बेटे के टीचर ने मेरी चूत मारी और असली चुदाई का अहसास करवाया - My son's teacher fucked me and made me feel real sex.

 बेटे के टीचर ने मेरी चूत मारी और असली चुदाई का अहसास करवाया

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां










हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम सविता है. मेरी उम्र 32 साल की है और मेरा फिगर 34-28-36 का है. मैं अयोध्या की रहने वाली हूँ. मैं दिखने में एकदम कच्ची कली हूँ, थोड़ी सांवली हूँ. मेरे उरोज खूब बड़े मोटे और कसे हैं. मेरी गांड भी खूब बड़ी और चौड़ी है. मुझे सेक्स करने का बड़ा शौक है मैं अब तक बहुत लोगों से चुद चुकी हूँ और मैं चुदने के नए नए लंड ढूंढती रहती हूँ.

ये बात तब की है, जब मेरा बेटा 5वीं क्लास में था और वो पढ़ने में थोड़ा कमज़ोर था. इस वजह से उसके लिए मैंने घर पर ही पढ़ने के लिए एक टीचर हायर किया. वो टीचर कोई और नहीं बल्कि मेरे बेटे के स्कूल के ही एक सर थे.

अब उसके सर रोज़ शाम को 6 से 8 बजे तक उसको पढ़ाते थे. सर का नाम उमेश था. वो एकदम एथलीट किस्म थे. उनकी हाइट 6 फिट की होगी, चौड़ी छाती भरा हुआ जिस्म … सच में क्या मस्त लगते थे.

मुझे उनसे चुदने का मन तो बहुत था लेकिन कोई मौका नहीं मिल पा रहा था. एक दिन मुझसे मिलने के लिए मेरी एक बेस्ट फ्रेंड ऋचा मेरे घर आई. उस टाइम उमेश सर भी मेरे बेटे को पढ़ा रहे थे. मेरी सहेली ने मेरे उमेश को बड़े ध्यान से देखा और हम लोग सीधे मेरे बेडरूम में आ गए.

मेरी फ्रेंड ऋचा मुझसे बोली- यार ये क्या मस्त आदमी है … क्या नाम है इसका?

मैं आंख दबाते हुए बोली- उमेश.

ऋचा बोली- यार, क्या मस्त कसरती शरीर है इसका … ये तो अपनी बीवी को पूरा संतुष्ट रखता होगा.

मैं बोली- अभी उमेश की शादी नहीं हुई है. ये इधर अकेला रहता है.

ऋचा बोली- यार, तू कितनी लकी है कि तुझे किस्मत ने अपनी प्यास बुझाने का इतना अच्छा चान्स दिया है और तेरे हज़्बेंड भी शहर से बाहर रहते हैं. वैसे भी तेरी प्यास नहीं बुझती है. तू एक बार इस पर ट्राइ क्यों नहीं करती?

मैं बोली- वो सब तो ठीक है … लेकिन मैं ये करूं कैसे?

वो बोली- अरे, ये कोई बड़ी बात है … मैं तुझे सब समझा दूँगी.

हम दोनों ने कुछ देर यूं ही बात की … फिर वो चली गयी.

अब जब मैं रात में सोने के लिए आंख बंद कर रही थी, तो बार बार मुझे उमेश का ही ख्याल आ रहा था. उसके बारे में सोचते सोचते मेरे हाथ मेरे मम्मों पर आ गए और मैं अपने मम्मों को दबाने लगी. फिर एक हाथ से एक दूध मसलते हुए दूसरे हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी.

अब धीरे धीरे मेरी वासना बढ़ने लगी और मैं ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत में उंगली करने लगी. तकरीबन 10 मिनट बाद मैं झड़ गयी. तब मुझे कुछ शांति मिली और मैं सो गयी.

अब अगली दिन शाम को जैसे ही डोर बेल बजी, मैं तुरंत दरवाज़ा खोलने चली गयी.

वैसे तो रोज दरवाज़ा मेरा बेटा खोलता था, लेकिन आज मैं जानबूझ कर खोलने गयी. क्योंकि आज मैं पहले से ही तैयार थी. मेरी सहेली ने जो बताया था, आज उसके अनुसार पहला दिन उमेश को रिझाने का था.

आज मैंने हल्की पीले रंग की साड़ी पहन रखी थी … जो कि बिल्कुल झीने कपड़े की थी. इस साड़ी में से उमेश को मेरा पूरा बदन साफ़ दिख सकता था. इसी के साथ आज मैंने स्लीवलैस ब्लाउज पहन रखा था, जो कि आगे से काफी गहरे गले का था. मेरी ब्लाउज के गहरे गले में से मेरे दोनों मम्मों के बीच की घाटी साफ दिख रही थी. मेरा ये ब्लाउज पीछे से भी काफ़ी गहरे गले वाला था. आज मैंने जानबूझ कर साड़ी अपनी नाभि के नीचे बांधी थी. पीछे से इस कसी हुई साड़ी में से मेरी निकली हुई गांड की पहाड़ी साफ़ दिख रही थी.

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, उमेश मुझे देखते ही रह गया. मैंने मुस्कुरा कर उसे अन्दर आने को कहा. वो अन्दर आया और सोफे पर बैठ गया. मैंने उमेश की तरफ झुक कर कुछ साड़ी ठीक करने का उपक्रम करते हुए अपने बेटे को आवाज़ दी- बेटे आपके सर आ गए हैं … आ जाओ पढ़ने.

फिर मैंने जानबूझ कर अपनी गांड मटकाई और उमेश को देखते हुए वहां से रसोई की तरफ आ गयी.

जैसे ही मैं रसोई में आई, तो मैंने चुपके से बाहर झांक कर देखा. उमेश अपना लंड अड्जस्ट कर रहा था. शायद उसका लंड खड़ा हो गया था.






कुछ देर बाद मैं रसोई से चाय और कुछ नाश्ता लेकर आई और उमेश के सामने झुक कर मेज पर रखने लगी. मेरा पल्लू सरक गया और मेरे दोनों चूचे ब्लाउज से बाहर आने लगे. उमेश ने बहुत घूर कर मेरे मम्मों को देखा. मैंने ट्रे रखी और अपना पल्लू सही करके वहां से गांड मटकाते हुए चली गई.

एक हफ्ते तक मैं अपनी सहेली के बताए हुए तरीकों से उमेश को रिझाती रही. कभी उसके सामने झुक कर कुछ उठाती, तो कभी उसके सामने झाड़ू लगाने लगती, तो कभी पौंछा लगाने लगती. ये सब करते देख कर वो मुझे बस घूर घूर कर देखता रहता.

कुछ दिन यही सब चलता रहा.

फिर एक दिन उमेश मुझे मार्केट में मिल गया. मेरे हाथ में झोला था और वो भी वहां सब्ज़ी लेने ही आया था. उससे मेरी हाय हैलो हुई.

उसने मुझसे पूछा- क्या आपने सब सामान ले लिया?

मैंने बोला- हां … क्यों?

वो बोला- मैं भी बस एक सामान और ले लूं, फिर आपको आपके घर ड्रॉप कर देता हूँ.

मैं तो मन ही मन में बहुत खुश हुई … लेकिन मैं कहने लगी- अरे नहीं, आप मेरे लिए परेशान मत होइए, मैं ऑटो से चली जाऊंगी.

उमेश बोला- अरे आप कैसी बात कर रही हैं … इसमें परेशानी की कौन सी बात है. मैं भी उधर ही से जाऊंगा, तो आपको छोड़ दूँगा … और वैसे भी यहां से ऑटो मिलेगी नहीं … आपको कुछ दूर जाना पड़ेगा.

मैं बोली- ठीक है.

फिर उसने अपने लिए कुछ सब्ज़ियां खरीदीं और बोला- चलिए.

मैं उसकी बाइक पर बैठ गयी और वो चल दिया. कुछ दूर चलने के बाद मुझे महसूस हुआ कि वो जानबूझ कर ब्रेक मार रहा था और गड्डों में गाड़ी झटका देते हुए चला रहा था. इससे मेरे चूचे उसकी पीठ से बार बार टच हो रहे थे.

यह महसूस करते हुए मैंने भी मौके का फायदा उठाया. अबकी बार जैसे ही उसने ब्रेक लगाया, मैं एकदम से उससे चिपक कर बैठ गयी और मैंने अपने एक हाथ से उसका एक कंधा कसके पकड़ लिया.

मेरी इस हरकत को देखते हुए उसने बात बनाते हुए कि आज कल सड़कों पर गड्डे कुछ ज्यादा ही हो गए हैं.

मैंने भी बोला- हां, ये बात तो आपने बिल्कुल ठीक बोली है.

अब मेरे दोनों चूचे अच्छे से उसकी पीठ से चिपके हुए थे और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मुझे पता था कि उमेश भी मेरे मम्मों का मज़ा ले रहा था.

इस घटना के अगले दिन फिर वैसे ही उस दिन जैसे सब हुआ. उमेश आया और मैंने दरवाज़ा खोला. कुछ देर में वो मेरे बेटे को पढ़ाने लगा. मैं कुछ देर में चाय और कुछ नाश्ता लेकर आई.

वहीं मेज पर एक शादी का कार्ड पड़ा था, तो उमेश उसको देखने लगा. वो मुझसे बोला- आप भी इस शादी में जाओगी?






मैंने बोला- आप भी से मतलब?

उमेश ने कहा- मेरा मतलब मुझे भी कार्ड आया है.

मैं बोली- आप जाओगे?

वो बोला- जी हां … क्यों आप नहीं जाओगी क्या?

मैंने बोला- मैं अकेली इतनी दूर कैसे जाऊंगी?

वो बोला- अरे मैं आपको ले चलूंगा … ठीक है!

मैंने हां में सर हिलाते हुए कह दिया कि देखूंगी.

कुछ देर बाद वो चला गया. मैं रात का खाना खाकर टीवी देख रही थी और मेरा बेटा सो गया था.

तभी मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया. मैंने देखा कि ये मैसेज उमेश का था.

उसने हैलो लिखा था.

मैंने भी रिप्लाई किया.

फिर उसने बोला- आप कल शादी में नहीं जाओगी?

मैं बोली- जाना तो चाहती हूँ … लेकिन मैं अपनी परेशानी तो आपको बता चुकी हूँ.

उमेश बोला कि अगर आपको कोई दिक्कत ना हो, तो आप मेरे साथ चल सकती हैं … मैं भी बाइक से अकेले ही जाऊंगा.

मैं कुछ देर सोचने लगी कि क्या करूं. मुझे इससे अच्छा मौका मिल नहीं सकता था. लेकिन बेटे का क्या करूं, उसको तो मैं ऐसे अकेले घर पर छोड़ नहीं सकती थी. अगर बेटे को साथ लेकर गयी, तो कुछ होगा नहीं.

फिर मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया कि क्यों ना अपने बेटे को अपनी सहेली के पास छोड़ दूं.

मैंने उसी वक्त ऋचा को मैसेज किया कि यार कल शाम से मॉर्निंग तक के लिए अपने बेटे को तेरे यहां छोड़ सकती हूँ … मुझे एक दिन के लिए बाहर जाना है.

वो बोली- हां ठीक है.

वैसे भी अगले दिन संडे था, तो मेरे बेटे को भी स्कूल की कोई दिक्कत नहीं होनी थी.

अब मैंने उमेश को मैसेज किया कि ठीक है … लेकिन मैं अपने बेटे को नहीं ले जाऊंगी … क्योंकि वापसी में रात हो जाएगी और उसको ठंड भी लग सकती है.

उमेश बोला- ठीक है … तो फिर मैं कल आपको लेने कितने बजे आऊं?

मैं बोली- 8 बजे ठीक रहेगा … क्योंकि दूर जाना है.

वो बोला- ठीक है.






अब अगले दिन मैं दोपहर में मेरे बेटे को अपनी फ्रेंड के यहां छोड़ आई. मैंने फ्रेंड से बोला कि मैं अभी शहर से बाहर जा रही हूँ. कल आ जाऊंगी.

सहेली के यहां से सब सैट करके मैं वहां से सीधे ब्यूटी पार्लर गयी और तैयार हुई.

उसके बाद घर आकर ब्लैक कलर की साड़ी पहनी. इसकी मैचिंग का ब्लाउज बहुत सेक्सी था … स्लीवलैस और बॅकलैस था. पीछे से बस एक डोरी बंधी थी और आगे लो-कट वाला गहरा गला था, जिसमें से मेरे आधे चूचे, जो कि हद से ज़्यादा बड़े थे, वो बाहर दिखते थे.

साड़ी भी मैंने नाभि के नीचे बांधी और गहरे लाल रंग की लिपस्टिक और खूब सारा मेकअप किया. बालों का जूड़ा बना लिया, जिससे मेरी पीठ पूरी साफ़ दिखे.

फिर मैंने हील्स पहनीं और लाल रंग की नाखूनी लगाई … और लाल रंग की ही चूड़ियां पहनीं. अब मैं एकदम सेक्स बॉम्ब लग रही थी.

उमेश के आने का समय हो गया था, इसलिए मैं उसका इन्तजार करने लगी. ठीक 5 मिनट बाद डोर बेल बजी और मैंने दरवाजा खोला.

वाहह … सामने उमेश क्या हैंडसम हंक लग रहा था. वो ब्लैक जीन्स और टी-शर्ट में मस्त लौंडा मेरे लिए एकदम फिट दिख रहा था.

वो तो बस मुझे देखता ही रह गया. मैं बोली- अब आप यूं ही देखते रहेंगे कि चलेंगे भी?

उमेश बोला- वाओ आप कितनी ब्यूटीफुल लग रही हैं. दुल्हन तो वहां आप ही लगोगी.

मैं थोड़ा सा शरमाई और बोली- थैंक्यू.

फिर मैंने घर लॉक किया और उमेश के साथ उसकी बाइक पर पहले से ही एकदम चिपक कर बैठ गयी.

कुछ देर मम्मों का मजा देने के बाद हम लोग शादी में आ पहुंचे. हम दोनों एकदम कपल्स लग रहे थे. सब हम लोगों को कपल्स की समझ रहे थे.

हम लोग 10 बजे शादी में पहुंचे थे. हम दोनों हर जगह साथ ही साथ रहे. हमने साथ में खाना भी खाया.

जब हम दोनों खाना खा रहे थे, तो बीच में मेरी प्लेट में सब्ज़ी खत्म हो गयी थी, तो मैं सब्ज़ी लेने के लिए गयी. वहां पहले से ही बहुत भीड़ थी.

मैं भी उस भीड़ में घुसी, तो मुझे महसूस हुआ कि जिसके हाथ में मेरा जो भी शरीर का अंग लग रहा था, वो उसको दबा रहा था.

एक आदमी पीछे से मेरी गांड पर अपना लंड का पूरा ज़ोर दे रहा था और सामने वाले लड़के का एक हाथ मेरे मम्मों पर जमा था. मुझे भी ये सब अच्छा लग रहा था.

तभी एकदम से उमेश मेरे पीछे आया और बोला- आप अपनी प्लेट मुझे दीजिए, मैं निकाल देता हूँ.

शायद मेरे पीछे वाले आदमी की करतूत उमेश ने देख ली होगी.

मैं उस भीड़ से बाहर आ गयी.

उमेश मेरी प्लेट में सब्ज़ी ले कर आया और बोला कि इस तरह आप भीड़ में ना जाओ … जो चाहिए हो, मुझे बोल दीजिएगा.






मैं उसकी मंशा समझ रही थी कि वो मुझे अपना माल समझने लगा था. शायद इसलिए उसे किसी और का हाथ मेरे ऊपर फेरना अच्छा नहीं लग रहा था.

हम दोनों खाने के बाद बैठ गए. उधर स्टेज पर डांस हो रहा था. हम लोगों ने वो देखा और यूं ही एन्जॉय करते रहे.

फिर मैंने टाइम देखा, तो 12 बज गए थे. मैंने उमेश से बोला कि देर बहुत हो गयी है … अब हमें चलना चाहिए.

उमेश बोला- ठीक है … चलिए … आप बाहर गेट पर मिलिए, मैं अपनी बाइक लेकर आता हूँ.

उमेश बाइक लेकर आया और मैं उसकी बाइक पर बैठ गयी और वहां से निकल दिए. जैसे ही हम कुछ दूर पहुंचे, तो मुझे बहुत तेज़ ठंड लगने लगी. मैं उमेश की पीठ से एकदम से चिपक गयी.

तकरीबन 10 मिनट चलने के बाद हम एकदम सुनसान इलाके में थे. मुझे बहुत तेज़ ठंड भी लग रही थी और एकाएक बहुत तेज़ बारिश शुरू हो गयी. रास्ते में कहीं रुकने की जगह भी नहीं थी. इतनी तेज़ बारिश में हम दोनों पूरी तरह से भीग गए थे. मैं उमेश से एकदम कस के चिपकी हुई थी … क्योंकि ठंड के मारे मेरा बुरा हाल था.

मैंने उमेश से रुकने को बोला, तो उसने कहा- मालूम है आपको ठंड लग रही है, लेकिन कहीं रुकने की जगह तो मिले, तब तो रुका जाए.

कोई 5 मिनट बाद एक पुराना सा कमरा टाइप सा दिखा. उमेश ने बाइक रोक दी और हम लोग उसी में जाकर रुक गए.

मैं ठंड के मारे कांप रही थी. ये देख कर उमेश बोला कि भीगे कपड़ों से आपको ठंड लग रही है. आप चेंज कर लो. मेरी गाड़ी की डिक्क़ी में मेरी एक टी-शर्ट पड़ी रहती है, अगर भीगी ना होगी, तो मैं ले आता हूँ.

मैं बोली- ठीक है … ले आओ.

वो बाइक से कपड़ा निकालने चला गया और तब तक मैंने अपनी साड़ी हटा दी ब्लाउज के बटन खोल दिए … और पेटीकोट भी ढीला कर दिया. अब मैं लगभग एकदम नंगी थी. उसी टाइम उमेश आ गया.

उसने मुझे वासना भरी निगाहों से देखा और टी-शर्ट देते हुए कहा- लो इसे पहन लो.

मैंने उसके सामने ही ब्लाउज हटाया और ब्रा का हुक खोल कर पलटते हुए ब्रा हटा दी. मैंने उसकी दी हुई टी-शर्ट पहन ली. ये टी-शर्ट मुझे कुछ लम्बी हो रही थी, तो मैंने पेटीकोट भी निकल जाने दिया और उमेश के सामने ही अपनी चड्डी भी निकाल दी. अब मैंने नीचे कुछ भी नहीं पहना था. मेरी चूत बिल्कुल नंगी थी. वो टी-शर्ट बस मेरी जांघों तक आ रही थी. उमेश की टी-शर्ट कुछ फिटिंग की थी, जिसमें से मेरे चूचे एकदम टाइट थे. ब्रा नहीं होने से मेरे निप्पलों भी साफ़ तने हुए दिख रहे थे.

मैंने टी-शर्ट अडजस्ट करते हुए मम्मों को ठीक किया. तभी उमेश ने भी अपनी शर्ट को उतार दिया. क्योंकि वो भी पूरी गीली हो गयी थी.

जैसे ही मैंने उमेश का नंगा जिस्म देखा, तो मैं तो बस पागल सी हो गयी. मैं सोचने लगी कि काश इधर ही लंड का कुछ जुगाड़ लग जाए. मैं किसी तरह उमेश की बांहों में आ जाऊं.

तभी एकदम से बहुत तेज़ आवाज़ से बिजली कड़की और मैं डर के मारे जाकर उमेश के सीने से चिपक गयी. उमेश ने भी मुझे कसके पकड़ कर चिपका लिया. अब मेरे दोनों चूचे और निप्पलों उसके नंगे सीने से चिपके हुए थे. मैंने उसे अपनी बांहों में जोर से भींचा हुआ था. उसका लंड मुझे अपने पेट पर गड़ता सा महसूस होने लगा था.

फिर कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद उमेश ने मेरे सर को ऊपर किया और मेरे होंठों पर अपने होंठों को रख दिया. वो पहले तो धीरे धीरे और फिर एकदम पागलों की तरह मेरे होंठों को चूसने लगा. इसमें मैं भी उसका साथ देने लगी.

फिर कुछ देर किस करने के बाद उमेश ने मुझे पलट दिया और मेरी कमर पकड़ कर मेरी गांड को अपने लंड पर कसके सटा दिया. उसने मेरे मुँह को अपनी तरफ करके फिर से चुम्बन करने लगा. उसने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों मम्मों को पहले टी-शर्ट के ऊपर से भींचा … फिर अन्दर हाथ डाल कर दबाने शुरू कर दिए . वो मेरे निप्पलों को भी बारी बारी मींजता हुआ खींच रहा था. मुझे तो इसमें बहुत मज़ा आ रहा था.






फिर मैं उमेश की तरफ घूमी और नीचे बैठ गयी. मैंने उसकी चैन खोली और लंड निकाल कर अपने मुँह में ले लिया.

आह इतना बड़ा और सख़्त लंड … क्या स्वाद था उसका … एकदम किसी गरम लोहे की रॉड के जैसा लंड था.

मैं कुछ देर तक उसका लंड यूं ही चूसती रही और वो भी मज़े ले रहा था. वो मेरे दूध मसलता हुआ बोल रहा था- आह सविता मेरी जान … चूस ले इस लंड को बहुत तड़पाया है तूने इसको … वाहह मेरी रानी और ज़ोर से चूसो … एकदम अन्दर तक लो.

मैं उसका पूरा लंड हलक तक लेने लगी.

वो बोला- आहह मेरी रानी बस में झड़ने वाला हूँ. माल मुँह में लोगी या मैं हटा लूं?

मैंने कुछ नहीं कहा बस लंड चूसती रही.

इससे उमेश समझ गया और उसने मेरे मुँह में लंड के घस्से देने शुरू कर दिए. इसके एक मिनट बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गया और मैं उसके लंड का पूरा रस पी गयी.

एक मिनट तक मैं उसके लंड को चूसती रही और पूरा लंड चाट कर साफ़ कर दिया.

इसके बाद मैं उठी, तो उमेश ने मेरे मुँह को चूसते हुए अपने लंड के रस का मजा लेना शुरू कर दिया.

कुछ पलों बाद उसने मेरी तरफ देखा और बोला- जान, अब लंड लेने का खेल घर चलकर खेलते हैं.

मैं राजी हो गई और उससे जोर से लिपट कर उससे अलग हो गई.

उमेश ने अपने कपड़े पहने और मुझसे बोला- सविता, तुम भी बस टीशर्ट पहन लो … अब इतनी रात को घर ही तो जाना है … अब कौन देखेगा.

मैंने उसकी बात मान ली और बस टी-शर्ट पहने हुए ही जाने को राजी हो गई.

मैंने बाकी सारे कपड़े उठा कर बाइक की डिक्क़ी में डाल दिए.

उसने बोला- आज मेरे घर चलते हैं.

मैं बोली- नहीं, मेरे घर चलो.

वो बोला- ठीक है.






हम दोनों वहां से निकले, तो इस बार मैं अपनी टांगें सीट के दोनों तरफ करके बैठी थी. मेरे हाथ में उमेश का लंड था, जिसे मैं मुठिया कर खड़ा करने में लगी थी.

उधर से हम दोनों सीधे मेरे घर आ गए.

घर आते ही हम दोनों सीधे मेरे बेडरूम में आ गए. अब रात के 2 बजे थे.

उमेश ने मुझे चुम्बन करना शुरू किया और मेरी टी-शर्ट उतार दी. मैं उसके सामने पूरी नंगी खड़ी थी. मैंने भी उसकी शर्ट उतार दी. वो मेरे मम्मों को बारी बारी से चूसने लगा और निप्पलों को भी चूसने लगा.

उसके बाद उसने अपने होंठ मेरी चूत पर रखे और चुत को चाटने और चूसने लगा. वो मुझे अपनी जीभ से चोद भी रहा था.

मैं चुत चुसाई से एकदम सातवें आसमान पर थी और मादक सिसकारियां ले रही थी. उसी समय जैसे ही धीरे से उमेश ने मेरी चूत पर काटा, मेरे मुँह से अहह निकल गया.

मैं बस ‘उहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ्फ़.’ की मादक सीत्कारें भर रही थी.

फिर मेरी बारी आई तो मैंने उमेश को लिटाकर उसके होंठों को चूमा, फिर गर्दन पर चूमा … उसकी छाती पर … और धीरे धीरे नीचे आती गयी. मैंने उसकी पेंट उतारी और उसका लंड चूसने लगी.

कुछ देर उसका लंड चूसने के बाद उसने बोला- मेरे ऊपर आओ.

मैंने उसके लंड पर अपनी चूत रखी और धीरे धीरे उसका लंड अन्दर करके बैठ गई. वो मुझे फुल स्पीड में चोदने लगा और मैं भी उचक उचक कर उससे चुदवाने लगी. पूरे कमरे में मेरी सिसकारियां गूंज रही थीं.

कुछ देर लंड पर बिठा कर चोदने के बाद उमेश ने मुझे नीचे लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोदने लगा.

मैं ‘उफ्फ़ अहह हह हह फक मी हार्ड लाइक योर स्लट … फक मी हार्ड … उमेश चोदो मुझे … और तेज़ और तेज़ अहह हह … उफफ्फ़..’

मैं झड़ गई और निढाल हो गई.

मगर उमेश अभी बाकी था. इसके बाद उमेश ने मुझे घोड़ी बनने को कहा और मेरी गांड के छेद को चाटने लगा.

उफ्फ़ …

इसके बाद उसने अपने लंड पर और मेरी गांड पर थोड़ा थूक लगा कर अपना लंड एक बार में पूरा डाल दिया. मैं एकदम से चिल्ला उठी … पर उमेश ने कुछ देर तक मेरी एक न सुनते हुए मुझे कुतिया बना कर चोदा. मुझे भी अपनी गांड मराने में मजा आने लगा.

कुछ देर बाद वो मेरी गांड में ही झड़ गया और इसी पोज़िशन में हम दोनों सो भी गए. उमेश का लंड मेरी गांड में घुसा रहा. उमेश मेरे ऊपर चढ़ा हुआ ही सो गया था. रात को किस वक्त हम दोनों अलग होकर सो गए, मुझे कुछ होश ही था. जब हम दोनों चुदाई से फारिग हुए थे, उस टाइम सुबह के 4 बजे थे.

फिर मेरी आंख सुबह 9 बजे खुली. मैंने सबसे पहले अपने बेटे को फोन किया और उसका हाल चाल जाना.

मैंने अपने बेटे को बताया- बस मैं यहां से अभी निकल रही हूँ … और कुछ देर में घर आ जाऊंगी.

उसे यही मालूम था कि मैं शहर से बाहर गई हूँ.

वो बोला- ठीक है मम्मा.

हम दोनों मैं फ्रेश हुए. मैंने अपने और उमेश के लिए ब्रेकफास्ट बनाया. मैंने उमेश को उठाया. उमेश भी कुछ देर में फ्रेश होकर आ गया और वो बेड पर बैठ गया. उसने मुझे अपने ऊपर बैठा लिया और अपने हाथ से मुझे नाश्ता कराया.

नाश्ता करते टाइम ही उमेश का लंड खड़ा हो गया और ब्रेकफास्ट के बाद हम दोनों ने फिर से बाथरूम में चुदाई का मजा लिया. दोपहर का खाना भी हम दोनों ने साथ में खाया.

फिर उमेश अपने घर चला गया और मैं जाकर अपने बेटे को ले आई.

अब उमेश मुझे रोज एक घंटा चोदता है. वो 6 से 8 बजे तक मेरे बेटे को पढ़ाता और 8 से 9 बजे तक मेरी चुदाई करता है. हर शनिवार रात को वो मेरे ही घर पर रुक जाता है. हम दोनों पूरी रात चुदाई करते और वो अगली सुबह चला जाता है.

ये सिलसिला अब भी यूं ही चल रहा है और मेरे जिस्म की आग पूरी तरह से शांत रहती है.






गाँव की भोली लेडीज़ और लड़कियों को चोदता ढोंगी बाबा - Fake Baba who fucks innocent village ladies and girls

 गाँव की भोली लेडीज़ और लड़कियों को चोदता ढोंगी बाबा


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां









यह बाबा सेक्स पोर्न स्टोरी कुछ 20 साल पहले की है. उस समय मेडिकल की सुविधा ज्यादा नहीं थी. गांव में भी एक दो डॉक्टर ही होते थे; वो भी ज्यादा पढ़े लिखे नहीं. तो कुछ थोड़ी भी अजीब बीमारी होती तो उस बीमारी का नाम ऊपरी हवा, झपट, भूत प्रेत का साया जैसे नाम दिए जाते थे.

उनके इलाज के लिए लोग साधु महाराज के पास जाते थे क्योंकि वो गुरुकुल में चिकित्सा के बारे में भी पढ़ते थे और कई मानसिक और शारीरिक बीमारी का इलाज करते थे. उन साधु महाराज को बाबा का नाम दिया जाता था.

अब सब बाबा एक जैसे नहीं होते थे; कुछ ढोंगी बाबा भी होते थे. जो इन अच्छे साधु की तरह बस कपड़े पहन कर रुपए कमाते थे और अपनी हवस की आग बुझाते थे.

गांव से थोड़ी सी दूर एक कुटिया में एक बाबा रहते थे. वो गांव में आटा, दूध, मक्खन मांग के अपना गुजारा करते थे. गांव में एक दो लोगो को कुछ बीमारी हुई और वो बाबा ने ठीक कर दी. तो सब उनको भूत सम्मान देने लगे और उनको मंदिर में ले आए.

मंदिर के पीछे एक पुराने घर में उनके रहने का इंतजाम कर दिया गया. अब तो बाबा के पास गांव के बहुत मरीज जाने लगे. बाबा कुछ का कुछ इलाज कर देते. कुछ ठीक होते … कुछ नहीं … पर बाबा कोई इल्ज़ाम नहीं देता था. गांव की एक लड़की लाजवंती उर्फ लाजो 22 वर्षीय जवान, काफी दिनों से बीमार चल रही थी.

वैद्य को दिखाया पर वो ठीक नहीं हुई. तो लाजों की माँ को किसी ने कहा कि मंदिर वाले बाबा को भी दिखा ले एक बार! कि कुछ भूत प्रेत का साया ना हो.

तो वो लाजो को लेकर बाबा के पास गई. बाबा मंदिर में सफाई करने में लगे थे. बाबा ने उन्हे मंदिर के पीछे जाकर इंतजार करने को बोला तो वो बाबा के रहने वाले घर में आ गई.

कुछ देर बाद बाबा भी आ गया.

उसने पूछा- माई क्या तकलीफ है?

तो माई ने पूरी कहानी सुनाई.

बाबा ने उन्हें थोड़ा समझाया और लाजो से बात करने लगा. कुछ बात पूछकर उसने राख की पुड़िया बनाई और उसे दे दी.

फिर बोला- माई, इसे एक दो दिन इसी समय ले आना.

तो माई उन्हें हाँ कर दिया.

अब लाजवंती अगले दिन भी बाबा के पास गई.

उसने फिर उससे बात की.

दो चार चलता रहा.






फिर एक दिन बाबा ने लाजवंती को सामने बैठा लिया और उसकी माई को बोला कि वो दूर रखी हुई चारपाई पर बैठ जाए. तो लाजवंती की माँ कुछ दूर रखी चारपाई पर बैठ गई.

बाबा ने लाजो से बात करना शुरू कर दिया- बच्चा भूख लगती है?

लाजवंती- हाँ बाबा!

बाबा- कोई चिंता की बात है घर में!

लाजवंती- नहीं बाबा, सब ठीक है.

बाबा- तेरा शादी हो गई?

लाजवंती- नहीं बाबा अभी ना हुई.

बाबा- मन करता है?

लाजवंती- हाँ बाबा!

बाबा के लगातार सवाल पूछने से लाजवंती सोच नहीं सकी और बस बोलती जा रही थी. पर अब ये बोल कर वो थोड़ा शरमा गई.

बाबा- हाँ, अब तू जवान हो गई है तो मन तो करता ही होगा. किसी के साथ मिली है अभी तक?

लाजवंती गर्दन झुका कर बैठी रही; बोली नहीं.

बाबा- बच्चा बोल किसी से मिली है या अब तक कुंवारी है?

अब लाजवंती ने अपनी मां की तरफ मुड़ कर देखा. वो कुछ दूर बैठी थी और उसे ही देख रही थी पर उसको आवाज नहीं सुन रही थी.

बाबा- माई को हमारी बात नहीं सुनेगी. तू बता कुंवारी है के नहीं?

लाजवंती ने गर्दन झुका कर हाँ बोल दिया.

तो बाबा ने कहा- तेरी बीमारी का पता चल गया.

लाजवंती- अच्छा बाबा.

बाबा- हाँ, इलाज तो मिल गया पर उसे करना बहुत मुश्किल काम है.

लाजवंती- बाबा, जो भी करना मैं कर लूंगी. तू बता दे बस!

बाबा- बेटी, इलाज की पहली शर्त कि तू यह बात किसी को बताएगी नहीं.

लाजवंती- ठीक है बाबा किसी से नी बताऊं.

बाबा- तो ध्यान से सुन! रात को जब पेशाब करने उठे तो अच्छे से हाथ मुंह धोकर एक मूली या गाजर लेकर अपनी पेशाब वाली जगह पर रगड़ देना.

लाजवंती- ठीक है बाबा.

अब लाजवंती घर आ गई.

वो घर में मूली ढूंढने लगी पर मिली नहीं तो उसने एक मोटी सी गाजर उठा कर रसोई में ही छुपा दी. फिर रात होने का इंतजार करने लगी. रात होते ही सब सो गए तो लाजवंती ने रसोई से गाजर उठाई और घर के पीछे बने पेशाबघर में आ गई. उसने पेशाब किया और फिर गाजर को अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी.

थोड़ी देर बाद उसे मज़ा आने लगा तो वो और जोर जोर से रगड़ने लगी. गाजर उसकी चूत में थोड़ी घुस भी जाती तो वो फिर भी रगड़ती रहती. फिर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और उसको बहुत अच्छा लगा.

तो वो वापस आकर सो गई.

वो कुछ दिन तक रातें अपनी चूत पर गाजर मूली रगड़ती रही. कभी कभी अंदर भी डाल लेती और पानी निकालती रही. अब घर में वो सबको सामान्य दिखने लगी. मतलब अब वो ठीक हो गई.

फिर कुछ दिन बाद लाजवंती अपनी मां के साथ बाबा को मिलने गई.

मां- बाबा तूने तो कमाल कर दिया. इब तो या बिल्कुल ठीक है.

बाबा- माई ये तो ऊपर वाले की दया है. वो ही करता है सब!

मां- बाबा ले, मैं तेरे लिए खाना लाई.






बाबा ने वो खाना रखवा दिया और बोला- माई अब इसकी शादी कर दे कोई अच्छा सा लड़का देख के!

मां- हाँ बाबा, शादी तो पहले ही कर देते. पर या बीमार थी. इसका रंग भी पीला हो गया था. पर अब कर देंगे.

शादी की बात सुनकर लाजवंती शरमा गई.

बाबा- माई, इसे सुबह कु मंदिर में भेज दिया कर … पूजा करनी पड़ेगी जिससे इसे अच्छा सा घर मिले.

मां- ठीक है बाबा, कल से ही आया करेगी.

अगले दिन लाजवंती सुबह ही पूजा करने आयी तो बाबा ने उसे देख लिया और वापस जाते हुए इसे मंदिर पीछे आने का इशारा किया. वो चली गई.

बाबा वहाँ अकेला था.

बाबा- अब कैसे हो बेटी?

लाजवंती- ठीक हूं बाबा अब तो!

बाबा- बेटी, अभी तेरा थोड़ा सा इलाज और करना पड़ेगा.

लाजवंती- ठीक है बाबा बता क्या करना है?

बाबा- ठीक है, अंदर आ जा.

तो लाजवंती बाबा के साथ अंदर चली गई. बाबा ने उसे हाथ पकड़ा समान रखने जो बोला और खुद दरवाजा बंद कर दिया. तो लाजवंती दरवाजा बंद देख कर डर गई- बाबा दरवाजा क्यूं बंद कर दिया.

बाबा- कुछ इलाज अकेले में ही करने पड़ते हैं. मैंने उस दिन भी बताया था.

लाजवंती अब समझ गई और चुप हो गई.

बाबा- चल अब नाड़ा खोल दे.

लाजवंती ने ज्यादा नहीं सोचा और अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया.

बाबा बोला- इसको वहाँ रख दे और वहाँ चारपाई पर लेट जा.

लाजवंती ने सलवार उतार दी और लेट गई.

बाबा ने अब लाजवंती के चूत पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा. तो लाजवंती को मज़ा आने लगा.

बाबा- कैसे लग रहा है बेटी?

लाजवंती- बढ़िया लग रहा बाबा!

बाबा ने अपनी उंगली उसकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा.

लाजवंती सिसकारी भर कर अपनी दोनों टांगें उठा कर मज़े ले रही थी.

बाबा- बच्चा अब थोड़ा सा दर्द होगा तुझे और फिर पूरी जिंदगी तेरे या बीमारी नहीं होगी.

लाजवंती ने हाँ में सिर हिलाया और मज़े लेती रही.

बाबा ने अपनी धोती खोल कर लंड बाहर निकाला और लाजवंती के ऊपर चढ़ गया. उसने अपना लंड लाजवंती की गीली चूत में डाल दिया और धक्का मारा. तो उसे ज्यादा दर्द नहीं हुआ क्योंकि वो मूली गाजर रोज ही अंदर पेलती थी.

बाबा- दर्द तो नहीं हुआ बेटी?

लाजवंती- आह नहीं बाबा आह आह!

बाबा समझ गया कि उसका काम हो गया और उसने चोदना शुरू कर दिया. लाजवंती मज़े से चुदाई करवाती रही और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

अब बाबा का लंड झड़ने वाला था तो उसने बाहर निकाल लिया और खड़ा होकर हाथ से ही पानी निकाल दिया.

इसके बाद से तो बाबा रोज लाजवंती की चुदाई करता.

फिर उसकी शादी हो गई.

पर बाबा तो और ज्यादा प्रसिद्ध हो चुका था.

लाजवंती के पड़ोस में ही एक औरत की शादी को दो साल हो गए थे पर कोई बच्चा नहीं हुआ था तो उसने लाजवंती की मां को बताया. तो उसने बाबा के बारे में पूरी जानकारी दी.

अगले दिन कमला अपने बेटे की बहू कुसुम को लेकर बाबा के पास गई.

बाबा ने कमला को आश्वासन दिया कि ऊपर वाला सब ठीक कर देगा.

और कुसुम को सामने बैठा कर उसके बारे में पूछने लगा- कितनी उम्र है बेटी?

कुसुम- 23 साल है बाबा.

बाबा- शादी कब हुई थी?

कुसुम- दो साल पहले!






बाबा- बच्चा क्यूँ नहीं हुआ?

कुसुम- पता नहीं बाबा के हो गया.

बाबा- हाँ ये ही पूछ रहा हूं … के हो गया?

कुसुम- मुझे नहीं पता बाबा.

बाबा- तुझे ही तो पता है बेटी … और कोई नहीं बता सकता.

कुसुम- क्या पता है मुझे?

बाबा- क्या हुआ है. कुछ होता भी है या नहीं?

कुसुम समझ गई- हाँ बाबा, करते तो हैं पर बच्चा नहीं होता है.

बाबा- कितने दिन में करते हो?

कुसुम- दो चार दिन में हो ही जावे.

बाबा- कितनी बार करते हो?

कुसुम- एक बार करे.

बाबा- कितनी देर तक होता है.

कुसुम- पता नहीं बाबा. टाइम तो देखती नी! पर इस बात से क्या फ़र्क पड़े.

बाबा- बेटी, इसी बात की वज़ह से तो बच्चा नहीं होता.

कुसुम- तो क्या करूं बाबा?

बाबा- बच्चा आज घर जा कर जब करेगी तो ध्यान देना कितनी देर तक करा … और बीज अंदर गया क्या!

कुसुम- ठीक है बाबा.

बाबा- सुबह जल्दी उठकर आना और मुझे फिर से दिखाना पड़ेगा.

कुसुम- ठीक है बाबा, मैं आ जाऊंगी.

अब कुसुम घर आ गई और रात को जब उसका पति उसे चोदने लगा तो वो पूरा ध्यान दे रही थी. पर उसका पति लंड घुसा कर चोदने लगा और दो मिनट में ही झड़ गया.

अगली सुबह 4 बजे ही कुसुम ने कमला को बाबा के पास जाने को बोला तो वो दोनों साथ मंदिर आ गई.

ज्यादा दिन नहीं निकला था तो थोड़ा अंधेरा ही था.

दोनों ने बाबा को प्रणाम किया और बाबा ने उन्हें मंदिर के पीछे जाने को बोला.

अब बाबा भी आ गया तो बाबा बोला- माई तू मंदिर में दर्शन कर ले. या बहू तेरे सामने ठीक से बात ना करने की.

तो कमला वहाँ से चली गई.

बाबा- हाँ बेटी, बताओ क्या हुआ कल रात को?

कुसुम- बाबा किया तो था पर थोड़ी देर ही हुआ.

बाबा- बीज अंदर गया था?

कुसुम- हाँ बाबा.

बाबा- तुम्हारा भी बीज निकला?

कुसुम- नहीं बाबा. वो तो इतनी जल्दी हो जावे. मेरा ना निकलता.

बाबा- तो अब तुम समझ गई क्यूँ मां नहीं बनती है.

कुसुम चुप रही.

बाबा- जब दोनों का बीज आपस में मिलेगा तभी तो बच्चा पैदा होगा.

कुसुम- तो अबे क्या करूं बाबा? जब वो निकलता ही नहीं.

बाबा- किसी और के साथ करना पड़ेगा जो तेरा भी बीज निकाल दे.

कुसुम- बाबा ये क्या कह रहे? किसी और के साथ किया तो कितनी बदनामी होगी. मेरे ससुराल वाले घर से निकाल देंगे. मेरी पूरी जिंदगी खराब हो जाएगी.

बाबा- बेटी ये बात तो ठीक है. पर ऐसे तुम कभी भी मां नहीं बन पाओगी.

कुसुम अब सोच में पड़ गई.






बाबा- एक समाधान मेरे पास है. तुम मां भी बन जाओगी और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.

कुसुम हाथ जोड़ कर बोली- बाबा तो बता दो. मैं पूरी जिंदगी आपका अहसान मानूंगी.

बाबा- बेटी, मैं दे सकता हूं तुम्हें अपना बीज.

कुसुम- पर बाबा … मैं यहां अकेली कैसे आऊंगी?

बाबा- में तेरी सास को बोल दूंगा कि इसे एक महीने तक रोज सुबह मंदिर पूजा करनी होगी.

कुसुम- बाबा, मेरी सास मेरे साथ ही आएगी.

बाबा- शुरुवात में एक दो दिन आएगी रोज नहीं आएगी. तू रोज पूजा करने में काफी देर तक बैठ कर नाम जपा कर. भरोसा कर वो दो दिन भी नहीं आएगी.

कुसुम अब खुश हो गई.

अब कुसुम पूजा करने के लिए आने लगी.

उसकी सास दो चार दिन तो साथ आई, फिर वो बोली- तू अकेली ही चली जाया कर! मैं तो परेशान हो गयी. तुझे एक घंटा लगे पूजा करने में.

अब कुसुम जल्दी से मंदिर आ गई और पूजा करने के बाद बाबा को इशारा किया.

बाबा भी पीछे आ गया.

वो अंदर आ कर बैठ गई.

तो बाबा उसे देख कर बोला- आज नहीं आई तेरी सास?

कुसुम- नहीं बाबा!

बाबा- हमने बोला था पहले ही!

कुसुम- हाँ बाबा, अब कर जल्दी से … मुझे जल्दी घर जाना है.

बाबा- जल्दी मत कर बच्चा … जिस समय रोज जाती है उसी समय जाना.

कुसुम को बाबा ने चारपाई पर ही लेटा लिया और उसके होंठ चूसने लगा.

फिर उसकी ब्लाउज के हुक खोल कर चोली (ब्रा) उतारने लगा.

वो कुसुम की मुलायम चूची को दबा दबा कर चूसने लगा.

कुसुम मज़े ले रही थी.

बाबा बोला- बेटी, अब उतार दे ये साड़ी और पेटीकोट भी.

अब कुसुम नंगी हो गई और बाबा भी.

बाबा ने कुसुम की चूत में दो उंगली डाल दी और हिलाने लगा.

कुसुम की चूत का पानी निकला और वो पूरी तरह उस पानी से गीली हो गई.

तो बाबा ने उसे लेटने के बोला और ऊपर चढ़ कर लंड अंदर घुसा दिया.

कुसुम जोर से चीख उठी.






बाबा ने उसका मुंह बंद कर दिया और बोला- क्या हुआ बेटी?

कुसुम बोली- बाबा दर्द हो रहा है. रुक जाओ!

तो बाबा रुक गया और कुसुम के चूचे दबाने लगा.

कुसुम बोली- बाबा मेरे घर वाले का तो छोटा सा है. तेरा तो घोड़ा जितना है पेट तक उतार दिया.

बाबा- बेटी, छोटे लंड के कारण ही तो तेरा बीज नहीं निकलता और तू मां नहीं बनती. पर अब मैं तुझे मां बना के ही रहूंगा.

अब बाबा फिर से धीरे धीरे चोदने लगा.

तो कुसुम अब अपनी गांड उठा कर धक्के मारने लगी.

बाबा ने भी जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया और कुसुम की चूत में वीर्य निकाल दिया. कुसुम का भी पानी निकल गया. अब बाबा कुसुम को कई दिन तक रोज सुबह चोदता था.

उसके अगले महीने महावारी (पीरियड्स) नहीं हुए. तो वो खुश हो गई और उसने सबको बताया कि वो मां बनने वाली है. इस तरह के कई काम बाबा ने किए.

अब उसके पास बहुत लोग इलाज कराने आते हैं. वो नये नये तरीकों से महिलाओं की चुदाई करता है.

एक महिला उसके पास आई तो बाबा बोला- अंदर कमरे में जाओ और नाड़ा खोल दो.

तो वो हंसते हुए अंदर गई और अपनी साड़ी उतार कर पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. बाबा ने उसकी अच्छे से चुदाई की. और बाहर सब सोच रहे थे कि अंदर इलाज हो रहा है.

फिर एक शरीफ महिला बाबा के पास आई तो बाबा ने उसे भी कहा- अंदर जाओ और नाड़ा खोल दो.

उस महिला ने शोर मचा दिया और अपने दूर खड़े पति को बुला कर नाड़ा खोलने वाली बात बताई.

तो बाबा को लगा कि आज सारे भक्त मिल कर उसकी गांड तोड़ेंगे. आज तो बाबा का ही इलाज होगा.

पर बाबा कहाँ फंसने वाला था.

उसने कहा- बच्चा, ऐसी गन्दी बात बोल कर अपमान मत करो मेरा!

तो वो लोग बोले- बाबा, या अकेली बैठी तो इसको तुमने नाड़ा खोलने की कही या नहीं?

बाबा- हाँ मैंने कहा. पर वो नाड़ा तो अंदर कमरे में है. जो भगवान की मन्नत मांगने के लिए बांधा है.

अब सब लोग शांत हो गए और वो महिला बाबा के पैरों में गिर कर माफी मांगने लगी.

बाबा ने तो अब अच्छा तरीका अपना लिया.

सबको नाड़ा खोलने के लिए बोलता.

जो महिला नाड़े वाली बात सुन कर कमरे में चली गई उसकी चूत गांड चोद देता.

नहीं तो मन्नत वाला नाड़ा बता देता और बच जाता.

पर किसी समझदार इंसान ने उस बाबा सेक्स वाली बात पकड़ ली और पुलिस को बुला लिया.

पुलिस के पकड़ने के बाद पता चला वो जेल से भागा हुआ मुजरिम था. पर कई साल से बाबा बना हुआ था.






टीचर मेडम ने चूत मरवाई मजे से - Teacher madam got her pussy fucked with pleasure

 टीचर मेडम ने चूत मरवाई मजे से

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां










मेरा नाम राजवीर है और मैं हरियाणा के अम्बाला का रहने वाला हूँ. मैं मर्दों को लंड हिलाने का सुझाव और औरतों को चूत में उंगली डाल कर पानी निकालने का सुझाव देना चाहूँगा. दोस्तो, ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, जो मैं आप सभी के साथ साझा करने जा रहा हूँ. ये बात तब की है, जब मैं 19 साल का था और बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, हमारे स्कूल में एक शिक्षिका हुआ करती थीं. जिनका नाम था ज्योत्सना.

दोस्तो, पहले मैं आपको मैडम के फिगर के बारे में बता देता हूँ. मैडम का फिगर 34-30-36 का था … वो बड़े गजब की माल लगती थीं. उनके बड़े ही तीखे नैन नक्श और मदमस्त जिस्म को देख कर उन्हें काम की मूर्ति कहा जा सकता था.

जब वो चलती थीं, तो उनके छत्तीस इंच के चूतड़ ऐसे मटकते थे कि बस ज़ोर से पकड़ कर मसल ही डालो सालों को … और अपना खड़ा लंड सीधा बिना झटके के अन्दर उतार दो.

दूसरी तरफ मैडम भी कुछ कम नहीं थीं. उन्हें स्कूल के लड़कों के इन इरादों का अच्छे से पता था, तभी वो जानबूझकर लड़कों को देखते ही अपनी चाल बदल देती थीं. उनकी चाल देख कर ही लौंडे समझ जाते थे कि मैडम जानबूझ कर गांड हिला रही हैं.

मगर प्रिंसीपल सर के डर के कारण कोई भी उनसे कुछ नहीं कह पाता था.

प्रिंसीपल सर का डर क्यों था ये आपको इस सेक्स कहानी में आगे पता चल जाएगा.

वो जब काले रंग के सूट में स्कूल आती थीं, तो मन करता था कि उसी वक़्त पकड़ कर मैडम को चोद दूं. … पर कर नहीं पाया. फिर कुछ ऐसा हुआ कि सब कुछ ओता चला गया. मुझे मालूम ही नहीं था मेरी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

गर्मियों का मौसम था, स्कूल की छुट्टी हुई ही थी. सारे टीचर अपना अपना बैग आदि समेट करके अपने घरों को जाने के लिए तैयार हो रहे थे. उसी समय मुझे प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनाई दी. वो ज्योत्सना मैडम को अपने केबिन में बुला रहे थे.

दरअसल हमारा स्कूल इतना बड़ा नहीं था कि अगर प्रिंसीपल किसी को भी बुलाएं और हम तक आवाज़ ना पहुंचे. अभी मैंने कुछ दिनों से लगातार ध्यान दिया हुआ था कि जैसे ही स्कूल खत्म होता था, ज्योत्सना मैडम के लिए प्रिंसीपल सर का बुलावा आ जाता था.







उस दिन मैंने सोचा कि आज तो मामला क्या है … ये जानने के बाद ही घर जाऊंगा. कुछ कुछ उड़ती हुई बातें भी मुझे उनके कमरे में झाँकने के लिए मजबूर कर रही थीं.

चूंकि सर और मैडम की आशिकी के चर्चे मेरे स्कूल में दाखिला लेने से पहले से ही चले आ रहे थे. बस उस दिन मैंने मन बना लिया.

प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनते ही मैडम जी ने अपना पर्स उठाया और उनके चेंबर में चली गईं. मैंने शुरू में बाहर रह कर ही इंतजार करना ठीक समझा और इंतजार करने के लिए बाहर पड़ी बेंच पर बैठ गया. इस दौरान मेरे कान कमरे में से आने वाली हर आवाज पर लगे हुए थे, मगर अन्दर से एक सुई गिरने तक की आवाज नहीं आ रही थी.

मैडम को प्रिंसीपल सर के कमरे में गए हुए एक घण्टा होने को आया पर अब तक ना मैडम बाहर आई थीं और ना ही प्रिंसीपल सर.

मैंने पहले भी ऐसी अनेक कहानियां पढ़ी हुई थीं … इसलिए मुझे समझते हुए ज़रा भी देर नहीं लगी कि अन्दर क्या चल रहा होगा.

थोड़ी देर और इंतजार करने के बाद मैंने अपनी कॉपी खोने की शिकायत लिखवाने का बहाना करके प्रिंसीपल के कमरे जाने का मन बना लिया और मैं उनके कमरे तक पहुंच भी गया, पर उधर ना ही प्रिंसीपल सर नज़र आए और ना ही मैडम नज़र आईं. मैं कमरा खाली देख कर भौंचक्का था. मुझे लगा कि शायद ये दोनों पीछे के रास्ते से निकल कर कहीं चले गए हैं और बाद में रूम में आ जाएंगे.

मगर उस दिन काफी देर हो चुकी थी तो मैं स्कूल से वापस आ गया, पर मैं इन बातों से इतना भी अंजान नहीं था कि मैं समझ ना सकूँ कि मैडम और सर कहां चले गए होंगे.

अगले दिन जब मैं स्कूल में ज्योत्सना मैडम से मिला, तो उस दिन के बाद से मैंने उन्हें घूर कर देखना शुरू कर दिया.

मैडम भी मेरे बदले बदले तेवर को समझ सकती थीं. चूंकि मैं स्कूल का प्रेसीडेंट था, जिस वजह से स्कूल की प्रार्थना से लेकर स्कूल के नोटिस आदि तक सभी के लिए प्रिंसीपल सर सीधे मेरा नाम ही सुनिश्चित करते थे.

ऐसे ही देखते देखते स्कूल का वार्षिक समारोह का दिन आ गया. पूरा स्कूल सज-धज कर तैयार था. सारे बच्चे, टीचर, उस दिन सभी सज-धज कर आए थे.






आप समझ ही सकते हैं कि मैं किसकी तरफ इशारा कर रहा हूँ.

ज्योत्सना मैडम ने लंबा सा गाउन डाला था, वो भी सुर्ख लाल रंग का, जिसमें से उनके चुचे लगभग बाहर को निकलने को हो रहे थे. मैंने कई बार नोटिस किया कि प्रिंसीपल सर और मैडम के बीच आज बात बिल्कुल भी नहीं हो रही थी.

मैंने कारण जानने के लिए मैडम को टटोलने की कोशिश की, पर मैडम ने अपना मुँह नहीं खोला. उनके इस बर्ताव से मेरा आश्चर्य सातवें आसमान पर था कि आज मैडम इतना मस्त माल लग रही थीं और प्रिंसीपल सर कुछ घास ही नहीं डाल रहे हैं.

मैंने सोचा अपने संयम पर काबू रखने में ही भलाई है. वक़्त आने पर अपने संयम का सही फायदा मिल कर रहेगा. बस ये सोच कर मैं प्रोग्राम की बाकी तैयारियों में लग गया.

उस दिन छह सात प्रोग्राम्स के बाद वार्षिकोत्सव समाप्ति की ओर चला ही था और प्रिंसीपल सर उठ कर चले गए थे. तभी मेरे मन में एक उपाए सूझा. मैंने बाहर जाकर देखा तो पाया कि प्रिंसीपल सर प्रोग्राम को खत्म करने के बाद के कामों में लगे हुए थे और उनको अभी एक घंटा लग सकता था.

ये देख कर मेरे दिमाग में एक खतरनाक आईडिया आ गया. मैंने अपने एक साथी को ये कह कर मैडम के पास भेज दिया कि प्रिंसीपल सर ने आपको अपने ऑफिस में बुलाया है, उन्हें आपसे कुछ जरूरी काम है.

जितनी देर में मेरा साथी मैडम को ये बात बताता … उतनी देर में मैं प्रिंसीपल सर के ऑफिस में चला गया और कमरे की लाइट्स ऑफ करके मैं दरवाजे के पीछे छिप गया.

दो मिनट ही बीते होंगे कि मैंने किसी के आने की आहट सुनी. कुछ ही पलों में ज्योत्सना मैडम ऑफिस के अन्दर आ चुकी थीं. जैसे वो अन्दर आईं, मैंने झट से दरवाजा बंद करके उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने में लग गया.

मैडम की आवाज़ आई- सर, आज सारा कुछ यहीं कर लेंगे … या उसी वाले कमरे में चलेंगे.

किसी दूसरे कमरे का नाम सुन कर मेरा दिमाग़ ठनका और मुझे समझ में आ गया कि उस दिन जब मैं शिकायत के बहाने से आया था, तब मुझे इस ऑफिस में कोई क्यों नहीं मिला था.

मैडम ने दुबारा आवाज़ लगाई- सर अंदर वाले कमरे में चलो न.

मैंने ये सुनते ही मैडम को आगे की तरफ़ टेबल पर झुका कर उनकी ड्रेस ऊपर करके अपना लंड उनके चूतड़ों की दरार के बीच के छेद पर लगा दिया. जब तक वो कुछ सोच पातीं, इतनी देर में मेरा आधा लंड टीचर की गांड के अन्दर प्रवेश कर चुका था.

वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी थीं और कह रही थीं- आह सर आपको ये शौक कब चढ़ गया … कल तक तो आप बस चुत मार कर ही शांत हो जाते थे … आह आज शुरुआत ही इतनी ख़तरनाक है … क्या इरादे हैं आज हमारे प्रिंसीपल सर के..!

मैडम की बातें सुनकर मुझे मजा आने लगा था और मेरा जोश बढ़ भी रहा था. मैंने मैडम की गांड मारना चालू रखा और पन्द्रह मिनट की धक्कम पेलाई में मैंने मैडम की गांड में ही अपना वीर्य डाल दिया. जैसे ही मैं थोड़ा पीछे को हुआ, मैडम ने घूम कर मेरी ओर रूख़ कर लिया और वो मुझे देख कर सन्न रह गईं. मैं उनके सामने ही अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए दुबारा खड़ा करने की कोशिश में लगा था.







तभी मैडम ने मुझ पर चिल्ला कर कहा- अरे राज … ये क्या कर रहे हो तुम … और तुम अन्दर कब आए?

मैंने उन्हें सारा सीन समझाया और कहा- मैडम देखो … मुझे आपके साथ वही सब कुछ करना है, जो आप प्रिंसीपल सर के साथ हर रोज करती हो. अगर आप राजी राजी करोगी, तो आपके लिए सही है. नहीं तो स्कूल इतना बड़ा भी नहीं है कि आपके कारनामे किसी से छिपे रह जाएं. बात फ़ैल जायेगी तो आपकी ही ज्यादा बदनामी होगी.

इतना कहते ही मैडम ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसको मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने और चाटने लगीं.

वो कहने लगीं- मैं तो कब से तुझसे चुदना चाह रही थी. तू ही गंडफट था तो मैं क्या करती. तूने कभी मुझे दाना ही नहीं डाला.

मुझे समझ आ गया कि मैडम मस्त हो गई हैं और फिर से मजा देंगी. अब मैंने मैडम के दूध मसलने शुरू कर दिए.

मैडम बोलीं- यार राज, मेरा गाउन खराब हो जाएगा. इस पर सिलवटें पड़ जायेंगी.

मैंने कहा- तो गाउन को उतार दो ना मैडम … आपके पक्के आशिक को आज पूरी नंगी मैडम चोदने का मन है.

मैडम ने गाउन उतार दिया और ब्रा पैंटी में आ गई’. मैंने अगले ही पल उनकी ब्रा पैंटी भी हटा दी और कमरे में एक छोटी लाईट जला दी. मैडम इतना चुदने के बाद अब भी मस्त माल थीं. मैं उनके एक दूध को चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा.

मैडम बोलीं- मुझे लंड ठीक से चूसने दे.

मैंने उनके दूध छोड़े और लंड से उनके मुँह को चोदना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में मैंने दुबारा अपना सारा माल मैडम के मुँह में डाल दिया.

इसके बाद मैंने मैडम को टेबल के ऊपर बिठाया और उनकी चूत चाटने लगा. दस मिनट के अन्दर ही उनकी चूत चुदने को तैयार थी.

मैडम ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थीं- राज आह … अब तो अपना लंड मेरी चूत में पेल दो. मेरी चूत पानी छोड़ रही है लंड हड़पने के लिए. इसका पेट भर दो अपने गर्म लंड से.

पर मैं आज उनको तड़पा तड़पा कर मजा देना चाहता था. सो मैंने उन्हें ऐसे कुछ मिनट और तड़पाया. फिर अपना सात इंच का लंड उनकी चूत में एक बार में ही उतार दिया.







मैडम की गीली चूत चौड़ी हो गयी और मजे के कारण उनकी आह निकल गई और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

टीचर मैडम के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थी. मैडम प्रिंसीपल को भी गालियाँ निकाल रही थी. कह रही थी मादरचोद कुत्ता साला … रोज मुझे चुदाई के लिए दफ्तर में बुला लेता है. पर उससे होता जाता कुछ नहीं! दो मिनट पुच पुच करके झड़ जाता है. मुझे तो नौकरी करनी है तो मजबूरी में उसके नीचे लेटना पड़ता है. नहीं तो ऐसे चूहे को तो मैं अपना मूत भी ना पिलाऊँ.

लगभग बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर ही निढाल होकर गिर पड़ा. फिर उन्होंने मुझे होठों पर किस किया और चुदाई के लिए थैंक्स कहा.

मैडम ने कहा- आज गांड और चूत मरवा कर मजा आ गया.

वो कहने लगीं- अब आज से साले प्रिंसीपल की माँ की चुत … आज के बाद मुझे जब भी मेरी चूत लंड मांगेगी, मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी.

बस इसी वादे के साथ हम प्रिंसीपल के ऑफिस के बाहर आए, तो देखा कि प्रोग्राम बस ख़त्म होने वाला था और प्रिंसीपल सर अपने ऑफिस में आने ही वाले थे.







योग टीचर के लंड से खुश हुई पंजाबी माल - Punjabi girl was happy with the penis of the yoga teacher

 योग टीचर के लंड से खुश हुई पंजाबी माल


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां










हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका कौर है. मैं 20 साल की जवान लड़की हूं. आज मैं आप लोगों के सामने सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं. यह मेरी पहली कहानी है तो कृपया करके मेरी गलतियों को माफ करें.

कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देती हूं. मैं एक सेक्सी जिस्म की मालकिन हूं. मेरा रंग गोरा है और मेरे बूब्स का साइज 32बी है. मेरी कमर 26 की है और मेरी गांड 34 की है.

अपने जिस्म की इस सेक्सी फिगर को मेंटेन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैंने योगा ट्रेनर रखने की सोची.

मैं कई बार नोटिस किया करती थी कि मेरे मौहल्ले के लड़के और मर्द मेरी ओर हवस भरी निगाहों से देखा करते थे. मुझे ये देख कर खुशी होती थी कि मैं इतनी सेक्सी हूं कि लोगों के मुंह से लार टपकवा सकती हूं. मगर मैं चेहरे पर ये सब जाहिर नहीं होने देती थी.

मेरी सेक्सी गांड को देखकर जवान तो क्या, बूढों का लंड भी सलामी देने लगता था. सभी लोग मुझे भोगने के लिए प्यासे दिखते थे. मगर मुझे सबको तड़पाने में बहुत मजा आता था. इसलिए मैं अपने फिगर की ओर बहुत ध्यान देती थी.

मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और एक छोटी बहन भी है. पिताजी काम के कारण ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. मेरी मां की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसलिए घर का काम हम दोनों बहनें ही करती हैं. मेरी छोटी बहन स्कूल चली जाती है. उसके बाद घर को मैं ही संभालती हूं.






कुछ दिन पहले ही मैंने योगा सीखने का सोचा. मैंने एक योगा ट्रेनर ढूंढा जो मुझे बहुत ही मुश्किल से मिला. वो मेरे घर आया और हमने बैठ कर सब कुछ तय कर लिया. उसने अपना नाम रवि बताया. मैंने उसे सुबह 7 बजे आने के लिए कह दिया.

वो बात करके चला गया. मैं खुश हो गयी कि कल से मेरी योगा क्लास शुरू होने जा रही है. रात को मैं काफी उत्साहित थी. अगली सुबह जब उठी तो छोटी बहन तैयार होकर स्कूल चली गयी. मैं फ्रेश होकर तैयार हो गयी.

7 बजे योगा ट्रेनर आ गया. मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नजर मेरी नाइटी पर गयी. मैंने जालीदार नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ झलक रही थी.

योगा ट्रेनर की नजर मेरे आधे बाहर झांक रहे बूब्स पर जम गयी थी. मैं अपनी नाईटी को ठीक करते हुए खांसी तो उसका ध्यान हटा. फिर मैंने उसे अपने पीछे आने के लिए कहा. मैं आगे की ओर मुड़ी तो उसका ध्यान मेरी गांड पर गया.

उसके मुंह से हल्की सी आवाज आयी- हाय … क्या माल है!

मैं बोली- जी? आपने कुछ कहा क्या?

वो बोली- नहीं मैडम, मैंने तो कुछ नहीं कहा.

फिर मैं आगे चलने लगी. हम लोग हॉल में आ गये.

मैंने उसको हॉल में सोफे पर बैठ कर इंतजार करने के लिए कहा. वो मेरे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देख रहा था. वो देखने में अच्छा था लेकिन बहुत ही ठरकी किस्म का इन्सान लग रहा था.

मैं बोली- मैं एक बार जरा अपनी योगा पैंट्स पहन कर आती हूं. आप थोड़ा वेट करो.

वो बोला- योगा पैंट्स की कोई जरूरत नहीं है. आप इस तरह के कपड़ों में भी कर सकती हैं. बल्कि खुले कपड़ों में तो और ज्यादा अच्छा रहता है योगा करना.

उसकी बात मैंने सोच कर कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर शुरू करते हैं.

वो बोला- जी. ठीक है.






कहकर उसने मैट नीचे वहीं फर्श पर बिछा दिया. वो मुझे पहले कुछ वार्म-अप एक्सरसाइज करवाने लगा.

जैसे जैसे वो कहता गया वैसे वैसे मैं करती गयी. वो भी मेरे साथ साथ कर रहा था. काफी देर तक एक्सरसाइज करने के बाद मेरी चूचियां मेरी ब्रा से बाहर आने को हो गयी थीं. उसकी नजर मेरी चूचियों को ही घूर रही थी.

उसके बदन में पसीना आ गया था. उसने अपना टीशर्ट उतार दिया.

मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं?

वो बोला- मैडम कपड़े खराब हो जायेंगे, अभी तो पूरी प्रैक्टिस बची हुई है.

मैंने फिर कुछ नहीं कहा.

हम दोनों फिर एक्सरसाइज करने लगे. मैट पर कूदते हुए मेरे बूब्स भी ऊपर नीचे उछल रहे थे. अपने उछलते बूब्स को फील करके मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी. सामने रवि का कसरती बदन देख कर मुझे सेक्स की फीलिंग भी आ रही थी.

कुछ देर के बाद उसने अपनी लोअर भी निकाल दी. वह केवल शॉर्ट्स में ही एक्सरसाइज करने लगा. मैं उसको देख रही थी.

फिर वो बोला- अब काफी वार्म अप हो गया है. अब योगा प्रैक्टिस करते हैं.

उसके बाद उसने मुझे कई सारे आसन करवाये. आखिर में फिर सेतुबन्धासन (ब्रिज पोज़) की प्रैक्टिस करवाने लगा. इस पोज में कमर को उठाते हुए पेट को ऊपर करते हुए शरीर को पुल के आकार में करना होता है.

इस पोजीशन में आने के बाद मेरी चूत ऊपर उठ गयी. रवि मेरी टांगों के बीच में आकर मुझे कमर से सपोर्ट दे रहा था. इस पोजीशन में उसका लंड उसके शॉर्ट्स में से मुझे मेरी पैंटी पर छूता हुआ महसूस हो रहा था. मैं फील कर पा रही थी कि उसका लंड टाइट हो रहा था.

उसके हाथ मेरी कमर पर थे और धीरे धीरे मेरे बूब्स के नीचे आ गये थे. उसके हाथों के अंगूठे मेरे बूब्स को दबा रहे थे. उसका लंड और ज्यादा कड़ा होकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा था. वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

जब मुझे लगा कि बात बहुत आगे जा रही है तो मैंने बोला- बस… आज के लिये यह काफी है. बाकी कल करेंगे.

वो बोला- ठीक है, प्रियंका. मैं कल आपको ज्यादा देर तक प्रैक्टिस करवाऊंगा.

उसके बाद वो चला गया.






अगले दिन फिर वो अपने टाइम पर आ गया. छोटी बहन स्कूल चली गयी थी. मां हॉल में लेटी हुई थी. उनकी कमर में बहुत दर्द था. उनको डिस्टर्ब ना हो इसलिए हम वहां पर योगा प्रैक्टिस नहीं कर सकते थे.

मैंने कहा- आज तो यहां पर जगह नहीं है.

वो तपाक से बोला- कोई बात नहीं, अंदर किसी रूम में कर लेते हैं अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो.

मैंने कहा- ठीक है. अंदर रूम में आ जाओ.

हम दोनों रूम में चले गये. मैं अपनी योगा ड्रेस निकालने लगी.

वो बोला- अगर आपको जल्दी से अच्छे रिजल्ट्स चाहिएं तो आपको कम से कम कपड़ों में योगा करना चाहिए. आप चाहें तो ब्रा और पैंटी में ही कीजिये.

मैं बोली- लेकिन आपके सामने?

वो बोला- मेरी बाकी सभी क्लाइंट्स भी करती हैं. वो लोग तो बहुत ओपन माइंडेड हैं. अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो कोई बात नहीं.

मैंने सोचा कि अगर मैंने मना किया तो ये मुझे गंवार समझेगा. इसलिए मैंने उसको हां बोल दिया. मुझे नहीं पता था कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की की चुदाई की तैयारी कर रहा है मेरा ट्रेनर.

अपनी नाइटी मैं उसके सामने ही उतारने लगी. उसकी नजरों से हवस टपक रही थी. उसके सामने मैं ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने उस दिन ब्लैक ब्रा और ब्लैक ही पैंटी पहनी थी. उसके बॉर्डर पर जाली लगी हुई थी जिससे मेरी चूत और चूचियों को बहुत ही सेक्सी लुक मिल रहा था.

मैंने देखा कि मुझे इस रूप में देख कर रवि का लंड उसकी लोअर में ही अलग से दिखने लगा था. फिर हम दोनों वार्म अप करने लगे. कुछ देर वार्म करने के बाद वो पसीना पसीना हो गया और उसने अपनी बनियान और लोअर को निकाल दिया.






आज उसने एक वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. उसका लंड उसमें अलग से ही उठा हुआ दिख रहा था. उसके लंड को देख कर लग रहा था कि वो कम से कम 8 इंच लम्बा तो होगा ही. उसके लंड को इस तरह से देखकर मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा. मगर मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

वो बोला- आज मैं आपको भुजंगासन (कोबरा पोज) करवाऊंगा. इसके लिए आपको बेड पर चलना होगा. यहां जमीन पर ठीक से नहीं होगा.

मैं उसकी बात मान गयी और उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटने के लिए कहा.

फिर वो मेरे पास पीछे आकर बैठ गया. उसने मुझे आगे से छाती उठाने के लिए कहा. मैं उठाने लगी लेकिन मेरे पैर भी पीछे से उठ रहे थे.

वो बोला- मैं आपके पैरो पर बैठ जाता हूं जिससे केवल छाती ही उठेगी.

वो मेरी गांड के ठीक बीच में मेरी जांघों पर बैठ गया. उसके अंडरवियर में से उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा. उसने मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा.

मैं उठाने लगी तो नहीं उठा पाई. उसने मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी मदद करने लगा. अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में पहले से ज्यादा अंदर घुसता सा लगने लगा. मुझे मजा आने लगा. मेरी नर्म नर्म गोल गांड में लंड लगाने में उसको भी मजा आ रहा था.

वो बोला- ऊपर देखो.

मैं ऊपर देखने लगी. उसका लंड मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटाने की कोशिश कर रहा था. फिर उसने मुझे वापस नीचे आने को कहा. मैं सिर नीचे रख कर आराम से लेट गयी. कमर दर्द करने लगी.

मैं बोली- मेरी कमर में दर्द हो रहा है.

वो बोला- मैं मसाज कर देता हूं. वो मेरी कमर को मसाज देने लगा. उसके हाथ मेरी गांड को भी दबाने लगे. वो मेरे गोरे गोरे चूतड़ों से मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटा कर अपनी उंगलियों से मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

मुझे भी अच्छा लग रहा था. बीच बीच में वो मेरी जांघों के अंदर मेरी चूत के पास अपने लंड को भी टच कर रहा था. मेरी चूत में गीलापन आने लगा था.

मैं थोड़ा कसमसाने लगी थी.






उसको शायद पता लग गया था कि मैं गर्म हो रही हूं.

उसके बाद वो बोला- मैडम, इतना आराम नहीं करना है. शरीर ठंडा पड़ा जायेगा. चलिए, फिर से प्रैक्टिस करते हैं.

उसने फिर से मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा. इस बार जब उसकी जांघें मेरी जांघों के बीच में मेरी गांड के पास टच हुई तो मैंने पाया कि उसका लंड नंगा होकर मेरी गांड को छू रह था. पता नहीं कब उसने अपना अंडरवियर निकाल दिया था.

वो अपने लंड को मेरी पैंटी में घुसाने लगा. मैं कुछ नहीं बोली. हिम्मत पाकर उसने मेरी पैंटी खींच दी और मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. मेरी आंखें बंद होने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे योगा ट्रेनर का गर्म गर्म लंड मेरी चूत को छू रहा था.

इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती उसने मेरी चूत में एक जोर का धक्का लगा दिया. उसका 8 इंच का लंड मेरी चूत में जा घुसा और मेरी आंखों के सामने अंधेरा हो गया. मेरी कुंवारी चूत में जान निकाल देने वाला दर्द हुआ.

मैं बेसुध सी हो गयी. इसी का फायदा उठा कर उसने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया. अब मैं ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी पड़ी हुई थी.

फिर वो मेरी चूचियों को आह्ह … आह्ह करते हुए दबाने लगा. मैं आधे होश में थी. जब पूरे होश में आयी तो उसके हाथ मेरी दोनों चूचियों को जोर जोर से भींच रहे थे. उसका लंड मेरी चूत में और अंदर घुसता जा रहा था.

धीरे धीरे करके उसने मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदने लगा. मैं उठने लगी तो उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा मुंह को बेड में दबा लिया और मेरी चूत को पेलने लगा. फिर उसने मेरी गांड को ऊपर खींचा और नीचे एक तकिया दे दिया.

मैं बोली- रुको, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.

वो बोला- नहीं रुक सकता मेरी जान … दर्द से ज्यादा अब तुम्हें मजा देने की बारी है. एक बार लंड का स्वाद चख लिया तो रोज ही मेरे लंड से खुद ही चुदने लगोगी.

तकिया रख देने से मेरी चूत उठ कर एकदम सही पोजीशन में आ गयी. उसने मेरे बालों से मुझे पकड़ लिया जैसे घोड़ी की लगाम पकड़ते हैं. रवि ने फिर से धक्का मारा और मेरी चूत में लंड फंसा कर उसको आगे पीछे करने लगा. मेरी चूत ने अब लंड को एडजस्ट कर लिया था और मैं चुदने का मजा लूटने लगी.

मेरे मुंह से कामुक सीत्कार आने लगा- आह्ह… ओहह … फक मी रवि … यस … आह्ह लव यू … फक मी हार्ड … आह्ह और जोर से. कमॉन .. आ्हह … करके मैं उसके लंड को चूत में लेती रही और वो मुझे चोदता रहा.






उसके धक्के इतने ताकतवर थे कि मेरी बच्चेदानी तक उसका लंड टक्कर मार रहा था. मेरी आंखें बंद होने लगी थीं. उसने सच ही कहा था. अब तो मेरा मन करने लगा था कि वो मुझे ऐसे ही चोदता रहे. मैं आंखें बंद करके उसके लंड का मजा लेने लगी.

वो मुझे घपाघप चोदता रहा. उसके मुंह से भी मस्त कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … ओह्ह … हाय सेक्सी … आह्ह … ऐसी टाइट कुंवारी चूत बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है. तुझे तो मैं अपनी रानी बना लूंगा मेरी जान … आह … ले मेरे लंड को, पूरा ले ले. आह्ह.. तुझे चूत की रानी न बना दिया तो मेरा नाम नहीं.

उसकी चुदाई इतनी मजेदार थी कि कुछ ही देर में मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा. मैं उसके लंड पर ही झड़ने लगी. मेरी चूत से निकले रस ने उसके लंड को भिगो दिया और अब पच-पच की जोरदार आवाज होने लगी.

रवि का लंड अब चिकना होकर और ज्यादा अंदर तक मेरी चूत को फाड़ने लगा. वो मेरी चूत की गर्मी को अब ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसका गर्म गर्म वीर्य मुझे मेरी बच्चेदानी तक महसूस हुआ.

रवि थक कर मेरे ऊपर ही गया. मेरी हालत भी खराब हो गयी थी. हम दोनों हांफ रहे थे. फिर धीरे धीरे उसका लंड सिकुड़ने लगा और मेरी चूत से बाहर आने लगा. मैंने उठ कर देखा तो उसके लंड पर खूब सारा वीर्य और काफी सारा खून लगा हुआ था.

मैं खून देख कर डर गयी.

वो बोला- घबराओ नहीं, तुमने पहली बार सेक्स किया है. तुम्हारी चूत का ताला मैंने खोल दिया है. अब तुम आराम से सेक्स का मजा ले सकती हो. पहली बार में सभी लड़कियों का खून निकलता है जिनकी सील नहीं टूटी होती है.

उसके बाद वो मुझे चूमने लगा. मुझे प्यार करने लगा. फिर उसने मुझे साफ किया और वहीं बेड पर मेरे साथ लेट गया.

मैं बोली- अब तुम्हें जाना चाहिए. योगा टाइम खत्म हो गया है. अगर मां उठ कर आ गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी.

वो बोला- ठीक है डार्लिंग, अब मैं जा रहा हूं. मगर कल से मैं सेक्सी लड़की की चुदाई घर के हर एक कोने में करूंगा. तुमको चोद चोद कर अपनी रानी बना लूंगा.

उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गया. मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

इस तरह मेरे योगा ट्रेनर ने मुझे चुदाई की ट्रेनिंग भी बखूबी दी. उसने मुझे चोद चोद कर मेरी चूत को अपने लंड की रानी बना लिया. मुझे पहले ही सेक्स में इतना दमदार लंड मिल गया.

मैं अपने योगा ट्रेनर से अब रोज ही अपनी चूत चुदवाती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. उसके लंड से चुद चुद कर मेरी गांड और ज्यादा मोटी और रसीली हो गयी है. मेरी चूचियों का साइज भी बढ़ गया है. मैं पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी हूं और बहुत खुश हूं.

दोस्तो, ये थी मेरी अपनी रियल सेक्स स्टोरी. आपको यह सेक्सी लड़की की चुदाई स्टोरी पढ़ने में मजा आया होगा. मुझे जरूर बतायें. अगर आप लोगों ने सही रेस्पोन्स दिया तो मैं आगे भी आप लोगों के लिए अपनी आपबीती लेकर आती रहूंगी….






टीचर चाची की खुजली मिटाई - Teacher Aunty's itch was relieved

 टीचर चाची की खुजली मिटाई


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां









मेरा नाम राहुल है. मैं एक अच्छा एथलीट हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 6 इंच है और मैं बी.एस.सी का स्टूडेंट हूँ.

यह कहानी मेरी उन चाची की है, जिन्हें आप में से कोई भी पहली बार देखने पर चाची तो बिल्कुल नहीं मान सकते. मेरी ये चाची सीकर में रहती हैं और सरकारी टीचर हैं. चाची के कोई संतान नहीं है. उनकी उम्र 24 साल है और वो दिखने में बिल्कुल प्रियंका चोपड़ा की ट्रू कॉपी हैं. मेरे चाचा की शादी को 2 साल हो चुके हैं, पर मेरी चाची अपने फिगर को मेंटेन रखने के लिए अभी कोई बच्चा नहीं चाहती हैं.

मैं शुरू से ही चाची के काफी नजदीक था. वैसे मेरे चाचा भी सरकारी अध्यापक हैं और वो भी सीकर में ही पढ़ाते हैं, पर उनकी ड्यूटी चाची के स्कूल में नहीं है.

हम लोग जयपुर में रहते हैं, पर मेरी जब भी छुट्टियां होती हैं, मैं टाइम पास करने अपने चाचा के पास आ ही जाता हूँ. मैं जब अपने घर रहता था, तब मैं अपनी चाची से व्हाट्सैप पर कई बार चैट किया करता था.

एक दिन रात को बात करते करते चाची ने मुझसे पूछा- तू इतनी रात तक ऑन लाइन रहता है, जरूर तू अपनी किसी गर्लफ्रेंड से चैट करता होगा.

मैंने उन्हें मना कर दिया और मैंने उनको बताया- चाची मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

चाची- ये तो हो ही नहीं सकता कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड ना हो.

मैं- क्यों नहीं हो सकता?

चाची- क्योंकि तू इतना हैंडसम जो है.

मैं- ऐसा नहीं है कि मैं किसी को पसंद नहीं करता. मैं अपनी वाली को बहुत पसंद करता हूँ, पर उसकी मज़बूरी ये है कि वो मेरी हो नहीं सकती और इसीलिए मैंने आज तक उसे प्रपोज नहीं किया.

चाची- पागल हो तुम, तुम्हें उसे प्रपोज जरूर करना चाहिए.

मैं- नहीं मैं नहीं कर सकता.

‘वो कौन है बता तो?’

फिर उनके जोर देने पर मैंने उनसे कहा कि अब की बार सीकर आते ही पक्का बताऊंगा.

चाची- ओ के, मैं तेरा बेसब्री से इंतजार करूंगी.

मैंने वैसे अभी तक चाची को चोदने का कभी नहीं सोचा था, मगर आज उनसे बात करके न जाने क्यों ऐसा लगा, जैसे मछली जाल में आ रही है.

फिर मेरी उनसे डेली चैट होने लगी और हम लोग एक दूसरे से बहुत कुछ शेयर करने लगे थे. मैं रोज उनसे एक ही बात कहता कि मुझे जिससे प्यार है, वो शायद मुझे पसंद भी करती हो, पर वो मेरी हो नहीं सकती.

पर चाची रोज जोर देकर पूछतीं कि प्लीज मुझे उसका नाम बताओ और मैं रोज यही कहकर टाल देता था कि अभी नहीं.. जब मैं आपसे मिलूंगा ना, तब पक्का बताऊंगा.

फिर उन्होंने मुझे ‘रोज डे..’ पर एक गुलाब के फूल का आइकन सेंड किया, तो मैंने भी उनको विश किया.

मैंने उनको हग डे पर विश किया और उनका एक टाइट हग माँगा तो उन्होंने कहा- फ़ोन पर कैसे दूँ, जब तू यहाँ आएगा तो तुझे पक्का हग दूंगी.

फिर चाची ने पूछा- एक बात पूछूँ?

मैंने कहा- हां पूछिये?







चाची ने बोला- तुझे मेरा हग क्यों चाहिए?

मैं- सही बताऊं तो ये मेरी तमन्ना है चाची कि मैं आपको हग करूँ, वो भी एक टाइट सा हग करूँ.

चाची- मुझे तेरे इरादे ठीक नहीं लग रहे.

मैं- नहीं चाची ऐसी कोई बात नहीं है.

चाची- तो बता ना बात है कैसी बात है?

मैं- थोड़ा रुको. में आपको फ़ोन पे नहीं बताना चाहता हूँ आपके सामने बताना चाहूँगा.

चाची- चल ओके.. मैं तेरा वेट करूंगी.

अब इतना पागल तो मैं भी नहीं था कि मुझे पता ना चले कि चाची किस इंतजार की बात कर रही हैं. मुझे पक्का पता चल चुका था कि चाची अब जानबूझ कर मुझसे खुद फंसना चाहती हैं.

अगले दिन मैंने चाची को कुछ यूं विश किया- हैप्पी किस डे डियर चाची.

चाची- नहीं, ये तो तुझे विश नहीं करूंगी.

मैं- ओके विश मत करो, किस ही कर दो.

चाची- अब बाय.. तेरे इरादे बहुत खतरनाक होते जा रहे हैं.

मैं- नहीं चाची प्लीज. कुछ देर और बात कीजिये ना. मुझे आपसे बात करना बहुत अच्छा लगता है.

चाची- मुझे सब पता है तुझे क्या क्या अच्छा लगता है, पर ऐसे तो तेरी सारी विश पूरी नहीं कर सकती ना.

मैं- तो आप कैसे मेरी सारी विश पूरी कर सकती हैं?

चाची- सबसे पहले तो तू मुझे चाची नहीं बल्कि मेरा नाम लेकर बोला कर. अब यार हम फ्रेंड हैं तो फ्रेंड्स में चाची थोड़ी ही चलता है.

दोस्तो ये मेरे लिए सबसे बड़ा ग्रीन सिग्नल था कि वो मुझसे भी वो ही सब चाहती थीं, जो मैं उनसे चाहता हूँ.

इस तरह हम दोनों फ्रेंड बन गए और एक दूसरे से घंटों तक बात करने लगे.

ये बात पिछले रक्षाबंधन की है. मेरी चाची चाचा के यहाँ जयपुर आए थे.

जब मैंने चाची को देखा तो उन्होंने एक अजीब सी स्माइल पास की और मैंने भी उसका रिप्लाई उसी स्माइल के साथ किया. फिर हम सब लोगों में कुछ बातचीत हुई और सब अपने अपने काम में लग गए.

लगभग 2 बजे की बात है, मैं ड्राइंग रूम में टीवी की केबल सही कर रहा था, तभी चाची मेरी ओर आईं और मुझसे बोलीं- आ तुझे तेरा हग दूँ.

ये मेरे लिए उनकी साइड से दिया जाने वाला पहला तोहफा था, जिसे मैंने दोनों हाथों से क़ुबूल किया.

मैंने चाची को हग के दौरान अपना मुँह सीधा रखा और उनके मम्मों पर अपनी ठोड़ी रखी और अपने हाथ उनकी ब्रा की पतली पट्टी पे. मैं इस हग में चाची को कसता ही जा रहा था और अपना मुँह ऊपर करके चाची के हाव भाव नोट कर रहा था.

वो हग मैं अपनी पूरी लाइफ कभी नहीं भूल सकता क्योंकि चाची ने इतने दिल से दिया था कि उनकी अगले दो मिनट तक उनकी आँखें बंद थीं.







उस हग के बाद चाची ने मुझे एक स्माइल दी और किचन में चली गईं.

मैं शाम को सोने जाने लगा तो चाची ने आवाज दी और कहा- आज हमारे रूम में ही सो जाओ क्योंकि तेरी मम्मी भी आज मेरे रूम में ही सो रही हैं.

चाची के कहने पर मम्मी ने भी बोल दिया कि हाँ आज हमारे साथ ही सो जा, तेरी चाची इतने दिनों बाद आई हैं और कल वापस चली जाएंगी तो फिर आज की रात आपस में गप्पें मारते हैं.

मुझे भी यही सही लगा तो मैंने हाँ कह दिया.

उस रूम में एक बेड और एक चारपाई थी और बेड पर मैं और चाची और एक मेरी बुआ का लड़का था, जिसकी उम्र लगभग 4 साल है.

मैंने, चाची और मम्मी ने लगभग 10 बजे तक बातें की और फिर मम्मी को नींद आ गई.

अब मैं ओर चाची दो ही जाग रहे थे और मैं सबके सो चुकने का पूरा कन्फॉर्म करने के लिए बेड से उठा और बाहर फ्रीज से पानी पीने के बहाने पूरा घर चैक किया कि कोई जाग तो नहीं रहा और तब तक कोई नहीं जाग रहा था.

मैं आपस आया और इस बार चाची के बिल्कुल नजदीक आकर लेट गया और उनकी साइड मुँह करके बात करने लगा.

अब हमें बात करते करते 12 बज चुके थे और हम दोनों की ही गर्दन दर्द करने लगी थी.

इस स्थिति में रहने से तो चाची ने बोला- मेरी गर्दन दर्द कर रही है.

मैंने अपना हाथ चाची की तरफ किया और चाची को बोला- आप अपनी गर्दन इस पर रख लीजिए.

और चाची ने बिना किसी झिझक के अपनी गर्दन मेरी बांह पर रख दी.

अब हमारी स्थिति कुछ ऐसी थी कि चाची सीधे पीठ के बल लेटी हुई थीं और मैं अपना हाथ चाची के गर्दन के नीचे रखकर उनकी साइड मुँह करके तिरछा लेटा हुआ था.

अब मैं आहिस्ता आहिस्ता बात करते करते चाची को अपनी तरफ खींचने लगा और चाची भी बिना किसी अवरोध के मेरी तरफ आने लगीं. अब तक हम दोनों इतने नजदीक आ चुके थे कि हमारी सांसें टकरा रही थीं. फिर चाची ने भी मेरी गर्दन के नीचे हाथ दिया तो मैंने भी अपनी गर्दन चाची की हाथ पे रख दी. अब तो हम दोनों इतने नजदीक थे कि हम दोनों अपनी बातें एक दूसरे के कानों में बोल रहे थे.

वो एक ऐसा पल था, जब हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में थे और हमें कुछ कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ होने लगा था. हमारी पकड़ एक दूसरे पर मजबूत होती जा रही थी और हम दूसरे में समाने जा रहे थे. अब तक हम एक दूसरे को जितना कसके अपनी ओर दबा सकते थे, दबा चुके थे. पर तभी मैंने अपनी चाची को छोड़ दिया और मैं साइड हो गया.







तभी चाची मेरी साइड आईं और बोलीं- क्या हुआ?

मैं- कुछ नहीं.

चाची- तो छोड़ क्यों दिया?

तभी मैंने चाची को फिर से वैसे ही पकड़ा और उनके होंठों पर जोर से किस कर दिया. पर चाची शायद इसके लिए तैयार नहीं नहीं थीं, उन्हें एक झटका सा लगा और उन्होंने मुझे अलग किया और बोलीं- ये क्या कर रहे हो?

पर उस वक़्त मैं उनकी किसी बात को सुनने में मूड में नहीं था. मैंने उनको अपनी तरफ खींचते हुए आई लव यू बोला और उनके पतले होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लिया.

मैं अपनी चाची का साइज़ आपको नहीं बता सकता क्योंकि मुझे इसका कोई अंदाजा नहीं है, पर इतना जरूर बता सकता हूँ कि वो प्रियंका चोपड़ा की बिल्कुल कॉपी हैं.

अब चाची भी मेरा साथ दे रही थीं और हम एक दूसरे को प्यासों की तरह चूम और चाट रहे थे.

इसके बाद चुदास बढ़ी तो मैं चाची के ऊपर आ गया और उनके मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा. चाची मेरा पूरा साथ दे रही थीं.

अब मैंने थोड़ा नीचे खिसकते हुए चाची कि नाभि की तरफ बढ़ा तो मुझे मेरी जिंदगी का सबसे हसीन वाला मजा आया.. क्योंकि जैसे ही मैंने उनकी नाभि को किस किया, तो उन्होंने मुझे जोर से अपनी तरफ खींचते हुए बीच में से खुद को इस बेड से कम से कम एक फुट ऊपर उठा लिया और एकदम रोमांस में मस्त हो गईं.

दोस्तो मैं बता नहीं सकता कि मैं उस समय कैसा फील कर रहा था.

मेरे दोनों हाथों में चाची के दोनों मम्मों थे और मैं जैसे ही चाची को नाभि पे या उससे नीचे किस करता तो चाची खुद को बहुत ऊपर उठा लेतीं, जिससे मेरा सेक्स का मजा कई गुना हो रहा था.

अब मेरे लिए कंट्रोल करना बहुत मुश्किल था तो मैंने अपना हाथ चाची के सलवार की इलास्टिक पर रखा और उसे खोलने की कोशिश करने लगा तो चाची ने ये कहकर मना कर दिया कि ये सब करने का अभी सही वक़्त नहीं है.

मैं 12 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक चाची को चूमता रहा और चाची भी पूरी तरह मेरा साथ देती रहीं. मैंने चाची की चूत पर हाथ लगाकर देखा तो वो किसी गर्म भट्टी की तरह तप रही थी.

मैंने चाची की चूत में उंगली की और उनका पानी निकाल दिया. फिर चाची ने मेरा लंड पकड़ा और उसे एक रंडी की तरह हिलाने लगीं. इस तरह चाची ने मेरी मुठ मार दी और हम दोनों एक दूसरे को किस करते हुए सो गए.

मैं सुबह जब उठा तो चाची मेरे से पहले उठ चुकी थीं. मैं उनसे नजरें नहीं मिला सकता था, पर जैसे ही चाची मेरे रूम में आईं.. चाची ने मुझे पकड़ कर एक लिप किस दिया. फिर तो मैं जैसे बिल्कुल ही बेशर्म हो गया. मैंने चाची को बेड पे गिरा लिया और उनके मम्मों को दबाने लगा.

चाची झटके से खड़ी हुईं और बोलीं- पागल हो गए हो क्या? कोई आ गया तो?

अगले दिन स्कूल लगना था तो चाची चाचा के साथ सीकर चली गईं.

चाची ने सीकर जाते ही मुझे कॉल किया. उनकी बातों से साफ़ लग रहा था कि जितना हम दोनों में हुआ, चाची उससे कहीं ज्यादा चाहती थीं.







मैंने भी कह दिया कि मैं भी आपसे जल्द से जल्द मिलना चाहता हूँ

चाची ने कह दिया कि जब भी तेरा मन करे.. आ जा, मैं स्कूल टाइम में घर आ जाऊँगी और तेरे से मिल लूँगी.

मैंने भी चाची से कह दिया कि मैं आ रहा हूँ तो कल ही बस आप तैयारी कर लेना.

चाची- कैसी तैयारी?

मैं- मतलब ये कि मेरे लिए कुछ तो तैयारी करोगी ना मेरी जान..!

चाची- तू आ तो सही, मैं पूरी तैयार मिलूंगी.

मैंने सुबह ही घर से कॉलेज का बहाना किया और घर पर बोल दिया कि आज मेरी कुछ एक्स्ट्रा क्लास है इसलिए लेट हो जाऊंगा.

मैं 8 बजे सीकर पहुंचा और चाची को कॉल किया.

चाची- सीधे घर ही आ जा.. मैं घर पे ही हूँ.

मैं- ओके.

मैं 8:15 पर घर पहुंचा और जाते ही चाची ने मुझे गले लगा कर मेरा स्वागत किया फिर पानी ऑफर किया. मैंने पानी पिया और फिर चाची ने ब्रेकफास्ट का पूछा तो मैंने मना कर दिया.

चाची- तो क्या लोगे?

मैं- आपकी चूत.

चाची- हट बेशर्म..

मैं- बनाया किसने?

चाची- मैंने हा हा हा..

मैंने घर को लॉक किया और चाची को पकड़ कर चूमने लगा और धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने लगा. अब मैं केवल अंडरवियर में था और चाची को पागलों की तरह चूम रहा था. सच कहूँ तो चाची किसी बच्चे की तरह कोमल थीं. वो इतनी सॉफ्ट थीं कि बार बार उनको नंगा छूने का मन कर रहा था.

मेरा लंड अब तक बिल्कुल एक रॉड बन चुका था. मैंने ज्यादा देर ना करते हुए चाची का कुरता उतार दिया और अगले ही झटके में उनकी सलवार भी नीचे पड़ी थी. चाची इन सब में मेरा साथ दे रही थीं. अब चाची ब्लू पेंटी और ब्रा में थीं. वे इस वक्त किसी नपुंसक का भी लंड खड़ा कर देने वाली माल लग रही थीं.

मैं बिना वक़्त गंवाए चाची की ओर लपका और एक हाथ सीधा उनकी पैंटी पर और दूसरा उनकी गर्दन पर रखता हुआ उनको गले के नीचे चुम्बन की बारिश करने लगा. चाची तो पहले से ही सेक्स की आग में तप रही थीं. मैं उनका कोई भी अंदाज यहां कहानी में बयान नहीं कर सकता क्योंकि ये उनकी अदा की तौहीन होगी और सच तो ये है कि उनकी किसी भी अदा को बयान किया नहीं जा सकता.







मैंने चाची को उल्टा किया और उनकी पीठ को बछड़े की तरह चाटने लगा और बीच बीच में मैं उनको काट भी रहा था, जिससे उनकी कामुक सिसकारियां और तेज हो रही थीं.

अब मैंने मेरे रास्ते की रुकावट उनकी ब्रा को हटाया और उन्हें सीधा लेटाया तो मुझे उन हसीन वादियों के दर्शन हुए, जिनके लिए मैंने 2 साल इंतजार किया था.

वो पहाड़ सी सख्त दिखने वाली चोटियां इतनी नरम होंगी, मैंने सोचा ही ना था. चाची के मम्मों को दबाते दबाते मैं उनके होंठों को चूमने लगा और उनके बाल पकड़ कर उनकी गर्दन को उठाया और उनको गले और कान के नीचे किस करने लगा.

चाची अपना आपा खोती जा रही थीं और इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने आँखें बंद किये किये ही मेरे लंड को पकड़ा और उसे जोर जोर से खींचने लगीं. पर वो ऐसा कर नहीं पा रही थीं, क्योंकि लंड रॉड बन चुका था.

इसी गर्मी का फायदा उठाकर मैंने चाची की पैंटी निकाल दी और चाची ने अपनी कमर उठा कर इसमें मेरी हेल्प की.

मैं तो उनकी क्लीन शेव चूत देखकर पागल ही हो गया. मेरी जीभ अपने आप उनकी चूत की तरफ चलने लगी और अगले ही पल वो चाची की चूत का रसपान कर रही थी.

इस बार चाची का सेक्स पोजीशन देखने लायक थी, वो मेरा मुँह अपनी चूत में पूरा घुसा देना चाहती थीं. वो ऊपर से इतना दबाव लगा रही थीं कि मेरा साँस लेना मुश्किल हो रहा था. मैंने चाची की चूत को कम से कम 10 मिनट तक चाटा. उनकी चूत एकदम मखमली थी.

उनकी चूत ऊपर की ओर उठी हुई थी और इतनी सफेद चुत थी कि एक बार फेयर एंड लवली वाले भी देख लें तो वो टीवी पे उनकी चूत का भी एड दे दें.

मैंने चूत चाटकर ही चाची को ठंडा कर दिया और चाची रिलेक्स होकर बेड पे लेट गईं.

अब मैंने अपना लंड निकाला और चाची के होंठों पर रख दिया. चाची ने आँखें खोलीं तो उनके सामने मेरा 7 इंच का लंड फुंफकार मार रहा था. ये मेरी चाची जान को मेरे लंड का पहला दीदार था.

चाची ने मेरे लंड को देखा और चौंक कर बोलीं- उई इतना बड़ा.

मैं- तेरे लिए है जान.







चाची ने लंड पकड़ा और उसे बाहर से जुबान बाहर निकाल कर चाटने लगीं. चाची बिल्कुल सन्नी लियोनी की तरह मेरा लौड़ा चूस रही थीं. मुझे लगा कि मैं चाची के मुँह में ही ना निकल जाऊं इसलिए मैंने लंड मुँह से निकाला और चाची की क़मर के नीचे तकिया लगाकर उनकी चूत के मुँह पे लंड सैट किया.

चाची मुझे अपने ऊपर खींच रही थीं. चाची ने खुद मेरा लौड़ा हाथ में लिया और अपनी चूत के अन्दर घुसाने लगीं. चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड फिसल रहा था. चाची की आँखें बंद थीं और वो मुझे अपनी तरफ खींच रही थीं. मैंने भी गर्म लोहा देखकर सही वक़्त पर हथौड़ा मारा और मेरा पूरा का पूरा लंड एक ही झटके में चूत में उतार दिया. इस झटके से चाची का मुँह खुल गया और आँखें बड़ी करके उन्होंने मेरी तरफ देखा.

मैंने पूछा- क्या हुआ?

चाची कराहते हुए बोलीं- साले पूछ रहा है क्या हुआ? तेरे लौड़े ने मेरी बच्चेदानी को टक्कर मारी है.. और..

इसी दौरान मैंने हंसते हुए एक और झटका दे मारा और चाची पता नहीं क्या कहना चाहती थीं, वो बात उनके गले में ही अटक गई.

अब मैं लगातार चाची की चुत में तेज झटकों की बारिश कर रहा था और चाची भी कमर उठा-उठा कर मेरा लंड खा रही थीं. हमारी चुदाई से पूरा कमरा गूंज रहा था. चाची की चूत से मेरे लौड़े के टकराने की आवाज भी साफ़ सुनी जा सकती थी.

मैंने अब चाची की टाँगें ऊपर उठा लीं और उनको पेलने लगा. मैं चाहता था कि मैं चाची को कम से कम दो बार झाड़ दूँ इसलिए मैं उनको हर प्रकार से चोद रहा था.

अब मैंने चाची की एक टांग छोड़ी और उनकी टांगों के बीच में घुसकर उनकी एक टांग उठाकर चोदने लगा. करीब 15 मिनट बाद चाची खुद को सिकोड़ने लगीं, जैसे वो सर्दी में कांप रही हों और उसी कम्पन के साथ उन्होंने अपना रस गिरा दिया. इस समय चाची के चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव बिल्कुल साफ़ देखे जा सकते थे. मैंने चाची को उल्टा किया और उनको घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया. मैंने चाची को घोड़ी बनाने से पहले बेड से नीचे उतार लिया था, इसलिए अब जब भी में पीछे से झटके मार रहा तो चाची आगे बेड से टकरा रही थीं, जिससे पूरा कमरा ऐसे गूंज रहा था.. जैसे भूकंप आया हो.

हालाँकि बाहर कोई भूकंप नहीं था पर चाची के माथे का पसीना देखकर ये जरूर अंदाजा लगाया जा सकता था कि उनकी चूत का क्या हाल हो रहा था.

काफी देर तक अलग अलग पोजीशन में चोदने के बाद मैं और चाची एक साथ ही झड़ गए.

फिर ब्रेकफास्ट करने के बाद मैंने चाची की गांड भी मारी. इसके बाद मैं घर वापस आ गया.

एक दिन चाची ने फ़ोन पे बताया कि उनकी एक सहेली भी तुझसे चुदना चाहती है, अगर तुझे कोई एतराज ना हो तो??

मैंने पूछा- कौन सी सहेली?

चाची- तेरी फेवरट अनु मैडम!

फिर उसी दिन की तरह प्रोग्राम बना के मैंने मेरी चाची और अनु मैडम की एक साथ चुदाई की.

उसके बाद तो जैसे मेरे लंड पे चूतों की बारिश होती रही.

मेरी चाची ने मुझे कई मैडमों के साथ सेक्स करवाया और उनको सन्तुष्टि दिलवाई. वो मैं आपको अपनी अगली सेक्स स्टोरी में बताऊंगा कि कैसे मुझे मेरी चाची ने चाची और भाभी का पसंदीदा कॉलबॉय बना दिया.







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