प्रमोशन के लिए बना जिगोलो - became a gigolo for promotion

 प्रमोशन के लिए बना जिगोलो

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


आज से से दो साल पहले मेरे साथ एक चुदासी कहें या मजबूरी वाली घटना घटी, जिसे मैं आज आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ, मैंने बहुत सोचने के बाद तय किया कि क्यों न मैं भी अपनी इस सच्ची सेक्स कहानी को आप सबके सामने पेश करूं.


दो साल पहले मैं गुड़गांव में एक कंपनी में जॉब करता था. मेरी सैलरी बहुत ही कम थी, मात्र 10000 रूपए मिलते थे, जिसमें से 3000 मेरा पीजी का किराया खाना आदि का लगता था और बचते थे 7000, जिनको मैं अपने घर पर दे दिया करता था. पूरा महीना जॉब करने के बाद भी मेरे पास कुछ नहीं बचता था, जिस वजह से मैं बहुत परेशान हो जाता था. कई बार तो सोचता था कि जॉब छोड़ दूं, लेकिन फिर जल्दी जॉब ढूंढना आज के टाइम में बहुत मुश्किल भी तो है़, इसीलिए कंटिन्यू जॉब करता रहा. अपना वही उदास सा चेहरा लेकर रोज ऑफिस में जाता, वहां पर काम करता, फिर घर आ जाता.


एक दिन मैं अपने सिस्टम पर बैठा अपना वर्क कर रहा था कि तभी हमारी मैनेजर, जिनका नाम मीरा है, उम्र 38 साल है, उन्होंने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया.


मुझसे पूछा कि ऋषभ सब ठीक तो है … मैं एक सप्ताह से देख रही हूं, तुम कुछ परेशान से नजर आ रहे हो. अगर कोई प्रॉब्लम है तो तुम मुझे बता सकते हो.

मैंने ना में सर हिला दिया.

उन्होंने दोबारा बोला- अगर कोई प्रॉब्लम है तो तुम मुझे बताओ … जब तक तुम किसी से अपनी प्रॉब्लम शेयर नहीं करोगे, तो तुम्हारी समस्या कैसे खत्म होगी.

फिर मैंने एकदम से थोड़ी हिम्मत करके बोल दिया- कोई समस्या नहीं है, बस थोड़ा सैलरी का प्रॉब्लम है. मेरी सैलरी जितनी मिलती है, उसमें मेरा खर्चा नहीं चल पाता, जो भी मिलता है, वह सारा घर पर चला जाता है. मेरे पास कुछ नहीं बचता. मैडम जी, मुझे यहां पर काम करते करते एक साल हो गया. अभी तक मेरी सैलरी भी नहीं बढ़ी. इंटरव्यू के टाइम पर बोला था कि सैलरी 3 महीने बाद बढ़ेगी, लेकिन एक साल हो गया, अभी तक नहीं बढ़ी. बस इसीलिए थोड़ा परेशान हूं.


मीरा- देखो ऋषभ इंटरव्यू के टाइम पर सब ऐसे ही बोलते हैं क्योंकि उनको हायरिंग करनी होती है. और अगर तुम्हारी सैलरी बढ़ती भी है, तो बस 10% बढ़ेगी क्योंकि यह कंपनी का रूल है.

मैं- बस 10 परसेंट? इससे अच्छा तो होगा कि मैं यह जॉब छोड़ दूं और कोई दूसरी जॉब तलाश करूं.

मीरा- ऋषभ हमारी कंपनी के रूल तो पता ही होगा जॉब छोड़ने से एक महीने पहले रिजाइन लेटर देना होता है और उसके 75 दिन बाद तुम्हारी सैलरी मिलेगी.

मैं- जी मैडम मुझे कंपनी के सारे रूल पता हैं. आप ही बताइए मैं क्या करूं. मैं बहुत परेशान हो चुका हूं, मुझे पैसों की बहुत जरूरत है.

मीरा- देखो ऋषभ अगर तुम यहां पर मुझसे सैलरी बढ़ाने की बात करना चाहते हो, तो मैं तुम्हारी सैलरी तो नहीं बढ़ा पाऊंगी. लेकिन हां मैं एक मदद कर सकती हूं … अगर तुम पार्ट टाइम जॉब करना चाहते हैं, तो मैं तुम्हारी जॉब लगवा सकती हूं, जिससे तुम अच्छे खासे पैसे कमा सकते हो. जैसा और जितना काम करोगे, वैसे पैसे मिलेंगे.

मैं- मैडम यहां ऑफिस से घर जाने के बाद पार्ट टाइम काम करने की हिम्मत बिल्कुल भी नहीं हो पाएगी.

मीरा- वह तुम्हारे ऊपर है कि तुम काम कर पाते हो या नहीं कर पाते. तुम्हारी मर्जी है. मैं तो तुम्हें पैसे कमाने का तरीका बता सकती हूं बस. और बाकी सब तुम्हारे ऊपर है.


मैं- ठीक है मैडम … लेकिन क्या मैं जान सकता हूं. क्या प्रोफाइल है, किस तरीके का काम होगा वहां?

मीरा- मैं तुम्हें सब बता दूंगी कि वहां पर किस तरीके का काम होगा और क्या तुम्हारी प्रोफाइल होगी. जितना मेरे से हो सकेगा, मैं सिखा भी दूंगी लेकिन अभी मुझे कहीं जाना है. बॉस बुला रहे हैं. तुम देर शाम दस बजे तक मेरे घर आ जाना. मैं तुम्हें सब समझा दूंगी. ठीक है! फिर कल तुम्हारा इंटरव्यू भी करवा दूंगी.


मैं- मैडम 10:00 बजे तो मैं नहीं आ सकता, रात के समय पीजी वाले आने नहीं देंगे.

मीरा- तुम्हारे पीजी वालों को कॉल करके मैं बोल दूंगी कि आज ऋषभ की नाइट शिफ्ट है … ऑफिस में काम थोड़ा ज्यादा है.

मुझे ये बात जंच गई.

मैं- धन्यवाद मैडम, अब मैं जाऊं.

मीरा- हां जाओ, लेकिन एक बात ध्यान से सुनो, जहां मैं तुम्हारे काम की बात करूँगी, वहां पर मेरी नाक नहीं कटनी चाहिए. जो भी मैं तुम्हें सिखाऊंगी, तुम्हें अच्छे से सीखना होगा ताकि आगे चल के तुम्हें काम करने में आसानी हो.

मैं- ठीक है मैडम जो आप सिखाओगी, मैं अच्छी तरह से सीखूंगा. वादा करता हूं और आपकी नाक नहीं कटने दूंगा.

मीरा- हा हा हा हा … वह तो आज रात को देखते हैं. चलो बाय रात को टाइम से आ जाना.

मैं- ठीक है मैडम.

मैं बाय बोल कर बाहर आ गया और अपने स्थान पर बैठ गया. अपना काम करने लगा. काम करते-करते कब 5:00 बज गए, पता ही नहीं चला और 5:00 बजे हमारी छुट्टी हो गई. फिर मैं घर चला गया.


घर पहुंच कर मुझे पता लगा कि मीरा मैडम ने पहले ही मेरे घर पर कॉल करके बता दिया है कि आज ऋषभ की नाइट शिफ्ट है. आपको घबराने की जरूरत नहीं है़. वो नौ बजे फिर से ऑफिस के लिए निकल जाएगा.


मैडम ने वापसी को लेकर मेरे पीजी में कुछ नहीं कहा था, तो मैं भी बिना कुछ कहे निकल आया. मैं घर से तैयार होकर 9:00 बजे निकल गया, जैसे ही मैं घर से बाहर निकला. मैंने मीरा मैडम को कॉल करके बता दिया कि मैं आपके घर आने के लिए निकल चुका हूं … लेकिन मैंने आपका घर नहीं देखा.


उन्होंने मुझे व्ट्सऐप पर अपने घर की लोकेशन पता भेज दी. दस बजे मैं उनके घर के बाहर पहुंच गया. घर के बाहर जाकर मैंने उनके डोर पर लगी घंटी बजाई, तो मीरा मैडम ने गेट खोला.


आज इस समय वह बहुत ही सेक्सी लग रही थीं. उन्होंने ब्लैक कलर की शिफोन की साड़ी पहनी थी और काले रंग का गहरे गले वाला ब्लाउज, उसमें से उनके चूचों की बीच की लाइन साफ दिखाई दे रही थी. उनके 36 साइज़ के चूचे बाहर आने को बेताब हो रहे थे. कुल मिलाकर वह आज किसी वासना जगाने वाली आइटम लग रही थीं.

मैंने उनकी तारीफ करते हुए बोला- मैडम यू आर लुकिंग ब्यूटीफुल टुडे.

उन्होंने रिप्लाई में थैंक्यू बोला और मुझे अन्दर आने के लिए कहा.

मैं अन्दर आ गया तो उन्होंने गेट बंद कर लिया.


फिर हम दोनों सोफे पर जाकर बैठ गए मीरा मैडम मेरे सामने वाले सोफे पर बैठी थीं और मैं उनके सामने वाले सोफे पर मैं बैठा था. हम दोनों के बीच में एक टेबल थी.


मीरा मैडम ने मुझसे पूछा- ऋषभ क्या लोगे चाय या कॉफी?

मैंने कहा- ना चाय ना कॉफी. … आप कृपा करके मुझे एक ग्लास पानी दे दीजिए, मुझे बहुत तेज प्यास लगी है.

उन्होंने आंख दबाते हुए कहा- ठीक है बस पानी चाहिए या उसमें मिलाने के लिए और कुछ भी चाहिए.

इतना कह कर मीरा मैडम खिलखिलाकर हंसने लगीं.


मैंने भी मजाक में जवाब देते हुए कहा- हा हा हा मैडम … अगर कुछ मिलाने के लिए हो … तो वह भी ले आओ … मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

मीरा- हां जरूर … क्यों नहीं.

इतना बोलकर मैडम किचन में चली गईं.

मुझे लगा मैडम मजाक कर रही हैं, इसलिए मैंने मजाक में उनसे कहा कि कुछ मिलाने के लिए है, तो ले आओ. लेकिन जब मैंने उन्हें किचन में से वापस आते हुए देखा, तो मैं एकदम से चौंक गया. उनके हाथ में एक वोडका की बोतल, दो गिलास और एक पानी की बोतल थी. जो उन्होंने लाकर टेबल पर रख दी.


मैंने कहा- अरे मैडम … मैं मजाक में बोल रहा था कि कुछ मिलाने के लिए है और आप तो असली में लेकर आ गईं.

मीरा- चलो अब मजाक बहुत हुआ, अब बोतल आ गई है तो दो-दो पैग हो ही जाएं.

मैंने मैडम को संजीदा देखा तो मैंने भी हामी भर दी और ‘जी हां … क्यों नहीं..’ बोल दिया.


मीरा मैडम ने दो पैग बनाए, एक मेरा और एक अपना. मैंने देखा उन्होंने मेरा पैग कुछ ज्यादा ही तगड़ा बनाया था. फिर हमने अपना अपना ग्लास उठाया और चियर्स करके गिलास होंठों से लगा लिए. मैंने एक ही झटके में फिर बॉटमअप कर के पैग अन्दर किया और गिलास खाली कर दिया.


एक ही बार में पैग खाली होते देखा, तो मीरा मैडम ने बैक टू बैक दो पैग और बना दिए. वह भी पियक्कड़ थीं, सो उन्होंने भी गिलास को एक ही सांस में खींच लिया था. हम दोनों ने बॉटम अप करते हुए पैग मारे … और नमकीन लेकर मुँह का स्वाद ठीक किया. मुझे इस वक्त सिगरेट की तलब लगी थी. तभी मैडम ने उठकर अपने बैग में से ट्रिपल फाइव की डिब्बी निकाली और मेरी तरफ बढ़ा दी.

मैं अभी कुछ सोचता इससे पहले मैडम ने कहा- एक ही सुलगा लो, शेयर कर लेंगे.

मुझे इस बात से जरा और अजीब सा लगा कि मैडम तो आज रंग पर रंग दिखाए जा रही हैं. खैर मैंने सिगरेट सुलगा ली. मैंने मैडम की तरफ सिगरेट बढ़ाई तो देखा कि मैडम की साड़ी एकदम खुली पड़ी थी और उनके गहरे गले वाले ब्लाउज से उनकी मदमस्त चूचियां मुझे ललचा रही थीं.


हालांकि मैंने सिवाए देखने के कुछ नहीं किया न कुछ कहा. मैंने गिलास उठाया और होंठों से लगा कर उनकी चुचियों को निहारते हुए शराब की चुस्की लेने लगा.

मैडम ने सिगरेट का कश खींचा और मेरी तरफ सिगरेट बढ़ाते हुए मम्मों की नुमाइश की और कहा- इनको देखने से कुछ नशा बढ़ा … मजा आया?

मैं हंस दिया और बस सिगरेट का कश खींच कर न जाने कैसे उनकी चूचियों पर धुंआ छोड़ दिया.

मैडम हंस पड़ीं.


बस यूं ही कुछ देर बाद हमारा दारू सिगरेट का प्रोग्राम खत्म हुआ. फिर मैंने मीरा मैडम से कहा- चलो मैम, दारू का प्रोग्राम तो खत्म हो गया, अब थोड़ी काम की बात कर लेते हैं.

मीरा मैडम ने फिर से मम्मे हिलाते हुए कहा- हां क्यों नहीं … तुम्हें यहां किस लिए बुलाया है. काम की बात ही तो करने के लिए बुलाया है.

फिर उन्होंने टांगें किसी रंडी के जैसे फैलाते हुए अपना फोन उठाया और मेरे सामने बैठकर ही अपनी सहेली, जिसका नाम सिमरन था … उससे फोन पर बात करने लगीं. मैडम ने फोन का स्पीकर ऑन कर दिया था, जिससे मुझे दूसरी तरफ से आती हुई आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी.


मीरा मैडम ने अपनी चूत पर हाथ फेरते हुए बोला- हैलो सिमरन … कहां है यार तू अभी तक आई क्यों नहीं.

सिमरन- यार मीरा, मैं तेरी कॉल का वेट कर रही थी. तूने ही तो कहा था उस लड़के के आने के बाद तू मुझे कॉल करेगी.

मीरा- अच्छा चल कोई बात नहीं, अब तो तुझे कॉल कर दिया. अब तू जहां भी है, जल्दी से मेरे घर आ जा. जिस लड़के ऋषभ की मैंने तेरे से बात करी थी, उसी जॉब के लिए … वह आ गया है.


जब मैडम ने ‘उसी जॉब..’ की बात कही तब उन्होंने अपनी चूत पर अपनी हथेली से थपकी दी थी. जिससे मुझे समझ आ गया था कि मैडम जी हो न हो चूत चुदवाने के जॉब की बात कर रही हैं.


सिमरन- हां मीरा डार्लिंग बस में तेरे घर पहुंचने ही वाली हूं. अब मुझे से भी और ज्यादा सब्र नहीं हो रहा.

मीरा- ही ही ही ही ठीक है तो जल्दी आ … मुझे घर के बाहर आ के कॉल करियो … बाय बाय आई एम वेटिंग फॉर यू बेबी.

सिमरन- ओके बाय बेबी.

फोन काटने के बाद मीरा मैडम बोलीं- ऋषभ, मैं जिससे अभी बात कर रही थी, उनका नाम सिमरन मैडम है, वह यहां पर आ रही हैं. तुम्हें जॉब के बारे में अच्छे से समझा देंगी और तुम्हारा इंटरव्यू भी यहीं पर क्लियर हो जाएगा. बस जैसा वह समझाएंगी, तुम उनसे अच्छी तरह से समझ लेना. अगर उन्हें तुम्हारा काम पसंद आया, तो तुम्हारी पार्ट टाइम जॉब कल से स्टार्ट हो जाएगी. और हां एक बात का ख्याल रखना कि उनको ना सुनने की आदत नहीं है. इस बात का खास तौर पर ध्यान रखना कि जैसा वो बोलेंगी, वैसे तुम्हें करना ही होगा … और फिर मेरी नाक का भी सवाल है … मेरी नाक मत कटवा देना तुम.


अब मुझे भी थोड़ा-थोड़ा नशा हो रहा था जो पैग मारे थे, उसका असर जब दिखाई दे रहा था, तो मैंने भी मैडम से हंसी मजाक में बोल दिया- नहीं मैडम आपकी नाक नहीं कटेगी … आपकी नाक की जिम्मेदारी अब से मेरी है.


इस बात पर हम दोनों हंसने लगे.


दोस्तो, अभी के लिए इतना ही अलविदा आपसे बहुत जल्दी मुलाकात होगी अगर आप आगे क्या हुआ मैं कैसे जिगोलो बना जानना चाहते हैं, तो मुझे ज्यादा से ज्यादा मेल करके बताइए कि आपको मेरी स्टोरी कैसी लगी. कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. इसके आगे की स्टोरी में कैसे मैंने सिमरन और मीरा दोनों की चुतों का भोसड़ा बनाया, कैसे मेरा जीवन एक जिगोलो की जिंदगी में बदल गया, ये सब जानने के लिए मुझे जरूर मेल करें.

ऑफिस के सर के साथ होटल में चुदाई - Fucking in hotel with office boss

 ऑफिस के सर के साथ होटल में चुदाई

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


हाई फ्रेंड्स, मेरा नाम नेहा है. मैं जॉब करती हूँ और शहर में रहती हूँ. मैं बहुत सेक्सी और बड़ी चूचियां और बड़ी गांड वाली काफी सुन्दर लड़की हूँ.


मेरी जॉब बहुत अच्छी है, ये जॉब मुझे मेरे सेक्सी जिस्म को देख कर मिली थी. मुझे जॉब करते हुए कुछ साल हो गए हैं. मेरी ऑफिस में काफी जान पहचान भी हो गयी. मेरे सीनियर सर लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं और मुझे बहुत कुछ समझाते भी हैं. मुझे भी ऑफिस में प्रमोशन पाने के लिए अपने सीनियर सर लोगों को पटाना पड़ता है. मैं हमेशा ऑफिस में मॉडर्न कपड़े पहन कर जाती हूँ. ऑफिस के सभी लोगों की नजर मेरे ऊपर ही रहती है. मेरे ऑफिस के जो बॉस सर हैं, वो बहुत ऊंचे पद पर हैं.


ये कहानी कुछ दिन पहले की है, इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना ये कहानी आप लोगों के साथ भी शेयर की जाए.


मैं जो भी काम करती हूँ, तो वो सर देखने के लिए आते हैं और वो मुझे अपना काम भी समझाते हैं. उनको ऑफिस में सब लोग मैनेजर सर कहते हैं, क्योंकि वो ऑफिस के सारे लेन देन का काम भी करते हैं. वो ऑफिस के मीटिंग में भी हिस्सा लेते हैं. चूँकि बॉस सबसे सीनियर हैं, तो सब लोग डरते भी हैं. मैनेजर सर की बॉडी बहुत मजबूत है और वो बहुत स्मार्ट भी लगते हैं.


मैनेजर सर के पास सारी लड़कियां इंटरव्यू के लिए जाती हैं क्योंकि वो ही जॉब देते हैं. ऑफिस की उनकी सारी मीटिंग का काम मुझे ही करना पड़ता है. क्योंकि मैं ही एक ऑफिस में मैनेजर सर से ठीक से बात कर पाती हूँ.. और वो ही मुझे मीटिंग के सारे काम समझाते हैं.


मैं और मैनेजर सर हम दोनों लोग मिलकर मीटिंग कर काम करते हैं. इससे हम दोनों मतलब मैं और मैनेजर सर काफी करीब आ गए थे. हम दोनों में बहुत बढ़िया दोस्ती सी भी हो गयी थी. ऑफिस के अन्य स्टाफ की तरह मुझे उनसे डर भी नहीं लगता था. वो मुझे ही सारे काम बताते थे. जिस वजह से मैं मैनेजर सर के केबिन में कभी कभी घंटों बनी रहती थी और मीटिंग कर काम करती थी.

मेरे साथ काम करने वाली लड़कियां मुझसे देखकर जलती थीं. मैंने एक दो मीटिंग में बहुत अच्छा काम किया था इसलिए मैनेजर सर को मेरे ऊपर काफी भरोसा हो गया था. हम लोगों की मीटिंग कभी कभी दूर होती थी.. और सभी लोगों को मीटिंग के लिए दूसरे शहर में जाना पड़ता था. मैं मैनेजर सर के साथ जाती थी और बाकी के लोग बाद में आते थे.


मैं और मैनेजर सर हम दोनों को मीटिंग में अक्सर देर हो जाती थी, तो हम दोनों को होटल में रुकना पड़ता था. हालांकि हम दोनों अलग अलग रूम में रहते थे, लेकिन डिनर वगैरह साथ में ही करते थे.


एक बार रात को मैं और मैनेजर सर मीटिंग के लिए होटल में रुके थे. ऑफिस के बाकी लोग कल आने वाले थे और हम दोनों लोग एक दिन पहले ही आ गए थे.


उस रात हम दोनों को डिनर करने के लिए जाना था. मैं डिनर करने के लिए जा रही थी, तभी मैनेजर सर का फ़ोन आया और वो बोले कि मैंने डिनर अपने रूम में मंगवाया है, तुम डिनर करने के लिए मेरे रूम में ही आ जाना.


मैं डिनर करने के लिए मैनेजर सर के रूम में गयी. वो उस वक्त नाईट सूट में थे और वे अपने एक हाथ में शराब का गिलास लिए हुए थे. वो मुझे नशे की हालत में घूर कर देख रहे थे.


हम दोनों ने कुछ देर बात की और उसके बाद हम दोनों लोग साथ में डिनर करने लगे. मैं डिनर करने अपने रूम में जाने लगी, तो मैनेजर सर ने मुझे रोक लिया और बोले कि तुम कुछ देर मेरे साथ बात करो न प्लीज.. मैं कब से बोर हो रहा हूँ.


मैं भी बोर हो रही थी, इसलिए मैं भी मैनेजर सर से बात करने लगी. हम दोनों लोग अपने अपने परिवार के बारे में बात करने लगे. मैं उस वक्त काफी मॉडर्न कपड़े में थी, जिसमें से मेरी चूचियां दिख रही थीं. मैनेजर सर मुझसे बात करते करते मेरी चूचियों को देख रहे थे.

मैनेजर सर ने मुझसे बात करते करते मुझसे पूछा कि तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?

मैंने मैनेजर सर को बोला- नहीं सर मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है.

जब कि मेरे बहुत सारे बॉयफ्रेंड्स हैं.

मेरा जवाब सुनकर मैनेजर सर बोले- तुम्हारी उम्र में तो मैंने बहुत सारी गर्लफ्रेंड्स बनाई थीं. उनके संग मैंने बहुत मजे भी किए थे.

इसी तरह हम दोनों लोग की बात सेक्स की चर्चा में बदल गयी. मैंने भी सर को खुली छूट दे दी थी. अब हम दोनों लोग सेक्स वाली बातें करने लगे.


मैनेजर सर मेरी चूची की तरफ देखकर मुझसे बातें कर रहे थे. साथ ही हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे. हम दोनों काफी देर तक सेक्स की बातें करने के बाद सेक्स करने के लिए मूड में आ गए थे.


मैनेजर सर अपने लंड पर हाथ फेरते हुए मुझसे मजाक करते हुए बोले- तुम्हारा फिगर तो बहुत अच्छा है.

यह कहते हुए मैनेजर सर मेरे नजदीक आ गए और वे मेरे चूचे पर अपना हाथ रख कर मेरी चूची को मसलने लगे. मैंने उनका कोई विरोध नहीं किया, उल्टे मैं कामुक सिसकारियां लेने लगी और चुदासी होने लगी.


मैनेजर सर ने मेरी चुदास देखी, तो एकदम से मेरा टॉप निकाल दिया और मेरी चूची को मेरे ब्रा के ऊपर से दबाने लगे. मैं भी उनसे चिपकने लगी. वे मेरी ब्रा निकाल कर मेरी चूची को चूसने लगे और मैं सिस्कारियां लेने लगी.


हम दोनों लोग पूरी तरह से सेक्स करने के मूड में आ गए थे. मैनेजर सर मेरी चूची चूस रहे थे और मैं आहें भर रही थी. हम दोनों लोग एक दूसरे का साथ दे रहे थे. मैं अपनी चूची चुसवाते हुए मैनेजर सर के बालों में अपना हाथ फिरा रही थी.

वो कुछ देर मेरी चूची को चूसने के बाद उठे और उन्होंने मेरी सलवार निकाल दी. फिर मेरी पेंटी भी निकाल कर मुझे पूरी नंगी कर दिया. मैं उनके सामने खजुराहो की नंगी मूर्ति की तरह खड़ी थी. इसके बाद मैनेजर सर ने एक सिगरेट सुलगाई और मेरी चूत में उंगली डाल कर मेरी चूत के दाने को मसला. इससे मेरी गरम आह निकल गई. फिर मैनेजर सर ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिए और मेरे साथ लेट गए. वो मेरी चूची को चूस रहे थे और उसके बाद मेरी पीठ को सहलाने लगे. सर मेरी गांड को दबाने लगे और फिर एकदम से 69 में होकर मेरी गांड के छेद में अपनी जीभ घुमाने लगे.


वो बहुत गन्दा सेक्स कर रहे थे. मेरी गांड के छेद को चाटने के बाद वो मेरी चूत को चाटने लगे. मैं वासना से भर कर मादक सिस्कारियां लेने लगी और मेरी भी चूत चुदासी हो गयी थी.


हम दोनों लोग सेक्स के लिए बेचैन हो गए. मैं उनके बालों को खींच रही थी और वो मेरी चूत को चाट रहे थे. मैनेजर सर मेरी चूत को दस मिनट कर चाटते रहे.. मैं झड़ गयी. कुछ पल बाद वो फिर से एक सिगरेट सुलगा कर मुझसे अपना लंड चूसने के लिए बोलने लगे. मैं भी झट से उनका लंड चूसने लगी. मैं बड़े मजे से सर का लंड चूस रही थी और मैनेजर सर मजे से सिगरेट पीते हुए अपना लंड मुझसे चुसवा रहे थे. मैं लंड चूसने के बाद उनका लंड हिलाने लगी.. तो वो भी झड़ गए.


इसके कुछ देर बाद हम दोनों चिपक कर बातचीत करने लगे. फिर चुदास चढ़ी तो मैनेजर सर ने मुझे चित्त लिटा कर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरी चूत को चोदने लगे.


मैं चुदासी होकर उनसे गांड उठाते हुए उनसे चुदवाए जा रही थी. हम दोनों ने दस मिनट तक चुदाई का मजा लिया और उसके बाद झड़ गए. चुदाई करने के बाद हम दोनों बिस्तर पर लेट गए. मेरी चूत पानी से भीग गई थी और चिपचिपी सी हो गई थी.

हम दोनों लोग एक दूसरे को किस करने लगे. मैनेजर सर मुझे चोदने के बाद बोले कि तुमको चोदने में बहुत मजा आया. मैंने भी सर का लंड हिलाते हुए बताया कि मुझे मजा आया.


फिर सर ने बताया कि वो अपनी एक गर्लफ्रेंड को भी चोदते हैं. उनकी वाइफ भी है, लेकिन वो सेक्स करने में बहुत माहिर हैं. वो अपनी नौकरानी को भी चोद चुके हैं.


कुछ देर बाद वो मुझे अपनी नौकरानी के साथ चोदने के लिए बोल रहे थे, लेकिन मैंने उनको मना कर दिया. मैनेजर सर मुझे किस करने के बाद मुझसे थोड़ी देर सेक्सी बातें करते रहे, उसके बाद वो मेरी दोनों जांघों को मसलने लगे. साथ ही वे मेरी दोनों जांघों को चाटने लगे.


मुझे भी सेक्स करने का फिर से मन करने लगा. मेरी दोनों जांघों को चाटने के बाद सर ने मेरी चूत में अपनी दो उंगलियों को डाल दिया और मेरी चूत में अपनी उन दोनों उंगलियों को अन्दर बाहर करने लगे.


इधर मैं लगातार चुदास से भरी सिस्कारियां ले रही थी और उधर वो मेरी चूत में उंगली कर रहे थे. मेरी चूत में बाल थे और इस वक्त मेरी चूत बहुत सेक्सी लग रही थी. मैं अपनी चूत को थोड़े से बालों से सजा कर रखती हूँ क्योंकि मुझे ऐसा करना अच्छा लगता है. हालांकि कभी कभी तो मैं चूत के पूरे बाल साफ़ कर देती हूँ.

सर मेरी चूत में उंगली करने के बाद मेरी चूत को कुत्ते की तरह चाटने लगे. इस वक्त मैं अपनी टांगें पूरी तरह से खोले हुए अपनी चूत उठा कर चुसवा रही थी और सर भी मेरी चूत को खोल कर अन्दर तक जीभ डाल कर मेरी चूत को चाट रहे थे.


इसके कुछ पल बाद हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे और उसके बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर आने के लिए बोला. मैं लपक कर उनके लंड पर बैठ गयी और लंड को अपनी चूत में ले लिया. सर नीचे से मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मुझे चोदने लगे. हम दोनों उछलते हुए सेक्स करने लगे. वो नीचे से अपने लंड को मेरी चूत में डाल कर मुझे चोद रहे थे और इधर मैं उनके लंड की सवारी करने के साटी साथ अपनी चूचियों को सर के मुँह से चुसवा रही थी. हम दोनों की धकापेल चुदाई से बिस्तर भी हिल रहा था.


चुदाई इतनी कामुक हो चली थी कि हम दोनों सेक्स करते करते तेज स्वर में चुदासी आवाजें निकालने लगे.


सर ने शराब पी हुई थी और वे मुझे बहुत जोर जोर से चोद रहे थे. हम दोनों लोग पूरी मदहोशी से सेक्स कर रहे थे. फिर वो मुझे चोदते चोदते मेरे ऊपर आ गए और हम दोनों लोग इसी पोजीशन में सेक्स करने लगे. वो मेरे ऊपर आ कर मेरी चूत को इतना मस्त चोद रहे थे और मुझे किस कर रहे थे कि मुझे नशा सा होने लगा था.


कुछ देर बाद हम दोनों सेक्स करते करते झड़ गए. इस तरह से हम दोनों ने दो बार सेक्स किया था, हम थक गए थे.


सेक्स करने के बाद हम दोनों यूं ही नंगे ही बिस्तर पर लेट कर एक दूसरे को किस करने लगे.

कुछ देर आराम करने के बाद हम दोनों बाहर घूमने चले गए. हम दोनों जिस होटल में रुके थे. वहां बहुत अच्छा पार्क था और रात में भी कुछ कपल लोग वहां पर घूम रहे थे. हम दोनों अब सेक्स कर चुके थे, इसलिए हम दोनों लोग शांत हो गए थे और एक दूसरे की बांहों में हाथ डाल कर शांति से पार्क में घूमने का मजा ले रहे थे.


होटल से बाहर के लोग हमें कपल समझ रहे थे, लेकिन हम दोनों होटल में अलग अलग रूम में रहते थे.


दूसरे दिन मीटिंग थी और ऑफिस से भी कुछ लोग आ रहे थे. मेरे साथ काम करने वाली एक दो और लड़की भी मीटिंग के लिए आई थीं, लेकिन उन सब लोगों को मैनेजर सर ने दूसरे होटल में रुकने के लिए कहा. वो लोग दूसरे होटल में रुके थे, जो हमारे होटल से कुछ दूरी पर था.


मीटिंग के बाद भी हम दोनों कुछ दिन का काम का बहाना बना कर रुके रहे थे. अब तो मैंने अपना कमरा खाली कर दिया था और सर के साथ ही उनके रूम में ही शिफ्ट हो गई थी. रोज रात को मैनेजर सर के साथ मैं खूब चुदवाती थी. वो भी मुझे दारू पी कर खूब चोदते थे.


एक दिन हम दोनों को सेक्स करते हुए होटल के एक वेटर ने देख लिया था. वो वेटर मुझे देख कर बहुत हँसता था और बाद में मैनेजर सर ने उसको कुछ पैसे दिए कि वो ये बात किसी से नहीं बताए.


हम दोनों कुछ दिन मस्ती करने के बाद वापस अपने घर आ गए.


अब हम दोनों जब भी मीटिंग के लिए जाते हैं, तो उसी होटल में रुकते हैं और सेक्स करते हैं.

वो वेटर अब वहां काम नहीं करता है, लेकिन मैं जब भी उस होटल में जाती हूँ, तो उस वेटर को जरूर याद करती हूँ, जिसने मुझे मैनेजर सर से चुदवाते हुए देख लिया था.


हम दोनों आज भी एक दूसरे के साथ सेक्स करते है. आप सबको मेरी सेक्स स्टोरी कैसी लगी. आप सब मुझे मेल करके बताएं. आप सब मेरी कहानी का फीडबैक जरूर दीजिये. आप सबके अच्छे फीडबैक मिले, तो मैं अपनी अगली कहानी बहुत जल्द आपको बताउंगी. आप सबके मेल का इंतज़ार करूँगी

मेरे लंड को मिली सुपरवाईजर की बीबी की चूत - My cock got the pussy of the supervisor's wife

 मेरे लंड को मिली सुपरवाईजर की बीबी की चूत

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


ऑफिस सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरे सीनियर की बीवी को चोट लग गयी. वो घर में नहीं था तो उसने मुझे अपने घर भेजा. वहां क्या हुआ?


नमस्ते मित्रों, अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स कहानी में आपका स्वागत है।


मैं राज शर्मा हूं और गुड़गांव में एक कंपनी में काम करता हूं। मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है. मुझे चूत मारने का कुछ ज्यादा ही शौक है.


आज मैं आपको अपनी ठरक की ऐसी ही बॉस की हॉट बीवी सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूं. मगर इस कहानी की नायिका मुझसे भी ज्यादा ठरकी निकली. वो मुझे बाद में पता चला.


जिस कंपनी में मैं काम करता हूं वहां पर मेरे सुपरवाइजर से मेरी अच्छी बनती थी. उसको सभी खन्ना कहकर बुलाते थे. वो मेरे काम से हमेशा संतुष्ट रहते थे और कंपनी में हमेशा मेरी मदद करते थे।


खन्ना जी की उम्र 45 साल थी। मैं एक दो बार उनके घर भी जा चुका था. इसलिए उनकी बीवी से भी मेरी थोड़ी जान पहचान थी. नायिका उसकी बीवी ही है जिसका नाम आपको कहानी में अंदर पता चलेगा.


उसकी बीवी 35 साल की थी. उन पति पत्नी की उम्र में फासला थोड़ा ज्यादा था. बीवी तो उनकी मस्त माल थी. बड़े बड़े बूब्स, भारी गांड, गोरी त्वचा, 34-30-34 का फिगर. जिसको देखकर किसी का भी लंड मचलने लगे।


जब वो चलती थी तो उनकी गांड ऐसे मटकती कि नज़र हटाने का मन नहीं करता था। खन्ना जी के घर में उनकी बूढ़ी मां और उनका एक बेटा था।

बेटा स्कूल जाया करता था और उनकी माता जी की नजर बहुत कमजोर हो चुकी थी. उनको देखने में दिक्कत होती थी. वो किसी को ठीक से पहचान नहीं पाती थी. ज्यादा पास जाने पर ही पहचान पाती थी.


एक दिन खन्ना जी कंपनी के काम से चंडीगढ़ गये थे. मेरी तबियत ठीक नहीं लग रही थी तो मैंने छुट्टी कर ली और रूम पर रूक गया।


दिन में करीब 11 बजे मेरा फोन बजा.

खन्ना जी का ही कॉल था- हैलो राज, कहां हो?

मैंने कहा- मैं रूम पर हूं।


खन्ना- तू जल्दी से मेरे घर पहुंच.

मैंने कहा- क्या बात है सर?

वो बोले- तेरी भाभी किचन में फिसल गई है और चोट लग गई है. घर में अम्मा के अलावा कोई नहीं है. तू जल्दी जा और अस्पताल में दिखवा दे।

मैंने कहा- ठीक है, मैं अभी जाता हूं.


फिर मैंने जल्दी से कपड़े पहने और तैयार होकर घर से निकल गया.

मैं ऑटो से जल्दी उनके घर पहुंचा।


जाकर मैंने गेट से आवाज दी- भाभी, मैं राज … गेट खोलो.

अंदर से आवाज आई- गेट में जोर से धक्का मारो, खुल जाएगा।

मैं गेट खोलकर अंदर आ गया और गेट वापस बंद कर दिया।


मैंने कहा- भाभी कहां हो?

वो बोली- अंदर आओ.

मैं रूम में घुसा तो अम्मा लेटी थी।

फिर दूसरे रूम में गया।

भाभी बिस्तर पर लेटी थी और दर्द से कराह रही थी।

मैंने कहा- कैसे हुआ?

वो बोली- किचन की सफाई करते हुए गिर गई।

मैंने कहा- खन्ना जी का फोन आया था, आप अस्पताल चलो!


वो बोली- नहीं, वहां अलमारी में दवा रखी है, वो लगा दो. उसी से आराम आ जायेगा, मैं अस्पताल नहीं जाऊंगी. मुझे फालतू की दवाई नहीं खानी है.


मैंने अलमारी खोली और दवा ढूंढने लगा.

मेरे हाथ में कंडोम का पैकेट आ गया।

मैंने उसे रख दिया और दवा लेकर बेड पर आ गया.


मैंने पूछा- भाभी कहां दर्द हो रहा है?

उसने अपनी साड़ी ऊपर कर दी। उसकी जांघों पर लाल निशान थे. मैं दवा धीरे धीरे मलने लगा।


अब मेरा लंड खड़ा होने लगा।

मैंने कहा- भाभी दवा साड़ी में लग रही है।

वो बोली- हां लग तो रही है लेकिन थोड़ा बचाकर मालिश करो.


मैं मालिश करता रहा लेकिन बार बार दवा साड़ी पर लग रही थी.

वो बोली- रुको, मुझे ही करने दो.

मैं बोला- अरे नहीं, मैं कर देता हूं. खन्ना जी ने आपके लिए ही तो भेजा है मुझे.


वो बोली- तो फिर ऐसे तो मेरी साड़ी खराब हो रही है. साड़ी मैं उतार भी नहीं सकती हूं तुम्हारे सामने.

मैं बोला- कोई बात नहीं, मैं साड़ी बचाकर कर देता हूं.


फिर उसने साड़ी और ऊपर कर ली. उसको थोड़ा अजीब तो लगा क्योंकि उसकी पैंटी मुझे साफ दिख रही थी.


पैंटी देखने के बाद मेरे लंड की हालत और खराब हो गयी. मेरा लंड पैंट में अलग से झटके लेने लगा. हो सकता है कि शायद भाभी ने मेरा उछलता हुआ लंड देख भी लिया हो क्योंकि उसके बाद वो साड़ी उतारने के लिए तैयार हो गयी.

उसने फिर साड़ी व पेटीकोट दोनों निकाल दिये. मैं मुंह घुमाए खड़ा था और भाभी ने पेट से लेकर जांघों तक एक कपड़ा डाल लिया.

अब उसकी जांघें ऊपर तक नंगी थीं. केवल उसकी पैंटी वाली जगह तक ही कपड़ा ढका हुआ था.


मैं उसकी भरी गोरी गोरी जांघों को सहला सहलाकर दवा लगाने लगा। अब उसको मेरे हाथों की मालिश अच्छी लगने लगी थी. उसके चेहरे पर आनंद और हल्की उत्तेजना के भाव थे.


मेरा हाथ भाभी की जांघों पर उसकी चूत के पास तक पहुंच रहा था. मुझसे अब रुकना मुश्किल हो रहा था. भाभी भी शायद गर्म हो रही थी. अब उसने कपड़े को हल्का सा और ऊपर कर दिया.


मुझे फिर से उसकी पैंटी दिखने लगी. फिर उसने कपड़ा थोड़ा और ऊपर कर लिया. अब उसकी झांटों तक का एरिया मुझे दिख रहा था. शायद भाभी सिग्नल दे रही थी.


मैंने भी थोड़ी हिम्मत की और जांघ मसलने के बहाने उंगलियों को पैंटी के अंदर तक ले जाकर वापस ले आया. उसने कुछ नहीं कहा. अब तो मैं और पागल हो गया. अब मेरा लक्ष्य भाभी की चूत को छूना था.


अबकी बार मेरी उंगली सीधी उसकी चूत को छू गयी और भाभी ने आंखें बंद कर दीं. उसने कपड़े को पूरा हटा दिया और अपनी जांघें खोल कर आराम से आंखें बंद करके लेटते हुए बोली- लो, आराम से कर लो.


इशारा मैं समझ गया था.

मैंने अब बार बार भाभी की चूत को छूना शुरू कर दिया.


वो गर्म होने लगी और एकदम से उसने मेरे हाथ को चूत के पास पकड़ लिया और उसको चूत पर दबा दिया.


बस फिर क्या था … मैं अब बेकाबू हो गया.

मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी में घुसा दिया और दूसरे हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा।


वो अब सिसकारने लगी- आह्ह … राज … ओह्ह … ये क्या कर रहे हो!

मैंने कहा- वही जो आप चाहती हो.


वो बोली- तो फिर ऊपर आ जाओ ना … इतनी दूर क्यों हो.

कहते हुए वो अपने बूब्स दबाते हुए मचलने लगी.


मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा खोल लिये, उसके मम्में आजाद कर दिये.

उसने मेरे लोवर में हाथ डालकर लंड को पकड़ लिया और मसलने लगी।

मैंने उसकी चूत में उंगली घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा।

वो सिसकारने लगी ‘आह्ह … आह्ह … ऊईई ऊईई’ करके आवाजें करने लगी.


मैंने कहा- धीरे से भाभी जी … आपकी अम्मा जी सुन लेंगी.

वो बोली- उनकी चिंता मत करो। तुम करते रहो. बस मजा आ रहा है.

फिर उसने मुझे नंगा कर दिया और लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.


बहुत मस्त लौड़ा चूस रही थी वो. मैं तो पागल सा हो उठा. मैं लंड से मुंह को चोदने लगा और उसकी चूचियों को दबाने लगा।

उसने लंड को जमकर चूसा. फिर मेरे मुंह में अपनी चूत रखकर उछालने लगी.


मैं जीभ घुसा घुसाकर चूत चाटने लगा।

मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया और ऊपर आ गया। मैं अपने लौड़े को चूत के होंठों पर रगड़ने लगा और चूत के रस से लंड को चिकना कर दिया।


अब मैं और नहीं रुक सकता था. मैं भाभी की चुदाई करने के लिए तड़प गया था. फिर मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया और वो जोर से चिल्लाई- उईई … आईई … आह्ह … निकाल ले … मर जाऊंगी मैं!


तभी मैंने उसके होंठों को चूसना शुरु कर दिया और लंड को रोक दिया। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ तो मैंने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया.


वो आह्ह … आह्ह … की सिसकारियों के साथ चुदने लगी और कहने लगी- हां … चोद दे … आज मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दे. मेरी चूत को फाड़ दे.

उसकी चुदास देखकर मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी और गपागप गपागप लंड अंदर बाहर करने लगा।

उसकी आंखों में चमक आ गई और अब वो लंड का मज़ा लेने लगी।


वो बोली- राज, तुम मुझे ऐसे ही चोदो, मुझे चिल्लाने दो, तुम रूकना नहीं। मेरे पति के लंड मे ताकत नहीं है, तेरा लौड़ा … आह्ह आअह् … तेरा लौड़ा … चोदो मुझे राज … आह्ह … चोदते रहो.


मैंने कहा- अब तुम मेरे लंड पर बैठोगी?

वो बोली- हां बैठूंगी.


फिर वो लंड पर थूक लगा कर बैठ गई. लंड सटाक से चूत में घुस गया.

वो आह्ह आह्ह करते हुए लंड पर उछलने लगी और साथ में उसकी चूचियां भी उछलने लगीं.


मेरे लंड पर उछल उछल कर वो अपनी गांड पटक रही थी.

वो बोली- मेरा पति बुड्ढा है. उसके लंड में दम नहीं है. वो मेरी चूत को ठंडी नहीं कर पाता है. आज से मेरी चूत में तुम्हारा लंड राज करेगा।


मैं उसकी चूत में लन्ड रगड़ने लगा और उसकी सिसकारियां बहुत तेज़ हो गईं. उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

अब फच्च फच्च … की आवाज के साथ लंड उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था.


हम दोनों पसीने में लथपथ हो गये थे. मैंने उसको गोद में उठा लिया और वो हॉल में चलने के लिए कहने लगी.

मैं बोला- अम्मा आ गयी तो?

वो बोली- तुम बहुत डरते हो. कुछ नहीं होगा. तुम चलो बाहर!


मैं उसे गोद में उठाकर हॉल में ले आया. मेरा लौड़ा पूरा गीला हो चुका था।

मैंने कहा- अब क्या करना है?

वो बोली- राज तुम मुझे जैसे चाहो चोदो, मैं आज से तुम्हारे लौड़े की गुलाम हूं।


फिर मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया और दोनों पैर उठाकर लंड घुसाया और उसके ऊपर चढ़ गया और तेज़ तेज़ झटके मारने लगा. अब उसकी आवाजों से पूरा हॉल गूंजने लगा।


मैंने चुदाई और तेज़ कर दी. उसकी जांघों पर पसीना भर गया और फच्च फच्च की आवाज आने लगी।

वो बोली- राज तुम मुझे हमेशा ऐसे ही चोदोगे?

उसको कस कर धक्के देते हुए मैंने कहा- हां, ऐसे ही चोदूंगा.

थोड़ी देर बाद मैंने उसे उठाकर घोड़ी बना दिया और चोदने लगा.


अब वो अपनी गांड को पीछे करने लगी और धक्के लगाने लगी।

हम दोनों बहुत मजा लेने लगे.


मैंने कहा- आप बहुत खूबसूरत हो.

वो बोली- ये क्या तुमने आप … आप … लगा रखा है. मुझे सपना कहो.


फिर मैं उसको और तेजी से चोदने लगा. वो भी मुझे झटके देने लगी. अब दोनों में जैसे चुदाई की रेस चल रही थी.


उसकी एक बार फिर से चीख निकली और उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया.


मैंने भी झटकों की रफ्तार तेज कर दी और तेजी से लंड को अंदर-बाहर करने लगा. अब मेरा लौड़ा मेरे काबू से निकल गया उसकी चूत को मैंने वीर्य से भर दिया।

मैंने लंड निकाल लिया और उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया.


फिर मुझे अपने बदन से चिपका कर वो सोफे पर लेटी रही. दोनों पसीने से लथपथ हो गये थे और थोड़ी देर बाद उठे. फिर हम बाथरूम में साथ नहाने लगे।


दोनों ने एक दूसरे को साबुन से साफ किया। फिर हम दोनों रूम में आ गए.


वो किचन से बादाम का दूध लाई और मुझे पिलाने लगी। अब मैं कपड़े पहनने लगा तो उसने मेरे कपड़े छुड़ाकर फेंक दिए.


मैंने उसको हैरानी से देखा तो वो बोली- इतनी आसानी से नहीं जाने दूंगी. फिर उसने मेरे मुंह में अपनी चूची लगा दी. मैं उसकी चूची पीने लगा. उसने फिर एक चॉकलेट ली और मेरे लंड पर लगा दी.


अब वो मेरे लंड को चूसने लगी. उसने लंड को चूसकर लाल कर दिया. अब मैंने उसे उल्टा लिटा दिया और उसकी गान्ड के छेद को चाटने लगा. उसकी गान्ड टाइट थी।


मैंने अलमारी से वैसलीन उठाई और गांड के छेद में भर दी और उंगली डालने लगा। वो ऊईई इईई … ऊईई करने लगी. उसकी गांड का छेद खुलने लगा.


फिर मैंने लंड पर थूक लगाया और गांड के छेद पर टिका दिया.

अब मैंने उसकी गांड में एक जोर का धक्का मारा तो उसकी चीख निकल पड़ी और लंड उसकी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। मैं रूक गया और उसकी गर्दन को चूमने लगा।


उसका चेहरा लाल हो गया और दर्द आंखों से बाहर आने लगा। फिर मैंने लंड को बाहर निकाल लिया और तेल में डुबा दिया. फिर उसकी गांड में तेल डाला.


मैंने फिर से लंड को गांड पर टिकाया और अंदर धकेल दिया. लंड अबकी बार फिसलकर गच्च से अंदर चला गया. वो कराहटों के साथ सपना अपनी गांड को आगे पीछे करने लगी।


कुछ देर बाद उसको चुदाई में मजा आने लगा. अब दोनों ही चुदाई का मज़ा लेने लगे और धक्के पर धक्के मारने लगे।

मैंने कहा- खन्ना जी तुम्हारी गांड चोदते हैं क्या?


वो बोली- वो बुड्ढा क्या चोदेगा? उसके लन्ड में दम नहीं है। बस चार झटके मारकर सो जाता है और मुझे तड़पने के लिए छोड़ देता है।

अब मैं जोर जोर से झटके मारने लगा और वो खुद अब मज़ा लेकर चुदाई करवाने लगी।


मैंने उसे जमकर चोदा और फ़िर उसकी गान्ड में लन्ड का पानी छोड़ दिया. वो बहुत खुश हुई. उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और होंठों को चूसने लगी।


अब उसके बेटे के आने का टाइम हो गया. हमने कपड़े पहने और हॉल में आ गए। मैं अपने रूम में आ गया और सो गया।

मैं चुदाई करके थक चुका था इसलिए मुझे गहरी नींद आ गयी.


फिर उसका 8 बजे फोन आया कि राज घर आ जाओ.

मैं समझ नहीं पाया कि अभी तो मैं आया था. फिर से ये बुला रही है?


खैर, मैं पहुंचा तो वो गेट पर खड़ी थी। वो मुझे रूम में ले गई. उसका बच्चा अम्मा के साथ सो रहा था।


फिर से हमारी चुदाई चालू हो गई और रात में तीन बार मैंने उसकी गान्ड मारी और एक बार उसकी चूत में पानी छोड़ा।

मैं सुबह जब जागा तो उसका बेटा स्कूल जा चुका था।

फिर मैंने उसको किचन में, बाथरूम में, हॉल में और सीढ़ियों में लिटाकर जमकर चोदा और शाम को रूम पर आ गया।

उसके बाद जब भी मौका मिलता सपना मुझे घर बुला लेती और अपने बिस्तर पर ले जाती.


दोस्तो, इस तरह से मैंने अपने बॉस की हॉट बीवी सेक्स का मजा लिया. वो मेरे लंड से चुद चुदकर मेरी दीवानी हो गयी. यदि किसी पुरूष मित्र ने ऐसे ही कभी अपने बॉस की बीवी को चोदा हो तो मुझे भी बतायें.

मेनेजर मैडम की हवस और मेरा लंड - Manager madam's lust and my penis

 मेनेजर मैडम की हवस और मेरा लंड

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


ये कहानी है तक़रीबन आठ महीने पुरानी है. मेरी कंपनी में प्रितेश सर मेरे डिपार्टमेन्ट के सीनियर थे. वो ही सीधे सीधे सारिका मेम को रिपोर्ट करते थे. सारिका मेम हमारी कंपनी की मैनेजर थीं.


सारिका मेम के बारे में बताऊं तो वो एक अड़तीस साल की औरत हैं, जो कि कमाल की माल हैं. उनका एक बच्चा भी है. उनका रूप बताऊं तो वो दूध सी गोरी हैं और उनका 36-28-34 का फिगर है. आप बस यूं समझिए कि वो हमारी कंपनी की माल हैं. वो ऑफिस आती हैं तो सब उनको ही देखते रहते हैं.


हुआ यूं कि हमारी कंपनी का एक प्रोजेक्ट खत्म होने को था, तो अगले प्रोजेक्ट के लिए क्लाइंट से मीटिंग होनी थी. साधारणतया क्लाइंट को मेम ही संभालती हैं. लेकिन इस बार की कंपनी मीटिंग में यह तय हुआ था कि अब से क्लाइंट से मीटिंग में हमारे डिपार्टमेंट का कोई आदमी भी रहेगा.


इस मीटिंग के तकरीबन चार हफ़्तों के बाद किसी क्लाइंट के साथ बंगलोर में मीटिंग थी, तो हमारे डिपार्टमेंट से हमारे बॉस जाने वाले थे.


तय हुआ कि क्लाइंट के साथ चौबीस तारीख को मीटिंग होगी. तो मेम और हमारे बॉस 22 तारीख को ही फ्लाइट से जाने वाले थे. लेकिन पता नहीं क्या हुआ कि बीस तारीख को मेरे बॉस ने मुझे उनके ऑफिस में बुलाया और कहा कि मैं बंगलोर नहीं जा सकता क्योंकि मेरी कुछ निजी दिक्कतें हैं, तो तेरे को मेम के साथ जाना होगा.

मेरे बॉस को मेरे पे भरोसा था … इसलिए वो मुझे भेज रहे थे. मुझे मेरे बॉस ने बोला कि देख जय तेरे को परसों जाना है … तू कल हाफ डे लेकर पैकिंग कर ले और प्रेजेंटेशन अच्छे से देना. वैसे तो मेम हैं ही तेरे साथ … मैंने मेम को बता दिया है कि मैं तेरे को उनके साथ भेज रहा हूँ.


मैं वहां से हां बोल कर चला गया.


फिर मैंने 21 को अपनी पैकिंग कर ली और मेम से मिल कर बात कर ली. मेम ने बोला कि 22 को दोपहर के ढाई बजे की फ्लाइट है, तो डेढ़ बजे एयरपोर्ट पे मिलते हैं. वहां बंगलोर में होटल बुक है. मैं खुश था क्योंकि मेम के साथ जा रहा था और बंगलोर घूमने को भी मिल रहा था.


मैं ठीक डेढ़ बजे एयरपोर्ट पहुंच गया. मेम भी दस मिनट में आ गईं. मेम को देख कर मैं तो पागल ही हो गया … क्योंकि मेम को मैंने कभी कैपरी और टी-शर्ट में नहीं देखा था.


मेम की चूचियां तो टी-शर्ट फाड़ कर बाहर आ रही थीं और गांड भी टाइट कैपरी में साफ़ दिख रही थी. जैसे तैसे करके मैंने अपने आपको संभाला. कुछ देर बाद हम दोनों फ्लाइट में बैठ गए.


हम पांच बजे बंगलोर पहुंच गए. वहां से आधे घंटे में होटल, जहां पे हमारी रूम बुकिंग थी.

छह बजे होटल पहुंच कर मेम ने कहा कि अभी रेस्ट कर लो … आठ बजे डिनर के लिए मिलते हैं.

हम दोनों अपने अपने रूम में चले गए मैं थोड़ा फ्रेश होकर टीवी देख रहा था. डेढ़ घंटे बाद मैंने देखा तो साढ़े सात बज चुके थे … तो मैं फटाफट तैयार हो गया और ठीक आठ बजे मैंने मोबाइल उठा कर मेम को फ़ोन करने के लिए सोचने लगा. फिर मैंने सोचा कि मेम के रूम में ही चला जाता हूँ और पूछ लेता हूँ कि वो तैयार हैं या नहीं.


मैंने मेम के रूम के बाहर जाकर नॉक किया और एक मिनट बाद दरवाजा खुला. मैं देख के दंग रह गया. मेम नाईट सूट में थीं और नहाने जाने की तैयारी कर रही थीं … ऐसा इसलिए लगा क्योंकि उनके हाथ में टॉवल था.


इस वक्त नाइटी में से उनके बोबे साफ़ दिखाई दे रहे थे.

उन्होंने कहा- अरे जय … सॉरी मैं रेडी नहीं हूँ … मुझे थोड़ी देर लगेगी.

मैंने कहा- तो मैं मेरे रूम में जाता हूँ मेम … आप रेडी हो जाओ तो कॉल कर देना.

मेम- अरे जय बैठो न इधर ही … टीवी देखो … मैं भी कब से बोर ही हो रही हूँ. मैं अभी दस मिनट में रेडी हो जाऊंगी.


मैंने सोचा कि ऐसा मौका कब मिलेगा, तो मैंने टीवी चालू किया और सोफे पे बैठ गया. वो नहाने के लिए बाथरूम में घुस गईं और मैं टीवी देखने लगा.


तक़रीबन दस मिनट के बाद वो बाथरूम से निकलीं और जो कमरे के बाजू में ड्रेसिंग रूम जैसा एक रूम था, वे उसमें चली गईं. वो क्या कयामत लग रही थीं … मैं तो उनको ही घूरे ही जा रहा था. जब वो बाहर आईं तो उन्होंने एक टी-शर्ट और जीन्स पहनी हुयी थी. उसमें से उनके चुचे बहुत बड़े दिख रहे थे.


टीवी एक ओर चल रहा था और मैं तो उनको ही घूरे जा रहा था. उन्होंने मेरे से बात करनी चालू की कि जय कैसा चल रहा है … और इधर उधर की बातें करने लगीं. उनसे बात करके समय भी मैं उनके तने हुए बोबों को ही देख रहा था और ये चीज़ वो भी नोटिस कर रही थीं.

फिर अचानक से बात बात में मुझसे उन्होंने पूछ लिया- जय तूने कितनी गर्लफ्रेंड पटा रखी हैं?

मैं उनकी इस बात से चौंक गया. उनके फेस के एक्सप्रेशन भी बदल चुके थे.

मैंने थोड़ा शर्मा कर बोला- क्या मेम आप भी … मेरी तो एक भी नहीं है.

मेम- अरे क्या लड़की तरह शर्मा रहा है.

मैं बोला- अरे मेम कोई है ही नहीं … तो क्या बोलूँ.

मेम- लगता नहीं है कि तेरे जैसे की कोई जुगाड़ नहीं है.


उनके मुँह से जुगाड़ शब्द सुना तो फिर मैंने भी हिम्मत करके बोल ही दिया- मेम आप जैसी और आप जैसे फिगर वाली कोई मिली ही नहीं न … इसलिए मन नहीं बना.

मेरी इस बात से वो हल्का सा मुस्कुराईं और जानबूझ कर अपने मम्मों को तानते हुए बोलीं- फिगर?


मैं उनके तने हुए मम्मों को ललचाई नजरों से देखने लगा.

इस बात को देख कर थोड़ी देर मेम कुछ नहीं बोलीं … फिर बोलीं- वैसे क्या अच्छा लगता है … मेरे फिगर में?


अब वो मुझसे बात करने के लिए मेरे बगल में बैठ चुकी थीं.तो मैंने हिम्मत करके बोला कि मेम आपकी हिल्स बहुत कातिल हैं.

मैं सोच रहा था कि कहीं मेरी जॉब खतरे में न आ जाए. लेकिन मैं एक तरफ ये भी सोच रहा था कि ऐसा मौका बार बार नहीं आता.

इतना बोलते ही उन्होंने मेरी नज़रों में नज़रें डाल कर देखा और एक मिनट देखती रहीं.इसके बाद में मेम ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने बड़े बड़े चूचों पे रख दिया.

वे हवस भरी आवाज़ में बोलीं- ऐसा है तो उनको मसल दे ना!


मैं लग गया और इसके बाद में धीरे धीरे उनकी चूचियों को दोनों हाथ से मसलने लगा. वो अह्हा अहा … करते हुए आहें भरने लगीं.


थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों पे रख दिए और हम दोनों जोर जोर से किस करने लगे. बाद में मैंने उनकी टी-शर्ट निकाल फेंकी और चूची चूसने लगा. उन्होंने भी थोड़ी देर मज़ा लेने के बाद मेरा पेंट उतार दिया और चड्डी में से लंड निकाल कर चूसने लगीं.


कुछ ही देर में हम दोनों नंगे हो चुके थे. वो मेरा लंड चूसे ही जा रही थी. थोड़ी देर लंड चूसने के बाद वो बोलीं- अब मत तड़पा … बहुत हफ़्तों से इसने कोई लंड नहीं खाया … डाल दे इसमें.


मैंने अपना लंड मैडम की चूत में डाल दिया. धकापेल चुदाई होने लगी. पन्द्रह मिनट की इस ताबड़तोड़ चुदाई में वो तीन बार झड़ चुकी थीं. अब मेरा पानी निकलने वाला था. मैंने बताया कि पानी आने वाला है.

मेम बोलीं- डाल दे चूत में ही.


मैंने ऐसा ही किया और सारा पानी उनकी चूत में ही छोड़ दिया. चुदाई के बाद हम दोनों बेड पर एक दूसरे को लिपटाए हुए पड़े थे. फिर मैं बोला- मेम मेरा परफोर्मेंस कैसा लगा?


मेम बोलीं- इधर मेम मेम न कर … जस्ट कॉल मी सारू.

मैंने बोला ओके … कैसा रहा सारू?

वो मुझे चूम कर बोलीं- टॉप ऑफ़ द वर्ल्ड!

फिर दस मिनट हम दोनों ऐसे ही लिपट कर सोये रहे. बाद में उन्होंने बोला कि चलो चलते हैं … भूख लगी है.

मैंने बोला- खाना यहीं आर्डर कर देते हैं.

क्योंकि मैं दूसरी इनिंग चालू करने के फ़िराक में था.


उन्होंने बोला- जरा तसल्ली रख … रुक जा हमारे पास पूरी रात पड़ी है … खाना कहीं बाहर अच्छे रेस्टोरेंट में चल कर करते हैं.


थोड़ी देर बाद हम तैयार हो कर खाना खाने के लिए ऐसे निकले, जैसे कोई कपल हों. हम दोनों वैसे हाथ में हाथ डाल कर बाहर आ गए.


खाना खाने के बाद पूरी रात में हम दोनों ने तीन बार चुदाई की और मैं मेम के रूम में ही शिफ्ट हो गया.


दूसरे दिन हमारी मीटिंग थी. वो अटेंड करके हम दोनों फिर से वड़ोदरा आ गए.


फ्लाइट में उन्होंने मुझसे कहा कि बंगलोर में जो हुआ … उसको बंगलोर में ही छोड़ देना.

मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती हैं … क्योंकि वो शादीशुदा औरत थीं … तो मैंने भी कुछ नहीं कहा.

मैंने बोल दिया- ओके मेम.

वो हल्का सा मुस्कराईं और बाद में कभी भी हमारे बीच ये ट्रिप की कोई बात ही नहीं हुई.

पति ने दिया दर्द मैं और मेरा लंड बना हमदर्द - My husband gave me pain and my penis became my sympathiser

 पति ने दिया दर्द मैं और मेरा लंड बना हमदर्द

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


हैलो दोस्तो, और प्यारी सी चूतों वाली भाभियों और गरम लड़कियों.. उम्मीद है आप लोग अपना वीकेंड मजे से मना रहे हो। इधर तो हाल बेहाल हैं.. वीकेंड बहुत गर्म था।


दोस्तो, पति से सताई औरत के अगले पार्ट में आपको मेरी रोमांचक चुदाई वाली लाइफ में आगे लेकर चलता हूँ।


जैसा कि आप जानते हैं, निधि और मैं भी हमबिस्तर होना शुरू हो गए थे लेकिन बिना किसी फीलिंग्स के, सिर्फ़ चुत और लंड का रिश्ता था, जिसमें एक विश्वास के साथ सिर्फ ज़िंदगी के मज़े लेने का रिश्ता था।


इधर दिव्या के साथ भी अच्छा समय निकल रहा था। मैं दिव्या से अगले दिन जाकर मिला और लिफ्ट के पास उसे हमेशा की तरह पकड़ लिया, मैंने उसको स्मूच करके कहा- बेबी मान भी जाओ ना!

उसने दबी आवाज़ में कहा- ओके..

मैंने कहा- मतलब तुमने माफ़ नहीं किया?

तो कहती- यार तुम जानते हो.. आई हेट टू कन्सीव नाउ!

मैंने कहा- यार पूछा, लेकिन किया नहीं ना, तेरी इच्छा के बगैर कुछ किया?

यह मैंने थोड़ा चिढ़ कर बोला, तो उसका गुस्सा कुछ ठंडा हुआ।

फिर कहती- रात क्या किया?

मैंने कहा- बस तेरे बगैर किसी तरह रात निकाल ली।

दिव्या- हाँ, जैसे मुझसे मिलने से पहले रोज़ रात को किसी को पेलते थे।

मैं- जबसे तू मिली.. तबसे आदत खराब हो गई।

दिव्या- तो सुधार लो न!

मैं- हाँ.. तभी सोच रहा तेरे फ्लैट पर ही शिफ्ट हो जाऊँ।

दिव्या ने आँखें बड़ी करके कहा- हट पागल।


मैंने उसको लिफ्ट में दबाया और उसकी चुची ड्रेस के ऊपर से ही चूस ली।

दिव्या- छोड़ ना यार.. शाम के लिए भी बाकी रख न!

मैंने कहा- माल बहुत जमा हो गया है.. तेरी भूख मिटाने को।

ये कह कर मैंने उसको अपने करीब लाकर कस के पकड़ लिया।

दिव्या- पता है.. बहुत गर्म हो, चलो अब जाने दो।

मैं- ओके.. मेरी रानी चाय पे मिलेंगे।


फिर मैंने पूरा दिन दिव्या का वेट किया, उसका कोई मैसेज नहीं आया।


मैं चाय पीने उठा तो देखता हूँ कि कैंटीन में राम और दिव्या बैठे हैं। मैंने उन दोनों को डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।


शाम तक दिव्या से थोड़ी बहुत हल्की-फुल्की बात हुई।


हमारे ऑफिस के बगल में एक खाली जगह है.. वहाँ पेड़ आदि लगे हुए है संकरा सा रास्ता भी बना हुआ है, जो वेयरहाउस को जाता है। शाम को चाय के बाद राम और दिव्या वहाँ से उधर वेयरहाउस की तरफ जा रहे थे। मैंने कॉल किया तो दिव्या ने इग्नोर कर दिया।


मैंने थोड़ा पीछा किया।

मैं वहाँ थोड़ी देर बाद गया भी और कॉल भी किया तो उसने झूठ कह दिया कि मैं किसी काम से बाहर हूँ, बाद में कॉल करूँगी।


मैंने वहाँ जाकर देखा तो राम उससे लिपटा हुआ था और दिव्या को खुद पर ज़ोर से दबाते हुए खींच रहा था। दिव्या ने आँखें बंद कर रखी थीं और वो भी राम से लिपटी जा रही थी।

राम ने उसकी गांड दबाते हुए उसकी चुत अपने लंड के करीब की.. तो वो राम के कान में कुछ बोली।

मुझे लगा कि उसने कहा होगा- अभी नहीं शाम को करेंगे।

इस बात के बाद राम ने उसको छोड़ दिया और वे दोनों वापिस आने लगे।


शाम को मेरी सोच के मुताबिक ही हुआ, मैंने दिव्या को देरी से निकालने का बताया तो वो कहती कि ठीक है।

वो इतना कह कर ऑफिस से निकल गई।


देर शाम के करीब 9.30 बजे मैंने, उसको डिनर के लिए कॉल किया, तो कहती- मेरी फ्रेंड और उसका ब्वॉयफ्रेंड आया है, मैं उनके साथ जा रही हूँ।

मैंने कहा- ठीक है।


मैं यह जानने के लिए राम से मिलने गया कि वो क्या कर रहा है.. मेरी सोच के अनुसार वो घर पर नहीं था।


मैंने सोचा कि चलो दिव्या के रूम पर जाकर उसका वेट करता हूँ और अपने कपड़े ले आऊँ, मेरे कुछ कपड़े उसके कमरे पर पड़े थे।

मैं गया तो देखा कि वहाँ लाइट जल रही थी।


मैंने सोचा कि कोई चोर या कोई और तो रूम में नहीं घुस गया, मैं विंडो के पास गया तो हैरान रह गया।

दिव्या राम की गोद में सिर रखकर लेटी थी.. राम उसके बाल सहला रहा था। फिर बातें करते हुए राम ने उसको ज़ोर से डांटा.. क्योंकि दिव्या ने उसकी च्यूंटी काटी थी।


दिव्या ने बड़ी मासूमियत से कहा- डांट क्यों रहे हो यार?

राम- नहीं यार मुझे च्यूंटी पसंद नहीं है।

दिव्या थोड़ी नाराज़ हुई तो उसने मनाना शुरू किया, लेकिन वो नहीं मान रही थी।

राम ने कहा- नहीं मानेगी?

उसने मुँह बनाकर कहा- नहीं!

राम ने झट से उठकर दिव्या को खड़ा किया और उसकी शर्ट खोल दी।

दिव्या हैरान थी, फिर राम ने उसको बांहों में भर लिया और पूछा- अब?

वो कसमसाने लगी।


उस वक़्त ऐसा लग रहा था कि वो ना चाहते हुए भी विरोध का दिखावा कर रही थी।


फिर राम ने दिव्या को चूम लिया और स्मूच किया, दिव्या उसकी बांहों में झूलने लगी।


अचानक से राम ने दिव्या की ब्रा ज़ोर से खींच कर उतार दी और उसके बोबे चूसने काटने लगा।

दिव्या- आह राम बी जेंटली.. राम प्लीज़ उफ़.. राम!

इतने में राम ने अपनी टी-शर्ट उतार दी।


राम की छाती के बाल देखकर दिव्या ने कहा- वाह.. तुम्हारा सीना बताता है कि तुम कितने स्ट्रोंग हो।

राम ने कहा- और मेरा लंड मेरी मर्दानगी बताएगा।

इतने में उसने अपना लोवर और अंडरवियर उतार दी।


राम का लंड देख कर दिव्या की आँखें फटी की फटी रह गईं।

वो कुछ कहती, उससे पहले राम ने उसको लिटा दिया और उसके नीचे के सब कपड़े उतार दिए। इस वक्त सारा सीन ऐसा लग रहा था कि दिव्या के साथ ज़बरदस्ती हो रही हो।


फिर उसने दिव्या की टांगों के बीच आकर उसकी चुत चाटी, उसकी चूत के अन्दर जीभ डालके उसको खूब चूसा।

दिव्या ‘आ.. उहह.. उम्म्म्म..’ करते हुए सिसकारियां ले रही थी।

फिर राम ने कहा- दिव्या मेरा लंड चूसो।


उसने थोड़ा आना-कानी की तो राम ने थोड़ा ज़ोर से कहा।

अब दिव्या ने राम का काला लंड अपने मुँह में लेकर चूसा.. लेकिन थोड़ी ही देर में निकाल दिया।


राम ने उतनी देर में उसके बोबे इतने अधिक मसल डाले थे कि मम्मे लाल हो गए थे।

दिव्या को देख ऐसा लग रहा था कि वो नशे में हो।

फिर राम ने अपना लंड उसकी चुत में पेल दिया, दिव्या को थोड़ा दर्द हुआ और वो चीखने लगी- आ उहह.. आउच उईईइ उम्म्म!

राम स्पीड से लंड पेल रहा था और दिव्या की चूत की ज़बरदस्त चुदाई कर रहा था।


ये देख कर मेरा भी लंड खड़ा हो गया।


राम ने करीबन 20 मिनट चुदाई की और दिव्या की चुत का पानी निकाल कर अपना खड़ा लंड उसकी गांड में पेल दिया।


दिव्या अचानक हुए प्रहार से कराह उठी लेकिन राम दिव्या की गांड में अपना मूसला लंड पेलता रहा।


कुछ पलों बाद चुदाई खत्म हुई तो राम हांफता हुआ दिव्या पर ही लेट गया।


थोड़ी देर बाद वो दोनों उठे और कपड़े पहन लिए। राम जाने को तैयार हो गया। वो बाहर निकला ही था कि उसी वक्त मैंने नजदीक खड़े होकर मैंने जानबूझ कर दिव्या को कॉल किया।

उसने उठाया और दबी आवाज़ में कहा- मैं सो रही हूँ.. सुबह बात करूँगी।


फिर मैं सुबह दिव्या के रूम पर गया, उसका रूम खोला क्योंकि एक चाभी मेरे पास भी थी।

जैसे ही मैं अन्दर गया.. वो उठी, कहती- अरे तुम हो, आओ।

मैंने कहा- और कौन आ सकता है?


वो बाल ठीक करने लगी, मैंने उसके पास जाके होंठ चूम लिए।


मैं उसकी शर्ट उठाने लगा तो वो रोकने लगी। मैंने नोटिस किया कि उसने ब्रा नहीं पहनी थी।

आख़िर मैंने उसकी शर्ट उतार दी।


वाउ… सुबह सुबह उसके बोबे एकदम तने हुए मस्त लग रहे थे।

उफ़फ्फ़.. मेरी आह निकल गई।

फिर उसकी शर्ट उतार कर मैं उस पर लेट गया। उसने भी मुझे दबा लिया, कहती- शैतान.. सुबह ही अपनी गर्लफ्रेंड पर चढ़ाई?

मैंने कहा- कल रात नहीं हुई ना!


बस फिर क्या लबालब चुदाई हुई.. सुबह दिव्या क्या मस्त लग रही थी.. उसकी चुत सूजकर डबलरोटी सी लग रही थी।


मैंने गांड पर हाथ फेरा तो वो समझ गई और कहती- गांड नहीं!

मैंने मान लिया और उसको कहा- बर्थडे है तेरा कल.. वी विल सेलिब्रेट!

कहती- हाँ..

मैंने कहा- हम दोनों साथ में ही वक्त गुजारेंगे।

कहती- ओए..!

मैंने कहा- बेबी बिस्तर की नहीं बाहर कहीं घूमने चलेंगे।

इस पर वो मुस्कुरा दी और बोली- मैं साड़ी पहनूंगी।

मैंने कहा- वाउ उतारने में भी मज़ा आएगा।

वो शर्मा गई.. कहती- बेशरम हो पक्के।


दोस्तो रात को 12 बजे मैं उसके रूम पे केक लेकर गया.. वो थोड़ी उदास थी।


बोली- पिछले साल उसके पति ने बर्थडे वाले दिन उसके साथ ज़बरदस्ती करनी चाही थी, जिसके विरोध करने पर उसने मुझको धक्के मार कर रूम से बाहर निकाल दिया था।

मैंने उसको चूमा और कहा- छोड़ उस कमीने को.. लेट्स सेलिब्रेट यार!


केक काटने के बाद उसको होंठों से खिलाया.. चूसाया फिर उसकी शर्ट को ऊपर किया। उसके बोबे पर केक की क्रीम लगा दी, फिर चुची चूसने लगा।


बोली- मुझे आज अपना बना लो.. आज कुछ स्पेशल कर लो!

मैंने कहा- ओके हनी.. धीरे-धीरे करते हैं और आज सब कुछ तुम शुरू करो!


मैं लंड खड़ा करके चित लेट गया, वो मेरे ऊपर आ गई, उसने मुझे नीचे करके मेरे लंड पर मेरे शॉर्ट्स के ऊपर ही बैठ गई।

फिर कहती- आज तुमको औरत के मन की बात बताऊँगी।

उसने मुझे स्मूच किया और मेरी टीशर्ट ऊपर करके कहती- मेरी छाती के बालों को नोंचते हुए बोली- तू बहुत कमीना है, तूने मेरी चुत को दीवाना बना रखा है।

फिर चूमते-चूमते मेरे नीचे आ गई और मेरा शॉर्ट निकाल कर फेंक दिया और कच्छा ज़ोर से खींचा और उसको भी उतार कर दूर फेंक दिया।

बोली- आज इसको मेरी चुत में क़ैद होना है.. कच्छे में नहीं।


फिर उसने अपना शॉर्ट्स और अंडरवियर निकाल दिया और मेरे लंड के ऊपर आकर बैठ गई, बोली- चूसो मेरी चूची.. लेकिन स्लोली और स्मूद्ली चूसना।

मैंने उसकी चुची मुँह में भर ली और चूसने लगा.. बीच-बीच में निप्पल को हल्के से काट भी लेता था।

वो मदहोश हो रही थी।


मैं उसकी चुची हल्के-हल्के से दबा रहा था जैसे मसाज होती है।

फिर उसकी नाभि के छेद को अपनी जीभ से चाटा।

वो ‘उहह ह्म उम्म्म्म..’ कर रही थी।


मैंने लंड से उसकी चुत पर पिटाई सी की.. हल्का अन्दर और बाहर किया।

वो तड़प उठी और कहती- डालो ना!

मैंने कहा- ना..

कहती- क्यों?

मैंने कहा- पहले चूस मेरा।

कहती- नो आई डोंट लाइक।


मैंने उसका चेहरा पकड़ा और मुँह अपने लंड पर लगा दिया, वो लंड चूसने लगी।

आह्ह.. मैं स्वर्ग में विचर रहा था।


फिर मैंने उसको पटका तो कहती- प्लीज़ आराम से.. यह रात यादगार होनी चाहिए।

यह हिंदी चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!


मैंने आराम से चुत में अपना लंड घुसा दिया और फिर धक्के देने लगा। चूत चोदते हुए कभी मैंने उसके बोबे चूसे कभी गर्दन पर चूमा।

‘उफफफ्फ़.. वाउ या..’

उसने अपनी बांहों से मुझे खुद पर दबाया।

थोड़ी देर बाद मैंने उसको पलटा और उसकी गांड में उंगली की ही थी कि वो चिहुंक उठी, बोली- नो प्लीज़..

मैंने उसकी एक ना सुनी और लंड गांड में पेल दिया, फिर उसकी गांड चुदाई शुरू हो गई, वो गांड उठा कर मस्ती से चुची हिला-हिला के चुदने लगी।


पूरे कमरे में उसकी कामुक सिसकारियां और उसकी ‘उहह आहह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उम्म्म..’ की आवाज़ें आ रही थीं।


फिर चुदाई के बाद मैंने उसके ऊपर ही लेट गया.. वो भी पसीने से तर थी। मैंने उसके ऊपर था.. वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी और कह रही थी- ये बहुत अच्छा था.. तुम मेरा बहुत ध्यान रखते हो।

मैंने उसको बहुत चूमा.. और कहा- कल और बहुत करूँगा।

वो हंसने लगी.. मैं उससे लिपट कर सो गया।


इतने में उसकी बहन का बर्थडे विश करने का कॉल आया, तो मैंने दिव्या की एक चुची पर काट लिया।

उसने ‘आउच..’ कहा तो उसकी बहन ने पूछा- कोई है क्या?

उसने बताया, तो उसकी बहन कहती- दीदी तू कितने मज़े लेगी.. पहले भी और अब यह?

तो दिव्या बोली- यह अच्छा है।


मैं दिव्या की चुची से खेल रहा था।


उसकी बहन कहती- दीदी नहीं.. ऐसे मत करो।

दिव्या- अच्छा है यार.. तू कहे तो तेरी सैटिंग करवा दूँ।

मैंने खुशी से पूछा- इज शी हॉट?

वो आँखें बड़ी करके कहती- बेशरम गर्लफ्रेंड की बहन पर भी नज़र!


उसकी बहन पूछने लगी- बहुत नॉटी है?

उसने झट से कहा- यार बहुत नॉटी है.. दो घंटे से लगा हुआ है।

फिर उसकी बहन समझी कि ये क्या बोली तो वो शर्मा गई।

उसकी बहन कहती- क्या दीदी तुम लोग बिस्तर में हो?


तो दिव्या ने फोन काटा और स्विच ऑफ कर दिया।

अब दिव्या बोली- तुम जाओ..

वो मुझे ज़बरदस्ती निकालने लगी। मैंने कपड़े पहने उसको चूमा और चला गया।

फिर उसकी विंडो के पास आकर देखा वो अपनी बहन से बात कर रही थी।


अगले दिन मॉर्निंग में हम दोनों उसकी कार में ऊटी के लिए निकल पड़े।

वो काले रंग की साड़ी में थी.. ब्लाउज ऐसा कि क्लीवेज तो बस कहर ढा रही थी।


रास्ते भर हम दोनों बात करते रहे। मैं उसको छेड़ता रहा, मैंने कहा- यार लेट्स सेलिब्रेट रोड साइड!

कहती- पागल हो.. मुझे डर लगता है।

मैंने कहा- तुझे अड्वेंचर पसंद नहीं?

कहती- है.. लेकिन!

मैंने कहा- चल ना..

कहती- नो अभी नहीं.. मैं थकी हुई हूँ।


फिर हम दोनों ऊटी पहुँचे, हमने एक रूम ले लिया।

कहती- दो लो न!

मैंने कहा- ना एक ही ठीक है।


मैंने ज़बरदस्ती एक ही रूम लिया।

फिर हम रूम में गए।

कहती- यार कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा कि मैं आवारा हूँ।

मैंने कहा- यहाँ कोई किसी को नहीं जानता है।

फिर वो बोली- अच्छा फ्रेश हो कर आती हूँ।


मैंने उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ा और खींच दिया।

कहती- अमित, कंट्रोल ना.. अभी हमारे पास पूरा दिन है।

मैंने साड़ी खींच कर निकाल दी। वो फिर खुद को छुपाने लगी।

मैंने कहा- कहर ढा रही हो.. लग रहा नई दुल्हन की तरह पहली बार चुदने वाली हो।

शायद वो भी यही सब चाहती थी सो मुस्कुरा दी।

मैं उसके पास गया और दीवार के सहारे उसको लगा दिया।

वो कहने लगी- अमित प्लीज़ थोड़ा सब्र करो.. मुझे पता है तुम और तुम्हारा वो मुझे न्यूड देखने और मेरे साथ ठंडी में बहुत कुछ करना चाहते हो।

मैंने उसको कहा- आज रोकने को मत कहना।


फिर मैंने एक झटके में उसका ब्लाउज खोल दिया और उसके बोबे दबा के धीरे-धीरे मसलने लगा। साथ ही दूसरे हाथ से उसके पेटीकोट के ऊपर से ही अपना लंड रगड़ने लगा।

उसने कहा- तुम क्यों मुझे इतना बेबस कर देते हो?

मैंने कहा- तुमने ही तो सिखाया है कि एक औरत को कैसे पूरा सुख देना है। उसके मन के हर उस हिस्से को छूना सिखाया, जहाँ तक मर्द पहुँचते-पहुँचते रह जाते हैं।


फिर मैंने उसका पेटीकोट खोला तो वो नीचे गिर गया। उसकी अंडरवियर के अन्दर मैंने हाथ डाल कर चूत को सहलाया और बहुत फिंगरिंग की।

उसने कहा- अमित, बस करो ना अभी।

‘लेट्स डू इट..’ मैंने कहा।

‘पक्का.. लेकिन जरा मुझे फ्रेश हो लेने दो।’


कुछ मिनट बाद वो मेरे करीब आई और उसने मेरे होंठ चूमे।

मैंने कहा- मेरे कपड़े तुम उतारो।

उसने बहुत जल्दी मुझे नंगा किया और मुझे खींचकर बिस्तर पर गिरा कर मेरे ऊपर आ गई।

फिर अपनी चुची मसलती हुई बोली- तूने बहुत चोदा मुझे.. लेकिन हर बार लगता और और और..


वो अपने बाल ठीक कर रही थी।

वाउ क्या नज़ारा था.. इतनी हॉट लड़की जब ऐसे चुची उभार कर बाल संभाले और तनी हुई चुचियाँ मर्द को पास बुलाएं तो दोस्तो लंड की हालत फटने वाली हो जाती है।


वो खुद जानती है कि लड़कों को कैसे पागल करना है। उसने मेरे लंड को अपनी चुत में भर लिया और उछलने लगी। मैंने उठ कर उसकी चुची मुँह में भर लिया। उसने मेरा मुँह अपनी चुची पर पूरा दबा दिया।

फिर मैंने कहा- कंडोम डाल ले.. आज लंड बहुत गर्म है.. फिर अन्दर छूट गया तो लड़ेगी।

वो हंसी तो मैंने जोर से पेल दिया और उसको उठा कर नीचे लिटा लिया।

अब ‘दे दनादन’ चुदाई होनी शुरू हो गई।


कुछ मिनट के बाद मेरा निकलने को हुआ.. उसका बदन भी अकड़ रहा था।

मैंने उसके ऊपर पूरा लेट गया उसने भी मुझे बांहों में भींच लिया।

फिर हम दोनों ऐसे ही पड़े खेलते रहे।


ऑफिस की दोस्त को चोदा मस्ती से - Fucked office friend with fun

 ऑफिस की दोस्त को चोदा मस्ती से - Fucked office friend with fun

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


ऑफिस सेक्स हिंदी स्टोरी में पढ़ें कि मेरे ऑफिस में आयी नयी लड़की से कैसे मेरी दोस्ती हुई, मैंने उसकी मदद की काम में और फिर उसने मुझे अपनी चूत गांड की पार्टी दी.


नमस्ते दोस्तों! मैं कोटा, राजस्थान में एक प्राईवेट कम्पनी में 4 साल से काम कर रहा हूँ.

कोटा जैसे स्मार्ट सिटी में हर साल लाखों लड़के लड़कियां आई.आई.टी. जेईई के एक्जाम की तैयारी के लिए अपनी किस्मत आजमाने आते हैं.


मैं जिस कम्पनी में काम करता हूँ. उस कम्पनी का सारा स्टाफ मुझे बहुत पसंद करता है क्योंकि मैं सबकी मदद भी करता हूँ और देखने में भी मैं बहुत स्मार्ट हूँ.

मेरा कद 5 फुट 9 इंच का है और रंग एकदम गोरा है.

मेरी बॉडी भी इतनी अच्छी है कि कोई भी लड़की एक बार तो मंत्रमुग्ध हो ही जाएगी.


ये ऑफिस . स्टोरी आज से दो साल पहले की है.


मेरे ऑफिस में अलवीना नाम की लड़की आई.

अलवीना के बारे में आप लोगों को सीधे तौर पर बताऊं … तो अलवीना एक नम्बर की माल लौंडिया थी. उसके बड़े बड़े मम्मों को हथेलियों से पूरा भर पाना बहुत मुश्किल काम था. वो 5 फीट के कद वाली एक डीजल माल थी.

डीजल माल मैं उस लौंडिया को कहता हूँ जो कद में नाटी हो और भरे हुए शरीर की हो.

अलवीना ज्यादातर सलवार सूट पहनती थी.


ऑफिस के काम के बारे में उसे ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो मैंने उसकी काफी मदद की. मैं तो वैसे ही सबकी मदद करने वाला बंदा था. मैंने अलवीना को भी एक दोस्त की तरह माना और उसकी हर काम में उसकी बहुत मदद की.


उसे एक बार तो मैंने एक कानूनी पेंच में फंसने से भी बचाया.

वो मेरी इस बात से बड़ी खुश थी.


लेकिन मैं इस बात से बिल्कुल अंजान था कि वो मुझ पर इस तरह फिदा हो चुकी है कि वो कैसे भी करके मुझे पाना चाहेगी.


फिर एक दिन जब ऑफिस में हमारे बॉस नहीं थे, तो अलवीना मेरे पास आ गई.


अलवीना मेरी टेबल पर अपनी कोहनियों को टिकाते हुए मुझे देखने लगी और बोली- यार, मैं आपका एहसान कैसे चुकाऊं … मेरे लिए तो आपने मेरी रोजी रोटी सब कुछ बचाई है.

मैंने कहा- अरे मैडम … आप मुझे क्यों शर्मिंदा कर रही हो.


पर उसकी आंखों में आंखें डालने पर मुझे सच में कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया.

मैंने कहा- मैडम आप तो सैंटी हो गई हो. मैंने आप पर कोई एहसान नहीं किया है. मैंने जो भी किया अपनी कम्पनी की छवि बचाने और एक दोस्त का फर्ज निभाने के लिए ही किया है.


लेकिन मेरी तमाम दलीलों के बावजूद भी अलवीना नहीं मानी. वो लगातार मेरी तारीफ पर तारीफ करती ही रही और मुझसे कोई भी ऐसा काम करने के लिए बोलती रही, जिससे वो मेरे अहसान से मुक्त हो सके.


आखिर मैंने उससे कहा- ओके अगर तुम मेरे एहसान का बदला चुकाना ही चाहती हो तो बस तुम मुझे एक ड्रिंक पिला देना.


ऑफिस में सभी को मालूम था कि मैं बहुत बड़ा दारूखोर हूँ. मैंने पहले भी अलवीना से इस तरह की बात की थी … जो कि मेरे लिए बिल्कुल आम बात थी.


मैंने कभी कभी ऑफिस में भी ड्रिंक ली थी, जिसके बारे में अलवीना को पता था, लेकिन उसने कभी किसी से नहीं कहा था.


अलवीना ने थोड़ी देर में मुझसे कहा- ठीक है दोस्त, मैंने तुमसे वादा किया है … तो मैं अपना ये वादा जरूर निभाउंगी.


फिर शनिवार के दिन उसने मुझे फ़ोन किया और मेरे साथ बैठ कर पीने की इच्छा जताई.

मुझे अकसर ऑफिस में देरी हो जाने के कारण में घर पहुंचने में कई बार देरी हो जाती थी. लेकिन उस दिन मेरे पास कोई ज्यादा काम नहीं था. मैं जल्दी घर जाकर मस्ती से इस शनिवार का मजा लेना चाहता था. मगर आज अलवीना ने बोला तो मैंने हामी भर दी.


अलवीना ने कहा- अगर तुम चाहो तो हम दोनों किसी बार में ड्रिंक करने चल सकते हैं.


लेकिन ऑफिस से बार काफी दूर होने के कारण मैंने अलवीना को मेरे साथ ऑफिस में ही ड्रिंक करने का प्रस्ताव दिया.

जिसे उसने मेरे कहने पर तुरन्त मान लिया.


हालांकि ऑफिस में ही ड्रिंक लेने की उसकी हामी भर देना मुझे थोड़ा अजीब सा लगा.

मैंने उससे ऑफिस में ड्रिंक लेने की बात केवल टालने के लिए कही थी.

मगर वो एकदम से मान गई थी.


आम तौर पर कोई भी लड़की अपने वर्क स्पेस में इस तरह इतनी जल्दी पीने के लिए नहीं मानती.

लेकिन अलवीना ने झट से दारू पीने की बात मान ली थी.


मैंने उसकी आंखों में देखा, तो वो बड़ी लालसा से मेरी तरफ देख रही थी.

मैं उसकी आंखों को देख कर अब भी ये न समझ सका था कि अलवीना क्या चाहती है.


शाम को जैसे ही 06.00 बजे, तो उसका मैसेज आ गया कि जाओ ड्रिंक ले आओ, मैं पे कर दूंगी.


उसकी बात सुनकर मैं पास की वाइन शॉप से एक बोतल और ग्लास, स्नैक्स वगैरह ले आया.

जब ऑफिस से सब चले गए … तो मैंने अलवीना को सामान के साथ ऑफिस के रेस्टहाउस वाले रूम में आने को कह दिया.


थोड़ी देर में मैं भी उसी रूम में चला गया और गेट का लॉक लगा दिया.


हम दोनों आमने सामने बैठ गए और बोतल खुल गई.

मैंने पैग बनाए और हम दोनों ने जाम टकरा कर पीना चालू कर दिया.


हम दोनों दारू के गिलासों को होंठों से लगाए हुए धीरे धीरे सिप लेते हुए एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे.

मैं उसकी तारीफ़ कर रहा था और वो मेरी.

हम दोनों एक दूसरे की खूबसूरती की तारीफ करते हुए दारू का मजा ले रहे थे.


अलवीना धीरे धीरे पी रही थी.

उसके दो पैग हुए थे और मैं चार पैग गटक चुका था.

मैं तो पीने का आदी हो गया हूँ.


हम दोनों फुल मस्ती में थे और आपस में हंसी मजाक कर रहे थे.


मुझे शराब जल्दी असर नहीं करती है. मगर ये सीन अलवीना के साथ नहीं था. उसे शराब का नशा चढ़ गया था.

और तभी पता नहीं उसको क्या हुआ, वह अपनी सीट से उठ कर मेरी गोद में आकर कुछ इस तरह से बैठ गई कि उसके दोनों स्तन मेरे सीने को छूने लगे थे.


पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगा कि अलवीना मुझसे चुदने के मूड में आ गई है.

मैंने अलवीना को खींच पर उसके गुलाबी होंठों पर किस कर लिया.


अलवीना ने भी मेरा साथ दिया, तो हम दोनों चूमा चाटी में लग गए. कुछ पल बाद मैंने उसको अपनी बांहों में जकड़ कर उसको उठा लिया.

वो भी मेरी कमर से अपने दोनों पैर बांध कर लटक गई.


मैंने उसे सामने की टेबल पर बिठाया और उसका कुर्ता खींच कर एक झटके में उतार दिया.


मैं पहली बार इतना वाईल्ड हुआ था. पता नहीं … उस दिन मुझे कुछ ज्यादा नशा हो गया था.

फिर अलवीना की तरफ से तो पहले से ही मुझे खुला आमंत्रण था.


उसका कुर्ता उतरते ही मेरे सामने एक गुलाबी ब्रा में कसे उसके मम्मे मुझे दीवाना बनाने लगे.

मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके मम्मों को पीना और काटना शुरू कर दिया.


मैं कुछ ज्यादा ही तेजी से उसके मम्मों को काटता हुआ चूस रहा था.

उसे दर्द ही रहा था मगर तब भी अलवीना ने चुपचाप सब कुछ होने दिया.

अलवीना नशे में इस दर्द को भी एन्जॉय कर रही थी. उसे भी अच्छा लगने लगा था.

अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था. फिर भी मैं उसको मीठा दर्द दिए जा रहा था.


अब मैंने उसका हाथ अपने औजार पर रख दिया.

उसको भी मेरे लंड को पकड़ने का मन था. उसने भी लंड को सहलाया और धीरे से नीचे झुक कर मेरी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाल लिया.


वो मेरी आंखों में वासना से देखने लगी तो मैंने उसे हल्का से इशारा किया. वो समझ गई और झुक कर लौड़े को चूसने लगी.


आह … एक तरफ तो दारू का नशा और दूसरी तरफ अलवीना की जवानी मेरे लंड को चूस रही थी.

मैंने अपनी शर्ट उतार दी और पूरा नंगा होकर मजा लेने लगा.


कुछ ही समय बाद मैं कमरे के फर्श पर ही लेट गया और नशे में लंड चुसाई का मजा लेने लगा.

मेरी आंखें मस्ती में बंद हो गई थीं और मैं कुछ बेहोश सा हो गया था.


कुछ देर बाद लंड चुसाई का अहसास खत्म हुआ और कुछ अलग सी गर्मी मिली.

तो मैंने आंखें खोल कर देखा कि अलवीना पूरी तरह से नंगी होकर मेरे लंड को अपनी चुत में लेकर मेरे ऊपर बैठने की कोशिश कर रही थी.

वो नशे में थी और उसकी चुत में लंड घुस नहीं रहा था.


मैंने हाथ से लंड को सैट किया और वो मेरे लौड़े पर चुत पेलती हुई धच्छ से बैठ गई.

लंड चुत के रगड़ से हम दोनों के मुँह से आह निकल गई.

एक दो बार ऊपर नीचे होकर अलवीना ने पूरा लंड चुत में ले लिया था और अब वो जोरों से मेरा लंड चुत की जड़ तक ले रही थी.


मुझे बहुत मजा आने लगा तो मैंने भी अलवीना को पकड़ कर उसकी धकापेल चुदाई चालू कर दी.


कुछ देर बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया.

वो गांड में लंड लेकर एकदम से बिलबिला उठी. मगर मैंने पूरा लौड़ा गांड में अन्दर तक पेल दिया.

वो पहले भी गांड मरा चुकी होगी, इसलिए उसको जल्दी ही मजा आने लगा था.


अब मैं उसको कुत्ते की तरह जोर जोर से चोदने लगा. वो भी कुतिया सी बिलबिलाती हुई लंड अन्दर ले रही थी.


अलवीना को भी मजा आने लगा. वो बोली- क्या यार पीछे भी पेल दिया … मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं आपके साथ पहली बार में ही इतना ओपनली सेक्स करवा लूंगी.

मैंने भी लंड पेलते हुए कहा- अब बस चुदने का मजा ले लो अलवीना रानी.


ये कहकर मैंने अपने झटके और तेज कर दिए और अलवीना मस्ती में चिल्ला चिल्ला कर मेरा लंड लेने लगी.


उस समय ऑफिस में हमारी मस्ती भरी आवाजों को सुनने वाला कोई नहीं था.


दस मिनट बाद वो मुझसे छोड़ने को कहने लगी, लेकिन अब मेरे ऊपर एक दूसरा नशा चढ़ गया था और वो था अलवीना की चुदाई का नशा.

चुदाई के बाद हम दोनों स्खलित हो गए थे.

नशे में होने के कारण अलवीना और मैं वहीं उसी नंगी हालत में फर्श पर पड़े कालीन पर ही सो गए.


जब सुबह मेरी नींद गहरी लगी हुई थी तो मेरे पास नंगी पड़ी अलवीना ने मेरे सीने पर किस किया और मुझको हिलाते हुए जगाया.


मैं जागा … तो उसने कहा- उठो यार, सुबह के 4 बज गए हैं और अब हमें अपने कपड़े पहन कर घर चलना चाहिए.


मैं उठा और जल्दी से अपने कपड़े पहने.

फिर हम दोनों चलने को रेडी हो गए.


मैंने गार्ड को फोन करके ऑफिस का गेट खोलने को कहा.

मेरी पीने की आदत के बारे में तो गार्ड पहले से ही जानता था, लेकिन अलवीना को देख कर उसके मन में भी मस्ती जाग गई.


उसने मेरी ओर देखा और स्माईल पास की.

मैंने उसकी भावना को समझ कर उसको 100 का नोट देकर सारे सबूत मिटाने को कहा.

उसने ‘जी सर ..’ कह कर अपना काम चालू कर दिया और मैं और अलवीना अपने अपने घर को एक साथ रवाना हो गए.

ऑफिस की दोस्त को चोदा मस्ती से - Fucked office friend with fun

 ऑफिस की दोस्त को चोदा मस्ती से - Fucked office friend with fun

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



ऑफिस सेक्स हिंदी स्टोरी में पढ़ें कि मेरे ऑफिस में आयी नयी लड़की से कैसे मेरी दोस्ती हुई, मैंने उसकी मदद की काम में और फिर उसने मुझे अपनी चूत गांड की पार्टी दी.


नमस्ते दोस्तों! मैं कोटा, राजस्थान में एक प्राईवेट कम्पनी में 4 साल से काम कर रहा हूँ.

कोटा जैसे स्मार्ट सिटी में हर साल लाखों लड़के लड़कियां आई.आई.टी. जेईई के एक्जाम की तैयारी के लिए अपनी किस्मत आजमाने आते हैं.


मैं जिस कम्पनी में काम करता हूँ. उस कम्पनी का सारा स्टाफ मुझे बहुत पसंद करता है क्योंकि मैं सबकी मदद भी करता हूँ और देखने में भी मैं बहुत स्मार्ट हूँ.

मेरा कद 5 फुट 9 इंच का है और रंग एकदम गोरा है.

मेरी बॉडी भी इतनी अच्छी है कि कोई भी लड़की एक बार तो मंत्रमुग्ध हो ही जाएगी.

ये ऑफिस . स्टोरी आज से दो साल पहले की है.


मेरे ऑफिस में अलवीना नाम की लड़की आई.

अलवीना के बारे में आप लोगों को सीधे तौर पर बताऊं … तो अलवीना एक नम्बर की माल लौंडिया थी. उसके बड़े बड़े मम्मों को हथेलियों से पूरा भर पाना बहुत मुश्किल काम था. वो 5 फीट के कद वाली एक डीजल माल थी.

डीजल माल मैं उस लौंडिया को कहता हूँ जो कद में नाटी हो और भरे हुए शरीर की हो.


अलवीना ज्यादातर सलवार सूट पहनती थी.


ऑफिस के काम के बारे में उसे ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो मैंने उसकी काफी मदद की. मैं तो वैसे ही सबकी मदद करने वाला बंदा था. मैंने अलवीना को भी एक दोस्त की तरह माना और उसकी हर काम में उसकी बहुत मदद की.

उसे एक बार तो मैंने एक कानूनी पेंच में फंसने से भी बचाया.

वो मेरी इस बात से बड़ी खुश थी.


लेकिन मैं इस बात से बिल्कुल अंजान था कि वो मुझ पर इस तरह फिदा हो चुकी है कि वो कैसे भी करके मुझे पाना चाहेगी.


फिर एक दिन जब ऑफिस में हमारे बॉस नहीं थे, तो अलवीना मेरे पास आ गई.


अलवीना मेरी टेबल पर अपनी कोहनियों को टिकाते हुए मुझे देखने लगी और बोली- यार, मैं आपका एहसान कैसे चुकाऊं … मेरे लिए तो आपने मेरी रोजी रोटी सब कुछ बचाई है.

मैंने कहा- अरे मैडम … आप मुझे क्यों शर्मिंदा कर रही हो.


पर उसकी आंखों में आंखें डालने पर मुझे सच में कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया.


मैंने कहा- मैडम आप तो सैंटी हो गई हो. मैंने आप पर कोई एहसान नहीं किया है. मैंने जो भी किया अपनी कम्पनी की छवि बचाने और एक दोस्त का फर्ज निभाने के लिए ही किया है.


लेकिन मेरी तमाम दलीलों के बावजूद भी अलवीना नहीं मानी. वो लगातार मेरी तारीफ पर तारीफ करती ही रही और मुझसे कोई भी ऐसा काम करने के लिए बोलती रही, जिससे वो मेरे अहसान से मुक्त हो सके.


आखिर मैंने उससे कहा- ओके अगर तुम मेरे एहसान का बदला चुकाना ही चाहती हो तो बस तुम मुझे एक ड्रिंक पिला देना.

ऑफिस में सभी को मालूम था कि मैं बहुत बड़ा दारूखोर हूँ. मैंने पहले भी अलवीना से इस तरह की बात की थी … जो कि मेरे लिए बिल्कुल आम बात थी.


मैंने कभी कभी ऑफिस में भी ड्रिंक ली थी, जिसके बारे में अलवीना को पता था, लेकिन उसने कभी किसी से नहीं कहा था.


अलवीना ने थोड़ी देर में मुझसे कहा- ठीक है दोस्त, मैंने तुमसे वादा किया है … तो मैं अपना ये वादा जरूर निभाउंगी.


फिर शनिवार के दिन उसने मुझे फ़ोन किया और मेरे साथ बैठ कर पीने की इच्छा जताई.


मुझे अकसर ऑफिस में देरी हो जाने के कारण में घर पहुंचने में कई बार देरी हो जाती थी. लेकिन उस दिन मेरे पास कोई ज्यादा काम नहीं था. मैं जल्दी घर जाकर मस्ती से इस शनिवार का मजा लेना चाहता था. मगर आज अलवीना ने बोला तो मैंने हामी भर दी.


अलवीना ने कहा- अगर तुम चाहो तो हम दोनों किसी बार में ड्रिंक करने चल सकते हैं.


लेकिन ऑफिस से बार काफी दूर होने के कारण मैंने अलवीना को मेरे साथ ऑफिस में ही ड्रिंक करने का प्रस्ताव दिया.

जिसे उसने मेरे कहने पर तुरन्त मान लिया.


हालांकि ऑफिस में ही ड्रिंक लेने की उसकी हामी भर देना मुझे थोड़ा अजीब सा लगा.

मैंने उससे ऑफिस में ड्रिंक लेने की बात केवल टालने के लिए कही थी.

मगर वो एकदम से मान गई थी.

आम तौर पर कोई भी लड़की अपने वर्क स्पेस में इस तरह इतनी जल्दी पीने के लिए नहीं मानती.

लेकिन अलवीना ने झट से दारू पीने की बात मान ली थी.


मैंने उसकी आंखों में देखा, तो वो बड़ी लालसा से मेरी तरफ देख रही थी.

मैं उसकी आंखों को देख कर अब भी ये न समझ सका था कि अलवीना क्या चाहती है.


शाम को जैसे ही 06.00 बजे, तो उसका मैसेज आ गया कि जाओ ड्रिंक ले आओ, मैं पे कर दूंगी.


उसकी बात सुनकर मैं पास की वाइन शॉप से एक बोतल और ग्लास, स्नैक्स वगैरह ले आया.


जब ऑफिस से सब चले गए … तो मैंने अलवीना को सामान के साथ ऑफिस के रेस्टहाउस वाले रूम में आने को कह दिया.


थोड़ी देर में मैं भी उसी रूम में चला गया और गेट का लॉक लगा दिया.


हम दोनों आमने सामने बैठ गए और बोतल खुल गई.

मैंने पैग बनाए और हम दोनों ने जाम टकरा कर पीना चालू कर दिया.


हम दोनों दारू के गिलासों को होंठों से लगाए हुए धीरे धीरे सिप लेते हुए एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे.

मैं उसकी तारीफ़ कर रहा था और वो मेरी.

हम दोनों एक दूसरे की खूबसूरती की तारीफ करते हुए दारू का मजा ले रहे थे.


अलवीना धीरे धीरे पी रही थी.

उसके दो पैग हुए थे और मैं चार पैग गटक चुका था.

मैं तो पीने का आदी हो गया हूँ.

हम दोनों फुल मस्ती में थे और आपस में हंसी मजाक कर रहे थे.


मुझे शराब जल्दी असर नहीं करती है. मगर ये सीन अलवीना के साथ नहीं था. उसे शराब का नशा चढ़ गया था.


और तभी पता नहीं उसको क्या हुआ, वह अपनी सीट से उठ कर मेरी गोद में आकर कुछ इस तरह से बैठ गई कि उसके दोनों स्तन मेरे सीने को छूने लगे थे.


पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगा कि अलवीना मुझसे चुदने के मूड में आ गई है.

मैंने अलवीना को खींच पर उसके गुलाबी होंठों पर किस कर लिया.


अलवीना ने भी मेरा साथ दिया, तो हम दोनों चूमा चाटी में लग गए. कुछ पल बाद मैंने उसको अपनी बांहों में जकड़ कर उसको उठा लिया.

वो भी मेरी कमर से अपने दोनों पैर बांध कर लटक गई.


मैंने उसे सामने की टेबल पर बिठाया और उसका कुर्ता खींच कर एक झटके में उतार दिया.


मैं पहली बार इतना वाईल्ड हुआ था. पता नहीं … उस दिन मुझे कुछ ज्यादा नशा हो गया था.

फिर अलवीना की तरफ से तो पहले से ही मुझे खुला आमंत्रण था.


उसका कुर्ता उतरते ही मेरे सामने एक गुलाबी ब्रा में कसे उसके मम्मे मुझे दीवाना बनाने लगे.

मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके मम्मों को पीना और काटना शुरू कर दिया.


मैं कुछ ज्यादा ही तेजी से उसके मम्मों को काटता हुआ चूस रहा था.

उसे दर्द ही रहा था मगर तब भी अलवीना ने चुपचाप सब कुछ होने दिया.


अलवीना नशे में इस दर्द को भी एन्जॉय कर रही थी. उसे भी अच्छा लगने लगा था.

अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था. फिर भी मैं उसको मीठा दर्द दिए जा रहा था.

अब मैंने उसका हाथ अपने औजार पर रख दिया.

उसको भी मेरे लंड को पकड़ने का मन था. उसने भी लंड को सहलाया और धीरे से नीचे झुक कर मेरी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाल लिया.


वो मेरी आंखों में वासना से देखने लगी तो मैंने उसे हल्का से इशारा किया. वो समझ गई और झुक कर लौड़े को चूसने लगी.


आह … एक तरफ तो दारू का नशा और दूसरी तरफ अलवीना की जवानी मेरे लंड को चूस रही थी.

मैंने अपनी शर्ट उतार दी और पूरा नंगा होकर मजा लेने लगा.


कुछ ही समय बाद मैं कमरे के फर्श पर ही लेट गया और नशे में लंड चुसाई का मजा लेने लगा.

मेरी आंखें मस्ती में बंद हो गई थीं और मैं कुछ बेहोश सा हो गया था.


कुछ देर बाद लंड चुसाई का अहसास खत्म हुआ और कुछ अलग सी गर्मी मिली.

तो मैंने आंखें खोल कर देखा कि अलवीना पूरी तरह से नंगी होकर मेरे लंड को अपनी चुत में लेकर मेरे ऊपर बैठने की कोशिश कर रही थी.

वो नशे में थी और उसकी चुत में लंड घुस नहीं रहा था.


मैंने हाथ से लंड को सैट किया और वो मेरे लौड़े पर चुत पेलती हुई धच्छ से बैठ गई.

लंड चुत के रगड़ से हम दोनों के मुँह से आह निकल गई.


एक दो बार ऊपर नीचे होकर अलवीना ने पूरा लंड चुत में ले लिया था और अब वो जोरों से मेरा लंड चुत की जड़ तक ले रही थी.

मुझे बहुत मजा आने लगा तो मैंने भी अलवीना को पकड़ कर उसकी धकापेल चुदाई चालू कर दी.


कुछ देर बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया.

वो गांड में लंड लेकर एकदम से बिलबिला उठी. मगर मैंने पूरा लौड़ा गांड में अन्दर तक पेल दिया.

वो पहले भी गांड मरा चुकी होगी, इसलिए उसको जल्दी ही मजा आने लगा था.


अब मैं उसको कुत्ते की तरह जोर जोर से चोदने लगा. वो भी कुतिया सी बिलबिलाती हुई लंड अन्दर ले रही थी.


अलवीना को भी मजा आने लगा. वो बोली- क्या यार पीछे भी पेल दिया … मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं आपके साथ पहली बार में ही इतना ओपनली सेक्स करवा लूंगी.

मैंने भी लंड पेलते हुए कहा- अब बस चुदने का मजा ले लो अलवीना रानी.


ये कहकर मैंने अपने झटके और तेज कर दिए और अलवीना मस्ती में चिल्ला चिल्ला कर मेरा लंड लेने लगी.


उस समय ऑफिस में हमारी मस्ती भरी आवाजों को सुनने वाला कोई नहीं था.


दस मिनट बाद वो मुझसे छोड़ने को कहने लगी, लेकिन अब मेरे ऊपर एक दूसरा नशा चढ़ गया था और वो था अलवीना की चुदाई का नशा.


चुदाई के बाद हम दोनों स्खलित हो गए थे.

नशे में होने के कारण अलवीना और मैं वहीं उसी नंगी हालत में फर्श पर पड़े कालीन पर ही सो गए.


जब सुबह मेरी नींद गहरी लगी हुई थी तो मेरे पास नंगी पड़ी अलवीना ने मेरे सीने पर किस किया और मुझको हिलाते हुए जगाया.


मैं जागा … तो उसने कहा- उठो यार, सुबह के 4 बज गए हैं और अब हमें अपने कपड़े पहन कर घर चलना चाहिए.

मैं उठा और जल्दी से अपने कपड़े पहने.

फिर हम दोनों चलने को रेडी हो गए.


मैंने गार्ड को फोन करके ऑफिस का गेट खोलने को कहा.

मेरी पीने की आदत के बारे में तो गार्ड पहले से ही जानता था, लेकिन अलवीना को देख कर उसके मन में भी मस्ती जाग गई.


उसने मेरी ओर देखा और स्माईल पास की.

मैंने उसकी भावना को समझ कर उसको 100 का नोट देकर सारे सबूत मिटाने को कहा.


उसने ‘जी सर ..’ कह कर अपना काम चालू कर दिया और मैं और अलवीना अपने अपने घर को एक साथ रवाना हो गए

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