भाभी की चूत मार उनको प्रेगनेंट किया - Fucked sister-in-law's pussy and made her pregnant

 भाभी की चूत मार उनको प्रेगनेंट किया


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


प्यारे दोस्तो नमस्कार, आज मैं आपको अपनी जिंदगी की दूसरी घटना बता रहा हूँ. मेरे लंड का साइज़ काफी बड़ा है.

मेरी पिछली हिंदी सेक्स स्टोरी के बाद मुझे एक कॉल आया, वो 34 साल की रिया नाम की एक महिला का कॉल था. काफी हमारी बात हुई.

फिर उसने एक दिन बताया कि उनको कोई बच्चा नहीं है, काफी कोशिश की परंतु नहीं हो पाया।

मैंने कहा- मुझसे आप क्या चाहती हो?

तो उसने कहा- क्या आप मेरे साथ कोशिश कर सकते हो? क्या पता आपसे कुछ हो जाये!’

मैंने कहा- क्यों नहीं… परंतु कब और कहाँ… और कैसे होगा!

तो उन्होंने कहा- वो मैं हैंडल कर लूँगी… आपका जो भी होगा, मैं आपको दूंगी.

मैं उसका मतलब नहीं समझ पाया कि वो क्या कहना चाहती थी.


दो दिन बाद उसका कॉल आया, उसने मुझे दिल्ली बुलाया, उसने रेल टिकट भी सेंड की, मैंने उस टाइम उसे मना किया परंतु उसने काफी रिक्वेस्ट की- प्लीज, एक बार आ जाओ!

मैंने काफी सोचा, फिर काफी सोचने के बाद उसे हां कह दी.

उसने मुझे बताया कि उसने मेरे रुकने का इंतजाम किसी होटल में किया है.


मैं जाने के लिये तैयार हुआ और रेल पकड़ी.

अगले दिन मैं दिल्ली पहुंचा, वो मुझे कार लेकर लेने भी आई.


हम दोनों मिले, मैंने देखा कि वो काफी यंग लग रही थी और थोड़ी मोटी थी.

परंतु क्या फिगर था… 36″ के बूब्स, 36′ की उभरी हुई गांड!


मेरा लंड तो वहीं खड़ा होने को तैयार था परंतु पब्लिक में मैंने सब नार्मल रखा. हम कार में बैठने के बाद उसने मुझे बताया कि वो मुझे होटल छोड़ने आई है.

मैं कार में कुछ नहीं बोला, मैं उसकी फिगर को देखता रहा!

क्या बूब्स थे यार!

हमारे बीच रास्ते में नार्मल बात हुई, थोड़ी देर में हम होटल आ गए, उसने मुझे होटल में छोड़ा, बोली कि वो 2 बजे होटल आएगी और रात में भी मेरे साथ ही रहेगी क्योंकि उसके हस्बैंड किसी काम से दुबई जा रहे हैं.

मैं काफी उत्तेजित हो गया और खुश भी.. होऊँ भी क्यों नहीं!


मैंने उसे कहा- ऐसे ही जाओगी?

तो उसने कहा- अभी नहीं… कुछ इन्तजार करो!

परंतु मेरे कहने पर उसने मुझे प्यारी सी किस दी फिर मैं कार से उतर गया और रूम में चला गया.


मैं रिफ्रेश हुआ और लंच बुक किया। लंच करने के बाद 2 बजे का वेट करने लगा.

इतने में मेरी बेल बजी, मैंने देखा कि यह तो रिया है, मैंने दरवाजा खोला, वो अंदर आ गई उसने मुझे लंच के लिए पूछा.

मैंने बता दिया कि मैंने लंच कर लिया है.


कुछ ही दर हम बातें करते रहे, रिया पिंक कलर का सूट पहन कर आई थी, क्या लग रही थी.

उसके बूब्स देखकर मेरे लंड खड़ा होने लगा. धीरे धीरे मैं उसके साथ रोमांटिक बातें करने लगा.

तब उसने मुझे बताया कि उसने काफी डॉक्टर को दिखाया और मेडिसिन भी ली परंतु कुछ नहीं हुआ.

मैं प्यार से उसे अपने पास पकड़ कर खींचने लगा, वो भी प्यार से मेरे पास आ गई. मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर लगा दिए और किस करने लगा.

मैंने उसे जोर से पकड़ रखा था कि वो चाहकर भी दूर न जो जाये! किस में मैं उसके दोनों लिप्स को काटने लगा.

वो काफी गर्म हो गई थी, वो गर्म सांसें लेने लगी. मैंने देखा कि वह गर्म हो गई है तो मैंने मौका देख कर अपने दोनों हाथ उसके बूब्स पर रख दिए.


बूब्स पर हाथ पड़ते ही वो चिंहुक उठी, मैं उसे जोर जोर से दबाने लेगा, वह कराह ऊठी ‘अहह अहह आईई…’

मैंने धीरे से उसका ऊपर का शर्ट खोल दिया, मैंने देखा कि वो वाइट ब्रा पहने हुये थी. मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने लगा, वह सिसकारियाँ लेती रही.

यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!


कुछ देर में मैंने उसके बूब्स को आज़ाद कर दिया उसकी ब्रा को खोल दिया कर और झटका देकर उसको बेड पर पटक लिया।

मैं उसके बूब्स को जोर जोर से चूसने लगा और जोर जोर से दबाने लगा.

वो बोली- बसंत धीरे धीरे… बसंत अहह अहद दर्द हो रहा है… धीरे दबाओ प्लीज!

मैंने देरी न करते हुए उस का नाड़ा खोल दिया और उसकी पजामी को उतार फेंका मैंने देखा कि उसने काली पेंटी पहन रखी थी. मैंने पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। वो तड़प उठी- अहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऑफ बसंत अहह हहहह!


मैंने उसकी पेंटी उतार दी, मैंने देखा कि उसकी चूत काफी फूली हुई थी और उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.

उसने कहा कि वो अभी साफ़ करके आई है.

मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर लगा दिए और उसको चूसने लगा.


वो तड़पने लगी, जोर जोर से चिल्लाने लगी- प्लीज बसंत, धीरे आईई मैं मर गई… हहहह धीरे! बसंत धीरे! अह्ह्ह्ह! हहह!

मैं उसकी चूत को चूसता रहा और उसके बूब्स को भी दबाता रहा.


थोड़ी दर में मैंने अपने कपड़े भी उतार दिये, मेरा लम्बा लंड देख कर उसकी आँखें फटी की फटी रह गई.

मैंने उसे लंड मुंह में लेने के लिए बोला, उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया. वो मेरे लंड को कुछ देर तक चूसती रही. मेरे मुंह से भी ‘हह अहह’ की आवाजें आने लगी.

फिर मैंने उसे अपने नीचे लेटाया और धीरे से अपना लंड उसकी चूत में डाला. लंड काफी बड़ा होने के कारण पूरा चूत में जा नहीं रहा था.

मैंने धीरे धीरे कोशीश की और तीसरे झटके में लगभग पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।

वो चिल्ला उठी- अहह मार दिया… आह यह हम्मः मैं मर गई इईईईई धीरे धीरे! रुको एक मिनट रुक जाओ… प्लीज एक मिनट!

मैं समझ गया कि लंड मोटा लम्बा होने के कारण प्रॉब्लम हुई हिया, मैं कुछ टाइम रुक गया, उसके बूब्स चूसने लगा.


थोड़ी देर बाद मैं धीरे धीरे अपनी गांड को हिलाने लगा और उसकी चूत चुदाई करने लगा। वो धीरे धीरे सिसकारियाँ भरने लगी- अहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… धीरे! धीरे!

मैंने अपने झटके फ़ास्ट किये और जोर जोर से रिया को चोदने लगा, वो चिल्लाती रही परंतु मैंने एक न सुनी, अपने झटके चालू रखे.


कुछ मिनट तक रिया को चोदने के बाद मैं रिया की चूत में ही झड़ गया. रिया भी झड़ चुकी थी.

मैं उसके ऊपर ही गिर गया.

कब हमें नींद आ गई, हमें पता भी नहीं चला!

लगभग 5 बजे मैं उठा, रिया को भी उठाया, उसको लम्बी किस की.

रिया ने मुझे बताया- इतना लंबा टाइम मैं पहली बार चुदी हूँ और इतना जोरदार पहली बार झड़ी हूँ, वाकई बसंत क्या मजा दिया है तुमने मुझे आज!

मैंने कहा- अभी तो शुरुआत हिया, अभी पूरी रात बाकी है.


पूरी रात में रिया को मैंने कई बार चोदा और हर बार मैंने उसकी चूत में अपना पानी डाला.

वह मेरे पानी से प्रग्नेंट हो गई.

भाभी की टाइट चूत की चुदाई - Bhabhi's tight pussy fucking

  भाभी की टाइट चूत की चुदाई


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


भाभी की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि मैं भाभी के घर गया. भाभी नंगी बाथरूम में नहा रही थी. मुझे भाभी के रूम में सेक्स कहानियों की किताब मिली. फिर क्या हुआ?


दोस्तो, मेरा नाम अंकित है. यह मेरी सच्ची चुदासी पड़ोसन भाभी चुदाई स्टोरी है लेकिन उनमें से ज्यादातर मुझे काल्पनिक लगती हैं, मगर कुछ कहानियां रियल भी होती हैं.


मैं आपको अपने साथ हुई वास्तविक घटना बताऊंगा.


बात दो साल पहले की है जब मैं अपनी फैमली के साथ एक अपार्टमेंट में रहता था. हमारे पड़ोस में एक भाभी रहती थी जिनका नाम वैशाली (बदला हुआ नाम) था.


उनके फिगर की बात करूं तो कुछ खास नहीं था.

पर उनकी गांड बहुत मस्त थी जिसे देखकर मैंने कई बार मुठ्ठी मारी थी.


मेरे परिवार के साथ उनकी अच्छी बातचीत होती थी. उनके घर में जाने में मुझे कोई संकोच नहीं होता था. मैं कई बार बिना बोले भी चला जाया करता था.


ऐेसे ही एक दिन मैं भाभी के यहां कुछ सामान लेने के लिए गया था.

मुझे बाहर कोई नहीं दिखा तो मैं सीधा अंदर ही चला गया.


अंदर जाकर मैंने भाभी को ढूंढते हुए आवाज लगाई.

भाभी ने अंदर से आवाज दी- हां अंकित, मैं नहा रही हूं. तुम बैठ जाओ जाकर, मैं थोड़ी देर में आती हूं.


उन्होंने मुझे बैठने को तो कह दिया लेकिन भाभी के नंगे जिस्म के बारे में सोचकर मेरा लंड उठ गया था.

अब सेक्सी भाभी बाथरूम में नहा रही हो और मैं आराम से बैठ जाऊं? ऐसा नहीं हो सकता था.

कामवासना के वशीभूत होकर मैंने अंदर झांकने की ठान ली.


मैं धीरे से बाथरूम के दरवाजे के पास गया और अंदर झांकने की कोशिश करने लगा.

छेद से मैंने देखा कि भाभी बाथ टब पर बैठ कर हंड शॉवर को अपनी चूत पर रगड़ रही थी और अपनी आंखें बंद किए अपने बूब्स मसल रही थी.


ये नजारा इतना कामुक था कि बता नहीं सकता.


मैंने अन्दर देखते हुए अपनी जिप खोली और अपना लन्ड मसलने लगा.

भाभी के चेहरे पर कामवासना तैरती हुई साफ नजर आ रही थी.

ऐसा लग रहा था जैसे वो लंड से चुदकर मजा ले रही हो.


मैं भी जोर से अपने लंड की मुठ मारने में लगा हुआ था.


देखते देखते भाभी थोड़ा अकड़ने लगी. उसके बदन में झटके से लगे और वो फिर बिल्कुल रुक गयी.

शायद वो झड़ चुकी थी.


फिर उठकर वो अपने आपको साफ करने लगी.


उसकी नंगी गांड को देख कर मन कर रहा था कि दरवाजा खोल सीधा अंदर घुसूं और उसको वहीं पर झुका कर घोड़ी बना लूं और बाथरूम में ही गांड चुदाई कर डालूं उसकी.


मगर फिर भाभी जल्दी से अपने बदन को पौंछने लगी.

मैंने वहां खड़ा रहना ठीक न समझा और अपने तने हुए लंड को जिप के अंदर ही ठूंस लिया.


फिर मैं उसको टीशर्ट के नीचे दबाकर वहां से चला गया और बेड पर जा लेटा.

अचानक मेरा हाथ भाभी की साड़ी पर लगा.

मुझे महसूस हुआ कि नीचे कुछ बुक सी रखी हुई थी. मैंने साड़ी उठाकर देखी तो सच में नीचे एक बुक रखी हुई थी.


वो किताब कोई साधारण किताब नहीं थी बल्कि सेक्स कहानियों की किताब थी.


मैं किताब को खोलकर देखने लगा तो उसमें विदेशी लौड़े गोरी चूतों में घुसे हुए थे और साथ में सेक्सी कहानियां भी लिखी हुई थीं.


किताब देखने में मैं जैसे खो ही गया.


कुछ तो मैं थोड़ी देर पहले नंगी भाभी देखकर आया था और लंड पहले से ही तना हुआ था.

किताब में नंगी लड़कियों की फोटो देखकर मैंने फिर से लंड को सहलाना शुरू कर दिया.


लंड को सहलाते हुए जैसे मैं भूल ही गया था कि मैं भाभी के रूम में हूं.


फिर अचानक से भाभी आ धमकी और उन्होंने मुझे किताब देखकर लंड सहलाते हुए देख लिया.


वो झट से मेरे करीब आई और बोली- अंकित, क्या देख रहा है, इधर दे इसे!

इतना कहकर भाभी ने मेरे हाथ से किताब ले ली और उनका चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था.


किताब को लेकर वो एक ओर रखने के लिए जाने लगी तो मैंने कहा- वाह भाभी … बहुत ही रोचक किताबें पढ़ते हो?

वो थोड़ी हड़बड़ाते हुए बोली- क्यूं? तुम नहीं पढ़ते हो क्या?


मैं बोला- हां पढ़ता हूं भाभी! मैं तो अन्तर्वासना पर मजेदार ऑनलाइन हिन्दी सेक्स कहानियां भी पढ़ता हूं. मगर आज तो मेरा मन कर रहा है कि आपके साथ ही पढूं.

भाभी- बताऊं क्या? थप्पड़ पड़ेगा. चल अभी, मुझे कपड़े पहनने दे.


मैं बोला- भाभी थोड़ी देर दो ना किताब, आप कपड़े पहन लो तब तक!

भाभी- नहीं, चल बाहर निकल तू रूम से.


मैं- नहीं भाभी, किताब दो मुझे.

इतना बोलकर मैं भाभी से किताब छीनने की कोशिश करने लगा.


छीना झपटी में भाभी के बदन पर लिपटा हुआ तौलिया खुल गया और भाभी मेरे सामने ब्रा पैंटी में खड़ी रह गयी.


उन्होंने अपने हाथों से अपनी चूत को छुपा लिया.


एक हाथ सीने पर रखकर मेरी ओर गुस्से से देखकर बोली- तू बहुत बिगड़ गया है अंकित, तेरी शिकायत करूंगी मैं तेरी मां से! पकड़ ये किताब!

इतना बोलकर वो टावल उठाने लगी.

मैं भाभी के स्तनों को घूर रहा था. भाभी के स्तन उसकी ब्रा से बाहर छलकने को हो रहे थे.

वो टावल उठाते हुए बोली- ऐसे क्या देख रहा है, कभी लड़की नहीं देखी क्या?


मैं बोला- देखी है भाभी, लेकिन आप जैसी नहीं.

वो बोली- क्यूं, मेरे में ऐसा क्या है, तूने क्या देख लिया ऐसा?

मैं बोला- अभी अभी बाथरूम में देखा है.


वो मेरी ओर हैरानी से देखकर बोली- क्या??? हरामी … क्या देखा है तूने? सच बता मुझे?

मैं बोला- जो देखने लायक होता है औरत में, वो सब देख लिया.


भाभी खिसियाकर मेरी ओर भागी और मैं उसके आगे आगे भागने लगा.


मैं हॉल में चला गया और भाभी अपने तौलिया को लपेटने की कोशिश करते हुए अपने उछलते चूचों के साथ मेरा पीछा कर रही थी.


वो बोली- रुक तू … मैं बताती हूं तुझे. बहुत बदमाश हो गया है.

मैंने कहा- कहां बताओगी? अंदर बाथरूम में?

इतना बोलकर मैं जोर जोर से हंसता हुआ भाग रहा था.


फिर भाभी थक गयी और हम वापस रूम में हांफते हुए आ गये.


मौका देखकर मैंने बोला- भाभी मजाक बहुत हो गया. अब थोड़ी देर साथ में बैठकर पढ़ते हैं.

भाभी जान गयी कि ये नहीं मानने वाला.

वो बोली- चल ठीक है, पढ़ ले.


फिर वो तौलिया लपेट कर मेरे साथ बेड पर बैठ गयी.

हम दोनों हिन्दी सेक्स कहानियों की किताब पढ़ने लगे.


किताब में भाभी देवर की चुदाई चल रही थी. पढ़ते पढ़ते मेरा लंड खड़ा होने लगा.

भाभी तिरछी नज़र से मेरा लन्ड देख रही थी.


मैं भी जान गया था कि भाभी मेरे लंड पर नजर बनाये हुए है.


ये देखकर मेरा लंड और ज्यादा तनाव में आ गया और पूरा आकार ले लिया.

मेरा लंड मेरी पैंट में उछलने लगा था.

जब भाभी से रहा न गया तो वो बोली- अंकित … तेरा कितना बड़ा है रे!

मैं बोला- आप खुद ही देखकर पता कर लो ना भाभी … मैंने तो कभी नापा नहीं है.

वो बोली- हट … बदमाश।!


भाभी बात पलटने लगी तो मैंने धीरे से अपना एक हाथ भाभी के बूब्स पर रख दिया और धीरे से दबा कर कहा- देख कर बताओ ना भाभी … मुझे भी तो पता चले कि मेरा कितना बड़ा है.


तो भाभी ने धीरे से हाथ मेरे लौड़े पर रखा तो लौड़ा पूरे जोश में उछल गया.

मैंने भाभी के हाथ को अपने लौड़े पर दबा दिया.

वो एकदम से सिहर सी गयी.


मैंने मौका पाया और उसी वक्त उसका टावल खींच दिया.


फिर मैंने ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स मसल दिए और उन्होंने कसमसाकर मुझे पकड़ लिया.

भाभी ने मेरे लौड़े को अब कसकर दबा दिया और उसको भींच लिया अपनी मुठ्ठी में.


जोश अब मुझे भी चढ़ गया था और मैं हवस में चूर होकर बोला- हाय … भाभी … ऊपर से ही दबाओगी या बाहर भी निकालोगी इसे?

कहते हुए मैंने भाभी की चूची को निप्पल के पास से कसकर भींच दिया.


भाभी को भी लंड देखने की आग लगी हुई थी.

उसने मेरी लोअर को खींच दिया और मेरे अंडरवियर का तंबू उसके सामने था.


भाभी की नजरें हैरानी से भर गयीं.

मैंने भाभी का हाथ पकड़ा और अपने कच्छे में अंदर घुसाकर उसके हाथ में लंड पकड़ा दिया.


भाभी एकदम से सकपका गयी. मेरा लौड़ा एकदम से गर्म होकर जैसे तप रहा था. भाभी की आहें निकलने लगीं. वो मेरे लंड की मुट्ठ मारने लगी.


फिर मैंने कच्छे को पूरा ही निकाल दिया और अब मेरा लंड बाहर आकर भाभी के हाथ में था. उसका सुपारा एकदम से लाल हो गया था और छोटी गेंद जैसा आकार ले चुका था.


वो बोली- हाय बाप रे … इतना बड़ा? तेरा तो बहुत बड़ा है अंकित।

मैं बोला- नहीं वैशाली भाभी. ये मेरा नहीं है, ये तो अब आपका है.

वो मेरी बात सुनकर मुस्करा दी.


अब मैं रुक नहीं सकता था और मैंने सीधे अपने होंठ भाभी के होंठों पर रख दिये और उसके सिर के पीछे हाथ ले जाकर उसको किस करने लगा.

वो मेरे लंड को सहलाते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी.

दोनों ही सेक्स के लिए गर्म होने लगे.

अब मैं उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा.

हुक खोलकर मैंने उसको उतार दिया और भाभी के गोल मोटे स्तन मेरे सामने झूल गये.


मैंने तुरंत भाभी के मुंह से जीभ निकाली और एक स्तन पर रख दी.

मैं एक चूचे को चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा.


भाभी ने अपनी छाती और आगे कर दी और मुझे आगे होकर अपने बूब्स पिलाते हुए सिसकारने लगी- आह्ह … अंकित जोर से चूस … आह्ह … मेरे चूचे … पी जा इनको … इनका दूध निकाल ले चूस चूसकर!


काफी देर तक मैंने बूब्स को चूसा और वो मेरे लंड की मुट्ठ मारती रही.

फिर मैं बोला- भाभी इसको हाथ से हिलाती रहोगी या होंठों का प्यार भी दोगी?


वो समझ गयी और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.

मैं बोला- अपनी टांगें मेरी ओर करके चूसो.


भाभी और मैं लेट गये और भाभी की टांगें मेरी ओर आ गयीं.

उनकी पैंटी के बीच में गीला धब्बा हो गया था.


इतने में भाभी ने मेरे लंड को फिर से चूसना शुरू कर दिया.

अब मैंने उनकी पैंटी पर लगे रस को चाटा और फिर पैंटी को नीचे खींच दिया.

आह्ह … भाभी की लाल चूत मेरे सामने नंगी हो गयी.


मेरे तो मुंह में पानी आ गया और झट से मैंने भाभी की चूत में जीभ देकर उसे चूसना शुरू कर दिया.


हम दोनों 69 की पोजीशन में चुसाई का मजा लेने लगे.

मैं उनकी चूत चाटने लगा और साथ ही उनकी गांड में उंगली भी करने लगा.

दस मिनट चूसने और उंगली करने के बाद भाभी का बदन एकदम से अकड़ गया और उसकी चूत ने मेरे मुंह में पानी छोड़ दिया.


फिर मैंने उसको घोड़ी बना लिया और उसके सामने घुटनों पर आ गया.


मैं उसके मुंह में लंड देकर धक्के मारने लगा और उसके मुंह को चोदने लगा.

दो मिनट के बाद मेरा वीर्य भी भाभी के मुंह में निकल गया और वो उसको सारा का सारा अंदर ही पी गयी.


फिर हम कुछ देर शांत होकर लेटे रहे. उसके बाद भाभी फिर से मेरे लंड को सहलाने लगी.

मैंने उसके चेहरे को अपनी ओर किया और उसको किस करने लगा.

वो भी मेरा साथ देने लगी.


फिर मैं बोला- भाभी अब मुझे आपकी मारनी है, अब नहीं रुका जायेगा.

वो बोली- ठीक है. मार ले. पहले चूत मार ले और फिर गांड.


भाभी की गांड चुदाई का नाम सुनकर मैं तो हक्का बक्का रह गया.

मेरी खुशी का ठिकाना न रहा.


भाभी थोड़ी घबरा कर बोली- आराम से करना, तेरे लंड के हिसाब से मेरी चूत काफी छोटी है. एकदम से नहीं ले पाऊंगी.

मैं बोला- ठीक है जान … आराम से करूंगा … बहुत प्यार से।


मैंने भाभी को लिटाया और उनके ऊपर आ गया. मैं भाभी की चूत पर लंड को रखकर रगड़ने लगा.


वो मस्त हो गयी और सिसकारने लगी- आह्ह अंकित … ऐसे क्यूं आग लगा रहा है मेरी चूत में?

मैं बोला- भाभी जान … चूत में आग लगेगी तभी तो पानी डालने का मजा है.


भाभी- तो फिर डाल दे ना मेरी चूत में अपने लंड का पानी.

मैं- ये लो भाभी!

कहते हुए मैंने एक धक्का भाभी की चूत में लगा दिया.


मेरे धक्के के साथ भाभी की चूत में लंड का सुपारा घुस गया. उसकी चूत वाकई में ही टाइट लग रही थी.


उसकी आह्ह निकल गयी और मैंने तभी उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसके तुरंत बाद एक और धक्का उसकी चूत में मार दिया.


वो छटपटाने लगी.

आधा लंड भाभी की चूत में घुस गया था.


वो मुझे धकेलने लगी लेकिन मैंने भाभी को कस कर जकड़ लिया और उसकी चूत में तीसरा धक्का भी दे मारा. वो तड़पने लगी और मेरे होंठों की पकड़ उसके लिप्स पर और ज्यादा कस गयी.


काफी देर तक लिप्स को चूसता रहा और फिर वो जाकर नॉर्मल हुई.

अब वो खुद ही मेरे होंठों को काट रही थी और मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी. शायद उसको लंड लेकर मजा आ गया था.


उसके बाद भाभी ने मेरी कमर में टांगें डाल दीं और मुझे कस कर अपने बदन से सटा लिया. मैं भाभी की चुदाई करने लगा.

वो भी अपनी गांड उचका कर चुदने लगी.


थोड़ी ही देर के बाद दोनों के मुंह से कामुकता भरे स्वर निकल रहे थे- आह्ह … ओह्ह … जान … यस … आह्ह … मजा आ रहा है … चोदो … और तेज अंकित … फाड़ दो.

मैं भी कुछ ऐसे ही बड़बड़ा रहा था- हाय मेरी रानी … तेरी चूत … आह्ह … कितनी गर्म है … बहुत मजा आ रहा है तेरी चूत चोदने में. आह्ह … चोद दूंगा तुझे … फाड़ दूंगा ये छेद।


इसी तरह 15 मिनट तक चोदने के बाद भाभी झड़ गयी.

मैं फिर भी उसकी चूत को पेलता रहा.


अब उसकी चूत में लंड बर्दाश्त नहीं हो रहा था उससे. वो दर्द से चिल्लाने लगी थी लेकिन मैं फिर भी उसको चोदता रहा.


उसके दस मिनट के बाद फिर मैंने पूरी स्पीड बढ़ा दी और उसकी चूत के चिथड़े होने लगे. पच … पच … फच … फच … की आवाज से कमरा गूंज उठा और एकाएक मेरे लंड से वीर्य निकल पड़ा. मैं हाँफता हुआ भाभी के बूब्स पर लेट गया.


मेरा सारा माल भाभी की चूत में खाली हो गया. उसके बाद हम लेटे रहे और फिर भाभी उठकर बाथरूम में चली गयी.

पीछे पीछे मैं भी गया और बोला- भाभी … अभी गांड चुदाई बाकी है.


वो बोली- नहीं, रात को तेरे भैया के साथ भी करना है. मैं और नहीं करवा पाऊंगी. तेरे लंड ने फाड़ कर रख दी मेरी चूत.


उसके बाद वो बाहर ही नहीं आई. मुझे देर हो रही थी इसलिए मैं मरे मन से वापस लौट आया और कपड़े पहन कर घर चला गया.


तो दोस्तो, उस रोज भाभी ने मुझे उनकी गांड चुदाई नहीं करने दी.

मगर मैं भी कहां मानने वाला था. मैं उसकी गांड को चोदकर ही रहा. कैसे? वो मैं आपको अपनी अगली चुदासी पड़ोसन भाभी चुदाई स्टोरी में बताऊंगा.


अकेली भाभी की चूत की प्यास - Lonely sister-in-law's pussy thirst

 अकेली भाभी की चूत की प्यास


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


नमस्कार दोस्तों! क्या हालचाल हैं आपके? आज मैं आपको मेरे साथ हुए एक हसीन किस्से को शेयर करूंगा जो अभी हाल ही में मेरे साथ हुआ है. उससे पहले आपको मेरा परिचय करवा देता हूं. मेरा नाम हितेश है और मैं मुम्बई का रहने वाला हूँ.


मैं अक्सर चैट साइट पे लोगों से बातें करता रहता हूं. कई बार वहां कोई लड़की मिल जाती है, लेकिन ज्यादातर लड़कियों के नाम पे वहां सब लड़के ही होते हैं.


ऐसे ही एक दिन मैं चैट कर रहा था कि एक नया नाम सामने आया. मैंने तुरंत उस को हाय भेजा. थोड़ी देर बाद उसका रिप्लाई आया और हमारी बातें शुरू हो गईं.

उसका नाम आहना था और वो भी मुम्बई से ही थी. हम बहुत देर तक बतियाते रहे.

फिर वो बोली कि अब उसे जाना है.

तो मैंने पूछा कि दोबारा कब मिलोगी?

उसने कहा कि किस्मत रही, तो जल्द ही मिलूंगी.


मैंने फिर भी जाते जाते उसे ये सोच कर अपना ईमेल एड्रेस दे दिया कि कभी तो बात होगी. लेकिन ऐसे ही दो महीने निकल गए और मुझे लगा कि कोई फेक लड़का होगा, जो मेरे मजे ले गया.


एक दिन में अपने मेल चैक कर रहा था कि मुझे अपने मेल बॉक्स में एक मेल दिखा, जो आहना नाम से दिखा रहा था.

मैंने तुरंत उसपे रिप्लाई किया. करीब दो दिन बाद उसका रिप्लाई आया.

उसने कहा कि इतना लेट रिप्लाई क्यों किया?

मैंने उसे सब बताया कि मैंने उसका मेल देखा ही नहीं था.

फिर हमारी बातें शुरू हुईं, लेकिन वो अपने बारे में ज्यादा बताती नहीं थी. बस इतना कहती कि वक़्त आने पे सब बता दूंगी. ऐसे ही उससे बातचीत करते हुए दिन बीतते गए और हम करीब आने लगे. हमारी करीबी इतनी अधिक हो गई थी कि अब हम मोबाइल पे भी बातें करने लगे थे.


मैं उसे अक्सर थोड़े नॉटी जोक्स भेजता था, जो भाभियों पे होते थे. उसे भी शायद इस तरह के जोक्स पसंद थे. इसलिए वो हमेशा मेरे जोक्स पे हंसती थी.

एक दिन उसने कहा- लगता है आपको भाभियों से बहुत प्यार है.

मैंने लिखा- प्यार तो बहुत है, लेकिन कोई मौका नहीं देती.

मैंने ये न जाने किस झोंक में उससे कह दिया.


तो पहले तो उसका कोई जवाब नहीं आया. फिर कुछ पल एक नॉटी स्माइली आया. मुझे लगा इसे मेरा जबाव पसंद आया.

वो बोली- ऐसा है, तो क्या पता कोई भाभी किसी दिन मौका दे दे.

मैं बोला- मैं तो कब से इंतजार कर रहा हूँ … लेकिन मौका मिल ही नहीं रहा है.

वो बोली- सब्र करो, सब्र का फल मीठा होता है.

मैंने कहा- तब से सब्र ही कर रहा हूँ. अब तक तो फल को देखा भी नहीं है. चखने की बात तो दूर है.


फिर अचानक से वो चली गई और तीन दिनों तक उसका कोई रिप्लाई नहीं आया. मुझे लगा ये लड़की अब बात नहीं करेगी. लेकिन एक रात उसका मुझे कॉल आया. उसकी आवाज में एक खनक थी, जो मुझे उसका दीवाना बना गयी.

उसने बोला कि मैं आपसे मिलना चाहती हूँ.

मैंने भी झट से हां कर दी.

वक़्त और जगह फिक्स करके उसने कॉल कट कर दिया. मैं भी अगले दिन तयशुदा वक़्त पर वहां पहुँच गया. उसने मुझे फोटो में देखा था, लेकिन मैंने उसको नहीं देखा था. हर आती जाती लड़की मुझे आहना ही लग रही थी. मुझे वहां खड़े खड़े एक घंटा हो गया था. लेकिन वो नहीं आई, ना ही उसका फ़ोन लग रहा था.


मुझे लगा कि कोई मुझे मूर्ख बना गया. थकहार कर मैंने जाने के लिए ऑटो को आवाज दी, तो मुझे एक अनजान नंबर से कॉल आयी.

मैंने जैसे ही उठाया, तो उस आवाज को पहचान गया. मैंने पूछा- कहां हो? कब से वेट कर रहा हूँ.

वो बोली- थोड़ा काम आ गया था, मैं बस दस मिनट में आ रही हूँ.


फिर थोड़ी देर बाद एक लड़की मेरे सामने आई. वो बहुत ज्यादा खूबसूरत तो नहीं थी, लेकिन फिर भी कमाल थी. सांवला रंग, काली आंखें, लंबी गर्दन, तने हुए स्तन, पतली कमर, बाहर निकले हुए नितम्ब. सच में वो बहुत कमाल लग रही थी.

उसने आते ही मुझसे माफी मांगी और कहा- मेरा मोबाइल बन्द हो गया था इसलिए बता नहीं पायी.


फिर हम वहां से कॉफी पीने गए. मैं अब भी उसको निहार रहा था. वो थोड़ा शर्मा रही थी. ऐसे ही हम बहुत देर तक बात करते रहे.

कुछ देर बाद उसने कहा- अब मुझे जाना होगा, फिर कभी मिलेंगे.

मैंने भरे मन से उससे विदा ली. लेकिन मुझे ख़ुशी थी कि वो मुझसे मिलने आई थी.


इसके बाद से हम दोनों की बिंदास बात होने लगी. हमारी बातों में सेक्स का मसाला भी आने लगा.

एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया. मुझे लगा कि आज तो शायद मुझे उसे प्यार करने का मौका मिल जाएगा. मैं अच्छे से तैयार होकर उसके यह पहुंचा. वो पिंक साड़ी में थी और क्या कमाल लग रही थी. मैं उसको देखता ही रह गया.

उसने मुझे कंधे से हिलाया, तब मुझे होश आया और मैंने उसे फूल दिए. मैंने कहा कि फूल को फूल दे रहा हूँ … समझ नहीं आता, कौन ज्यादा खूबसूरत है.

वो मेरी इस सड़ी सी शायरी पर हंस दी.


मुझे लगा कि आज तो लाइन क्लियर है. फिर हम दोनों अन्दर आए और सोफे पर बैठ गए. मैं अभी उसकी खूबसूरती को देख रहा था. सच में आज बहुत कमाल लग रही थी.

उसने मुझसे पूछा- क्या लोगे?

मैंने कहा- जो भी प्यार से दे दो.

इस पर वह मुस्कुरा दी और किचन की तरफ चल दी. आज उसकी हंसी में अलग ही नशा था, जो मुझे दीवाना बना रहा था.


थोड़ी देर बाद वो चाय लेकर आई. चाय के साथ हमारी बातें भी चल रही थीं. वो थोड़ा घबरा रही थी और मैं उसकी यही घबराहट मिटाना चाह रहा था.


हम बात कर ही रहे थे कि अचानक किसी बच्चे के रोने की आवाज आई. वो सुनकर मैं चौंक गया कि ये क्या हो रहा है.

आहना ने पहले तो मुझे कभी बच्चे के बारे में नहीं बताया. मुझे लगा मैं फंस गया हूँ. आहना उठ कर जल्दी से कमरे में गयी. मैं सोच में था कि क्या करूँ … इधर रुकूं या चला जाऊं.

तभी मैंने सोचा कि रुकता हूँ, पता तो चले कि माजरा क्या है. मैं इस वक्त काफी बैचैन था और आहना का इंतजार कर रहा था. थोड़ी देर में वो आयी और उसके चेहरे पे थोड़ी उदासी थी.

मैंने उसको अपने पास बैठाया और उससे पूछा- क्या हुआ तुम उदास क्यों हो?

तो वो बोली- मैंने तुमसे झूठ बोला और बताया नहीं कि मेरा एक बच्चा भी है.

मैंने कहा- कोई बात नहीं, कभी कभी भरोसा होने में समय लगता है.

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे भरोसा दिखाया कि मैं अब भी तुम्हारे ही साथ हूँ.


वो बताने लगी कि उसकी शादी घरवालों की मर्जी से हुई थी. उस वक़्त वो शादी नहीं करना चाहती थी, लेकिन घरवालों के दवाब में शादी करना पड़ी. उसका पति भी अच्छा था, उसे बहुत प्यार करता था. लेकिन जबसे वो प्रेग्नेंट हुई, उसके पति ने उसके साथ प्यार करना बंद कर दिया क्योंकि वो अभी बच्चा नहीं चाहता था. हम डॉक्टर की सलाह के कारण पहले बच्चे को गिरा नहीं पाए. इस बात से मेरे पति को बहुत धक्का लगा. मैंने अपने पति को बहुत समझाया, लेकिन वो नहीं माने और उसने शराब पीना शुरू कर दी. साथ ही किसी रुचि नाम की लड़की से संबंध बना लिए.

ये कहते कहते आहना रोने लगी.


मैंने उसे चुप कराने की कोशिश की.


आहना कहने लगी- मैंने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन वो मेरी कोई बात नहीं सुनते हैं. घर भी कभी कभी ही आते हैं. मैं बहुत अकेली हो गयी थी, इसलिए अपना दिल लगाने के लिए चैट करती थी. वहां भी सब सिर्फ सेक्स के लिए बात करते हैं, लेकिन तुमने मुझे अच्छे से बात की, मेरा ध्यान रखा.

वो लगातार रोये जा रही थी और बोले जा रही थी.


मैंने उसका हाथ पकड़ा हुआ था और उससे बोला- अब तुम्हें रोने को जरूरत नहीं है. मैं एक दोस्त की तरह तुम्हारे साथ हूँ … और मुझे कुछ नहीं चाहिए. तुम ये ना सोचना कि मैं तुम्हारा फायदा उठाऊंगा.

मैंने इतना बोला और वो मेरे गले से लग गयी. वो बोली- मैं चाहती हूँ, तुम मुझसे प्यार करो. मुझे अपना बना लो.


मैंने उसको दूर किया और पूछा- क्या सच में तुम ऐसा चाहती हो या सिर्फ पति से गुस्से के कारण ऐसा कह रही हो?

वो बोली- नहीं … ये एक औरत की चाहत बोल रही है. मैं जानती हूं मेरा पति अब मुझे प्यार नहीं करेगा, ना ही मेरे पास आएगा. मैं भी प्यासी हूँ, मुझे भी चाहिए कि कोई मुझे प्यार करे.

इतना बोल के उसने मुझे फिर गले से लगा लिया.

मैं समझ गया कि आज आहना की वासना उसपे हावी है और उसे किसी की जरूरत है. मैंने उसका साथ देना शुरू किया. वो मेरे गले से लगी हुई थी और मेरा हाथ उसकी पीठ पे घूम रहा था.


मैंने उसकी गर्दन पे चूमना शुरू किया. जैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पे लगाए, उसने एक आह भरी और मुझे और जोर से पकड़ लिया. जैसे मुझमें समाना चाहती हो.

मैं बहुत देर तक उसकी गर्दन पे किस करता रहा. शायद ये उसका हॉट स्पॉट था.


फिर कुछ पल बाद हम दोनों अलग हुए. मैंने उसकी आंखों में देखा कि उसमें एक अलग ही नशा था. लेकिन वो हवस नहीं थी … वो प्यार था, जिसकी उसे जरूरत थी. जो आज उसे मिल रहा था.


हमने एक दूसरे की आंखों में देखा. फिर मैंने अपना एक हाथ से आहना के बालों को पकड़ कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. हम एक दूसरे के लबों को चूमने लगे. उस दिन इस चुम्बन में वो आग थी कि समझो मैं झुलस ही गया था. मैंने वैसा किस आज तक नहीं किया था. न जाने उस वक्त के चुम्बन में कितनी आग थी, मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मुझे बस लग रहा था कि आज वो मुझे खा जाएगी.


तभी मेरा हाथ आहना के स्तन पे आ गया और मैं उसके स्तन उसके ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लग गया. आहना ने ब्रा नहीं पहनी थी. शायद उससे बच्चे को दूध पिलाने में आसान रहता है.


लेकिन मेरे स्तन दबाने से उसका दूध निकलने लगा था. उसका ब्लाउज चूचुक वाली जगह से गीला हो गया था. हम दोनों न जाने कितनी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे, नहीं मालूम. लेकिन जब सांस लेनी बंद हो जाती, तब हम रूकते और एक दूसरे की आंखों में देखते.


उसकी नजरों से लगता, जैसे कह रही हो कि आज रुको मत … बस ऐसे ही प्यार करते रहो. बस हम फिर से किस करने में लग जाते.


फिर मैंने आहना से कहा- मैंने आज तक तुम्हारे जैसा प्रेम नहीं देखा.

तो वो हंसती हुई बोली- देखोगे भी नहीं.

मैं भी उस पर फ़िदा था. वो मेरे कान में सरगोशी से बोली- कमरे में चलते हैं.

लेकिन वहां उसका बच्चा सोया था. मैंने उसे बताया, तो वो बोली- कोई बात नहीं, वो अपने पालने में सो रहा है.

मैं उसे अपनी बांहों में उठा कर उसके कमरे में ले गया. वहां पलंग के साथ ही एक पालना रखा था, जिसमें उसका बच्चा सोया हुआ था.

मैंने आहना को पलंग पे लिटाया और उसके पास आकर लेट गया. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे देख रहे थे, जैसे दो प्रेमी बहुत दिनों बाद मिले हों.


हमने फिर से एक दूसरे को हग कर लिया और चूमने लगे. अबकी बार मेरा हाथ उसके ब्लाउज पर और तेजी से घूम रहा था. मैंने उसका ब्लाउज उतार दिया. और अब उसके स्तन मेरे हाथों में थे. कितने मुलायम थे और एकदम तने हुए मम्मे थे. उसके स्तन दूध से पूरे भीगे हुए थे. मैं उन्हें दबा रहा था और आहना को चूम रहा था. तभी उसने एक आह ली, जैसे उसने काम रस छोड़ दिया हो.


मैं उसे चूमते हुए नीचे को आया और उसके स्तन को चूमने लगा. उन पर लगा दूध चाटने लगा. आहना सिर्फ आहें भर रही थी. फिर मैं अपनी जीभ आहना के चूचुक पे ले गया. और उन्हें चूमने लगा. जितना उन्हें चूम रहा था, उतना ही उनमें से दूध निकल रहा था. मुझे यकीन नहीं हुआ कि मैं अब किसी के स्तन से सीधा दूध पी रहा हूँ.

मैं आहना के चूचुकों को तब तक चूमता चूसता रहा, जब तक उसमें से दूध आना बंद नहीं हो गया. आहना सिर्फ मादक आहें भर रही थी और मुझे अपने स्तन में ऐसे दबा रही थी, जैसे मेरा चेहरा अपने स्तन में समा लेना चाहती हो.


जब उसका दूध आना बंद ही गया, तो मैंने आहना की आंखों में देखा और उसने कहा- घबराओ नहीं, मेरे बेटे और तुम्हारे लिए अभी भी बहुत दूध बाकी है.

उसने मुझे ऊपर खींच के मेरे होंठों को चूमने लगी और अपने दूध का स्वाद खुद चखने लगी.

सच में दोस्तो, मैं उसका वो चुम्बन कभी नहीं भूल सकता.


फिर मैं चूमते हुए आहना के पेट पे पहुंचा और उसके पेट पे अपनी जीभ घुमाने लगा. आहना के पेट पे हमारी प्रेमलीला के कारण पसीने में थी और मैं उसका पसीने से भीगा पेट चूम रहा था या कहिये कि मैं उसका पसीना चाट रहा था. वो मादक सिसकारियां ले रही थी, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थीं. फिर मैं अपनी जीभ आहना की नाभि में ले गया और उसे चाटने लगा. आहना की तड़प बढ़ती जा रही थी.


लेकिन दोस्तो, इस प्रेमलीला में जितना वक़्त फोरप्ले में बिताओगे, उतना ही मजा आपको और आपकी साथी दोनों को मिलेगा.

आहना की नाभि का मर्दन करने के बाद मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट दोनों को निकाल दिया. अब वो मेरे सामने सिर्फ पेंटी में थी, जो उसके योनि रस से भीगी थी. उसकी पेंटी की मादक महक पूरे कमरे में महक रही थी.


मैंने आहना को थोड़ा और मदहोश करना चाहा, तो मैं उसके पैरों को चूमने लगा और अपने हाथों से उसकी योनि को पैंटी के ऊपर से छूने लगा. लेकिन सिर्फ हल्के हल्के से सहला रहा था, जिससे वो मचल रही थी. वो कामवासना में कह रही थी- आह … मेरी योनि को मसलो … उसे प्यार करो …


लेकिन मैं उसे और तड़पाना चाहता था. मैं ऐसे ही बहुत देर तक उसकी टांगों को चूमता रहा. फिर उसकी जांघों को चूमने लगा. हर बार मैं अपना मुँह उसकी योनि के पास ले जाता, लेकिन उसे छूता तक नहीं … और वो बस अपनी योनि रस छोड़े जा रही थी.


उसकी पूरी पैंटी और चादर दोनों भीग चुके थे. मैंने उसे और तड़पाना ठीक नहीं समझा और उसकी पेंटी उसके योनि से अलग कर दी.


आह क्या कामुक दृश्य था वो … दोस्तों गुलाब की पंखुड़ियों की गुलाबी योनि अपने ही कामरस में भीगी हुई मानो रो रही थी. उसकी महक मुझे दीवाना बना रही थी. मैंने पहले तो उस योनि को छुआ और जैसे ही मैंने उसे हाथ लगाया, तो आहना ने एक जोर से आह भरी और अपना कामरस एकदम से निकाल दिया.


आज तक मैंने इतनी उत्तेजना कभी नहीं देखी थी. उसके चेहरे के भाव में सुकून था … साथ ही ना रुकने के लिए निवेदन भी था. मैं भी अपने कार्य में लग गया और उसकी योनि को हाथों से मसलने लगा.


अब मैं उसकी चूत के भगनासा को अपनी उंगलियों की बीच में रखकर दबाने लगा. आहना सिर्फ गरम आहें ले रही थी. उसने अपने हाथों की मुठ्ठियों से चादर को पकड़ रखा था और अपना काम रस छोड़े जा रही थी. तभी मैंने उसकी योनि पे अपनी जीभ लगा दी और उसके रस को पीने लगा.


उसका स्वाद दोस्तो, आज भी मेरी जीभ पे है और वो महक … आह क्या बताऊँ.

मैं अपनी जीभ उसकी योनि पे चला रहा था और उसके काम रस को चाट रहा था. लेकिन मैं जितना चाटता, उतना ही काम रस बढ़ता जा रहा था. अब तो जैसे मैं अपनी जीभ से उसकी योनि का मर्दन करने लगा. थोड़ी देर बाद ही आहना ने एक लंबी आह ली और मेरे सर को अपने पैरों में जकड़ लिया और अपना पूरा योनि रस निकाल दिया. मैंने भी उसका पूरा रस पी लिया और उसके बगल में लेट गया.


आहना बोली- मैं आज तक कभी इतनी संतुष्ट नहीं हुई हूँ. आज से मैं तुम्हारी हुई, जो तुम बोलोगे, वो ही मैं करूंगी.

मैंने कहा- मुझे भी वही करने में खुशी होगी, जो तुम्हें संतुष्टि दे.

ऐसा कहके हम दोनों गले लग गए.


उसने कहा- अब तुम्हें खुश करने की मेरी बारी है.

वो मेरे ऊपर आ गयी और उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मेरे लिंग को देखकर उसकी आंखों में एक चमक सी आ गयी थी. वह मेरे लिंग को अपने हाथों से मसलने लगी और साथ ही मेरे होंठों को भी चूम रही थी. उसकी आंखों में एक अलग ही नशा था, वह मुझे चूमे जा रही थी और मेरे लिंग को मसल रही थी. उसके हाथों में जादू था.


फिर वह ऐसे ही चूमते चूमते मेरे सीने को चूमने लगी. उधर नीचे उसका हाथ मेरे लिंग पर अपना कमाल दिखा रहा था. मेरा लिंग अपने पूरे रूप में आ चुका था और वह ऐसे ही चूमते चूमते मेरे लिंग तक पहुंच गई और मेरे लिंग के ऊपर एक हल्का सा चुंबन ले लिया. एस लगा कि मेरे शरीर में न जाने जैसे किसी ने करंट छोड़ दिया हो.


मेरे मुँह से ‘आहहह हहह..’ निकल गई. वह मुझे देखकर थोड़ी सी मुस्कुराई फिर उसने मेरे लिंग को अपने मुँह में ले लिया और मुझे मुख मैथुन का सुख देने लगी. उसके हाथ मेरे अंडकोष सहला रहे थे. वह मेरे पूरे लिंग को अपने मुँह में लेना चाह रही थी और उसे चूम रही थी बीच-बीच में अपनी जीभ से मेरे पूरे लिंग को चाट रही थी. मैं भी उसका सर अपने लिंग पर दबा रहा था. वह ऐसे ही चूमती जा रही थी और मैं सिर्फ सिसकारियां ले रहा था.


उसकी जीभ में गजब का जादू था और उस जादू के आगे मैं देर तक नहीं टिक पाया. मैंने अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया और उसने भी मेरा पूरा वीर्य पी लिया. साथ ही उसने मेरे लिंग को पूरा चाटते हुए साफ कर दिया. फिर वो मेरे बगल में आकर लेट गई.


हम दोनों पूरे पसीने में भीगे हुए थे लेकिन हमारी वासना अभी पूरी नहीं हुई थी. आहना ने मुझसे कहा- अब अपना लिंग मेरी योनि में डालो … मैं कब से तड़प रही हूँ … मुझे और मत तड़पाओ.

मैंने भी उसे और तड़पाना ठीक नहीं समझा और उसकी योनि को चूमने लगा. वह फिर से उत्तेजित होने लगी. फिर उसने मुझे 69 में आने को कहा और वह मेरे ऊपर आ गई. अब उसकी योनि मेरे मुख पर थी. वह मेरा लिंग उसके मुँह में था और हम एक दूसरे को चूमने लगे.

उसकी योनि जल्दी ही एक बार फिर काम रस से भर गई, तो उसने कहा- अब और मत तड़पाओ, अब अपना लिंग मेरी योनि में डालो.

मैंने भी उसे नीचे लिटाया और अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ने लगा. वह मचल रही थी और बार बार अपनी कमर उठा कर मेरे लिंग को अपनी योनि में प्रवेश करवाना चाह रही थी. मैंने भी अपने लिंग को की योनि पर रखा और एक धक्का दे दिया. उसकी योनि बहुत टाइट थी, लेकिन मेरे धक्के के कारण मेरा लिंग का टोपा अन्दर प्रवेश कर गया.


आहना ने जोर से उम्म्ह… अहह… हय… याह… किया और मुझे जोरों से जकड़ लिया. मैं धीरे धीरे अपने लिंग को आगे पीछे करने लगा और आहना भी मेरा साथ देने लगी. जब वो तैयार हो गयी, तो मैंने एक और जोर से धक्का दिया और मेरा लिंग पूरा अन्दर हो गया. आहना आहें ले रही थी और अपने नाखूनों को मेरी पीठ पे कुरेद रही थी. लेकिन इस वक्त मुझे वो दर्द भी बहुत अच्छा लग रहा था.


अब मैंने भी आहना की योनि का मर्दन शुरू कर दिया और साथ ही कभी उसके लबों को चूमना चालू कर दिया. मैं कभी उसके स्तनों को चूमता चूसता जाता. तभी आहना ने एक बार फिर अपना काम रस छोड़ दिया और निढाल हो गयी. मैं भी रुक गया और उसको चूमना शुरू कर दिया. साथ ही धीरे धीरे अपने लिंग को उसकी योनि में चलाता रहा.


मैं उसके चूचुकों को चूमता रहा. मेरे चूचुक चूमने और योनि में लगातार लिंग के कारण वो और भी ज्यादा उत्तेजित हो रही थी. अब की बार मैंने उसे डॉगी स्टाइल के लिए बोला, तो वो तुरंत तैयार हो गयी. फिर मैंने उसे बहुत देर तक वैसे ही आनन्द दिया.


तभी अचानक आहना का बच्चा रोने लगा, तो आहना ने कहा- लगता है, उसे भूख लग आयी.

मैंने आहना को कहा- आज अपने बच्चे को ऐसे ही दूध पिलाओ.

वो झट से मान गयी. मैं लेट गया और आहना मेरे लिंग पे बैठ गयी. मेरा लिंग उसकी योनि में अन्दर तक घुस गया. फिर उसने अपने बच्चे को लिया और उसे दूध पिलाने लगी.

सच में दोस्तो, वो नजारा अद्भुत था. वो अपनी कमर भी हिला रही थी, साथ ही अपने बच्चे को दूध भी पिला रही थी. मैंने भी उसका दूसरा स्तन पकड़ा और उसमें से दूध निकालने लग गया.

वो बोली- अभी ये दूध मेरे बच्चे के लिए है, तुम बाद में पीना.

आहना बच्चे को स्तनपान करती रही और अपनी योनि को मेरे लिंग पे चलाती रही. फिर जब बच्चा सो गया, तो उसे वापस पालने में सुला दिया.


मैंने आहना को नीचे लेटा कर फिर से उसकी योनि में लिंग डालकर उसका मर्दन शुरू कर दिया. थोड़ी देर की इस यौन क्रिया के बाद में चरम सीमा पे पहुंच गया, तो मैंने कहा- मेरा वीर्य निकलने वाला है.

उसने कहा- मेरी योनि में ही निकाल दो.

मैंने अपना वीर्य उसकी योनि में छोड़ दिया. साथ ही आहना ने भी अपना काम रस निकाल दिया.


हम दोनों कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे से चिपके पड़े रहे और मेरा लिंग उसकी योनि से बाहर आ गया. साथ ही हम दोनों का प्रेम रस भी बह निकला. उसके चेहरे पे संतुष्टि देखकर मुझे बहुत खुशी हुई.


उसके बाद हम अक्सर मिलते और खूब प्रेम क्रीड़ा करते. लेकिन अब वो अपने पति के साथ दूसरे शहर चली गई. हम अब भी फ़ोन पे और वीडियो पे बात करते हैं, लेकिन आप तो जानते ही हो कि जो आनन्द साथ में है, वो फ़ोन पे कहां आता है.

वैसे यह कहानी मैंने आहना को बता कर ही लिखी है … और उसे बहुत पसंद भी आई है. साथ ही उसने कहा कि वो मुझसे मिलने जरूर आएगी.

आहना के आने का और आपके विचारों और प्रतिक्रिया का मुझे इंतजार है. उसके बाद मैं बताऊंगा. अगर आहना आयी तो हमने क्या क्या किया.

गाँव की औरत को चाचा ने मेरे सामने चोदा - Uncle fucked the village woman in front of me

 गाँव की औरत को चाचा ने मेरे सामने चोदा


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


नमस्कार दोस्तो, मैं आज एक सच्ची घटना बता रहा हूँ जिसमें मुख्य पात्र मेरी माँ और पापा के दोस्त और चाचा है.


दोस्तो, मेरे पापा शहर में काम करते हैं.

गांव में खेती बाड़ी है जिसे चाचा देखते हैं.

घर में माँ, चाचा और मैं रहते हैं.


चाचा की शादी नहीं हुई है. चाचा बहुत स्मार्ट हैं. गांव में दीदी, चाची भाभियों में चाचा की खूब डिमांड हैऔर वे कई औरतों लड़कियों को चोद चुके हैं.

गांव में बहुत से पुरुष कमाने के लिए शहर में रहते हैं और 15 दिन या एक महीने में आते रहते हैं.

जिनका फायदा गांव की महिलायें और गांव में ही खेती करने वाले पुरुष उठाते हैं, खूब मौज उड़ाते हैं.


इन्हीं में मेरी माँ भी है को गाँव में रह कर गैर मर्दों के लंड का जम के मजा लेती है.


मेरे चाचा को पड़ोस की एक औरत को चोदने का बहुत मन था.

वे उसे पटाने की कोशिश में लगे थे. उनका आपस में हंसी मजाक चलता रहता था.


यह देसी औरत की चूत की कहानी इसी औरत की चुदाई की आँखों देखी है.


आग दोनों तरफ लगी थी क्योंकि उस औरत का पति बाहर रहता था.

चाचा और उस सेक्सी औरत का नैन मटक्का चल रहा था.

कई बार उसके पास चाचा को कुछ भेजना रहता था तो मुझे भेजते थे.

कभी कुछ खाने को तो कभी रिचार्ज करवा दिया करते थे.


एक बार जब उनके घर में कोई नहीं था तो उस औरत ने चाचा को घर बुलाया क्योंकि उसकी सास कहीं बाहर गई हुई थी.


लेकिन किसी को शक न हो, इसके लिए चाचा मुझे भी अपने साथ ले गए.

अब मैं चाचा की राजदार बन गया था.


वे दोनों पास पास बैठे थे, चाचा उनके हाथ को सहलाते हुए बात कर रहे थे, उन्हें मनाने की प्रयास कर रहे थे.


चाचा ने मुझे हॉल में बैठने को बोला और वे दोनों बेडरूम में चले गए.

मैं खिड़की के पास खड़ा हो गया.


दोनों रूम में पहुचते ही एक दूसरे को चूमने चाटने, गुत्थम गुत्थी होने लगे.

वह औरत बोल रही थी- समय मत गंवाओ. जल्दी से चोदो!


बोल कर पैंटी निकाल कर साड़ी ऊपर करके टांग फैला के चाचा को बुलाने लगी.


चाचा भी लोअर उतार कर टांगों के बीच आकर अपना लंड उस देसी औरत की चूत में रगड़ने लगे.

फिर एक झटके के साथ चाचा ने लंड अंदर पेल दिया और धकाधक चोदने लगे.


वह औरत ‘आ..ह … ह … उह … धीरे … आह … हह … धीरे … आहह … उह … धीरे’ चिल्लाने लगी.

चाचा भी बोल रहे थे- गजब की माल हो मेरी जान … क्या मक्खन चुत है तुम्हारी! एकदम सॉफ्ट साफ्ट! बहुत मजा आ रहा है!

और चाचा उस औरत की चूत को हुमच हुमच कर चोदने लगे.


कभी लेफ्ट पैर कंधे पर रख के, कभी राइट, कभी दोनों पैर कन्धे में रख के जबरदस्त घपाघप कर रहे थे.


फिर चाचा ने कहा- कुतिया बन जा!

वह औरत तुरंत उल्टी होकर झुक गई.


चाचा ने फिर से लण्ड को उसकी चूत के छेद से सटा के धक्का दिया.

पूरा लंड औरत की चूत में पेल कर घपाघप चोदने लगे.

वे दोनों पसीने से भीग गए थे.


15 मिनट तक पेलने के बाद चाचा अकड़ने लगे और उस देसी औरत की चूत में माल गिरा कर उसके ऊपर ही निढाल हो गए और बगल में लेट गए.

वे दोनों अपनी सांसें सम्हालने की कोशिश कर रहे थे.


फिर वह औरत बोलने लगी- सच में … तुम्हारी भाभी (मतलब मेरी माँ) ने जैसा कहा था तुम्हारे बारे में, तुम उससे भी दमदार निकले. अब तक कितनी को पेला है?

चाचा कपड़े पहनते हुए बोले- आम खाओ, गुठली न गिनो. रात को फिर आऊंगा!

बोलकर बाहर आ गए और मुझे पूछने लगे- कैसा लगा मेरा शॉट?

मैं बोला- गजब!


चाचा खेत की ओर चल दिये.

और मैं जब घर वापस आया तो देखा हमारे ही गांव के एक डॉक्टर और मम्मी हाथ पकड़कर हँसते हुए निकल रहे थे.


मैंने पूछा- माँ क्या हुआ? आपकी तबियत ठीक है?

तो डॉक्टर ने कहा- तुम्हारी मम्मी को खुजली हो रही थी. तो मैंने बड़ा मोटा वाला इंजेक्शन लगा दिया है. बीच बीच में और भी लगाना पड़ सकता है. फिर ठीक हो जाएगी.


माँ के बाल बिखरे हुए थे. डॉक्टर के भी कपड़ों में सिलवट थी.


उन दोनों की कुटिल मुस्कान से मुझे दाल में कुछ काला लग रहा था.


माँ बहुत खुश लग रही थी.

वे डॉक्टर को दरवाजे के पास छोड़ने गई तो मैं बेडरूम में गया.

तो देखा कि बिस्तर पूरा बिखरा था.

लण्ड रस से भरा कंडोम वहीं जमीन पर पडा था. चादर अस्त व्यस्त थी.

माँ की चड्डी ब्रा पड़ी हुई थी.


मैं समझ गया कि जैसे पड़ोसन औरत की चुदाई हुई है, वैसे ही मेरी माँ की घपाघप ठुकाई हुई है.


उसके बाद मैं बाहर आ गया और चाचा के पास चला गया.

मैंने चाचा से माँ के बारे में पूछा.

तो चाचा हँसे और बात टालने लगे.

अगली कहानी में बताऊंगा कि माँ और किस किस से चुदी और चाचा ने किस किस को चोदा है.

भाभी की प्यास उसको मेरे पास लायी - Bhabhi's thirst brought her to me

 भाभी की प्यास उसको मेरे पास लायी


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


भाभी की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि भाभी ने मुझे चाची की चुदाई करते देख लिया था. तब से वो मुझपर नजर रखने लगी थी. घर में मुझे अकेला पाकर भाभी मेरे पास आयी और …


कुछ से दोस्तों ने मुझे पूछा कि हरियाणा में कहाँ से हो.

तो दोस्तो, मैं हरियाणा के हिसार शहर से हूँ.


मेरा नाम दीपक सोनी है, मेरी उम्र 29 साल, हाईट 5 फीट 11 इंच है और रंग गोरा है। दिखने में सुंदर हूँ।

मैं यह नहीं कहूँगा की मेरा लण्ड बहुत बड़ा है, पर मोटा बहुत है. मेरा लंड कितनी भी ढीली चूत हो, उसमें भी फंस कर जाता है. जिसकी वजह से मेरे लण्ड ने अच्छी अच्छी औरतों का पानी निकाला हुआ है।


जो भी भाभी या आंटी अब तक मुझसे चुदी है वो आज भी मुझे याद करती है।


जैसा आपने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा कि कैसे मैंने मेरी प्यारी चाची को चोद कर अपना दीवाना बना लिया था.

उसके बाद तो जैसे चाची को चस्का ही लग गया था मेरे लंड का!


वो लगभग हर रोज मेरे घर आ जाती थी या जब भी मौका मिलता था वो मुझे अपने घर बुला कर चुदवाती थी.

ना जाने कितनी बार मैंने उनकी चूत और गांड मारी है.


अब तो चाची को गांड मरवाने में भी मजा आने लगा है क्योंकि मेरी गांड मारने का तरीका ही ऐसा है कि मैं दर्द की बजाये मजा देता हूँ गांड मारने में भी!

मैंने और चाची ने अपने और मेरे घर का ऐसा कोई कोना नहीं छोड़ा, जहाँ हमने चुदाई ना की हो।

तो दोस्तो, यह भाभी चूत कहानी मेरी और चाची की नहीं बल्कि उस भाभी की है जिसने चाची को रसोई में रंगे हाथों पकड़ लिया था सलवार का नाड़ा बांधते हुए … और वापिस चली गयी थी।


मेरी भाभी का नाम मंजू है (काल्पनिक नाम)

इस कहानी में सिर्फ नाम ही काल्पनिक है. उसके अलावा पूरी कहानी में कुछ भी काल्पनिक नहीं है. जो जो मेरे साथ हुआ है, वही आपको लिख कर बता रहा हूँ।


भाभी तो चाची से भी मस्त शरीर वाली है. भाभी की उम्र 25 साल, हाईट 5 फिट 10 इंच है। उनके चूचे 32 के, कमर 28 की और गांड 36 की है.


उनकी शादी हुए 1 साल ही हुआ है. भईया किसी कम्पनी में अच्छी पोस्ट पर हैं, उनका काम फील्ड का ज्यादा रहता है तो वो हफ्ते में 4 दिन घर से बाहर ही रहते हैं.


भाभी की गांड तो चाची से भी ज्यादा रसीली है. जब वो चलती है तो उनकी गांड के दोनों पलड़े जबरदस्त हिलते हैं जिनको देख कर बूढ़े के लंड में भी जान आ जाए.

उनका जिस्म दूध जैसा है, मख़मली है.


भाभी लगभग साड़ी ही डालती है और इतनी कस कर बांधती है कि उनकी पैंटी की लाइन भी दिखने लगती है.


जैसा मैंने आपको बताया था कि भाभी को हम पर शक हो गया था.

अब वो मुझ पर और भी ध्यान रखने लगी थी. मैं उनको कहीं भी मिल जाऊँ तो बड़ी कातिलाना स्माइल करती हैं।

उनका मेरे घर भी आना जाना ज्यादा हो गया था.

एक दिन मेरे घर कोई नहीं था. मेरी मम्मी मेरी मौसी जी के घर दूसरे शहर गयी हुई थी.

और पापा अपने ऑफिस टूर से आउट ऑफ़ स्टेशन थे.


मैं घर पर अकेला ही बैठा चाची की वेट कर रहा था.

चाची की चूत मारे मुझे बहुत दिन हो गए थे क्योंकि कुछ दिन से चाचा घर पर ही थे.


तो चाची को आने का मौका ही नहीं मिला. और ना मुझे घर बुला सकती थी.

मैं उनके घर तो जरूर जाता था किसी काम के बहाने … पर कुछ कर नहीं सकते थे.


पर आज चाचा बाहर गए हुए थे तो उनके आने की पूरी पूरी उम्मीद थी मुझे.


मैं सिर्फ अंडरवियर में बैठा अन्तर्वासना पर सेक्स स्टोरी पढ़ रहा था और अपना लंड हिला रहा था.


तभी घर की घंटी बजी.

मुझे लगा कि चाची ही होगी.


तो मैंने अपना अंडरवियर भी निकल दिया और ऐसे ही गेट खोलने चला गया उनको सरप्राइज देने!

पर जैसे ही मैंने गेट खोला, सामने वही भाभी खड़ी थी.

मुझे इस अवस्था में देख कर उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया और अपना चेहरा अपने आंचल से ढक लिया.


मेरे तो जैसे एकदम होश ही उड़ गए.

मैं सीधा अंदर भागा.


वो भी मेरे पीछे पीछे अंदर आ गयी और हंसने लगी, बोली- क्या हुआ देवर जी? किसका वेट कर रहे थे इस अवस्था में?

मैंने कहा- किसी का भी नहीं भाभी!


तो उन्होंने कहा- तो क्या फिर आप हर किसी का ऐसे ही स्वागत करते हो क्या बिना कपड़ों के?

अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ.


पर भाभी समझ गयी थी और बोली- मैं समझ सकती हूँ देवर जी. इस उम्र में ऐसा ही होता है. पर थोड़ा बहुत ध्यान हमारा भी रख लिया करो।

मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं भाभी?

तो उन्होंने कहा- अब इतने भी नासमझ ना बनो, तुम्हारी इस हथियार के तो बहुत कारनामे देखे है मैंने!

यह कहते हुए भाभी ने धीरे से मेरे लंड पर कच्छे के ऊपर से ही हाथ फेर दिया और हंसने लगी.


मेरा लंड तो दुगनी स्पीड से खड़ा हो गया और फटने को हो गया।

मैंने कहा- ऐसा क्या कारनामा और कब देख लिया भाभी आपने?

तो उन्होंने एक जबरदस्त सेक्सी स्माइल कर के बोली: बताऊँगी जनाब! इतनी भी क्या जल्दी है?


मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं!


फिर उन्होंने कहा- आप चिंता ना करो, मैं किसी को भी नहीं कहूँगी कि तुमने चाची के साथ क्या क्या किया है.


मेरे तो पसीने ही छुट गए, मैंने कहा- मैंने क्यय क्ययय क्या किया है, बताओ?

उन्होंने कहा- अरे इतना डर क्यों रहे हो और इतना हकला क्यों रहे हो? मैंने तो बहुत दिन से तुम दोनों पर नजर रखी हुई थी. कभी तुम उसके घर … और कभी वो तुम्हारे घर! पूरे मजे लिए हैं तुम दोनों ने! पर मुझे एक बात का दुःख है।


मैंने कहा- किस बात का भाभी जी?

तो उन्होंने कहा- तूने सारा प्यार चाची को ही दे दिया. कुछ ख्याल हमारा भी रख लेते।


मुझे लगा कि अब भाभी को सारी बातों का पता ही लग गया है तो क्यों ना बिल्कुल खुलकर ही बात कर ली जाये.

जिस हिसाब से भाभी खुल कर बात कर रही थी तो मुझे लग भी रहा था कि भाभी चुदने के इरादे से ही आयी हैं.

क्या पता चाची की जगह आज भाभी की चूत मिल जाये!

इस वक़्त तो मुझे सिर्फ चूत और गांड चाहिए थी. मेरा लंड अकड़ कर जो खड़ा था अब वो चाहे वो भाभी की हो या चाची की.


मैंने कहा- क्या करूं भाभी, आपने भी तो कभी लाइन ही नहीं दी. मेरा लंड तो कब से आपके लिए तैयार था।

उन्होंने कहा- अच्छा जी, ये बात है! सच कहुँ दीपू, जब से मैंने तुम्हारा लंड उस दिन कच्छे में खड़ा देखा था, तब से मैं तो यही सोच रही थी कि ये कच्छे में इतना हॉट लग रहा था तो बाहर आने के बाद कैसा लगेगा. तब से मुझे और कुछ दिख ही नहीं रहा.


भाभी आगे बोली- तुम्हारे भाई का तो यार 4 इंच से भी कम है. पर उस दिन तुम्हारा लंड देखते ही मेरी चूत गीली हो गयी थी. मैंने आज तक इतना मोटा और लम्बा लंड कभी नहीं देखा.


अब भाभी बिल्कुल खुल कर बोलने लगी थी. जिसे सुन सुन कर मेरे लंड में और भी जोश आने लग गया था. मेरा लंड झटके मारने लगा था. जिसे भाभी सेक्सी तिरछी नजरों से देख रही थी.


वे बोली- दिल तो कर रहा था कि उसी दिन तुम्हारा पकड़ लूं. पर तुम चाची के साथ ही लगे हुए थे. और उसके बाद मैंने ना जाने कितनी बार तुम्हें हिंट दिए. पर तुम तो चाची के पल्लू से ही चिपके हुए थे. आज सही समय लग रहा है मुझे क्योंकि मुझे पता था आज तुम्हारी मम्मी तुम्हारी मौसी के घर जाएगी और तुम घर पर अकेले होंगे.


भाभी बताती रही- मैं तो आज ये सोच कर आयी थी कि चाहे आज कुछ भी हो जाये, मैं आज तुमसे चुद कर ही जाऊँगी. पर मुझे क्या पता था, तुम यहाँ मुझे ऐसे मिलोगे और मेरा आधा काम आसान कर दोगे. वैसे मैंने तुम्हारी और चाची की चुदाई देखी है यार, क्या मस्त झटके लगाते हो तुम! और क्या मस्त स्टैमिना है तुम्हारा, मैंने तो तुम्हारी पूरी चुदाई देखी थी.

मैंने कहा- अरे भाभी, आपने कब देख ली हमारी चुदाई?

उन्होंने कहा- जिस दिन मैं चीनी लेने आयी थी और थोड़ी देर बाद चाची चली गयी थी.

मैंने कहा- हां चाची तो चली गयी थी।


फिर उन्होंने कहा- थोड़ी देर बाद चाची वापसी आती हुई दिखी मुझे और सीधा तुम्हारे घर आयी. तब मैं भी उनके पीछे पीछे आयी थी और तुम्हारी जबरदस्त चुदाई देखी थी।

तो मैंने कहा- तो भाभी आप भी अंदर आ जाती, मैं आपका भी पानी निकल देता।


उन्होंने कहा- दीपू, मैं तुम्हारा मजा ख़राब नहीं करना चाहती थी. पर मैंने उस दिन तुम्हारी मदमस्त कर देने वाली चुदाई देख कर इतना जरूर सोच लिया था कि अब मुझे भी तुमसे जरूर अपनी चूत की प्यास बुझवानी है।


भाभी कहने लगी- प्लीज दीपू, मेरा इतना काम कर दो. मैं तुम्हारा जिंदगी भर अहसान नहीं भूलूंगी. अगर तुमने मेरी अच्छे से प्यास बुझा दी जैसे चाची की बुझाई थी. तो पक्का प्रॉमिस करती हूँ, मेरे साथ साथ मेरी बहुत सी सहलियाँ को भी तुझसे चुदवा कर तुम्हारा पानी निकलवा दूँगी। मेरी बहुत से दोस्त ऐसी हैं जो अपने अपने पतियों से चुदाई से खुश नहीं है.


मैंने कहा- भाभी नेकी और पूछ पूछ! अगर सच में वो सब अपने पतियों के सेक्स से खुश नहीं हैं तो मैं आपके कहने पर फ्री मैं ही उनकी सेवा कर दूँगा।


भाभी पूरी खुश हो गयी और भाग कर मेरे गले लग गयी. वे मेरी गर्दन को चूमने चाटने लगी.

मेरे शरीर में 440 वाट का करंट सा दौड़ गया।

भाभी का शरीर इतना मुलायम और कोमल था कि मुझसे रहा ना गया और मैंने उनको पूरी अपनी आग़ोश में ले लिया।


तभी भाभी बोली- दीपू, प्लीज अब अपना बना ले यार, अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।

अब मैं भी उनकी गर्दन और कान के पास चूमने लगा और अपने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ ली.

भाभी जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी- आअह आआ इस्स्स्स स्शह्ह, ओह्ह दीपूउउउ … आह आह ओह ओह!

थी और बोली- मैं कब से तरस रही थी इस प्यार के लिए।


मैंने कहा- भाभी अब में हूँ ना आपके लिए, अब आपको कभी इस प्यार की कमी नहीं होने दूँगा।


भाभी ने अपना एक हाथ नीचे लाते हुए मेरे लंड पर रख दिया और दूसरे हाथ से मेरी कमर को सहला रही थी.

फिर बोली- तुम्हारा लंड तो पूरा फौलादी बना हुआ है, चाची कैसे इसे अपनी चूत और गांड में ले लिया?

मैंने कहा- जैसे आप लोगी भाभी!


उन्होंने कहा- दीपू, मेरी चूत बहुत टाइट है. तेरे भाई का लंड तो बहुत छोटा है. मुझे तो उस से ही दर्द होता है, तुम्हारा लंड मैं कैसे लूंगी?

मैंने कहा- भाभी आप टेंशन ना लो, मैं आपको दर्द भी नहीं होने दूँगा और मजे भी दूँगा।


उन्होंने कहा- इसीलिए तो तुम्हारी पास आयी हूँ. और दीपू, प्लीज ये बात किसी को पता ना चले. नहीं तो मेरी बहुत बदनामी होगी।

मैंने कहा- भाभी, आप मेरे पास आये हो तो आपकी इज्जत मेरी इज्जत है. आप टेंशन ना लो।

और भाभी जोर जोर से मेरे लंड को रगड़ने लगी।


मैं भी भाभी को किस करते करते हुए अपने दोनों हाथ भाभी के दोनों चूचों पर ले आया और उनको रगड़ने लगा. मैं भाभी के निप्पल को उंगली और अंगूठे से रगड़ने लगा.


भाभी पूरी तरह तड़पने लगी और मस्त सिसकारियां निकालने लगी.

मैं धीरे धीरे भाभी के शरीर से कपड़े अलग करने लगा.

अब भाभी मेरे सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी.


मैंने उनका ब्लाउज और पेटीकोट भी निकाल दिया.


मैं आपको बता नहीं सकता कि भाभी क्या मस्त लग रही थी.

उन्होंने रेड कलर की ब्रा और रेड कलर की ही जालीदार पैंटी पहनी हुई थी.

और ये दोनों ही उनके दूधिया जिस्म पर मस्त लग रही थी.

मैं तो सिर्फ देखता ही रह गया।


भाभी ने कहा- क्या देख रहे हो देवर जी?

मैंने कहा- भाभी, आपका शरीर तो चाची को भी दूर बिठा रहा है. आपके सामने तो चाची भी पानी ना मांगे!

यह सुन कर भाभी शर्म से लाल हो गयी और मैंने आगे बढ़ कर उनको फिर से गले लगा लिया.


और जब हम दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे से टकराये तो मैं आपको बता नहीं सकता कि मुझे कितना आनंद आया.

माँ की चुदाई भाई बहन के मन भाई - brother and sister sex

 माँ की चुदाई भाई बहन के मन भाई


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


हेलो फ्रेंड्स! मैं हरियाणा के एक गांव से आपका दोस्त मानुष हूँ. मेरे पापा अपनी जॉब की वजह से घर से बहार ही रहते हैं. घर में मैं, छोटी बहिन और मेरी मम्मी ही रहते हैं. मेरी मम्मी का नाम सुमंगला और छोटी बहन का नाम वृतिका है। पापा साल में एक दो महीना आते हैं।

मेरी मम्मी की उम्र 41 वर्ष है, वह मस्त गदराई हुई है। वैसे तो उनकी गांड भी खूब मोटी है लेकिन लोगों की नज़र उनके तरबूज जैसे बड़े बड़े बोबों पर ही टिकी रहती है।

मेरी बहन वृतिका की उम्र 18 साल है, वह भी मस्त गदराई हुई है और उसकी गांड मस्त बाहर निकली हुई है। लेगी पहनने के कारण हर आदमी मेरी बहन को देखते ही उसको घोड़ी बनाने की सोचता है।


दोस्तो, मेरी मम्मी शुरू से ही चालू थी और उसके असर से मेरी बहन भी चुदक्कड़ बन चुकी है।


बात आज से 5 साल पहले की है जब मैं और वृतिका एक दिन कॉलेज गए। उस दिन किसी नेता की मौत हो गई थी इसलिए मौन प्रार्थना करवा कर तुरंत छुट्टी कर दी।

हम वापस घर लौटे मैंने देखा कि घर का दरवाजा अंदर से बंद है। लेकिन हम तो अभी अभी मम्मी को छोड़ कर गए थे।


वृतिका बोली- भैया हम पीछे की खिड़की से अंदर चल कर देखते हैं।

जब हम खिड़की के पास गये तो हमें ‘आह ऊह …’ की आवाज सुनाई दी।


थोड़ा सा धकेलने पर खिड़की हल्की सी खुल गई क्योंकि अंदर से सिटकनी नहीं लगाई हुई थी।


अब हमने अंदर जो देखा; उसे देख कर हमारी आंखें फ़टी रह गई। अंदर गुलाब काका(चाचा) और मम्मी आपस में लिपटकर चुम्मा चाटी कर रहे थे। मम्मी एक हाथ से गुलाब काका का लंड पजामे के ऊपर से ही मसल रही थी। गुलाब काका उस वक्त 32 साल के हट्टे कट्टे नौजवान थे। मम्मी उनके होंठों को बुरी तरह से चूस रही थी मानो जन्म-जन्मांतर की भूखी हों।


गुलाब काका मम्मी के मोटे बोबे दबा रहे थे। मम्मी ने अब गुलाब काका की शर्ट उतार दी और उनकी चौड़े सीने पर अपनी उंगलियां फिराने लगी। उसके बाद मम्मी अपने घुटनों पर खड़ी हो गई और गुलाब काका का पजामा और अंडरवियर एक साथ उतार दी।


हाय राम … गुलाब काका का लंड करीब 7 इंच लंबा और करीब ढाई इंच मोटा था। मम्मी ने उसे हाथ में पकड़ कर कुछ देर आगे पीछे किया और फिर उसको अपने मुंह में लेकर कुल्फी की तरह चूसना शुरू कर दिया।


मेरी छोटी बहन वृतिका बोली- छी भैया, हमारी मां कितनी गंदी है ना!

उसके चेहरे पर घृणा के भाव थे.


कुछ देर बाद हमारी मम्मी ने खड़ी होकर अपनी कुर्ती व घाघरा उतार दिया; वो अधनंगी हो गयी. तभी गुलाब काका ने मेरी मां को पलट कर उनकी पीठ पर हाथ लेजाकर उनकी ब्रा के हुक खोल दिए और ब्रा की पट्टियां उनके कंधे से उतार दी तो मां ऊपर से नंगी हो गई.


गुलाब काका ने कुछ देर तक उनकी गोरी नंगी पीठ को चूमा, चाटा और सहलाया. फिर काका हमारी माँ को वापस पलट कर उनका दूध पीने लगे। वे अपनी जीभ से मम्मी के नुकीले निप्पलों को चुभलाने लगे।


फिर गुलाब काका ने अपने घुटने नीचे धरती पर टिका दिए और हमारी मम्मी की पैंटी को भी अपने दोनों हाथों की उँगलियों को पैंटी में फंसा कर उतार दिया। अब मम्मी पूरी नंगी खडी थी.

अपनी मम्मी की टांगों के बीच की जन्नत को मैंने पहली बार देखा था, एकदम गोरी चूत पूरा फुलाव लिए हुए।


गुलाब काका ने कुछ देर तक उस जगह को सूंघा, चूमा और फिर चाटना शुरू कर दिया। मम्मी कामुक सिसकारियां लेने लगी; उनसे अब खड़ा नहीं जा रहा था; वह वासना के वशीभूत बार-बार अपनी गांड मटका रही थी।


उन्होंने गुलाब काका के बाल खींच कर उनको अपनी टांगों में दबाना शुरू कर दिया। उनके मुंह से निकल रहा था- आह गुलाब … ओह गुलाब … तुम कितने अच्छे हो! तुम नहीं होते तो आपके भाई के भरोसे तो यहां मेरी जवानी का रस ही सूख जाता। ऊपर दाने को चूसो गुलाब, मजा आ रहा है।


अब मेरी मम्मी की सांसें अनियंत्रित होने लगी और टांगें कांपने लगी जिसके कारण खड़ा होना भी मुश्किल हो गया। मम्मी की कामवासना अपने चरम पर दिख रही थी.


गुलाब काका बोले- भाभी, आओ शुरू करते हैं, मेरे रहते हुए आप चिंता क्यों करती हो, कहो तो डबल मजा दिलवा दूं?

मम्मी ने कहा- नहीं गुलाब … अभी ज्यादा लालच ठीक नहीं, फिलहाल तुम मुझे जल्दी से चोदो; नहीं तो मैं अपने जिस्म की आग से पागल हो जाऊंगी।


गुलाब काका ने मम्मी को बिस्तर पर लिटाया और खुद उनके नंगे बदन पर लेट कर उनके होंठ चूसने और बोबे दबाने लगे।

मम्मी ने एक हाथ नीचे ले जाकर गुलाब काका के लंड को पकड़कर अपनी चूत के छेद पर सेट किया और दूसरे हाथ से गुलाब काका के चूतड़ों पर थप्पड़ मार कर धक्का देने का इशारा किया।

गुलाब काका ने अपने कूल्हे उचकाये और एक ही झटके में पूरा लंड अपनी भाभी और हमारी मम्मी की चूत में उतार दिया।

मम्मी के मुख से निकला- उम्म्ह… अहह… हय… याह… गुलाब!


हमारी मम्मी की जोर से आह निकल गई। वह बोली- उई मां गुलाब … क्या कर रहे हो तुम? भाभी हूँ तुम्हारी, प्यार से करो।

गुलाब काका कुछ भी नहीं बोले और हम भी बहन की मम्मी की चुदाई करते रहे।


मम्मी कभी चचा के चूतड़ों पर थप्पड़ मार कर जोश बढ़ाती तो कभी अपनी गांड को उनकी तरफ उछालती। दस मिनट के बाद मम्मी गुलाब की गर्दन पर बुरी तरह चुम्मे लेने लगी और उनकी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी। मम्मी अब कामतृष्णा से पागल होकर जंगली बिल्ली की तरह हरकतें कर रही थी। उन्होंने अपनी टांगों को मोड़कर गुलाब काका को कसना शुरू कर दिया और थोड़ी जोर जोर से आवाज करने लगी।


कुछ देर बाद उनका शरीर अकड़ा और वो ढीली पड़ गई।

लेकिन गुलाब काका धक्के लगाए जा रहे थे।


मम्मी बोली- गुलाब रुको … एक बार अंदर ही रहने दो और मेरे ऊपर लेट जाओ, कुछ देर बाद कर लेना।


थोड़ी देर बाद मम्मी ने गुलाब काका को अपने नंगे शरीर के ऊपर से हटने को कहा और फिर वह घोड़ी बन गई। मतलब अब मामी पीछे से लंड चूत में लेकर अपनी चूत चुदाई करवाना चाह रही थी.

गुलाब काका अपने के उठे हुए चूतड़ों के पीछे आये और दोनों हाथों से दोनों कूल्हे फैला कर अपना लंड बीच में टिका कर अपना लंड अपनी चुदासी भाभी की चूत में डालने लगे. चाचा का खड़ा लंड जब मेरी मम्मी की गीली गर्म चूत में गया तो मम्मी आगे को उचक गयी और उनके मुख से आनन्द से परिपूर्ण लम्बी सिसकारी निकल गयी.


और काका बकरे की सी आवाज करते हुए जैसे सांड गाय को चोदता है वैसे मम्मी को चोदने लगे।


करीब 10 मिनट के बाद उन्होंने मम्मी को दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया और पीछे से खड़े खड़े ही मम्मी को चोदने लगे।

5 मिनट के बाद उन्होंने कहा- मेरी प्यासी भाभी, अब मैं झड़ने वाला हूँ।

मम्मी बोली- 2-3 मिनट रुको, मैं भी बस झड़ ही रही हूं।


फिर मम्मी अचानक से थरथराकर कांपने लगी और नीचे बैठ गई। गुलाब काका का लंड जो अभी भी खड़ा था मम्मी की चूत से बाहर निकल आया। मम्मी ने पास पड़े सूती कपड़े से उसे पौंछा और उसके टोपे को चूसने लगी।

कुछ देर बाद उसे सफेद मलाई निकली जिसे मम्मी पी गई।


थोड़ी देर तक मम्मी और गुलाब काका नंगे ही लिपट कर लेटे रहे, दोनों देवर भाभी के चेहरे पर असीम संतुष्टि के भाव दिखायी दे रहे थे.


कुछ देर के बाद गुलाब काका उठे, अपने कपड़े पहने, मम्मी के होंठों को चूमा, मम्मी की चूचियां मसली और चले गए.

और साथ ही मम्मी भी उठ गयी और उन्होंने भी अपने कपड़े पहन लिए।


थोड़ी देर बाद जब मम्मी रसोई की तरफ गई तो हम बाहर के गेट से अंदर आ गए।

जैसे ही मम्मी ने हम दोनों भाई बहन को देखा, एक पल के लिए तो उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी लेकिन शीघ्र ही खुद को संयत करके बोली- अरे … तुम दोनों यहाँ? कॉलेज से इतनी जल्दी कैसे आ गए?

हमने जल्दी छुट्टी होने का कारण बताया और अपने कमरे में चले गए.

लेखक की इमेल आईडी नहीं दी जा रही है.

धन्यवाद.

भाभी की प्यास उसको मेरे पास लायी - Bhabhi's thirst brought her to me

 भाभी की प्यास उसको मेरे पास लायी


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


दोस्तो, मेरी पिछली स्टोरी को पढ़कर बहुत से दोस्तों के ईमेल आये और उन्होंने बहुत प्यार दिया. मैं उन दोस्तों को तहेदिल से धन्यवाद कहना चाहूँगा और साथ ही साथ अन्तर्वासना साइट का भी तहेदिल से धन्यवाद कहना चाहूँगा जिसके वजह मुझे इतना प्यार व सम्मान मिला.


कुछ से दोस्तों ने मुझे पूछा कि हरियाणा में कहाँ से हो.

तो दोस्तो, मैं हरियाणा के हिसार शहर से हूँ.


मेरा नाम दीपक सोनी है, मेरी उम्र 29 साल, हाईट 5 फीट 11 इंच है और रंग गोरा है। दिखने में सुंदर हूँ।

मैं यह नहीं कहूँगा की मेरा लण्ड बहुत बड़ा है, पर मोटा बहुत है. मेरा लंड कितनी भी ढीली चूत हो, उसमें भी फंस कर जाता है. जिसकी वजह से मेरे लण्ड ने अच्छी अच्छी औरतों का पानी निकाला हुआ है।


जो भी भाभी या आंटी अब तक मुझसे चुदी है वो आज भी मुझे याद करती है।


जैसा आपने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा कि कैसे मैंने मेरी प्यारी चाची को चोद कर अपना दीवाना बना लिया था.

उसके बाद तो जैसे चाची को चस्का ही लग गया था मेरे लंड का!


वो लगभग हर रोज मेरे घर आ जाती थी या जब भी मौका मिलता था वो मुझे अपने घर बुला कर चुदवाती थी.

ना जाने कितनी बार मैंने उनकी चूत और गांड मारी है.


अब तो चाची को गांड मरवाने में भी मजा आने लगा है क्योंकि मेरी गांड मारने का तरीका ही ऐसा है कि मैं दर्द की बजाये मजा देता हूँ गांड मारने में भी!

मैंने और चाची ने अपने और मेरे घर का ऐसा कोई कोना नहीं छोड़ा, जहाँ हमने चुदाई ना की हो।


तो दोस्तो, यह भाभी चूत कहानी मेरी और चाची की नहीं बल्कि उस भाभी की है जिसने चाची को रसोई में रंगे हाथों पकड़ लिया था सलवार का नाड़ा बांधते हुए … और वापिस चली गयी थी।


मेरी भाभी का नाम मंजू है (काल्पनिक नाम)

इस कहानी में सिर्फ नाम ही काल्पनिक है. उसके अलावा पूरी कहानी में कुछ भी काल्पनिक नहीं है. जो जो मेरे साथ हुआ है, वही आपको लिख कर बता रहा हूँ।


भाभी तो चाची से भी मस्त शरीर वाली है. भाभी की उम्र 25 साल, हाईट 5 फिट 10 इंच है। उनके चूचे 32 के, कमर 28 की और गांड 36 की है.


उनकी शादी हुए 1 साल ही हुआ है. भईया किसी कम्पनी में अच्छी पोस्ट पर हैं, उनका काम फील्ड का ज्यादा रहता है तो वो हफ्ते में 4 दिन घर से बाहर ही रहते हैं.


भाभी की गांड तो चाची से भी ज्यादा रसीली है. जब वो चलती है तो उनकी गांड के दोनों पलड़े जबरदस्त हिलते हैं जिनको देख कर बूढ़े के लंड में भी जान आ जाए.

उनका जिस्म दूध जैसा है, मख़मली है.


भाभी लगभग साड़ी ही डालती है और इतनी कस कर बांधती है कि उनकी पैंटी की लाइन भी दिखने लगती है.


जैसा मैंने आपको बताया था कि भाभी को हम पर शक हो गया था.

अब वो मुझ पर और भी ध्यान रखने लगी थी. मैं उनको कहीं भी मिल जाऊँ तो बड़ी कातिलाना स्माइल करती हैं।

उनका मेरे घर भी आना जाना ज्यादा हो गया था.


एक दिन मेरे घर कोई नहीं था. मेरी मम्मी मेरी मौसी जी के घर दूसरे शहर गयी हुई थी.

और पापा अपने ऑफिस टूर से आउट ऑफ़ स्टेशन थे.


मैं घर पर अकेला ही बैठा चाची की वेट कर रहा था.

चाची की चूत मारे मुझे बहुत दिन हो गए थे क्योंकि कुछ दिन से चाचा घर पर ही थे.


तो चाची को आने का मौका ही नहीं मिला. और ना मुझे घर बुला सकती थी.

मैं उनके घर तो जरूर जाता था किसी काम के बहाने … पर कुछ कर नहीं सकते थे.


पर आज चाचा बाहर गए हुए थे तो उनके आने की पूरी पूरी उम्मीद थी मुझे.


मैं सिर्फ अंडरवियर में बैठा अन्तर्वासना पर सेक्स स्टोरी पढ़ रहा था और अपना लंड हिला रहा था.


तभी घर की घंटी बजी.

मुझे लगा कि चाची ही होगी.


तो मैंने अपना अंडरवियर भी निकल दिया और ऐसे ही गेट खोलने चला गया उनको सरप्राइज देने!


पर जैसे ही मैंने गेट खोला, सामने वही भाभी खड़ी थी.

मुझे इस अवस्था में देख कर उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया और अपना चेहरा अपने आंचल से ढक लिया.


मेरे तो जैसे एकदम होश ही उड़ गए.

मैं सीधा अंदर भागा.


वो भी मेरे पीछे पीछे अंदर आ गयी और हंसने लगी, बोली- क्या हुआ देवर जी? किसका वेट कर रहे थे इस अवस्था में?

मैंने कहा- किसी का भी नहीं भाभी!


तो उन्होंने कहा- तो क्या फिर आप हर किसी का ऐसे ही स्वागत करते हो क्या बिना कपड़ों के?

अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ.


पर भाभी समझ गयी थी और बोली- मैं समझ सकती हूँ देवर जी. इस उम्र में ऐसा ही होता है. पर थोड़ा बहुत ध्यान हमारा भी रख लिया करो।

मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं भाभी?


तो उन्होंने कहा- अब इतने भी नासमझ ना बनो, तुम्हारी इस हथियार के तो बहुत कारनामे देखे है मैंने!

यह कहते हुए भाभी ने धीरे से मेरे लंड पर कच्छे के ऊपर से ही हाथ फेर दिया और हंसने लगी.


मेरा लंड तो दुगनी स्पीड से खड़ा हो गया और फटने को हो गया।

मैंने कहा- ऐसा क्या कारनामा और कब देख लिया भाभी आपने?

तो उन्होंने एक जबरदस्त सेक्सी स्माइल कर के बोली: बताऊँगी जनाब! इतनी भी क्या जल्दी है?


मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं!


फिर उन्होंने कहा- आप चिंता ना करो, मैं किसी को भी नहीं कहूँगी कि तुमने चाची के साथ क्या क्या किया है.


मेरे तो पसीने ही छुट गए, मैंने कहा- मैंने क्यय क्ययय क्या किया है, बताओ?

उन्होंने कहा- अरे इतना डर क्यों रहे हो और इतना हकला क्यों रहे हो? मैंने तो बहुत दिन से तुम दोनों पर नजर रखी हुई थी. कभी तुम उसके घर … और कभी वो तुम्हारे घर! पूरे मजे लिए हैं तुम दोनों ने! पर मुझे एक बात का दुःख है।


मैंने कहा- किस बात का भाभी जी?

तो उन्होंने कहा- तूने सारा प्यार चाची को ही दे दिया. कुछ ख्याल हमारा भी रख लेते।


मुझे लगा कि अब भाभी को सारी बातों का पता ही लग गया है तो क्यों ना बिल्कुल खुलकर ही बात कर ली जाये.

जिस हिसाब से भाभी खुल कर बात कर रही थी तो मुझे लग भी रहा था कि भाभी चुदने के इरादे से ही आयी हैं.


क्या पता चाची की जगह आज भाभी की चूत मिल जाये!

इस वक़्त तो मुझे सिर्फ चूत और गांड चाहिए थी. मेरा लंड अकड़ कर जो खड़ा था अब वो चाहे वो भाभी की हो या चाची की.


मैंने कहा- क्या करूं भाभी, आपने भी तो कभी लाइन ही नहीं दी. मेरा लंड तो कब से आपके लिए तैयार था।

उन्होंने कहा- अच्छा जी, ये बात है! सच कहुँ दीपू, जब से मैंने तुम्हारा लंड उस दिन कच्छे में खड़ा देखा था, तब से मैं तो यही सोच रही थी कि ये कच्छे में इतना हॉट लग रहा था तो बाहर आने के बाद कैसा लगेगा. तब से मुझे और कुछ दिख ही नहीं रहा.


भाभी आगे बोली- तुम्हारे भाई का तो यार 4 इंच से भी कम है. पर उस दिन तुम्हारा लंड देखते ही मेरी चूत गीली हो गयी थी. मैंने आज तक इतना मोटा और लम्बा लंड कभी नहीं देखा.


अब भाभी बिल्कुल खुल कर बोलने लगी थी. जिसे सुन सुन कर मेरे लंड में और भी जोश आने लग गया था. मेरा लंड झटके मारने लगा था. जिसे भाभी सेक्सी तिरछी नजरों से देख रही थी.


वे बोली- दिल तो कर रहा था कि उसी दिन तुम्हारा पकड़ लूं. पर तुम चाची के साथ ही लगे हुए थे. और उसके बाद मैंने ना जाने कितनी बार तुम्हें हिंट दिए. पर तुम तो चाची के पल्लू से ही चिपके हुए थे. आज सही समय लग रहा है मुझे क्योंकि मुझे पता था आज तुम्हारी मम्मी तुम्हारी मौसी के घर जाएगी और तुम घर पर अकेले होंगे.


भाभी बताती रही- मैं तो आज ये सोच कर आयी थी कि चाहे आज कुछ भी हो जाये, मैं आज तुमसे चुद कर ही जाऊँगी. पर मुझे क्या पता था, तुम यहाँ मुझे ऐसे मिलोगे और मेरा आधा काम आसान कर दोगे. वैसे मैंने तुम्हारी और चाची की चुदाई देखी है यार, क्या मस्त झटके लगाते हो तुम! और क्या मस्त स्टैमिना है तुम्हारा, मैंने तो तुम्हारी पूरी चुदाई देखी थी.


मैंने कहा- अरे भाभी, आपने कब देख ली हमारी चुदाई?

उन्होंने कहा- जिस दिन मैं चीनी लेने आयी थी और थोड़ी देर बाद चाची चली गयी थी.

मैंने कहा- हां चाची तो चली गयी थी।


फिर उन्होंने कहा- थोड़ी देर बाद चाची वापसी आती हुई दिखी मुझे और सीधा तुम्हारे घर आयी. तब मैं भी उनके पीछे पीछे आयी थी और तुम्हारी जबरदस्त चुदाई देखी थी।

तो मैंने कहा- तो भाभी आप भी अंदर आ जाती, मैं आपका भी पानी निकल देता।


उन्होंने कहा- दीपू, मैं तुम्हारा मजा ख़राब नहीं करना चाहती थी. पर मैंने उस दिन तुम्हारी मदमस्त कर देने वाली चुदाई देख कर इतना जरूर सोच लिया था कि अब मुझे भी तुमसे जरूर अपनी चूत की प्यास बुझवानी है।


भाभी कहने लगी- प्लीज दीपू, मेरा इतना काम कर दो. मैं तुम्हारा जिंदगी भर अहसान नहीं भूलूंगी. अगर तुमने मेरी अच्छे से प्यास बुझा दी जैसे चाची की बुझाई थी. तो पक्का प्रॉमिस करती हूँ, मेरे साथ साथ मेरी बहुत सी सहलियाँ को भी तुझसे चुदवा कर तुम्हारा पानी निकलवा दूँगी। मेरी बहुत से दोस्त ऐसी हैं जो अपने अपने पतियों से चुदाई से खुश नहीं है.


मैंने कहा- भाभी नेकी और पूछ पूछ! अगर सच में वो सब अपने पतियों के सेक्स से खुश नहीं हैं तो मैं आपके कहने पर फ्री मैं ही उनकी सेवा कर दूँगा।


भाभी पूरी खुश हो गयी और भाग कर मेरे गले लग गयी. वे मेरी गर्दन को चूमने चाटने लगी.

मेरे शरीर में 440 वाट का करंट सा दौड़ गया।

भाभी का शरीर इतना मुलायम और कोमल था कि मुझसे रहा ना गया और मैंने उनको पूरी अपनी आग़ोश में ले लिया।


तभी भाभी बोली- दीपू, प्लीज अब अपना बना ले यार, अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।


अब मैं भी उनकी गर्दन और कान के पास चूमने लगा और अपने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ ली.

भाभी जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी- आअह आआ इस्स्स्स स्शह्ह, ओह्ह दीपूउउउ … आह आह ओह ओह!

थी और बोली- मैं कब से तरस रही थी इस प्यार के लिए।


मैंने कहा- भाभी अब में हूँ ना आपके लिए, अब आपको कभी इस प्यार की कमी नहीं होने दूँगा।


भाभी ने अपना एक हाथ नीचे लाते हुए मेरे लंड पर रख दिया और दूसरे हाथ से मेरी कमर को सहला रही थी.

फिर बोली- तुम्हारा लंड तो पूरा फौलादी बना हुआ है, चाची कैसे इसे अपनी चूत और गांड में ले लिया?

मैंने कहा- जैसे आप लोगी भाभी!


उन्होंने कहा- दीपू, मेरी चूत बहुत टाइट है. तेरे भाई का लंड तो बहुत छोटा है. मुझे तो उस से ही दर्द होता है, तुम्हारा लंड मैं कैसे लूंगी?

मैंने कहा- भाभी आप टेंशन ना लो, मैं आपको दर्द भी नहीं होने दूँगा और मजे भी दूँगा।


उन्होंने कहा- इसीलिए तो तुम्हारी पास आयी हूँ. और दीपू, प्लीज ये बात किसी को पता ना चले. नहीं तो मेरी बहुत बदनामी होगी।

मैंने कहा- भाभी, आप मेरे पास आये हो तो आपकी इज्जत मेरी इज्जत है. आप टेंशन ना लो।

और भाभी जोर जोर से मेरे लंड को रगड़ने लगी।


मैं भी भाभी को किस करते करते हुए अपने दोनों हाथ भाभी के दोनों चूचों पर ले आया और उनको रगड़ने लगा. मैं भाभी के निप्पल को उंगली और अंगूठे से रगड़ने लगा.


भाभी पूरी तरह तड़पने लगी और मस्त सिसकारियां निकालने लगी.


मैं धीरे धीरे भाभी के शरीर से कपड़े अलग करने लगा.

अब भाभी मेरे सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी.


मैंने उनका ब्लाउज और पेटीकोट भी निकाल दिया.


मैं आपको बता नहीं सकता कि भाभी क्या मस्त लग रही थी.

उन्होंने रेड कलर की ब्रा और रेड कलर की ही जालीदार पैंटी पहनी हुई थी.

और ये दोनों ही उनके दूधिया जिस्म पर मस्त लग रही थी.

मैं तो सिर्फ देखता ही रह गया।


भाभी ने कहा- क्या देख रहे हो देवर जी?

मैंने कहा- भाभी, आपका शरीर तो चाची को भी दूर बिठा रहा है. आपके सामने तो चाची भी पानी ना मांगे!


यह सुन कर भाभी शर्म से लाल हो गयी और मैंने आगे बढ़ कर उनको फिर से गले लगा लिया.


और जब हम दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे से टकराये तो मैं आपको बता नहीं सकता कि मुझे कितना आनंद आया.

बड़ी गांड वाली दूधवाली भाभी की चुदाई - Big ass milkmaid sister-in-law fucking

 बड़ी गांड वाली दूधवाली भाभी की चुदाई


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


मेरी उम्र 30 साल हो गयी है लेकिन शादी अभी नहीं हुई है.


हरियाणा में जाटों में एक बात है कि नौकरी नहीं, तो छोकरी नहीं.

मेरे घर वाले मेरी शादी के लिए कहीं जुगाड़ भिड़ाने की कोशिश कर रहे हैं.


मुझे भाभी और 45 साल तक की औरत चोदना बहुत पसंद है.

क्योंकि लड़की चुदने में बहुत नखरे करती है और भाभी बहुत मजा देती है.


हुआ यूं कि हमारी भैंस ने दूध देना बंद कर दिया था क्योंकि भैंस के ब्याने (भैस के बच्चा देने) का समय नजदीक आ रहा था.


पापा ने हमारे घर से थोड़ी दूर के एक घर से 2 किलो दूध लगवा लिया था.


मैं उन्हें जानता हूँ लेकिन उनसे कोई ज्यादा बोलचाल नहीं थी.

बस यह पता था कि वे मेरे भाई लगते हैं.


उनके परिवार के बारे में बता दूँ कि उनके घर में 4 सदस्य हैं.

भाई, भाभी और उनके दो बच्चे … जो अपने मामा के घर दिल्ली में रह कर पढ़ते हैं.


आजकल भाई और भाभी ही गांव में रहते हैं.

वे खेती करते हैं और 2 भैंस रखे हुए हैं.


भाई की उम्र 40 साल के करीब है और भाभी 36 साल की.

अपनी उम्र भाभी ने ही बतायी थी.

भाभी का मैं कोई नाम नहीं रखूंगा, बस भाभी नाम से ही लिखूंगा.

वे वैसे तो बहुत गोरी हैं लेकिन फिगर के मामले बहुत अच्छी नहीं हैं.


उनकी चूचियां छोटी छोटी हैं. पेट थोड़ा निकला हुआ है, हां गांड मस्त है.


मैं रोज शाम को दूध लेने जाता था.

भाई कभी कभी ही घर पर मिलते थे तो राम राम हो जाती थी और मैं उनसे हाल-चाल पूछ लेता था.


भाभी के साथ अच्छे से बात होती थी.

उनके पति घर में होते तो भाभी मुझसे बात नहीं करती थीं.


मैं बस भाभी की गांड देखता रहता था, उनके चूतड़ बहुत चौड़े हैं.

भाभी जब झुक कर दूध डालतीं, तो जी करता कि इनकी गांड में लंड डाल दूँ!


पर डर लगता था क्योंकि उनकी आवाज थोड़ी मोटी थी.

कहीं ये कुछ बोल भी दें तो आस पास तक पता चल जाएगा कि भाभी का काम उठ रहा है.


मैं भाभी को पटाने की कोशिश करने लगा.

भाभी जब भी मुझे बर्तन में दूध डाल कर पकड़ातीं तो मैं उनका हाथ दबा देता.


कुछ दिन तक तो वे कुछ नहीं बोलीं.

फिर उन्होंने मुझसे बात करना बंद कर दी, तो मैं समझ गया.


मैं भी चुपचाप दूध डलवा कर ले आता.

फिर कुछ दिन बाद वे अपने आप ही बात करने लगीं.


तो मैंने सोच लिया कि आर या पार करना है. पहला मौका मिलते ही अपनी बात कह देना चाहिए.

भाभी ने हां कही, तो ठीक … ना कही तो आगे से देखना भी ठीक नहीं.


तो एक दिन जैसे ही भाभी ने मुझे दूध दिया, मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा- भाभी, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं.

एक बार तो उन्होंने मेरी तरफ देखा, फिर बोलीं- हाथ छोड़ दे … तन्नै शर्म आव है … खबरदार है ज आज के बाद ऐसी हरकत कर दी त!


मैं कुछ नहीं बोला और नजर नीचे करके घर आ गया.

फिर मैं दूध लेने नहीं गया, पापा ही लेकर आने लगे.

लगभग दस दिन बाद पापा को बाहर जाना पड़ गया तो मुझे दूध लेने जाना पड़ गया.

मैं गया.


वहां भाभी ही थीं.

तो मैं वहां बर्तन रखकर नीची नजर करके चुपचाप खड़ा हो गया.


जैसे ही दूध लेकर जाने लगा तो भाभी बोलीं- के बात ह … आना ही छोड़ दिया?

मैं कुछ नहीं बोला.


भाभी बोलीं- तू त घना बढ़िया लाग है. मने अपना नम्बर दे जा … फेर बात करूंगी टाईम लागते ही!

मैं यह सुनकर खुश हो गया और उनका नम्बर पूछ कर कॉल कर दी.


फिर आगे बढ़ कर भाभी के गाल को चूम लिया.


भाभी बोलीं- कती शर्म बेच खायी के …. जा तू इब!

मैं फिर घर आ गया.


रात को भाभी का फोन आया, भाभी बोलीं- तनै मेरे में के बढ़िया लागया … जो तने मैं बढ़िया लागी?

मैं बोला- भाभी तेरी गांड.


भाभी हप्प कहकर हंसने लगीं.

मैं बोला- भाभी तने बांहों में लेन का कसुता जी करे है.


भाभी बोलीं- रुक जा तू … गांव का माहौल है … ज किसे न पता चल गया तो बहुत बेज्जती हो जाएगी!

मैं बोला- भाभी, बस आप किसी को बताना मत … चाहे कोई कितनी प्यारी तेरी दोस्त क्यों ना हो बस!


भाभी बोलीं- डर लाग रहा है, पर तू बढ़िया भी बहुत लाग है. देखी जागी तू कल दिन में आ जाना. तेरा भाई त पानी लावगा खेत में!

मैंने कहा- तुम फोन कर देना.


भाभी बोलीं- ठीक है इब सो जा.

फिर मैंने भी ‘ठीक है.’ कहकर फोन रख दिया.


भाभी की गांड को सोचकर मुठ मार ली और सो गया.

सुबह से भाभी के फोन का इन्तजार करने लगा.


दिन में 11 बजे के करीब फोन आया कि आजा जल्दी, थोड़ा सा टाईम है.

मैंने ओके कहा और उनके घर की तरफ चल पड़ा.


वहा पहुंच कर दांए बांए देखकर भाभी के घर में घुस गया.

भाभी कमरे में झाड़ू लगा रही थीं.


मैं चुपके से कमरे में घुसा, तो भाभी की गांड मेरी तरफ थी.

मैंने बस पीछे से भाभी को पकड़ लिया.


भाभी एक बार तो डर गईं, फिर मुझे देख कर बोलीं- रूक, गेट बंद करके आती हूँ.


मेरा तो लंड फटने को था.

भाभी के गेट बंद करके कमरे आते ही मैंने उन्हें बांहों में भर लिया और उनके होंठों को चूमने लगा.


भाभी भी पूरा साथ दे रही थीं.

मेरा तो बस जी कर रहा था कि होंठों को खा जाऊं.


मैंने उनका थोड़ा होंठ काट भी लिया.


भाभी बोलीं- पागल सै के .. जे मत कर!

मैंने भाभी से कहा- गलती हो गई.


फिर भाभी ने मेरी ओर देखा तो भाभी की आंखों में प्यार दिख रहा था.

भाभी और मैं बेड पर आ गए और एक दूसरे को चूमने लगे.


मैं कपड़ों के ऊपर से ही भाभी की चूची को हल्का काट देता.


फिर मैंने एक एक करके भाभी के और अपने सारे कपड़े उतार दिए.

भाभी की चूचियों को बारी बारी से पीने लगा.

भाभी सीई ईईई करने लगीं.

चूचियों के बाद मैं उनके होंठ चूसने लगा.

भाभी की चूत पर छोटे छोटे बाल थे. चूत चाटना मुझे बहुत पसन्द है, तो मैं भाभी को चूमते चूमते नीचे हो गया.


अब मेरी जीभ भाभी की चूत के पास पहुंच गई.

भाभी ने लम्बी सांस ली तो मैंने भाभी की ओर देखा.

वे मेरी ओर ही देख रही थीं.

शायद वे यही कह रही थीं कि रूक क्यों गए!


मैंने धीरे से चूत के पास जीभ लगायी तो भाभी ने ‘सीई ईईई आआह’ की आवाज निकाली.


अब मैं उनकी चूत को चाटने लगा.

कभी मैं चूत के अन्दर जीभ डाल देता तो कभी उनके दाने को चूसने लगता.


अब भाभी अपनी चूत को उचकाने लगी थीं.

इसका मतलब साफ था कि भाभी अब झड़ने को थीं.


मैं जीभ को तेज तेज चलाने लगा.


तभी भाभी ने अचानक से अपना पानी छोड़ दिया.

उनका गर्म गर्म पानी मुझे मजा देने लगा और उनके पानी से मेरा मुँह भर गया.


मैंने सारा पानी पी लिया और भाभी के ऊपर आकर उनके होंठों को चूसने लगा.

वे भी अपनी चूत के पानी का स्वाद चखने लगीं.


हम दोनों मस्ती में प्यार कर रहे थे.

बिग एस्स वाली भाभी वापस चुदासी हो गईं.


अब मेरा लंड भी पूरे उफान पर था.

मैं भाभी की चूचियों को फिर से पीने लगा.


अब भाभी फिर से गर्म होने लगीं और विलेज सेक्स की कहने लगीं, तो मैं भाभी के ऊपर आ गया.

मैंने अपने लंड को चूत के ऊपर लगा दिया और हल्का सा दबाव डालने लगा, जिससे मेरा लंड धीरे-धीरे अन्दर जाने लगा.


भाभी आह आह करने लगीं.

उन्हें काफी दिनों बाद लंड का मजा मिल रहा था भाई जी ने शायद उन्हें चोदना छोड़ दिया था.


अब मैं भाभी की चूत में लंड को अन्दर बाहर करने लगा.


थोड़ी देर में मैं बेड से नीचे आ गया और भाभी की टागें खींच कर बेड के किनारे ले आया.

अब मैं भाभी की दोनों टागों को अपने कंधों पर रखकर चोदने लगा.


मैं भाभी को चोदते चोदते बीच में कभी रुक जाता, तो भाभी आंखें खोल कर देखने लगतीं कि चूत की सर्विसिंग बंद क्यों हुई … और उसी वक्त मैं फिर से एक तगड़े झटके में पूरा लंड अन्दर तक घुसा देता.

उस पर भाभी की आह निकल जाती और वे बोल देतीं- आह मारेगा के मने!


मैं हंस देता और उनके एक चूचे को दबा कर मींज देता व साथ ही उनकी चूत की चुदाई चालू कर देता.


भाभी अपने जिस्म को थिरकाती हुई बोल उठतीं- आहहह आआआ … मजा आ रहा है और तेज कर … पूरा बाड़ दे रै … आहहह बाड़ दे आआह आईई.

मैं उन्हें अब और तेजी से चोदने लगा था.


तभी भाभी ने अपनी चूत से पानी की गर्म गर्म की पिचकारी छोड़ना शुरू कर दिया.


कुछ ही पलों में भाभी एकदम से निढाल हो गईं और वे शांत हो गईं.

अब तो उनको मेरे हर झटके में दर्द होने लगा था.


कुछ देर बाद जब उनसे सहा नहीं गया तो वे बोलीं- बस कर … इब मारेगा कै … दर्द होन लाग रहा है!

मैं बोला- बस थोड़ी देर ले ले भाभी … तू ऐसा कर भाभी कि घोड़ी बन जा बस म्हारा पाणी निकल जाण दे.


भाभी बोलीं- मने घना दर्द हो रेआ सै … पर ठीक सै … तू काण लै आपना पाणी … आह.

तब भाभी घोड़ी बन गईं और उनकी चौड़ी गांड देख कर मेरा दिल बाग बाग हो उठा.

उनकी इसी चौड़ी चकरी गांड का ही तो मैं दीवाना था.


भाभी की मटकती गांड देख कर मेरा लंड और जोश में आ गया.

मैंने पीछे से भाभी की चूत में लंड डाल दिया और उनकी गांड को सहला कर अपना लंड चूत की जड़ तक ठांस दिया.


भाभी आह आह करने लगीं.

मैंने उनकी पीठ पर चढ़ कर अपने हाथ आगे बढ़ाए और भाभी की दोनों चूचियां पकड़ लीं.


मेरे हाथों को मानो पकड़ मिल गई थी तो मैं उनकी चूत में स्पीड से धक्के देते हुए चोदने लगा.

थोड़ी ही देर में मेरे लंड ने भी अपनी गर्मी उगल दी. मेरे लंड से बहुत ज्यादा पानी निकला था.


लौड़े से पानी निकलने के थोड़ी देर तक तो मैं ऐसा ही पड़ा रहा और उनकी दोनों चूचियों को हाथ से मींजता रहा.

उसके बाद मैं लंड निकाल कर अलग हुआ और बेड पर लेट गया.


भाभी भी पेट के बल औंधी ही मेरे बाजू में गिर गईं.

मैंने करवट लेकर भाभी का माथा चूम लिया.


भाभी पास में रखी तौलिए से अपनी चूत को पौंछने लगीं.


वे बोलीं- कहां त सीखा इतना कुछ?

मैं बोला- नंगी फिल्मों से.


भाभी बोलीं- सच में बहुत मजा आया … तू बस ऐसा ही प्यार देता रहिये, एक किलो रोज का दूध मेरी तरफ से तेरे लिए.

मैं हँसने लगा.


भाभी बोलीं- अब जा, तेरा भाई कभी भी आ जावगा.

मैंने भाई की याद आते ही झट से उठ कर अपने कपड़े पहने और भाभी के होंठ चूम कर घर की तरफ निकल गया.

दोस्तो, अब तो मौका मिलते ही मैं भाभी को चोद लेता हूँ. अब तक आठ बारी चोद चुका हूँ.


भाभी की गांड मारने का बड़ा जी कर रहा है.

पर वे अपनी गांड के लिए मुझसे राजी नहीं हो रही हैं.

जिस दिन भाभी की गांड मार लूँगा, उसी दिन आपको भाभी की गंड चुदाई की कहानी आपको सुनाऊंगा.

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