कर्ज के लिए बीबी को चुदवाया - wife got fucked to repay the debt

 कर्ज के लिए बीबी को चुदवाया - wife got fucked to repay the debt

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


नमस्कार दोस्तों ! आप सभी ने मेरी पहली कहानी  सिनेमा हॉल में मस्ती गोदाम में चुदाई अब तक पढ़ ली होगी। मुझे जितनी ईमेल मिली हैं उन सबसे तो यही लगता है की आपको कहानी बहुत पसंद आयी. आप सबकी प्रार्थना पर मैं एक नई कहानी आप सबके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ.


यह कहानी काल्पनिक है, मनोरंजन मात्र के लिए लिखी गयी है।


मेरा नाम विक्रम है, जयपुर में रहता हूँ. मेरा कद 5 फुट 11 इंच, उम्र 31 वर्ष है। पर यह कहानी मेरी पत्नी रीना की है जिसकी उम्र 27 वर्ष, रंग सांवला, बूब्स साइज 34B, कद 5 फुट 2 इंच, एकदम दुबला छरहरा कामुक शरीर … मेरी बीवी रीना को जो कोई एक बार भी देख लें वो गच्चा खा जाये कि यह लड़की शादीशुदा भी हो सकती है क्या!


सीधा कहानी पे आता हूँ। बात करीबी एक वर्ष पुरानी है. मेरे कंप्यूटर बिज़नेस में बहुत घाटा हो चला था, मेरे ऊपर दो लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया था। मासिक किस्त भी भर पाना मुश्किल हो गया था।

तभी रीना ने मुझे सुझाव दिया कि वो अगर कहीं कुछ महीने नौकरी कर लेगी तो मुझे मदद मिल जाएगी.

मैंने काफी देर सोच कर उसे हाँ कह दिया।


अब रीना ने एक प्रमुख ऑनलाइन रोजगार साइट पे आवदेन शुरू कर दिए। तभी एक सप्ताह बाद रीना मुझे बताया कि एक प्रमुख प्राइवेट कंपनी ने उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया है।

मैंने खुश होते हुए कहा- यह तो बहुत अच्छी बात है.

पर रीना ने उदास होते हुए कहा- पर पोस्टिंग गुरुग्राम में है।


मैंने काफी देर मौन रहते उसे पूछा- सैलरी कितनी दे रहे हैं?

रीना बोली- 30,000 रुपये मासिक।

मैंने उसका उत्साह बढ़ाते हुए कहा- ठीक है, कर लो इंटरव्यू।

रीना गुरुग्राम चली गयी और नसीब का खेल देखो उसको जॉब भी मिल गयी। देखते देखते एक महीना बीत गया, हम लोग रोज़ाना मोबाइल चैट से संपर्क में थे।


अचानक मेरे दिल को धक्का लगा जब रीना मेरे कॉल को कट करने लगी। पूछने पे बोलती थी ‘ऑफिस का काम रहता है। बॉस फ़ोन करते रहते हैं।’

अब मुझे अपनी हालत पर गुस्सा बहुत आ रहा था।


इस तरह 3 महीने निकल गए। किश्तें चुकने लगी।


एक दिन मैं शाम को चाय दूकान पे बैठा था, तभी मैंने देखा सामने से रीना चली आ रही और उसके हाथ में बड़ा बैग है।

पिछले 1 हफ्ते से बात नहीं हुई थी और उसका अचानक से दिखना मुझको छलावा लगा।


पर वो तुरंत मेरे पास आयी और बोली- बहुत भारी है बैग … उठा लीजिये।

तभी मुझको यकीन हो चला ‘हाँ ये रीना ही है।’


मेरे मन में जैसे बारिश होने लगी और मोर नृत्य करने लगे बड़े उत्साह के साथ मैंने उसका बैग लिए और हम घर को चल दिए।


रात को खाना हमने बाहर से मंगवा लिया, फिर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे लगा कि रीना खूब बात करेगी जैसा उसका स्वभाव है चुलबुला … पर वो शाम से बिलकुल चुप थी।

मुझे लगा थकी होगी तो कुछ बोलना उचित न समझा और हम सो गए।


सुबह रोज की तरह मैं अपनी शॉप पे गया। तभी शाम को चार बजे मुझे बैंक से एक मेसेज मिला कि मेरा पूरा दो लाख क़र्ज़ चुकती हो गया है।

मेरा दिमाग ख़राब हो गया, कुछ समझ नहीं आया. मुझे लगा कि बैंक की तरफ से कोई गलती हो गयी होगी।

क्यूंकि बैंक अभी होने वाला बंद था तो मैंने अगले दिन पता करना उचित समझा।


रात को डिनर करने के बाद मैं और रीना सो रहे थे।

तभी मैंने पूछा- रीना क्या बात है आजकल बड़ी गुमसुम रहती हो? पहले तो खूब बोलती थी.

रीना चिढ़ते हुए- आप सो क्यों नहीं जाते, मैं बहुत थक गयी हूँ।

मैंने कर्ज वाली बात बतानी चाही पर उसके गुस्से को देखते हुए उस तरफ मुँह मोड़ के सो गया।

अगले दिन में फिर अपने शॉप गया, फिर दो बजे लोन वाली बात याद आ गयी, बैंक जाकर मैंने अधिकारी से पूछा- सर, मेरा लोन अकाउंट पूरा खत्म बता रहा है.

बैंक अधिकारी कंप्यूटर में देखते हुए- हाँ सर, आपका लोन पूरा पे हो गया है.

मैं चौंका और फिर पूछा- सर ठीक से देखिए कोई गलती हो गयी होगी।

बैंक अधिकारी- कमाल करते हो विक्रम सर, आपकी वाइफ ही तो चेक लगा कर गयी है. क्यों परेशान कर रहे हो। कोई बकरा मिला नहीं आज आपको?


मेरा दिमाग सुन्न हो चला, इतने पैसे इतने कम समय में रीना के पास कहाँ से आ गए? वो भी पूरे दो लाख!


मैं बाइक भगाते हुए घर गया, मुझे रीना से बहुत सवालों के जवाब लेने थे।


जैसे ही मैं घर में घुसा, मैंने पाया कि रीना घर पर है ही नहीं.

अब मेरी हालात टाइट हो गयी … आखिर कहाँ गयी मेरी रीना? कहाँ से आये इतने पैसे?


मैंने उसे बहुत फ़ोन लगाए पर उसका फ़ोन स्विच ऑफ आया। दोस्तों और पड़ोस में भी उसका अता-पता नहीं था।

अब रात के 11 बज रहे थे, मुझे घबराहट सी होने लगी। अंत में अपने घर के अंदर थकान से गिर पड़ा।


रात के 11:30 बजे दरवाजे पे मैंने देखा रीना खड़ी थी।


मैं दौड़ कर उसके पास गया और उसे बाँहों में भर लिया. वो रोने लगी।

मैंने उसे बिलकुल नहीं डांटा और हम रूम में चले गए।


मैंने उसे खाने को पूछा और किचन में जाकर कुछ फटफट नूडल बना लिए।

फिर हम सोने को हुए।

मैंने उसके सिर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसका रोना बंद हो गया था।


मैंने उसे ह्ल्के से कहा- रीना, अगर मन में कोई बात है, तो उसे फ़ौरन बता दो। मैं पति हूँ तुम्हारा अब मुझसे भी छुपाओगी?

रीना- शुरू शुरू में ऑफिस में सब कुछ ठीक चल रहा था दो महीने तक … फिर बॉस की मुझ में कुछ ज्यादा दिलचस्पी होने लगी, वो मुझे खूब काम देते और तारीफ भी करते, मुझे तो बहुत अच्छा लगने लगा कि मेरी जल्दी तरक्की होगी।

मैं- हाँ …तो फिर क्या हुआ ऐसा?

रीना- धीरे धीरे मुझे सहकर्मियों से उनके बारे में काफी कुछ पता लगने लगा.

मैं- अच्छा थोड़ा थोड़ा समझ में आ रहा है.


रीना- फिर एक दिन उन्होंने कंपनी की कोई डील बताई और मुझे साथ में शिमला चलने को कहा. मैंने काफी मना भी किया. फिर उन्होंने मुझे इशारों में कहा की यह डील जरूरी है, नहीं तो आपका यह नौकरी का आखिरी महीना हो सकता है.

विक्रम- फिर तुम चली गयी? इतनी बड़ी बात मुझे बतानी नहीं समझी?

रीना- मुझे कुछ समझ नहीं आया, क्या करूँ … या ना करूँ! मैंने पता नहीं क्यों हाँ बोल दिया और चली भी गयी.


विक्रम ठण्डे मन से- अच्छा फिर क्या हुआ?

रीना ने पूरी बात बतायी:


हम लोग शिमला पहुंच गए और वाकई में वहां ऑफिस का कोई काम था. मुझे खुद पे पछतावा हुआ कि मैंने बेकार ही बॉस पे शक किया और मुझे भरोसा करना चाहिए था।

दूसरे दिन फिर हम लोग होटल में अपने-अपने रूम में थे तभी बॉस का मैसेज आया- डिनर करते हैं साथ में!

तो मैंने हां कर दी।


मैं एक दम सज धज के काली जीन्स और लाल कुर्ती में नीचे गयी। मैंने मंगलसूत्र भी पहना हुआ था, सिंदूर, लाल लिपस्टिक और शृंगार भी किया था।

बॉस- क्या बात है मैडम, आप तो पूरी क़यामत लग रही हो!

रीना- सर, आप कुछ भी बोलते हैं। रोज के जैसे ही तो है.

बॉस- अरे हम झूठी तारीफ भी मुफ्त में नहीं करते हैं, पूरा दाम वसूल लेते हैं.

रीना- क्या मतलब? मैं समझी नहीं!


बॉस- अरे बाबा! छोड़ो ना … बताओ कैसा लग रहा है? शिमला पहले कभी आयी हो पति के साथ?

रीना- कहाँ सर … इनका तो शॉप है कंप्यूटर की … आजकल पूरा वक़्त उसी में दे देते हैं.

बॉस ठंडी आह भरते हुए- हाँ समझ सकता हूँ, तो क्या पियोगी आप?

रीना- माफ़ करियेगा सर, मैं दारु नहीं पीती.

बॉस- ओह रीना … अब ऐसे ना बोलो. एक तो इतनी मुश्किल से तुम हाँ बोलकर शिमला आयी हो और फिर वाइन को दारू बोल रही हो। शो सम क्लास डार्लिंग!

मैं- ओके, आगे क्या हुआ?


रीना- पता नहीं, वो माहौल वो जगह मैं खुद को रोक ना सकी और मैंने पीना शुरू कर दिया.

बॉस- देखा, कुछ तो नहीं होता। आप लोग ऐसे ही डरते हो।

रीना- फिर मुझे याद है हमने कुछ खाना खाया फिर मेरे रूम में बॉस छोड़ने गए.


मैं धीरे से- आगे?


रीना- बॉस ने मुझे रूम में ले जाते ही बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर आ गए.

विक्रम को मन ही मन गुस्सा आ रहा था पर साथ में उत्तेजना भी होने लगी थी- फिर आगे क्या हुआ, बताओ मुझे पूरा एक-एक शब्द नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं!


रीना डरते हुए- फिर वे मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगे, पता नहीं मैंने विरोध क्यों नहीं किया, उल्टा साथ देने लगी, मुझे उनका स्पर्श अच्छा लगने लगा। वो अपने हाथों से मेरे बूब्स ऊपर से दबाने लगे और फिर अंदर मेरी कुर्ती में हाथ डाल कर पूरा जिस्म सहलाने लगे.


रीना ने मेरी आँखों में वासना का अनुभव किया फिर इतराते हुए बोली- उन्होंने मेरी कुर्ती उतार दी, मैं गुलाबी ब्रा में थी। वो पागलों जैसे मेरे बूब्स दबाने लगे, फिर मेरी ब्रा खोल दी और मेरे बूब्स चूसने लगे, मेरे निप्पलों को हल्के हल्के चाटने लगे और बीच-बीच में काटने भी लगे.

मुझे बहुत तेज़ उत्तेजना होने लगी. फिर मेरी उन्होंने मेरी जीन्स उतार दी और पैंटी के ऊपर से मेरी चुत सहलाने लगे। एक झटके में उन्होंने मेरी पेंटी उतार दी और अपनी जीभ मेरी चुत पे लगा दी.


इतने में मैंने अपना एक हाथ रीना के बूब्स पे रखा और कहा- फिर आगे क्या हुआ?


रीना- मैंने तो जैसे अपने आप को उनको पूरा सौंप दिया था। इतने दिनों बाद पुरुष के स्पर्श और उस वाइन ने मुझे मदहोश कर डाला था। मैं पूरी नंगी थी। बदन पे सिर्फ मेरा मंगलसूत्र था और कुछ नहीं।

इतने में वो 69 की अवस्था में आ गए। अब उनके लण्ड का सुपारा मेरे होंठों पे लगने लगा और वो मेरी चुत को चाटे जा रहे थे। मुझ में हवस सवार हो गयी और मैंने वो लण्ड का बड़ा सुपारा अपने मुँह में ले लिया।


मैं चुत में उंगली करते हुए- अच्छा और तूने चूस लिया? मेरे से क्या बड़ा था क्या साले का?

रीना- ना! औसत था, रहा होगा कुछ 5-6 इंच के आसपास, मोटा शरीर था, उम्र लगभग 40 के आसपास होगी।

15-20 मिनट तक हमने 69 किया, फिर वो मेरे ऊपर आ गए, अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाया और मेरी चुत पर लण्ड को सेट कर दिया.

मैं अपनी बीवी की चुत में तेज उंगली करते हुए- फिर क्या हुआ?

रीना- होना क्या था … फच्च से लण्ड अंदर घुस गया और वो धक्के लगाने लगे। शुरू शुरू में धीरे धीरे धक्के लगाए और बड़बड़ाने लगे ‘इंटरव्यू के समय ही मैंने सोच लिया था कि रंग बेशक सांवला है पर क्या जोरदार फिगर है, क्या सेक्सी माल है। मस्त चुदाई करूँगा साली की … इसलिए नौकरी पे रखा तुझे!


मैंने उनकी फालतू बातों को नजर अंदाज़ किया और सेक्स का आनन्द लेने लगी।


फिर उनके धक्के तेज़ होने लगे। मेरी सिसकारियां चीखों में बदल गयी। वो धक्का लगाते … मैं जोरदार चीखती ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मेरे बूब्स ऊपर से दबा-दबा के जोर-जोर से चोदने लगे। मैं भी कमर हिला-हिला कर साथ देने लगी। मेरे पूरे जिस्म का जैसे इस्तेमाल किया जा रहा था और मैं बेशर्मी से होने दे रही थी।


फिर मैंने उन्हें रुकने को कहा तो वो बोले- क्या हुआ डार्लिंग? मज़ा नहीं आया?

मैंने उन्हें लिटाया और उनके ऊपर आ गयी। उनके लण्ड को अपनी चुत पर सेट किया और बैठ गयी। मैं उनके लण्ड पर कूदने लगी। आह आह ओहो ओहो!

वो बोले- लव यू स्वीट हार्ट … चोद चोद … तेज तेज!


काफी देर हमने इस पोजीशन में सेक्स किया होगा। फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनने को कहा।

मैं उलटी हुई और वो पीछे से आये फिर लण्ड घुसा कर मेरी चुत को पीछे से तेज़ तेज़ चोदने लगे।

आह आह … क्या बताऊँ … मुझे तो आपकी याद आने लगी थी विक्रम! मैं चिल्लाने लगी ‘और तेज चोद मुझे साले और तेज! मर्द नहीं है क्या? दम लगा साले!’


बॉस के धक्कों की स्पीड तेज़ हो गयी जैसे राजधानी एक्सप्रेस!

‘आह आह … चोद मुझे! और तेज़!’

फिर एक तेज़ धक्का आया और उन्होंने पूरा कंडोम वीर्य से भर दिया।


मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी।

और हम दोनों बिस्तर पर निढाल होकर सो गए।


मैं- इस बॉस ने तो पूरा काम ही कर डाला, पर तुम्हारे पास इतने पैसे आये कहाँ से? यह मुझे समझ नहीं आया।

रीना- सुबह सुबह 6 बजे मोबाइल बज रहा था। मैं नींद में थी, मैंने बिना देखे, अब मुझे लगा आपने किया होगा. तो मैंने उठा लिया और बोली ‘हेलो’

तो उधर से किसी महिला की आवाज़ आयी, वो गुस्से से बोली- कौन है?

मैंने अपना नाम बताया और कहा- मैं इनकी ऑफिस स्टाफ हूँ कोई काम है तो बतायें!

इस महिला ने गुस्से में फोन कट कर दिया. मैंने नाम पढ़ा तो उसमें वाइफ लिखा था।

मेरी हालात ख़राब हो गयी मैंने बॉस को कुछ नहीं बताया और चुपचाप बाथरूम चली गयी।

उसी दिन हम वापस गुरुग्राम आ गए फिर अगले दिन मैं ऑफिस में गयी। मुझे बहुत शर्म और खुद पे गुस्सा आ रहा था। मैं बॉस से नजर चुरा रही थी।

जैसे ही दिन ख़त्म हुआ सारा स्टाफ चला गया, बॉस ने मुझे रुकने कहा और अपने केबिन में बुलाया और गुस्से से बोले की मुझे यह जॉब छोड़नी होगी, उनकी वाइफ को सब पता चल गया है.

मैंने गिड़गिड़ाते हुए कहा- सॉरी! इसमें गलती मेरे अकेले की नहीं थी, आप भी बराबर के कसूरवार हो।

बॉस- रीना तुम्हें जाना ही होगा, अपना इस्तीफा दो और निकलो.

रीना- नहीं, मैं नहीं जा सकती.


बॉस- क्या लोगी मेरा पीछा छोड़ने का?

रीना कुछ देर सोचते हुए- अच्छा ठीक है, दो लाख दे दीजिए, चली जाऊँगी.

बॉस- बस इतनी सी बात!


मेरी बीवी बोली- उन्होंने फटाफट मेरे बैंक खाते में दो लाख ट्रांसफर कर दिए। और फिर मैं सब कुछ छोड़कर आपके पास चली आयी। बाकी सब तो आप जानते ही हो। मुझसे गलती हो गयी मुझे माफ़ कर दीजिए। किसी को भी मुँह दिखाने लायक नहीं रही मैं तो!


मैं अब पूरा उत्तेजित हो चला था, मैंने बस इतना कहा- अरे रीना, हो जाती हैं ऐसी नादानियाँ! तुम होश में नहीं थी। आगे पूरा जीवन पड़ा है.

इतना बोलते हुए मैंने अपनी पत्नी रीना को सम्पूर्ण नग्न किया फिर दो घण्टे तक उसके जिस्म का पूरा आनंद लिया।


पर उस रात 3 बजे तक मैं सो नहीं पाया, मेरे मन में एक बात बार-बार खटक रही थी। ये बॉस वाली चुदाई की बात तक तो ठीक थी … पर रीना आज पूरे दिन से कहाँ गयी थी?

अब इतना कुछ हो जाने के बाद भी मैं हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था की रीना से सब पूछूँ।

मैंने अपने मन को समझाते कहा ‘अब जो हुआ सो हुआ … इसे अब बदला तो जा नहीं सकता। बात की खाल निकालने से कोई फायदा नहीं!’

और चादर औढ़ कर रीना से चिपक कर सो गया।


तो मित्रो कैसी लगी मेरी यह काल्पनिक कहानी?

आखिर रीना गयी कहाँ थी सारा दिन?

आपके सुझाव और जवाब ईमेल के माध्यम से दें।

चार दिन का बिछोह फिर लम्बा - Four days of separation then longer

 चार दिन का बिछोह फिर लम्बा -  Four days of separation then longer

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां
Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



में आपने पढ़ा कि चार दिन की जुदाई के बाद ही पति ने मेरी चूत की जोरदार चुदाई कर डाली। अब मैं आपको उससे आगे की कहानी बताने जा रही हूं.


मुंबई से वापस आने के बाद पहली रात को मैं पति का लंड अपनी चूत में ही लेकर सो गई थी. उसके बाद अगली तीन रातों में मेरे घरवाले ने मेरी चूत को जमकर चोदा.


जब चूत की चुदाई की भूख भरने लगी तो अब ध्यान गांड की चुदाई पर जाने लगा. हम दोनों गांड चुदाई नहीं कर पा रहे थे. इसके लिए हमें दिन का समय चाहिए था. दिन में हम दोनों आराम से मजे लेते हुए गांड चुदाई का आनंद लेना चाहते थे. मगर बेटी के होने के कारण दिन में वो सब करने का मौका नहीं मिल पा रहा था.


जब तीन दिन गुजर गये तो मेरी बेटी ने कहा कि अब उसको कॉलेज जाना है नहीं तो फिर पढ़ाई का नुकसान हो जायेगा.


जब रात को मैंने पति के लंड से चुदते हुए उनको ये खबर सुनाई तो वो खुश हो गये. मैंने उनसे कह दिया कि आज अपना माल जी भर कर निकाल लो ताकि कल दिन में आराम से गांड चुदाई का मजा लिया जा सके.

पति ने कहा- अगर ऐसी बात है तो फिर सुबह ही तुम्हारी चूत में वीर्य निकालूंगा. अब ऐसे ही चूत में लंड को रख कर सो जाते हैं. नींद आने के बाद लंड खुद ही चूत से बाहर निकल आयेगा. अगर अभी निकालूंगा तो फिर तुम्हें चादे बिना रहा नहीं जायेगा.


इसलिए उनके कहने पर वो मेरी चूत में अपना लंड डाल कर सो गये.


सुबह के पांच बजे के करीब मेरी आंख खुल गई. मैंने उठते ही पति के लंड को अपने मुंह में लेकर उनका लंड गीला कर दिया. काफी देर तक मुंह में लंड को रखने के बाद उनका लौड़ा अच्छी तरह से गीला हो गया ताकि चूत में आराम से जा सके.

मोटा लंड चूसते हुए मेरी चूत भी चिकनी हो चली थी. उसने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. इसलिए बस अब चूत में लंड जाने की देरी रह गई थी.


पति ने उठ कर मेरी गीली चूत में अपना लंड ठोका और दस मिनट तक मजे लेकर मेरी चुदाई कर डाली. दनादन चूत चुदाई के बाद एकदम से उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में बिल्कुल जड़ तक घुसा दिया और उनके लौड़े से वीर्य निकल कर मेरी चूत में गिरने लगा. इधर मेरी चूत ने अपना पानी निकाल दिया. दोनों शांत हो गये.


उठने के बाद मैंने सुबह के सारे काम जल्दी से निपटा लिये. नहा धोकर मैंने नाश्ता बना दिया. फिर बेटी भी कॉलेज के लिए दस बजे के करीब निकल गई.


मैंने उसके जाते ही मैक्सी पहन ली. बाथरूम में जाकर एक बार फिर से नहा ली ताकि चुदाई का मजा अच्छे से लिया जा सके. नहाकर जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो पति मेरी मैक्सी को घूर रहे थे. मेरे चूचे मेरी मैक्सी में इधर-उधर डोल रहे थे. पति को भी पता चल गया था कि मैंने चुदाई की पूरी तैयारी कर ली है और इसी वजह से मैंने मैक्सी के नीचे कुछ भी नहीं पहना है.


फिर पति भी उठ कर नहा लिये और उन्होंने भी पैंट और टी-शर्ट पहन लिया. मैं अपनी गांड अपने पति से चुदवाने के लिए बेकरार थी. बेटी के जाने के बाद घर में हम दोनों ही रह गये थे. मैंने अपने पति का हाथ पकड़ा और उनको पकड़ कर खुद ही बेडरूम में लेकर जाने लगी. मेरे पति ने चलते हुए ही मेरी गांड को दबाना शुरू कर दिया था. आज इस गांड की चुदने की बारी थी. चूत चुदवाते हुए तो मुझे कई दिन हो चुके थे. पति को भी कुछ नया करने का मौका मिल रहा था इसलिए वो भी ज्यादा ही उत्तेजित हो रहे थे.


उन्होंने चलते हुए ही मेरी गांड को मैक्सी के ऊपर से दबा दिया. मैंने पीछे मुड़कर उनका लंड सहला दिया. फिर वहीं पर रुक कर हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.


लेकिन बाहर यह सब करना ठीक नहीं था. घर में खिड़की दरवाजे लगे थे जिनसे बाहर से कोई भी देख सकता था. इसलिए एक दो बार होंठों को चूसने के बाद हम रूम की तरफ बढ़ने लगे. पति ने चलते हुए ही अपना लंड दो-तीन बार मेरी गांड पर लगा कर ये बता दिया था कि आज मेरी गांड की चुदाई जमकर होने वाली है.


रूम में जाते ही उन्होंने मेरी मैक्सी को ऊपर उठा दिया. मैं नीचे से नंगी थी. मैंने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. मेरे नंगे चूतड़ देखते ही पति ने एक बार उनको हाथ से दबा दिया और फिर मेरी गांड को किस करने लगे. मैंने मैक्सी को अपने हाथों में ऊपर ही पकड़ रखा था और गांड पर पति के होंठों का मजा ले रही थी. फिर उन्होंने उठकर अपनी पैंट के अंदर से ही अपना तना हुआ लंड मेरी गांड पर सटा दिया और मेरी गर्दन को चूमने लगे. मैंने भी पीछे की तरफ घूम कर उनके होंठों को चूस लिया.

पतिदेव ने मुझे बेड पर धक्का देते हुए झुका दिया और मेरी मैक्सी उठा कर अपना लंड मेरी चूत पर पीछे से ही रगड़ने लगे. मैं चुदासी हो गई और अपनी गांड को पीछे करते हुए खुद ही अपने घरवाले के लौड़े पर रगड़ने लगी.

उन्होंने मेरी चूत को अपने हाथ से सहलाया और फिर मेरी गांड पर एक बड़ा सा चुम्बन दे दिया. फिर उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत पर पीछे से ही रगड़ा और लंड का टोपा मेरी चूत पर लगा कर एक धक्का दे दिया. मेरे पति का मोटा लंड गच्च से मेरी चूत में उतर गया.


वो मुझे कुतिया बनाकर वहीं बेड के किनारे पर चोदने लगे. दस मिनट तक मेरे पति ने ऐसे ही कुतिया बनाकर मुझे चोदा और फिर अपना लंड बाहर निकाल लिया.


उसके बाद मैं बेड पर ऊपर चढ़ गई और अपने दोनों पंजों को बेड से बाहर करते हुए अपना चेहरा और अपने चूचे मैंने बेड पर टिका लिये. इस पोजीशन में मेरी गांड उठकर पति के सामने आ गई और वो अपने लंड को हिलाते हुए मेरे पैरों के बीच में आकर खड़े हो गये. मैंने अपने मोटे चूतड़ों को अपने हाथों से फैलाकर रखा हुआ था.


फिर मैंने सुना कि पतिदेव ने अपना थूक अपनी हथेली पर लिया और उसको शायद अपने लंड के टोपे पर मलने लगे. दो मिनट के बाद उन्होंने दोबारा से थूका और मेरी गांड पर भी थोड़ा सा थूक मल दिया. अब मुझे भी थोड़ी सी घबराहट होने लगी थी और मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा था. मेरी गांड में सुरसुरी सी उठने लगी थी.


ऐसा भी नहीं था कि इससे पहले पति ने मेरी गांड नहीं मारी थी लेकिन मुझे गांड मरवाने में जितना मजा आता था उससे पहले डर भी बहुत लगता था. इससे पहले भी जब मैंने अपने पति से गांड चुदवाई थी तो उन्होंने मेरी गांड को खोल कर रख दिया था. पति का मोटा लंड गांड में समाने के लिए मैंने अपने आप को पूरी तरह से तैयार करने की पूरी कोशिश की.


थूक मलने के बाद मेरे घरवाले ने मेरी गांड के छेद पर अपने तगड़े लंड का मोटा सा सुपारा रख दिया और मेरी सांसें तेज होने लगीं. अब लंड मेरी गांड को चीरने के लिए तैयार हो चुका था. पति ने हल्का सा दबाव दिया तो मैं उचक गई लेकिन उन्होंने मेरे चूतड़ों को अपने हाथों से पकड़ कर वापस ही नीचे दबा दिया. फिर उन्होंने हल्का सा धक्का मारा तो सुपारा गांड में घुस गया.


मैं उछल गई. लंड बहुत मोटा था और गांड का छेद टाइट हो गया था. उन्होंने अपने हाथ से ही खुद ही मेरे चूतड़ों को फैला दिया और दबाव बढ़ाने लगे. लंड अंदर नहीं सरक रहा था.


फिर उन्होंने लंड पर दोबारा से थूका और फिर से दबाव बढ़ाया तो लंड थोड़ा अंदर सरकने लगा. मेरी गांड फैलने लगी. फिर पति ने एकदम से पूरी ताकत के साथ जोर का धक्का मार दिया और लंड मेरी गांड में उतार दिया.

मैं दर्द से चीख पड़ी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’


और उन्होंने मेरे चूचों को दबा दिया. उनका लंड मेरी गांड में उतर गया था लेकिन दर्द भी बहुत कर रहा था. फिर वो एक दो मिनट तक ऐसे ही मुझे पीठ पर चूमते रहे और फिर हल्के से मेरी गांड में धक्के देने लगे.

अब मेरा दर्द कम होता जा रहा था, गांड पूरी खुल कर फैलने लगी थी. उनका लंड पूरा गांड में फंस गया था.


धीरे-धीरे पति ने मेरी गांड में अपने धक्कों की गति तेज की तो मुझे भी मजा आने लगा. मेरी गांड की चुदाई शुरू हो गई. पति के लंड से गांड चुदवाने का मजा ही अलग है. मैं अपने पति के मोटे लंड को अब आराम से अपनी गांड में लेने लगी.


कुछ ही देर में मैं पति के लंड से चुदते हुए मदमस्त होने लगी. वो कभी मेरे चूचों को दबा रहे थे तो कभी मेरी पीठ को चूम रहे थे. मेरी गांड में पति का लंड तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था.


जब मेरी गांड चुदते हुए पूरी तरह से खुल गई तो मैंने पति को नीचे लिटा लिया और खुद उनके लंड पर बैठ कर मैंने पूरा लंड अपनी गांड में ले लिया. फिर मैंने पति की जांघों पर अपने हाथों का सहारा लेते हुए अपनी गांड को उनके लंड पर उछालना शुरू कर दिया. मैं मस्ती से अपने चूचे हिलाती हुई अपने पति से गांड चुदवा रही थी. मेरी छोटी सी कोमल गांड का भोसड़ा बना दिया मेरे पति के मोटे लौड़े ने। लेकिन मुझे बहुत मजा आ रहा था और पति के मुंह से भी कामुक सिसकारियां निकल रही थीं.


यूं ही कुछ देर पति के लंड पर कूदने के बाद उन्होंने मेरी गांड को कुतिया बनाकर चोदा. इस पोज में चोदने के बाद उन्होंने मुझे दीवार के सहारे लगा लिया और पीछे से मेरी गांड में लंड डाल दिया और चोदने लगे. फिर मेरी एक टांग को उठाकर चोदा. फिर मुझे सीधी खड़ी करके पीछे से लंड डाल दिया और मेरे मम्मे दबाते हुए चोदा. इतनी चुदाई करने के बाद हम दोनों थक गये थे. मगर पति का लंड अभी भी खड़ा हुआ था. वो मुझे बांहों में लेकर वहीं बेड पर लेट गये.


पति का लंड मेरी गांड से निकल गया था लेकिन ऐसा लग रहा था कि उनका लंड अभी भी मेरी गांड में घुसा हुआ है. मेरी गांड में चींटियां सी चल रही थीं. कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे.

फिर उसके बाद मैं उठ गई क्योंकि अब नहाने का मन कर रहा था. जब मैं नहा कर बाहर आई तो पति का लंड सो चुका था और उनकी आंख लग गई थी. मैंने पति का सोया हुआ लंड देखा और उसको बेड पर आकर अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी.


मेरे घरवाले की आंख खुली तो वो मेरे चूचों को फिर से भींचने लगे. मैंने उनका लंड फिर से पूरी तरह खड़ा कर दिया था. फिर मैंने उसको अपने मुंह में ले लिया. दो-तीन मिनट तक लंड को चूस कर गीला कर लिया. फिर मैं पति के साथ ही लेट गई.


लेकिन मेरे अंदर की चुदास फिर से जाग चुकी थी इसलिए मैंने उनके लंड की तरफ अपना मुंह कर लिया और अपनी चूत को उनके मुंह की तरफ कर दिया. उसके बाद मैंने उनके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मुझे पति के लंड से निकलने वाले नमकीन पानी का स्वाद चखने का मन कर रहा था. इसलिए मैंने तेजी के साथ उनके लंड को चूसने लगी. पति का लंड जब पूरी तरह से तन गया तो उन्होंने मेरी चूत को भी चूसना शुरू कर दिया.

जब वो भी सेक्स के लिए उत्तेजित हो गये तो उनके लंड से नमकीन पानी रस कर बाहर आने लगा. मुझे उनके लंड से निकल रहे पानी का स्वाद अपनी जीभ पर महसूस होने लगा. मैं उनके लंड को चूसते हुए उनके पानी का स्वाद लेती रही और वो मेरी चूत को चाटते रहे. मैंने पति के लंड को पूरा मुंह में ले लिया और उन्होंने मेरी चूत में जीभ को पूरी घुसा दिया. मैं बहुत चुदासी हो गई थी.


लगभग दस मिनट तक पति के मोटे लौड़े को चूसने के बाद उनके लंड में तनाव बहुत ज्यादा ही बढ़ गया मुझे लगने लगा था कि अब उनके लंड का वीर्य निकलने वाला है. मेरा मुंह भी दुखने लगा था. फिर दो मिनट बाद ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और पति के लंड ने भी अपना वीर्य मेरे मुंह में छोड़ दिया. मैंने अपने पति के लंड से निकलने वाला सारा वीर्य पी लिया. फिर दोनों शांत हो गये.


उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में रख दिया और मैं उनकी बांहों से लिपट गई. उसके बाद फिर मेरी आंख लग गई. मुझे पति का लंड चूत में लेकर लेटने के बाद ही नींद अच्छी आती है. फिर मैं दोपहर को उठी क्योंकि खाना बनाने का टाइम हो गया था.


मैंने उठकर खाना बनाया और तब तक बेटी के आने का समय भी हो गया था. मैंने पति को उठ कर कपड़े पहनने के लिए कह दिया क्योंकि वो अभी तक बेड पर नंगे ही लेटे हुए थे. वो उठकर नहा लिये और तब तक बेटी भी घर आ गयी.


तो दोस्तो, इस तरह चार दिन की जुदाई के बाद पति ने मेरी चूत और गांड की जमकर की चुदाई की. मैं उम्मीद करती हूँ कि मियां-बीवी की चुदाई की ये गांड चुदाई कहानी आपको पसंद आई होगी. मैं आगे भी हम पति-पत्नी की चुदाई की कहानियाँ आप तक लेकर आती रहूंगी.

आपको मेरी आज की गांड चुदाई कहानी कैसी लगी मुझे मैसेज करके बताना और कमेंट भी करना अगर अच्छी नहीं लगी हो तो. एक बात फिर मैं आपसे कहना चाहती हूँ कि कृपया गंदे कमेंट ना लिखें क्योंकि मुझे गंदे कमेंट बिल्कुल भी पसंद नहीं है. कहीं ऐसा न हो कि मैं आपके गंदे कमेंट्स के कारण आगे कहानी लिख ही न पाऊं. इसलिए आप कमेंट सोच-समझकर लिखें.

मेरी गांड चुदाई कहानी पढने के लिए धन्यवाद।

सुहागरात में भाभी की चूत और पत्नी की गांड मारी-3 - Fucked sister-in-law's pussy and wife's ass on wedding night-3

सुहागरात में भाभी की चूत और पत्नी की गांड मारी-3 - Fucked sister-in-law's pussy and wife's ass on wedding night-3

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


सुहागरात पर मेरी बीबी का डर भाभी के कहने पर कुछ काम हुआ. लेकिन अभी भी वो चुदाई से होने वाले दर्द से डर रही थी. मैंने उससे कहा- जाकर तेल की शीशी उठा लाओ और मेरे लंड पर ढेर सारा तेल लगा दो.

वो बोली- मुझे शर्म आती है.

मैंने कहा- अगर तुम मेरे लंड पर तेल नहीं लगाओगी, तो मैं ऐसे ही अपना सूखा लंड तुम्हारे छेद में घुसा दूंगा.

वो बोली- ना बाबा ना … ऐसा मत करना. जब तेल लगाने के बाद इतना दर्द होता है, तो बिना तेल लगाए तुम अपना औजार अन्दर घुसाओगे, तो मैं तो मर ही जाऊंगी. मैं तुम्हारे औजार पर तेल लगा देती हूँ.इतना कह कर वो उठी. उसने तेल की शीशी से तेल निकाल कर मेरे लंड पर लगा दिया. उसके तेल लगाने से मेरा लंड एकदम सख्त हो गया. उसके बाद वो मेरे कुछ कहे बिना ही पेट के बल लेट गई और बोली- प्लीज़ धीरे धीरे घुसाना.अब मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड के छेद पर रख दिया और फिर उसकी कमर के नीचे से हाथ डाल कर उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया। मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसके मुँह से आह निकल गई। मैंने थोड़ा जोर और लगाया उसके मुँह से हल्की सी चीख निकल गई। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 3″ तक घुस चुका था। मैंने थोड़ा सा जोर और लगाया तो वो फिर से चिल्लाने लगी और मेरा लण्ड 4″ तक घुस गया।मैंने उसकी चीख पर जरा सा भी ध्यान नहीं दिया। मैंने जोर का धक्का मारा तो वो तड़पने लगी और जोर जोर से चीखने लगी- दीदी, बचा लो मुझे, मैं मर जाऊंगी।इस धक्के के साथ मेरा लण्ड 5″ तक घुस गया। मैंने फिर से बहुत ही जोर का एक धक्का और मारा तो अपने हाथों को जोर जोर से बिस्तर पर पटकने लगी। उसने अपने सिर के बाल नोचने शुरु कर दिये और बहुत ही जोर जोर से चिल्लाने लगी। अब तक मेरा लण्ड शालू की गाण्ड में 6″ तक घुस चुका था।

मैंने पूरी ताकत के साथ फिर से जोर का धक्का मारा तो वो बहुत जोर-जोर से रोने लगी। लग रहा था कि जैसे वो मर जायेगी।

मैं रुक गया।

इस धक्के के साथ मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 7″ घुस चुका था। मैंने अपना लण्ड एक झटके से बाहर खींच लिया। पुक की आवाज के साथ मेरा लण्ड बाहर आ गया।

मैंने देखा कि उसकी गाण्ड का मुँह खुला का खुला हुआ ही रह गया था और ढेर सारा खून मेरे लण्ड पर और उसकी गाण्ड पर लगा हुआ था। मैंने तेल की शीशी उठाई और उसकी गाण्ड के छेद में ढेर सारा तेल डाल दिया। उसके बाद मैंने फिर से अपना लण्ड धीरे धीरे उसकी गाण्ड में घुसा दिया। जब मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 7″ तक घुस गया तो मैंने पूरे ताकत के साथ 2 बहुत ही जोरदार धक्के लगा दिये।


वो जोर जोर से चिल्लाने लगी- दीदी, तुमने मुझे कहां फसा दिया। मैं तो मरी जा रही हूँ और तुम हो कि सुन ही नहीं रही हो, बचा लो मुझे, नहीं तो ये मुझे मार डालेंगे।

मैंने कहा- अब चुप हो जाओ। मेरा पूरा लण्ड अब घुस चुका है।

वो कुछ नहीं बोली … केवल सिसक सिसक कर रोती रही।


मैं अपना लण्ड उसकी गाण्ड में ही डाले हुये थोड़ी देर तक रुका रहा। धीरे धीरे वो कुछ हद तक शान्त हो गई।


तभी कमरे के बाहर से ही भाभी ने पूछा- काम हो गया?

मैंने कहा- अभी तो मैंने केवल अपना औजार ही पूरा अन्दर घुसाया है।

वो बोली- ठीक है, अब जल्दी से अपना पानी भी निकाल दो और बाहर आ जाओ।


मैंने धीरे धीरे धक्के लगने शुरु कर दिये तो शालू फिर से चीखने लगी। समय गुजरता गया और वो धीरे धीरे शान्त होती गई। दस मिनट में वो एकदम शान्त हो गई तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरु कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही निकाल रही थी।


अपनी स्पीड मैंने और तेज कर दी। तेल लगा होने की वजह से मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में सटासट अन्दर बाहर हो रहा था। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। शालू को भी अब कुछ कुछ मज़ा आने लगा था। मैं भी पूरे जोश में आ चुका था और तेजी के साथ उसकी गाण्ड मार रहा था।


10 मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। लण्ड का सारा पानी उसकी गाण्ड में निकाल देने के बाद भी मैं उसके गाण्ड में ही अपना लण्ड डाले रखा और उसके ऊपर लेट गया।

मैंने शालू से पूछा- कुछ मज़ा आया?

वो बोली- बहुत दर्द हो रहा है और तुम पूछ रहे हो कि मज़ा आया।

मैंने कहा- मेरी कसम है तुम्हें, सच सच बताओ क्या तुम्हें जरा सा भी मज़ा नहीं आया?


उसने शरमाते हुये कहा- पहले तो बहुत दर्द हो रहा था लेकिन बाद में मुझे थोड़ा थोड़ा सा मज़ा आने लगा था कि तुम रुक गये।

मैंने कहा- अभी थोड़ी देर में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो जायेगा। उसके बाद मैं फिर से तुम्हारी गाण्ड मारूंगा।

वो बोली- नहीं, अभी रहने दो।


तभी भाभी ने पूछा- क्यों राज, काम हो गया?

मैंने कहा- हां, मैंने अपना पानी इसकी गाण्ड के छेद में निकाल दिया है। अभी थोड़ी ही देर में मैं फिर से अपना पानी निकालने वाला हूँ।

भाभी ने कहा- ठीक है, जब दोबारा पानी निकाल देना तो बाहर आ जाना।

मैंने कहा- ठीक है।


मैंने अपना लण्ड शालू की गाण्ड में ही रखा और उसकी चूचियों को मसलता रहा। पन्द्रह मिनट में ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरु कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही निकाल रही थी।

थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा तो वो सिसकारियां लेने लगी।

मैंने पूछा- अब कैसा लग रहा है?

वो बोली- अब अच्छा लग रहा है।


मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो थोड़ी ही देर में वो जोर से सिसकारियां भरने लगी। मुझे भी उसकी गाण्ड मरने में खूब मज़ा आ रहा था। 20 मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से बाहर निकाला और उसके बगल में लेट गया।


मैंने उसके होंठो को चूमते हुये पूछा- कैसा लगा?

वो बोली- इस बार कुछ ज्यादा ही मज़ा आया।

मैंने कहा- धीरे धीरे तुम्हें और ज्यादा मज़ा आने लगेगा।


मैं शालू के पास से उठ कर बाहर चला आया।

भाभी बाहर बैठी थी, उन्होंने मुझसे पूछा- काम हो गया?

मैंने कहा- हां।


वो बोली- मैं गर्म पानी से उसकी चूत की सिकाई कर देती हूँ। इससे उसका दर्द कम हो जायेगा।


मैं चुप रह गया क्योंकि मैंने तो शालू की चूत को अभी तक छुआ ही नहीं था। मैंने तो उसकी गाण्ड मारी थी।


फिर मैं कुछ मिनट बाद शालू के पास चला आया। भाभी पानी गर्म कर के ले आई, वो बोली- मैं पानी गर्म कर के लाई हूँ, अन्दर आ जाऊं?

मैंने कहा- आ जाओ।

शालू बोली- मैं एकदम नंगी हूँ और तुम दीदी को यहां बुला रहे हो?

मैंने कहा- तो क्या हुआ?

वो कुछ नहीं बोली।


भाभी अन्दर आ गई, उन्होंने शालू से कहा- लाओ मैं तुम्हारे छेद की सिकाई कर दूं। इससे तुम्हारा दर्द कम हो जायेगा।


शालू ने करवट बदल ली तो भाभी ने कहा- तुमने करवट क्यों बदल ली, अब मैं कैसे तुम्हारी चूत के छेद की सिकाई करूंगी?

उसने अपनी गाण्ड के छेद की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- इसी में तो इन्होंने अपना औजार घुसाया था।

भाभी के मुँह से निकला- क्या?


भाभी की नज़र शालू की गाण्ड पर पड़ी। उसकी गाण्ड खून से लथपथ थी। मैंने अभी तक अपना लण्ड साफ़ नहीं किया था। मेरा लण्ड भी खून से भीगा हुआ था। भाभी आंखें फ़ाड़े कभी मेरे लण्ड को और कभी शालू की गाण्ड को और कभी मेरे चेहरे को देखने लगी।


भाभी ने गर्म पानी से शालू की गाण्ड की सिकाई की। उसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुये शालू से कहा- शालू तुमने तो एक मैदान मार लिया है। अब दूसरा मैदान मारना और बाकी है।

वो बोली- दीदी, मैं समझी नहीं?

भाभी ने शालू की चूत पर हाथ लगाते हुये कहा- अभी तो तुम्हें इस छेद में भी इसका औजार अन्दर लेना है।


शालू को बहुत दर्द हो रहा था। भाभी की बात सुनकर वो गुस्से में आ गई। उसने अपनी चूत की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- एक छेद के अन्दर इनका औजार लेने में ही मेरा इतना बुरा हाल हो गया और आप कह रही हो कि अभी इस दूसरे छेद में भी अन्दर लेना है। मैं अब किसी छेद में इनका औजार अन्दर नहीं लूंगी। मुझे बहुत दर्द होता है। आप खुद ही इनका औजार अपने छेद में ले लो।

भाभी ने मुस्कुराते हुये कहा- मेरे अन्दर लेने से क्या होगा। आखिर तुम्हें भी तो इसका औजार अपने इस छेद में अन्दर लेना ही पड़ेगा। जैसे एक बार तुमने दर्द को बर्दाश्त कर लिया है उसी तरह से एक बार और दर्द को बर्दाश्त कर लेना।


शालू ने भाभी की चूत की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- पहले तुम इनका औजार अपने इस छेद में अन्दर ले कर दिखाओ। उसके बाद ही मैं इनका औजार अपने इस छेद में अन्दर लूंगी।


भाभी मुझे देखने लगी और मैं उनको।शालू बोली- क्यों अब क्या हुआ? आप मुझे फंसा रही थी लेकिन मैंने आपको ही फंसा दिया। दिखाओ इसका औजार अपने छेद के अन्दर लेकर।


भाभी ने कहा- अच्छा बाबा, अभी दिखा देती हूँ लेकिन उसके बाद तो तुम मना नहीं करोगी।


वो बोली- पहले आप दिखाओ उसके बाद मैं इनका औजार अन्दर ले लूंगी … भले ही मुझे कितनी भी तकलीफ़ क्यों ना हो।


भाभी ने मुझसे कहा- देवर जी, शालू ऐसे नहीं मानेगी। अब तुम अपना औजार मेरे अन्दर डाल ही दो।

मैंने कहा- शालू के सामने?

शालू बोली- तो क्या हुआ?

भाभी बोली- जब यह मुझे तुम्हारा औजार अन्दर लेते हुये देखेगी तब ही तो यह तुम्हारा औजार अन्दर लेगी।

सुहागरात में भाभी की चूत और पत्नी की गांड मारी-1 - Fucked sister-in-law's pussy and wife's ass on wedding night-1

 सुहागरात में भाभी की चूत और पत्नी की गांड मारी-1 - Fucked sister-in-law's pussy and wife's ass on wedding night-1

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां

नमस्ते दोस्तों! मेरे पटना के एक दोस्त सूरज ने अपनी आपबीती मुझे बताई थी. इस कहानी को आप उसी के शब्दों में सुनिए.

मेरा नाम सूरज है, मैं पटना में रहता हूँ. हम लोग गांव के रहने वाले हैं. हमारा गांव पटना से 44 किलोमीटर दूर है.


पास के ही एक गांव में भैया की शादी हो गई. भाभी बहुत ही अच्छी थीं और खूबसूरत भी थीं. भैया की उम्र 21 साल की थी. भाभी उम्र में भैया से 2 साल छोटी थीं. मैं भाभी से उम्र में एक साल छोटा था. भाभी की उम्र 19 साल की थी. गांव में ये उम्र शादी के लिए काफी मानी जाती है.


शादी के बाद भैया की नौकरी पटना के एक कम्पनी में लग गई. वो पटना शहर में ही रहने लगे. उधर वो अकेले रहते थे और खुद ही घर का सारा काम करते थे. अपना खाना भी खुद ही बनाते थे. जब उन्हें खना बनाने में और घर का काम करने में दिक्कत होने लगी, तो उन्होंने भाभी को भी अपने पास पटना बुला लिया. मेरे घर में मम्मी तो थी नहीं, उनका निधन काफी पहले हो चुका था. केवल पापा ही थे. कुछ दिनों के बाद पापा का भी स्वर्गवास हो गया, तो भैया ने मुझे अपने पास ही रहने के लिए पटना बुला लिया.


मैं उनके पास पटना आ गया और वहीं रह कर अपनी पढ़ाई करने लगा. मैंने बीए तक की पढ़ाई पूरी की और फिर नौकरी की तलाश में लग गया.


अभी मुझे नौकरी तलाश करते हुए एक साल ही गुजरा था कि भैया का सड़क दुर्घटना में स्वर्गवास हो गया. उस समय मेरी उम्र 21 साल की हो चुकी थी. अब तक मैं एकदम हट्टा कट्टा नौजवान हो गया था. मैं बहुत ही ताकतवर भी था, क्योंकि गांव में मैं पहले कुश्ती भी लड़ता था.


मुझे भैया की जगह पर ही नौकरी मिल गई. अब घर पर मेरे और भाभी के अलवा कोई नहीं था. वो मुझसे मुझसे बहुत प्यार करती थीं. मैं भी उनकी पूरी देखभाल करता था और वो भी मेरा बहुत ख्याल रखती थीं. भाभी को ही घर का सारा काम करना पड़ता था, इसलिए मैं भी उनके काम में हाथ बंटा देता था. वो मुझसे बार बार शादी करने के लिए कहती थीं.

एक दिन भाभी ने शादी के लिए मुझ पर ज्यादा दबाव डाला, तो मैंने शादी के लिए हां कर दी.


भाभी के एक रिश्तेदार थे, जो कि उनके गांव में ही रहते थे. उनकी एक लड़की थी, जिसका नाम शालू था. भाभी ने शालू के साथ मेरी शादी की बात चलाई. बात पक्की करने से पहले भाभी ने मुझे शालू की फोटो दिखा कर मुझसे पूछा कि बताओ लड़की कैसी है?


मैं शालू की फोटो देख कर दंग रह गया. मैं समझता था कि गांव की लड़की है, तो ज्यादा खूबसूरत नहीं होगी, लेकिन वो तो बहुत ही खूबसूरत थी. मैंने हां कर दी.


शालू की उम्र भी उस वक्त 18 साल की ही थी. खैर शादी पक्की हो गई. शालू के मम्मी पापा बहुत गरीब थे. एक महीने के बाद ही हमारी शादी गांव के एक मन्दिर में हो गई. शादी हो जाने के बाद दोपहर को भाभी मुझे और शालू को लेकर पटना आ गईं.


घर पर कुछ पड़ोस के लोग बहू देखने आए. जिसने भी शालू को देखा, उसकी बहुत तारीफ़ की. शाम तक सब लोग अपने अपने घर चले गए.


अब रात के 8 बज रहे थे. भाभी ने मुझसे कहा- आज मैं बहुत थक गई हूँ. तुम जाकर होटल से खाना ले आओ.

मैंने कहा- ठीक है.


मैंने झोला उठाया और खाना लाने के लिए चल पड़ा. मेरा एक दोस्त था, उसका नाम विजय था. उसी का एक होटल था. मैं सीधा विजय के पास गया.

विजय मुझे देखते ही बोला- आज इधर कैसे?

मैंने उससे सारी बात बता दी. वो मेरी शादी की बात सुनकर बहुत खुश हो गया. हम दोनों कुछ देर तक गप-शप करते रहे.


विजय ने मुझसे कहा- तुझे मज़ा लेना हो, तो मैं एक तरीका बताता हूँ.

मैंने कहा- बताओ.

वो बोला- तुम शालू की चुत को कुछ दिन तक हाथ भी मत लगाना. तुम केवल उसकी गांड मारना और अपने आपको काबू में रखना. कुछ दिन तक उसकी गांड मारने के बाद तुम उसकी चूत की चुदाई करना.


मैंने सोचा कि विजय ठीक ही कह रहा है. मैंने उससे कहा- ठीक है, मैं ऐसा ही करूंगा.


उसने मेरे लिए सबसे अच्छा खाना, जो कि उसके होटल में बनता था, पैक करा दिया. मैं खाना लेकर घर वापस आ गया.


हम सबने खाना खाया. भाभी ने शालू को मेरे रूम में पहुंचा दिया.


उसके बाद उन्होंने मुझे अपने रूम में बुलाया और कहने लगीं- शालू अभी छोटी है. उसके साथ बहुत आराम से करना.

मैंने मजाक किया- मुझे करना क्या है?

भाभी हंस कर बोलीं- शैतान कहीं का … तू तो ऐसे कह रहा है कि जैसे कुछ जानता ही नहीं है.

मैंने कहा- सच में भाभी मुझे कुछ नहीं मालूम है.

भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा- पहले उससे प्यार की दो बातें करना. उसके बाद अपने औजार पर ज्यादा सा तेल लगा लेना. फिर अपना औजार को उसके छेद में बहुत ही धीरे धीरे घुसा देना. जल्दीबाजी मत करना, नहीं तो वो बहुत चिल्लाएगी. वो अभी कमसिन उम्र की है … समझ गए ना.

मैंने कहा- हां भाभी, मैं सब समझ गया.

भाभी ने कहा- समझ गया, तो अब जा अपने कमरे में.


मैं अपने कमरे में आ गया. शालू बेड पर बैठी थी. मैं भी उसके बगल में बैठ गया. मैंने उससे पूछा- मैं तुम्हें पसंद तो हूँ न.

उसने अपना सिर हां में हिला दिया.

मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोल कर बताओ.

उसने शर्माते हुए कहा- हां.


मैंने पूछा- तुम कहां तक पढ़ी हो?

वो बोली- केवल 6 तक.

मैंने कहा- मेरी भाभी ने मुझे कुछ सिखाया है … क्या तुम्हें भी किसी ने कुछ सिखाया है?

इस पर वो कुछ नहीं बोली.

तो मैंने कहा- अगर तुम कुछ नहीं बोलोगी, तो मैं बाहर चला जाऊंगा.


इतना कह कर मैं खड़ा हो गया, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. मैं उसके बगल में बैठ गया.

मैंने कहा- अब बताओ.

वो कहने लगी- मेरे घर पर केवल मेरे मम्मी पापा ही हैं. उन्होंने तो मुझसे कुछ भी नहीं कहा, लेकिन मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी ने मुझसे कहा था कि तुम्हारे पति जब अपना औजार तुम्हारे छेद में अन्दर घुसाएंगे, तब तुमको बहुत दर्द होगा. उस दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश करना. ज्यादा चीखना और चिल्लाना मत, नहीं तो बड़ी बदनामी होगी. अपने पति से कह देना कि अपने औजार पर खूब सारा तेल लगा लें. लेकिन मैंने आज तक औजार नहीं देखा है. ये औजार क्या होता है?

मैंने कहा- तुमने आदमियों को पेशाब करते समय कभी उनकी छुन्नी देखी है?

उसने कहा- हां, गांव में तो सारे मर्द कभी भी कहीं भी पेशाब करने लगते हैं. आते जाते समय मैंने कई बार देखा है. लेकिन उसे तो गांव में लंड कहते हैं.

मैंने कहा- उसी को औजार भी कहते हैं.


वो बोली- मैंने तो देखा है कि किसी किसी का औजार तो बहुत बड़ा होता है.

मैंने कहा- जैसे आदमी कई तरह के होते हैं, ठीक उसी तरह उनका औजार भी कई तरह का होता है. मेरा औजार देखोगी.

वो बोली- मुझे शर्म आती है.

मैंने कहा- अब तो तुम्हें हमेशा ही मेरा औजार देखना पड़ेगा. उसे हाथ में भी पकड़ना पड़ेगा. बोलो तुम देखोगी मेरा औजार?

वो बोली- ठीक है, दिखा दो.


मैं पहले से ही जोश में था. मैंने अपनी शर्ट और बनियान उतार दी. उसके बाद मैंने अपनी पेंट और चड्डी भी उतार दी. मेरा 9″ लम्बा और खूब मोटा देसी लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया.


मैंने अपना लंड उसके चेहरे के सामने कर दिया और लंड हिलाते हुए उससे कहा- लो देख लो मेरा औजार.

उसने तिरछी निगाहों से मेरे लंड को देखा और शर्माते हुए बोली- तुम्हारा तो बहुत बड़ा है.

इतना कह कर उसने अपने हाथों से अपने चेहरे को ढक लिया.

मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसके चेहरे पर से हटा दिया और कहा- शर्माती क्यों हो. जी भर कर देख लो इसे. अब तो सारी जिन्दगी तुम्हें मेरा औजार देखना भी है और उसे अपने छेद के अन्दर भी लेना है. मैंने तो अपने कपड़े उतार दिए हैं, अब तुम भी अपने कपड़े उतार दो.


वो बोली- मैं अपने कपड़े कैसे उतार सकती हूँ, मुझे शर्म आती है.

मैंने कहा- अगर तुम अपने कपड़े नहीं उतारोगी, तो मैं अपना औजार तुम्हारे छेद में कैसे घुसाऊंगा.

वो कुछ नहीं बोली.


मैंने खुद ही शालू के कपड़े उतारने शुरू कर दिए, तो वो शर्माने लगी.

धीरे धीरे मैंने उसे एकदम नंगी कर दिया. मैं उसके संगमरमर जैसे खूबसूरत बदन को देख कर दंग रह गया. उसकी चुचियां अभी बहुत छोटी छोटी थीं.


मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी चुचियों को सहलाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा. मैंने देखा कि उसकी चुत पर अभी बहुत हल्के हल्के बाल ही उगे थे और उसकी चुत एकदम गुलाबी सी दिख रही थी.


उसकी चुचियों को मैंने मसलना शुरू कर दिया तो वो बोली- मुझे गुदगुदी हो रही है.

मैंने पूछा- क्या अच्छा नहीं लग रहा है?

वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है.


मैंने उसके निप्पलों को बारी बारी से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.


वो गर्म सिसकारियां भरने लगी. उसके बाद मैंने उसकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया. उसे और भी ज्यादा गुदगुदी होने लगी.


उसने मेरा हाथ हटा दिया, तो मैंने पूछा- क्या हुआ?

वो बोली- मुझे बहुत जोर की गुदगुदी हो रही है.

मैंने कहा- अच्छा नहीं लग रहा है क्या?

वो बोली- अच्छा तो लग रहा है.

मैंने कहा- तो तुमने मेरा हाथ क्यों हटाया. अगर तुम ऐसा ही करोगी, तो मैं बाहर चला जाऊंगा.

वो बोली- ठीक है, मैं अब तुम्हें कुछ भी करने से मना नहीं करूंगी.

मैंने कहा- फिर ठीक है.

मैंने उसकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में उसकी चुत गीली होने लगी. वो जोर जोर से कामुक सिसकरियां भरने लगी.


मैंने एक उंगली उसकी चुत के अन्दर डाल दी, तो उसने जोर की सिसकारी ली.


मेरा लंड अब तक बहुत ज्यादा सख्त हो चुका था. थोड़ी देर तक मैं उसकी चुत में अपनी उंगली अन्दर बाहर करता रहा.


कुछ ही देर में वो अकड़ने के साथ झड़ने लगी. झड़ते समय उसने मुझे जोर से पकड़ लिया. वो सिसयाते हुए बोली- तुम्हारे उंगली करने से मुझे तो पेशाब सी आ रही है.

मैंने कहा, ये पेशाब नहीं है … जोश में आने के बाद चुत से पानी निकलता है.

वो कुछ नहीं बोली.


मेरी उंगली उसकी चुत के पानी से एकदम गीली हो चुकी थी. मैंने उसके झड़ने के बाद भी उंगली चलाना जारी रखी.


थोड़ी ही देर में वो फिर से पूरे जोश में आ गई.

मैंने कहा- अब मैं अपना औजार तुम्हारे छेद में घुसाऊंगा. तुम पेट के बल लेट जाओ.

वो पेट के बल लेट गई.


मैंने देखा कि उसकी गांड भी एकदम गोरी थी. उसकी गांड का छेद बहुत ही मस्त और हल्के भूरे रंग का था.


मैं अपनी उंगली उसकी गांड के छेद पर फिराने लगा. उसके बाद मैंने एक झटके से अपनी एक उंगली उसकी गांड में घुसा दी.

वो जोर से चीख उठी.

मैंने कहा- अगर तुम ऐसे चीखोगी तो भाभी आ जाएंगी.

वो कराहट हुए बोली- मुझे दर्द हो रहा है.

मैंने कहा- दर्द तो होगा ही. अभी तो उंगली डाली है, इसके बाद मैं अपना लंड तुम्हारी गांड में घुसाऊंगा.


थोड़ी देर तक मैं अपनी उंगली उसकी गांड में अन्दर बाहर करता रहा.

वो बोली- मेरा छेद तो बहुत ही छोटा है और तुम्हारा औजार बहुत बड़ा है. ये अन्दर कैसे घुसेगा?

मैंने कहा- जैसे दूसरी औरतों के अन्दर घुसता है.

वो बोली- तब तो मुझे बहुत दर्द होगा.


मैंने कहा- इसी लिए तो तुम्हारी भाभी ने तुमसे कहा था कि दर्द को बर्दाश्त करना, ज्यादा चीखना चिल्लाना मत.

वो बोली- मैं समझ गई.


मैं उसके ऊपर चढ़ गया, तो वो बोली- तेल नहीं लगाओगे क्या.

मैंने कहा- लगाऊंगा.


मैंने अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगा लिया. उसके बाद मैंने उसकी गांड के छेद पर अपने लंड का सुपारा रखा और उससे कहा- अब तुम अपना मुँह जोर से दबा लो, जिससे तुम्हारे मुँह से चीख ना निकले.


उसने कहा- ठीक है, मैं दबा लेती हूँ. लेकिन तुम बहुत धीरे धीरे घुसाना.

मैंने कहा- हां, मैं बहुत धीरे ही घुसाऊंगा.


उसने अपने हाथों से अपने मुँह को दबा लिया. मैंने थोड़ा सा ही जोर लगाया था कि वो जोर से चीख पड़ी. मेरे लंड का सुपारा भी अभी ठीक से उसकी गांड में नहीं घुस पाया था कि वो रोने लगी.


वो बोली- मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने कहा- दर्द तो होगा ही. तुम अपना मुँह जोर से दबा लो.

उसने अपना मुँह फिर से दबा लिया, तो मैंने इस बार कुछ ज्यादा ही जोर लगा दिया.


वो दर्द से तड़पते हुए जोर जोर से चीखने लगी- उई माँ दीदी, बचा लो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊंगी.

इस बार मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुस गया था. उसकी गांड से खून निकल आया था. वो इतने जोर जोर से चीख रही थी कि मैं थोड़ा सा डर गया. मैंने एक झटके से अपना लंड बाहर खींच लिया. पुक्क़ की आवाज के साथ मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड से बाहर आ गया.


मैंने उसे चुप कराते हुए कहा- अगर तुम ऐसे ही चिल्लाओगी, तो काम कैसे बनेगा?

वो बोली- मैं क्या करूं, मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

मैंने कहा- थोड़ा सब्र से काम लो. फिर सब ठीक हो जायेगा. अब तुम अपना मुँह दबा लो, मैं फिर से कोशिश करता हूँ.


उसने अपना मुँह दबा लिया, तो मैंने फिर से अपने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर रख दिया. उसके बाद मैंने उसकी कमर के नीचे से हाथ डाल कर उसे जोर से पकड़ लिया. फिर मैंने पूरी ताकत के साथ जोर का धक्का दे मारा. वो बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगी. वो मेरे नीचे से निकलना चाहती थी, लेकिन मैंने उसे बुरी तरह से जकड़ रखा था. मेरा लंड इस धक्के के साथ उसकी गांड में 3″ तक घुस गया.


वो जोर जोर से चिल्लाते हुए भाभी को पुकार रही थी- दीदी, बचा लो मुझे … नहीं तो ये मुझे मार डालेंगे … बहुत दर्द हो रहा है.

तभी कमरे के बाहर से भाभी की आवाज आई- राज, क्या हुआ. शालू इतना क्यों चिल्ला रही है.

मैंने कहा- मैं अपना औजार अन्दर घुसा रहा था, लेकिन ये मुझे घुसाने ही नहीं दे रही है … बहुत चिल्ला रही है.

भाभी ने कहा- तुम दोनों बाहर आ जाओ. मैं शालू को समझा देती हूँ.

मैंने लुंगी पहन ली और शालू से कहा- बाहर चलो, भाभी बुला रही हैं.


वो उठना चाहती थी, लेकिन उठ नहीं पा रही थी.


मैंने उसे सहारा दे कर खड़ा किया. उसने केवल अपनी साड़ी बदन पर लपेट ली.


मैं उसे सहारा देकर बाहर ले आया. वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी.


भाभी ने शालू से पूछा- इतना क्यों चिल्ला रही थी?

वो रोते हुए भाभी से कहने लगी- ये अपना औजार मेरे छेद में घुसा रहे थे … इसलिए मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

भाभी ने कहा- पहली पहली बार दर्द तो होगा ही. सभी औरतों को होता है. ये कोई नई बात थोड़े ही है.

मुझसे भाभी ने कहा- मैंने तुझसे कहा था ना कि तेल लगा कर धीरे धीरे घुसाना.

मैंने कहा- मैं तेल लगा कर धीरे धीरे ही घुसाने की कोशिश कर रहा था. जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया और मेरे औजार का टोपा ही इसके छेद में घुसा कि ये जोर जोर से चिल्लाने लगी. इसके चिल्लाने से मैं डर गया और मैंने अपना औजार बाहर निकाल लिया. उसके बाद मैंने इसे समझाया, तो ये राजी हो गई. मैंने फिर से कोशिश की, तो शालू फिर जोर जोर से चिल्लाने लगी. जबकि अभी मेरा औजार केवल जरा सा ही अन्दर घुस पाया था. तभी आपने हम दोनों को बुला लिया और हम बाहर आ गए.


भाभी ने कहा- इसका मतलब तुमने अभी तक कुछ भी नहीं किया?

मैंने कहा- बिल्कुल नहीं … आप चाहो तो शालू से पूछ लो.

भाभी ने शालू से पूछा- क्या ये सही कह रहा है?


उसने अपना सिर हां में हिला दिया. भाभी ने शालू से कहा- तुम कमरे में जाओ. मैं इसे समझा बुझा कर भेजती हूँ.

शालू कमरे में चली गई.

Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई

 Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई हाय . मैं फिर से हाजिर हूं।मैं आपके समक्ष एक नई कहानी बताता हूँ जब कि मै बिलासपुर स...