अपने लंड से डॉक्टर की गांड तृप्त की - Satisfied the doctor's ass with my cock

 अपने लंड से डॉक्टर की गांड तृप्त की

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


दोस्तों ये कहानी की शुरुआत ही आपको मस्ती से भर देगी…


“उई … बहुत मोटा है..!”

“क्या लग रही है? निकाल लूं?”

“नहीं डाले रहो … उसने सही कहा था.”

“किसने? क्या बात है?”

“तो शुरू करूं … परमीशन है?

“हां भाई साहब यह भी कोई पूछने की बात है. लंड डाले हुए दो-तीन मिनट हो गए … कब तक डाले रहोगे. वैसे भी सुना है कि आपको देर लगती है.”


उनकी गांड सुरसुराने लगी थी. उसमें हल्की हल्की हरकत होने लगी थी, जिसे महसूस करके मैं समझ गया था कि अब गांड में मजा आना शुरू हो गया है.


मैं हल्के हल्के धक्के देने लगा.


धच्च पच्च धच्च पच्च …


मैं बहुत धीरे धीरे कर रहा था. असल में मैं डॉक्टर साहब की पहली बार गांड मार रहा था, तो सावधानी जरूरी थी. मेरी भी फट रही थी कि गांड मरवाते में डॉक्टर साहब नाराज न हो जाएं.


चलिए मैं आपको पूरी बात बताता हूं. मेरी उम्र तब लगभग चौंतीस पैंतीस साल की रही होगी. मैं सरकारी नौकरी में था और थोड़ा अकड़ू मिजाज का था. आप इसे स्वाभिमानी मिजाज भी कह सकते हैं.

मैं किसी से रिक्वेस्ट या चमचागीरी नहीं कर पाता था. अतः दूर दूर फेंक दिया जाता था. वैसे तो मैं हर चार छह माह में घर आता रहता था, पर इस बार तीन चार साल बाद एक डेढ़ माह रूका था.


मेरा होम टाउन मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चम्बल संभाग में एक तहसील स्तर का कस्बा है. यहीं से मैंने मैट्रिक इन्टर बारहवीं तक पढ़ाई की और गांड मराई का भी खूब मजा लिया. कुछ दोस्तों के साथ अटा सटा भी रहा. हमने एक दूसरे की गांड मारी. मैं एक गोरा चिकना लौंडा था. माशूकी की उम्र थी, गांड मराई ज्यादा हो चुकी थी. मेरे से बड़ी क्लास के दादा टाईप के दबंग लौंडे मेरी गांड कसके मारते थे. साले मेरी गांड रगड़ कर रख देते थे.


फिर मेरे क्लास फैलो भी मुझ पर मरते थे. मुझे उनकी भी दोस्ती निभानी पड़ती थी. मोहल्ले के अंकल टाइप के लोग भी नहीं छोड़ते थे. वे सब मेरी गांड मार कर निहाल हो जाते थे.


अपनी क्लास के ऐसे ही हम पांच-सात माशूक लौंडे थे, जिनकी गांड अधिकतर रगड़ी जाती थी.


ऐसे ही डॉक्टर साहब के बड़े भाई भी मेरे क्लास फैलो थे, वे भी तब मेरे जैसे ही माशूक थे. गांड मराने की उन्हें भी मेरी तरह ही आदत पड़ गई थी. वे एक समृद्ध घर के चिरंजीव थे. उनके पास उनका स्टडी रूम अलग से था. उनके आग्रह पर मैं उनके साथ पढ़ता था, वहीं रात में रूक भी जाता था. उधर मुझे उनकी इच्छा पूरी करना पड़ती थी.


एक दिन उनके घर में कोई नहीं था. मैं स्टडी रूम मैं अपने प्यारे नमकीन दोस्त के उसी के आग्रह पर उनकी गांड मार रहा था कि उनके चाचा आ गए. वे यही कोई बीस साल के होंगे, उन्हीं के साथ ये डॉक्टर साहब भी थे. तब ये मुझसे लगभग कुछ साल छोटे रहे होंगे. चाचा बड़ी देर तक हमारी गांड मराई देखते रहे. हम लोगों का ध्यान उन पर नहीं था. जब मैं झड़ा और लंड बाहर निकाला, तो चाचा जी कमरे में आ गए.


हम दोनों को थप्पड़ पड़े, डांट फटकार भी हुई. चाचाजी बड़बड़ा रहे थे कि साले अभी धरती से निकले नहीं … जरा सा लंड है … पानी तक नहीं छूटता होगा, पर पेलने में लगे हैं.


हालांकि उन्होंने किसी और से कुछ नहीं कहा. कुछ पिट पिटा कर खेल खत्म हुआ.

अब हम दोनों घर में सावधानी रखते. बाहर स्कूल के पास, तालाब के किनारे झाड़ियों में निपट लेते या उजाड़ मकबरे में गांड की प्यास बुझा लेते. ये आदत भी साली कहीं छूटती है.


आगे की बात सुनिए. अब मैं कोई चौंतीस-पैंतीस का होऊंगा, मैं हट्टा-कट्टा फिट बॉडी वाला एक गठीला वयस्क मर्द हो गया था. लोगों की दृष्टि मैं हैंडसम स्मार्ट मर्द हूं. अधिकतर दोस्त क्लासफैलो व सीनियर अलग अलग जॉब में बाहर निकल गए हैं. कुछ बिजनेस में हैं. किसी से मिलना ही नहीं हो पाता था.


एक दिन बाजार में डॉक्टर साहब का बोर्ड देखा. मेरे पेट में कुछ गड़बड़ थी, तो मैंने सोचा कि चलो डॉक्टर साहब से सलाह ले लेता हूँ. वे एक सरकारी मेडिकल ऑफीसर थे. शाम को क्लीनिक पर बैठते ही मैं अन्दर पहुंचा, तो देखा काफी भीड़ भाड़ थी. आठ दस मरीज बैठे थे.


उन्होंने मुझे देखा तो झट से पहचान लिया. उस समय लगभग सात-साढ़े सात का समय रहा होगा. मैंने डॉक्टर साहब को नमस्ते किया.


डॉक्टर साहब बोले- बैठ जाइए, आपसे अभी बात करेंगे.


लगभग आठ साढ़े आठ बजे सारे मरीज निपट गए. वे रिलैक्स होकर बैठे, स्टाफ को छुट्टी दे दी.


डॉक्टर साहब अपने स्टाफ से बोले- तुम लोग जाओ, मैं क्लीनिक बंद कर लूंगा.

उनकी बात सुनकर सब लोग चले गए.

डॉक्टर साहब ने पूछा- भाई साहब आजकल कहां हैं? इधर कब आए?

डॉक्टर साहब ने मुझसे शिकायत की कि मिलते ही नहीं हो.


फिर मैंने उनसे अपने मित्र के बारे में पूछा, तो डॉक्टर साहब ने बताया कि वे आर्मी में हैं, उनको छुट्टी कम मिलती है.

अब मैंने डॉक्टर साहब को ध्यान से देखा. वे इस समय मुझे खुद से काफी छोटे लग रहे थे. गेहुंए रंगत की रंगत, साढ़े पांच पौने छः फीट की लम्बाई. स्लिम स्मार्ट, कसे हुए बदन के मालिक डॉक्टर साहब, क्लीन शेव, चिकने चुपड़े आकर्षक व्यक्तित्व के थे.


उन्होंने मुझे उसी दिन की घटना याद दिलाई, जब हम चाचा जी के सामने पकड़े गए थे.


डॉक्टर साहब पूछने लगे- क्या अब भी शौक रखते हैं?

मैं चुप रहा, फिर मुस्करा दिया.

तो बोले- आदत कहां छूटती है.

ये कह कर डॉक्टर साहब हो हो करके हंसने लगे.


मैंने उनकी हंसी को दरकिनार किया और अपना दर्द उनसे बताया. मैंने कहा- पेट में गड़बड़ी है, कुछ दवा लिख दीजिएगा.


डॉक्टर साहब- आप डॉक्टर के पास आए हैं … तो चलिए देख लेते हैं.


वे मुझे बगल के रूम में ले गए. मुझसे डॉक्टर साहब ने एक बेड पर लेटने को कहा.


मैं लेटने लगा, तो बोले कि पेंट शर्ट उतार लो.

मैं थोड़ा झिझका, तो बोले- उतार लेंगे, तो ठीक से चैकअप कर लूंगा.


मैंने पेंट शर्ट उतार दिए व लेट गया. उन्होंने मेरी बनियान भी ऊपर कर दी. वे मेरे पेट को देखते रहे, हाथ फेरते रहे.


फिर पेट के निचले हिस्से (पेड़ू) को सहलाने लगे. डॉक्टर साहब ने दो तीन बार अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को भी सहला दिया.


मैं पुराना लौंडेबाज था, उनकी इस हरकत से समझ गया. मैंने कहा- डॉक्टर साहब ठीक से पकड़ें.

उन्होंने झट से मेरी अंडरवियर में हाथ डाल दिया व लंड पकड़ कर बाहर निकाल लिया. वे मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर ऐसे देखने लगे, जैसे नाड़ी चैक कर रहे हों.


मैंने कहा- ऐसे कब तक औजार पकड़े रहेंगे … कुछ खेल लीजिए.

मेरी बात पर डॉक्टर साहब मुस्कराए, लेकिन अब भी वो कुछ कह नहीं रहे थे.


मैंने कहा- मुँह में दे लें … तो कुछ सही चैकअप हो सकेगा.

मेरी बात से सहमत होकर डॉक्टर साहब वास्तव में लंड चूसने लगे. मैं भी अब उनके चूतड़ पेंट के ऊपर से ही सहलाने लगा.


मैंने कहा- आप भी कपड़े उतार लें.

उन्होंने झट से अपना पैंट उतार दिया. मैंने उनके अंडरवियर का इलास्टिक खींचा. अब उसका क्या काम रह गया था.


मेरी निगाह और चाहत समझ कर डॉक्टर साहब ने अंडरवियर उतार दिया. अब वे नंगे खड़े थे. उनके भारी चूतड़ चमक रहे थे.


उनको नंगा देख कर मैं उठ कर खड़ा हो गया. उनका लंड एकदम तना हुआ था. मैंने उनके लंड पर हाथ फेरा, एक दो बार लंड की मुट्ठी सी मारी, तो उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया.

मैं समझ गया.


अब मैंने बेड का गद्दा खींच कर नीचे बिछाया. उस पर उन्हें लेटने का इशारा किया. वे तुरंत गांड मराने की पोजीशन में औंधे लेट गए. मैं उनके ऊपर घुटने मोड़ कर बैठ गया और थूक लगा कर लंड का सुपारा डॉक्टर साहब की गांड पर टिका दिया.

एक बार लंड के सुपारे को डॉक्टर साहब की गांड के छेद पर फेरा, तो उन्होंने अल्मारी की तरफ इशारा किया.


वहां उनकी अलमारी में ऑलिव ऑयल की शीशी रखी थी. मैं उठ कर तेल ले आया. शीशी का ढक्कन खोल कर मैंने तेल को अपने लंड पर चुपड़ा और तेल से भीगी उंगली उनकी गांड में डाल दी.


दो तीन बाद तेल से सनी उंगली डॉक्टर साहब की गांड में डाल कर घुमाई … अन्दर बाहर की, तो डॉक्टर साहब की गांड बिल्कुल ढीली हो गई.


वैसे भी उनकी गांड चुदाई को मचल रही थी. मैंने लंड का टोपा फिर से डॉक्टर साहब की गांड पर टिकाया और पेल दिया. अभी सुपारा ही अन्दर जा पाया था. उन्होंने थोड़ा “आ आ ई ई..” किया.


पहले तो डॉक्टर साहब गांड ढीली किए हुए थे, फिर दर्द के कारण थोड़ी टाईट कर ली.


फिर जब मैंने उनके चूतड़ सहलाए, मसले, उनका चुम्बन लिया और थोड़ी रिक्वेस्ट की कि गांड थोड़ी ढीली रखें.

डॉक्टर साहब मान गए.


मैंने धीरे धीरे पूरा लंड डॉक्टर साहब की गांड में अन्दर कर दिया.

अब डॉक्टर साहब ऊंह आंह करते हुए बोले- आपका बड़ा मोटा है … दर्द हो रहा है.

डॉक्टर साहब सही कह रहे थे. मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था.


फिर मैंने पूछा- डॉक्टर साहब, आपको किसने बताया था.

उनको मेरे लंड की चुदाई की पूरी जानकारी थी.

उन्होंने कहा- अभी तो करो … बाद में बात करेंगे.


मैं हैरान सा हो गया था. मैं आज उनकी पहली बार गांड मार रहा था, तो मुझे मजा आ रहा था.


मैंने पूरा लंड अन्दर कर दिया व डाल कर रूक गया. मैंने फिर पूछा- डॉक्टर साहब बताओ न?

तब उन्होंने राज़ खोला. अब आप डॉक्टर साहब से सुनिए.


मैं कस्बे के किराना स्टोर के सेठ से सामान लाया था, लगभग पन्द्रह दिन हुए थे, सामान ज्यादा था. सिन्धी सेठ भी मेरा क्लास फैलो था.


मैं सामान ले जाने लगा, तो वो बोला कि आप रहने दो, मैं घर पर भिजवा दूंगा.

अगले दिन शाम को उनका डिलेवरी ब्वाय सामान देने आया. वह उनका भतीजा था व उनका असिस्टेंट भी था. वह अट्ठारह बीस के लगभग का गोरा चिट्टा बहुत नमकीन सिन्धी मांडू था. मैंने उससे अन्दर के कमरे में सामान रखने को कहा. वह मेरे साथ आ गया. जब वह सामान रखते समय कमर तक झुका था, तो उसके सुडौल चूतड़ों पर मैंने हाथ फेर दिया. मेरी हरकत देख कर वह रूक गया. मैं उसके दोनों चूतड़ों के बीच उंगली फेरने लगा.


वह बोला कि सौ रूपए देना.


मैं उसका पेंट खोलने लगा. उसके गोरे गोरे चूतड़ चमक रहे थे.


वह वहीं जमीन पर लेट गया. बहुत दिनों बाद इतना नमकीन गोरा माशूक माल पटा था. मैंने सोचा भी न था कि लौंडा मान जाएगा, मगर वह अचानक तैयार हो गया. मैं भी झट से अपना पायजामा अंडरवियर उतार कर एकदम नंगा हो गया. फिर मैं उसके ऊपर घुटने मोड़ बैठ गया. लंड के सुपारे पर थूक लगाया और उसकी गांड पर टिका दिया. उसके बहुत गोरा होने के कारण गुलाबी गांड चूतड़ हाथ से हटाने पर अलग चमक रही थी.


मैं अपने को बहुत खुशकिस्मत मान रहा था. मैं लंड का सुपारा बड़े धीरे धीरे उसकी गांड में पेल रहा था, उससे कह रहा था कि जोर जोर से सांस लो.


तब उसने कहा था कि सर जी आपका बहुत मोटा है … लग रही है.

मैं नहीं रुका और धीरे धीरे डालता रहा.

वो सौ रूपए की लालसा में बस “ऊन्ह … आंह..” कर रहा था.


मैं उससे बार बार पूछता था कि लग तो नहीं रही, वो कुछ नहीं कहता था.


मैं अपना मोटा लंड उसकी गांड में डाले बड़ी देर तक रूका रहा. जब उसकी गांड कुछ ढीली हो गई, तब मैंने धक्के दिए. अभी भी मैं बहुत धीरे धीरे लंड आगे पीछे कर रहा था. मुझे गांड मारने में बहुत टाईम लगा.

वो मेरी गांड मारने की कला से बहुत प्रभावित हो गया था. गांड मराने के बाद वो हंस रहा था कि ऐसे कोई नहीं मारता.


मैंने पेंट का हुक लगा कर खुद को ठीक किया. मैंने उसे, उसके मांगे रूपए दे दिए. वह चला गया. उसके बाद भी वो एक दो बार मुझसे गांड मराने आया. वो मेरा आशिक हो गया था.


पहले तो वो रूपए देने पर गांड खोलता था, मगर बाद में वो मना करने लगा था.


मैंने उससे रूपए लेने का दबाव बनाया और उसे जबरन रूपए दिए. वही लौंडा लपका था. मैंने इसी कमरे में उसकी खूब बजाई थी, जिसमें आप अभी मेरी मार रहे हो.


डाक्टर साहब की बात से मुझे मालूम हुआ कि ये महाशय भी पुराने हरामी हैं.


मैंने फिर से पूछा कि ये तो आपकी गांड की खुजली की बात हुई, पर आपको मेरे बारे में किसने बताया था?


उन्होंने बताया कि जब मैंने उस लौंडे की गांड मारी थी, तब गांड मरवाते वक्त उस लौंडे ने मुझसे आपके लंड की तारीफ़ कर दी थी.


तो ये बात थी. डाक्टर साहब से उस माशूक सिन्धी लौंडे ने मेरे लंड की तारीफ़ की थी.


मैं अपने को बड़ा किस्मत वाला मान रहा था कि उसकी वजह से डॉक्टर साहब की मुझसे मरवाने की इच्छा हुई.


डाक्टर साहब मस्ती से टांगें चौड़ी किए लेटे थे. वे पुराने पापी थे. उनकी ढीली हो चुकी गांड, लंड के धक्के मजे से ले रही थी. गांड मराने के साथ चूतड़ चलाने से बार बार गांड ढीली कसती करना भी बड़ा मजा दे रही थी.

सच में डॉक्टर साहब बहुत मजा दे रहे थे. वे गांड मराने के एक्सपर्ट थे, परफैक्ट थे. वे हट्टे कट्टे मस्त मर्द थे, उनकी गांड मारने में मुझे बहुत आनन्द आया. हम दोनों बड़ी देर तक लगे रहे. डॉक्टर साहब की गांड मारने में मैं ऐसा मस्त हुआ कि मैं उनकी चूमा चाटी भूल गया. वे भी अपनी गांड से धीरे धीरे हरकत कर रहे थे. शायद उन्हें बहुत दिनों से कोई गांड मारने वाला नहीं मिला था. उनकी गांड बहुत दिनों से प्यासी थी.


झड़ने के बाद हम दोनों अलग हुए, तो वे थोड़ा आराम करने के बाद मेरे को चूमने पर उतर आए … बार बार मेरे गले लगने लगे. उनके क्लीनिक के ऊपर एक आराम करने का कमरा लेट कम बाथरूम व छोटा सा किचन भी था.


डॉक्टर साहब ने गांड मराने के बाद बाथरूम में जाकर नहाया. उन्होंने मुझसे भी कपड़े उतार कर अन्दर आने के लिए कहा. मैं फिर से नंगा हो गया और बाथरूम में चला गया. हम दोनों ने साथ साथ में नहाया. वे एक स्वस्थ शरीर के मालिक थे.


डॉक्टर साहब बोले- आज आपने मेरी गांड तबियत से मार कर मस्त कर दी. क्या चुदाई की … यार गांड रगड़ कर लाल कर दी … क्या हथियार है … लम्बा मोटा मेरी गांड तो तृप्त हो गई … मजा आ गया … तबियत हरी हो गई.


वे बार बार मेरे लंड की और मेरी गांड मारने की तारीफ कर रहे थे.


मैंने उनसे कहा- डॅाक्टर साहब, आपका हथियार भी तो मस्त है.

वे बोले- भाई साहब … मेरा कितना भी बड़ा हो, पर अपना लंड खुद अपनी गांड में तो नहीं डाल सकता न!


इस पर हम दोनों हंसने लगे.

मैंने कहा- तो आपका लंड आपको ज्यादा परेशान कर रहा हो, तो मेरी में डाल दो.

इस पर वे हंसने लगे. फिर मेरे हाथ जोड़ने लगे.

डॉक्टर साहब बोले- घर जाकर बीबी की चुदाई करूंगा … वह भी गायनिक की डॉक्टर है … अभी प्रेग्नेंन्ट है, आज मैं उसकी भी आपकी तरह ही धीरे धीरे चुदाई करूंगा.

मैंने आंख मार दी.


फिर बोले- फिर भी मुझे लगता है कि मैं भाई साहब की तरह नहीं करवा पाया. उस दिन वे क्या गांड हिला हिला कर आपका लंड ले रहे थे. आप भी क्या जोरदारी से पूरा अन्दर तक पेल रहे थे.

मैं- डॉक्टर साहब … आप उस दिन की बात कर रहे हो, जब चाचा ने हम दोनों की ठुकाई लगाई थी?


वे बोले- नहीं, उस दिन तो मैं चाचा जी की वजह से बिना कुछ ज्यादा देखे भाग गया था. एक दिन और जब आप छत पर उनकी चुदाई कर रहे थे, तब भी भाईसाब गांड हिला हिला कर आपके लंड का मजा ले रहे थे. वे अपनी कोहनियां छत की बाउन्ड्री पर टिकाए थे और आधे झुके थे. आप उनके पीछे चिपके थे.


मैं- तो आप चुपके से मेरी जासूसी करते थे. तब तो आप काफी छोटी उम्र के रहे होंगे, नमकीन चीज थे. ऐसा नहीं था कि भाई साहब केवल मेरे लंड से ही गांड मरवाते थे, वे मेरी गांड भी मारते थे. हम दोनों में परस्पर अट्टा सट्टा था.

डॉक्टर साहब- मैंने तो उन्हें आपसे केवल मरवाते देखा था. उतने जैसे तो मैं भी अपनी गांड हिला हिला कर नहीं करवा पाया. शायद आपको उतना मजा नहीं आया होगा, जैसा आपको भाई साहब देते थे.

मैं- नहीं डॉक्टर साहब बहुत मजा आया. पांच छह साल बाद यह काम किया … आपने पूरा मजा दिया … थैंक्स.


नहाने के बाद डॉक्टर साहब जल्दी ही कॉफ़ी बना लाए. मैं जाने की जल्दी में था, पर रूक गया.


हम दोनों बात करने लगे. उन्होंने मेरे और किस्से जानने की इच्छा जताई.


मैंने उन्हें बताया- यहां एक स्पोर्ट टीचर थे जोसफ सर … वे केरल के थे इसलिए कुछ काले रंग के थे. वे हम सबको स्पोर्ट सिखाते थे. एक्स्ट्रा क्लास में इंगलिश भी पढ़ाते थे. वे पूरे लौंडेबाज थे. उनकी हाईट लगभग छः फीट की रही होगी. और आप सुनकर ताज्जुब करोगे कि उनका लंड पूरे दस इंच का था … बड़ा मस्त लंड था. उनसे हम सबको गांड में उनका मूसल पिलवाना पड़ता था. पर रोज रोज मैं नहीं … कभी भाई साहब करवाते थे. कभी कभी और लौंडे भी उनके लंड का शिकार बनते थे, इसलिए हरेक का नम्बर पांच सात दिन में आता था. पहले पहल तो गांड दो तीन दिन दर्द करती थी. उनका बहुत बड़ा व मोटा था, फिर आदत पड़ गई. वे भाई साहब के ज्यादा आशिक थे. उनके बाद वो मुझे पसंद करते थे. वे और लौडों की भी गांड मारते थे. उनसे बचना सभी लड़कों के मुश्किल था. उनमें बहुत दम थी, हम सभी की गांड बुरी तरह रगड़ देते थे. बहुत ताकतवर थे … पूरा लौड़ा जड़ तक पेल देते थे. उनका लंड लेते ही हम तड़प कर रह जाते थे.

हम लोग तब दसवीं में पढ़ने वाले दुबले पतले स्टूडेंट थे. वे तीस बत्तीस के मस्त कसरती एक्स आर्मी पर्सन थे. बड़े मोटे मस्त लंड के मालिक एक्सपर्ट लौडेबाज जवान मर्द थे. उनका एक लौंडा था सुभाष … एक दिन हम सर के कमरे में सो रहे थे. उनका लौंडा गहरी नींद में था. वो तब कम उम्र का था … मगर बड़ा चिकना था. लेकिन भयंकर काला था. वो मेरी तरफ गांड किए लेटा था. मैंने रात में उसकी गांड में पेल दिया. लंड अन्दर जाते ही साला फड़फड़ाने लगा. मैंने चिपक कर उसकी गांड मारी. उसे तब तक नहीं छोड़ा, जब तक पानी नहीं निकल गया. वह बहुत बहका कि शिकायत करूंगा. तुम्हारे भाई साहब ने ही उसको मक्खन लगाया … ठंडा किया कि इससे गलती हो गई … आगे से नहीं करेगा. आपके भाईसाहब वे मेरे संकट मोचक रहे.


डॉक्टर साहब बोले- हां मैं उस लड़के सुभाष को जानता हूं. वो मेरा ही क्लास फैलो था … साला बड़ा घुन्ना था. खास खूबसूरत भी नहीं था. खैर पसंद आपकी.

मैं- अरे नहीं, वे सर हम लौंडों की बार बार मारते थे … कई बार रगड़ी थी, तो अन्दर गुस्सा था. अब बदले में मैं सर की तो नहीं मार सकता था, इसलिए उनके लौडे की गांड में पेल दिया था. बाद में आपके भाई साहब ने भी कहा था कि ठीक किया, साले को रगड़ दिया.


कॉफ़ी पी कर हम दोनों बाहर निकले. वे अपने घर चले गए, मैं अपने निवास चला आया.


उस एक डेढ़ महीने के अंतर में उनसे दो तीन बार और मिला और उनकी गांड को एन्जॉय किया.


फिर छुट्टी खत्म हो गई … तो मैं वापस अपनी जॉब पर चला गया.

मक्खन सी मुलायम गांड चोदने का सुख - The pleasure of fucking a buttery soft ass

 मक्खन सी मुलायम गांड चोदने का सुख - The pleasure of fucking a buttery soft ass

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


नमस्ते फ्रेंड्स, मैं मोंटू हूँ लेकिन फेसबुक में मेरी ईद आशीष के नाम से है तो लोग मुझे आशीष नाम से पहचानते हैं. अभी में 19 वर्ष का हूँ. यह मेरी पहली गांड की चुदाई सेक्स स्टोरी है, जो मैं आज आप सभी के साथ साझा कर रहा हूँ.


ये बात उन दिनों की है, जब मैं 19 साल का था और 12 वीं पास करके इंदौर आया था. मैं यहां अपने मामा के घर पर रहता था. बारहवीं पास करने के बाद मैं एम पी पी ई टी की तैयारी कर रहा था.

मामा जी के बच्चे छोटे थे, तो वे मुझे परेशान करते थे. जब इसकी चर्चा मैंने सुबह सुबह टहलने के दौरान एक दो लोगों से की, तो मुझे बताया गया कि इस पार्क में और भी लड़के पढ़ने जाते हैं, तुम भी इधर ही चले जाया करो. मैं नेहरू पार्क में पढ़ने जाने लगा.


ये जगह इंदौर में गे लोगों के मिलने की जगह है. वहां अधिकतर गे लोग आते थे, मुझे यह सब नहीं पता था और मैंने कभी पहले गे सेक्स या गांड की चुदाई किया भी नहीं था. या यूं कहूँ कि मुझे आज से ये कभी पता ही नहीं था कि लड़के लड़के का सेक्स भी होता है.


खैर इधर ही मुझे पहली बार सेक्स का अनुभव हुआ. पार्क में मैं रोजाना बारह से चार बजे तक पढ़ता था. पार्क में एक लाइब्रेरी भी थी, जहां लोग अखबार या अन्य मैगजीन आदि पढ़ कर मूड फ्रेश करने के लिए जाते थे.


एक दिन मैं लाईब्रेरी में न्यूज़पेपर पढ़ रहा था, तभी वहां एक लड़का आया. उसकी उम्र शायद 20 साल होगी. वो मेरे पास आकर बैठ गया और एक किताब लेकर पढ़ने लगा. मैं भी न्यूज़पेपर पढ़ कर रहा था. मैंने देखा कि उसका ध्यान किताब पर कम था, मुझ पर अधिक था. उसका यूं ताकना मुझे कुछ अजीब सा लगा.


मैंने उससे पूछा- क्या हुआ … ऐसे क्यों देख रहे हो?

उसने मुझसे कहा- यार ऐसा लगता है जैसे आपको कहीं देखा है.

मैंने कहा- हो सकता है, पार्क में ही देखा होगा … क्योंकि मैं यहां रोज़ आता हूं.

इतनी बात करने के बाद मैंने वापस अपना ध्यान पेपर को पढ़ने में लगा दिया. मुझे पता ही नहीं लगा कि कब वो मेरे करीब आकर बैठ गया. जब मेरा उस पर ध्यान गया, तो वो मेरे पास ही बैठा था और मुझे ही देख रहा था. इस बार उसके चेहरे पर एक अर्थपूर्ण मुस्कान थी. मुझे कुछ अजीब लगा, इसलिए मैं उधर से उठ कर अपने ग्रुप के दोस्तों के साथ पढ़ने चला गया.


करीब 6-7 दिनों बाद रोज की तरह में पार्क में अपनी बेंच पर बैठ कर पढ़ रहा था. तभी मैंने देखा कि वो लाइब्रेरी वाला लड़का पार्क में घूम रहा है.


इस बार उसकी नज़र किसकी तलाश कर रही है, ये जानने की मुझे उत्सुकता हुई … तो मैं उसे देखने लगा.


अचानक तभी मेरा एक साथी आ गया … और उसने मुझसे मेरा पेन मांगा. मैंने उसे पेन दे दिया और मेरा दोस्त चला गया. इसी दौरान मेरा ध्यान उस लड़के से हट गया था. दोस्त के जाने के बाद मैंने उस लड़के को देखा, तो वो नहीं दिखा. मैं एकाध मिनट तक उसे देखता रहा पर जब वो नहीं दिखा, तो मैं अपनी स्टडी करने लगा.


करीब दस मिनट बाद मैंने देखा, वो लड़का मेरे पास वाली बेंच पर आके बैठ गया. मैंने उसे देखा, तो वो मुझे देख कर मुस्कुराया. उसकी मुस्कुराहट देख कर मैं समझ गया कि वो मुझे ही ढूंढ रहा था.


इस बार वो अपने साथ कुछ किताबें लाया था. वो मेरे पास आकर कहने लगा- क्या मैं आपके साथ बैठ कर पढ़ाई कर सकता हूँ.

चूंकि पार्क में बहुत सारे लड़के पढ़ने आते थे, तो सबके साथ मिलकर ही रहना पड़ता था. चूंकि मैं एम पी पी ई टी की कोचिंग नहीं जाता था, तो मैं अपने डाउट्स उन लोगों से क्लियर करता रहता था. इसलिए मैंने उसको अपने पास बैठने को कह दिया.


जब हम साथ बैठे थे, तो हम दोनों के बीच परिचय हुआ. मुझे पता चला कि उसका नाम चयन शर्मा है. चयन दिखने में मेरे जैसा ही था, पर थोड़ा कद में बढ़ा था. उसकी साढ़े पांच फिट की ऊंचाई थी, रंग गोरा था. उसके चेहरे पर दाड़ी मूंछों के अभी सिर्फ बाल के रोएं आने लगे थे.

उसके साथ बैठ कर मैं पढ़ाई करने लगा. हम उस दिन करीब 4 बजे चाय पीने गए और फिर शाम को अपने अपने घर चले गए. उसके बाद वो हर दिन आता और 12 से 4 बजे तक हम दोनों साथ में बैठ कर पढ़ लेते थे. बाकी दोस्तों से भी उसकी पहचान हो गयी थी.


अब हम अच्छे दोस्त हो गए थे, पर मैंने कभी सोचा नहीं था कि कभी उसके साथ मेरा सेक्स होगा और वो मुझे अपनी गोरी चिकनी गांड मारने देगा. चूंकि मैं गे सेक्स के बारे में नहीं जानता था.


एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुलाया. उस दिन उसकी फैमिली के सभी लोग एक शादी में भोपाल गए थे. वो अपने घर में अकेला था और घर से बाहर ज्यादा देर नहीं रह सकता था. इसलिए उसने मुझे मुलाकात के बहाने और घर पर ही पढ़ाई करने के लिए आने के लिए कहा. मैं उसके घर चला गया.


करीब 12 बजे मैं उसके यहां गया था. फिर हम दोनों ने गणित के कुछ सवाल हल किए. वो सिविल सेवा की तैयारी कर रहा था. उसने अपनी बारहवीं पीसीएम से ही की थी, तो वो मेरी मदद कर देता था. जब मैं उसके घर में पढ़ाई कर रहा था, तो उसने पढ़ाई करते समय मुझसे बोला.


उसने कहा- मोंटू … यार मैं एक बात कहना चाहता हूँ. मैं ये बात बहुत दिनों से कहना चाहता था, लेकिन कह नहीं पाया. आज मुझसे रहा नहीं जा रहा है … तो कह देना ही चाहता हूँ.

मैंने कहा- यार तू तो मेरा दोस्त है. अब अच्छे दोस्त कभी कुछ कहने से नहीं झिझकते. तू बिंदास होकर बोल न.

उसने कहा- यार मोंटू, तू मुझे बहुत अच्छा लगता है.

मैंने कहा- थैंक्स यार.

फिर उसने कहा- यार मोंटू, क्या मैं तुझे किस कर सकता हूँ.

मैंने कहा- हां भाई कर लो.

उसने मुझे गालों पर किस किया. उसके बाद में पढ़ाई करने में लग गया.


थोड़ी देर बाद उसने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा.

मैंने कहा- हां मेरी जीएफ है, वो मेरे मोहल्ले में ही रहती है, मुझे उसकी याद भी आती है. मैं इंदौर में नया हूँ. कॉलोनी में भी कोई अच्छी लड़की नहीं है, होती तो कभी की सैट कर लेता.

उसने कहा- हां मोंटू, तू तो इतना स्मार्ट है ही कि इधर कोई भी बंदी सैट हो जाएगी.

उसकी बात पर मुझे हंसी आ गई और हम दोनों ही हंस दिए.


उसके बाद चयन ने मुझसे फिर पूछा- मोंटू तू इंदौर में रहता है और तुझे अपनी जीएफ की याद भी आ रही है, उससे मिलने तो जाता ही नहीं है.

मैंने कहा- यार अभी थोड़ा टाइम का तोड़ा है … और वैसे भी अब उसकी शादी होने वाली है. अभी कुछ दिनों में मेरी फैमिली बाहर जाने वाली है, तब मैं अपने घर चला जाऊंगा और फिर उससे मिल कर आऊंगा.

चयन बोला- उससे सिर्फ मिल कर ही आएगा या कुछ और भी कर आएगा.

मैंने कहा- वो तो वहीं जाकर पता चलेगा. मेरा मूड तो और कुछ करने का ही है.


जैसे ही मैंने मूड शब्द का प्रयोग किया, चयन ने मेरे लंड पर हाथ रखते हुए कहा- अच्छा तेरा ऐसा कितना बड़ा है मोंटू … देखूँ तो ज़रा.


उसने ये कहते हुए ही मेरे लंड को जोर से दबा दिया. उसने मेरा लंड दबाया, तो मैंने मजाकिया स्टाइल में कहा- क्या कर रहा है कमीने … अभी लंड खड़ा हो जाएगा, तो कौन संभालेगा.

चयन भी उसी रौ में बोला- मैं हूँ ना.

मैं हँस दिया और चयन भी हंसने लगा.


मैंने कहा- कैसी पागलों जैसी बात कर रहा है … तू तो लड़का है. तेरे पास चुत कहां से आएगी.

गांड की चुदाई का ज्ञान

चयन अब थोड़ा खुलने लगा था और उसने मुझे सेक्स के लिए उकसाना चालू कर दिया. चयन बोला- लड़की की चूत से ज्यादा लड़के की गांड में मज़ा आता है मोंटू … कभी लड़के को चोद कर देखना.


मैं उसकी बात सुनकर एकदम से चौंक गया कि ये कैसी बात कर रहा है. लड़के को चोदने में क्या मजा आता होगा. मैं बोला- चल टॉपिक चेंज कर … फ़ालतू में मूड ऑन हो जाएगा.

इतना कहकर मैं चुप हो गया.


चयन बोला- ऐसा नहीं है … शायद तुम्हें पता नहीं है, लेकिन लड़के की गांड ज्यादा मज़ा देती है. चलो मैं तुम्हें बताता हूं.


उसने अपने कंप्यूटर पर पोर्न की एक साईट खोली और मुझे गे सेक्स का एक वीडियो दिखाया.


मैं गे सेक्स का वीडियो देख कर हैरान था. मेरा लंड अब तक खड़ा हो चुका था. चयन की नज़र भी मेरे लंड पर ही टिकी थी. मैं भी थोड़ा थोड़ा समझ रहा था कि चयन ने मुझे आज घर क्यों बुलाया है.


मैंने चयन को दिखाते हुए अपने लंड पर हाथ रखा और धीरे धीरे अपना लंड सहलाने लगा.

चयन ने कहा- क्या हुआ मोंटू?

मैंने कहा- यार, अब तो मेरा लंड खड़ा हो गया … लगता है अब मुठ मारने बाथरूम में जाना पड़ेगा.

तभी चयन ने कहा- अच्छा जरा दिखाना मुझे.

ये कहते हुए उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और बोला- हां यार यह तो खड़ा हो गया.

मैंने कहा- हां यार …

फिर चयन ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर मेरे लंड को बाहर निकाल लिया. मेरे लंड को देख कर वो बोला- यार मोंटू तेरा लंड तो बहुत बड़ा है … यकीन नहीं होता तू अभी इतना छोटा है और तेरा लंड 7 इंच का हो गया. मोंटू तेरे जितना बड़ा लंड गांड में हो, तो मज़ा आ जाएगा.

मैंने कहा- मज़ा कैसे आ जाएगा?

चयन बोला- इसे चूसने में.


ये कहते हुए जैसे जैसे चयन मेरे लंड को पकड़ कर दबा रहा था, मेरे लंड की भूख उतनी ही बढ़ रही थी.


मैंने चयन से कहा- यार एक कोई मिल जाए … जो लंड चूस ले, तो मज़ा आ जाएगा.


मैंने बस इतना बोला ही था कि चयन ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया. उसने जैसे ही मेरे लंड को मुँह में लिया … मेरे मुँह से ‘आहह..’ निकल गयी. मैंने आज के पहले कभी किसी से अपना लंड नहीं चुसवाया था.


धीरे धीरे चयन मेरे लंड के साथ खेल रहा था और मेरा लंड अपने पूरे जोश में चयन को मज़े दे रहा था. चयन की आंखें बता रही थीं कि जैसे उसका कोई ख़्वाब पूरा हो रहा हो.

मैंने लंड चुसवाते हुए चयन से बोला कि अहह … चयन … आज तो तूने मुझे खुश कर दिया.

चयन बोला- नहीं यार … मैं तो तुझे थैंक्स बोलना चाहता हूँ. तेरे मोटे लंड से आज मैं तृप्त हो रहा हूँ.


मैं उसकी तरफ मस्त निगाहों से देखे जा रहा था.


चयन- मोंटू सुन … यह तो अभी स्टार्ट हुआ है … आगे आगे देखना क्या क्या होता है.


यह बोल कर चयन ने मेरे पेंट के बटन को खोल दिया. उसने मेरे पेंट को उतार दिया और फिर अपनी जुबान से धीरे धीरे मेरे लंड को चाटने लगा.

लंड चूसते हुए ही उसने मेरे आंडों को भी सहलाना शुरू कर दिया और एक मेरी गोटी को उसने अपने मुँह में ले लिया. वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर अपने मुलायम होंठों से गोटी को चूसने लगा. यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था. मैं चयन के साथ पूरा मज़ा ले रहा था.


अब चयन ने मेरी कमीज़ को उतारा और अपने भी सारे कपड़े उतार दिए. वो मेरे साथ चिपक गया और मेरी छाती के निप्पलों को चूसने लगा. मुझे उसके साथ ठीक वैसे ही बेहद मज़ा आ रहा था जैसे आपको यह सेक्स कहानी पढ़कर मजा आ रहा है.


चयन के बहुत ज़िद करने पर मैंने जोर जोर से दबा कर चयन के निप्पलों को भी चूसना स्टार्ट कर दिया. उसके निप्पल चूसना मुझे लड़की के मम्मों से ज्यादा मज़ा दे रहा था. चयन का गोरा बदन किसी अप्सरा से कम नहीं था. उसके साथ यह सब करना मुझे एक अलग ही मजा दे रहा था.


अब धीरे धीरे मेरा लंड किसी को पेलने को उतावला हो रहा था, लेकिन चयन पहले अपने मुँह को मेरे लंड से सन्तुष्ट करना चाहता था. चयन को मेरा मोटा लंड गुलाबी चौंच वाला इतना पसंद आ रहा था कि वो जैसे किसी लॉलीपॉप चूस रहा हो. लेकिन मैं अब तड़प रहा था, और सिर्फ गांड मारने को सामने उपलब्ध थी.


इसलिए मैंने चयन से कहा- चयन अब मैं तेरी गांड की चुदाई करूँगा.

चयन ने कहा- ठीक है मार ले.


वो रसोई घर से ऑइल लेकर आया और मेरे लंड पर तेल लगाने लगा. उसके बाद चयन ने थोड़ा तेल अपनी खुद की गांड में भी लगा लिया.


फिर वो मुझसे बोला- चल अब मुझे रंडी समझ कर चोद दे … आज तू मेरी गांड फाड़ दे.

मैंने भी देर नहीं की और लंड को चयन की गांड में डाल दिया. चयन ने भी मेरे लंड को तकलीफ न हो, इसलिए वो भी दोनों पैर ऊपर करके मेरा पूरा साथ देने लगा. धीरे धीरे मेरा लंड चयन की गांड में पूरा चला गया.

चयन ने मेरा लंड अपनी गांड में लेने के बाद कहा- मोंटू आज तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया.

मैंने भी चयन से यही कहा- काश तू पहले मिल जाता, तो मेरे दो महीने में तीन बार का मुठ यूं ही बाहर नहीं निकलता. चल अब चिंता मत कर … आज हम दोनों को मज़ा आएगा.


इतना कह कर मैंने चयन की कमर को पकड़ा और उसके गांड में लंड से जोर जोर के झटके देने लगा. मैं पूरी मस्ती से उसकी गांड की चुदाई करने लगा.


कभी चयन ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करता, तो कभी मैं ‘चयन अहह अहह..’ कर रहा था.


फिर करीब 20 मिनट के बाद मैंने चयन की गांड में अपना सारा पानी निकाल दिया. चयन की पूरी गांड लबालब भर गई थी. मेरा वीर्य बाहर बहने लगा था. चयन ने जल्दी से बाथरूम में जाकर सब साफ किया.


मैं उसकी गांड में अपना लंड रस निकालने के बाद बिस्तर पर निढाल पड़ा था. चयन ने बाथरूम से आकर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया. वो पहले के जैसे लंड चाटने लगा और उसने मेरे लंड को चूस कर साफ कर दिया.


कुछ देर बाद मैं हाथ मुँह धोकर घर चला गया. उस दिन के बाद बहुत बार मैंने चयन की गांड की चुदाई की. चयन ने जो मज़ा दिया था, वास्तव में वो एक लड़की नहीं दे सकती थी. मैं हमेशा चयन को याद करता हूँ. अभी भी साल में 2 बार उससे मिलता हूँ और उसकी गांड की चुदाई करता हूँ.

इस तरह से चयन ने मुझे अपनी गोरी गांड से खुश किया था. मेरी गांड की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, मुझे जरूर बताना ताकि मैं आपको अपनी दूसरी सेक्स कहानी बता सकूँ.

पुराने ट्रैन कोच में मस्ती से गांड मराई - Ass fucked with fun in old train coach

 पुराने ट्रैन कोच में मस्ती से गांड मराई

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


मैं आपका दोस्त रघु हूँ. वैसे मुझे आप प्यार से रोबीला रघु भी कह सकते हैं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि आप लोग मुझे इतना प्यार देंगे। आपका प्यार पाकर दिल बाग बाग हो उठा। कुछ ने तो मुझे अपने रात का हमसफ़र बनाना चाहा, उसके लिए उनका बहुत शुक्रिया।

तो मित्रो, आज हम बढ़ते हैं अगले वाकये की तरफ।


आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी मेरी गांड पहली बार कैसे चुदी जिसमें मेरे समलैंगिक जीवन की शुरुआत हुई. वह पहली बार था तो मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा. पर धीरे धीरे मैं इसी समलैंगिक जीवन में रमता चला गया। अब तो यह मुझे इतना अच्छा लगता है कि मन में ख्याल आता है काश मेरी शादी किसी ऐसी लड़की से हो जिसके पास एक बड़ा और कलेजा हलक तक ला देने वाला लन्ड हो। वैसे यह मेरी जीवन की सबसे बड़ी ख्वाहिश है कि मैं कभी अपने जीवन में किसी लण्डधारी लड़की से मिल सकूँ. क्या पता मेरी यह ख्वाहिश अन्तर्वासना के माध्यम से ही पूरी हो।

तो पिछली कहानी में उस अधेड़ उम्र के आदमी ने जब मेरी गांड मार कर छोड़ दिया तब से मैं वो वाकया भुला ही नहीं पा रहा था।


इसी तरह वर्षों बीत गए पर जब भी वो बात जेहन में आती तो दिल में सनसनी दौड़ जाती। अंत में मैंने बी ए प्रथम वर्ष की परीक्षा देने के बाद फैसला लिया कि मैं एक फेक फेसबुक आईडी बनाऊंगा और लोगों से मिलूंगा।

मैंने एक फेसबुक आईडी बना कर उसमें बहुत सारे फ्रेंड्स ऐड किये, तब मुझे पता चला कि भारत के 75% पुरुष गांड के प्यासे होते हैं चाहे वो गांड लड़की की हो या लड़के की।


उन्ही दिनों मुझे एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी सुल्तानपुर के एक लड़के की। चूँकि मैं भी सुल्तानपुर का ही हूँ तो मन में थोड़ा चिंतन किया कि रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करना उचित है या नहीं।

कहीं यह पहचान का न निकल जाए?


फिर काफी सोच विचार के बाद हवस मुझ पर हावी हुई और मैंने सोचा कि चलो पास का है, तो जब मन होगा तो मिलेगा तो!

मगर मुझे कहाँ पता था कि यह एक फ्रेंड रिक्वेस्ट मेरे जीवन को बदल कर रख देगा।


उसका नाम विजय गौतम(बदला हुआ) था। शुरुआत में वह सिर्फ हाय हेलो ही करता था. फिर एक दिन उसने मुझे अपनी फोटो दी. वो साँवले रंग का बहुत ही गठीले बदन का लगभग 26 वर्षीय युवक था. मन में प्रसन्नता हुई कि चलो इसे जानता तो नहीं हूँ।

बदले में उसने मुझसे मेरी तस्वीर मांगी। मैंने तस्वीर देने के बजाय उससे मिलने का फैसला किया तो वो तैयार हो गया। हमने दोपहर में मिलने का फैसला किया परन्तु किसी कारणवश उसे आने में शाम हो गयी तो हमने किसी रेस्तरां की बजाय पास के ही एक पुराने स्कूल में मिलने का फैसला किया।


शाम के 8 बज रहे थे वो पहले ही स्कूल में जाकर मेरा इन्तजार कर रहा था। मैं स्कूल में पहुंचा और हल्की रोशनी में उसे देखा, जीन्स और लेदर की जैकेट पहन कर सिगरेट के छल्ले उड़ा रहा था। वो देखने में बहुत खूबसूरत नहीं था पर उसके चेहरे पर चमक थी।


मैंने उसे हाय बोला, जवाब में उसने हाथ हिलाया। शायद वो स्कूल में होने की वजह से थोड़ा डरा हुआ था।


मैं पहली बार किसी से मिलने गया था तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!

तो उसने पहल की, उसने अपनी जेब से चॉकलेट निकाला और मुझे आफर की. मैंने हाथ बढ़ाया पर उसने चॉकलेट वापस ले ली.


उसने कहा- ऐसे नहीं खाते इसे!

चॉकलेट का रैपर निकाल दिया उसने और आधी चॉकलेट अपने मुंह में दबा ली और मुझे खाने का इशारा किया।

मैं धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ा और आधी निकली हुई चॉकलेट अपने होंठों में दबा ली। उसकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर आ रही थी जो एक अजब सी उत्तेजना पैदा कर रही थी। शायद उसने पहले से ही सौंफ या इलायची खा रखी थी।


मैंने चॉकलेट खानी शुरू कर दी. जल्द ही हम दोनों के होंठ एक दूसरे के मुंह के अंदर की गहराई का जायजा ले रहे थे। वो बीच बीच में अपने दांतों से मेरे होंठो पर हल्के से काट लेता. मुझे दर्द तो होता पर उससे ज्यादा उत्तेजना होती। जी करता कि मैं उसके होंठों को चबा लूं।


वो बिल्कुल मंझा हुआ खिलाड़ी लग रहा था, वो मुझे सांस लेने का भी मौका नहीं दे रहा था।


हमने लगभग 10 मिनट तक सिर्फ चुम्बन किया। बीच बीच में वो हौले से अपने दोनों हाथों से मेरी गोल नर्म गांड दबा देता जिससे मैं और ऊपर उठ जाता। वो अपना एक हाथ शर्ट के अंदर मेरे स्तनों पर ले गया. पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मैंने सुना था कि चुचियाँ दबवाने से मम्में लड़कियों की तरह हो जाते हैं. इसी डर से मैंने उसे मना कर दिया, वो मान गया।


उसने पुनः अपनी जेब से एक चॉकलेट निकाला और मुस्करा दिया. मैं समझ गया कि इसके दिमाग में कुछ तो खुराफात चल रही है। वो पास ही रखी मेज पर अपनी गांड टिका कर बैठ गया और बहुत ही धीमी आवाज में मुझसे अपनी चैन खोलने को कहा।


मैंने उसकी बात मानते हुए उसके कैद में बंद सांप को आजाद कर दिया। उसका लन्ड लगभग 6 इंच का रहा होगा. काला इतना कि कौवा भी शर्मा जाए।

उसने अपने लन्ड के सुपारे को पीछे की तरफ धकेलते हुए उस पर चॉकलेट रगड़नी शुरू कर दी और मुझसे बोला- ऐसी चॉकलेट तुमने अपने जीवन में नहीं चखी होगी!


और ये बिल्कुल सच था क्योंकि इससे पहले एक बार मैं चुद तो चुका था पर कभी लन्ड नहीं चखा था, सिर्फ पोर्न मूवीज में देखा था।

मैं बहुत उत्साहित था उसका काला लन्ड चखने को।


उसने मेरा सर पकड़ कर अपने टोपे पर लगा दिया। पहली बार मुझे लन्ड की बदबू महसूस हुई पर जब एक बार जीभ लगा दी तो वही बदबू महक बन कर मेरे नथुनों में जा रही थी। मुझे बहुत पता तो नहीं था लन्ड चूसने के बारे में फिर भी जितना देखा था पोर्न में … सब उसके लन्ड पर आजमा लिया। मैं उसके सुपारे पर थूक थूक कर चाटता।


मैंने नशे में अचानक से उसके अण्डों को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. उसे तो जैसे जन्नत मिल गयी, वो आंखें बंद करके उसी बेंच पर लेट गया। मैं उसका लन्ड लगभग 20 मिनट तक चूसता रहा।

मेरे गाल दुखने लगे।


उसने मुझे उठा कर घुटनों के बल बैठा दिया और अपना थोड़ा सा लन्ड मेरे मुंह में देकर तेजी से लन्ड पर हाथ फिराने लगा. लगभग 3 मिनट बाद उसने मेरे मुंह में गर्मागर्म पिचकारी छोड़ी. वो माल ऐसे छोड़ रहा था जैसे सालों से बचा कर रखा हो।


मैंने पूरा माल मेरे मुंह में ले रखा था पर उसने मुझे तब तक मुंह नहीं खोलने दिया जब तक कि मैंने उसके अमृत रूपी वीर्य का एक एक कतरा अपने गले के नीचे नहीं उतार दिया.


फिर उसने मुझे एक जोरदार किस की और अपनी बाइक से एक फूलों का गुलदस्ता लाकर मुझे दिया, फिर उसने मुझे मेरे रास्ते ड्राप किया और वो चला गया।


उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैंने आज एक लन्ड चखा है। आंखें बंद करने पर बार बार उसका लन्ड मेरी आँखों के सामने आ जाता।

उस रात मैंने दो बार मुट्ठ मारी तब जाकर मुझे नींद आयी।


सुबह उसकी काल आयी, उसने मेरा हाल चाल पूछा हमने बात की।

कुछ दिन बाद ही हमने पुनः मिलने की योजना बनाई. इस बार पहले ही तय हो चुका था कि उसे मेरा पूरा शरीर चाहिए. मतलब साफ शब्दों में वो मेरी नर्म गांड के अंदर अपना रस निकालना चाहता था।


मैं आज अलग ही उत्साह में था, जल्दी से नहा धोकर तैयार हो गया। बॉथरूम में ही अपने बालों की बलि चढ़ा दी और गांड पर क्रीम लगाई जिससे वो सॉफ्ट बनी रहे। फिर हम दोनों सिटी के पयागीपुर चौराहे पर मिले, उसने मुझे पिक किया।

मैंने उससे जगह के बारे में पूछा तो उसने कहा- अभी तय नहीं किया।


मैं थोड़ा आश्चर्यचकित हुआ.

फिर उसने कहा- तुम टेंशन न लो, मैं मैंनेज कर लूंगा.

मैंने कहा- ठीक है।


फिर हम घूमते घूमते पटरी के किनारे एक जंगल की तरफ गए. पर उसे वहां सुरक्षित नहीं लगा। फिर उसने मुझे फैसला सुनाया कि हम सामने खड़ी हुई पुराने रेल के डिब्बे में जाएंगे। वो काफी दिनों से खड़ा हुआ डिब्बों का झुंड था शायद 6 य 7 डिब्बे।


मैंने उसे मना किया पर उसने मुझे समझाया कि यहां कोई नहीं आता और अगर कोई आता भी है तो वो सब सम्हाल लेगा।

मेरा मन तो नहीं था इतने असुरक्षित स्थान पर लेकिन हवस के आगे इंसान की नहीं चलती.

फिर वो मुझे लेकर अंदर चला गया। अंदर जाते ही उसने कस कर मुझे अपनी बाजुओं में जकड़ लिया और ताबड़तोड़ किस करने लगा जैसे कि कई वर्षों से कोई मिला ही न हो.

पर मुझे उसका ये वहशीपन अच्छा लग रहा था।


किस करते करते बार बार वो मुझे अपनी गोद में उठा लेता। फिर उसने अपने गले में लपेटा हुआ तौलिया उस सीट पर डाल दिया और अपनी पैंट नीचे करके अपने लण्ड की तरफ इशारा करके उस सीट पर बैठ गया।

मैं नीचे झुक कर उसका लन्ड चुसने लगा।


कुछ देर में उसने मुझे उठा दिया और कहा- पहले तू अपने कपड़े उतार दे, तब लन्ड चूसना।

मैंने वैसा ही किया, अपने सारे कपड़े उतार कर ऊपर टांग दिए और झुक कर उसका लन्ड अपने मुंह में ले लिया।


वो थोड़ा आगे की तरफ होकर मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा। वो जब भी मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए एक उंगली से मेरी गांड के छेद पर प्रेशर देता तो मैं उत्तेजित होकर उसका पूरा लन्ड अपने मुंह में ले लेता और भी तेजी से चूसने लगता.


इसी तरह करते करते वो पहली बार मेरे मुंह में अपना झरना दे बैठा और मैं पहले की तरह उसे चाव से पी गया।

वो निढाल होकर सीट पर लेट गया।

5 मिनट आराम करने के बाद उसने मेरे निप्पल्स पर धीरे से काटा तो मेरी आह निकल गयी.


फिर वह सीट से उठ गया और उसी सीट पर मुझे बिल्कुल किनारे पर घुटनों के बल झुका दिया। इस तरह मेरा सिर सीट पर और गांड सीट से थोड़ा बाहर निकली हुई थी.

उसने पास पड़े अपने कपड़ों से शहद की एक डिब्बी निकाली और मेरी गांड पर गिराना शुरू कर दिया।


मेरी धड़कनें बहुत तेज हो गयी थी। उसने मेरी गांड के छेद पर अपनी जीभ लगा दी, मेरा दिल मानो थम सा गया। वो छेद पर अपनी जीभ लगाकर ऊपर से शहद गिरा कर छेद को पूरे जोर और जोश से चाट रहा था। मानो वो अपनी पूरी जीभ मेरी गांड में डाल देना चाहता हो।


मेरी गांड से उसका थूक रिसकर मेरी जांघों से होते हुए सीट पर बिछे उस तौलिये पर गिर रहा था। अब मेरे मन में बस यही हो रहा था कि वो कितनी जल्दी अपना लन्ड मेरी गांड में पिरो दे।


कुछ देर मेरी गांड को जी भर के चाटने के बाद वो उठा और मेरे सामने आकर मेरे होंठों पर जोरदार किस किया और अपना लन्ड मेरे होंठों से लगा दिया गीला करने के लिए।

मैंने 2 मिनट तक उसका लन्ड चूसा.

फिर वो घूमकर दुबारा मेरे पीछे आ गया और ताकत के साथ मेरी कमर पकड़ ली और अपना लन्ड मेरी गीली गांड के गोल छल्ले पर टिका दिया। ऐसे ही कुछ देर मेरे पीठ को चूमते हुए उसने एक जोरदार धक्का दिया। मेरी तो जान निकल गयी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ मैं आगे की तरफ भागा. पर शायद उसे पहले से ही इसका अंदाजा था उसने पूरी ताकत से मेरी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रखा था।


वो धीरे धीरे मेरी चुचियों पर हाथ फेरते हुए मेरी गर्दन पर हौले हौले अपने दांत धंसाने लगा। कुछ देर बाद मुझे कुछ आराम हुआ तो उसने हौले से एक और धक्का दिया. इस बार उतना दर्द नहीं दिया.

और फिर फिर धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाने लगा।


कुछ देर बाद मुझे इतना मजा आने लगा कि मैं ख़ुद ही अपनी गांड को पीछे की तरफ हिलाने लगा. यह महसूस करके उसने अपने धक्के तेज कर दिए और फिर मुझे सीट पर पूरा लिटा कर मेरे ऊपर आ गया और धक्के लगाने लगा।


मेरा लन्ड नीचे सीट पर दबा हुआ था जिससे मैं कुछ ही झटकों में झड़ गया। मेरा चिपचिपा माल मेरे पेट पर लग रहा था।


फिर वह मुझे उठा कर बाथरूम में ले गया और शीशे के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से ही मेरी एक टांग उठा कर खिड़की पर रख दिया और मैंने अपने दोनों हाथ आईने के पास टिका दिए और वो पीछे से मेरे स्तनों पर हाथ फेरते हुए जबर्दस्त धक्के लगा रहा था.

अचानक उसने अपने धक्के दुगुनी गति से कर दिए और आह आह की आवाज करने लगा. मुझे घुमा कर उसने अपना लन्ड मेरे होंठों से लगा दिया और वीर्य की नदी बहा दी। उस दिन मुझे जो परमसुख मिला उसे शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है. फिर भी मैंने प्रयत्न किया है।


तो मित्रो, जल्द ही मिलूंगा आपसे अपनी अगली कहानी के साथ। तब तक के लिए गांडू गरिमा/रोबीला रघु आपसे विदा लेता है। अपना प्यार बनाये रखियेगा!

आपको कहानी जैसे भी लगे कृपया पानी प्रतिक्रिया दीजियेगा.

तीन कामिनियों की कामाग्नि - the lust of three women

 तीन कामिनियों की कामाग्नि

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



हैलो दोस्तो, मेरी कहानी में आप सभी का स्वागत है. मेरी पिछली सभी कहानियों को पसंद करने के लिए मैं आपका तहेदिल से शुक्रगुजार हूँ. उम्मीद करता हूँ कि आगे भी मुझे ऐसे ही प्यार देते रहोगे और इमेल्स करते रहोगे. मेरी पिछली कहनियाँ को पढ़कर बहुत सी फीमेल ने अपनी चूतों का रस निकाला और बहुत से मर्दों और लड़कों ने अपने लंडों की प्यास शांत की।


मेरी पिछली कहानी थी

आए थे घूमने, चोद दी चूतें


अब मैं आता हूँ सीधा अपनी कहानी पर, कहानी पढ़ने के बाद ईमेल करनी मत भूलियेगा।


हम दोनों व्ट्सऐप दोस्त बन गए और हर रोज़ व्ट्सऐप पे सेक्स चैट करते. जैसे कि आपको पता ही है कि मैं चैट पे चूत का पानी निकालने में पूरी तरह माहिर हूँ और सपना तब तक चैट करती जब तक उसकी चूत का पानी निकल न जाता।

सपना ने मेरा व्ट्सऐप नम्बर अपनी 3 ख़ास सहेलियों को भी दे रखा था और उनके साथ मिल कर व्ट्सऐप ग्रुप बनया था जिसमें वो मुझसे सेक्सी सेक्सी बातें करती और कुछ टिप्स भी पूछती रहती थी।

सभी की सभी अभी कुंवारियां थी, मतलब उनकी शादी अभी नहीं हुई थी.

वैसे तो सपना ने बताया था कि उसकी सील एक लड़के ने तोड़ दी थी जो उसका बॉयफ्रेंड था, परन्तु वो ज्यादा तेर तक सपना से बना कर न रख सका और फिर सपना ने उसे छोड़ दिया।

आज कल बस तीनों का बातें करने का जरिया बस मैं ही था। जैसे कि सभी को पता है कि मैं हर एक को जो भी मेरी नयी दोस्त बनती है, हमेशा यही कहता हूँ कि मैं सिर्फ आपका दोस्त बनकर रहूँगा, और अपना प्यार वियार वाला चक्कर किसी और से चलाना, मेरी इसी बात को वो सभी पसंद करती थीं।


एक दिन मुझे सपना का फ़ोन आया कि हम तीनों आपसे मिलना चाहती हैं और हो सके तो आप हर हाल में हमें मिलिएगा।

यहाँ मैं एक बात बता दूँ कि वो मेरे से 50 किलोमीटर दूर ही एक शहर में रहती हैं।


मैंने उन्हें मिलने का दिन रविवार का दिन तय कर दिया। सपना ने मुझे अपनी दूसरी सहेली जिसका नाम अंशिका है, के घर पे मिलने को कहा, क्योंकि अंशिका के घर पे रविवार को कोई नहीं था।

मैं रविवार को उनके बताये पते पर पहुँच गया। उनका घर एक गली के अंत में था तो मुझे कार काफी दूर पार्क करनी पड़ी।


मैंने जैसे ही उनके घर की डोरबैल बजाई तो सपना मुझे गेट से लेने आई. हम मिल दूसरी बार रहे थे, एक बार हम इस से पहले एक मॉल में मिले थे।


हम घर के अंदर चले गए। उसने मुझे ड्राइंग रूम में बिठाया और चाय पानी के बाद मुझसे बातें करने लगी.


कुछ देर बाद उसने एक आवाज़ लगायी और उसकी सहेली अंशिका और एक और सहेली जिसका नाम अंजू था, उन दोनों को बुलाया, मेरी उनके साथ जान पहचान करवाई।

अंजू सबसे खूबसूरत थी, परन्तु मम्मे अंशिका के बड़े बड़े लग रहे थे और चूतड़ सपना के गोलमटोल थे।

सपना ने बात करते हुए बताया- डियर रवि, हम सभी व्ट्सऐप और फ़ोन पे सेक्स चैट करते हैं, तो हम सभी चाहती हैं कि एक बार हम असली में सेक्स करें। मेरी सहेलियों का कहना है कि मेरी सील टूटी होने की वजह से हम दोनों सेक्स करें और ये दोनों हमको सेक्स करते हुए देखेंगी।

मैंने कहा- ओके, मैं आपके साथ सहमत हूँ, परन्तु मेरी एक शर्त है!

‘शर्त?’ वो सभी एक साथ बोलीं और मेरी तरफ देखने लगीं।


तो मैंने उनका आश्चर्य दूर करते हुए आगे कहा- मैं चाहता हूँ कि जब हम सेक्स करें तो ये दोनों (अंजू और अंशिका) भी बिल्कुल नंगी होकर बाकी अंगों से हमारा साथ देंगी. हाँ, इनका कुंवारापन हम नहीं छेड़ेंगे.


वो दोनों हिचकने लगीं तो मैंने कहा- देखो, अगर आप मेरे हर अंग को नंगा देखोगी, और हम सभी चुदाई की बातें करते हैं, तो अब इसमें क्या परेशानी है? वैसे भी तो हम सभी चुदाई की सीधी बातें करते ही हैं.

और फिर सपना ने भी उन्हें थोड़ा मनाया, फिर वो मान गयीं।


हम चारों एक बैड पर एक साथ बैठे थे। मैंने सबसे पहले सपना को किस किया और मैंने सपना के होंठों को अपने होंठों में ले लिया. मैं उसके बूब्स को उसके टॉप के ऊपर से दबाने लगा।

इससे सपना थोड़ी हॉट हो गयी.


मैंने ऐसे ही एक एक करके अंशिका और अंजू को भी किस किया और उनके होंठों को थोड़ी देर के लिए चूसा। मेरे होंठ चूसने से उनके अंदर कामुकता की लहर दौड़ गयी और तीनों की ही शर्म थोड़ी देर के लिए उड़ गयी क्योंकि कुछ तो हम सभी आपस में फ़ोन पे गालियाँ वगैरा और डर्टी चैट कर लेते थे इसलिए अब हमें कोई दिक्कत नहीं थी।


तभी अंजू अंशिका को देखती हुई बोली- ए मादरचोद साली … अब जीजू से मज़े ले ले आज!

यहाँ एक बात बता दूँ कि सपना के अलावा वो दोनों मुझे जीजू कहकर बुलाती हैं।

तभी मैंने अंजू की गांड थपथपाते हुए उसे कहा- साली बहन की लौड़ी, उससे ज्यादा जल्दी तो तुझे लगती है मादरचोद!

मेरी तरफ देखती हुई अंजू बोली- तू बहनचोद अपना काम कर, देखती हूँ आज तेरे लौड़े में कितना दम है.


मैंने अंजू को पकड़ कर उसकी गांड पे चपत लगाई और बोला- दिखाऊं अपने लौड़े का दम साली? तेरी गांड और चूत दोनों फट जायेंगी … वो भी अभी!

तभी अंशिका बोली- हाँ जीजू, फाड़ दो इसकी चूत, ये वैसे भी रोज़ आपको याद कर करके मुठ मारती है.

मैंने कहा- ओह, ऐसी बात है क्या?


सपना ने सभी को कहा- अरे छोड़ो ये सबी … अब हमारे पास आज वक्त बहुत कम है. यहाँ हम 3 घंटे के लिए ही हैं, इसलिए इतने कम समय में सभी को सबी कुछ ज़ल्दी में करना होगा और अगर आज सब कुछ अच्छा लगा तो हम कहीं और बढ़िया प्रोग्राम करेंगे.

मैंने कहा- ठीक है. तो बताओ क्या करें अब?


तो सपना ने सभी को एकदम नंगे होने को बोला- सभी अपने अपने कपड़े खुद ही उतार लो ताकि हमें कम समय लगे।

सभी अपने अपने कपड़े उतारने लगे.

मैंने अपने कपड़े तो उतार दिए परन्तु अंडरवियर नहीं उतारा.


तभी अंशिका बोली- जीजू, आप भी नंगे हो जाओ न!

मैंने कहा- अरे मेरी रानियो, तुम किस लिए हो? कर देना मुझे नंगा बेबी!

सभी हंसने लगे.

तो मैंने सभी को कहा- देखो, जैसे जैसे मैं कहता जाऊं, तुम सब वैसे वैसे ही करना, उस हिसाब से हम सभी को एक साथ मज़ा भी आएगा.

सभी ने हामी भरी.


मैंने सबसे पहले अंशिका को अपने पास बुलाया और उसके मम्मों को किस किया, उसके निप्पलों को चूसना शुरू कर दिया.


ऐसे ही मैंने तीनों लड़कियों के साथ किया. मैंने अंजू के मम्मे भी चुसे और सपना के मम्मे और गर्दन भी चूसी।


फिर मैंने सपना की चूत को मुंह में लिया. उसकी लाल चूत पर एक भी बाल नहीं था. मैंने उसकी चूत के लाल लाल दाने उसके जी स्पॉट और उसके अंदर तक सभी जगह अच्छी तरह चूसा. सपना आहें भरने लगी थी।


अब मेरे अंडरवियर को अंशिका ने उतार दिया। उसके बाद मैंने अंजू की चूत के अंदर जीभ डाली. जब अंजू आहें भरने लग गयी तो मैंने अंशिका की चूत में जीभ डाली और ऊपर से अंशिका के मम्मे भी पकड़ लिए.

अब अंशिका पूरी तरह मेरी गिरफ्त में थी। अंशिका जोर जोर से आहें भर रही थी, उसका तो रस निकलने वाला था।


मैंने उसकी चूत चूसते हुए जीभ बाहर निकाल कर कहा- ला साली निकाल अपना रस … बहन की लौड़ी … मादरचोद … निकाल अपना पिशाब! कुतिया देख … तुम्हारे यार का लौड़ा और जीभ तुम्हारे पास है!


अब सभी पूरी तरह गर्म हो चुके थे।


फिर सपना ने सभी को समझाया. अंजू की चूत पे अंशिका की जीभ लगवा दी, अंशिका की चूत पे मेरी जीभ लगा दी और मेरे लौड़े को खुद चूसने लगी और अपनी चूत उसने अंजू के मुंह में दे दी.

इस तरह हम सभी एक गोल चक्कर में थे और सभी एक दूसरे की चुसाई कर रहे थे.

ऐसे सभी को मज़ा आ रहा था।


कुछ देर बाद उन्होंने मुझे थोड़ा आगे करके सभी की पोजिशन बदल दी. इस तरह हमने कुछ देर तक एक दूसरे की चुसाई करने के बाद कहा- चलो अब चुदाई करते हैं.

चुदाई तो सिर्फ मैंने और सपना ने ही करनी थी क्योंकि अंजू और अंशिका अभी कुंवारी थीं.

तो मैंने उन्हें कहा- कोई बात नहीं साली, तुम दोनों गांड मरवा लेना, उससे सील भी बरकरार रह जायेगी और मज़ा भी मिल जाएगा.

सभी हंसने लगे.


खैर मैंने लेट कर सपना को धीरे धीरे अपने लौड़े पे बिठाया और अंजू को अपने मुंह पे बैठने को कहा. अब अंजू की चूत को मैं मुंह से चूस रहा था और सपना की चूत में अपना लौड़ा डाल चुका था. मैंने दो तीन झटके ही लगाए और मेरा लौड़ा सपना की चूत में पूरी तरह फिट हो गया। अब मैं अपना लंड तेज तेज अंदर बाहर करने लगा था।


अब मैं अंजू की चूत में जीभ डाल कर अंदर बाहर कर रहा था और उसके जी स्पॉट को चूस रहा था.


मैं एक साथ दो लड़कियां को सेक्स का मजा दे रहा था. अंशिका हम सभी को देख रही थी और अपनी चूत पे तेज तेज उंगली चला रही थी।

मैंने सोचा भी नहीं था कि अंजू की चूत का रस बहकर मेरे मुंह में आने लगा और मेरी जीभ को भिगोने लगा, मैं उसका रस पिए जा रहा था। अंजू की चूत को मैंने अपने होंठों में कस लिया ताकि वो इस बहते झरने का पूरा मज़ा ले सके।


अंजू मेरे मुंह से उठ गयी और अंशिका ने उसकी जगह ले ली। दूसरी तरफ मैंने सपना की चूत में धक्के तेज कर दिए थे.


मैंने अपने हाथ अंशिका के मम्मों को मैंने अपने हाथों में ले लिया. उधर सपना के मम्मों को पीछे से अंजू ने जाकर पकड़ लिया.

अंशिका अब मेरे मुंह पर अपनी चूत को आगे पीछे करके मेरी जीभ पे रगड़ रही थी।

मेरा लंड अभी भी सपना को चोद रहा था। सपना झड़ने के कगार पर थी.


इधर अंशिका ने भी मेरे मुंह पे अपने झटके तेज कर दिए थे. अंशिका पहले से ही ज्यादा उतेजित होने की वजह से ज्यादा देर तक टिक न पाई और उसने मेरे मुंह पर अपनी चूत से पिचकारी छोड़ दी.

उधर साथ ही सपना भी झड़ गयी. सपना जैसे काँप रही थी और उसका शरीर अकड़ गया था.


मैंने अंशिका को जोर से पकड़ लिया और मेरा लंड भी ज्यादा देर तक टिक न पाया. जैसे ही सपना के रस ने मेरे लंड को भिगोया तो मैंने भी जोर से एक चीख लगाई और अपने लंड की धार सपना की चूत में छोड़ दी.

सपना जोर जोर से चिल्लाने लगी- उन्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… सीसी सी सी सी मेरे मुंह में दे साले … मेरी चूत में नहीं जाना चाहिए था भोसड़ी के … उई मर गयी कुत्ते … मेरी चूत फट गयी आज!


तभी अंशिका की भी चीखें निकल गयी. उसकी चूत की फांकों को मैंने अपने मुंह में लिया हुआ था और उन्हें दांतों से रगड़ रहा था इसलिए वो ज्यादा चिल्ला रही थी- उई आह आह आह … मर गयी … मज़ा आ गया … साली मरवा दिया आज … मादरचोद उई आह आह सी सी सी सी!


इधर मेरे मुंह से भी सिसकारियाँ निकल रही थी- आह आह आह सी सी सी सी बहनचोद … मादरचोद रांडो चुद गयी आज तुम सालियो … आह आह चुदो चुदो चुदो कुत्तियो … आह सी सी सी सी सी.

ऐसे ही अंशिका बोल रही थी- उई बहन चोद दी आज हमारी … उई उई आह आह सी सी सीससी मर गयी … मरवा दिया … कुतिया … ले जीजू साले … पी … मेरा मूत!

कहते हुए उसने मेरे मुंह में अपनी चूत का रस छोड़ दिया और पूरी तरह झड़ गयी थी।

अब अंशिका मेरे मुंह से उठ गयी और सपना भी हम सभी एक दूसरे से अलग हुए और साथ ही मैंने अंजू को घोड़ी बनने के लिए कहा.

तो वो बोली- उई जीजू, ये क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- अरे कुछ नहीं बेबी, एक बार हो जाओ न! घबराओ मत! अरे मैं कुछ नहीं करता, हो जा तू।


वो मेरे जोर देने से घोड़ी बन गयी तो मैंने पीछे से उसकी गांड में उंगली दे दी और गोल गोल घुमानी शुरू की. वो छटपटाने लगी.

मैंने कहा- अरे अभी मज़ा आएगा.

अंशिका को मैंने एक मोमबती लाने को कहा।


पहली बार गांड में लंड नहीं जा पाता इसलिए अगर आपके पास मोमबती हो तो सबसे अच्छा है।

मैंने अंजू की गांड में मोमबती डाल दी और पहले धीरे धीरे मोमबती को आगे पीछे करता रहा और फिर मैं तेज तेज उसकी गांड में मोमबत्ती करने लगा।

अंजू को मज़ा आने लगा था।


फिर मैंने नीचे अपना लंड अंशिका को चूसने के लिए कहा तो अंशिका झट से मेरा लौड़ा चूसने लगी.

मैं मोमबती से अंजू की गांड चोद रहा था तो कुछ ही देर में अंजू आहें भरने लगी- उन्ह आह … उन्ह सी सी सी सी उई उई आह आह उई सी सी सी चुद गयी साले लौड़ा डाल मेरे यार … उई आह आह आह उई साले … मज़ा आ गया!


अब तक मेरा भी लंड बड़ा हो चुका था। मैंने फिर से खड़ा लंड अंजू की गांड में डाल दिया और सपना को कहा- साली बहन की लौड़ी, तू उतनी देर तक अंशिका की गांड ढीली कर मादरचोद.

और इधर मैं अंजू की गांड में अपना लंड जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा था. अंजू भी अपनी गांड आगे पीछे कर करके मज़े ले लेकर चुदवा रही थी।

तभी मैंने अपने लौड़े की स्पीड बड़ा दी और अंजू जोर जोर से आहें भर कर मज़ा लेने लगी।

ऊपर से सपना भी उन्हें गालियाँ देकर बोलने लगी- मादरचोद सालियो कुतियो, तुम्हारी बहन का लौड़ा, आज मेरे यार से गांड चुदवा रही हो, गांडू रांडो, देखो मैंने चूत चुदवा कर मज़ा लिया है और तुम रह गयी गांड जैसी!


मैंने कहा- उई ले साली चुदवा अपनी गांड … मादरचोद अंजू … ले चुद … आह उई ले चुदवा … मेरी गांडू रांडो, अब तुम्हें गांडू बोल कर ही बुलाऊंगा सालियो गांडू रांडो … ले उई!

और मैंने अंजू की चूत के दाने पे अपनी उंगली रख दी और उसकी चूत से धार निकलने लगी. वो झड़ चुकी थी।


कुछ देर और उसकी गांड चोदने के बाद वो खलास हो गयी. मैंने तभी लौड़ा बाहर निकाला और अंशिका की गांड में डाल दिया. अब अंशिका कराह रही थी और मजेदार सिसकारियाँ लेकर चुदने लगी थी।

मैंने अंशिका को बहुत जोर जोर से कुछ देर चोदा तो सपना बोली- साले भूल मत जाना, इस बार मैंने पीना है तुम्हारी ये जवानी का रस! मेरे प्यारे कुत्ते!

मैंने भी कहा- मेरी कुतिया, इस कुतिया की गांड फट जाए … फिर तेरे मुंह में ही डालूँगा अपना रस मेरी रांड! वैसे भी तू तो पक्की मादरचोद है मेरी रांड! उई आह ले साली अंशिका … चुद चुद चुद … तेरी फट गयी गांड कुतिया.


तभी अंशिका भी बोल पड़ी- उई आह उई सी सी सी सी आह फट गयी गांड मेरी! आह उई बना दिया मुझे गांडू! आह उई उई आह … गांड बज गयी मेरी! आह आह उई बस बस … छोड़ दे साले! कहते हुए वो भी झड़ गयी.

मैंने अपना लंड निकाला और तुरंत उसे सपना के मुंह में दे दिया. सपना ने जैसे ही उसे चूसना शुरू किया, मैंने सीधी धार उसके मुंह में छोड़ दी. वो रस को मज़े से पीने लगी. मैंने झड़ता लौड़ा उसके मुंह से निकाला तो दूसरी धार उसके मम्मों पे गिरी.

ज़ल्द ही मैंने अपना लंड अंजू के मुंह में दे दिया और तीसरी धार अंजू के मुंह में गिर गयी. ऐसे ही अंजू ने भी मेरा लौड़ा मुंह में लिया तो अभी झड़ना बंद नहीं हुआ था कि अंशिका ने आकर लौड़ा पकड़ा और उसके मुंह से निकाल कर अपने मुंह में ले लिया।


अब तीनों लड़कियों ने मेरे लंड के रस का टेस्ट कर लिया था।

सपना ने मेरा सारा रस अपने मुंह में भरा हुआ था, गटका नहीं था. सपना ने सारा रस मुझे दिखा कर अंशिका के मुंह में ट्रांसफर कर दिया.

अब अंशिका ने वो सारा रस अंजू के मुंह में धार बना कर गिरा दिया.

अंजू ने वो फिर से उल्टा अंशिका के मुंह में दे दिया.


तभी सपना ने अपने मम्मे आगे किये तो अंशिका ने मेरे लंड का रस सपना के मम्मों पर गिरा दिया. जहाँ से अंजू ने वो सारा रस चाटा.


इधर मैं आराम से बैठा था तो अंशिका मेरा लौड़ा चाटने लगी। उसके बाद तीनों ने कुछ देर तक मेरे लंड को चाट और चूसा.


फिर मैंने तीनों को किस किया और उनके होंठ अपने होंठों में लेकर चूसे।

तब तक हम चारों थक चुके थे.


अंशिका बोली- उफ़ … कितना मज़ा आया!

और हम सभी ने बाथरूम में जाकर अपने आप को साफ़ किया और कपड़े पहने।

अंशिका और अंजू रसोई में जाकर चाय बनाकर लायीं। हम सभी ने चाय पी और मैंने उन सभी से विदा ली.

अंजू और अंशिका ने वादा किया- अब हम कहीं टूर पे सभी एक साथ 2-3 दिन के लिए चलेंगे और वहां अपनी सील तुड़वा कर मज़ा लेंगी।


देखते हैं कि वो वक्त कब आता है।


तब तक आप मेरी इस कहानी का मज़ा लीजिये। लड़कियाँ अपनी चूत और लड़के अपने लौड़े हिला कर कहानियों का आनन्द लेते रहिये.

फिर मिलेंगे एक नयी कहानी के साथ। मुझे ईमेल करनी मत भूलियेगा। आपकी मेल्स के इंतज़ार में आपका दोस्त रवि।

रूममेट मेरी गांड का दीवाना - My roommate is crazy about my ass

 रूममेट मेरी गांड का दीवाना

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



नमस्कार मित्रो, मैं नागपुर से सोनू. मैं दिखने में काम उम्र का लगता हूँ लेकिन अभी मेरी उम्र तीस साल है. मैं दिखने में चिकना और हैंडसम हूं. मैं लड़का, लड़की, अंकल, आंटी सभी को पसंद करता हूं.


मैं ये कहानी तब की बताने जा रहा हूं, जब मैं काम करने हरियाणा गया था. मुझे वहां एक फैक्ट्री में काम भी मिल गया था, लेकिन रहने का कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कहां रहूँ.


तभी वहां एक काम करने वाले भैया बोले- तुम हमारे साथ रह लो, कंपनी का ही रूम है, भाड़ा भी नहीं देना पड़ता है.

मैंने भी सोचा कि चलो अच्छा है, फोकट में रहना मिल रहा है … इसमें बुराई क्या है.


वो एक छोटा सा रूम था और एक बेड था. हम दोनों को एक बेड पर ही सोना था. मैंने सोचा कि कोई बात नहीं, रहना तो पड़ेगा ही.


मैंने पूरा दिन काम किया और शाम को घर आ गया. वो भैया बोले- छोटे … तुम नहा लो, अच्छा लगेगा.

मैंने बोला- हां भैया, नहाना तो पड़ेगा ही, बहुत थक भी गया हूं.


उस समय मेरी उम्र जवानी की दहलीज पर थी. मैं दिखने में भी बड़ा भोला भला था, जो कि अभी भी हूँ.

फिर मैं नहा आ गया और हम लोग खाना बनाने लगे. खाना बनाने के बाद हम दोनों ने खाया. फिर थोड़ा गप्पें मारने लगे, इधर उधर की बातें करने लगे.

बातें करते करते हम दोनों सो गए. बिस्तर एक ही था, तो साथ में ही सोए थे.


क़रीब आधी रात को वो भैया का हाथ मुझे मेरी गांड पर महसूस हुआ. मैंने आंखें बिना खोले समझने की कोशिश की कि ऐसा नींद में हो रहा है या सच में भैया मेरी गांड सहला रहे हैं. कुछ ही पलों में मुझे समझ आ गया कि भैया जाग रहे हैं. वो मेरे चूतड़ों को सहला रहे थे.


पहले तो मुझे गड़बड़ सा लगा. लेकिन पता नहीं क्यों … मुझे ये अच्छा भी लग रहा था. मैंने सोचा चलो कोई बात नहीं सहलाने दो.


फिर उन्होंने मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया और वे मेरी गांड को सहलाने लगे थे, इससे मुझे और अच्छा लगने लगा. इतना होते होते मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.


उसके बाद उन्होंने मेरी चड्डी उतार दी. चड्डी उतारते समय मैंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर किया ताकि चड्डी उतारने में कोई परेशानी ना हो. इससे उन्हें भी समझ आ गया था कि मैं भी मजा ले रहा हूँ.


मुझे भी पता चल गया था कि आज भैया जी मेरी गांड मारने वाले हैं. मैं भी गांड मरवाने के मूड में आ चुका था.

अब उन्होंने मुझे बेख़ौफ़ नंगा कर दिया और मेरी गांड को सहलाने लगे. कभी कभी भैया अपना हाथ आगे करके मेरा लौड़ा भी हिलाने लगे. उन्हें पता चल गया था कि मैं जग गया हूं और मजा ले रहा हूँ, तो भैया ने मेरा मुँह घुमाया और किस करने लगे. मैं भी उन्हें किस करने लगा.


नीचे से उनका लौड़ा मेरी नंगी गांड से रगड़ रहा था. फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रखा. मैंने भैया का लंड पकड़ा, तो पता चला कि ज्यादा बड़ा नहीं है. लेकिन मुझे भैया का लंड अच्छा लगा, वो एकदम कड़क था.


मैं उनका लौड़ा अपने हाथ से सहलाने लगा. वो भी मेरे चूतड़ों को सहला रहे थे. बीच बीच में वे मेरी गांड पर चूम भी रहे थे. मैं तो सातवें आसमान पर था. सोच रहा था कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है.


फिर उन्होंने कहा- सोनू मजा आ रहा है ना?

मैंने कहा- हां बहुत मजा आ रहा है.

उन्होंने कहा- थोड़ी देर बाद और मजा आएगा.

मैंने पूछा- कैसे?

उन्होंने बताया- बताता हूं.

फिर उन्होंने एक उंगली को मेरी गांड में डाल दिया. उफ्फ … मुझे थोड़ा दर्द हुआ क्योंकि गांड सूखी थी.

मैंने कहा- भैया दर्द हो रहा है.


उन्होंने उंगली पर थोड़ा थूक लगाया और फिर से उंगली को मेरी गांड में डाल दिया. इस बार आराम से उंगली घुस गई और मुझे मजा भी आया. मैं गांड हिलाने लगा.


थोड़ी देर में भैया ने एक और उंगली को अन्दर डाल दिया, लेकिन थूक से गीली होने के कारण मुझे ज्यादा दर्द नहीं हुआ और मजा आने लगा.


वो मेरी गांड में उंगली डाल रहे थे और मैं उनका लौड़ा सहला रहा था.


फिर उन्होंने पूछा- सोनू लौड़ा गांड में डालूँ क्या?

मैं कुछ नहीं बोला, तो वो समझ गए कि लौंडा गांड मराने के लिए राजी है.


फिर उन्होंने कहा- तुम पेट के बल से हो जाओ, जिससे तेरी गांड ऊपर आ जाएगी.

मैं गांड ऊपर करके औंधा सो गया. फिर उन्होंने थूक लेकर मेरी गांड पर लगा दिया और अपने लौड़े पर भी लगा लिया.


मेरी गांड में जब वो लौड़ा घिसने लगे, तो मुझे अजीब सा लग रहा था. वे मेरी गांड के छेद को लौड़े से रगड़ रहे थे.

उफ्फ … क्या बताऊं क्या मजेदार फीलिंग आ रही थी. फिर उन्होंने अपना लौड़ा हाथ से पकड़ कर मेरी गांड के छेद पर रखा और धीरे धीरे घुसाने लगा.


मुझसे भैया बोले- सोनू गांड ढीला कर ले, दर्द नहीं होगा.

मैंने वैसे ही किया, अपनी गांड को ढीला कर दिया. उसी वक्त उनका लौड़ा मेरी गांड में घुस गया.


उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ क्योंकि उनका लौड़ा ज्यादा मोटा भी नहीं था … तो अच्छा भी लगने लगा.


फिर उन्होंने अपना लौड़ा कुछ बाहर निकाला और गांड में डाल दिया. इस बार भी उन्होंने आराम से डाला और पूरा लौड़ा डाल दिया.

आह … मैं उनका लौड़ा अपनी गांड में महसूस कर रहा था और मजा ले रहा था. मैंने अपने दोनों हाथों से अपने चूतड़ों को फ़ैलाए रहा था, ताकि मेरी गांड में और अन्दर तक वो लौड़ा पेल दे.

फिर वो लौड़ा मेरी गांड में अन्दर बाहर करने लगे और बोलने लगे- सोनू तेरी गांड मस्त मुलायम है … तुझे मजा आ रहा है ना?

मैंने कहा- हां बहुत मजा आ रहा है.


मैं आह उफ्फ कर रहा था और वो भी मेरी गांड को मस्त पेल रहे थे. मैं भी अपनी गांड उछाल उछाल कर गांड मरवा रहा था.


क़रीब आधा घंटा तक उन्होंने मेरी गांड मारी और मेरी गांड में अपना लौड़ा अन्दर बाहर करते रहे. मैं गांड मरवा कर मजे ले रहा था. वो अब और भी स्पीड में मुझे पेलने लगे.


आह क्या मजा आ रहा था … उफ्फ..


वो स्पीड में पेलते पेलते झड़ गए और अपना गर्म गर्म वीर्य मेरी गांड में ही डाल दिया. मुझे मानो चैन मिला गया.


फिर उन्होंने लौड़ा निकाला और तौलिए से साफ करके मेरी गांड को भी साफ कर दिया. फिर हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए.

सुबह उठे, तो उनका लौड़ा फिर से खड़ा था. उन्होंने मेरी गांड को फिर से सहलाना शुरू कर दिया. फिर थूक लगा कर फिर से मेरी गांड में लंड पेलने लगे.


सुबह में गांड मरवा कर मुझे और भी मजा आया.


उसके बाद मैंने करीब दो महीने वहां काम किया. मैं भैया से रोज रात को अपनी गांड मरवाने लगा था. वो मेरे पति जैसे हो गए थे और मैं उनकी जोरू बन गई थी.

जब गांड में गया दमदार लंड - When a powerful cock went into the ass

 जब गांड में गया दमदार लंड

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


आज की इस कहानी में मैं आपको बताना चाहता’ हूँ कैसे मैंने अपनी गांड में एक बहुत मोटा लंड लिया.


मैं फैमिली के साथ पुणे में रहता हूँ. मैं दिखने में मोटा हूँ मगर लंड चूसने में मेरा हाथ कोई नहीं पकड़ सकता. मुझे अक्सर नए लंड की तलाश रहती है. शुरू से ही जवान लंड को चूसने का, सहलाने का, उससे चुदवाने का शौक लगा हुआ था. वैसे मैं लंड से चुदवाता कम हूँ, लंड को चूसता ज्यादा हूँ. लंड चूसते समय मुझे हमेशा कुछ अलग करने की आदत है.


मेरे इसी चुदक्कड़पन की वजह से मैं पुणे में घर होने के बावजूद रूम खोज रहा था, ताकि मैं पढ़ाई के साथ साथ हर रोज कोई नया लंड चूस सकूं. मैं यदि घर में ही रहता, तो लंड चूसना सम्भव नहीं था.


बहुत कोशिशों के बावजूद भी मुझे रूम मिल ही नहीं रहा था. दरअसल मुझे रूम सिर्फ किसी प्रायवेट हॉस्टल में चाहिए था जहां मुझे लंड की कमी न हो और 24 घंटे रूम देने वाला मकान मालिक भी मौजूद न हो.


ऐसे ही खोजते हुए मैं एक हॉस्टल में आया. वहां थोड़ी सी गंदगी थी, लेकिन मुझे अच्छी जगह लग रही थी. उधर जवान मर्दों के अंडरवियर्स की मदहोश कर देने वाली महक थी.


वहां पे 20-25 कमरे थे. लड़कों से हॉस्टल खचाखच भरा था. आधे नंगे, सिर्फ अंडरवियर पहने हुए लड़के देखकर मेरा मन उनके लंड चूसने को उछला जा रहा था.


कई लड़के तो जॉकी पहने बैठे थे. उनके उभार वाले लंड सूंघने का मन कर रहा था. रूम पर रहने वाला कोई लड़का पूरे कपड़े पहने बैठा हो, ऐसा कभी हो नहीं सकता. लंड खुजाने की आदत तो सबको होती ही है.. सो ज्यादातर लड़के लंड खुजा रहे थे.

मैं हर एक रूम में जाकर खाली स्थान के बारे में पूछ रहा था. वैसे मुझे तो सिंगल रूम सिर्फ अकेले रहने के लिए चाहिए था मगर फिर भी मैं पूछ रहा था. बगल वाले रूम में जगह है या नहीं, यह तो सबको पता होता ही है लेकिन फिर भी मैं हरएक रूम में झांककर जगह के बारे में पूछ रहा था. क्योंकि सिर्फ रूम लेना ही मेरा मकसद नहीं था, बल्कि मैं अपनी आंखों से हरेक रूम में रहने वाले लड़के के लंड नापना चाहता था और अपनी आंखें सेंकना चाहता था.


कुछ लड़के अपने काम करते करते बोलते थे, तो कुछ लंड खुजाते खुजाते मुझे मेरी बात का उत्तर दे रहे थे. मैं तो समझो उनके लंड चूसने के लिए मरा ही जा रहा था.


यह कहानी आप अन्तर्वासना पर पढ़ रहे हैं.


इस हॉस्टल के सेकंड फ्लोर पर सिर्फ तीन कमरे थे. मैं वहा चला गया. दो दो बेडवाले तीन रूम थे. दो रूम बंद थे, एक ही खुला था. मैं वहां गया और अन्दर झांककर देखा. उसमें दो बेड थे लेकिन एक ही लड़का सोता हुआ दिखा. वो लड़का मस्त जवान और बिहारी लग रहा था. वो सोया हुआ था, इसलिए मैं उसको उठाना नहीं चाहता था. वो सिर्फ जॉकी पहने सो रहा था.


कुछ देर तक मैं उसको सिर्फ ताकता रहा. अपनी आंखों की हवस पूरी कर रहा था. शायद उसने देर रात तक पी रखी थी. वहीं कोने में ऑफिसर्स चॉइस की बोतल भी खाली पड़ी थी. मैं देर तक उसे यूं ही एकटक देखता रहा. उसने दरवाजा बिना कुंडी लगाए खुला रखा था. इसलिए आसानी से खुल गया. दरवाजे के नजदीक ही वो बेड पर सो रहा था. मैंने थोड़ी सी शरारत करने की हिम्मत की. दरवाजे के बाहर से ही झुकते हुए मैंने उसके अंडरवियर को सूँघने की कोशिश की.

आहाह … क्या खुशबू थी. शायद कोई परफ्यूम लगाया था.


तभी अचानक उसकी नींद खुल गयी. मैं झट से पीछे हट गया और दरवाजा खटखटा दिया. उसे कोई शक भी नहीं हुआ. ऐसी परिस्थितियों से निपटने में मैं शुरू से माहिर रहा हूँ.


मैंने उससे खाली जगह के बारे में पूछा.

उसने कहा- यहां कोई जगह खाली नहीं है, सब कमरे फुल हैं.


मैं- यहां कितने लोग रहते हैं?

वो- हम दो लोग रहते हैं?

मैं- क्या आप मुझे एडजस्ट कर सकते हो? रेन्ट भी शेयर हो जाएगा, तो पर हैड कम लगेगा.

वो- नहीं यार, हम दो लोग ही बड़े मुश्किल से रह रहे हैं.

मैं- अच्छा ठीक है.. वैसे आप क्या करते हो?

वो- रेल्वे में जॉब है.

मैं- और आपका पार्टनर?

वो- वो भी.

मैं- ओके. मतलब आपकी रात में ड्यूटी है इसीलिए आप रूम पर हो और उनकी दिन में ड्यूटी है.

वो- हाँ.

मैं कुछ देर तक ऐसी ही बातें करके मैं टाईमपास कर रहा था. वो नींद से जागा हुआ था, इसलिए उसकी जॉकी से लंड का उभार साफ दिखाई दे रहा था. ऐसा लग रहा था, जैसे अभी लिपट जाऊं. लेकिन मैंने कन्ट्रोल किया. मैं ब़ोलते बोलते सिर्फ उसके लंड के उभार पर नजर टिकाए हुए था.


मैं बोलते बोलते ही उसके बारे में बहुत कुछ समझ गया था. वे दोनों बिहार से थे, रेल्वे में जॉब करते थे और रूम पर ही खाना वगैरह बना कर खाते थे. शादी हुयी थी, लेकिन नयी नयी नौकरी लगी है, इसलिए फैमिली को साथ नहीं ला सका.


वैसे मुझे इन सबमें कोई इन्टरेस्ट नहीं था. मेरा दिल तो सिर्फ उसका लंड माँग रहा था. अब बहुत बातें कर चुका था. लेकिन शुरुआत कहां से करूं, समझ में नहीं आ रहा था. आखिरकार कोई बहाना मिल नहीं रहा था, तो कब तक वहां बाहर खड़ा रहता.


मैं मोबाईल हाथ में लिए वहां कुछ देर बिना बोले ही खड़ा रहा और फिर जाने लगा. लेकिन पैर निकल नहीं रहे थे.. वो भी कुछ रिएक्ट नहीं कर रहा था. पता नहीं क्यों.. ऐसा क्या हो रहा था.


मैं जा भी नहीं रहा था.. देर तक कुछ बोल भी नहीं रहा था, फिर भी वो चुप था. फिर मैं जाने लगा.. तभी मेरे दिमाग की घंटी बजी.

मैं- पानी मिलेगा?

वो- हां लो ना.


वो मुझे बोतल देने लगा. उससे बोतल लेने के बहाने मैं अन्दर आ गया. बोतल लेने के लिए उसने हाथ आगे बढ़ाया.. तो मैंने उसे हल्का सा टच करते हुए बोतल ले ली. अब मैं धीरे धीरे उसके लंड के उभार को ताकते हुए पानी पीने लगा.


मैं इतना स्लोली पानी क्यों पी रहा हूँ? उसके समझ में नहीं आ रहा था. पानी पीने के बाद मैं बोतल उसको वापस कर रहा ही था कि मुझसे रहा न गया और उसके उभार को मैंने हल्का सा टच किया. वो बिल्कुल मेरे नजदीक ही खड़ा था. मेरे लंड छूने से वो हड़बड़ा गया और पीछे को हटा.


मैंने सोचा अब हुआ, सो हुआ और हिम्मत बढ़ाते हुए झट से नीचे बैठ गया. उसके लंड को पकड़ा और डायरेक्टली मुँह में ले लिया. वो ज्यादा कुछ समझ पाता, उसके पहले ही मैंने उसके लंड का एन्काऊंटर कर डाला.

यह सब उसकी समझ के बाहर था कि क्या हो रहा है. वो कुछ समझता, उसके पहले ही उसकी सिसकारियां शुरू हो गईं. एक बार सिसकारी निकल गयी, तो फिर बचा ही क्या था, जो वो मना कर दे.


मैं करीब पन्द्रह मिनट तक उस तने हुए रॉड को चूसता रहा था. ऐसा लग रहा था, जैसे कोई बरसों पुरानी मन्नत आज पूरी हो रही है. मैं हमेशा मेरे पास चॉकलेट रखता हूँ. अभी मुझे भूख भी लग आई थी. अचानक मुझे याद आया. मैंने जेब से चॉकलेट निकाली और चॉकलेट के साथ लंड चूसता रहा.


वो तो बस देखता ही रह गया. उसे भी कहां इतना मजा मिलने वाला था. बीवियां तो बस चुत ही में लेती हैं. लंड चूसने की बात बहुत दूर की बात है.


कुछ देर बाद उसका लंड झटके देने लगा और अब वो झड़ने जा रहा था. वो लंड बाहर निकालना चाहता था मगर मैं कहां उसकी सुनने वाला था. इतने बड़े लंड का अमृत मैं क्या वेस्ट जाने देता! मैंने एक बूंद भी नहीं जाया होने दिया … पूरा का पूरा माल निगल गया.


आहाह … आज मैं तृप्त हो गया था.


लंड आसानी से मिले, तो उसमें मजा नहीं आता. रिस्क उठाकर कड़ी मेहनत करके जो लंड पटा लिया जाए, उससे जो अमृत मिले, उसी में असल मजा आता है.

उस दिन सारे दिन मैं उसी के पास रहा. उसने 3 बार मुझे चोदा और गांड में भी रसमलाई भर दी. उसके लंड के ब्रांडेड अमृत से मैं असीम सुख पाया, मैंने दिन भर में उसके माल से खुद को अन्दर तक नहा लिया. उसने भी मेरे बड़े बड़े मम्मों को चूस चूसकर और दबा-दबा कर लाल कर दिया.


उसके पास दूध पावडर था … तो मैंने उससे मेरे मम्मों पर लगाने को बोला.


उसे चाटने में ऐसा फील हुआ, जैसे मेरे मम्मों का दूध हो. वो तो बस पगला गया. मेरे मम्मों का आकार इतना बड़ा है कि एक बार जो कोई इनको चूस ले, तो बस दीवाना बन जाता है.


जब वो मुझे चोद रहा था, तब मैं उछल उछल कर अपने मम्मों को हिला रहा था. इस तरह से मैं उसे और उत्तेजित कर रहा था. हम दोनों के बीच किसिंग तो इतनी अधिक हुई कि बस पूछो ही मत. उसने मुझे हर जगह किस किया. मुझे पीठ पर ज्यादा किसिंग पसंद है. उसने वो सब किया, जो मैंने कहा.


तीन बार सेक्स होने के बाद मैं थक गया था. लेकिन वो नहीं थका था. उसका मजबूत लंड अभी भी सलामी दे रहा था. करता भी क्या बेचारा, बीवी होने के बावजूद उसका सूखा चल रहा था. पता नहीं कितने दिनों की प्यास थी जो आज मिट रही थी.

लेकिन मैं अब थक चुका था. मैं उसको अपना नंबर देकर और उसका नंबर लेकर उधर से वापस निकल आया. मुझे रूम तो नहीं मिला, लेकिन अगले कुछ दिनों तक गांड की खुजली का मुफ्त इलाज मिल गया था.


जब भी उसे प्यास लगती है, वो मुझे बुला लेता है. लेकिन अब उसमें पहले जितना मजा नहीं आता इसलिए मुझे नए लंड की तलाश जारी है.


आपको मेरी इस गांड चुदाई की कहानी पर क्या कुछ कहना है, प्लीज़ कमेंट्स कीजिएगा.

लेखक के अनुरोध पर इमले आईडी नहीं दिया जा रहा है.

पड़ोस के अंकल ने मेरी गांड का उद्घाटन किया - Neighbor uncle inaugurated my ass

 पड़ोस के अंकल ने मेरी गांड का उद्घाटन किया

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


आज मैंने भी सोचा कि क्यों ना मैं भी अपनी कहानी आप लोगों के साथ शेयर करूं. ये मेरी पहली कहानी है, तो कहानी से पहले थोड़ा अपने बारे में बता देना चाहता हूँ.


मैं उन्नीस साल का लम्बा तगड़ा नौज़वान हूँ. मेरे घर में माँ, पापा और एक भाई हैं. मेरे पापा सब्जी की दुकान चलाते हैं. और मेरी माँ भी अक्सर घर के बाहर ही रहती हैं. लोग कहते हैं कि वो भी पैसे कमाने के चक्कर में बाहर जाती हैं. मेरे घर अक्सर बाहरी लोगों आते जाते रहते हैं और वो माँ से ही ज़्यादा बात करते हैं. मेरे बाप ने कभी उसको टोका नहीं, शायद वो भी जानते थे कि उनकी कमाई से घर के खर्चे पूरे नहीं होते. मैं भी इन सब मामलों में कोई दिलचस्पी नहीं रखता था, अक्सर बाहर ही आवारगार्दी करता रहता.


मेरी उम्र जवान हो चुकी थी, इसलिए मेरी सेक्स की लालसा भी शुरू हो गई थी, लेकिन कोई लड़की पट नहीं पा रही थी. फिर मैंने गे सेक्स के बारे में पढ़ा और सोचा कि लड़की से साथ वैसे भी बहुत बवाल होते हैं, तो मुझे गे सेक्स ज़्यादा पसंद आया. या यूं कहें कि मुझमें लड़कियों से ज्यादा पुरुषों में अधिक रूचि थी.

अब समस्या ये थी कि पार्ट्नर कहां से खोजा जाए क्योंकि साथ के लड़के इतने हरामी थे कि साले सबको बता सकते थे. इससे बड़ा मज़ाक बन सकता था.


तभी मुझे अपने पड़ोस में रहने वाले एक अंकल याद आए. उनकी उम्र लगभग चालीस साल की होगी, लेकिन वो बहुत ही स्मार्ट लंबे चौड़े और आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक हैं. मैंने सुना था कि इस उम्र में लोग अक्सर बाहर सेक्स की तलाश करने लगते हैं. वो मुझको बड़े गौर से देखते भी थे और कभी कभी आंख भी मार देते थे.


तो मैंने मन ही मन ये विचार बनाया कि इनके साथ दोस्ती करना और सेक्स के मज़े लेना ज़्यादा ठीक रहेगा, क्योंकि इस उम्र में ये किसी से बताएंगे भी नहीं.


बस उस दिन से मैं उनसे बात करने की योजना बनाने लगा. वो जब भी मुझे कहीं भी दिखते, मैं मुस्करा देता. अगर पास होते, तो हालचाल भी पूछ लेता.


एक दिन वो मुझको रास्ते में मिल गए और बात करने लगे. उनकी बातों से लगा कि वो भी मुझसे वही चाहते हैं, जो मैं उनसे चाहता हूँ. फिर अक्सर हम लोगों की बात होने लगी और धीरे धीरे हम दोस्तों की तरह बातें करने लगे.

एक दिन मैंने हिम्मत करके पूछा- अंकल, गे क्या होता है?

तो वो हंसने लगे और बोले- तुम्हारी इतनी उम्र हो गई और तुम ये भी नहीं जानते.

मैंने कुछ नहीं कहा.


फिर उन्होंने बताया- जब एक लड़का दूसरे लड़के के साथ प्यार करता है और सेक्स करता है, उसको गे बोलते हैं.

मैंने पूछा- आपने कभी किसी लड़के के साथ सेक्स किया है?

अंकल बोले- कोई मनपसंद लड़का मिला ही नहीं.

मैंने पूछा- आपको किस टाइप का लड़का पसंद है.

तो वो बोले- तेरे जैसा.


बस वे हंस दिए.


मैंने कहा- अंकल आप सीरीयस हैं या मज़ाक कर रहे हैं?

उन्होंने बोला- तू क्या चाहता है?

तो मैंने बोला- अंकल लड़की पटाने में बड़ी झंझट हैं और खर्चा भी होता है और डर भी रहता है. अगर आप नाराज़ ना हों, तो हम दोनों की ख्वाहिश पूरी हो सकती है.

वो बिना कुछ बोले उठे और चले गए.

मुझे अन्दर से बहुत डर लगा, फिर सोचा कि जो होगा देखा जाएगा.


दो दिन बाद अचानक से अंकल का फोन आया- अमित आज तुम्हारी आंटी बाहर गई हैं, तो आज हम दोनों के लिए अपने सपने को सच करने का बड़ा बढ़िया मौका है.

यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ, जैसे मुझे मन माँगी मुराद मिल गई हो. मैं जल्दी से उनके घर पहुंचा, वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे.


उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और एक जोरदार किस किया. मुझे भी उनसे लिपटना बहुत अच्छा लगा. फिर उन्होंने मुझे अपने बेड पे बिठाया और अपनी बांहों में भर कर मेरे होंठों को चूमने लगे. मैं भी उनका साथ दे रहा था. हम दोनों एक दूसरे से कसके चिपके हुए चूम चाट रहे थे और एक दूसरे के कपड़े भी उतारते जा रहे थे. फिर हम दोनों केवल जांघिया में आ गए.


अब तक अंकल ने एक ब्लू फिल्म लगा दी, जो गे सेक्स की ही थी. उस फिल्म में एक लड़का दूसरे लड़के का लंड अपने मुँह में लेकर चूस रहा था. मुझे ये देख कर बहुत अजीब लगा.

मैंने अंकल से पूछा- ये क्या है?

तो उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल कर कहा- खुद ही करके देख लो.

उनका लंड काफ़ी बड़ा था. पहले तो मुझे थोड़ा अजीब लगा, फिर मैंने सोचा कि करके देखते हैं.


जब मैंने उनका लंड अपने मुँह में लिया, तो उसमें से जो खुशबू आ रही थी, वो बड़ी मारू थी. शायद अंकल ने अपना लंड साबुन लगा के धोया था. मुझे उनका लंड चूसने में बहुत अच्छा लग रहा था. वो भी आंखें बंद कर के मज़ा ले रहे थे.


काफ़ी देर तक अंकल का लंड चूसने से मैं भी उत्तेजित हो गया था. फिर मैंने भी अपना कच्छा उतार दिया और उनके लंड का स्वाद लेने लगा. वो मेरे लंड को अपने हाथों से सहला रहे थे. पहली बार किसी ने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया था, तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. कभी वो मेरे लंड को सहलाते, कभी मुट्ठी में दबा कर आगे पीछे करते और कभी नीचे आंड को सहलाते. मुझे तो बिल्कुल जन्नत का एहसास हो रहा था.


उन्होंने बोला- अमित बेटा, तेरा लंड तो काफ़ी बड़ा और मोटा है, बहुत मज़ा आएगा इसको चूसने में.

यह सुनकर मेरा जोश बढ़ गया और मैं उनके लंड को और भी जोर के साथ चूसने लगा. अब मैं अंकल के लंड को अपने गले तक मुँह में भर ले रहा था.

तभी अचानक से वो मुझे रोकने लगे, लेकिन मैं नहीं रुका और उनके लंड का सारा पानी मेरे मुँह में निकल गया, जिसको मैं पी गया.


अंकल अभी भी मेरा लंड अपने हाथ में लिए आगे पीछे कर रहे थे. मैं बोला- अंकल मुझे भी तो पूरा मज़ा दिलाओ.

तो उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में रख लिया और चूसने लगे. मुझे तो जैसे जन्नत का मज़ा मिल रहा था, लेकिन जो मज़ा लंड चूसने में था, वो चुसवाने में नहीं आ रहा था. मैंने 69 की पोज़िशन बना ली और उनका लंड दोबारा चूसने लगा. काफ़ी देर हम दोनों एक दूसरे का लंड चूसते रहे.


फिर अंकल ने बोला- अमित, ज़रा अपनी गांड का मज़ा भी तो दिलाओ.

मैंने बोला- अंकल, मैंने पहले कभी भी गांड में लंड नहीं लिया है.

तो वो बोले- कोई बात नहीं बेटा, मैं हूँ ना, तुमको कोई परेशानी नहीं होगी.


फिर उन्होंने तेल की बोतल निकाली और ढेर सारा तेल मेरी गांड पे लगा कर मालिश करने लगे. मैं भी बड़े प्यार से अपनी गांड पर तेल लगवा रहा था. वो बीच बीच में मेरी गांड में अपनी उंगली भी डाल रहे थे, जिससे गांड थोड़ी ढीली हो जाए.

फिर उन्होंने थोड़ा सा तेल अपने लंड पर लगाया और बोले- अमित बेटा, मेरा लंड अपनी गांड में लेने के लिए तैयार हो जाओ.

मैं डरते हुए गांड में लंड लेने को राजी हो गया.


उन्होंने मुझे पीठ के बल बेड पर लिटा दिया और मेरी टांगें अपने कंधे पर रख लीं, जिससे मेरी गांड उभर कर सामने आ गई. अंकल ने मेरे कंधों को कसके पकड़ लिया. पहले तो वो मेरी गांड में अपनी उंगली डालके उसको आगे पीछे करते रहे. मुझे उनकी उंगली से बहुत मज़ा आ रहा था.


फिर उन्होंने अपने लंड का सुपारा मेरी गांड के छेद पर लगा दिया. अंकल बोले- अमित बेटा ज़रा मेरा लंड संभाल लेना.


मुझे तो उंगली से बहुत मज़ा आया था, तो मैं बहुत खुश था. मुझे लगा था कि इसी तरह से लंड को लेने में मजा आएगा. लेकिन जैसे ही लंड का सुपारा मेरी गांड में घुसा, तो ऐसा लगा जैसे मेरी गांड फट गई. मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा था. मैं चिल्लाने को हुआ, लेकिन अंकल ने फ़ौरन ही मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और लंड को धीरे धीरे मेरी गांड में घुसाते चले गए.


फिर वो थोड़ी देर रुके और आहिस्ता आहिस्ता से लंड को आगे पीछे करके मेरी गांड को चोदने लगे.

अब दर्द थोड़ा सा कम हो गया था और मुझे गांड मरवाने में मज़ा आने लगा था. मैं मज़े में बड़बड़ाने लगा- उम्म्ह… अहह… हय… याह… अंकल.. और चोदो.. कसके चोदो.. फाड़ दो मेरी गांड को.. आह.. और जोर से चोदो.. बड़ा मज़ा आ रहा है.

अंकल भी ये सुनके जोश में आ गए और कस कसके धक्के लगाने लगे.


लगभग 15 मिनट की चुदाई के बाद अंकल बोले- मेरा माल बाहर आ रहा है.

मैं बोला- अंकल उसको मेरी गांड में ही गिरा दो.


दो तीन जोरदार धक्के लगाने के बाद अंकल का माल बाहर निकल गया और अंकल ने लंड रस से मेरी गांड को पूरा भर दिया. फिर मैं उनके लंड को मुँह में लेके चूसने लगा और वो निढाल होकर लेट गए.


मैंने बाथरूम में जाकर अपनी गांड को धोया और फिर अंकल के बगल में आकर लेट गया. हम दोनों फिर से एक दूसरे से लिपटकर पति पत्नी की तरह प्यार करने लगे. मुझे अपनी गांड की चुदाई में जो मज़ा मिला, वो जिंदगी में कभी भी महसूस नहीं हुआ.

हम दोनों दोबारा से एक दूसरे के लंड को मुँह में लेकर चूसने लगे.


अब अंकल बोले- अमित बेटा, तू तो अभी भी प्यासा ही है, मैं अभी तेरी प्यास बुझाता हूँ.

इतना कह कर वो मेरे लंड को कसके चूसने लगे और अपने मुँह को आगे पीछे करने लगे. मुझे लंड चुसवाने में अब बहुत मज़ा आ रहा था. मैं भी उनके लंड को कस कस के चूस और चाट रहा था.

मैं बोला- अंकल, मुझे भी तो गांड का मज़ा दिलाओ ना.


तब वो थोड़ा सा चुप हो गए, फिर बोले- तूने आज मुझे बहुत मज़ा दिया है, तो मैं तुझे निराश कैसे कर सकता हूँ. लेकिन बेटा मेरी गांड में आज तक कोई लंड नहीं गया, इसलिए थोड़ा ध्यान से चोदना.

यह सुनकर मेरी तो खुशी का कोई ठिकाना ही ना रहा क्योंकि आज मैं एक कुंवारी गांड मारने जा रहा था.


मैंने भी अंकल के जैसे तेल लेकर अंकल की गांड में लगाना शुरू कर दिया और अपनी उंगली भी उनकी गांड में डाल रहा था, जिससे अंकल की गांड भी थोड़ी फैल जाए.


फिर मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और अंकल की गांड में पूरा लंड एक साथ डाल दिया.

अंकल दर्द से तड़प उठे और बोले- तुम्हारी उम्र में यही प्राब्लम है, हर काम में जल्दी रहती है. मेरी गांड की माँ चोद दी.

मैंने बोला- सॉरी अंकल.

फिर मैं धीरे धीरे अंकल की गांड में अपने लंड से धक्के लगाने लगा. उनके चेहरे से दर्द साफ़ महसूस हो रहा था. मैंने आगे झुक कर अंकल के होंठों और सीने को चूसना और चाटना शुरू कर दिया. धीरे धीरे उनको भी मज़ा आने लगा और वो भी भरपूर साथ देने लगे.


लगभग 15 मिनट बाद मैंने अपना सारा माल उनकी गांड में भर दिया और निढाल होकर अंकल के ऊपर ही गिर गया.


वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे शानदार दिन था. थोड़ी देर बाद हम दोनों ने एक साथ नहाया और फिर मैंने कपड़े पहन कर अंकल से विदा ली. उन्होंने बड़े प्यार से मेरे होंठों को अपने होंठों में भर के चूसा और बोले- तुझे छोड़ने का मन नहीं कर रहा.

मैं बोला- अंकल जाने का मन तो मेरा भी नहीं है, सोच रहा हूँ एक बार फिर से आपका लंड अपनी गांड में ले लूँ. लेकिन देर बहुत हो गई है, आंटी आने वाली होंगी. अब जब भी मौका मिलेगा, हम ऐसे ही मिलते रहेंगे.

उसके बाद हम दोनों के बीच ये सिलसिला लगातार चल रहा है. हम दोनों एक दूसरे की गांड मार के अपनी हवस मिटा लेते हैं. मुझे गांड मारने से ज़्यादा गांड मराने में मज़ा आता है

Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई

 Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई हाय . मैं फिर से हाजिर हूं।मैं आपके समक्ष एक नई कहानी बताता हूँ जब कि मै बिलासपुर स...