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झांट साफ़ करवा चूत चुदाई - shaved pubic hair and pussy fucking
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नमस्ते दोस्तों, आज काफी समय बाद मुझे अपनी सेक्स कहानी लिखने का फिर से मन हुआ.
अब कुछ ऐसा हो गया है कि मुझे अपनी सेक्स लिखने का टाइम ही नहीं मिलता है. मगर इसका मतलब ये कतई नहीं है कि मुझे सेक्स की भूख कम हो गयी है. बल्कि अब तो इसका उल्टा हो गया है. मुझे अपने यार से चुदवाने का मन बहुत ज्यादा करने लगा है.
मैं सोचती हूँ कि जितना टाइम कहानी लिखने में लगाऊंगी, उतने में तो मैं दो राउंड चुत में लंड के ही करवा लूं.
उस रात मेरे ब्वॉयफ्रेंड अनु ने पहली बार मेरी गांड मारी थी, मुझे काफी दर्द हुआ था. गांड मराने के बाद जब मैं सो कर उठी, तो मैंने देखा कि मेरी प्यारी सी गांड फूल कर लाल हो गयी थी.
हम दोनों रात में नंगे ही सो गए थे. तो सुबह मैंने देख लिया वरना पता ही नहीं लगता कि क्या बैंड बजा था रात को मेरी गांड का.
मैं जैसे तैसे उठ कर वॉशरूम गयी और गरम पानी से नहा ली. तब जाकर मुझे थोड़ा सा आराम मिला.
उसके बाद मैंने अनु को जाकर उठाया. अपने कपड़े पहने और ब्रेकफास्ट का ऑर्डर दे दिया. कुछ देर में अनु भी बाथरूम से आ गया और हम दोनों ने साथ में ब्रेकफास्ट किया.
फिर हम दोनों रेडी होकर घूमने निकलने वाले थे.
तभी होटल के मैनेजर ने हमारे कमरे की घंटी बजाई. मैंने उसे अन्दर आने का कहा.
वो अन्दर आया और बोला- आपके हनीमून की पहली रात अच्छी रही होगी.
अनु ने उससे इतनी अच्छी व्यवस्था देने के लिए थैंक्स बोला और वो जाने के लिए घूम गया.
फिर हम दोनों आगे बढ़े, वो मैनेजर मेरी चाल देख रहा था. क्योंकि मेरी गांड का दर्द मुझे ठीक से चलने भी नहीं दे रहा था.
वो मैनेजर कुछ दबी हुई मुस्कान के साथ मेरी गांड की तरफ देखता हुआ जाने लगा.
मैंने अनु को बोला- देखो, वो कैसे मुझे देख रहा है.
इस पर अनु हंस कर बोला- उसने भी अपनी वाइफ की ऐसे ही ली होगी … वो उसी को याद करके हंस रहा होगा.
ये कह कर अनु हंसने लगा.
मुझसे चलते नहीं बन रहा था, तो मैंने अनु के साथ जाने से मना कर दिया और मैं होटल में ही रुक गयी.
अनु बोले- ओके, तुम इधर ही आराम करो, मैं मार्केट तक जा रहा हूँ. मुझे कुछ सामान लाना है.
मैं रूम में वापस आ गयी और अनु मार्केट चले गए.
मैं फिर वॉशरूम में जाकर बाथटब में गरम पानी भर कर बैठ गई और अपनी गांड की सिकाई करने लगी.
लगभग एक घंटे बाद अनु कमरे में वापस आ गए. उनके हाथ में बैग था.
अनु कमरे में अन्दर आते ही बोले- जो कल करना चाह रही थी, अब करो. मैं रेडी हूँ.
मुझे अनु की बात समझ में नहीं आई कि कल क्या करना था. तभी अनु ने बैग ओपन किया. उसमें रेज़र, ट्रिमर, कैंची और लाल रंग की ब्रा और पैंटी थी.
मैंने पूछा- कल तो आपने मना कर दिया था कि रेज़र नहीं है?
तब अनु बोले कि हां इसी लिए तो अभी मार्केट से लाया हूँ. ब्रा ओर पैंटी पहले ले ली थी, ये कार में रह गई थी.
वो बोले- लो तुम चेंज कर लो, फिर काम स्टार्ट करते हैं.
मैं वहीं नंगी हुई और ब्रा पैंटी पहन ली.
क्या बताऊं दोस्तो … क्या मस्त ब्रा थी. ये लाल रंग की ट्रांसपेरेंट जाली वाली ब्रा थी. जैसे सुहागरात के लिए लड़कियां खरीदती हैं. ये ठीक वैसी ही थी.
मैंने उसको पहन कर देखा तो सामने अनु ने अपने लंड पर रूमाल बांधे हुए खुद को नंगा कर लिया था.
मैं बोला- ये क्या?
वो बोले- आज इसकी सुहागरात है … इसलिए शरमा रहा है.
ये कह कर अनु हंसने लगे. मुझे भी हंसी आ गई.
एक तो कमरे का सीन बहुत मस्त था ऊपर से अनु की ये बातें मुझे मस्त किये दे रही थीं.
फिर अनु बोले- हिमानी, बाल कटवाने के लिए रेडी हो?
मैं सोचने लगी कि यहां सेक्स के लिए आई हूँ … या बाल कटवाने के लिए. फिर मैंने अनु से ये पूछ ही लिया.
अनु बोले- दोनों का मज़ा दूंगा.
अब मैं नई पैंटी ब्रा में अनु के सामने खड़ी हो गई थी. मेरे बाल कंधे तक थे.
अनु ने मुझे चेयर पर बिठाया और बोले- मैडम कैसा हेयर कट करवाना है?
मैंने कहा- जो आपको पसन्द हो.
अनु बोले- ठीक है … अब देखो अपनी हीनू को कैसा मस्त हेयर कट देता हूँ.
मैंने ओके कहा.
तो बोले- शॉर्ट चलेगा?
मैं बोली- पहले एक बार बॉयकट किया था, तब से मम्मी बॉयकट के लिए ही बोल रही हैं. लेकिन मैं ही नहीं करवा रही थी. आपसे बोलने में मुझे शर्म आ रही थी कि वो ही वाला हेयर कट कर दो जो पहले किया था.
वो बोले- आज उससे भी ज्यादा सेक्सी हेयर कट करूंगा.
बस वो मेरे बालों में कंघी करने लगे. उनके लंड पर रूमाल अभी भी वैसे ही बंधा था और लंड सीधा ऊपर को मुँह उठाए हुए खड़ा था.
उसके बाद अनु ने कैंची से बाल सैट किए … और पीछे से, साइड से, वो बाल काटने लगे. मेरे बाल मेरी ब्रा पर गिर रहे थे.
मैंने पूछा- आप कौन सा कट कर रहे हैं … ये तो बता दो?
फिर अनु बोले- शॉर्ट बॉब विद शेप एंड अंडर कट.
मुझे अनु की बात समझ ही नहीं आई.
मगर मुझे उन पर विश्वास था कि जो भी अनु करेंगे, अच्छा ही करेंगे.
कुछ देर कैंची चलाने के बाद अनु ने मेरी गर्दन को नीचे कर दी और ट्रिमर से कान तक के बाल हटा दिए. अब मैं भी सोच में पढ़ गयी कि कहीं मुझे गंजी तो नहीं कर रहे हैं.
मैंने अनु को टोका. तो वो बोले- आराम से बैठो हिमानी … जब पूरा हो जाएगा, तो देख लेना.
मैंने आंख बंद करके अपने प्यार से अपने बाल कटवाती रही.
दस मिनट बाद मेरी गर्दन पर उस्तरा लगा कर अनु ने बालों को साफ़ कर दिया और बोले- अब शीशे में देख कर बताओ कि हेयर कट कैसा हुआ.
मैंने आंखें खोलीं और सामने लगे शीशे में खुद को निहारा. मैं हैरान थी … झूठ नहीं बोलूंगी … लेकिन इस हेयर कट में मैं और ज्यादा सेक्सी लग रही थी.
मैंने पलट कर अनु को किस किया और उसे थैंक्स बोला.
वो बोले- अभी काम पूरा नहीं हुआ … आराम से बैठी मेरी जान.
मैं बैठ गई. अनु ने मेरी बाहें उठा कर मेरी बगलों के बाल भी साफ़ किए. फिर पैंटी उतार कर मेरी मुन्नी को चिकना कर दिया. वो भी दो बार क्रीम लगा कर चुत पर रेजर फेरा. मेरी तो चुत बह उठी.
फिर अनु बोले- अब तुम मेरे रॉकेट को भी साफ़ कर दो.
मैंने कहा- जी बिल्कुल!
मैंने अनु को लेटा दिया और उनके रॉकेट से खड़े लंड से रूमाल हटा दिया.
रूमाल हटाते ही मैं भौचक्की रह गई. अनु के लंड पर लिखा था- थैंक्स हीनू लव यू.
मैंने झुक कर अनु के लंड पर एक किस किया … फिर क्रीम लगाई.
मैं पहली बार लंड से झांटें साफ कर रही थी तो क्रीम यहां वहां सारे में फ़ैल गयी थी.
फिर अनु ने मुझे रेज़र दिया और बोले- आराम से करो.
मैंने बोला- जिस रेजर से मेरी शेव की है, मुझे वो वाला ही रेज़र दो, उसी से करूंगी.
वो बोले- वो उस्तरा होता है, रिस्की रहेगा … तुम मेरा रॉकेट कट कर दोगी.
लेकिन मैंने कहा- नहीं मुझे उसी से ही करना है.
तब मनु ने अपने हाथ में मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड की शेव करवाई.
मैंने बोला- एक बार मैं खुद करूगी.
वो नहीं माने और बोले- पहले मैं सिखा दूंगा, तब करना. अभी नहीं.
कुछ देर में लंड की सफाई हो गई और मैं और अनु दोनों वॉशरूम में चले गए. उधर अच्छी तरह से हम दोनों साफ़ हुए और कमरे में नंगे ही आ गए. मेरी मुन्नी और उनका रॉकेट दोनों चमक रहे थे.
फिर मैं अनु की गोद में बैठ गयी और किस होना शुरू हो गया. फिर काफी देर तक अनु मेरे मम्मों को ऐसे पीते रहे, जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी मां का दूध पिता है.
मुझे अनु को अपनी चूचियां पिलाने में बहुत मज़ा आ रहा था.
मैं गरमा गई थी तो बोली- अनु यार अब डाल भी दो … बहुत देर हो गयी.
वो बोले- आज मुझे कुछ अलग स्टाइल से चुदाई करना है.
मैंने ओके कहते हुए उनसे कहा कि जैसे भी चोदना हो जल्दी से चोदो. मेरी चुत में चींटियां रेंग रही हैं
अनु हंस पड़े.
उसके बाद अनु ने कहा- तुम टॉप पहन लो और कमरे की खिड़की खोल दो.
मैंने टॉप उठाया और खिड़की खोल कर बेड के पास आ गई.
अनु बोले- वहीं खिड़की के पास खड़ी हो जाओ … और बाहर का नजारा एंजाय करो.
मैं बोली- पागल हो गए हो क्या?
वो बोले- करो ना … मज़ा आएगा.
मैंने टॉप डाला और खिड़की के पास खड़ी हो गयी. वो नीचे बैठ गए और मेरी चुत में मुँह लगा आकर उसको चूसने लगे थे.
मेरी आह निकल गई. मैं पैरों को चौड़ा किए खिड़की से बाहर देख रही थी और अपने होंठ को दांतों से दबा कर चुत चुसाई का मजा ले रही थी. सच में अनु ने मुझे पागल ही बना दिया था.
अनु थोड़ी देर बाद चेयर पर बैठ गए और बोले- हीनू, मेरे रॉकेट पर बैठ कर इसे अन्दर ले लो.
मैं धीरे से अनु के खड़े लंड पर चुत रखते हुए बैठने लगी … लेकिन मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
वो बोले- रुकना नहीं है … एक बार में ही अन्दर लेना है मेरी रानी.
मैंने बड़ी मुश्किल से आधा लंड लिया.
तभी अनु ने मेरे कंधे पकड़ कर दबा दिए और पूरा लंड मेरी मुन्नी में जा घुसा.
वहीं खड़की पर मैं अपने यार का लंड चुत में लेकर बैठ गई. कोई दो मिनट बाद अनु ने मुझे वैसे ही उठाया और सोफे पर कुतिया बनाते हुए झुका दिया.
अब अनु ने अपने मोटे लंड से मेरी चुत का बैंड बजाना स्टार्ट कर दिया. इस कहकर में मैं ये भूल ही गयी थी कि अनु ने लंड पर कंडोम नहीं लगाया है.
मैंने बोला- अनु ये क्या किया? बिना कंडोम के शुरू हो गए?
वो बोले- सॉरी यार मुझे भी याद नहीं रहा.
फिर वो बोले- कोई बात नहीं जान, आईपिल ले लेना … अब जो हो गया है, ठीक हुआ है … तुम अभी बस लंड के मज़े लो.
उस टाइम मुझे पहली बार फील हुआ कि बिना कंडोम के कैसा गरम सा महसूस होता है. चुत में नंगे लंड का वो मज़ा अलग ही था.
फिर अनु ने तेज़ तेज़ चोदते हुए मुझे बेहद मजा देना शुरू कर दिया. वो और तेजी से लंड पेलते रहे और 5 मिनट में ही अपना रस मेरी चुत में निकाल दिया.
सच बोलूं, तो उस दिन फर्स्ट टाइम लगा था यही रियल सेक्स होता है. चुत को वीर्य से नहाना एक ऐसा मजा था जिसे भुला पाना मेरे वश में नहीं था. शायद उस दिन मैंने सोच लिया था कि अब बिना कंडोम के ही चुदूंगी.
अनु झड़ने के बाद ऐसे ही मेरे ऊपर ढेर होते हुए झुक गए और अपने लंड का सारा माल मेरी चुत में चला जाने दिया.
मुझे डर भी था और मज़ा भी आ रहा था.
अनु बोले- दवा ले लेना यार, कुछ नहीं होगा.
फिर हम थोड़ी देर नंगे ही लेट गए. बीस मिनट बाद फिर से उनका मूड बन गया. वो बोले- हिमानी एक राउंड पीछे वाले में भी लेने दो.
गांड मराने का मन तो मेरा भी था. लेकिन मैंने कहा- नहीं यार … दर्द हो रहा है.
वो थोड़ा सा नाराज़ हो गए और जिद करने लगे.
तब मैंने हां बोल दिया और कहा- यार आराम से करना … कल से अभी तक मेरी गांड सूजी हुई है.
फिर मैंने अनु का लंड साफ़ किया और उसको चूसने लगी. मुझे लंड चूसने में मज़ा आ रहा था. क्योंकि अभी उस पर कोई बाल नहीं थे.
मैंने दो मिनट में ही उनका लंड चूस कर टाइट कर दिया और डॉगी सी झुक गयी.
मैंने गांड हिलाते हुए कहा- लो मेरी पीछे की दुकान खुली है … मार लो.
अनु बोले- ऐसे नहीं … आज मैं कुछ अलग तरह से गांड मारूंगा.
मनु ने मुझे दीवार की ओर मुँह करके खड़ा कर दिया और मेरी एक टांग चेयर पर रखकर मेरी गांड को थोड़ा सा ऊपर किया और उंगली से मेरी गांड में क्रीम लगाना स्टार्ट कर दिया.
मेरी गांड में मुझे मज़ा भी आ रहा था और डर भी लग रहा था. लेकिन शादी के बाद भी ये सब होना है और अब भी सब हो रहा है, सो मैंने सोचा कि जो होगा देखा जाएगा.
अनु ने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाया और दबाव देते हुए अन्दर डालने लगे. उन्होंने मुझे पूरी ताक़त से पकड़ा हुआ था. मुझे गांड में परपराहट होने लगी थी. धीरे धीरे लंड का टोपा मेरी गांड में फंस गया और लंड अन्दर घुसता ही जा रहा था.
मैं अपने दांतों को भींचे हुए लंड अन्दर लेते हुए खुद को दिलासा दे रही थी. आज दर्द कम हो रहा था … मगर दर्द फिर भी था.
यूं ही पेलते पेलते अनु का पूरा लंड मेरी गांड में सैट हो गया. मुझे दर्द तो हुआ लेकिन कल वाला नहीं था. अब अनु ने मेरी गांड मारना स्टार्ट कर दिया. उन्होंने लंड को गांड में आगे पीछे करना शुरू किया, लेकिन लंड टाइट जा रहा था.
दस बारह मिनट तक शॉट लगाने के बाद अनु ने मेरी गांड में पूरा माल निकाल दिया. आज मुझे बहुत मज़ा आया था. मैं खुश थी कि मेरी पीछे वाली दुकान भी चल निकली थी.
फिर अनु ने मेरी गांड के बाल भी साफ़ किए और हम दोनों लेट कर सो गए. शाम को हम दोनों वापस देहरादून आ गए.
ये गांड मरवाने वाली ट्रिप मैं कभी भी नहीं भूल पाऊंगी.
कुछ टाइम बाद अनु की मम्मी ने मेरे मम्मी पापा से बात की और हमारी शादी पक्की कर दी.
इसके बाद दोस्तो, आगे क्या हुआ, मैं आपको लिख कर बताऊंगी. आप सब अपना ख्याल रखना.
आपकी सेक्स कहानी वाली हिमानी
पति से गांड मरवाने का सुख - The pleasure of getting ass fucked by husband
पति से गांड मरवाने का सुख - The pleasure of getting ass fucked by husband
मेरा नाम प्रतिभा है. मैं सोलापुर की रहने वाली हूँ. आज मैं आप सभी के सामने मेरी गांड चुदाई की घटना लेकर हाजिर हुई हूँ. यह चुदाई की कहानी मेरे पति और मेरे बीच की है. मैं किसी भी तरह की झूठी कहानी लिखना नहीं चाहती थी इसलिए मैंने अपने पति के साथ अपनी सच्ची चुदाई की कहानी लिखना ठीक समझा.
हमारी शादी हुए 18 साल पूरे हो गए हैं, फिर भी हम दोनों हर रोज चुदाई करते हैं. मेरे मासिक के दिनों को छोड़ कर, ऐसा एक दिन भी नहीं निकलता, जिस दिन हम दोनों ने चुदाई नहीं की हो. मेरे पति, जिनका नाम प्रवीण है, मुझे नई नई पोजिशनों में काफी देर तक चोदते हैं, जो मुझे बहुत पसंद है. मेरे पति की खासियत है कि जब तक वो नहीं चाहते, तब तक उनका वीर्य लंड से बाहर नहीं आता. इसलिए मेरी चुत पति से चुदने के लिए हमेशा तैयार रहती है.
मेरे मोटे मोटे चूतड़ों के बीच कसी हुई मेरी गांड और मेरी फूली हुई चुत मेरे पति के लिए सबसे पसंदीदा जगहें हैं. साथ ही मेरे बड़े बड़े मम्मे मेरे पति को बहुत ही ज्यादा पसंद हैं.
चूत को हर तरह से बजाने के बाद एक बार मेरे पति को मेरी गांड की चुदाई करनी थी, लेकिन उस वक्त मेरी गांड का उद्घाटन नहीं हुआ था, जिस वजह से मेरी गांड एकदम टाईट थी. मेरे पति का लंड काफी मोटा है. जब उन्होंने अपने मोटे लंड से मेरी गांड मारने की इच्छा जाहिर की, तो मैं एकदम से डर गई. क्योंकि मुझे मालूम था कि मेरे पति का मोटा मूसल लंड मेरी गांड में आसानी से नहीं घुसेगा, ये मूसल मेरी गांड को फाड़ देगा.
तब भी मैंने अपने पति को मना नहीं किया. क्योंकि मुझे मालूम था कि मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते हैं और वे अपनी जवान बीवी को किसी भी तरह का दर्द नहीं होने देंगे.
उन्होंने मुझे चूम कर याद दिलाते हुए कहा- क्या तुमको मुझ पर भरोसा नहीं है.
उनकी इस बात से मैं चुप हो गई और उनको गांड मारने के लिए हामी भर दी.
पति ने मेरी गांड में उंगली करना शुरू की, जिससे मुझे शुरूआती दर्द हुआ, पर तेल से सनी उंगली ने मेरी गांड में अन्दर तक जाकर मुझे गुदगुदी करना शुरू कर दी. मुझे भी ठीक लगा कि चलो धीरे धीरे लंड जाने लायक भी रास्ता हो ही जाएगी.
इसके बाद मेरे पति ने दो बार मेरी गांड में अपना लंड घुसना चाहा. उनके प्रयासों से मेरी गांड में उनके लंड का सुपारा घुस भी गया था, लेकिन जब मुझे बहुत दर्द हुआ तो मेरे पति को मेरी गांड से लंड निकालना पड़ा था.
उन्होंने उस दिन मेरे दर्द को समझते हुए अपने लंड से मेरी चुत का भी मजा नहीं ले पाया था. मुझे बड़ा बुरा लग रहा था कि मैं अपने पति को गांड चोदने का मौका नहीं दे पा रही थी.
फिर मुझे अच्छी तरह से याद है कि पिछले साल नवम्बर की वो 4 तारीख थी. उस दिन हमारी बेटी कॉलेज गई थी. घर में केवल हम पति पत्नी दोनों ही थे. हमेशा की तरह मैं अपनी साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठा कर, कमर का ऊपर वाला हिस्सा मतलब मेरा पेट मम्मे और सर बेड पर रख कर लेट गई. मैंने अपना दायां पैर फर्श पर रखा था और बायां पैर घुटनों में मोड़कर बेड पर रख दिया था.
मैं आपको बता देती हूँ कि हम दोनों पति पत्नी दिन में कभी भी किसी भी समय मूड बन जाने पर शौक से चुदाई कर लेते हैं, इसलिए मैं अक्सर चड्डी पहनती ही नहीं हूँ. पता नहीं कब मेरी जान का चुदाई का मूड बन जाए और वे मुझ पर चढ़ने को आतुर हो जाएं. या फिर पता नहीं कब मेरा मूड बन जाए और मैं अपने पति के सामने अपना छेद खोल कर औंधी हो जाऊं. इसलिए चड्डी पहनना मुझे फालतू का काम लगता था.
इस तरह कभी भी मूड बन जाने पर अपने पति से चुदवाने में मुझे बहुत मजा आता था. उस दिन मेरा मूड बना हुआ था और मैं चुदाई की पोजीशन में पड़ी थी. मैंने पति को आवाज देकर अन्दर आने को कहा, मेरे पति अन्दर आकर देखा मेरी गोरी गांड और दोनों कूल्हों के बीच से मेरी चुत चुदने के लिए तैयार थी.
ये देखकर मेरे पति का लंड तन कर सात इंच का हो गया. मेरे पति ने पीछे से आकर अपनी पेंट और चड्डी एक साथ निकाल कर अपना लंड मेरी चुत की दरार पर रख दिया. वे अपने हाथ को मेरी गांड पर हल्का हल्का फेरने लगे.
उनके कामुक और मादक स्पर्श से मेरी चुत में हलचल मच गई. मैंने अपने पति को लंड चुत में घुसाने के लिए कहा तो उन्होंने अपना लंड थूक से गीला कर के मेरी गांड को दोनों हाथों से फैलाकर अपना मोटा लंड मेरी चुत में घुसाने के लिए चुत के दरार पर रख दिया. लंड चूत की फांकों में जैसे ही सैट हुआ तो मेरे पति ने एक हल्का सा धक्का मार दिया. इस झटके से मेरे पति का आधा लंड मेरे चिकनी चुत में सट से घुस गया. तभी दूसरा करार धक्का मारकर मेरे पति ने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चुत में घुसेड़ दिया.
मेरे पति का लंड चुत में घुसते ही मेरे मुँह से हल्की चीख निकल गई. उनका आज ये धक्का जरा जोर से लग गया था. यह तो अच्छा हुआ कि वहां मेरी चीख सुनने वाला कोई नहीं था. मेरे पति आज पता नहीं किस जोश में थे. उन्होंने मेरी चीख को नजरअंदाज किया और वे मुझे इसी पोज में दस मिनट तक चोदते रहे.
मुझे चुत में लंड के झटके तो मस्त लग रहे थे. मेरी चुत की खुजली भी मिट रही थी, लेकिन मेरे इस पोजीशन में ताबड़तोड़ लंड के झटकों से मेरे पैर में दर्द होने लगा था. मैंने अपने पति से कहा- यार, पैर में दर्द हो रहा है … जरा अपनी शंटिंग रोको.
इस बात को सुनकर मेरे प्यारे पति ने अपना लंड मेरी चुत से निकाल दिया.
मैंने राहत की सांस ली और अब मैं बेड के किनारे अपनी गोरी गांड रख कर सीधे लेट गई. मैं दोनों पैर उठाकर घुटनों के जोड़ से फैलाए. पैरों को सहारा देने के लिए पीछे से हाथ डालकर मैंने अपने पैर फैलाकर रख लिए.
अब मेरे पति अपना लम्बा और मोटा लंड हाथ से हिलाते हुए मेरी चुत में डालने के लिए करीब को आये, तो मैंने उनको मेरी चुत में लंड डालने के लिए मना कर दिया.
मेरे पति ने मुझसे सवालिया शक्ल से पूछा- क्या हुआ भोसड़ी वाली.. साली चुत तो खोल कर रखी हो.. और चुत में लंड ना डालने की कह रही हो?
मैंने कहा- चुत चोदना बाद में … अब तुम आज अपना लंड मेरी गांड में डालकर चोदो.
पति ने कहा- तुम्हें दर्द होगा.
मैंने कहा- दर्द सह लूँगी … लेकिन तुम्हारे लंड से आज गांड चुदवा कर ही मानूंगी.
फिर क्या था … पति ने वैसलीन की डिब्बी उठाई और थोड़ी सी वैसलीन लेकर उंगली के जरिये मेरी गांड में डालकर उंगली अन्दर बाहर करने लगे, जिससे मेरी गांड खुल गई और मेरे पति की उंगली मेरी गांड में आसानी से अन्दर बाहर होने लगी. आज मैंने भी अपनी पूरी गांड ढीली कर दी थी, जिससे गांड का छेद खुल गया था.
अब मेरे पति ने थोड़ी सी वैसलीन को अपने लंड के सुपारे के सामने लगा दिया. इसके बाद उन्होंने अपने दांए हाथ से मेरी गांड को फैलाकर अपना लंड बांए हाथ में पकड़ कर गांड के छेद पर सैट कर लिया. फिर लंड को हाथ में ही पकड़ कर वे मेरी गांड में घुसाने लगे.
आहिस्ता आहिस्ता पति के लंड का सुपारा मेरी गांड घुसता जा रहा था. वैसे मुझे थोड़ा सा दर्द हो रहा था.. लेकिन मैं दांत पर दांत दबाए हुए गांड मरवाने पर तुली हुई थी.
कुछ ही देर की मशक्कत से मेरे पति के लंड का सुपारा मेरी गांड में घुस गया था. उधर मेरे पति बिना रूके अपने लंड को मेरी गांड में सरकाते जा रहे थे. वे उंगली में वैसलीन लेकर लंड के बाहर रहने वाले में हिस्से में लगाते जा रहे थे. वैसलीन की चिकनाहट की वजह से उनका लंड मेरी गांड में फिसलता हुआ आसानी से घुसता जा रहा था. मेरी गांड की दीवारें इस वक्त मेरी हिम्मत के कारण शांत होकर दर्द सहन कर रही थीं.
अब तक मेरे पति का आधा लंड मेरे गांड में घुस गया था. लंड को और अन्दर न घुसेड़ कर इस बार मेरे पति अपना लंड बाहर निकालने लगे. तो मेरी गांड में गुदगुदी सी होने लगी. मेरे पति ने अपना लंड सुपारे तक बाहर निकाला और फिर गांड में घुसाने लगे. अब ये खेल मुझे अच्छा लगने लगा था. मेरे पति अपना आधा लंड ही मेरी गांड में अन्दर बाहर करके मेरी गांड चोदने लगे.
अब मुझे भी मजा आने लगा. मैं दर्द को भूलकर मदमस्त होकर गांड चुदवा रही थी. आप विश्वास नहीं करोगे कि आधे घंटे से ज्यादा देर तक मैं अपनी गांड चुदवाती रही थी.
फिर मेरे पति ने अपना लंड मेरी गांड में से निकाल लिया और मुझे बेड के किनारे मेंढक जैसा बना दिया, जिससे मेरी गांड बेड के किनारे बाहर को आ गयी. मेरे पति ने फिर से थोड़ी सी वैसलीन अपने उंगली पे लेकर मेरी गांड में डाल दी और थोड़ी वैसलीन अपने लंड के सुपारे के सामने लगा दी. फिर उन्होंने वही क्रिया दुहराई. अपने बांए हाथ से मेरी गांड को थोड़ा फैलाया, दांए हाथ में अपना लंड पकड़कर मेरी गांड के छेद पर सैट किया और लंड को मेरे गांड में घुसाने लगे. मेरी गांड वैसलीन से बहुत ही चिकनी हो गई थी और अब गांड का छेद भी लंड की मोटाई के मुताबिक़ खुल गया था. इस बार मेरे पति का लंड आसानी से मेरे गांड में घुस रहा था. आधा लंड मेरी गांड में एकदम से घुस गया था. लेकिन मेरे पति बिना रूके लंड को मेरे गांड में घुसाते रहे.
कुछ ही देर की कोशिशों के बाद मेरे प्यारे पति का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था. सच में मुझे अपनी गांड में अपने पति का लंड लेकर बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुँह से लगातार आवाजें आ रही थीं.
मेरे पति अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को फैलाकर अपना मोटा लंड मेरी गांड में डालकर धकापेल चोद रहे थे. मैं अपनी गांड चुदवाने का भरपूर आनन्द उठा रही थी. पति देव अपना पूरा लंड मेरी गांड में डालकर फिर से पूरा लंड बाहर निकाल लेते थे, सिर्फ सुपारा ही मेरी गांड में रहता था. मुझे दर्द की जगह आज जन्नत का मजा मिल रहा था.
करीब पन्द्रह मिनट तक मेरी गांड चोदने के बाद गांड से लंड निकालकर उन्होंने मेरी कुलबुलाती चुत में घुसेड़ दिया. पांच मिनट तक मेरी चुत चोदने के बाद फिर से अपना लंड मेरी गांड में डालकर मेरी गांड मारने लगे.
मैं तो जन्नत में सैर कर रही थी.
पूरे एक घंटे तक मेरे पति मेरी गांड और चुत अदल बदल कर चोदते रहे. मेरे पति का बहुत दिनों का सपना था कि वे मेरी चुत और गांड बदल बदल कर चोदें. आज उनका वो सपना पूरा हो गया था. मेरे पति आज बहुत खुश थे. मेरी गांड चोदने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी. मैंने पहले भी बताया था कि मेरे पति की खासियत है कि जब तक वो नहीं चाहते, तब तक उनका वीर्य लंड से बाहर नहीं आता.
मेरे पति से अपनी गांड चुदवाकर मैं बहुत खुश थी. ऐसा लग रहा था कि मैंने पहले ही पति से अपनी गांड क्यों नहीं चुदवाई. अब तो मैं मेरे प्यारे पति को अपनी गांड हफ्ते में दो बार चोदने के लिए ऑफर करती हूं.
मेरी गांड चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी जरूर बताना और प्लीज़ मुझसे कोई उम्मीद न करना. मेरे लिए मेरा पति का लंड ही काफी है.
मेरी बीबी चुदी रंडी के जैसे-1 - My wife fucked like a whore-1
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नमस्कार मित्रों, चुदाई की सच्ची कहानियों में गहरी रुचि रखने वाले मेरे प्रिय पाठको, आइए मैं आपको अपनी स्वीट वाइफ नीना की चुदाई की एक ऐसी घटना बताता हूं जिसके बाद वह मेरी धर्मपत्नी से अधर्मपत्नी बन गई. इसके बाद तो उसकी सेक्स लाइफ में हमेशा-हमेशा के लिए बंसती बयार बहने लगी.
सचमुच उस दिन का मौसम बड़ा ही नशीला था. वास्तव में बीती रात से ही नीना की चूत में बहुत हलचल हो रही थी. अगले दिन दोपहर में मुझे एक हफ्ते के लिए शहर से बाहर जाना था. ऐसे में मैं पूरे हफ्ते भर का कोटा पूरा कर लेने के मूड में था. उधर आखिर नीना भी मुझसे कम नहीं थी.
बहरहाल इधर बच्चे गहरी नींद में सोए और हम दोनों चुदाई में जुट गए. दो राउंड चुदाई के बाद हम दोनों के मन को थोड़ी राहत मिली. इस बीच हम दोनों ने किचन में जाकर जाकर नंगे ही रेडीमेड फूड के साथ चाय बनाई और पेट भर लिया. मगर हम दोनों को अभी भी अपने सेक्स की भूख मिटानी बाकी थी.
उन दिनों हमारे किचन की खिड़की से आंगन का वह भाग दिखता था, जहां से होकर किराएदार प्रशांत का परिवार टॉयलेट के लिए जाया करता थे. इधर किचन में काम करते हुए रह-रहकर मैं नीना की चूचियां भी दबा रहा था, तो कभी निप्पल रगड़ देता, जिससे वह मस्ती में आकर सिसकारी भर उठती. तभी मुझे प्रशांत टॉयलेट की ओर जाता हुआ दिखा.
शायद उसे हमारी चुदाई की मस्ती का एहसास हो चुका था. तभी तो वह ठिठक-ठिठक कर चल रहा था. इधर नीना भी कुछ ज्यादा ही ऊंची आवाज में सिसकारी मारने लगी. शायद उस दिन वह प्रशांत को सुना रही थी, अपनी नीना रानी का असली राज खुलने के बाद मुझे इस बात का एहसास हुआ.
थोड़ी देर बाद ही प्रशांत की बीवी माधुरी आंगन में आकर तार से अपने घर के कपड़े समेटने लगी. मगर कद छोटा होने से उसे उछलना पड़ रहा था. इस उछलकूद में माधुरी से ज्यादा उसकी चूचियां ही उछल रही थीं. यह सीन देखकर मेरा लंड बुरी तरह फनफना उठा.
ऐसे में भला मेरी बीवी नीना कहां शांत बैठने वाली थी. सारा काम छोड़कर उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और वो लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसते हुए अप-डाउन करने लगी. साथ ही आंगन के सीन का हम दोनों मजा भी लूट रहे थे.
इस बीच प्रशांत टॉयलेट से वापस आया, तो माधुरी की मदद करने को आगे की ओर बढ़ा. मगर न जाने क्या हुआ, पैर उठाकर कपड़े उतारते वक्त प्रशांत का टावेल सरक कर नीचे जा गिरा. साथ ही प्रशांत का मोटा तगड़ा लंड हवा में लहरा गया. दरअसल प्रशांत ने ऊपर बनियान और नीचे एक टॉवेल लपेट रखा था.
यह सीन देखकर माधुरी हंसने लगी तो प्रशांत अपने आप को संभालने की कोशिश करने लगा. फिर भी काफी समय लग गया.
इधर मेरी नीना डार्लिंग को तो जैसे सांप सूंघ गया हो. हम भी आपस में ठहाके लगाने लग गए. इस ठहाके की भनक माधुरी और प्रशांत को भी लग चुकी थी और वे दोनों खिलखिलाते हुए भाग गए. इस बीच हम दोनों भी अपने बेडरूम में आ चुके थे, मगर नीना के दिमाग में प्रशांत के लौड़े का नशा छा गया, जो साइज में मेरे लंड का करीब डेढ़ गुना रहा होगा.
पाठको, आपको राज की एक बात बता दूं. तब तक अपनी नीना को मैं वनमैन लेडी समझता था. मगर इतना जरूर था कि मेरे साथ चुदाई करते वक्त वह पूरी तरह से आजाद ख्याल की घरेलू चुदक्कड़ औरत जैसी ही पेश आती रही, जिसे मैं महज उसकी मस्ती मानता था. जबकि नीना शादी से पहले ही सौ फीसदी खेली-खाई बिंदास चुदैल लड़की रही, इस बात की जानकारी मुझे बाद में हुई.
दरअसल नीना के दिमाग में किराएदार प्रशांत को भगाने की तमन्ना बीते सात-आठ महीने से चल रही थी मगर संकोच और मौका न मिल पाने की वजह से वह उसे लाइन पर नहीं ले सकी थी. इस बीच अचानक प्रशांत के भुतहा लंड का दीदार होने के बाद नीना के दिल में उससे चुदने की ख्वाहिश और भी अधिक तेज हो गई.
अगले राउंड की चुदाई में नीना ने कई बार मुझसे कहा- हाय, बेचारी दुबली पतली माधुरी कैसे चुदती होगी प्रशांत के गधे जैसे लंड से? उसकी तो जान ही निकल जाती होगी.
यह लाइन बार-बार सुनने के बाद मुझे अंत में कहना ही पड़ा- तुम क्यों परेशान हो रही हो. तुमको तो उससे नहीं चुदना है न? प्रशांत से चुदवाना हो, तो बताओ, साले का लंड पकड़कर तुम्हारी चूत में डाल दूं.
इस बात से नीना बनावटी गुस्से में आकर मुझ पर भड़क उठी. थोड़ी देर बाद जब शांत हुई तो मेरे लंड से खेलने लगी. मगर हकीकत में वह तो प्रशांत का लंड खाने के लिए बेचैन हो चुकी थी.
मुझे हफ्ते भर में वापस आना था लेकिन काम लटक जाने से पूरे महीने भर वापस नहीं आ सका. मेरी बेचारी पत्नी नीना मेरा कब तक इंतजार करती? जाहिर है, नीना की चूत में जबरदस्त बेचैनी होने लगी.
मार्च का रोमांटिक गुलाबी महीना और उन दिनों बेमौसम की बरसात तो उसे कुछ अधिक ही तड़पा रही थी. मगर वह बेचारी मजबूर थी. आखिर उसके सामने कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं था.
इस दौरान अपने किचन की खिड़की से ही प्रशांत के साथ उसकी आंखें अक्सर दो-चार हो जाया करती थीं. लिहाजा मेरी धर्म?पत्नी नीना अपनी नशीली आंखों से प्रशांत पर वार कर दिया करती. उन दिनों तो नीना की आंखें बार-बार उधर ही उठ जाती थीं, जो हर बार चोदने के लिए प्रशांत को खुला आमंत्रण दे रही थीं.
प्रशांत के 36 साल कड़ियल जिस्म को 30 साल की जवान खूबसूरत मदमस्त उसकी मकान मालकिन कभी अपनी 34 इंच साइज वाली चूचियां दिखाती, तो कभी अधनंगी टांगें, कभी बिना ब्रा-पैंटी के ही लगभग पारदर्शी मैक्सी में चूचियों के निप्पल से लेकर क्लीन शेव्ड चूत का नजारा पेश कर देती. ऐसे में वह भी बेचारा खुद पर कब तक काबू रख पाता? यह उसके लिए बड़ी समस्या बन गई थी.
आखिरकार वह दिन आ ही गया, जब सती-सावित्री की तरह पेश आने वाली मेरी बिंदास चुदैल ‘धर्मपत्नी’ की मुराद पूरी हो गई. सभी बच्चे स्कूल कब के स्कूल जा चुके थे. प्रशांत की कामकाजी बीवी माधुरी भी अपने आफिस में थी. पीछे आंगन या टॉयलेट की ओर कोई आने वाला था नहीं, शायद यही सोचकर प्रशांत ने घर की ओर अपनी बाइक मोड़ दी.
दोपहर के करीब ग्यारह बजे होंगे. रिमझिम बरसात के बीच नीना घर के काम समेटने में जुटी हुई थी. बच्चों को दो बजे के बाद स्कूल से वापस आना था. लिहाजा वाशिंग मशीन ऑन करके थोड़े कपड़ों की सफाई करने लगी. एक तरह से नीना आधा भीग चुकी थी.
तब तक प्रशांत की बाइक आंगन में रुकी और भाग कर वह अपने फ्लैट में गया. थोड़ी ही देर में कपड़े निकालकर वह केवल बनियान और वी-कट वाले अंडरवियर में होकर पाइप से बाइक की धुलाई करने लगा. इधर अभी तक काम करते-करते मेरी जोरू नीना बरामदे और आंगन के बीच आ-जा रही थी.
प्रशांत को इस तरह देखकर नीना को अब होश कहां रहा? उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा. आंगन में पहले से रखी हुई प्लास्टिक चेयर पर नीना कुछ इस तरह पसर गई, जैसे वह गंभीर रूप से बीमार हो.
प्रशांत तो जैसे उससे बात करने का बहाना ही ढूंढ रहा था, उसने तपाक से पूछा- क्या हुआ मैडम? तबियत तो ठीक है न?
इस पर नीना ने बड़े ही नाटकीय अंदाज में दिल धक-धक करने की समस्या साझा की, तो प्रशांत ने उसके करीब आते हुए मदद करने का ऑफर दिया.
इस बात से बिदकती हुई नीना ने कहा- जिसे मदद करनी होती है, वह खुद आगे आ जाता है, पूछता नहीं है.
प्रशांत तो यही सुनना चाह रहा था. अब वह नीना से महज 5-7 फीट की दूरी पर आ चुका था. वी-कट अंडर वियर से करीब-करीब बाहर झांकते हुए प्रशांत के तगड़े लौड़े पर नीना की नजर अटक गई, मगर आंखों को बंद कर वह एक आंख की कनखी से देख रही थी. साथ ही नीना ऊपर-नीचे सांस छोड़ने लगी जिससे चूचियां भी ज्वार-भाटा की तरह हरकत करने लगीं. प्रशांत तब तक नीना के नखरे का सच समझ गया.
लिहाजा वह बिना देर किए साहस जुटाकर सीधे मुद्दे पर आ गया, बोला- मैडम, मैं भी तो देखूं.. आपका दिल कितना तेज धड़क रहा है?
इतना कहते हुए उसने नीना की बाईं चूची पर अपना हाथ रख दिया और मसाज करने के अंदाज में हथेली गोल-गोल फेरने लगा. फिर एक झटके में उसने ब्रा के भीतर हाथ डाल दिया.
दो बच्चों की मां और इतनी कड़क चूचियां, प्रशांत ने तो सपने में भी नहीं सोचा था. तब तक बारिश की बूंदें तगड़ी होने लगीं. दोनों को आपस में खुलने भर की ही तो देर थी, नीना की चुदाई का प्लेटफार्म उसके सामने था. ऐसे में अब वह प्रशांत की बांहों में लटक जाने को आतुर हो गई. इस बात का एहसास होते ही देर न करते हुए प्रशांत ने उसे अपनी बांहों में लपेट लिया.
अगले कदम पर थोड़ी देर बाद प्रशांत ने नीना को एक झटके से अपनी गोद में लेकर खुशी के मारे आंगन के कई चक्कर काट डाले. जब जमीन पर उतारा, तो दहकते हुए अंगारे जैसे नीना के होंठों पर पप्पी की झड़ी लगा दी. हालांकि उसका साथ देने से नीना भी पीछे नहीं हटी.
फिर तो प्रशांत ने नीना के होंठों का जो रसपान किया, वह या तो मैं करता हूं या फिर हिंदी सिनेमा के परदे पर सीरियल किसर इमरान हाशमी.
दोनों को ही एक दूसरे की चाहत बड़े लंबे समय से थी जो अब जाकर पूरी हुई. भीगी-भीगी इस मस्त समा में प्रशांत का नौ इंच लंबा कड़क लंड भला वी-कट अंडरवियर में कहां छिप पाता. ऐसे में उसका लंड भी मेरी चुदक्कड़ बीवी नीना के हाथों का खिलौना बन चुका था.
अब बारी प्रशांत की थी. नीना की चूत में अपना लंड डालने से पहले वह बहुत कुछ कर लेना चाह रहा था, मगर हमारे बेडरूम में, जहां नीना हर रोज मेरे साथ चुदाई किया करती थी. लिहाजा आंखों के इशारे से परमिशन लेकर प्रशांत ने नीना को गोद में उठाकर सीधे चुदाई के बेड पर पटक दिया.
बारिश की बड़ी-बड़ी बूंदों से दोनों ही भीग चुके थे. फिर तो बदन सुखाना सचमुच जरूरी हो गया था. इस छोटी सी बात को भी प्रशांत ने खास अंदाज में लिया और सामने पड़ी टावेल उठा कर नीना के चेहरे और बालों पर कुछ ऐसे फेरा, जैसे वह उसे रानी बनाकर चोदना चाह रहा हो.
इसके बाद प्रशांत ने नीना के बदन से मैक्सी को निकाल फेंका. फिर ऊपर से नीचे तक नीना के बदन पर टावेल घुमा दिया ताकि गीलापन न रहे. इसके साथ ही उसे नीना के चेहरे पर कातिल मुस्कान दिखाई पड़ी तो उसने एक झटके में ब्रा का हुक खोल दिया, जिससे दोनों आजाद कबूतर हवा में उड़ने लगे.
अब भला प्रशांत कहां रूकने वाला था. उधर नीना की शर्महया भी रफू चक्कर हो चुकी थी क्योंकि उसे तो कब से इस घड़ी का बेसब्री के साथ इंतजार था. इसके बाद उसका हाथ हरकत में आया तो वह प्रशांत का अंडरवियर सरकाने लगी.
इशारा समझकर प्रशांत ने अपना अंडरवियर ही नहीं बल्कि बनियान को भी निकाल फेंका. साथ ही वह नीना की बार्इं चूची पीने लगा और अपनी चुटकी से चूची का निप्पल मसलने लगा.
इस बीच नीना की सिसकारियां प्रशांत को बहुत उत्तेजित कर रही थीं. नीना अपनी चूचियां अब तक पूरी तरह से प्रशांत के हवाले कर चुकी थी. दूसरी ओर प्रशांत के गदहलंड को हाथ में लेकर मसले जा रही थी और साथ-साथ अपनी करामाती उंगलियां लंड के टोपे पर फिसलाते हुए करतब करने लगी.
नीना के मुताबिक इस समय दोनों ही एक दूसरे की जवानी का एक-एक बूंद रस निचोड़कर पी जाना चाह रहे थे. कई महीने की अपनी तड़प मिटा लेने को वे दोनों ही बेकरार हो रहे थे. यह सेक्सी अंदाज बेहद मजेदार बन गया क्योंकि तब तक मूसलाधार बारिश होने लगी.
इधर अपने बेडरूम में मेरी बीवी किराएदार प्रशांत के मूसल लंड से चुदने की जबरदस्त तैयारी कर चुकी थी. इस बारिश में किसी के आने-जाने को कोई खतरा नहीं था इसलिए फ्लैट का दरवाजा भी खुला ही रह गया था जिसकी कोई चिंता नहीं रही यानि चुदाई का खुल्लमखुल्ला खेल चरम पर आ गया था.
चूत चुदवाते हुए साड़ी में करवाई प्रेस - While getting her pussy fucked, she got her saree pressed
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हाई फ्रेंड्स! कैसे हैं आप सब ? मैं आपकी सेक्स डॉल प्रतिभा. चुदाई की कहानियां आपको बहुत पसंद है, मैं इस बात को भली भांति जानती हूँ. इसलिये मैं अपनी एक और नई मस्तराम कहानी लेकर आपके सामने आई हूँ, शायद आपको पसंद आ जाए.
हम दोनों पति पत्नी चुदाई के बहुत शौकीन हैं. हम दोनों को जब भी मौका मिलता है, हम चुदाई करने लग जाते हैं. यूँ समझ लीजिए कि हम दोनों तो बस चुदाई करने के लिये मौके की तलाश में ही रहते हैं. हम दोनों पति-पत्नी कहीं भी, कभी भी, चुदाई कर लेते हैं. मैं तो घर के कुछ काम भी पति से चुदवाते हुए ही करती हूँ.
मैं घर के काम ऐसे करती हूँ कि मेरे पति अपना लंड मेरे चुत में डालकर मेरी चुत आसानी से चोद सकें. हम दोनों को सच में इस तरह से चुदाई करने में बड़ा मजा आता है.
वो मई का महीना था, हम दोनों पति पत्नी को रिश्तेदार के घर शादी में जाना था. मैंने अपने पति को अल्मारी से कपड़े निकाल कर प्रेस करने के लिये दे दिये. मेरे पति टेबल पर कपड़े प्रेस करने लगे. मैंने भी खुद को पहनने के लिये साड़ी और ब्लाउज निकाला, उनको भी प्रेस करना जरूरी था.
मैं कपड़े प्रेस नहीं करती हूँ, क्योंकि मेरे हाथ से एक बार मेरी साड़ी जल गई थी. इसलिए मैंने अपने पति से कहा कि आप मेरी भी साड़ी प्रेस कर दो.
पति ने कहा कि मैं साड़ी तो प्रेस करके दूंगा, लेकिन उसके बदले में मुझे क्या मिलेगा?
मुझे मालूम था कि मेरे पति मुझसे मेरी चुत चोदने के लिये मांगेंगे; मैंने कहा- आपको क्या चाहिए?
मेरे पति ने कहा- जब तक मैं तुम्हारी साड़ी और ब्लाउज प्रेस करता हूँ, तब तक मैं तुम्हारी चुत भी साथ में चोदूँगा.
मुझे तो खुद भी तो यही चाहिए था, मैंने झट से हां कह दिया.
मेरे पति ने अपने कपड़े प्रेस करके हैंगर को लटका दिए. अब मेरे पति मेरे ब्लाउज प्रेस करने के लिए हुए, तो मैं उनके सामने अपने घुटनों के बल बैठ गई. मैंने उनका पैंट का हुक खोलकर पैंट और चड्डी को एक साथ नीचे पैरों में खिसका दिया. मेरे पति का मुरझाया हुआ लंड अब मेरे सामने था. पहले तो मैं अपने हाथों से अपने पति का लंड और नीचे झूलते अंडों को हाथों से सहलाने लगी. मेरा हाथ लगाते ही उनका लंड फनफनाने लगा. पति के लंड ने जल्द ही अपना पूरा आकार ले लिया. मैंने मेरे पति का लंड अपने मुँह में भर लिया और अपना मुँह आगे पीछे करके उनका लंड चूसने लगी. लंड चुसाई शुरू होते ही नीचे मेरी चुत भी गीली हो गई थी. मैं अपने पति का लंड पांच मिनट तक चूसती रही थी. मैंने पति का लंड चूसकर एकदम गीला कर दिया ताकि मेरे पति का लंड मेरी चुत में आसानी से घुस जाए.
मेरे ब्लाउज को प्रेस करके बाजू में रखकर अब मेरे पति ने मेरी साड़ी को प्रेस करने के लिए ले लिया.
मैं उठकर खड़ी हो गई. मैंने अपनी साड़ी और पेटीकोट एक साथ उठाकर अपनी फूल की डिजाइन वाली चड्डी को निकाल दिया और अपने पति की तरफ अपनी गोरी गांड करके आगे की तरफ झुक कर खड़ी हो गई.
मेरे पति ने इस्त्री को बाजू में रखकर अपने दोनों हाथ मेरे गांड पर रख दिए और मेरे चूतड़ों को प्यार से मसलते हुए हाथ फेरने लगे. फिर उन्होंने मेरे एक चूतड़ पर एक जोरदार चपत मार दी, जिससे मेरे मुँह ससे एक मीठी कराह निकल गई और मेरी गांड लाल हो गई.
अब मेरे पति ने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ फैलाकर पीछे से अपना तगड़ा लंड मेरी चुत में घुसाने लगे. मैंने हाथ बढ़ा कर अपने थूक से पति का लंड गीला कर दिया था, इसलिए उनका लंड मेरे चुत में आसानी से घुसने लगा.
पहले तो पति ने अपना आधा लंड धीरे-धीरे मेरे चुत में डाल दिया, फिर थोड़ा-सा रूक कर एक जोरदार झटका मारकर अपना पूरा लंड मेरी नाजुक कोमल गुलाबी चुत में जड़ तक घुसा दिया. मेरे पति का लंड सीधे मेरे बच्चेदानी से जाकर टकराया और मेरे मुँह से चीख़ निकल पड़ी.
अभी मैं इस हमले से खुद को संभाल पाती कि तभी मेरे पति ने अपना लंड मेरे चुत से बाहर निकालकर दूसरा हमला कर दिया. मेरी चीख़ फिर से निकल गई. मैं अपना मुँह बंद करने वाली ही थी कि पति ने फिर से अपना लंड मेरे चुत से बाहर निकालकर तीसरा झटका मार दिया. मैं फिर से जोर से चीखी. तीनों बार के झटकों में मेरे पति का लंड सीधे मेरी बच्चेदानी से जा टकराता था. इससे मेरी चुत पानी छोड़ दिया और मेरी चुत पूरी गीली हो गई थी.
चूत में पानी भर जाने से मेरे पति का लंड मेरी नाजुक कोमल गुलाबी चुत में आसानी से अन्दर बाहर होने लगा था. लेकिन अब मेरी तो हालत खराब ही हो गई थी.
अब मेरे पति मेरे दोनों चूतड़ छोड़क़र मेरी साड़ी प्रेस करने लगे और अपना लंड मेरे चुत में अन्दर बाहर करके मेरी चुत चोदने लगे. अब मुझे भी मजा आ रहा था, मैं भी अपनी गांड आगे पीछे करके अपने पति से चुदवाने लगी.
सच बताऊं दोस्तो, इस वक्त मैं तो जन्नत की सैर कर रही थी. मेरे पति अपने लंड से मेरी चुत सटासट चोद रहे थे. मेरे पति का लंड मेरी चुत में जिस मस्ती से अन्दर बाहर हो रहा था, उससे मेरी चुत से ‘पचपच.. खचपच.. खचापच..’ आवाज आ रही थी.
एक लय में मेरे पति अपना लंड मेरे चुत में अन्दर बाहर करे जा रहे थे. उनके हाथ मेरी साड़ी प्रेस करने में लगे थे और उनका कड़ियल लंड मेरी चुत का बाजा बजा रहा था. जल्द ही मेरी चुत से फिर से पानी बाहर निकलकर टपकने लगा था. मेरी चूत के पानी की मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी. कमरे का पूरा माहौल मदहोश कर देने वाला हो गया था.
मेरे पति बीच में साड़ी प्रेस करना छोड़क़र कर मेरे दोनों चूतड़ अपने दोनों हाथों से फैलाकर मेरी चुत चोदने लगते थे. जिससे मेरी बच्चेदानी तक लंड की चोट लगने लगती थी.
तभी अचानक से पति महोदय ने मेरी चुत चोदते चोदते अपना पूरा लंड मेरी चुत से सुपारे तक बाहर निकाला और फिर घचाक से मेरी चुत में अपना मूसल लंड अन्दर तक घुसेड़ दिया.
अभी मैं संभल भी नहीं पाई थी कि उन्होंने फिर से अपना लंड मेरी चुत से बाहर निकालकर फिर से मेरी चुत में जड़ तक डाल दिया. इस तरह से उन्होंने मुझे चौंकाते हुए पांच छह बार अपना लंड पूरा बाहर निकालकर फिर से मेरी चुत में पेल डाला.
आज न जाने क्या बात हो गई थी कि मेरे पति का लंड मेरी चुत के चिथड़े उड़ा रहा था. मैं भी मदहोशी में चुदवाते हुए बड़बड़ा रही थी.
‘आआहा चोदो.. मेरी चुत को ऐसे ही चोदो.. हां ऐसे ही.. आह.. अपना लंड मेरी चुत में जड़ तक डालो.. आह मेरी बच्चेदानी को कुचल डालो..’
आज अपने पति की धमाकेदार चुदाई से मैं तो मानो हवा में तैरने लगी थी. मेरे पति अब मेरे चूतड़ छोड़क़र मेरी साड़ी प्रेस करने लगे और साथ में अपना लंड मेरे चुत में स्लोली स्लोली अन्दर-बाहर करते हुए मेरी प्यारी चुत की चुदाई भी करने लगे.
उधर मेरी साड़ी भी प्रेस हो रही थी और इधर मेरे चुत की चुदाई भी हो रही थी. ऐसी चुत चुदाई में मुझे इतना मजा आया कि मेरी चुत ने दो बार पानी छोड़ दिया था. इसके बाद भी पति महोदय मेरी चूत का भोसड़ा बनाने में लगे हुए थे.
मेरी चुत से पानी बहकर मेरे नाभि की तरफ बाहर आकर, जहां चुत की दरार खत्म होती है, वहां पर बूंद बूंद टपकने लगा था.
मेरे पति न जाने आज किस मूड में थे कि वे मेरी चुत लगातार हचक कर चोदे जा रहे थे. वे बीच बीच में साड़ी भी प्रेस करते जा रहे थे.
वैसे मेरे पति मेरी चुत बड़े आराम से मजा लेते हुए चोदते हैं.. इस तरह से मेरी चुत की चुदाई करना मेरे पति को बहुत पसंद है. लेकिन आज तो उन्होंने गजब ही कर दिया था.
खैर मेरी हालत खराब हो चली थी, लेकिन तब भी मैं उनका पूरा साथ दे रही थी. मेरे पति मेरी चुत को बीस मिनट तक चोदते रहे. मैं भी जमाने से बेखबर होकर अपने पति से अपनी रसभरी चुत चुदवाती रही.
अब मेरी साड़ी प्रेस हो चुकी थी. मेरी चुत चोदते हुए मेरे पति ने साड़ी को ठीक से फोल्ड भी कर दिया. फिर पति ने कहा- लो तुम्हारी साड़ी और ब्लाउज प्रेस हो गई.
मैंने कहा- ठीक है.
करीब दसेक धक्के मार कर पति ने अपने लंड का लावा मेरी चूत में छोड़ दिया. पति के लंड के गरम लावे का मजा लेते हुए मैंने भी कुछ पल यूं ही रुक कर उनके लंड की सारी गर्मी खींच ली. इसके बाद मैंने अपनी गांड को हिलाया, तो मेरे पति ने अपना लंड मेरे चुत से बाहर निकाल दिया.
मैंने मुड़कर पति के लंड को देखा, तो मेरे पति का लंड मेरी चुत के पानी से पूरा लथपथ हो चुका था. मुझसे रहा नहीं गया, मैं झट से घुटनों के बल बैठ गई और अपने पति का लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.
आह क्या मस्त स्वाद था. मैं अपने पति का चूत रस से लिपटा हुआ लंड पूरा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी. कुछ ही देर में मैंने लंड को चूसकर साफ कर दिया.
अब मेरे पति मुझे उठाकर खड़ा कर दिया और गले से लगा लिया. मेरे नरम मुलायम होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगे. पांच मिनट तक होंठ चूसने के बाद हम दोनों अलग हो गए.
शादी में भी जाना था यार.
अब तो हम दोनों को आदत सी हो गयी है. मैं अपनी साड़ी या फिर ड्रेस पति को प्रेस करने को कहती हूं.. ताकि मेरे पति मुझे कुतिया बना कर मेरी चुत की चुदाई कर सकें.
प्यासी अन्तर्वासना की दुविधा-1 - Dilemma of thirsty lust-1
प्यासी अन्तर्वासना की दुविधा-1 - Dilemma of thirsty lust-1
हाई फ्रेंड्स! मेरा नाम सारिका है और मैं फिर से आप सबके समक्ष एक नई कहानी लेकर आई हूं. मैं आशा करती हूं कि मेरी इस कहानी को पढ़ कर मजा आप सभी को आएगा, क्योंकि ये कहानी भी पहले के जैसी आम जीवन की है मगर सबसे छुपी थी. आज इसे मैं आप सबसे साझा करने जा रही हूँ.
कहते हैं कि लोग जिस प्रवृति के होते हैं, उन्हें उन्हीं के जैसे लोग मिलते हैं या दोस्ती होती है. ये बात माइक, तारा और मुनीर के मिलन के बाद की है.
मेरी जेठानी अड़ियल तरह से मुझसे व्यवहार करने लगी थी और मैं भी कुछ नहीं कर सकती थी. क्योंकि न तो मुझे पता था कि वो ऐसा किस वजह से कर रही थी, न ही हमारे घर में कोई बड़ों से बहस करता था. मुझे अपनी गलती का एहसास था, उस वजह से मैं चुपचाप उनकी जली कटी बातें सुन लेती थी.
अब मुझे उस घर में रहना बिल्कुल पसंद नहीं था. तो इसी वजह से मैंने अपने पति से बात की कि कब तक सब साथ रहेंगे? हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं और हम सबके तरह साथ रहें, ये जरूरी नहीं है. अब जमाना बदल रहा है और बच्चों को अपनी अपनी एकांतता की आवश्यकता पड़ेगी.
पर बंटवारे की बात पति को हजम नहीं हुई और वे उल्टा मुझ पर क्रोध जताने लगे.
अब तक मेरे पति ने बहुत तरक्की कर ली थी, उन्होंने धनबाद में ही अपना व्यापार शुरू कर लिया था. खुद का ठेका ले लिया था, इस वजह से वो वहीं रहने लगे थे और 3-4 हफ्ते में आते और राशन पानी की व्यवस्था करके चले जाते. बड़े लड़के ने रोज दिन कालेज आने के झंझट से शहर में ही किराए पे कमरा लेकर रहना शुरू कर दिया और हर हफ्ते में आ जाता था. छोटे ने भी एक दिन तय कर लिया कि वो भी शहर में रहेगा. आखिर आज के बच्चों को कहां गाँव में रहने की इच्छा होती है. फिर पति ने उसकी भी व्यवस्था शहर में करा दी.
इस सबके बाद अब मैं अकेली रह गयी. दिन भर बहुत बेकार सा लगने लगा था. मैं ज्यादातर उस वयस्क साइट पर समय बिताने लगी. अब रात तो रात, दिन में भी कई दंपति मित्र मुझे अपनी संभोग क्रिया कैमरे पर दिखाने लगे. इस तरह मेरा मन व्याकुल होने लगा, पर दुविधा ये थी कि मैं अब यहां और जोखिम नहीं उठा सकती थी. पति कभी आते भी, तो संभोग में उनकी रूचि नकारात्मक थी. कभी मन भी हुआ तो न किसी तरह का खेल, न आलिंगन, न कुछ.. बस मेरी साड़ी उठायी, धक्के दिए और बस सो गए. मैं अधूरी प्यास अपनी समेटे सोने का प्रयास करती रह जाती. मेरी वासना की आग दिन ब दिन बढ़ती जाती और मेरे पास उपाय के नाम पर केवल हस्तमैथुन ही रह जाता.
एक रात मैंने पति से आखिरकार कह दिया- क्यों न आप अपनी कमजोरी के बारे में किसी डॉक्टर को दिखा लेते?
इस बात पर पति इतने क्रोधित हो गए और कहने लगे- इतने साल में इस उम्र में तुम्हें अब कमी दिख रही है, दो बच्चे क्या ऐसे ही हो गए?
उन्होंने मुझे उल्टा पुल्टा बहुत सुनाया.
फिर उस रात मेरी हर तरह की इच्छा ही खत्म हो गयी. अकेले मन नहीं लगता था और शारीरिक इच्छाएं परेशान करने लग गयी थी. इसी वजह से मैंने ठानी कि अब अपना मन कहीं और लगाना है.
मैंने पति से बात की कि मुझे भी अपने साथ धनबाद में रख लो. पति शुरू में तैयार नहीं हुए, फिर बहुत जिद करने पर वो राजी हो गए.
अपने कमरे में ताला लगा कर एक दिन मैं अपने पति के साथ नई जगह चली आयी. नया मकान देख दिल खुश हो गया. पति ने घर की लगभग सारी व्यवस्था कर ली थी. दो कमरे, दो शौचालय, एक हॉल, एक रसोईघर एक बालकनी.. सब था. गाँव से भी बहुत सारा सामान साथ ले आए थे, सब जमा लिया.
एक रात पतिदेव खाने के समय बताने लगे कि उन्होंने बच्चों के लिए सब व्यवस्था कर दी है. बाकी अगर सब सही रहा, तो पास के कॉलोनी में एक घर भी खरीद लेंगे. तब तक इस किराए के घर में रह लेते हैं.
मुझे उनकी योजना बहुत अच्छी लगी कि कुछ भी है, घर और परिवार के लिए इतना सोचते तो हैं. मेरे दिन अच्छे गुजरने लगे थे. पहले की भांति पति अब मेरी बात सुनते थे. केवल कमी शारीरिक संबंधों की थी, जो पति नहीं देते थे और न उन्हें कुछ ज्यादा रूचि थी. मैं दोबारा उनसे कुछ नहीं पूछना चाहती थी.
चूंकि हमारा समाज रूढ़िवादी है और एक समय के बाद कामक्रीड़ा को अपराध की तरह देखता है. मेरे पति भी उन्हीं में से एक थे, हालांकि उनकी कभी इच्छा हुई, तो मर्द होने के नाते संभोग करना अपना अधिकार समझते थे.
यह समाज की दोगली मनोवृत्ति है और मेरे पति में भी ये स्वाभाविक रूप से होना तय थी. पर मैं कुछ अलग हूँ.
पति के साथ इधर रहते हुए महीना भर होने को आया, तो अगल बगल एक दो औरतों के साथ जान पहचान भी हो गयी. पर वो सभी सामाजिक बंधनों में जीने वाली महिलाएं थीं. हाथ में महंगा समार्टफोन तो था, मगर गूगल, वॉट्सएप्प और यूट्यूब से आगे कोई बढ़ा ही नहीं.
मैं भी उनसे ज्यादा नहीं बातें करती थी क्योंकि जब कोई बात छिड़े, तो किसी न किसी की बुराई या बढ़ाई के अलावा कुछ नहीं था.
पति के होने की वजह से मैं ज्यादा वयस्क साइट पर नहीं जा पाती थी. मगर जब कभी मौका मिलता, तो खोल लेती. तो पुराने और नए मित्रों से ढेरों संदेश मिलते. किसी को उत्तर देती, किसी को नहीं.
अब मैंने सोच लिया था कि अब और कुछ नहीं करना है. इसी बीच पतिदेव ने रामगढ़ के पास भी कुछ ठेका ले लिया और हफ्ते में एक दो बार वहां जाने लगे. समय बीतने के साथ उनका काम बढ़ता गया, तो हफ्ते के 2 से 3 दिन उधर ही बिताने लगे.
जब वो नहीं होते, तो फिर मेरा मन उस साइट की ओर खिंच जाता. फिर क्या था मेरी जिज्ञासाएं फिर से बढ़ने लगीं.
इसी बीच एक दिन मैं नीचे दूध लाने गयी, तो देखा कि जिस दुकान से दूध लाती थी, वो बन्द थी. दूध तो लेना ही था, तो मैं बगल की दुकान में चली गयी. सामने देखा तो बहुत ही आकर्षक मर्द दुकान में बैठा था. लंबा, चौड़ा, गोरा सिर पर पगड़ी और चेहरे पर दाड़ी मूंछें थीं.
ये एक सरदार था, जिसकी उम्र मेरे ख्याल से 50 साल की होगी, पर वो हट्टा कट्टा और बहुत आकर्षक था.
मैंने उनसे दूध की थैली मांगी, तो शुरू में बिना मुझे देखे सरदारजी थैली लाने चले गए. पर जब वापस आए और मैंने पैसे दिए, तो उनकी नजर मेरी नजर से टकराई. तो वे मुझे देखते रह गए. एकटक मुझे देखने के बाद उन्होंने पैसे लौटाए और मैं वापस चली आयी. मेरे दिमाग में तो उस वक़्त कुछ नहीं था, पर वो इंसान मुझे केवल आकर्षक लगा था.
उस दिन तो कुछ खास अनुभव नहीं लगा, कुछ भी पर अगले दिन पता नहीं क्यों, मैं उसी की दुकान में चली गयी. पर आज भी मन में सब कुछ सामान्य था. पहले दिन की तरह कुछ नहीं लगा. उसने दूध दिया, मैंने लिया और चली आयी.
ऐसा ही लगभग 10-12 रोज हुआ. मैं रोज वहीं से दूध लेने लगी थी.
फिर एक दिन देखा कि दुकान पर वो आदमी नहीं था, उसकी जगह पर एक 38-40 साल की हष्ट-पुष्ट महिला बैठी थी. वो सलवार कमीज में एकदम चट-चट गोरी, सुडौल स्तन, गोल मांसल मोटे मोटे चूतड़, चूड़ीदार पाजामे में मोटी-मोटी जांघें थीं. वो बहुत आकर्षक लग रही थी. उसका गोल चेहरा, लंबी नाक, गुलाबी होंठ, ऐसा लग रहा था मानो कोई पहाड़ी कश्मीरी महिला हो, जिसे देख किसी भी मर्द का मन मचल उठे. आसानी से कोई उसकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता था.
मैंने उनसे दूध मांगा, फिर जब पैसे दिए तो मैंने 2000 का नोट दिया. उस महिला ने मुझे खुले पैसे देने को कहा, मैंने कहा कि खुके नहीं हैं.
फिर उसने मुझसे कहा कि आज उनके पति नहीं हैं और उनके पास भी 2000 के खुले नहीं हैं.
मैं बिना दूध लिए वापस जाने लगी.
तभी उसने मुझे आवाज दी और पूछा कि क्या आप यहीं रहती हैं?
मैंने उत्तर दिया- हां सामने वाली इमारत के तीसरे माले में रहती हूं.
उसने फिर मुझसे कहा- आप लगता है नई आयी हो यहां?
मैंने कहा- हां अभी कुछ ही दिन हुए यहां आए.. और अब यही रहेंगे.
उसने मुझसे कहा- अगर आप रोज दूध लेती हैं, तो ले जाइए बाद में पैसे दे देना.
इस प्रकार हमारी जान पहचान शुरू हुई और उसी शाम सब्जी लेने बाहर निकली तो लौटते समय उससे दोबारा बातचीत हुई. मैंने उससे बात करते हुए देखा कि ज्यादातर वो मोबाइल में ही व्यस्त रहती थी. खैर जो भी हो वो मुझे मोहल्ले की बाकी औरतों से थोड़ी अलग लगी. इसलिये उससे मेरी अच्छी बन रही थी.
अगले दिन फिर दूध लाने गयी, तो सरदार जी सामने थे. दूध के पैसे देते समय मैंने पिछला उधार भी ले लेने को कहा, तो हंसते हुए मुझसे मेरा परिचय लेने लग गए. इसी तरह रोज दिन में दोनों दंपत्ती से हल्की फुल्की बातें होने लगीं. उस महिला का काल्पनिक नाम प्रीति है, जबकी उसके पति का नाम सुखबीर है. प्रीति का मायका जम्मू है और सुखबीर यहीं झारखंड से है. मगर उसके पूर्वज पंजाब से थे. वो सिख रेजिमेंट रामगढ़ जिले में सिपाही था और अब रिटायर्ड होकर यहीं अपनी दुकान से जीवन यापन कर रहा था. दुकान छोटी मोटी नहीं थी बल्कि उसकी दुकान से और भी बड़े व्यापार जुड़े थे.
प्रीति से बात करते हुए पता चला कि वो 45 साल की है और उसकी 2 बेटियां हैं, उन दोनों का विवाह हो चुका था और अपने अपने ससुराल में हैं.
प्रीति की बात से यकीन नहीं हुआ कि वो इतनी उम्र की है. उसने आगे बताया कि उसकी शादी 19 साल में ही हो गयी थी और एक साल के बाद पहली लड़की हुई, फिर डेढ़ साल के बाद दूसरी लड़की हुई. उनकी इच्छा तो थी कि उन्हें कोई पुत्र प्राप्त हो, पर कम उम्र में माँ बनने से उसकी तबियत बिगड़ चुकी थी और वो कमजोर हो गयी थी. इसी वजह से निरंतर उसका गर्भपात होता रहा. पति वैसे भी फौज में था, तो मिलना भी कम होता था. फिर कुछ सालों के बाद उसे गर्भ ठहरा मगर उसकी तबियत इतनी बिगड़ गयी कि उसे गर्भपात करवाना पड़ा. डॉक्टर ने साफ कह दिया था कि अब प्रीति का शरीर अतिरिक्त गर्भ धारण के लिए सक्षम नहीं है. तब दोनों ने किसी भी बच्चे के लिए प्रयास करना छोड़ दिया और दोनों बेटियों पर ध्यान केंद्रित करने लगे. शुरूआती जीवन दोनों का संघर्षपूर्ण रहा.
मैंने ऊपर भी लिखा था कि कहा जाता है कि दो समान विचारों वाले लोग जल्दी घुल मिल जाते हैं. प्रीति के साथ मैं भी बहुत जल्द घुल मिल गयी थी. अब तो वो मेरे घर भी आने जाने लगी और हम दोनों घंटों बातें करते. उसने अपने जीवन के सारे उतार चढ़ाव मुझे बताने शुरू किए, तो मैंने भी अपने जीवन के सुख दुख उससे बांटने शुरू कर दिए.
महीने भर के बाद तो हम दोनों इतने ज्यादा खुल गए कि वो मुझे अपने फ़ोन के वाट्सअप पर दोहरे मतलब वाले चुटकुले, मजाकिया अश्लील तस्वीरें व अन्य कई वयस्क सामग्री दिखाने और साझा करने लगी. वो मुझे ये सब दिख खूब हंसती और तरह तरह से व्यंग्य करती.
एक दिन प्रीति ने मुझसे पूछा- क्या मैं बूढ़ी हो गयी हूँ?
मैंने उत्तर दिया- स्त्री और मर्द 50-50 साल तक बूढ़े नहीं होते, तुम अभी से क्यों खुद को बूढ़ी समझने लगी हो.
वो मेरी इस बात से खुश सी हुई.
मैंने उसकी प्रसंसा करते हुए कहा कि भले ही तुम्हारी उम्र 45 साल की है, पर अब भी तुम किसी 25-30 साल की महिला से अधिक सुंदर और आकर्षक दिखती हो.
अपनी प्रसंसा सुनकर वो एक तरफ तो खुश हुई, मगर उसके मन में कोई और भी बात थी, जो मुझे नहीं बता रही थी. उसका मन उदास लग रहा था.
मैंने उसे अपनी छोटी बहन सहेली बना करके उससे कहा- मन कोई बात है तो बात दे, शायद मैं कुछ सहायता कर सकूं.
और यदि सहायता न भी कर सकी, तो वो अपने मन की बात मुझसे कह कर खुद को हल्का महसूस कर सकती थी.
काफी देर सोच विचार करके उसने मुझसे पहले तो मुझसे सवाल करने शुरू कर दिए. उसने मुझसे मेरे और पति की शारीरिक संबंधों के बारे में पूछा.
मैं उसे कोई अपनी निजी जानकारी नहीं देना चाहती थी, सो मैंने कह दिया कि सब सही है. मगर उम्र के हिसाब से हम घर गृहस्थी और बच्चों पर ज्यादा ध्यान देते हैं.
तब उसने मुझसे पूछा कि क्या हम कभी रतिक्रिया नहीं करते?
मैंने कहा- हां करते हैं, पर बहुत कम करते हैं. क्योंकि न मुझे अब ज्यादा रूचि है और न पतिदेव को.
उसे कोई शंका न हो, इसलिए मैंने उससे कहा कि हमने अपने जीवन में बच्चे पैदा करने से लेकर आनन्द लेने तक सब कुछ कर लिया, हम दोनों को किसी भी चीज की कमी नहीं रही.
वो मेरी बातें सुनकर गहरी सोच में पड़ गयी.
तब मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
उसने मुझसे पूछा- क्या इस उम्र में संभोग, रतिक्रिया की कामना करना गलत है?
मैंने उसे उत्तर दिया- अगर कोई स्त्री पुरुष स्वेच्छा से शारीरिक आनन्द उठाना चाहते हैं, तो इसमें गलत क्या है. और ये गलत तब तक नहीं है, जब तक किसी की निजी जीवन में किसी प्रकार से कष्ट न पहुंचे.
मेरी बात सुनकर उसके भीतर एक आत्मविश्वास सा जागृत हो गया और वो भीतर से प्रसन्न हो गयी. उसने मुझसे फिर पूछा कि क्या स्त्री पुरुष इस उम्र में भी संभोग के आनन्द लेते हैं?
मैंने उससे कहा- जो अपनी इच्छा से जीवन का आनन्द लेना चाहते हैं, वो किसी भी तरह से जीवन का आनन्द उठाते हैं.
वो मुझसे अब ऐसे व्यवहार करने लगी, जैसे मैं उसकी शिक्षिका हूँ और वो मेरी शिष्या है.
अब मैंने उससे उसकी और उसके पति के बीच के संबंधों के बारे में पूछा. तब उसने खुल कर अपनी व्यथा बतानी शुरू कर दी. उसने बताया कि उनके शारीरिक संबंध तो अच्छे नहीं हैं.
मैंने उसका कारण पूछा, तो उसने कहा कि पता नहीं, क्या कारण है.
मैंने सोचा कि इतनी सुंदर और सभी को आकर्षित करने वाली महिला के साथ आखिर क्या वजह हो सकती है कि रिश्ते अच्छे नहीं हैं. मैं अपने अनुभव से कहूँ, तो जब कोई मर्द मुझे देख उत्साहित हो सकता है, उत्तेजित हो सकता है, कामुक हो सकता है और किसी भी हद को पार कर सकता है, तो फिर प्रीति जैसी महिला के लिए तो कोई भी मर्द मर तक सकता है.
मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे वो कितने अंतराल में संभोग करते हैं?
उसने मुझे बताया कि जब पति की इच्छा होती है तब.. और जब मेरी इच्छा होती है, तब वो बहाना बना कर सो जाते हैं.
मैं बस उसे सुन रही थी.
उसने फिर बताया कि उसे पहले की भांति अब आनन्द नहीं आता. वो केवल अपनी पति की इच्छा पूर्ति करती है.
मैंने थोड़ा सोचा और उससे आगे पूछा कि दोनों संभोग में क्या क्या और कैसे कैसे करते हैं.
इस पर पहले तो बहुत शरमाई, पर उसे लगा कि मैं कोई समाधान निकाल सकती हूं. उसने बताया कि जब पति की इच्छा होती है, तो उससे कहता है, फिर वो अपना पजामा उतार कर लेट जाती है और उसका पति संभोग कर शांत हो जाता है.
उसकी कहानी बिल्कुल मेरी तरह ही थी. पहले मैंने सोचा कि उसे भी सलाह दे दूँ कि किसी दूसरे मर्द से ये सुख प्राप्त करने का प्रयास कर ले. मगर मुझे फिर लगा कि कहीं उसे मेरा चरित्र अच्छा न लगे.
अब मैंने सोचा कि इसे कुछ ऐसा बताऊं कि दोनों पति पत्नी के संबंध अच्छे हो जाएं.
वो मेरी तरफ किसी समाधान की आशा की नजरों से देख रही थी.
मैंने उससे पूछा- क्या पहले भी ऐसे ही संभोग करते थे?
मैंने प्रीति की दुखती रग तो समझ ली थी, पर वो मुझसे इसका समाधान पाना चाहती थी.
मेरी सुहागरात की कहानी - story of my honeymoon
मेरी सुहागरात की कहानी - story of my honeymoon
हाई फ्रेंड्स! मैं राजस्थान के बीकानेर में एक छोटे से गाँव की रहने वाली हूँ. नाम है सरला और मेरी उम्र 38 साल है. मेरे परिवार में मेरे माता-पिता के अलावा मेरा एक छोटा भाई भी है.
मेरी शादी को 18 वर्ष बीत चुके हैं. मैं अपने पति और दो बेटियों के साथ पुणे में रहती हूँ. मेरे पति का नाम राहुल है. मेरे और मेरे पति के माता पिता (मेरे सास-ससुर) राजस्थान के एक गांव में रहते हैं. मेरा फीगर 36-30-36 का है.
मैं अपने पति के बारे में बता देती हूँ. वह एक एम.एन.सी. कम्पनी में काम करते हैं. उनकी कमाई काफी अच्छी है. घर की सारी ज़़रूरतें पूरी हो जाती हैं और बेटियों की पढ़ाई का खर्च निकलने के बाद भी हमारे पास पैसों की कमी नहीं होती है.
यह कहानी मेरी शादी वाली रात की है. अगर देसी शब्दों में कहें तो मैं अपनी सुहागरात की कहानी को आप सब के साथ शेयर करने जा रही हूँ. जब मेरी शादी हुई थी तो उस वक्त मेरे पति का शरीर काफी दुबला-पतला था. वह मुझसे एक साल के अंतर से ही बड़े हैं. यानि कि अब उनकी उम्र 39 साल की हो चुकी है.
जब मेरी शादी हुई थी तो मेरे पति काफी शर्मीले थे. जब मैं शादी करके पहली बार अपने पति के घर गई थी तो वहाँ पर मुझे काफी बड़ी फैमिली मिली थी. वहाँ पर मेरे सास-ससुर के अलावा मेरे जेठ और जेठानी भी थे. उस घर में मेरी एक ननद भी थी. उसका नाम विमला है. उस वक्त विमला की उम्र 30 साल के करीब रही होगी.
उस समय उसकी शादी को पांच साल हो चुके थे. वह भी काफी पैसे वाली है. वह अपने पति के साथ मुंबई में रहती है. घर में उसी का राज चलता है. वह देखने में भी काफी सुंदर औरत थी. उसका फीगर करीबन 36-30-38 का रहा होगा. जबकि मेरा फीगर 32-28-34 का था.
मेरी ननद की गांड बहुत ही बड़ी थी. वह बहुत ही सेक्सी थी.
शादी से पहले मेरा तो किसी भी लड़के के साथ चक्कर नहीं था. जब मेरी शादी की पहली रात थी तो उस समय मैं काफी थक गई थी. जब मेरी ननद मुझे रूम में लेकर गई तो मेरे पति अपने दोस्तों के साथ दूसरे कमरे में बैठ कर गप्पें मार रहे थे.
मेरी ननद ने मेरे पति को देखते हुए कहा- भाभी, लगता है कि आज भैया ये भूल गए हैं कि उनकी सुहागरात है.
मैंने शरमाते हुए कहा- शायद वह अपने दोस्तों के साथ बातों में लगे होंगे.
विमला- अरे मेरी प्यारी भाभी, असली खेल तो उनको यहाँ पर खेलना है. वहाँ दोस्तों के साथ क्या टाइम पास करने में लगे हुए हैं वो.
विमला के मुंह से यह बात सुनकर मैं शर्म के मारे लाल हो गई.
मैंने कहा- दीदी, मैं आपके लिए चाय लेकर आती हूँ.
विमला- अरे मुझे चाय नहीं चाहिए. बल्कि आज तो तुम दोनों को दूध की जरूरत है. मैं तुम दोनों के लिए दूध लेकर आती हूँ. तब तक तुम कपड़े बदल लो. थोड़ा हल्का महसूस होगा. मैं तुम्हारे लिए मुंबई से एक अच्छी सी नाइटी भी लेकर आई हूँ. रुको, मैं अभी लेकर आती हूँ।
कहकर विमला कमरे से बाहर चली गई और कुछ ही देर बाद कमरे में वापस आकर विमला ने मेरे हाथों में वह नाइटी थमा दी. मैंने देखा कि नाइटी बिल्कुल पारदर्शी थी. मैं उसको भला कैसे पहन सकती थी. मुझे शर्म आने लगी. इतनी ही देर में विमला दूध लेकर फिर से कमरे में आ गई और मुझे हल्के से डांटने लगी.
विमला- अरे भाभी, आपने अभी तक कपड़े नहीं बदले?
मैंने कहा- नहीं, मुझे इन कपड़ों में शर्म आएगी. ये तो बहुत ही छोटे और पारदर्शी हैं.
विमला ने कहा- भाभी, फटाफट ये कपड़े बदल लो. ऐसे कपड़े देखकर ही मर्दों का लंड खड़ा होता है. ताकि वह जबरदस्त चुदाई कर सके.
यह कहकर विमला ने मेरी गांड पर एक हल्का सा थप्पड़ मार दिया.
मैं तो समझ ही नहीं पा रही थी कि ये विमला कैसी बातें कर रही है. उसके बहुत कहने पर मैंने बाथरूम में जाकर वह नाइटी पहन ली. जब मैंने खुद को आइने में देखा तो मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी साफ दिखाई दे रही थी.
जब मैं बाहर निकली तो विमला बोल पड़ी- अरे वाह भाभी … आप तो मस्त माल हो एकदम. आज तो मेरे भाई राहुल को मजा आ जाएगा. उसको खूब मजे लेने दो आज. वह आज तुम्हारी चूत का उद्घाटन करेगा. वैसे तुझे देखकर तो किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है.
विमला के मुंह से इस तरह की कामुक गंदी बातें सुनकर मैं शर्म के मारे लाल हुई जा रही थी. तभी मैंने देखा कि मेरे पति हम दोनों के पास आ गए.
उसने मेरे पति से कहा- राहुल, ये ले, तेरा माल तो बिल्कुल तैयार है. अब मैं बाहर चली जाती हूँ।
विमला के बाहर जाते ही मेरे पति ने दरवाजा बंद कर दिया. मैंने शर्म के मारे अपने ऊपर एक कपड़ा (चादर) डाल लिया था. मैं पहली बार में ही किसी मर्द के सामने इस तरह से नहीं जाना चाह रही थी. हर लड़की के दिल में अपनी शादी वाली रात के लिए बहुत सारे अरमान होते हैं.
मैं भी राहुल के बारे में सोच कर अपने अरमान अपने दिल में ही लिए बैठी थी.
पति ने दरवाजा बंद कर दिया और वे बाथरूम की तरफ जाने लगे. कुछ देर बाद वह वापस बाहर निकले. मैं अपने बेड पर बैठी हुई थी. शर्म के कारण मैंने अपने मुंह को दूसरी तरफ घुमा लिया था. मैं सब कुछ धीरे-धीरे करना चाहती थी. मैंने बेड में लगे शीशे में देखा कि मेरे पति पीछे खड़े होकर अपने कपड़े उतार रहे हैं. पहले उन्होंने अपने कुर्ते को उतार और फिर अपना पजामा भी निकाल दिया. उसके बाद उन्होंने बनियान निकाल दिया. मुझे नीचे का भाग दिखाई नहीं दे रहा था.
मैंने ज्यादा देखने की कोशिश भी नहीं की. मेरे दिल की धड़कन तो वैसे ही काफी बढ़ गई थी. इससे पहले मैंने किसी मर्द को इस तरह अकेले में बिना कपड़ों के नहीं देखा था. मैंने अपनी नजरों को नीचे बेड पर झुका लिया और अपनी गर्दन को नीचे करके बैठी रही.
फिर मेरे पति मेरी बगल से चलते हुए आए और बेड पर रखा हुआ दूध का गिलास उठा लिया. उन्होंने 2 मिनट में ही गिलास खाली कर दिया. फिर उन्होंने दूध का दूसरा गिलास उठाया और मेरी तरफ बढ़ा दिया.
मैं अभी भी शरमा रही थी. मैंने धीरे से दूध का गिलास अपने हाथ में पकड़ लिया. मैं शरमाते हुए दूध के गिलास को होंठों से लगाकर दूध पीने लगी. मेरे पति मेरे सामने आकर बेड पर बैठ गए. जब मेरी नजर उन पर पड़ी तो मैंने देखा कि उन्होंने केवल एक अंडरवियर पहना हुआ था.
उनकी जांघें काफी गोरी थीं. काफी पतली भी थीं. जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि शादी के समय पर मेरे पति शरीर के काफी दुबले-पतले व्यक्ति थे. इस वक्त तो उनकी तोंद निकल चुकी है. मगर उस वक्त वह काफी पतले और जवान लड़के थे.
फिर मैंने दूध को पीकर खत्म किया और खाली गिलास को उनकी तरफ बढ़ा दिया. उन्होंने मेरे हाथ से गिलास को लिया और मेरी बगल में आकर लेट गये.
मैं अभी भी बैठी हुई थी. मैं सोच रही थी कि मेरे पति कुछ प्यार भरी बातें करेंगे.
मैं उनकी तरफ से पहल करने का इंतजार कर रही थी. मैंने देखा कि उनके अंडरवियर में एक उभार सा था. यह देखकर मेरा दिल धड़क रहा था. मैंने पहली बार किसी मर्द को इस तरह केवल कच्छी में ही देखा था.
फिर उन्होंने मुझसे चादर उतारने के लिए कहा. मैंने अपने शरीर पर ओढ़ी हुई चादर को उतार दिया. अब मेरी पारदर्शी नाइटी में से मेरी ब्रा और पैंटी साफ दिखाई देने लगी थी.
यह देखकर मेरे पति ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और अपने साथ बेड पर लेटा लिया. जिस पल का मुझे इंतजार था वह आ गया था. पहली बार मैं किसी लड़के के साथ सेक्स मजा लेने वाली थी.
मगर उन्होंने मेरी नाइटी को उतार दिया और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाने लगे. 2 मिनट तक दबाने के बाद उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फेरा और फिर मेरी पेंटी को उतार दिया. फिर मेरे पति ने मुझे उठाकर मेरी ब्रा को खोल दिया और मेरी चूची नंगी हो गई.
उन्होंने कुछ पलों के लिए मेरी चूचियों को अपने मुंह में लेकर चूसा जिससे मैं गर्म होने लगी थी. मगर जल्दी ही उन्होंने मेरी चूचियों को छोड़कर मेरी पैंटी को मेरी जांघों से भी उतार दिया. अब मैं पूरी नंगी हो गई थी. उसके बाद मेरे पति ने मेरी चूत में उंगली डाली और एक-दो बार अंदर बाहर की. मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं. लेकिन तुरंत ही उन्होंने अपनी उंगली को वापस से बाहर निकाल लिया. मैंने आंख खोलकर देखा तो वह अपने अंडरवियर को उतार रहे थे. जब उन्होंने अपने अंडरवियर को अपनी जांघों से नीचे किया तो मैं हैरान रह गई.
मैंने देखा कि उनका लंड केवल 4 इंच के करीब ही था साइज में. फिर उन्होंने जल्दी से मेरी टांगों को चौड़ी कर दिया और फिर अपने छोटे से लंड को मेरी चूत के मुंह पर रखकर मेरे ऊपर लेट गए. उन्होंने एक दो बार मेरे होंठों को चूसा और फिर नीचे आकर मेरे चूचों को दबाते हुए मेरी चूत में लंड को घुसाने की कोशिश करने लगे. लंड पूरी तरह से अंदर भी नहीं गया था.
फिर उन्होंने मेरी चूत में अपने लंड को आगे-पीछे करना शूरू कर दिया. 8-10 धक्के लगाने के बाद ही मेरे पति ने मेरी चूत में अपना वीर्य झाड़ दिया. जब उन्होंने लंड को बाहर निकाला तो कुछ वीर्य मेरे पेट पर भी लग गया.
अपने वीर्य को झाड़कर वो एक तरफ गिर गए. मैं अभी यही सोच रही थी कि वो शायद दोबारा प्रयास करेंगे लेकिन मेरा इंतजार तो इंतजार ही रह गया. कुछ पल के बाद उन्होंने साथ में पड़े अपने अंडरवियर को वापस पहन लिया.
मैं हैरान थी.
उन्होंने अपना अंडरवियर पहना और करवट बदल कर लेट गए.
मैंने शादी की पहली रात के लिए जो सपने देखे थे वह सब धरे के धरे रह गए. मेरे पति फिसड्डी निकले. मैं तो बहुत से सुनहरे ख्वाब सजाकर बैठी थी. देखने में राहुल काफी अच्छे थे. मगर शरीर के कमजोर थे. मैंने सोचा कि शादी की पहली रात के कारण उत्तेजना में यह सब इतनी जल्दी हो गया होगा.
क्योंकि मुझे नहीं पता था कि मर्दों का कितनी देर में होता है लेकिन इतना जरूर पता था कि इतनी जल्दी तो नहीं होता है. फिर सोचा कि वह कुछ देर बाद शायद दोबारा मुझ पर चढ़ाई करेंगे. मैंने तो अभी कुछ किया ही नहीं था.
मैं तो शर्म के मारे उनके बदन को छू भी नहीं पाई थी. मैं गर्म हो रही थी लेकिन उससे पहले ही मेरे पति ठंडे पड़ गए. फिर भी मैंने धीरज रखा और उम्मीद लगाए रही. मगर बहुत इंतजार करने के बाद भी जब उन्होंने पलट कर नहीं देखा तो मुझे यकीन हो गया कि पहली रात के मेरे अरमान अब अधूरे ही रह जाएंगे.
मेरी चूत में आग लगी की लगी ही रह गई. मैं तो अभी अच्छी तरह से गर्म भी नहीं हो पाई थी और उनका खेल खत्म हो चुका था. उसके बाद मैंने भी अपनी ब्रा और पैन्टी को पहना और फिर नाइटी को पहन लिया. मैंने चद्दर ओढ़ ली और करवट बदल ली. मेरा मूड काफी खराब हो गया था.
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी सुहागरात इतनी नीरस रह जाएगी. मैं तो प्यासी की प्यासी ही रह गई. कुछ देर तक मैं यूं ही सोचती रही कि ये सब क्या हो रहा है. मैं शरीर से थकी हुई थी और दिमाग में टेंशन हो रही थी. फिर लगभग घंटे भर के बाद मुझे भी नींद आ गई.
आपा की हलाला सेक्स स्टोरी-1 - Aapa's Halala Sex Story-1
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असलाम वालेकुम! आप सबने मेरी कहानी
आपा के हलाला से पहले खाला को चोदा
में पढ़ा था कि नूरी खाला को जबरदस्त चुदाई का मजा देने के बाद दूसरे दिन मेरा निकाह हलाला की बंदिश में बंधी मेरी आपा सारा से होना था और उसके साथ मुझे शौहर के मानिंद रात गुजारनी होगी. मतलब उसे चोदना होगा.
अब आगे:
इधर उस हलाला वाली आपा के बारे में बता दूँ. आपको याद होगा कि मेरी एक कजिन थी, जिसका नाम सारा था और उसकी उम्र लगभग उन्नीस साल की थी. उसकी शादी हमारे कजिन इमरान से हुई थी और उनका आपस में बहुत प्यार मोहब्बत था. फिर पता नहीं क्या हुआ कि इमरान ने ग़ुस्से में आकर मेरी कजिन सिस्टर को तलाक़ दे दिया और इसी कारण से वह शादी में भी नहीं आयी थी.
इस तलाक देने के बाद मेरे कजिन को बहुत पछतावा हुआ और इमरान ने दोबारा सारा से शादी करने की ख्वाहिश की, तो मौलवी साहेब बोले कि शरीयत के रूल से सारा को हलाला से गुजरना होगा और कम से कम एक रात के लिए किसी और की बीवी बनना पड़ेगा, तब ही तुम दोनों की शादी हो सकती है.
उसके बाद शाम के समय मेरा और सारा का निकाह हो गया. तो मेरे मामू जो सारा के ससुर भी थे, उन्होंने मुझे बाहर बुलाया और कहने लगे कि आमिर बात सिर्फ निकाह की नहीं थी, तुम्हें रात को अपनी कजिन सिस्टर के साथ मियां बीवी की तरह सोना भी पड़ेगा.
मुझे ये बात पहले ही खाला ने बता दी थी. मैं और भी खुश हो गया. लेकिन दिखावे के गुस्से से मैं बोला कि मामू ये नहीं हो सकता.
तो मामू ने मेरे अब्बा को फ़ोन किया और दिक्कत बताई, तो उन्होंने भी इजाजत दे दी.
मैंने इतने में देखा सारा की एक छोटी बहन ज़रीना भी थी. वो अठारह साल की थी और बला की खूबसूरत थी. एकदम पतली लम्बी … गोरा रंग और कश्मीरी होने के कारण उसके लाल सुर्ख गाल थे. वो देखने में बिल्कुल ज़रीन खान हीरोइन जैसी लग रही थी. उसे देख कर यही लगता था कि यह तो सच में ज़रीन खान की जुड़वाँ बहन है. मैंने उसको देखा तो देखता रह गया. मेरा मन बेईमान हो गया.
मैंने खाला से पूछा- ज़रीना के लिए क्या सोचा है?
तो खाला बोलीं- अभी सोच रहे हैं … सोचती थी कि तुमसे इसका निकाह करवा दूँगी.
इधर अब सारा भी मेरी बीवी थी, पर उसे तो हलाला के चलते तलाक देना होगा. मैंने कहा- खाला, आप मुझे जरीना दे दो. वह मुझे भा गयी है. ज़रीना से भी मेरा निकाह पढ़वा दो.
इस बात पर खाला बोलीं- चाहती तो मैं भी यही चाहती हूँ.
इसके बाद खाला ने मामू से बात की. ये बात फिर अब्बा हज़ूर और अम्मी के पास गयी और उन्होंने भी इजाजत दे दी. मेरा निकाह सारा के साथ साथ जरीना से भी पढ़वा दिया गया.
अब कुछ बाकी नहीं था, तो मैं एक रात का दूल्हा बन सारा के साथ रात गुजारने के लिए ऐसे मान गया जैसे मैं सारा की चुदाई बेमन से कर रहा हूँ.
हम घर आए. सर्दियों की रातें थी. रात को 8:30 बजे उन्होंने मुझे कमरे में भी भेज दिया, जहां मेरी कजिन सारा अपने एक रात के शौहर का इंतज़ार कर रही थी. सारा भी बला की खूबसूरत थी, उसके बड़े बड़े मम्मे, जिनकी साइज 38c थी. उसकी मोटी गांड की साइज 40 इंच थी. सपाट पेट और कमर 26 इंच की और जिस्म भरा हुआ था. वो लम्बी थी और मुख़्तसर ये कि वो खतरनाक हद तक खूबसूरत और सेक्सी थी.
उस वक्त वो लाल रंग के कश्मीरी दुल्हन के कपड़ों में थी. दुल्हन के लिबास के लिए लाल मेरा पसंदीदा कलर है. मैं उसके पास बैठ गया. मैंने करीब जाकर उसका घूंघट उठा दिया और सारा की ओर देखा. उसकी शक्ल सूरत बिल्कुल कटरीना कैफ की थी. मुझे तो अपने नसीब पर रश्क़ होने लगा.
एक ही दिन में दो नयी बीवियां … एक कटरीना जैसी और दूसरी ज़रीन खान जैसी. मेरी तो जैसे लाटरी लग गयी मेरा लौड़ा सलामी देने लगा. साथ साथ मैंने उसका हाथ अपने हाथ में पकड़ रखा था और उसे सहला भी रहा था.
मैंने उससे कहा- सारा, मेरे दिल की तमन्ना आज पूरी होने जा रही है. मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि तुम्हारे साथ कुछ कर सकूँगा.
उसने बोला- आमिर, मेरे भी दिल में दबी दबी ख्वाहिश थी कि काश कभी हम आपस में चुदाई कर सकते. लेकिन ऐसा न हो सका और तुम पढ़ने इंग्लैंड चले गए और मेरी तीन महीने पहले शादी हो गयी.
फिर मैंने पूछा- उसने तुम्हारी जैसी खूबसूरत बला को तलाक़ कैसे दे दिया?
सारा बोली- मेरा उससे झगड़ा होता था.
मैं- किस बात को लेकर?
वह खुल बताने में शर्मा रही थी … मैंने कहा- शर्माओ मत … अब मैं तुम्हारा शौहर हूँ और कजिन भाई भी हूँ. शायद तुम्हारी आगे की जिंदगी में कुछ मदद कर सकूं.
वह शर्मा कर बोली- इमरान का लंड बहुत कमजोर था और खड़ा भी नहीं होता था. वह नामर्द था और मैं अब तक कुंवारी हूँ.
मैंने पूछा- अब दुबारा निकाह के बाद कैसे होगा … तुम कैसे मान गईं?
वह बोली- अब वह इलाज कराने को मान गया है.
मैंने कहा- अगर ठीक नहीं हुआ तो तुम्हारा क्या होगा?
वह धीरे धीरे रोने लगी- वह मुझे मारता भी था. अब मैं उससे शादी नहीं करना चाहती, पर अम्मी के दबाव में हलाला के लिए राजी हो गयी हूँ. फिर उससे दुबारा निकाह भी कर सह लूंगी.
मैंने उसके आंसू पौंछे और बोसा लेकर बोला- मेरी जान, अब तुम मेरी जिम्मेवारी हो.
फिर मैंने आहिस्ता से उसका हाथ पकड़ कर अपने होंठों से लगा लिया, उसे मेरे स्पर्श से कंपकंपी सी आ गयी. फिर मैंने उसकी एक उंगली अपने मुँह में लेकर आहिस्ता आहिस्ता चूसी और कभी कभी बाईट भी कर देता था. वो गर्म हो रही थी.
उसने मुझे गले से लगा लिया और हम दोनों ने एक बहुत डीप किस की. फिर मैंने उसकी जुबान चूसनी शुरू कर दी. उसने मेरी भी ज़ुबान चूसी. इस दौरान मेरा बायाँ हाथ उसके बालों पे था, जिससे मैंने उसकी गर्दन को पीछे को खींची हुई थी. मेरा दायाँ हाथ उसके मम्मों को दबा रहा था. वो मादक सिसकारियां भर रही थी.
फिर मैंने उसकी क़मीज़ उतार दी, उसने रेड ब्रा पहनी हुई थी. उफ्फ्फ्फ … क्या मम्मे थे उसके … दूधिया रंगत के पिंक निप्पल एकदम से खड़े हुए थे. मैंने आहिस्ता आहिस्ता उसके सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी निकाल दिए. वो मुझे दीवानों की तरह छाती पे किस कर रही थी और मेरे निप्पल से खेल रही थी. मैं भी उसके सारे जिस्म पे हाथ फेर रहा था और वो गरम से गरमतर हो रही थी.
फिर मैंने उसे उल्टा लेटने को कहा, वो लेट गयी और मैंने उसकी गर्दन से उसे चाटना शुरू किया. उसके दोनों बाज़ू हाथ और आर्मपिट … उफ्फ्फ्फ़ … क्या मदहोश कर देने वाली महक थी उसके जिस्म की. जब मैं उसके आर्मपिट और गर्दन पे ज़ुबान लगाता था, तो वो ऊपर को उछल पड़ती थी, जिससे मेरा लंड उसकी गांड पे टच हो रहा था.
उसने हाथ बड़ा कर मेरा लंड पकड़ा और बोली- उफ्फ्फ्फ़ हाय अल्लाह … इतना बड़ा इतना मोटा … और मजबूत … मेरी तो ये आज फाड़ ही डालेगा … ज़रीना तो बहुत किस्मत वाली है … जिसे इतना मजबूत लंड मिला है.
मैंने कहा- मेरी रानी, अब ये तुम्हारा भी है … आज रात इसके पूरे मजे कर लो.
हम दोनों जल्द ही चुदाई की पोजीशन में आ गए. इस वक्त मैं उसके ऊपर दोनों तरफ टांगें फैला कर चढ़ा हुआ था. इसी तरह चूमते चाटते मैं उसकी गांड पे आ गया और ज़ोर से उसकी नंगी गांड पे एक थप्पड़ मारा.
‘उफ्फ़ …’ उसकी गांड ऐसे फड़फड़ाई कि क्या बताऊं. फिर मैंने उसकी गांड पे दांत से काटना शुरू कर दिए, जिससे वह मरने की हद तक पहुंच गयी. फिर मैंने अपना हाथ उसकी गांड की दरार में डाला और उसकी चूत और गांड को सहलाने लगा. साथ साथ उसकी टांगों को भी चूमने लगा. फिर मैंने उसे सीधा लेटने को कहा. जब मैंने उसका मुखड़ा देखा तो टमाटर की तरह लाल हो रहा था. मुझसे रहा ही न गया और मैं उसके गालों पे बहुत देर किस करता रहा, काटता भी रहा. फिर मैंने उसकी गर्दन पे किस किया और फिर उसके मम्मों को सहलाने लगा.
मैं अब भी उसके ऊपर उसी पोजीशन में था और जब मैंने नीचे मुँह कर के उसके मम्मे को अपने मुँह में लिए, तो साथ साथ मेरा लंड उसकी बग़ैर बालों की चूत, जो बिल्कुल गीली हुई पड़ी थी, उससे टच कर रहा था. मैंने नोट किया जब मेरा लंड उसकी चूत से टच करके ऊपर को उठता था तो उसकी चूत के रस से लंड की टोपी के साथ एक तार सी बन जाती. मैं पूरे जोश में था. मैंने बारी बारी उसके दोनों चूचे चूसे और उनको दबा दबा कर काटता भी रहा. फिर मैं उसके पेट पे किस करता रहा और उसकी चूत पे आ गया.
मैंने उसकी रानों पे किस किया और वहां जुबान से चाटने चूमने लगा. जब मैंने अपनी जुबान उसकी चूत के आसपास फेरी, तो मुझे उसकी गीली चूत का कुछ अजीब सा स्वाद लगा लेकिन मैं मज़े से पागल हो रहा था. मैंने दीवानगी के साथ उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
ऐसा करते देख कर सारा ने खुद ब खुद अपनी टांगें फैला दीं और मेरे बालों में हाथ फेरने लगी. मैं ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत चाट रहा था. मैं उस वक्त तक नहीं रूका, जब तक कि उसकी चूत का पानी न निकल गया. मैं ये देख कर हैरान रह गया कि उसकी मनी (कामरस) भी बिल्कुल मेरी मनी की तरह गाढ़ी थी.
फिर जब मैंने अपना मुँह हटाया तो वो भूखी शेरनी की तरह उठी, उसने मुझे नीचे गिराया और मेरे ऊपर चढ़ गयी. मेरा लंड जो इस वक्त बिल्कुल खूंखार हो चुका था … उसकी गीली चूत से टच हुआ.
लेकिन उसने एक नया काम किया. मैं सोच रहा था कि अभी मेरा लंड अपनी चूत में ले लेगी लेकिन उसने मेरे पेट पे लेट कर इस पोजीशन में कर लिया कि मेरा लंड बस उसकी चूत के मुँह को टच करता रहे. उसने अपनी ज़ुबान से मेरे होंठों पे और आस पास लगाई और मेरे मुँह में लगी अपनी मनी को चाटना शुरू कर दिया.
उफ्फ्फ … क्या बताऊं … यार उसने अपनी खुद की सारी मनी मेरे मुँह से साफ़ कर दी. इसके बाद उसने मेरे माथे से बोसे लेना शुरू किया. किस के साथ साथ वो हिल भी रही थी, जिससे लंड और चूत आपस में चुम्मी चुम्मी खेल रहे थे. मुझे और उसे इस खेल का भरपूर मज़ा आ रहा था. उसने मेरी आँखों, मेरे गाल, मेरी नाक को पहले किस किया, फिर चूसा. फिर उसने मेरे कानों को किस किया … लिक किया … बाईट किया और कान में ज़ुबान डाल दी.
उफ्फ़फ … मेरा तो बुरा हाल हो गया था.
फिर उसने मुझे फ्रेंच किस की और अचानक किस खत्म करके उसने मेरे होंठों के ऊपर वाले हिस्से को, मतलब मूंछों वाली जगह को लिक किया और मेरे नाक में भी अपनी जुबान से किस करती रही. ये मेरे लिए नया तजुर्बा था.
फिर उसने मेरी गर्दन को किस किया और फिर मेरे सीने को दोनों हाथ से मसलती रही. वो मेरे सीने पे और कन्धों पर काटती रही. सारा इस वक़्त ज़ख़्मी शेरनी से कुछ कम नज़र नहीं आ रही थी. उसने मेरे निप्पलों की भी किस करना चालू कर दिया और बारी बारी से वो मेरे दोनों निप्पलों को दांतों से काटने में लग गई.
खैर … वो किस करती हुई मेरे नीचे आ रही थी. जब वो नीचे हो रही थी, तो मेरे लंड पर उसकी चूत ऐसे फिसली कि मत पूछो … मैं तो उस रगड़ से सातवें आसमान पे पहुंच चुका था. मुझे कुछ जल्दी नहीं थी … मैं बस अपनी एक रात की शादी को एन्जॉय कर रहा था.
खैर उसने मेरे लंड की टिप पर ज़ुबान रख दी और लंड को हाथ में पकड़ा, जो उसकी चूत के पानी से बिल्कुल गीला हो चुका था. वो मेरे लंड को सहलाने लगी और मेरी गोटियों को अपनी ज़ुबान की नोक से बिल्कुल नीचे से ऊपर तक मेरे लंड के सुराख तक चाटती हुई ऊपर आई. फिर उसने मेरे लंड की टोपी को किस किया और मुझे टांगें खोलने को कहा.
मैंने टांगें खोलीं तो अगले ही लम्हे में मेरा पूरा जिस्म मज़े से कंपकंपा उठा. उसने मेरी गांड के सुराख़ के पास से शुरू चाटना करके मेरी गोटियों और मेरे लंड की टोपी तक जो जुबानी चांटा लगाया. तो मेरे मुँह से बेइख़्तियार सिसकारी निकल गई- उम्म्ह… अहह… हय… याह… सीईईईई आह …
क्या बताऊं दोस्तो आपको … साली पूरी खिलाड़िन थी.
फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया. मैंने उसे इशारा किया तो वो मेरे ऊपर 69 पोजीशन में आ गयी. ऊपर होने की वजह से उसकी चूत और गांड खुल कर मेरे सामने आ गयी थी. मैंने भी दीवानों की तरह उसकी चूत पे ज़ुबान चलानी शुरू कर दी. अब मैं अपनी ज़ुबान उसकी चूत में भी डाल रहा था और ज़ुबान से सारा को छेड़ रहा था. जैसे ही मेरी ज़ुबान उसकी चूत में जाती, वो बहुत ज़ोर से मेरे लंड का चुप्पा लगाती.
ऐसे ही करते करते हम दोनों का पानी निकल गया, जिसे हम दोनों ने पी लिया. सर्दी के बावजूद भी हमारे जिस्म तप रहे थे. इस सारे काम में हमें तक़रीबन एक घंटा लग गया था … और इस एक घंटे में हम दोनों एक दूसरे से बहुत कम बोले.
वो मेरे बराबर में लेट गयी और बोली- आमिर … मुझे ज़िंदगी में इतना मज़ा कभी नहीं आया … जितना आज आया है. आज तुम मेरी सील भी तोड़ दो.
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