन किया था।

क्या मस्त गान्ड थी ईशान की !!!


मज़ा आ गया। और बाकी का मज़ा और आगे आने वाला था। ईशान ने अपनी गोरी गोरी, मुलायम, चिकनी गाण्ड का छेद पिंकू के लण्ड सुपारे पर टिकाया और अंदर लेने लगा और लेते-लेते हल्की-हल्की आहें भरने लगा, “आह… अहह… हआ… !!”


शायद बेचारे को दर्द हो रहा था। वैसे दर्द तो लाज़मी था।


ईशान ने किसी तरह आधा लण्ड अपनी गाण्ड में लिया। इसके बाद उसकी गाण्ड चिरने लगी।


“पिंकू बस…!” दर्द के मारे इतना ही कह पाया।


पिंकू ने आगे झुक कर ईशान को देखा। बेचारे की आँखे बाहर थीं और मुँह खुला हुआ था।

“अच्छा और नहीं घुसेड़ूँगा।” पिंकू ने कह तो दिया, लेकिन उससे रहा नहीं जा रहा था। उसका तो मन था कि ईशान की गोरी-गोरी गान्ड में अपना लौड़ा पूरा का पूरा घुसेड़ दे, अंदर तक। इधर हमारे ईशान की गान्ड वाकयी में फट गई थी।


ज़रा सोचिये, अगर आपकी गान्ड में पिंकू जितना बड़ा लण्ड घुस जाये, तो क्या आपकी गान्ड नहीं फटेगी? अरे आप तो डर गए, मेरा मतलब आपकी में नहीं वो तो बस यूँ ही कह दिया।


बेचारे को वो पल याद आ गया जब उसने पहली बार अपनी गान्ड में लण्ड लिया था। उसके दोस्त के बड़े भाई ने उसे पहली बार चोदा था। बड़ा दर्द हुआ था बेचारे को। लेकिन उसके बाद से ईशान पक्का गाण्डू बन गया था। वो अपने दोस्त के बड़े भाई के आगे हाथ जोड़ता था अपनी गान्ड की खुजली शांत करवाने के लिए।


अब पिंकू ने लण्ड हिलाना शुरू किया। अभी तक तो वो सिर्फ अपना लण्ड घुसेड़े, ईशान की प्रतिक्रिया देख रहा था।


अब ईशान ने छटपटाना और चिल्लाना शुरू किया, “अह्ह्ह्ह… आह्ह्ह… !!! पिंकू …… ऊऊह्ह्ह्ह !!”


ईशान चाहता था, पिंकू अपना लण्ड निकाल ले, लेकिन पिंकू समझा कि ईशान चाहता है वो उसे धीरे-धीरे चोदे। वैसे पिंकू अब उसे नहीं छोड़ने वाला था।


शेर के मुँह में खून लग जाये तो वो अपने शिकार को कहीं छोड़ता है भला !!

पिंकू ने उसे जाँघों से पकड़ा हुआ था और अपनी कमर उछाल-उछाल उसे चोद रहा था। कुर्सी खबड़-खबड़ फर्श पर आवाज़ कर रही थी।


ईशान से कुछ बोला ही नहीं जा रहा था, आहें भरे जा रहा था,”उह्ह… आह्ह… उह्ह… आह… उह्ह !!”


ईशान की सिसकारियों ने पिंकू का मज़ा दुगना कर दिया था।


ईशान ने हिम्मत जुटाई और हटने की कोशिश करने लगा। पिंकू ने उसे जाँघों से पकड़ा हुआ था, इसीलिए उसकी पकड़ थोड़ा ढीली थी। किसी तरह ईशान खड़ा हो गया। पिंकू भाँप गया था कि ईशान भागने के चक्कर में है। जैसे ही ईशान उठा, पिंकू उसकी जाँघे पकड़े-पकड़े, उसकी गाण्ड में अपना लौड़ा घुसेड़े, उसके साथ खड़ा हो गया। ईशान भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसकी जीन्स उसके टखनों तक सरक आई थी, इसलिये उससे चला भी नहीं जा रहा था, सिर्फ छोटे-छोटे कदम ले पा रहा था। पिंकू अभी भी उसे चोदे जा रहा था, उसी अवस्था में, चलते-चलते।


साला बहुत हरामी सांड था और उसका लौड़ा तो उससे भी ज्यादा हरामी था।


पिंकू को डर लगा कि कहीं इस भागा-दौड़ी में उसका लण्ड बाहर न निकल आये। उसे मालूम था कि अगर एक बार उसका लण्ड निकला तो ईशान फिर नहीं लेने वाला और वो इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। वो ईशान को धकेल कर डेस्क के पास ले आया, जिससे वो कहीं भाग न जाये। ईशान ने अपने हाथ डेस्क पर टिका दिए।

ये सब उसने बड़ी कुशलता पूर्वक किया, अब ईशान भाग नहीं सकता था, पिंकू तो वैसे भी चोदने का रसिया था, अभी तक उसने कुल मिला कर 126 अलग-अलग गाण्डें मारी थी। एक सौ सत्ताईसवाँ ईशान था।


पिंकू अभी तक ईशान को मज़े-मज़े, धीरे-धीरे चोद रहा था लेकिन अब उससे रहा नहीं जा रहा। इस ख्याल से कि ईशान को दर्द होगा, वो ईशान को आराम से चोद रहा था और अभी भी उसका लण्ड आधा बाहर था।


लेकिन अब उसके सब्र का बाँध टूट गया, उसने अपना पूरा का पूरा, दस इन्च का, मोटा-गदराया लौड़ा बेरहमी से ईशान की गान्ड में घुसेड़ दिया।


“उई ई ई मम्मी…!!” ईशान ज़ोरों से चीख उठा।


इसकी परवाह किये बिना पिंकू उसकी गाण्ड मारने में लगा हुआ था। उसने उसने मज़बूती से जाँघों से दबोचा हुआ था और गपागप- गपागप अपनी कमर हिलाता चोदे जा रहा था।


इधर हमारा चिकना छोकरा ईशान मार खाते कुत्ते की तरह कूंक रहा था, “उउउउं… आऊँ… उउउं… !!!”


बेचारा ! उसकी आँखों में आँसू आ गए थे। ऐसी शक्ल बना ली थी जैसे कोई उसे यातना दे रहा हो।


“चुप भोसड़ी के… ऊँ न पूँ… चुपचाप चुदवा !” पिंकू उसे हड़काता हुआ बोला। लण्ड चुसवाते समय पिंकू कैसा निरीह बनकर उसके सामने खड़ा था और अब उसको दरोगा की हड़का-हड़का कर चोद रहा था।

ईशान वैसे ही छटपटा-तड़प रहा था, अब तो उसने सर भी झटकना शुरू दिया था। मन ही मन वो उस पल को कोस रहा था जब वो उससे गाण्ड मरवाने को राज़ी हुआ था। आज गोशाईंगँज का गँवार-देहाती लण्ड घुस ही गया ईशान की गोरी-गोरी रसगुल्ले जैसी मुलायम फ़ैज़ाबादी गाण्ड में।


“ईशान मेरी जान…” पिंकू उसकी गाण्ड मारते हुए बोला- बहुत मस्त गाण्ड है तुम्हारी, बहुत दिनों से अरमान था तुम्हें पेलने का ! आज जाकर तुम चुदे।


पिंकू का लण्ड ईशान की मुलायम, चिकनी गान्ड नश्तर की तरह छलनी कर रहा था। ईशान बीच-बीच में अपनी बाँह पीछे बढ़ा कर को पिंकू रोकने की कोशिश करता, लेकिन पिंकू लपक कर उसकी कलाई पकड़ लेता और चोदता रहता। हारकर ईशान अपनी बाँह वापस कर लेता।


बहुत देर बाद जाकर बेचारा कुछ कहने की हिम्मत जुटा पाया, “पिंकू मुझे छोड़ दो… दर्द हो रहा है… !!”


“छोड़ दूँ कि चोद दूँ?” पिंकू व्यंग्य भरे स्वर में बोला।


“छोड़ दे भाई, बहुत दर्द हो रहा है।”


“बस जान… मैं झड़ने वाला हूँ…” पिंकू चरम सीमा पर पहुँचने लगा, उसके शॉट तेज़ होते गए और ईशान की आँहें भी, “अहह ..!!”

“उह्ह्ह… अह्ह.. उह्ह्ह… अहह…!!”


पिंकू अब झड़ने वाला था। चोदते-चोदते रुक गया और अपना लौड़ा गाण्ड से निकाल लिया। उसका मन था कि ईशान के चेहरे पर अपना माल गिराए। वो अपने लण्ड को ईशान के सुन्दर चेहरे पर अपना वीर्य छिड़कते हुए देखना चाहता था।


पिंकू की पकड़ ढीली हो गई। ईशान ने अपने आप को सम्भाला और खड़ा होकर सुस्ताने लगा।


तभी पिंकू बोला, “यार नीचे बैठ जाओ… तुम्हारे चेहरे पर अपना पानी गिराऊँगा… जल्दी करो।”


ईशान मरियल कुत्ते की तरह लग रहा था। उसने ‘न’ में सर हिला दिया। लेकिन अब पिंकू बस झड़ने ही वाला था। उसने ईशान को कन्धों से पकड़ कर ज़मीन पर बैठाने की कोशिश की और अपनी कमर उचका कर लण्ड ऊपर कर दिया कि किसी तरह से उसका लण्ड ईशान के चेहरे से छू जाये और वो उसके चेहरे पर अपना वीर्य गिरा दे।


लेकिन ईशान संभल चुका था, वो नहीं झुका और इस सब चक्कर के बीच पिंकू ने ईशान की टी-शर्ट गन्दी कर दी। उसके लौड़े की पिचकारी इतनी तेज़ थी कि वीर्य की एक-आध धार ईशान की ठोड़ी पर भी आ गिरी।


“ओह्ह…!!”

ये ‘ओह’ पिंकू की थी। अब उसने राहत की साँस ली। ईशान के कंधे पर सर टिकाए हुए। उसके लौड़े से अभी भी वीर्य की एक छोटी सी बूँद टपक रही थी, जो ईशान की नीचे सिमटी जींस पर जा गिरी।


ईशान अपनी टी-शर्ट ख़राब होने से खीज गया था। उसने पिंकू को झटके से अलग किया और बाथरूम की तरफ भागा।


इस सब से ईशान का मूड तो ख़राब हो गया था, लेकिन ये तो शुरुआत थी। आगे जाकर उसने पिंकू से कई बार गाण्ड मरवाई, पिंकू ने अपनी सारी इच्छाएँ ईशान से पूरी कीं। ईशान के चेहरे पर अपना वीर्य गिराना, उसे हर पोज़ में चोदना, उसके मुँह में मुँह डाल कर जीभ लड़ाना और भी न जाने क्या-क्या !


बाकी सबकी तरह ईशान भी गोशाईंगंज के लण्ड का गुलाम हो चुका था।

प्रचण्ड मुसण्ड लौड़ा-1 - Gay Hindi story

 Gay Hindi story – प्रचण्ड मुसण्ड लौड़ा-1

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


समस्त पाठकगण को मेरा नमस्कार। आज आपको मैं एक ट्रेवल एजेंसी का किस्सा बताता हूँ। यह ट्रेवल एजेंसी हमारी माया नगरी मुम्बई के अँधेरी इलाके में थी।


इस ट्रेवल एजेंसी की ख़ास बात यह थी कि इसे एक गे (समलैंगिक) उद्यमी ने शुरू किया था व इसके सारे कर्मचारी चपरासी से लेकर मालिक तक सब ‘गे’ थे।


ईशान भी इसी ट्रेवल एजेंसी में काम करता था। उसका ज़िम्मा था ग्रुप टूअर्स करवाना। अब तक वो कई ‘गे’ लड़कों के ग्रुप टूअर्स करवा चुका था।

उसे इस ट्रेवल एजेंसी में उसके बॉयफ्रेंड विशाल ने नौकरी दिलवाई थी। वैसे तो उस ट्रेवल एजेंसी में हर कोई एक-दूसरे के बारे में जानता था, लेकिन ईशान और विशाल एक-दूसरे के बहुत करीब थे।


ईशान बहुत सुन्दर लड़का था, दुबला पतला, गोरा-चिट्टा, काली बड़ी-बड़ी आँखें और बहुत ही पतले-पतले नाज़ुक होंठ कि सामने वाले का मन करता था कि चूस ले, उम्र लगभग चौबीस साल, उसके पीछे बहुत लोग थे, उसके दफ्तर में भी और बाहर भी लेकिन ईशान किसी को घास नहीं डालता था। वो विशाल से बहुत प्यार करता था, सिर्फ उसी का लौड़ा चूसता था, उसी से गान्ड मरवाता था।


उस ट्रेवल एजेंसी का चपरासी अभिषेक था। पूरा नाम अभिषेक तिवारी था, लेकिन सब उसे ‘पिंकू’ कहकर बुलाते थे। उसकी उम्र लगभग छब्बीस साल थी, इकहरा बदन, लम्बा कद, रंग गेहुँआ, चेहरे पर हल्की-हल्की मूँछें।


पिंकू का सबसे बड़ा हथियार था उसका लण्ड। उस ट्रेवल एजेंसी में हर कोई उसका दीवाना था। यहाँ तक कि उसका मालिक भी पिंकू के लण्ड का कायल था। वहाँ जो लोग गान्ड मारते थे, वो भी उसके लण्ड का लोहा मानते थे।


पिंकू का लण्ड साढ़े दस इन्च का था और भयंकर मोटा था।


पिंकू ईशान को बहुत पसन्द करता था, उसका बड़ा मन था ईशान को चोदने का, उसको दफ्तर में रह-रह कर घूरा करता था। उसको लाइन मारता था, उसके सामने अपना लण्ड खुजाता था। लेकिन ईशान उसको बिल्कुल घास नहीं डालता था। वो सिर्फ विशाल का था। इसी बात को लेकर पिंकू परेशान रहता था।


इसके अलावा ईशान और पिंकू एक ही जगह के रहने वाले थे। ईशान फैज़ाबाद का था और पिंकू फैज़ाबाद के करीब एक छोटे से कस्बे गोशाईंगंज का था। लेकिन ईशान फिर भी पिंकू से दूर रहता था। इसका कारण यह भी था कि ईशान पिंकू को देहाती, गँवार समझता था। उसे मालूम था कि गोशाईंगंज महज़ एक छोटा सा क़स्बा था।


यद्यपि उसने पिंकू के ‘महा-प्रचंड’ लौड़े के बारे में सुन रखा था और वो ये भी जानता था कि पिंकू उसके पीछे था।


एक दिन की बात है, किसी ज़रूरी काम से ईशान और विशाल को किसी ज़रूरी काम से रविवार के दिन ट्रेवल एजेंसी आना पड़ा। दौड़-भाग करने के लिए पिंकू को भी बुलाया गया। बाकी लोग रविवार की वजह से छुट्टी पर थे। दफ्तर में उन तीनों के अलावा और कोई नहीं था।


विशाल थोड़ी देर बाद किसी काम से बाहर निकल गया। अब दफ्तर में सिर्फ पिंकू और ईशान थे।


पिंकू हमेशा की तरह ईशान को ताड़ रहा था। लेकिन ईशान पिंकू को नज़रअंदाज़ किये हुए, अपने लैपटॉप में मशगूल था।


“पिछली बार घर कब गए थे?” पिंकू ने बातचीत शुरू की।


“दीवाली पर !” ईशान ने बिना उसकी और देखे संक्षिप्त सा जवाब दिया।


पिंकू को मालूम था ईशान उस पर ध्यान नहीं दे रहा था, लेकिन फिर भी वो बातचीत में लगा रहा।


“मैं नए साल पर गया था। बहुत ठण्ड थी।”

ईशान ने कोई जवाब नहीं दिया।


पिंकू आकर उसकी डेस्क पर खड़ा हो गया, “चाय पियोगे?” उसने पूछा।


ईशान ने उसी तरह, बिना उसे देखे ‘ना’ बोल दिया।


पिंकू की समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। उसका लण्ड मचल रहा था। इतना सुन्दर, चिकना लड़का उसके सामने अकेला था, लेकिन वो कुछ नहीं कर पा रहा था।


न जाने पिंकू के दिमाग में क्या आया, उसने दफ्तर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। वैसे भी रविवार के दिन कोई नहीं आने वाला था। उसे मालूम था कि विशाल लम्बे काम से बाहर गया हुआ है और देर से लौटेगा।


ईशान इससे अनभिज्ञ अपने काम में जुटा हुआ था। तभी पिंकू आकर उसके करीब खड़ा हो गया। ईशान चौंक गया।


पिंकू ने अपनी जींस और चड्डी नीचे खींची हुई थी। वो अपना लण्ड खोलकर ईशान के सामने खड़ा था। ईशान बुरी तरह सकपकाया। एक पल उसने पिंकू के महा भयंकर लौड़े को देखा और एक पल पिंकू को, ठिठक कर पीछे खिसक गया।


“इसे एक बार चूस दो ईशान…” पिंकू ने बड़े दयनीय लहज़े में कहा। उसकी आवाज़ में बेइन्तहा हवस की वजह से बेबसी का पुट था। जैसे कोई बहुत भूखा आदमी किसी खाना खाते हुए आदमी के सामने रोटी के एक टुकड़े के लिए भीख माँग रहा हो।

ईशान स्तब्ध था। वो इसकी उम्मीद नहीं कर रहा था, दूसरे वो पिंकू का लण्ड-मुसंड देख कर हिल गया था। उसने उसके लौड़े के बारे में सुन तो रखा था, लेकिन देख अब रहा था और वाकयी में अचम्भित था।


पिंकू का विकराल लण्ड साढ़े दस इन्च लम्बा था और ज़बरदस्त मोटा था, जितना पिंकू की अपनी कलाई। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उसकी जांघों के बीच से काले-गेहुँए रँग का मोटा सा खीरा लटका हो।


ईशान उसका लण्ड-मुसंड देखता ही रह गया।


उसकी तोप पर मोटी-मोटी नसें उभर आई थीं, रंग गहरे सांवले से अब काला पड़ने लगा था। उसका सुपारा बड़े से गुलाब जामुन की तरह फूल कर मोटा हो गया था और उसमें से प्री-कम चू रहा था। उसके मोटे-मोटे गोले, उसके पीछे उगी हुई झाँटों में उलझे लटक रहे थे।


ईशान सोच रहा था- इतना बड़ा तो सिर्फ ब्लू फिल्मों में अफ्रीकियों का होता है। इतना बड़ा मुसंड गोशाईंगंज में कहाँ से आ गया?


एक पल को ईशान को घिन आई ‘साला गँवार अपनी झाँटे भी नहीं साफ़ करता था, न ही काट कर छोटा करता था।’ लेकिन इससे वो और मर्दाना और रौबीला लग रहा था।

ईशान उसके प्रचण्ड मुसंड को घूर ही रहा था कि पिंकू उसके और करीब आ गया। ईशान के चेहरे और उसके लण्ड में कुछ ही इंचों का फैसला था। लण्ड की गन्ध ईशान के नथुनों में भर गई थी, पिंकू का तो मन था कि अपना लौड़ा सीधे उसके मुँह में घुसेड़ दे। उसने देखा जितना लम्बा उसका लण्ड था, उतना लम्बा तो ईशान का सर था। लेकिन उसके लिए यह कोई नई बात नहीं थी।


“चूसो…” पिंकू ने ईशान का ध्यान भंग करते हुए कहा, उसके लहज़े में हवस की बेबसी थी।


“पिंकू… कोई आ गया तो?” ईशान उसका विकराल लण्ड देख कर पिंघल चुका था, उसके मुँह में पानी आ गया था।


“अरे कोई नहीं आएगा। मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया है।”


“और विशाल?” ईशान ने पूछा।


“अरे वो देर से आयेगा। ओबेरॉय (होटल) गया हुआ है क्लाइंट से मिलने। देर से लौटेगा।” उसकी लहज़े में अब बेसब्री थी। वो जान गया था कि ईशान अब पिंघल गया है।


उसके लण्ड से इतना प्री-कम टपक रहा था कि अब ईशान की जींस पर गिरने लगा था।

इससे पहले कि ईशान उसका लण्ड मुँह में लेता, पिंकू ने खुद ही उसका सर पकड़ कर अपना लंड उसके मुँह में घुसेड़ दिया और ईशान मानो सहजवृत्ति से, अपने आप ही फ़ौरन उसका गदराया लण्ड-मुसंड चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पीता हो। पिंकू के लण्ड से वीर्य और मूत की तेज़ गंध आ रही थी, लेकिन बजाये घिन आने के यह गंध ईशान को और आकर्षित कर रही थी।


ईशान मस्त होकर पिंकू का लौड़ा चूसने लगा। वैसे इतना भीमकाय लौड़ा किसी को भी मिल जाये तो मस्त होकर चूसेगा।


“आज चूस लो गोशाईंगंज का लण्ड …” पिंकू बोला।


ईशान अपनी कुर्सी पर बैठा, अपने सामने खड़े पिंकू का लण्ड ऐसे चूस रहा था जैसे उसे दोबारा कभी लण्ड चूसने को मिलेगा। कभी उसको अगल-बगल से चाटता, कभी उसका सुपारा चूसता, कभी पूरा मुँह में लेने की कोशिश करता (हालांकि पिंकू का पूरा लण्ड मुँह में लेना असम्भव था।)


इधर पिंकू अपने हाथ कमर पर टिकाये, ईशान के सामने खड़ा लण्ड चुसवाने का आनन्द ले रहा था और ईशान को अपने सामने झुके हुए लण्ड चूसता हुआ देख रहा था।


“एक मिनट रुको !” पिंकू ईशान की मेज़ पर बैठ गया, “अब चूसो।”

ईशान कुर्सी सरका कर पिंकू की जांघों तक आ गया और फिर से चुसाई में लग गया। इतना मस्त, सुन्दर, लम्बा, मोटा और रसीला लण्ड लाखों में एक होता है, अपने मन में सोच रहा था और लपर-लपर उसका लण्ड चूस रहा था। उसका मन था कि वो पिंकू के लण्ड के हर एक कोने का स्वाद ले, पूरा का पूरा अपने मुँह में भर ले, लेकिन इतना बड़ा लण्ड किसी के भी मुँह में लेना असम्भव था।


पिंकू भी इसी चेष्टा में था कि ईशान के मुँह पूरा घुसेड़ दे, लेकिन उसका गला चोक हो रहा था। ईशान ऊपर से नीचे तक, अगल-बगल, हर जगह से, यथा सम्भव उसके लौड़े को चूस रहा था और चाट रहा था। जब पिंकू अपना लौड़ा लेकर ईशान के सामने आया था, लण्ड आधा खड़ा था। अब उसके मुँह की गर्मी पाकर पूरा का पूरा तनकर कर खड़ा हो गया था।


पिंकू का तो मन था कि अभी ईशान को पकड़ कर चोद दे। विशाल ने उसे ईशान की गाण्ड के बारे में बता रखा था। बहुत मुलायम, चिकनी गोल-गोल और कसी हुई थी साले की।


लेकिन पिंकू अभी थोड़ी देर लौड़ा चुसवाने का आनन्द लेना चाहता था। एक पल को पीछे झुक कर ईशान को अपना लण्ड चूसता हुआ देखने लगा। उसने ईशान के पतले-पतले नाज़ुक होंठों के बीच अपने सांवले साण्ड-मुसण्ड को देखा।


बहुत मज़ा आ रहा था उसे। उसने ईशान के हलक में लण्ड और अंदर घुसेड़ने की कोशिश की, लेकिन बेचारे का गला चोक होने लगा। उसका पूरा लण्ड ईशान के थूक से सराबोर हो गया था।

ईशान एक हाथ से उसका लण्ड थामे और दूसरा उसकी जाँघ पर टिकाए चूसे पड़ा था। उस साले को बहुत मज़ा आ रहा था। ईशान की नरम मुलायम गीली जीभ उसके लण्ड का दुलार कर रही थी। उसके मुँह की गर्मी पाकर पिंकू का लण्ड ऐश कर रहा था।


“इसे होंठों से दबा कर ऊपर-नीचे करो न !”


पिंकू अब ईशान आदेश देने लगा था और ईशान मानने भी लगा था। ट्रेवल एजेंसी के बाकी लोगों की तरह वो भी उसके लौड़े का गुलाम बन चुका था। पिंकू अपनी आँखें बंद किये, ईशान के बाल सहलाता, लण्ड चुसवाने का आनन्द ले रहा था और ईशान भी अपनी आँखें बंद किये, दोनों हाथों से पिंकू का हथौड़े जैसा लंड चूसने का आनन्द ले रहा था।


दोनों आँखें बंद किये आनन्द के सागर में डूबे जा रहे थे।

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