अपनी बहन को चार लड़कों से चुदती हुई देखा - I saw my sister getting fucked by four boys

 अपनी बहन को चार लड़कों से चुदती हुई देखा

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


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हिड्डन लस्ट कहानी में मेरे दोस्त ने मेरी बहन को पटा लिया. एक दिन उन दोनों ने चुदाई का प्रोग्राम बनाया. मुझे पता लग गया. मैंने उनका पीछा किया.


दोस्तो, कैसे हैं आप लोग … उम्मीद है कि आप सभी अच्छे होंगे.

मेरा नाम विकास है और मैं राजस्थान के जयपुर का रहने वाला हूं.

मेरी उम्र 21 साल है.


आज मैं आपको एक सच्ची सेक्स कहानी सुना रहा हूं.

यह मेरे अपने जीवन की घटना है, जब मैंने अपनी बहन को अपने चार दोस्तों के साथ कमरे में मस्ती करते हुए देख कर अपना लंड हिलाया.


यह हिड्डन लस्ट कहानी 2 साल पुरानी है.

मेरी बहन की उम्र तब 22 साल थी, उस वक्त मेरी बहन की शादी नहीं हुई थी.


मैं अपने एक दोस्त राजकुमार को पहली बार अपने घर लेकर आया था.

उस दिन मेरी बहन ने सलवार सूट पहना हुआ था.


राजकुमार की पहली नजर से ही मैंने उसको देख लिया था कि वह मेरी दीदी की तरफ गंदी निगाहों से देख रहा है.


मैं और राजकुमार बैठ गए और मेरी दीदी ने हमें पानी लाकर दिया.

राजकुमार ने मेरी दीदी से पूछा- दीदी आप पढ़ाई में क्या कर रही हो?

मेरी बहन थोड़ा सा शर्मा कर बोली- भैया, इस साल कॉलेज में मेरे ग्रेजुएशन का फाइनल ईयर है.


फिर वे दोनों आपस में बातें करने लगे.

तब मेरी बहन ने चुन्नी नहीं ओढ़ रखी थी इसलिए उसकी छाती और गोरा बदन साफ-साफ दिखाई दे रहे थे.

maan

राजकुमार कुछ देर बात करने के बाद चला गया.


अगले दिन मैं घर पर नहीं था.


जब मैं घर आया तो मैंने देखा कि राजकुमार हमारे घर पर बैठा था और मेरी दीदी से बातें कर रहा था.


मुझे आया देखकर राजकुमार बोला- मैं तेरे आने का ही वेट कर रहा था.


मैं आपको बता दूं कि मेरा दोस्त राजकुमार एक हट्टा कट्टा लड़का है और वह जिम में ट्रेनर है. उसके हाथों की मछलियां देखते ही बनती थीं. चेहरे से भी वह आकर्षक लगता था और गोरे रंग का था.


उस दिन उसने हाफ शर्ट पहनी थी जिसके गले के पास के दो बटन खुले हुए थे.

अन्दर से उसका चौड़ा मर्दाना सीना दिख रहा था. उस पर कोई भी लड़की फिदा हो सकती थी.


फिर मैं आकर बैठा तो हम तीनों में बातें चलने लगीं.

मेरे बहन मेरे दोस्त से काफी ज्यादा इंप्रेस सी दिख रही थी.


कुछ समय बाद राजकुमार चला गया.


मैंने अपनी बहन का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर रखा था इसलिए मैंने कुछ दिन तक अपनी बहन का इंस्टाग्राम देखा तो पाया कि वह राजकुमार के साथ बातें करती थी.


एक दिन उन्होंने मिलने का प्लान बनाया था.

मैं भी उन दोनों को देखना चाहता था.


अब दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि मुझे यह पढ़कर गुस्सा आया होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि मैं चाहता था कि मेरी बहन किसी से चुदे और मैं उसको लाइव देखूं.


दूसरे दिन मेरी बहन ने बोला- हमारे कॉलेज के प्रैक्टिकल चल रहे हैं तो मुझे कॉलेज जाना पड़ेगा भैया.

तो मैंने कहा- ठीक है चली जाओ. पर टाइम से घर आ जाना.

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फिर वह घर से निकल गई.

मैंने उसका पीछा किया.


कुछ दूर जाकर मैंने देखा कि मेरी बहन आगे जाकर एक जगह रुक गई.

तभी मुझे राजकुमार दिखा.

वह गाड़ी लेकर खड़ा था.


वे दोनों उस गाड़ी में बैठ गए और चल दिए.

मैंने पीछा किया.


राजकुमार अपने पुराने वाले फार्म हाउस पर मेरी बहन को ले गया.


मैं भी उसके फार्म हाउस में चला गया और पीछे की तरफ से जाकर उसकी खिड़की से अन्दर का नजारा देखने लगा.


अन्दर राजकुमार ने मेरी बहन को अपनी बांहों में ले लिया था और वह उसके बालों को‌ खोलने लगा था.

वह मेरी बहन से प्यार कर रहा था.


मेरी बहन भी उसके साथ सहज थी.

वह बहुत खुश लग रही थी और राजकुमार के गले लग रही थी.


मेरी बहन सील पैक लड़की थी इसलिए राजकुमार काफी उत्तेजित हो रहा था.


उसका लौड़ा का पैंट में से साफ-साफ दिखने लगा था.


यह सब देखकर मेरा भी लौड़ा खड़ा होने लगा.


कुछ ही देर में मैंने देखा कि राजकुमार ने मेरी बहन का कुर्ता निकाल दिया और उसकी ब्रा को देख कर कामुक हो गया.

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कुछ पल बाद उसने मेरी बहन की ब्रा को भी खोल कर अलग कर दिया.

अब वह मेरी बहन के बूब्स के एक निप्पल को अपने दांतों से चबाने लगा और चूसने लगा.


मेरी बहन से भी नहीं रहा जा रहा था.

वह अपने हाथ से राजकुमार को अपने मम्मों पर दबाने लगी थी.


कुछ देर बाद मेरी बहन राजकुमार की पैंट खोल कर सीधा उसके अंडरवियर के ऊपर से लंड को सहलाने लगी.


उधर राजकुमार भी पीछे नहीं था.

उसने मेरी बहन की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी पैंटी में हाथ डालकर चुत को मसलने लगा.


यह सीन देख कर मैंने भी अपने पैंट में हाथ डाल दिया था और अपने लंड को सहलाने लगा था.


राजकुमार से शायद ज्यादा इंतजार नहीं हो रहा था इसलिए उसने मेरी बहन की सीधा पैंटी उतारी और उसकी झांटों वाली चुत के मुँह पर अपने होंठ लगा दिए.

उसने चुत को अपने मुँह में भर लिया था और उसे चूसने लगा था.


राजकुमार अपनी जीभ से मेरी बहन की चुत से रिसता पानी पीने लगा और चूसने लगा.


उसके इस कदम से मेरी दीदी ने भी हिड्डन लस्ट के कारण कामुक आवाजें निकालना शुरू कर दीं ‘आह मर गई आह मम्मी बचा लो!’


कुछ ही देर में मेरी बहन काफी उत्तेजित हो गई थी और उसकी चुत से बहुत पानी निकल रहा था जिसको राजकुमार पीता जा रहा था.


फिर राजकुमार ने अपना अंडरवियर निकाला और मेरी बहन उसका लंड देखकर खुश हो गई.


उसकी आंखों में एकदम से खुशी आ गई.

वह लपक कर मेरे दोस्त के लंड को किस करने लगी.


अब राजकुमार का लौड़ा और भी ज्यादा फनफनाने लगा और कड़क होकर खड़ा हो गया.

उसके लंड के ऊपर की नसें साफ दिखने लगी थीं.

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राजकुमार का शरीर सिक्स पैक वाला था इसलिए उसने मेरी बहन को उल्टा ऊपर उठाया और उसे अपने हाथों से कुछ इस तरह से लटका लिया कि वह उसकी चुत चाटने लगा.

और नीचे मेरी बहन अपने मुँह से उसका लंड चूसने लगी.


ब्लू फिल्मों में भी इस खड़ी दशा में 69 का आसन बहुत कम बार देखने को मिलता है.


काफी देर राजकुमार ने मेरी बहन को यूं ही लटकाए रखा और उसके बाद उसने मेरी बहन को सोफे पर लिटा दिया.


अब वह उसकी चुत पर काफी देर तक लंड को लगा कर सहलाता रहा.

उसका लंड किसी मूसल के जैसा लग रहा था और मेरी बहन की कुंवारी चुत उसके सामने बहुत छोटी सी फांक सी लग रही थी.


शायद राजकुमार ने अपने लंड के सुपारे को मेरी बहन की चुत में दबाया था जिससे वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी थी ‘आह अन्दर मत डालना, मर जाऊंगी मैं!’

पर तभी राजकुमार ने सुपारा अन्दर घुसेड़ दिया, जिससे मेरी बहन की आवाज निकलने लगी ‘आह मेरी मम्मी मर गई … आह मुझे बचा लो कोई मेरे इस राजा से बचा लो!’


पर राजकुमार हंस रहा था और मेरी बहन की चुत में लंड लगाए हुए था. तभी उसने एक जोर का झटका मारा और उसका पूरा लंड मेरी बहन की चुत के अन्दर चला गया.


उसी वक्त मेरी बहन की चुत में से खून की पिचकारी आई और उसकी तेज आह्ह्ह की आवाज निकली.

उसकी आंखें बाहर निकल आई थीं.


मुझे यह देख कर काफी डर लगने लगा था कि यह क्या हो गया मेरी बहन के साथ, कहीं वह मर तो नहीं जाएगी.


लेकिन कुछ ही देर के दर्द के वह शांत हो गई और बाद में वह मेरे दोस्त राजकुमार के लंड से मस्ती से चुदवाने लगी.


हालांकि उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे लेकिन उसके हाव भाव बता रहे थे कि उसे अच्छा लगने लगा था.


वह अपने जिस्म को राजकुमार के जिस्म से रगड़ती हुई बोली- आह … इतना सुकून आज तक मुझे कहीं नहीं मिला. इस दर्द में जो मजा है, वह मुझे कब से चाहिए था!

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राजकुमार ऐसे ही मेरी बहन के साथ चुदाई में लगा रहा.


फिर उसने पोजीशन बदल कर मेरी बहन को घोड़ी बना दिया.

उसने पीछे से मेरी बहन की गांड में लंड डाल दिया.


अब मेरी बहन फिर से बहुत तेज रोने लगी और चिल्लाने लगी.


फिर राजकुमार ने लंड बाहर निकाला और चुत चोदने लगा.

चुत चुदाई के साथ साथ उसने बाजू की दराज में से तेल लेकर उसकी गांड के तेल लगाना शुरू कर दिया.


मेरी बहन कहने लगी कि यार उधर मत करो न … चुत में ही करते रहो.

मगर राजकुमार ने उसकी एक न सुनी.


उसने मेरी बहन की गांड में तेल लगा कर उसे ढीली कर ली और अपने लंड को गांड में घुसा दिया.


मेरी बहन को दर्द कम हुआ, शायद वह तेल कुछ ऐसे किस्म का था, जिससे दर्द नहीं होता था.


मेरी बहन मजे से गांड मरवा रही थी.

मैं अपनी बहन को देखकर हैरान था और उसके दूध देख कर मेरा लंड एकदम से खड़ा था.


अब राजकुमार का माल आने वाला था और वह मेरी बहन को नीचे बैठा कर उसके मुँह में माल डालने के लिए लंड की मुठ मार रहा था.


फिर मेरी बहन ने उसके हाथ से लंड अपने मुँह में ले लिया और राजकुमार उसके मुँह को चोदने लगा.


यह सब देखते हुए मेरा दो बार पानी निकल चुका था लेकिन राजकुमार जिम करता था तो वह काफी स्ट्रांग था.


उसका माल काफी देर में निकला और मेरी बहन ने वह सारा रस पी लिया.

उसके बाद मेरी बहन ने अपने सलवार सूट को पहना और राजकुमार के गले लग गई.

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कुछ देर तक लिप किस करके वे दोनों वहां से घर की तरफ निकल गए.


मैं भी चुपके से वहां से अपने घर पर आ गया.


थोड़ी देर बाद जब मेरी दीदी घर आई तो वह थोड़ी लंगड़ा कर चल रही थी.


मैंने उससे पूछा- ज्योति क्या हुआ, लंगड़ा कर क्यों चल रही हो?

वह बोली- कुछ नहीं भैया, ऐसे ही पैर में जरा चोट लग गई थी.


वह पसीना पसीना भी हो रही थी.

मुझे उसे देख कर उसकी सारी हरकतें याद आ रही थीं.


मैं मन में खुश हो रहा था कि मेरी बहन आज इतनी बड़ी हो गई.

यह मेरे दोस्त से ही चुदवा कर आई है.


उसके बाद ऐसा ही काफी बार काफी दिनों तक चलता रहा.


मेरी बहन राजकुमार के साथ उसके फार्म हाउस पर जाती और खूब आराम से उसके साथ सेक्स का मजा लेती.


फिर एक बार राजकुमार ने अपने साथ तीन लड़कों को भी ले लिया.


उसने अपने दोस्तों से कहा- यदि तुमको भी विकास की बहन को चोदना है, तो तुम तीनों मेरे फार्म हाउस पर रहना.


मेरी दीदी ने राजकुमार से बोला- मैं कल जरूर आऊंगी, मेरे से नहीं रहा जा रहा है. मुझे तुम्हारा लंड चाहिए.


राजकुमार ने मेरी दीदी से कहा- यार मेरे तीन दोस्त और हैं. वे भी चुत की डिमांड कर रहे हैं. तुम अपने साथ किसी सहेली को ले आ सकती हो तो ले आना.

मेरी बहन ने कहा- ठीक है, मैं ले आऊंगी.

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राजकुमार ने कहा- सही बताओ, तो मैं अपने उन तीनों दोस्तों को भी फार्म में बुला लूं?

मेरी बहन ने हां कहते हुए कहा कि हां मैं अपनी पक्की सहेली को लेकर आ जाऊंगी. उसको भी चुदवा दूंगी.


लेकिन जिस दिन मेरी बहन को फार्म पर जाना था उस दिन मेरी बहन की सहेली नहीं आ पाई और वह अकेली ही चली गई.

मैं भी उसके पीछे था.


पीछे खिड़की में से मैं सब कुछ देख रहा था.

मैंने देखा कि चार लड़कों के बीच में मेरी बहन अकेली थी और वह राजकुमार से चिपक कर बैठी थी.


राजकुमार ने उससे कहा कि तुम अपनी सहेली को नहीं लेकर आईं, मैं इनको क्या जवाब दूं?


मेरी बहन जरा सहमी हुई थी.

वह बोली कि मैं अपनी दो सहेलियां आशा और मंजू को ला रही थी, मुझे नहीं पता था कि ऐन वक्त पर वे दोनों आने से मना कर देंगी.


फिर राजकुमार बोला- तू भी तो इनकी भाभी मतलब आधी घर वाली है, आज तू ही दे दे इनको अपनी जवानी का मजा!


मेरी बहन ने दो-चार बार मना किया.

शायद वह नाटक कर रही थी.

मुझे पता था कि मेरी बहन मान जाएगी.

फिर उसने हां बोल दिया.


अब चारों लड़कों ने अपने अपने औजार निकाल लिए और वे मेरी बहन के सामने सब खड़े हो गए.


चारों की बॉडी बहुत हट्टी-कट्टी थी और वे सब जिम करने वाले थे.

उन सबका कद 6 फीट ऊंचा और चारों काफी तगड़े थे.

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अब उनमें से एक ने मेरी फूल सी हल्की बहन को गोद में उठा लिया और उसे किस करने लगा.


जल्द ही मेरी बहन को नंगी कर दिया गया.

एक लड़का उसकी चुत चाटने लगा, तो दूसरा उसके बूब्स दबाने लगा.


उसको तीनों लड़के बदल बदल कर अपनी गोद में लेकर खेल रहे थे.


फिर उन्होंने मेरी बहन को लिटा दिया और बारी बारी से सब उसके ऊपर चढ़ने लगे.

एक ने अपना लंड मेरी बहन के मुँह में दे दिया था, दूसरा उसकी गांड में लंड पेल रहा था.

एक चुत में जा रहा था और वह राजकुमार के लंड को अपने हाथ से मुठिया रही थी.


यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ कि यह अकेली इस तरह से चुदवा रही है.

मेरी बहन लगातार 4 घंटे तक चुदती रही. आखिर में वह रोने लगी और बार-बार बेहोश होने लगी.

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राजकुमार ने उसको होश में लाकर उसे कपड़े पहनाए और उसे गाड़ी में बिठाकर हमारे घर छोड़ दिया.

मैं पीछे से गया तो मैंने ज्योति से पूछा कि क्या हुआ?


वह बोली- भैया, मेरी तबीयत खराब हो रही है.

मैंने पूछा कि क्या हुआ?


तो मेरी बहन ने कहा- कुछ नहीं, मैं धूप में गई थी तो मेरी तबीयत खराब हो गई.

मैंने दो-तीन महीने बाद नोटिस किया तो पाया कि मेरी बहन का पेट बाहर आ रहा है.


मैंने उससे पूछा कि यह क्या हुआ?

तो वह बोली- कुछ नहीं भैया मेरे पेट में दर्द रहता है.


मैं उसको डॉक्टर के पास ले गया तो डॉक्टर ने बताया कि इसके पेट में तो जुड़वा बच्चे हैं.

मैं वहां से आ गया और मैंने अपनी बहन से पूछा- यह सब क्या है?


तो उसने मुझे सब बताया- चार लड़कों ने मुझे पेला था. राजकुमार और उसके साथ के तीन लड़कों ने मुझे फॉर्म हाउस पर पेल दिया था. मुझसे गलती हो गई भैया कि मैंने आपको कुछ नहीं बताया. अबकी बार मुझे माफ कर दो.

मैंने कहा- कोई नहीं ज्योति तू मेरी बहन है. तुझे अपने मन की करने की पूरी छूट है. अब तू एक काम कर, अबॉर्शन करवा ले और अपनी लाइफ पहले जैसी जी. सब सही हो जाएगा.


फिर मैंने ज्योति को एक डॉक्टर के पास ले जाकर उसका अबॉर्शन करवा दिया.

उसके बाद मैं और ज्योति सामान्य रहने लगे.


एक दिन हम दोनों बातें कर रहे थे तो मैंने पूछा- ज्योति तेरे ऊपर चार लड़के आ गए थे, तुझे दर्द वगैरह नहीं हुआ.

ज्योति बोली- नहीं भैया, दर्द तो होता है लेकिन उस चुदाई के दर्द में मजा भी आता है.


मैं चुप हो गया.

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वह मुझसे बोली- भैया आपने कभी किया?

मैंने कहा- नहीं बहन, मैंने तो कभी नहीं किया.


इस पर मेरी दीदी ने कहा- चलो भैया आज आपको मजा देती हूं.

मैं उसे देख कर हैरान था.

वह हंस रही थी.


फिर मैं अपनी बहन के ऊपर चढ़ गया और उसे चोदने लगा.

आगे तो आप सभी को पता ही है कि चुदाई में क्या हुआ होगा.

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आज मेरी बहन की शादी हो गई है.

पर मेरी बहन प्रेग्नेंट हो नहीं हो पा रही है क्योंकि मेरी बहन ने पहली बार के हमल में अबॉर्शन करवा लिया था.

जिससे उसके साथ यह दिक्कत हो गई है.


अब मेरी बहन पहले की बात याद करके करके खुद को कोसती है.

मैं कभी जाता हूं तो वह मुझे आज भी उसी अंदाज में चरम सुख देती है ताकि वह किसी तरह से पेट से हो जाए.


अपनी बीवी को गैर मर्द से चुदवाने को उकसाया - Encouraged his wife to have sex with a stranger

 अपनी बीवी को गैर मर्द से चुदवाने को उकसाया


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


मेरा नाम रमन है. मैं नोएडा में रहता हूँ.

मेरी उम्र अभी 35 वर्ष है. मैं शादीशुदा हूँ और मेरे दो बच्चे हैं.


मेरी बीवी की उम्र 33 वर्ष है. वह बहुत खूबसूरत और सेक्सी है.

उसका फिगर 35-28-34 है.

वह इतनी आकर्षक है कि उसे देखकर किसी का भी मन उसकी चुदाई करने को करेगा.


हमारी शादी को 8 वर्ष हो गए हैं.

हमारा शादीशुदा जीवन बहुत अच्छा चल रहा है.

हम सेक्स के खूब मजे लेते हैं.


कभी-कभी सेक्स करते हुए मैं उसको छेड़ता था कि तुमने कभी किसी और के साथ भी सेक्स किया है?

तो वह मना कर देती थी.


मैं उसको कहता कि चल, तुझे दूसरे मर्द के लंड के मजे दिलवाता हूँ.

इस पर वह बोलती- नहीं, मुझे नहीं चाहिए.


इस तरह जब हम सेक्स करते तो मैं सेक्स करते-करते उसको दूसरे मर्द से चुदवाने की बातें करता रहता था.

अब मेरे मन में यही चलता रहता था कि इसको दूसरे मर्द से कैसे चुदवाऊं.


मैंने ठान लिया था कि अपनी बीवी को किसी दूसरे मर्द के लंड का मज़ा दिलाकर रहूँगा.

यह  हस्बैंड कुकोल्ड वाइफ कहानी इसी विषय पर है.


एक दिन मैं घर पर शराब ले आया और अपनी बीवी से बोला- चल, आज मेरा साथ दे. दोनों शराब पिएंगे और मजे करेंगे.

उसने पहले मना किया, फिर मेरे जोर देने पर मान गई.


हम दोनों ने पहले शराब पी और पीते-पीते मैं उससे रोमांटिक बातें करने लगा.

मैं उसे बताने लगा कि कैसे शादीशुदा लड़कियां भी दूसरे मर्दों से मज़ा लेती हैं.


वह कहने लगी- अगर मैं दूसरे मर्द के साथ सेक्स करूँगी, तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?

मैंने कहा- नहीं, अगर तुम मुझे बता कर करोगी, तो नहीं.

फिर शराब के न/शे में हम दोनों टुन्न हो गए.


हमने थोड़ा-बहुत खाना खाया और बेडरूम में चले गए.


वहां जाकर मैं उसको किस करने लगा और उसकी चूत में उंगली डाल दी जिससे वह गर्म हो गई.


हम दोनों ऐसे ही दूसरे मर्द से चुदाई की बातें करने लगे जिससे वह और गर्म हो गई.


अब मैंने उसको पूरी नंगी कर दिया और मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.

फिर मैंने उसको घोड़ी बना दिया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा.


अब मेरी बीवी के मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं.

वह मुझसे कहने लगी- अब मुझे चोद दो.


तो मैंने कहा- हां मेरी रानी, चोदूँगा और तुझे दूसरे मर्द से भी चुदवाऊंगा.

वह बोली- ठीक है, चुदवा देना.


मुझे लगा मेरा प्लान सफल हो रहा है और मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था.


अब मैंने उसकी चूत में अपना पूरा लंड डाल दिया और धक्के मारने लगा.

वह गांड उठाकर खूब मजे से चुद रही थी जिसमें मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.


फिर मैं नीचे लेट गया और उसको अपने लंड पर बैठने को कहा.

अब वह मेरे लंड पर बैठ गई जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.


मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मेरी बीवी भी खूब उछल-उछल कर चुद रही थी.

मैं उसको बोल रहा था- ऐसे ही दूसरे मर्द से चुदने पर वह तेरी चूत का दीवाना हो जाएगा.


उस रात हमने दो बार चुदाई की.


फिर जब भी मैं सेक्स करता, तो उसे गैर मर्द से चुदने के लिए बोलता.


वह खूब मजे लेती और प्यार से गाली देती हुई मुझसे पूछती- बता साले, किससे चुदकर तुम्हारी ख्वाहिश पूरी करूँ?

मैं भी उसके दूध दबा कर कह देता- आज तू सलमान खान के साथ चुद ले.

वह हंस कर कह देती- नहीं आज तो मैं टाइगर श्रॉफ के साथ चुदूँगी.


हम दोनों इसी तरह की मस्ती में चुदाई का मजा लेते और झड़ जाते.

ऐसे ही काफी समय निकल गया.


एक बार मेरा हाथ थोड़ा पैसों से तंग था तो उसने एक हॉस्पिटल में जॉब शुरू कर दी.

वहां बहुत से स्टाफ के लड़के उस पर लाइन मारते थे.


मेरी बीवी मुझे बताती थी कि कैसे हॉस्पिटल में स्टाफ का एक लड़का उसे गंदी नजरों से देखता है.

मैं उससे कहता- कोई नहीं, ऐसे तो लड़के लड़कियों को देखते ही हैं. वह तुझे चोदना चाहता होगा. अब तू है ही इतनी सेक्सी कि तुझे कोई भी चोदना चाहेगा. तू तो बस उससे अपना काम निकलवा लिया कर, मुस्कुराकर बात करके … समझ गई न!


वह हंस कर हां कह कर चुप हो गई.


फिर एक दिन मेरी बीवी ने मुझे बताया कि हॉस्पिटल में जो कैंटीन चलती थी, वहां का मालिक भी उस पर लाइन मारता है और उसे फ्री में नाश्ता करा देता है.


मैंने पूछा कि उस कैंटीन का मालिक कौन है?

तो उसने बताया कि वे एक अंकल हैं और उनकी उम्र भी 50 साल से कुछ ऊपर ही होगी.


मैंने कहा- अबे यार, अंकल से क्या डरना … तू उन्हें हंस कर खुश कर दिया कर … वह बुड्डा तुझे फ्री में नाश्ता-पानी करवा देगा.


कैंटीन वाले मालिक अंकल आर्मी से रिटायर्ड थे.

वे भी मेरी बीवी को चोदना चाहते थे.


जब मेरी बीवी ने अंकल को लिफ्ट देनी शुरू की तो वे अब कभी कभी मेरी बीवी की गांड पर हाथ भी मार दिया करते थे.

उनकी हरकतों को मेरी बीवी इग्नोर कर देती थी.

इससे अंकल का हौसला और बढ़ जाता था.

मेरी बीवी भी अंकल के मजे ले रही थी.


कैंटीन वाले अंकल भी उससे कहने लगे थे कि आपका जो मन करे, वह आकर खा लिया करो.


इससे हुआ यह कि मेरी बीवी के मन में से गैर मर्द संकोच खत्म होने लगा और वह भी अब किसी तगड़े मर्द से अपनी चुत चुदवाने का ख्याल अपने मन में लाने लगी थी.

उधर के कई लोग मेरी बीवी को छेड़ने लगे थे.


मेरी बीवी मुझे सारी बातें बता देती थी.

तो मैं कहता- कोई नहीं, तू इनसे ही चुद ले.

मेरी बीवी बोलती- मैं इन लफंगों से नहीं चुदूँगी. इनसे क्या मज़ा आएगा?


मैंने कहा- ठीक है, किसी जवान लड़के से दोस्ती कर ले, जो तेरी चूत की तगड़ी चुदाई कर दे और तुझे खूब मज़ा आए.


यह सुनकर उसने मुस्कुरा कर कहा- ठीक है.


अब मेरी बीवी की जिस लड़के ने जॉब लगवाई थी, वह उसी हॉस्पिटल में उसके डिपार्टमेंट का मैनेजर था.

वह मेरी बीवी की बहुत मदद करता था. उसने मेरी बीवी की रात की शिफ्ट भी नहीं लगाई थी.


वह मेरी बीवी को चोदना चाहता था.

मेरी बीवी भी उस पर फिदा हो गई थी और वह भी उससे चुदने के लिए तैयार थी.


एक दिन मेरी बीवी हॉस्पिटल न जाकर उसके साथ होटल में चली गई.

होटल के रूम में जाकर उसके मैनेजर ने उसको अपनी बांहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा.

मेरी बीवी भी उसका पूरा साथ दे रही थी.


धीरे-धीरे मैनेजर ने मेरी बीवी के सारे कपड़े उतार दिए.

अब मेरी बीवी उसके सामने पूरी नंगी थी.


मैनेजर भी पूरा नंगा हो गया था.


उसने मेरी बीवी के बूब्स चूसने शुरू कर दिए, जिससे मेरी बीवी को बहुत मज़ा आ रहा था.


उसका हाथ मेरी बीवी की चूत पर जा रहा था.

उसने मेरी बीवी की चूत में एक उंगली डाल दी.


मेरी बीवी के मुँह से ‘आह … आह’ की सिसकारियां निकल रही थीं.

वह पूरी गर्म हो चुकी थी.


मैनेजर मेरी बीवी को उंगली से चोद रहा था और मुँह से उसके बूब्स चूस रहा था.


फिर धीरे-धीरे वह अपना मुँह मेरी बीवी की चूत पर ले आया और उसकी चूत को चाटने लगा.

वे दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.


अब वह मैनेजर मेरी बीवी की चूत चाट रहा था और मेरी बीवी उसका लंड चूस रही थी.


कुछ देर बाद मेरी बीवी बोली- अब मेरी चूत में अपना लंड डाल दो. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा.

मैनेजर ने मेरी बीवी की चूत में अपना 7 इंच लंबा लंड डाल दिया.

इससे मेरी बीवी को कुछ दर्द हुआ पर कुछ ही धक्कों के बाद वह उस पराये मर्द के लौड़े से खूब मजे से चुदवा रही थी और मैनेजर मजे से चोद रहा था.

फिर मेरी बीवी डॉगी स्टाइल में भी चुदने लगी.


उस दिन वह मैनेजर से तीन बार चुद गई.


अगली सेक्स कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी बीवी को एक पुलिस वाले से भी चुदवाया.

एक रात सलहज की चूत चोदने मिल गई - One night I got to fuck my sister-in-law's pussy

 एक रात सलहज की चूत चोदने मिल गई

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


दोस्तो, मेरा नाम साहिल है.

मेरी पहली कहानी

सासू मां के साथ एक रात

को आप लोगों ने खूब पसंद किया. थोड़ा व्यस्त होने की वजह से मैं अपनी कोई सेक्स कहानी नहीं लिख पाया.


अब मैं आपके साथ मेरे और मेरे साले की बीवी के बीच हुई सेक्स कहानी को साझा कर रहा हूँ. मुझे उम्मीद है कि आप लोगो को ये हॉट फॅमिली पोर्न स्टोरी पसंद आएगी.


मेरे साले की बीवी का नाम स्वरा (बदला हुआ नाम) है. उसका फिगर 30-28-32 का है. वो दिखने में एकदम सुंदर माल जैसी है. उसका रंग मक्खन सा सफेद है.


उसकी शादी के बाद से ही हम दोनों में खूब जमती थी क्योंकि आपको तो पता ही है कि सलहज और जीजा में कुछ ना कुछ तो चलता ही रहता है.


स्वरा मुझसे अपनी हर बार साझा करती रहती थी, जिस कारण से हम दोनों काफ़ी क्लोज हो गए थे.


उसकी बातों से मुझे ये भी मालूम थी कि उसका पति उसमें कम इंटरेस्ट लेता था.

पता नहीं क्यों … लेकिन मेरे लिए तो ये सही था.


एक दिन मेरी सासू मां और उसके बेटे को उनके कोई निजी काम से एक दिन के लिए दिल्ली जाना पड़ा.


उन्होंने मुझसे कहा- आप या तो यहां रुक जाना या स्वरा को वहां अपने घर ले जाना.

स्वरा ने कहा- मैं जीजा जी के घर जाऊंगी तो घर सूना हो जाएगा. जीजू यहीं रुक जाएंगे. एक रात की तो बात है.

ये बात सुनकर उन्होंने भी हां कर दी और मैं उन दोनों को बस पर छोड़ कर उनके घर दस बजे के करीब पहुंच गया.


स्वरा ने नाइट सूट पहना हुआ था. नीचे पज़ामा और ऊपर बटनों टी-शर्ट वाली.


तो स्वरा ने मुझसे कहा- जीजू आपको चेंज करना है, तो कर लीजिए, फिर आराम से बैठते हैं.

मैं बाथरूम में चेंज करने चला गया.


मैंने जानबूझकर बाथरूम का गेट पूरा बंद नहीं किया. जब मैं अन्दर गया तो अन्दर स्वरा की ब्रा टंगी हुई थी. मैं वहां उसकी ब्रा अपने लंड पर लपेट कर मुठ मारने लगा.


कुछ ही देर में मैंने अपने लंड का पानी ब्रा में निकाला और चेंज करके बाहर आ गया.


मुझे ये नहीं पता था कि उस ब्रा को थोड़ी देर में ही उठा कर मशीन में डालने वाली है.


मैं अन्दर बैठा था तो मैंने देखा कि वो बाथरूम में गई और उसने बाथरूम से कपड़े उठाए.

फिर उसने मेरी और थोड़ा अजीब सी नजरों से देखा. फिर वो वॉशिंग मशीन की तरफ चली गयी.


मैं समझ गया कि इसे पता चल चुका है कि मैंने इसकी ब्रा के साथ क्या किया है.


फिर वो कमरे में आ गई.

कमरे की लाइट्स ऑफ होने के बाद रूम में अंधेरा हो गया था.


हम दोनों ही बेड पर लेटे हुए बातें कर रहे थे.

बातों बातों में वो मुझे बताने लगी थी कि इनको सेक्स में कोई इंटरेस्ट ही नहीं है. मैं कुछ कहूँ तो उन्हें मेरी बात बुरी लगती है.


मैंने कहा- नहीं तुम नहीं कहा करो, तुम क्यों ये सब कह कर अपनी वैल्यू कम करती हो.

वो बोली- हां, अब मुझे उनसे कुछ नहीं कहना है. मुझे उनसे अब कोई शिकायत नहीं है.

उसकी ऐसी बातें सुनकर मेरा लंड पूरा कड़क हो गया था. मैंने अंडरवियर भी नहीं पहनी थी, तो पजामे में मेरा लंड तम्बू बना रहा था.


रात के 12.30 बज चुके थे और स्वरा को नींद आ चुकी थी.


फिर भी मैंने चैक करने के लिए उसको आवाज लगाई.

उसका कोई जवाब नहीं आया.

मुझे कुछ हिम्मत मिली और मैं धीरे धीरे सरक कर उसके पास चला गया.


वो चित सोई हुई थी और उसने अपने बदन पर चादर डाला हुआ था.

शायद एसी के कारण उसे ठंड लग रही थी.


मैंने चादर को धीरे से एक तरफ किया और जहां उसकी टी-शर्ट के बटन थे, वहां हल्के हाथों से बटन खोलने लगा.


उसकी शर्ट में बटन आराम से खुलने वाले थे, तो जरा सी कोशिश में ही उसके दो बटन खुल गए.


एसी की एलईडी की रोशनी कमरे में काफी उजियाला कर रही थी जिसमें से में मुझे उसका पेट साफ़ दिखाई देने लगा था.


फिर मैं ऊपर वाले बटनों की तरफ गया तो वो उसके फूले हुए मम्मों के कारण उधर के बटन काफी टाइट लगे थे.

मुझसे बड़ी मुश्किल में उसमें से एक ही बटन खुल पाया.


तभी वो हिलने लगी और करवट लेकर पलट गई.


मुझे बहुत खीज हुई क्योंकि मुझे उसके बूब्स टच करने थे और अब वो उस साइड मुँह करके सो गई थी.


फिर भी मैंने अपनी कोशिशें जारी रखीं और कुछ मिनट बाद उसकी पीठ तरफ से उसका पज़ामा नीचे करने की कोशिश करने लगा.


स्वरा की फूली हुई गांड होने के कारण पजामा ने नीचे उतरने से मना कर दिया और मुझसे झांट कुछ नहीं हो पाया.


अब जब तक वो वापिस नहीं मुड़ जाती, तब तक मेरे पास कोई रास्ता नहीं था.


थोड़ी ही देर बाद मुझे ऐसे लगा जैसे शायद उसको सुसु आई क्योंकि वो हिल रही थी और उठने की कोशिश में थी.

मैंने इसे एक मौक़ा माना और मैं फटाफट उठ कर वॉशरूम में चला गया.


बाथरूम का गेट बिना बंद किए मैं मूतने लगा. मैं इस तरह से खड़ा था कि मेरा लंड उसे दिख जाए.


एक मिनट बाद ही वो आंखें मसलती हुई जब बाथरूम के पास आई तो मैं अपने लंड को हिला रहा था.

उसने मेरे लंड को देखा और वो एक तरफ हो गई.

वो बोली- जीजू, गेट बंद नहीं किया आपने.

मैंने कहा- कोई और था नहीं घर पर, मुझे नहीं पता था कि तुम भी उठ जाओगी. गर्मी कुछ ज्यादा थी तो नहीं किया.

वो बोली- ओके.


कुछ पल बाद मैं बाहर आ गया और वो अन्दर चली गई.


उसने सुसु की और हम दोनों वापिस बेड में आ गए.

हम दोनों फिर से सोने लगे.


उस समय रात के 3 बजे से ज्यादा का समय हो गया था.

उसने ठंड की वजह से एसी बंद कर दिया था और चादर भी हटा दिया था.


वो जब सो गई तो मैंने उसके मम्मों को सहलाना शुरू किया.


उसका कोई विरोध नहीं हुआ तो मुझे हिम्मत आ गई.

मेरी सोच यही थी कि आज कैसे भी करके ये मौका नहीं छोड़ना है.


मैंने हल्के से उसको आवाज दी, ‘स्वरा …’

उसका कोई उत्तर नहीं आया.


मैंने फिर से उसे जगाया, तो वो नींद में ही बोली- हां जीजा जी.

मैंने कहा- स्वरा यार, मैं तुझे पसंद करता हूँ.


ये बात सुनकर वो हंसने भी लगी और शर्मा गई.


वो बोली- मैं नींद में इतनी भी बेसुध नहीं हूँ, जो मुझे पता नहीं चल रहा कि आप क्या कर रहे हो. पहले मेरी ब्रा में अपना पानी गिराया, फिर मेरी शर्ट के बटन खोले. मुझे सिड्यूस करने के बाद भी आपने कुछ नहीं किया और 3 बजा दिए.


मैंने कहा- क्या मतलब?

वो बोली- मुझे भी जरूरत है जीजू … बहुत दिन से मैं भी प्यासी हूँ.

इतना कहते ही वो मेरे गले लग गई और हम दोनों लिपकिस करने लगे.

वो मेरे ऊपर आ गई और उसने मेरी टी-शर्ट को उतार दिया. वो मेरे सीने को पागलों की तरह चूमने और चूसने लगी.


मैंने उसकी शर्ट को उतार दिया और वो ऊपर ब्रा में रह गई. मैंने उसका पज़ामा उतार कर उससे कहा- हनी 69 में आ जाओ.


उसके पति ने कभी उसकी चूत नहीं चाटी थी तो वो 69 समझ नहीं पा रही थी.


फिर मैंने खुद ही उसकी चूत की तरफ आकर उसकी चूत चाटी, तो वो कंट्रोल से बाहर हो गई. मैं लगा रहा और वो आंह आंह करती रही अपनी चूत मेरे मुँह में देती रही.


कुछ ही पलों में उसकी चूत का सारा पानी मेरे मुँह में आ गया.

वो झड़ कर मेरे बाजू में लेट गई.


कुछ मिनट बाद मैं नंगा हो गया और उसको गोदी में उठा कर उसे चूमने लगा.

मेरा लंड उसकी चूत में रगड़ मार रहा था.


उसने मेरे लंड को हाथ पकड़ कर रास्ता दिखाया और मैंने लंड चूत में डाल दिया.

वो आंह कह कर सिसक उठी.


उसकी चूत एकदम कसी हुई थी.

साले साहब का लंड एक तो छोटा था और काफी दिन से चूत में गया भी नहीं था.


कुछ देर की उन्ह आह के बाद वो चुदाई के पूरे मजे लेने लगी.


हमारी चुदाई धकापेल चलने लगी.

पहली बार का मामला था तो ये चुदाई 10 मिनट ही चली और मेरा लंड पानी छोड़ने को हो गया.


मैंने लंड चूत से निकला और पानी बाहर ही छोड़ दिया.

वो काफी खुश थी.


कुछ देर बाद हॉट फॅमिली पोर्न का दूसरा राउंड शुरू हो गया.

उस बार मैंने उसे हचक कर चोदा.

वो भी अपनी चूत को हर आसन में चुदवाने को मचल रही थी.

मैंने रात भर अपनी सलहज की चूत का मजा लिया.


पूरी रात चुदाई के चार राउंड करने के बाद हम दोनों काफी थक चुके थे.

स्वरा को भी नींद आ रही थी.


मैंने उसको सोने के लिए कहा और हम दोनों बिना कपड़ों के सो गए.

अगली सुबह मॉर्निंग जब मैं उठा तो देखा कि वह बिस्तर पर नहीं थी.


जब मैंने बाहर देखा, तो वो किचन में काम पर लगी हुई थी.


मैंने उसे आवाज लगाई और चाय बनाने के लिए कहा. मेरे दिमाग़ में अभी भी सेक्स करने की इच्छा चल रही थी.


मैंने उसके रूम में आने से पहले ही लंड सहलाना शुरू कर दिया था.


कुछ ही देर में वो अन्दर आई और मुझे लंड सहलाते देख कर मुस्कुराने लगी.


उसने कहा- जीजू, अभी तक शांत नहीं हुए आप!

मैंने कहा- तू है ही इतनी सेक्सी कि कंट्रोल करना मुश्किल है.


मेरी बात सुनकर वो मेरे पास आकर मुझे लिपकिस करने लगी.


मैंने उसे कपड़े उतारने के लिए कहा.

वो झट से अपना सलवार कुर्ता उतार कर मेरे पास आ गई.


उसने सिर्फ़ ब्लैक कलर की ब्रा डाल रखी थी.


मैंने उसे मेरे मुँह पर बैठने को कहा.

वो अपनी चूत चटवाने के लिए मेरे मुँह पर बैठ गई.


मैंने जीभ से उसकी फुद्दी चाटना शुरू कर दिया. मेरी जितनी जीभ अन्दर तक जा सकती थी, मैंने डालकर मजा लिया.


मेरी इस हरकत से वो फिर से चुदासी हो गई और मेरे मुँह से चूत हटा कर मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी.

मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसकी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया.

वो और ज़्यादा गर्मा गई और मुझे लंड अन्दर डालने के लिए कहने लगी.


मैं झट से उसके ऊपर चढ़ गया और लंड सैट करके एक ही झटके में पूरी ताक़त से अपना लंड उसकी फुद्दी में उतार दिया.

वो ‘आह मर गई …’ कह कर सिहर उठी.


कुछ ही मिनट में ही उसको चरम सुख की प्राप्ति होने लगी और उसकी चूत से पानी बाहर बहने लगा.

वो चिल्लाने लगी.


मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड बाहर निकाला और उसके मम्मों पर मुठ मारने लगा, अपने लंड का सारा पानी उसके मम्मों और पेट पर निकाल दिया.

वो खुश हो गई.


उस दिन शाम को मेरे साले और सासू मां को वापस आना था.

मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली और तीन बजे तक अपनी सलहज को चोद चोद कर तृप्त कर दिया.

दोस्तो, इसके बाद भी हम जब भी अकेले में होते हैं, तो एक दूसरे साथ चुदाई कर लेते हैं.


ये मेरी सच्ची हॉट फॅमिली पोर्न स्टोरी है. आप सभी को कैसी लगी, प्लीज मुझे मेल कीजिए.

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Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


नमस्कार दोस्तो!

मैं आपका अपना साथी संदीप सिंह हूँ. मेरी उम्र 26 साल है. मैं उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर का रहने वाला हूं और दिल्ली में जॉब करता था. मैं अपनी शारीरिक बनावट की बात करूं, तो मेरी हाईट 5 फुट 7 फीट है. मेरे लंड का साइज़ काफी मस्त है, ये करीब 7 इंच लम्बा और करीब 2.5 इंच मोटा है.


मेरा शरीर बिल्कुल फिट है. उसकी वजह ये है कि मैं प्रतिदिन एक्सरसाइज़ करता हूं.


मैं अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स साइट पर साल 2012 से नियमित पाठक हूँ और अपनी सेक्स कहानियों के जरिए आप सबसे जुड़ा भी हूँ.

मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लगता है कि आप सबको मेरी कहानियां बहुत पसंद आ रही हैं.


मेरी पिछली कहानी थी: मेरा लंड लेने को आतुर मेरी कमसिन स्टूडेंट


मुझे उम्मीद है कि आप सब इसी तरह से मुझे अपना प्यार और मेरा साथ देते रहेंगे और मेरी कहानियों को पसंद करते रहेंगे.


जिन पाठकों और पठिकाओं ने मेरी पिछली कहानियां नहीं पढ़ी हैं वो कृपया पुरानी कहानियों पर भी एक नज़र ज़रूर डालें, ऊपर इस कहानी के टाइटल के नीच मेरे नाम पर क्लिक करके आप मेरी सभी कहानियाँ पढ़ सकते हैं.


मैं अपनी एक और नयी हॉट लड़की की होटल चुदाई की कहानी के साथ हाजिर हूँ.

इस हॉट सेक्स विद फ्रेंड कहानी को पढ़कर आप मुट्ठ मारने के लिए मजबूर हो जाएंगे और सेक्सी चूतों में लंड लेने की प्यास बढ़ जाएगी.


मेरी कम्पनी ने मेरा तबादला मुम्बई जैसे बड़े शहर में कर दिया था. मुम्बई मेरे लिए नया शहर था.

मुम्बई में मेरा कोई दोस्त नहीं था.

मैं अपनी कम्पनी में काम करने वाले एक साथी लड़के के साथ रहने लगा.


लेकिन मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए मैं एक महीने की छुट्टी लेकर अपने घर कानपुर आ गया.


उन्हीं दिनों मुझे अ. शर्मा के नाम से एक ईमेल आया.


उसने लिखा था कि मुझे आपकी सेक्स कहानी को पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.

मैंने भी धन्यवाद लिख कर उसके मेल का रिप्लाई दे दिया.


थोड़ी देर बाद उसका मेल आया कि आपका नाम क्या है?

मैंने अपना नाम बताया और उसका नाम पूछा.


उसने अपना नाम अनन्या शर्मा बताया.

ये नाम और शहर दोनों बदले हुए हैं.


मैंने पूछा कि आप कहां से हैं और क्या करती हैं?

उसने कहा कि वो राजस्थान से है और एक सरकारी स्कूल में अध्यापिका है.


हमारे बीच बातें होने लगीं.

उस दिन कुछ ऐसी बात जमी कि हम दोनों में रोज ही बातें चलने लगीं.


एक दिन उसने मुझे बताया कि वो शादीशुदा है और उसकी शादी को करीब 6 साल हो गए हैं.

उसके पति भी सरकारी विभाग में हैं.


हमारी बातें मेल से हैंगआउट पर आ गईं.

हम दोनों काफी बातें करने लगे.


करीब दस दिन बाद जब उसको मुझ पर भरोसा हुआ, तब अनन्या ने मेरे साथ अपना मोबाइल नम्बर शेयर किया और फोटो भी भेजी.

वो फोटो में काफी अच्छी लग रही थी. वो खूबसूरत तो थी ही.


अनन्या की उम्र करीब 28 साल की थी. उसके बूब्स 34 इंच के, कमर 28 की और 36 की गांड थी.

वो क़यामत माल लग रही थी. उसकी हाइट करीब 5 फुट 4 इंच के आस-पास की थी.

मैंने उसकी तारीफ की.

अब हमारी रोज रात में भी बातें होने लगीं.


एक दिन अनन्या ने मुझे मिलने के लिए बोला.

तो मैंने अनन्या को बताया कि मैं नहीं आ सकता हूँ.


उन दिनों मेरे घर पर काम चल रहा था.

मैंने अनन्या को सब कुछ बताया.


अनन्या ने कहा- ओके, तुम नहीं आ सकते हो तो मैं तो आ सकती हूँ?

मैंने कहा- हां ठीक है तुम आ जाओ.


वो आने को तैयार हो गई.


मैंने पूछा- होटल बुक कर दूँ?

अनन्या ने कहा- नहीं, मैं अपने हिसाब से बुक करूंगी.


दूसरे दिन अनन्या का मैसेज आया कि मैं आज कानपुर पहुंच जाऊंगी. तुम शाम को मुझे होटल में मिलने आ जाना.

मैंने कहा- ठीक है शाम को मिलता हूँ.


शाम को करीब 4 बजे अनन्या का मैसेज आया कि वो कानपुर पहुंच गयी है.


मुझे पता चल गया कि अनन्या से मिलने जाना है तो मैंने अपने घर में बता दिया कि दोस्त के घर में कुछ कार्यक्रम है, वहीं जाना है.

मैं जल्दी-जल्दी तैयारी करने लगा.


सर्दियों के मौसम में दिन बहुत छोटे होते हैं. दिन कब ढल जाता है कुछ पता ही नहीं चलता.


लेकिन वो दिन काटे ही नहीं कट रहा था.

जैसे-तैसे दिन कटा और शाम हुई.


मैं घर से निकल गया.

मेरे घर से होटल तक का रास्ता करीब 45 मिनट का था.


सर्दियों के मौसम में बाइक चलाना बहुत मुश्किल है.

होटल पहुंचते पहुंचते मेरे हाथ पैर ठंडे हो गए.


मैंने बाइक को पार्किंग में लगाया और अनन्या को फोन लगाकर उससे कमरा नम्बर पूछा.

उसने बता दिया.


मैं होटल के रिशेप्शन पर गया और उसके दिए गए कमरा नम्बर के बारे में पूछा.

रिशेप्शनिस्ट ने मेरा नाम पूछा और अनन्या के कमरे में फोन लगा कर उससे पूछा.


उधर से हामी मिलते ही मुझे एक बंदे के साथ भेज दिया गया.

उस बंदे ने मुझे कमरा दिखाया और चला गया.

मैंने कमरे की घन्टी बजाई तो अन्दर से आवाज आई- कौन?

मैंने कहा- सन्दीप.


उसने तुरंत दरवाजा खोला.

मैं पहली बार अनन्या को सामने से देख रहा था.

थोड़ी देर तक मैं उसे देखता रहा.


उसने हैलो बोला और मुझे अन्दर खींच लिया.

मेरे अन्दर आते ही उसने झट से दरवाजा बन्द कर दिया.


मैंने सामने से अनन्या को देखा तो सेम वही फिगर था जो मैंने फोटो देख कर उसके बारे में आपको बताया था.


बस सामने से उसका दूधिया रंग और भरा हुआ बदन मुझे नशे में ले आया था.

मैं ठगा सा खड़ा उसे निहार रहा था.


राजस्थान की लड़कियां ऐसे भी लम्बी होती हैं. उसका हल्का सा लम्बा चेहरा था और वो काफी अच्छी लग रही थी.

अनन्या ने मुझे गले से लगाया.


उसके चूचे मेरे सीने में दब रहे थे जो मुझे रोमांचित कर रहे थे.

हटते ही उसने मेरे होंठों पर एक छोटा सा किस कर दिया और सोफे की तरफ इशारा करते हुए बैठ गयी.


मैं भी अनन्या के करीब बैठ गया.

हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे की आंखों में देखते रहे.


फिर धीरे से उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे सहलाने लगा.


अनन्या ने अपने सिर को मेरे कन्धे में रख लिया और बोली- कुछ पियोगे?

मैंने कहा- जानेमन, मैं तो पीने ही आया हूँ.


वो मेरी तरफ शरारती नजरों से देख कर मुस्कुराने लगी.

फिर उसने रूम सर्विस को फोन करके दो चाय मंगाईं.


कुछ ही देर में चाय आ गई और हम दोनों चाय पीते हुए बात करने लगे.


चाय पीने के बाद उसने अपनी सफेद जैकेट को उतारा और बेड से कम्बल लेकर मेरे गोद में सिर रख कर लेट गयी.


मैं बात करते हुए उसके बालों को धीरे-धीरे सहलाने लगा. मैं कभी-कभी उसके माथे पर किस कर देता.


धीरे-धीरे ऐसा ही चलता रहा, पता नहीं कब हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ गए और एक दूसरे को चूमने चूसने लगे.

मैं उसके होंठों को चूसता हुआ उसके बालों को अहिस्ता अहिस्ता सहलाने लगा.

करीब दस मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे.


फिर हम दोनों अलग हुए देखा तो आठ बज रहे थे.

अनन्या ने पूछा- खाना खाओगे?

मैंने कहा कि मैं तुम्हें खाऊंगा.


अनन्या ने कहा- देखती हूँ कितना खाते हो?

हम दोनों हंसने लगे.


उसने दो प्लेट्स नॉनवेज आर्डर दिया।


मैंने पूछा- अनन्या तुम नॉनवेज खाना पसंद करती हो?

उसने बताया कि हां जबसे मैं इस स्कूल में आयी हूँ. तब से मैं अपने स्कूल की एक अध्यापिका से नॉनवेज खाना सीख गई. वो केरल से हैं उन्होंने मुझे नॉनवेज खाना सिखाया और मुझे भी पसंद आ गया. बस तभी से खाने लगी. लेकिन मेरे यहां कोई भी नहीं खाता है.


यही सब बातें करते हुए मैंने अनन्या को पीछे से अपनी बांहों में जकड़ लिया और गले में किस करने लगा.

अनन्या ने भी खुद को मेरी बांहों में ढीला छोड़ दिया और मस्त होने लगी.


मैं कभी अनन्या के गले में किस करता, कभी कान के नीचे किस करता, तो कभी पीठ पर!

फिर मैंने अपने हाथ को अनन्या के पेट पर रखा और धीरे-धीरे पेट को सहलाने लगा.


वो मेरे हाथ को ऊपर ले जाने लगी.

मैंने अपने हाथ को बिंदास अनन्या के मम्मों के ऊपर रखा और उन्हें सहलाने लगा.

साथ ही मैं उसके गले और कान में किस करता रहा.


फिर मैंने झटके से अनन्या को अपने सामने किया और उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठों को लगा दिया.

अहिस्ता अहिस्ता मैं उसके होंठों का रस पीने लगा.

अनन्या भी पूरी तरह से मेरे होंठों को चूसने लगी.


मैंने आराम से अनन्या की टी-शर्ट को निकाल दिया और हाथों से बूब्स को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगा.


कुछ पल बाद मैंने उसकी ब्रा को मम्मों से अलग कर दिया और उसके 34 इंच के मम्मों को मस्ती से सहलाने लगा, एक को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा.


अनन्या के मुँह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं.

मेरा हाथ अहिस्ता अहिस्ता अनन्या की जींस के अन्दर चूत को पैन्टी के ऊपर से सहलाने लगा.


मैं अनन्या के पैन्टी के अन्दर हाथ चूत को सहलाने लगा.

उसकी चूत बिल्कुल साफ़ थी, झांटों का कोई नामो निशान नहीं था.

चूत ऐसी चिकनी थी, जैसे आज ही साफ सफाई की गई हो.

मैंने प्यार से अनन्या की जींस और पैन्टी को उसकी टांगों से अलग कर दिया.

वो नंगी हो गई थी.

मैं उसके सामने बैठ कर उसकी चूत को चूसने लगा.


जैसे मैंने पहले भी कहा है कि मुझे चूत पीना बहुत पसन्द है, तो अनन्या की चिकनी चमेली सी चूत चाटने में मुझे मजा आने लगा था.

उधर अनन्या को भी बेहद सुखद अनुभूति हो रही थी.


थोड़ी देर तक चूत चूसने के बाद मैं खड़ा हुआ और अनन्या के होंठों को चूसने लगा.

अनन्या ने किस करते हुए मेरे कपड़े उतार दिए और नीचे बैठ कर मेरे लंड को चूसने लगी.


अनन्या लंड को काफी अच्छे से चूस रही थी.

मैं उसका सर पकड़ कर लंड को गले तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था.


कुछ देर बाद मैंने उसे उठाया और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.

अनन्या को मैंने अपनी गोद में उठाया और ले जाकर बेड पर लिटा दिया, उसके पैरों को हवा में उठा कर उसकी गुलाबी चूत को चूसने और सहलाने लगा.


कभी मैं उसकी चूत के दाने को चूसता और कभी होंठों से दबाकर खींच लेता.

अनन्या जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.


थोड़ी देर बाद हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.

मैंने अनन्या को ऊपर करके उसकी चूत को मुँह में रख लिया और जीभ को अन्दर डालने लगा.


अनन्या मेरे लंड को हाथ और मुँह में लेकर फैंटने लगी, कभी वो हाथ से करती, कभी मुँह में लेकर चूसने लगती.


मैं भी उसकी चूत के अन्दर जीभ डाल कर चोदने लगा.

काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के जिस्म को चूसते और सहलाते रहे.


मैंने अनन्या से कहा- क्या मेरी चुदक्कड़ रानी अब मेरा लंड लेने के लिए तैयार है?

उसने कहा- हां मेरे चोदू राजा, फाड़ दे मेरी चूत को अपने लंड से!


मैंने दो तकिये अनन्या की गांड के नीचे लगाए और दोनों पैरों को हवा में करके लंड को जैसे ही चूत में रगड़ा, वो मेरा लंड लेने के लिए मचलने लगी.


अनन्या की चूत चमक रही थी.

मैंने लंड को चूत में रखा और जोर से धक्का लगा दिया.

अनन्या के आंखों में आंसू आ गए.

उसने उम्मीद नहीं की थी कि मैं इतनी जोर से धक्का लगाऊंगा.


मैंने धकापेल चुदाई शुरू कर दी.

अनन्या भी कमर चला कर मेरा साथ देने लगी.


चुदाई का मजा तभी आता है, जब चुदने वाली और चोदने वाला दोनों साथ दें.


अनन्या ने खूब अच्छे से चुदाई करवाई.


करीब 20 मिनट तक मैंने और अनन्या ने अलग अलग पोजीशन में चुदाई का मजा लिया.

अनन्या को गाली देकर चुदवाने में ज्यादा मजा आता था.


इतने समय में अनन्या दो बार स्खलित हुई.

जब मेरा निकलाने को आया तो हमने पोजीशन को बदला और अनन्या के पीछे से लंड को चूत में डाल कर चोदने लगा.


थोड़ी देर में मैंने पूरा वीर्य अनन्या की चूत में डाल दिया.

काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के ऊपर उसी पोजीशन में लेटे रहे, जब तक हम दोनों की सांसें सामान्य नहीं हो गईं.


थोड़ी देर बाद हम दोनों फ्रेश हुए और कुछ खाया.

फिर एक दूसरे से लिपट कर बात करने लगे.


उस मिलन में हम दोनों ने दो रात और दिन में कम से कम दस बार से ज्यादा चुदाई की.

मैंने अनन्या को कानपुर भी घुमाया.


हम दोनों ने खूब सारी मस्ती भी की.


जिस दिन अनन्या को कानपुर से जाना था तो मैंने उससे पूछा- तुम्हें कानपुर कैसा लगा?

वो बोली- तुम और तुम्हारा कानपुर बहुत अच्छा लगा. एक चीज को छोड़ कर और वो है हवाई जहाज. मेरे यहां से कानपुर के लिए सीधी कोई फ्लाइट नहीं है. वरना जल्दी से उड़ कर आ जाती.

एक मादक चुम्बन के साथ हम दोनों अलग हुए और ये अहसास किया कि शायद भगवान की मर्जी हुई तो फिर मिलेंगे.

फिर वो अपनी दुनिया में चली गयी.


उसके बाद अनन्या ने कभी मुझसे बात नहीं की और शायद न मेरे पास समय था.

क्योंकि मुझे भी माया नगरी रास आने लगी थी.


करीब एक साल बाद एक अनजान मेल से एक मेल मिला.

उसमें अनन्या ने अपने बारे में लिखा था और साथ में एक फोटो भी थी.


मैंने फोटो को देखा तो उसमें एक प्यारी सी बच्ची की पिक थी.

बच्ची अनन्या की तरह थी.


उसने पिक के नीचे लिखा था- पहचानो कि ये कौन है?

मैंने मेल का उत्तर दिया.


थोड़ी देर बाद एक फोन आया.

उसने जैसे ही हैलो बोला मैं उसकी आवाज को पहचान गया.

मैंने कहा- अनन्या!

वो शान्त हो गयी, फिर धीमे से बोली- हां.


हमारी बात होने लगी.

वो कुछ संकोच कर रही थी.

ये शायद इतना समय बीत जाने के कारण हो रहा था.


तब भी हमारी काफी बात हुई.


उसने कहा- संदीप तुमने मेरे लिए इतना किया, उसके लिए थैंक्यू. ये बच्ची हमारे प्यार की निशानी है और हमारे परिवार में ये पहली बच्ची है. आज तक मेरे ससुराल में कभी बेटी नहीं हुई. मेरी ससुराल में सभी बहुत खुश हैं और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है.


मैंने कहा- मैं कुछ तो तुम्हारे काम आया.

वो बोली- तुमने मेरे लिए इतना किया है कि बस एक चीज तुम्हारे लिए करना चाहती हूँ, मना मत करना!

मैंने कहा- मुझे कुछ नहीं चाहिए बस तुम इसकी अच्छी सी परवरिश करना.

अनन्या बोली- उसकी टेंशन मत लो. इस बच्ची के पास अपना खुद का बहुत पैसा और जायदाद है.


हमने उस दिन काफी देर तक बात की.

उसके बाद हमारी मेल से कभी कभी बात हो जाती है.


मैंने हम दोनों के बीच जो कुछ भी इस कहानी में लिखा, वो अनन्या की अनुमति से लिखा.


धन्यवाद.


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Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


हैलो फ्रेंड्स, मैं श्रद्धा फैजाबाद की रहने वाली हूं. मेरी उम्र 21 साल है.


जब मैं ग्रेजुएशन कर रही थी, तब मेरी फिगर की साइज 30b-28-32 की थी.

मैं दिखने किसी हीरोइन से कम नहीं दिखती थी.


मेरे गोरे गाल, लंबे बाल और मेरी चाल देख कर अच्छे अच्छों का लंड खड़ा हो जाता था.


बहुत से लड़कों ने मुझे प्रपोज भी किया लेकिन मेरे घर वाले इतने सख्त स्वभाव के थे कि मैं कभी किसी लड़के को अपना ब्वॉयफ्रेंड बनाने की हिम्मत ही नहीं कर पाई थी.


जबकि मेरी सहेलियां अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ की हुई मस्ती बताती थीं कि उसका ब्वॉयफ्रेंड उसको कैसे किस करता है, चूची मसलता है, चूत में उंगली करता है, चूत चाटता है और लंड डाल कर चुदाई करता है.

वे लोग मुझे यह सब बताकर मेरी जलती व चढ़ती जवानी की आग में घी डालने का काम करती थीं.


उनकी बातों से गर्म होकर मैं घर वापस आकर सीधे अपने रूम में आती और सबसे पहले अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाती.

फिर सबसे पहले शीशे के सामने खड़ी होकर अपने शरीर को निहारती थी.


मैं अपनी चूचियों और चूत को मसलती थी, फिर बाथरूम में जाकर अपनी सहेलियों की बातों को याद करके चूत में उंगली करती थी.

रात में अंतर्वासना की कहानियां पढ़कर फिर से अपनी चुत में उंगली करती थी.

मुझे जिन लेखकों की कहानियां पसंद आतीं, उन्हें मैं मैसेज भी कर देती थी.


वहीं से एक लेखक से मेरी बात शुरू हुई और कुछ ही समय में मैं उनसे अपनी हर तरह की बातें करने लगी.

यही मेरा रोज का नियम बन गया था.


तभी मैंने सोच लिया था कि अपनी जवानी को ऐसे ही बर्बाद नहीं करूँगी!


जैसे-तैसे मैंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन करने लखनऊ आ गई.


मैं हॉस्टल में रहने लगी.

अपने खर्चे उठाने के लिए मैंने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में जॉब शुरू कर दी.


वहां मेरी मुलाकात प्रोजेक्ट मैनेजर शैलेश सर से हुई.

उनका बात करने का तरीका इतना अलग था कि कोई भी उनकी बातें सुनने को मजबूर हो जाता था.


उनके इसी अंदाज के कारण कंपनी की लगभग सारी लड़कियां उनके साथ काम करना चाहती थीं.


मुझे भी सर के साथ काम करना था.


मैं धीरे-धीरे उनके करीब जाने की कोशिश करने लगी और ज्यादा से ज्यादा वक्त उनके साथ बिताने लगी क्योंकि मैं उन्हें पसंद करने लगी थी.


मैं चाहती थी कि सर मेरे ब्वॉयफ्रेंड बन जाएं.

मैं रोज बन-ठन कर सर के सामने जाती थी.


कंपनी में काम करने वाली दूसरी लड़कियां मुझसे जलने लगी थीं.

लेकिन सर मेरी तरफ ध्यान ही नहीं देते थे.


दोस्तो आप ही बताओ, जब एक खूबसूरत लड़की सेक्सी ड्रेस पहनकर बन-ठन कर आए और लड़का उस पर ध्यान न दे, तो कैसा लगता है?

मेरा तो मन करता था कि उसकी जान ले लूँ! आप लोगों का मन क्या करता है, जरूर बताना!


फिर एक दिन मैंने शैलेश सर से अपने दिल की बात कह दी- सर, मैं आपको बहुत पसंद करती हूँ!


सर उस समय कुछ नहीं बोले और बाहर चले गए.


मुझे बहुत बुरा लगा कि कोई लड़का इतना एटिट्यूड कैसे दिखा सकता है!


मैंने ये सारी बातें लेखक को बताईं, तो उन्होंने कहा- प्यार पाने की कोशिश करो, लेकिन जबरदस्ती मत करो.


मैंने धीरे-धीरे सर से बात करना कम कर दिया.

यूँ ही दिन गुजरते जा रहे थे.


एक दिन शाम को कंपनी के बॉस ने मुझे और सर को दिल्ली जाने को कहा क्योंकि अधिकारी कंपनी की पेमेंट रिलीज नहीं कर रहे थे.


कंपनी ने हम दोनों की सुबह की फ्लाइट टिकट बुक कर दी.

हम सुबह की फ्लाइट पकड़ कर दिल्ली पहुंच गए और एयरपोर्ट से सीधे अधिकारी से मिलने चले गए.


वहां पता चला कि अधिकारी अभी आए नहीं हैं.

हमें उनका इंतजार करते-करते शाम हो गई लेकिन वह नहीं आए.


अगला दिन रविवार था और ऑफिस बंद रहता था.


सर ने ये बात बॉस को बताई, तो बॉस ने कहा- वहीं किसी अच्छे होटल में रुक जाओ … काम करवाकर ही आना!


सर ने ‘ओके’ बोलकर फोन काट दिया.

फिर सर ने पास के एक 5-स्टार होटल में दो कमरे बुक किए.


मैं बहुत थक गई थी इसलिए अपने कमरे में पहुंच कर सीधे सो गई.


थोड़ी देर बाद सर का फोन आया- श्रद्धा, मुझे बहुत भूख लगी है. तुम तैयार हो जाओ, नीचे रेस्टोरेंट चलते हैं खाना खाने!

मैं- सर मुझे भी बहुत भूख लगी है और मैं बहुत थक भी गई हूँ. मेरा मन नहीं कर रहा जाने का!

शैलेश- तो फिर एक काम करो. जो तुम्हारा मन हो, वह खाना अपने रूम में ही मंगवा लो … हम दोनों वहीं खा लेंगे!

मैं- ठीक है सर.


मैंने खाने का ऑर्डर दिया और नहाने चली गई क्योंकि खाना आने में कम से कम आधा घंटा तो लगना ही था.


थोड़ी देर बाद किसी ने मेरे रूम का दरवाजा खटखटाया.

मैंने सोचा कि वेटर खाना देने आया है.


मैंने अन्दर से ही कहा- दरवाजा खुला है, खाना रख दो और जाओ! मैं बाद में देख लूँगी!


थोड़ी देर बाद मैं सिर्फ पैंटी और तौलिया लपेट कर बाहर आ गई और देखा कि सर अन्दर खाने को टेबल पर सैट कर रहे थे.


उन्हें देखते ही मैं इतनी तेज़ी से बाथरूम की ओर भागी कि मेरा पैर पानी की वजह से फिसल गया और मैं सीधे बाथरूम के अन्दर जाकर दीवार से टकरा गई.


इससे मेरे बाएं हाथ, पैर और सिर में चोट लग गई.

सिर में चोट लगने की वजह से मेरी आंखों के सामने कुछ देर के लिए अंधेरा छा गया.


सर मेरे गिरने की आवाज़ सुनकर जल्दी से बाथरूम में आए, मेरे कपड़े ठीक किए क्योंकि मेरा तौलिया मेरे शरीर को ना के बराबर ढक रहा था.


फिर सर मुझे उठाकर बेड पर ले आए.

मेरी लेफ्ट साइड की बॉडी बहुत दर्द कर रही थी.


सर जल्दी से अपने रूम में गए और दर्द की टैबलेट और मूव स्प्रे ले आए.


शैलेश- कहां चोट लगी है?


मैं बिना कुछ बोले उंगली से इशारा करने लगी. सर उस जगह पर स्प्रे करते जा रहे थे और मैं मल रही थी.

शैलेश- तुम कैसे काम करती हो … इतनी लापरवाही! अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो मैं बॉस को क्या बताता?

मैं सिर्फ सर की डाँट सुनती रही.


मैं कहती भी क्या कि सर, आपकी वजह से गिरी हूँ! ऐसा तो नहीं बोल सकती थी.


मैं- सॉरी सर!

शैलेश- ठीक है कोई बात नहीं! ज्यादा चोट नहीं लगी, उठो और खाना खा लो.


मुझे उठने में दिक्कत हो रही थी, तो सर खाना बिस्तर पर ही ले आए.

हम दोनों खाने लगे.

मैं अभी भी तौलिये में थी.


खाना खाते-खाते मेरा तौलिया गिर गया और मेरे बूब्स बाहर आ गए.

मैं दाहिने हाथ से खाना खा रही थी और बाएं हाथ में दर्द की वजह से वह उठ नहीं रहा था.


सर ने ये देख लिया.

वे उठे और मेरे पीछे आ गए.

उन्होंने तौलिये को ऊपर करके उसमें गाँठ मार दी.


फिर सर वापस जाकर खाना खाने लगे.

सर के हाथ की गर्मी से मेरे पूरे शरीर में एक अलग ही न/शा चढ़ने लगा.


मैं पैर आगे करके धीरे-धीरे अपने पैर खोलने लगी, जिससे मेरी पैंटी दिखने लगी.


सर की नज़र बार-बार मेरी पैंटी की तरफ जा रही थी लेकिन मेरे देखने से पहले वह नज़र हटाने की कोशिश करते थे.


मेरी नज़र बार-बार सर के उफान मार रहे लंड पर जा रही थी.

फिर हम दोनों का खाना खत्म हो गया. सर उठकर प्लेट बाहर रख आए.


मैं उठकर हाथ धोकर वापस बेड पर आ गई.

तभी मैं अपनी 32C-28-34 की जवानी में मदहोश होकर पूछ बैठी.

मैं- सर क्या मैं आपको अच्छी नहीं लगती?

शैलेश- ऐसा कुछ नहीं है! तुम बहुत खूबसूरत हो … अब तुम आराम करो.


इतना बोलकर सर चले गए और मैं अपने मोबाइल लेकर गूगल चैट पर लेखक को मैसेज करने लगी.


थोड़ी देर में लेखक ऑनलाइन आ गया.

मैं उनसे पूरी बात बताने लगी.


मैं- मैं आज चुदना चाहती हूँ. आज तुम मेरी प्यास बुझा दो!


मैं उनसे अपनी चूत में उंगली करती हुई लिख रही थी.


लेखक- चोदना तो मैं भी चाहता हूँ!

मैं- तो आ जाओ मेरे पास!


लेखक- आ तो जाऊं, लेकिन कैसे?

मैं- वीडियो कॉल पर अपना लंड दिखाओ!


लेखक- ठीक है आओ और तुम भी मुझे अपनी चूत, बूब्स दिखाओ और मैं अपना लंड दिखाता हूँ.


कॉल करते ही लेखक अपना तगड़ा, मोटा लंड मसलते हुए दिखा रहा था.

मैं अपनी चूत में उंगली करती हुई उसे दिखा रही थी.


फिर धीरे-धीरे मैं उसे अपने बूब्स मसलती हुई दिखाने लगी.


मैं- अब चेहरा भी दिखाओ!

लेखक- ओके … तुम भी दिखाओ!

जैसे ही हम दोनों कैमरे के सामने आए, हम दोनों हैरान हो गए.

क्योंकि इतने साल से मैं जिससे बात कर रही थी, वे कोई और नहीं … शैलेश सर थे!


मैं- सर आप?

शैलेश- तुम?


हम दोनों ने फोन काट दिया.


मैं तौलिया फिर से लपेट ही रही थी कि सर मेरे रूम में आ गए और बेड पर बैठ गए.


मैं- सर आप ही वह लेखक हैं, जो अंतर्वासना में कहानियां लिखते हैं?

शैलेश- हां … लेकिन तुम! मैंने कभी नहीं सोचा था कि जिससे मैं इतने समय से बात कर रहा हूँ … वह लड़की तुम ही हो जो मेरे साथ काम करती है!


मैं- मैं भी नहीं जानती थी कि आप इतनी सारी लड़कियों और औरतों को खुशी देने वाले हैं! लेकिन आपको मुझसे क्या दिक्कत है? मैं आपको पसंद करती हूँ! मैंने प्रपोज भी किया है!

शैलेश- मैं गर्लफ्रेंड नहीं बनाना चाहता … और नहीं चाहता कि मैं किसी ऐसी लड़की के साथ सेक्स कैसे करूँ जो मेरे साथ काम करती है!


इतने में मैंने अपना तौलिया निकाल दिया और अपनी चूत और बूब्स सर को दिखाने लगी.


मैं- मैं तो उस लेखक को चूत दिखा रही हूँ, जो कुछ देर पहले मुझे चोदने वाला था!


सर ने अपने हाथ को धीरे से बढ़ा कर मेरी चूत पर रख दिया और एक उंगली मेरी चूत में डाल दी.


शैलेश- तुम्हारी चूत बिल्कुल कुंवारी लगती है … कभी चुदाई नहीं की क्या?

मैं- नहीं … आह्ह … सिवाय चूत में उंगली के कुछ नहीं डाला … मैं बिल्कुल कुंवारी हूँ … आह आह्ह …

मैं गर्म सिसकारियां भरने लगी.


सर ने मुझे अपनी तरफ खींचकर अपनी गर्म-गर्म जीभ मेरी चूत में डाल दी.

मैं सर का सिर अपनी चूत में दबाने लगी.


थोड़ी देर में मुझे इतना मज़ा आने लगा कि मेरा खुद पर काबू न रहा. मेरी बॉडी अकड़ने लगी.

मैं- आहह … आहह … आहह …

मेरी सांसें फूलने लगीं.

मैं झड़ गई.


सर का मुँह मेरे पानी से पूरा गीला हो गया.


सर ने लोअर उतार कर अपना लंड मेरे हाथ में दे दिया.

मैं उसे मसलते हुए मुट्ठी मारने लगी.


तभी सर ने मेरा मुँह दबा दिया.

शैलेश- मुँह में लो इसे आह जोर-जोर से चूसो!


जिस तरह पॉर्न में लड़की लंड चूसती है, उसी तरह मैं भी जोर-जोर से लंड चूस रही थी.

सर का लंड पूरा मेरे मुँह के अन्दर नहीं जा रहा था.


शैलेश- चूस मेरी रानी …. आह जोर जोर से चूस … आज तुझे स्वर्ग दिखाऊंगा आह्ह्ह … उह्ह … ओह्ह्ह … श्श्श्श्श्ह!

मैं- ओह्ह … यह् … उह्ह्ह!


मेरे मुँह में लंड होने की वजह से कुछ साफ आवाज नहीं निकल पा रही थी.


सर ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला और मेरी गीली चूत में रगड़ने लगे.


मैं अपनी कमर उठा-उठाकर लंड लेने की कोशिश करने लगी, लेकिन सर लंड चूत में नहीं डाल रहे थे.


मैं- प्लीज, अब मत तड़पाओ न … डाल दो मेरी कुंवारी चूत में अपना लंड … आह बना दो मुझे कली से फूल!

मैं गिड़गिड़ाती हुई सर से निवेदन कर रही थी.


शैलेश- हां मेरी जान, आज इस फूल को पूरा निचोड़ दूँगा!

सर ने नीचे तौलिया बिछाया और मुझे उस पर लिटाया.


जैसे ही उन्होंने अपना लंड मेरी टाइट चूत पर रखकर झटका मारा, शायद 2 इंच ही गया होगा कि मेरी आवाज फट पड़ी.

मैं- आई मर गई आह!

मैं जोर से चिल्लाई.

मेरी कुंवारी चूत की सील आज टूट गई.


मेरी चूत में ऐसा लगा जैसे किसी ने मिर्च डाल दी हो, वह जलने लगी.


मैं सर को बाहर धक्का देने की कोशिश करने लगी और सर ने मेरा मुँह दबाकर मेरी आवाज को दबाने की कोशिश की.


सर ने अपना लंड मेरी चूत में डाले हुए ही मुझे जकड़ लिया और बिना कुछ किए मेरे ऊपर लेट गए.


मैं जोर-जोर से हाथ-पैर पटकने लगी. मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरी जान निकल गई.


थोड़ी देर बाद जब दर्द कम हुआ, तो सर ने वापस एक जोरदार झटका मारा.


मैं- आईईई … श्श्श्श्श्ह्ह!


मुझे लगा जैसे कोई गर्म पैनी तलवार मेरी चूत को चीरती हुई मेरे गर्भाशय तक पहुंच गई.


कसम से इतना दर्द मैंने कभी नहीं झेला था.

शैलेश- बस्स्स हो गया!


सर अब चूत में धीरे-धीरे झटके मार रहे थे.

टप्प-टप्प … टप्प-टप्प की आवाज से पूरा कमरा गूंज उठा.


सर के लंड का टोपा मेरी चूत से रगड़-रगड़ कर अन्दर-बाहर हो रहा था, जिससे बहुत मजा आ रहा था.


मैं- आह्ह … आह … आह्ह … आह्ह!


इतना मजा मुझे पॉर्न देखने में कभी नहीं आया था.

थोड़ी देर की चुदाई में मेरी चूत पानी-पानी हो गई.

‘आ आहह …’

सर ने अपना लंड निकाल कर मुझे डॉगी पोज में आने को कहा.

मैं जैसे ही कुतिया बनी, सर ने पीछे से लंड चूत में डाल दिया और मुझे चोदने लगे.


मैं- आहह … आहह!

शैलेश- ओहह … ओहह … आहह … उहह … श्श्श्श्श्ह्ह!


मुझे इस तरह कुछ देर चोदने के बाद सर नीचे आ गए.


शैलेश- मेरे ऊपर चढ़कर लंड को चूत में डालकर बैठो!

मैं- ओके … आह आपने मेरी जान निकाल दी मेरे दिलवर आह!


मैंने वैसा ही किया.

लंड पर उछलने के साथ ही मेरे दूध हवा में उछलने लगे.


मेरे 34 साइज के बूब्स को सर जोर-जोर से मसल रहे थे.

कभी मेरी गांड पकड़कर मुझे उछाल रहे थे.


शैलेश- गांड उछालो लंड पे … आह!

मैं- आह्ह … आहह … आह!


शैलेश- ओहह … आहह … उह्ह! जोर-जोर से उछलो! मजा आ रहा है न?

‘हआह हां आह मजा आ रहा है!’


देसी चूत फक करने में अब पूरा कमरा चुत लंड की पट पट और मेरे कंठ से निकलती अआह्ह ओह्ह की आवाजों से गूंज रहा था.


मैं- बहुत ज्यादा मजा आ रहा है सर आह … चोदो और तेज चोदो मुझे आह आह!

शैलेश- उछलती रहो मेरी रंडी आह आह.

मैं- आहह … आहह … आहह … आह्ह् … आह्ह्ह्!


बहुत देर तक चुदने से मेरी चूत में जलन होने लगी थी.

मैं लंड पर उछलती हुई बस यही सोच रही थी कि कब सर का लंड पानी निकालेगा.

हमारी चुदाई को लगभग 40 मिनट से ऊपर हो गए थे.

शैलेश- मेरा निकलने वाला है ओहह … ओहह … श्श्श्श्श्ह्ह!


सर अपना लंड चूत से निकालने ही वाले थे कि मेरे मुँह से निकल गया.


मैं- मुझे आपके लंड के वीर्य की गर्मी अपनी चूत में महसूस करनी है! मेरे अन्दर ही निकाल दो! मैं आई-पिल ले लूँगी!

शैलेश- ठीक है ओहह … ओहह … श्श्श्श्श … ओहह … श्श्श्श्श्ह!


सर के लंड की पिचकारी मेरी जख्मी चूत में मलहम की तरह काम कर रही थी. इतनी देर की चुदाई के बाद मैं बहुत थक गई थी.


मैं बिस्तर पर पड़े तौलिये को देखा, वह पूरा खून से सना हुआ था.


मुझमें उठने की हिम्मत नहीं थी.

मैं सर से लिपट कर सो गई.


करीब एक घंटे बाद सर मेरी गांड में उंगली डालने लगे.

मुझे दर्द हुआ तो मैं उठ गई.


मैं सर को मना करने लगी.

शैलेश- तुम्हारी गांड बहुत मस्त है! इसे देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है!


मैं- सर आज ही तो आपने मेरी चूत तो चोदी है. किसी और दिन गांड मार लेना. मुझे बहुत दर्द हो रहा है!


शैलेश- मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है!

मैं- मेरी चूत में डालकर फिर से मुझे चोद दो!

शैलेश- ठीक है!


सर ने मुझे फिर से चोदना शुरू कर दिया.

उस रात सर ने मुझे तीन बार चोदा.


अगले दिन सुबह मैं चल भी नहीं पा रही थी.


सच कहूँ तो उस रात की चुदाई आज भी याद आती है तो मन तड़प उठता है.

उसके बाद हम दोनों कई बार मिले.

आज मैं शादीशुदा हूँ.

लेकिन जो शारीरिक सुख सर से मिला, वह मुझे अपने पति से नहीं मिला.


शायद इसी वजह से इतनी सारी लड़कियां और औरतें शैलेश सर से सेक्स करना चाहती हैं.

हाउसवाइफ से बनी रण्डी - housewife turned prostitute

 हाउसवाइफ से बनी रण्डी

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


मेरी एक सहेली है हया (बदला हुआ नाम), और उसका पति अखलाक, उन दोनों का जीवन आपसी मुहब्बत, कामुक शौक, मस्ती और आनंद से भरा हुआ है।


उन दोनों ने अपने जीवन में सैक्स के हर खेल के भरपूर मजे लिए हैं।

दोनों ने एक दूसरे को पूरी छूट दे रखी है कि वे दोनों जब, जिस को, जहां मौका मिले, अलग अलग या साथ में, चुदाई का मजा ले सकते हैं।


हया का कहना है कि उसे ठीक से याद नहीं पर उसने कम से कम 30-40 लंड ले रखे हैं।


मैंने उससे पूछा- तेरे शौहर अखलाक ने कितनी औरतों को चोद रखा है?

वह बोली- 25-30 तो उसने भी चोदी होंगी।


इस पर मैंने पूछा- तूने इतने ज्यादा मर्दों से चुदवाया, तेरी तुलना में अखलाक ने कम औरतें चोदी, ऐसा क्यों?

तो वह बोली- क्योंकि किसी भी औरत के लिए मर्द को पटाना बहुत आसान होता है।


मैं तो यह कहूंगी कि अधिकांश मामलों में मर्द को यह गलतफहमी होती है कि उसने औरत को पटाया है। जबकि वास्तव में तो औरत ने अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए मर्द का शिकार किया होता है।

क्योंकि यदि औरत ना चाहे तो किसी भी मर्द की हिम्मत नहीं है कि वह उस औरत को छू भी सके।


हया अपने पति की गैरमौजूदगी में भी कई मर्दों से चुद चुकी है.

और पति के सामने भी उस ने कई बार नए-नए लंड से चुदाई के मजे लिए हैं।


उन दोनों ने अपनी हर तरह की सैक्स फैंटेसी पूरी की है। उन ने कभी, किसी गैर मर्द के साथ 3सम किया है तो औरत के साथ भी, कभी 4सम में दो मर्द उनके साथ थे तो कभी दो औरतें।


उनके लिए कपल स्वैपिंग तो जैसे एक सामान्य कामक्रीड़ा थी।

दोनों ने एक दूसरे की हर फैंटेसी को पूरा करने में अपना पूरा सहयोग दिया था।

यहां तक कि उन्होंने कई बार ग्रुप सेक्स के मजे भी लिए थे।

इसके लिए वे ऐसे क्लबों में गए जहां कामुकता का नंगा खेल होता है।

कोई भी मर्द किसी भी औरत के साथ और कोई भी औरत किसी भी मर्द के साथ मनचाही मस्ती कर सकते थे।

जहां किसी को कुछ भी करने से रोकना, वहां की तहजीब के खिलाफ माना जाता है।


एक बार तो ऐसे क्लब में हया को 10 से अधिक मर्दों ने जी भर के नोचा, उसके वासना की आग में जलते हुए शरीर को अंदर बाहर से वीर्य में तरबतर कर के ठंडा कर दिया था।


हया का कहना था कि उसे याद नहीं कि उस दिन उसकी चूत में कितने लंड गए, कितने गांड में घुसे, कितने मुंह में और कितनों ने उसके बदन पर वीर्य रस का छिड़काव किया।

उसे बस इतना याद है कि उस दिन उसने मस्ती के सब से ऊंचे शिखर को छुआ था।


इतने कामुक और खुले, सैक्स से भरे जीवन के बावजूद हया की एक अजीब सी फैंटेसी बाकी थी, जिसे वह हर हाल में पूरा करना चाहती थी।

उसकी हसरत थी कि वह एक रात रंडी बन के किसी गैर मर्द से चुदवाये.

और इतना ही नहीं, उसको चोदने के लिए ग्राहक, उसका शौहर अखलाक ढूंढ के लाए।


उसने अपनी यह फैंटेसी कैसे पूरी की, उस के बारे में मुझे बताया और मुझ से आग्रह किया कि उसकी इस हसीन फेंटेसी को, बिना उसका नाम लिए, कहानी के रूप में प्रस्तुत करूं।


जिससे उसके जैसी उन्मुक्त जीवन जीने वाली, प्रकृति के इस वरदान का भरपूर दोहन करने वाली, अन्य औरतों को भी इस नए आनंद को प्राप्त करने की प्रेरणा मिल सके।


क्योंकि ऐसी अजीब सी लालसा बहुत सी कामुक औरतों की फैंटेसी हो सकती है।

इस कहानी को पढ़ कर उनके लहू में भी उबाल आ सकता है।

उनमें भी किसी मौके पर अपनी फैंटेसी को पूरा करने की हिम्मत आ सकती है।


यह भी हो सकता है कि अपनी बीवी को गैर मर्द से चुदवाने वाले किसी शौहर की भी, इस किस्म की फैंटेसी हो और कहानी पढ़ के उस शौहर में, इस फेंटेसी को पूरा करने का जोश आ जाए।


इसलिए मेरे कामुक, रसीले पाठकों के लंड को तन्नाने और अपनी हर अधूरी हसरतों को पूरा करने को बेकरार, गर्म चूत वाली पाठिकाओं के लिए प्रस्तुत है मेरी सहेली की यह अनोखी, मगर सच्ची कहानी उसी के शब्दों में:


मैं हया हूँ, मैं 40 वर्षीया, 38 36 38 की फिगर और मांसल बदन वाली एक भरपूर जवान औरत हूं।

मेरे शौहर और मैं सैक्स का, कामक्रीड़ा का भरपूर मज़ा लेते हैं, नए नए लोगों के साथ, नए नए कामुक खेलों ने हमारे जीवन को आनन्द से भर रखा है।


मुझे नहीं पता नहीं कि हर कामुक औरत की ऐसी इच्छा होती है या नहीं … लेकिन मेरी बहुत दिली इच्छा थी कि एक दिन मैं किसी गैर मर्द से रण्डी बनकर चुदवाऊं।

मैंने अपनी इस निराली हसरत का इज़हार अपने शौहर से किया।


मेरे शौहर तो वास्तव में बड़े अनोखे हैं, उन्हें मेरी हर हसरत पूरी करने में एक अजीब सा आनन्द मिलता है।

उनने मेरी इस हसरत को भी सच करने की ठान ली।


मैं अपने शौहर के बारे में बता दूं, उनका नाम अख़लाक़ है.

वे 42 वर्षीय, 5 फीट 10 इंच के बहुत ज्यादा रसिक व्यक्ति हैं।

उन्हें चुदाई के अलावा और कोई शौक नहीं है।

वे न सिर्फ बढ़िया चुदाई करते हैं बल्कि मेरी हर तरह की ख्वाहिश पूरी करते हैं।


उनका लंड करीब साढ़े छः इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।

अपने इस शानदार लंड से उन्होंने मुझे हजारों बार झड़ा के तृप्त कर रखा है यानि वो चोदन क्रिया में निपुण हैं।


सैक्स के किसी भी खेल के लिए पूछो तो … ना तो वे कभी कहते ही नहीं!

उनका एक ही जवाब होता है- जरूर ट्राई करेंगे।


एक बार जब वो पहली बार मेरी गांड मारने वाले थे, तब उन्होंने लंड का सुपारा घुसेड़ने की कोशिश की थी तो दर्द के मारे मैं बिदक गई.

मैंने कहा- इतना मोटा लंड तुम्हारी गांड में घुसे तो पता चले!

तो वे हँस के बोले- हया, मौका आयेगा तो नीग्रो के जैसे लंबे-मोटे लंड से अपनी गांड मरवा के भी दिखा दूंगा।


मेरी किसी भी तमन्ना के लिए उन्होंने कभी मना नहीं किया।

जीवन में मेरे पास हर तरह की सुख सुविधा मौजूद है, किसी चीज की कमी नहीं है।


जब उन्हें मेरी इस रण्डी बनाने की विचित्र तमन्ना के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके लिए भी मना नहीं किया, बल्कि उनका लंड भी ये ख्वाहिश सुनकर तन्नाने लगा.

यह इस बात का सबूत था कि उनको भी मेरा आइडिया बहुत सैक्सी लगा था।


इसे पूरा करने के लिए उन्होंने हमारे शहर से 300 कि मी दूर जयपुर शहर को चुना।


हम शनिवार को दोपहर में वहां पहुंचे, खाना खाकर सो गए क्योंकि पूरी रात तो नए अनजाने, किसी गैर मर्द के लंड के मजे लूटने थे।


शाम 7 बजे करीब अख़लाक़ किसी बार से एक छह फुट के गठीले, कसरती बदन वाले 29-30 साल के लड़के राजेश को लेकर आए.


अख़लाक़ 6 बजे के करीब मेरे लिए ग्राहक ढूँढने निकल गए थे.

उन्होंने मुझे बाद में बताया था कि राजेश बार में अकेला बैठा ड्रिंक कर रहा था तो अख़लाक़ खुद भी एक पैग लेकर उसके पास जा के बैठ गए।


मेरे शौहर मार्केटिंग में हैं तो किसी भी व्यक्ति से परिचय करने में एक्सपर्ट हैं.

अख़लाक़ ने उससे इंट्रो किया तो पता चला कि वो राजेश है, एक मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब करता है.

उसकी शादी को चार साल हुए थे और उसकी बीवी डिलिवरी के लिए मायके गई हुई थी.

राजेश डेढ़ महीने से बिना चुदाई के तड़प रहा था.


अख़लाक़ को लगा यही राजेश, मेरी गैर मर्द के लंड की प्यासी चूत की फैंटेसी पूरी करने के लिए बिलकुल सही रहेगा।

तो अख़लाक़ ने उससे पूछा- यार एक बात तो बताओ, इतना समय हो गया तुम्हारी बीवी को गए … तो फिर रात में तुमको चैन कैसे पड़ता है?

वो बोला- सेल्फ सर्विस और क्या करूं?


अख़लाक़ ने पूछा- क्यों कोई स्टेपनी नहीं है?

वो बोला- नहीं सर, शादी के बाद अभी तक तो कंट्रोल किया हुआ है.


फिर अख़लाक़ ने पूछा- क्यों, यहां तो अच्छी प्रोफेशनल भी मिल जायेगी?

तो उसने कहा- सर, मैंने अब तक या तो गर्लफ्रेंड के साथ सैक्स किया है या फिर किसी भाभी, आंटी के साथ। किसी धंधे वाली औरत के पास अभी तक तो गया नहीं।


इस पर अख़लाक़ ने पूछा- यदि तुम्हें किसी अच्छे घर की ‘कामुक हाउस वाइफ’ मिले तो?

वो बोला- साफ साफ बोलो न सर, क्या कहना चाह रहे हो?


फिर अख़लाक़ ने कहा- देखो यार, मेरी बीवी का नाम हया है, हम ओपन माइंड कपल हैं, स्वैपिंग, थ्रीसम, फोरसम, हर तरह के सैक्स को खुल के एंजॉय करते हैं।

उसने पूछा- क्या तुम मुझे अपनी वाइफ हया को फक करने की पेशकश कर रहे हो?

अख़लाक़ ने कहा- हां, यूं ही समझो, बहुत आनन्द आएगा।


फिर राजेश ने पूछा- आप लोग कुछ चार्ज भी करेंगे या मुफ्त में आपकी बीवी चोदने को मिलेगी?

तो अख़लाक़ को मेरे रण्डी बन के चुदने में एक्स्ट्रा किक लगने का ध्यान आया तो उनने बोला- अरे यार, मेरी बीवी कोई धंधे वाली औरत नहीं है, न हमारे पास रुपए पैसे की कमी है। उसे बस एक बार एक अजनबी मर्द से रण्डी की तरह चुद के एंजॉय करना है, इसलिए वो चार्ज तो करेगी लेकिन बहुत कम!


इस पर उसने कहा- लेकिन यार, मैं बहुत भूखा हूं, मजा पूरा आना चाहिए!

अख़लाक़ ने कहा- हम दोनों मिलकर तुमको मस्त कर देंगे, यह हमारा वादा है।


फिर राजेश ने अख़लाक़ से पूछा- यार, तुम मेरे साथ मजाक तो नहीं कर रहे? क्या मैं तुम्हारी वाइफ से बात कर सकता हूं?

अख़लाक़ ने कहा- मैं हया से पूछ कर बताता हूं.


तब अख़लाक़ ने थोड़ा अलग होकर मुझसे पूछा- एक लड़का मिला है जो तुझसे बात करना चाहता है।

मेरा रण्डीपन मेरे दिमाग पे इतना हावी था कि मेरी चूत अपने ग्राहक से बात करने के नाम से रिसने लगी।


मैंने कहा- हां, बात करवाओ।

अख़लाक़ ने अपना फोन राजेश को दिया.


उसने अख़लाक़ को कहा- मैं थोड़ा अकेले में बात करना चाहता हूं.

तो अख़लाक़ थोड़ा दूर चले गए।


राजेश ने मुझ से पूछा- हया जी, आप एक अच्छे घर की होकर मेरे साथ रण्डी की तरह एंजॉय करोगी, तो मुझे छूट कितनी होगी?

मैंने कहा- 100%, तुम जो भी चाहो करना, जैसे चाहो वैसा करना, जितनी देर चाहो, उतनी देर करना!

उसने कहा- ओके … और तुम्हारी डिमांड क्या है?

मैंने कहा- मुझे ज्यादा नहीं केवल दस हजार दे देना, दस हजार में पूरी रात के लिए ये रण्डी तुम्हारी! तुम भरपूर मस्ती करना, जी भर के आनन्द लूटना, रौंद डालना मेरी जवानी को। मुझे मेरा रण्डी बन के चुदने का आनन्द चाहिए बस!


इस पर वो बोला- मुझे तुम से मिलना मंजूर है। लेकिन मैं जो चाहूं वो करूं? जैसे चाहूं वैसे करूं? और जितनी देर चाहूं उतनी देर करूं?

मैंने कहा- बिल्कुल सही, आज की रात तुम्हारी जिंदगी की यादगार रात होगी।


उसके बाद वो अख़लाक़ के साथ होटल के हमारे रूम में आया.

अख़लाक़ ने हम दोनों का परिचय करवाया।


हम तीनों ने दो दो पैग व्हिस्की के लिए!


पीने के बाद अख़लाक़ ने कहा- मैं कमरे में रुक सकता हूं या तुम अकेले एंजॉय करोगे?

वो बोला- रुको न यार, यह पहला मौका होगा जब मैं किसी मर्द की बीवी को, उसी के शौहर के सामने चोदूंगा। तुम्हारे सामने तुम्हारी लम्पट बीवी को एक रण्डी की तरह चोदने में अधिक मजे आयेंगे।


मैंने साड़ी पहन रखी थी.

राजेश ने चीरहरण से शुरू किया.


मैंने भी उसकी जैकेट, टी शर्ट उतारी।

फिर उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा भी उतार फैंकी.


जब उसने मेरे कोमल, मुलायम स्तनों पर हाथ फेरा तो मेरे बदन में वासना की लहरें उठने लगी।


उसने मेरे नंगे बदन से अपना बदन चिपका लिया और मेरे होंठ चूमने लगा.

फिर वह अपने दोनों हाथों से मेरे कूल्हे दबाने लगा.

वासना के वशीभूत मेरा हाथ उसके लंड पर चला गया.

वो तन्नाने की प्रक्रिया में था.


तभी राजेश पलंग के किनारे बैठ गया.


मैंने उसे कहा- तुम दोनों मर्द मेरे दोनों बोबे एक साथ चूसो!

उसको भी यह आइडिया पसंद आया, उसने अख़लाक़ को बुलाया.


अख़लाक़ भी इस बीच आधे नंगे हो गए थे.


फिर दोनों ने एक साथ मेरे बोबे चूसे और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी.


करीब पांच मिनट तक मेरे बोबे चूसने के बाद राजेश खड़ा हुआ, उसने अपनी जींस और अंडरवियर एक साथ उतारी और मेरा पेटीकोट पैंटी सहित खींच के उतार दिया।


मैं एक रात की रण्डी एक गैर मर्द के सामने पूरी नंगी खड़ी थी.

अख़लाक़ भी पूरे नंगे हो गए थे.

राजेश ने अख़लाक़ को पूरा नंगा देखा तो बोला- अख़लाक़, अब तुम सोफे पर बैठ कर लाइव ब्लू फिल्म देखो. तुम्हारी ये कामुक हाउसवाइफ अब से कुछ घंटों के लिए मेरी रण्डी है रण्डी!


अख़लाक़ हंसते हुए जाकर सोफे पर बैठकर अपने लंड को सहलाने लगे.


राजेश ने मेरे कंधों पर दबाव डालकर मुझे झुकाया और अपना लंड मेरे मुंह के सामने ले आया।


यार … यह पहला लंड था जो अख़लाक़ के लंड से करीब एक इंच अधिक यानि साढ़े सात इंच लंबा था और मोटा भी थोड़ा ज्यादा ही था।


मैंने राजेश के चिकने, सांवले, सलौने, सुहाने लंड को कुछ पल निहारा.

उसने शायद आज ही झांटें साफ करी थी, उसका लंड बहुत ही मनमोहक लग रहा था।


मैंने उसके चमकदार सुर्ख लाल सुपारे को चूमा, हाथों से सहलाया फिर मैंने चूसना शुरू किया.


वो बोला- हया जान, सबसे पहले तेरे मुंह में ही सारा वीर्य निकालूंगा।

मैंने 👍👍 इशारा कर के कहा- ओके, निकालो।


उसने मेरे मुंह को चोदना शुरू किया.

मैंने कई बार अपनी जुबान उसके लंड के चारों ओर घुमाई.

उसके मुंह से मस्ती की सिसकारियां निकल रही थीं।


उसने दो तीन मिनट रुक रुक के अपना लंड मेरे मुंह के अंदर बाहर किया.

उसके लंड में वीर्य हिलोरें मार रहा था.


फिर एक तूफान सा उठा और फिर उसके लंड ने पिचकारी छोड़ी, ढेर सारा वीर्य उछल उछल के मेरे हलक में जा रहा था.

मैं हर कतरे को निगलती रही.


लेकिन आखिर में एक दो छोटे छोटे कतरे मैंने मुंह में रोक लिए।

मुझे ध्यान आया कि अख़लाक़ कहते थे कि मेरा लंड तन्नाया हुआ हो तो मैं तेरी चूत से किसी गैर मर्द का वीर्य भी चाट सकता हूं.

मैंने अख़लाक़ को आजमाने की सोची.


मैं, जब राजेश का लंड सिकुड़ के मुंह से निकल गया, तब अख़लाक़ की ओर बढ़ी और उनके होठों से होंठ लगाकर बचा खुचा वीर्य अख़लाक़ के मुंह में स्थानांतरित कर दिया।


राजेश ये देखकर हैरानी से ताली बजाने लगा- वाह यार, ये हुई न बात!


अख़लाक़ ने सारा वीर्य गटक लिया और राजेश से बोला- मैंने कहा था न हम हर तरह का सैक्स एंजॉय करते हैं।

उसके बाद राजेश बिस्तर पर पस्त होकर बैठ गया।

उसके चेहरे और बदन पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।


थोड़ी देर वो इस मीठी थकान का आनन्द लेता रहा।

उसके बाद हमने थोड़ा नाश्ता किया।


मेरी चूत तो मेरे ग्राहक के लंड से चुदने के लिए कुलबुला रही थी.

इसके लिए मैं राजेश के नंगे बदन से चिपक कर लेट गई, उसके चौड़े सीने को चूमती रही, उसके निप्पलों को सहलाती रही, हल्के हल्के मसलती रही.

मैंने उसकी निप्पलों को चूसा, काटा.


राजेश का लंड अंगड़ाइयां लेने लगा.

मैंने झुक के उसका लंड मुंह में ले लिया और अख़लाक़ को इशारा किया.


वो भी उठकर आए और राजेश के आंड चाटने लगे.

राजेश के लंड में सनसनी होने लगी.


आखिर एक औरत और एक मर्द एक साथ उसका लंड चूस रहे थे।

उसका लंड फिर से तन्नाने लग गया।


मैंने राजेश को कहा- अब अपने इस माँसल लंड से मुझे कस के चोद दे मेरे राजा! मेरी चूत तेरे इस विशाल लंड को अपने भीतर लेने के लिए मचल रही है, तड़प रही है।


राजेश ने ये सुनते ही मेरे घुटने मोड़ के ऊपर किए और मेरी चूत पे अपने होंठ टिका दिए।

उसकी जुबान चूत के चारों ओर से चूत रस को सुड़क रही थी।


मेरी चूत को वो चाटता रहा और चूत पानी छोड़ती रही।


उसके बाद उसने मेरे संवेदनशील क्लिटोरिस को जुबान की नोक से टच किया और हौले हौले जुबान से सहलाने लगा.

फिर उसके स्ट्रोक में तेजी आने लगी मेरे बदन में चरम उठने लगा.


ऐसे में चूत के अंदर लंड के करारे रगड़े लग जाएं तो क्या बात है.

यह सोच कर मैंने उसे कहा- राजू यार … अब लंड डाल भी दे ना जल्दी से!


राजेश ने अपना लंड चूत पे टिका के दबाते हुए, धीरे धीरे अंदर डाला.


मुझे इतना अच्छा महसूस हो रहा था यार कि पूछ मत, सुंदर चेहरा, बलिष्ठ शरीर, खूबसूरत लंबा-मोटा, मेरा मन पसंद लंड!

उसका लंड मेरी चूत में जड़ तक चला गया।


दो मिनट तक वो दबाव डाल के आनन्द लेता रहा.

फिर मैं ही बोली- रगड़ न मादरचोद!


इतना सुनना था कि उसका जोश बढ़ा उसने गाली बकते हुए धक्के लगाने शुरू किए- ले मेरी रण्डी, ले भोसड़ी वाली, लंडखोर साली हया … ले!

बोलते हुए रुक रुक के दस पंद्रह मिनट तक चोदता रहा।

फिर जब मेरा चरम नजदीक लगने लगा तो मैंने उसे कहा- राजू, अब लगातार रगड़ दे कस के, मेरा बस होने वाला है!


उसने फिर दम लगा के खूब जोर जोर से रगड़े लगाए, उसका डिस्चार्ज होने लगा, चूत से फच फच की आवाज आने लगी.


लेकिन वो रुका नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद करीब दस धक्के और लगाए होंगे कि मेरा पूरा शरीर अकड़ा और चूत जोर जोर से फड़कने लगी, मानो मेरा दिल सीने से हट के चूत में चला गया हो।

मुझे इस चुदाई ने परम आनन्द से मस्त कर दिया।


मैं बहुत देर तक आंखें बंद करके चरम सुख के इन लम्हों को भोगती रही।


उसके बाद वो एकदम पस्त हो गया, बोला- यार हया, इतना आनन्द आज तक नहीं आया. तुम दोनों वास्तव में गजब की कामुक जोड़ी हो. तुम दोनों से मिलकर जो आनन्द मुझे आज मिला है, मैं उसके बारे में सोच भी नहीं सकता था.


अख़लाक़ को मैंने अब तक डिस्चार्ज करने से रोका हुआ था क्योंकि अभी अख़लाक़ को एक गैर मर्द के वीर्य से भरी मेरी चूत चटवानी थी।

मैंने राजेश को बोला- आज का एक और स्पेशल सरप्राइज़ अभी बाकी है.

वो जिज्ञासा से बोला- क्या?


मैंने अख़लाक़ को इशारा किया.

वो आया और मेरी चूत से सारा वीर्य चाटने और सुड़कने लगा.

राजेश हैरत से सारा नज़ारा देख रहा था.


अख़लाक़ ने आज साबित कर दिया कि वह मेरी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है।


उसके बाद अख़लाक़ ने मेरे होंठ चूसे मुझे राजेश के वीर्य और मेरी चूत रस का, मिला जुला खट्टा कसैला स्वाद आया।


राजेश हमारी हरकतें देख देख के मस्त हो रहा था।


थोड़ी देर सुस्ताने के बाद राजेश ने कहा- यार, अब खाना खाते हैं फिर एक बार तेरी गांड और मारूंगा.

अख़लाक़ ने कहा- यार, अब मेरे को भी तो एक बार डिस्चार्ज करने दे!


मैंने कहा- देखो यार, मेरी चूत तो अभी अभी तृप्त हुई है और गांड तो राजेश के इस मस्त लौड़े से ही मरवाऊंगी। तुम भी चाहो तो मेरे मुंह में वीर्य निकाल दो!


अख़लाक़ ने तुरंत मेरे मुंह में लंड डाल के चोदना शुरू किया.

लंड उफना हुआ तो था ही, एक मिनट भी नहीं लगा और पिचकारी छूट गई।

मैंने अख़लाक़ का सारा वीर्य भी गटक लिया।


उसके बाद हमने खाना ऑर्डर किया.

जब तक खाना आया, तब तक हम तीनों साथ में नहाए, एक दूसरे के नंगे और साबुन लगे चिकने बदन का आनन्द लिया.


और खाना खाने के बाद भी हमने काफी देर आराम किया।


रात के करीब बारह बज रहे थे, मैंने और अख़लाक़ ने एक साथ राजेश का लंड चूस के खड़ा किया.


और जब वो तन्ना गया, तब उसने मुझे घोड़ी बना के लंड को तेल से चिकना किया, थोड़ा तेल मेरी गदराई हुई, सुडौल गांड में भी लगाया.


फिर राजेश ने बहुत धीरे से मेरी गांड में लंड का सुपारा घुसेड़ा.

मेरी गांड थोड़ा सा चिरमिराई पर उसका लंड मेरे जिस्म के अंदर घुसता चला गया.


फिर वो धीरे धीरे लंड अंदर डालता और जल्दी से बाहर निकालता.

वो गांड मारने का भी एक्सपर्ट था, बहुत देर तक उसने पूरे मन से मेरी गांड मारी.


उस को और मेरे को, दोनों को खूब मजे आए।


अख़लाक़ उसके पीछे खड़े होकर उसकी निप्पलें मसल रहे थे, उसके लंड में आनन्द की लहरें उठ रही थीं।


करीब पंद्रह मिनट के आनन्ददायक घर्षण के बाद उसने अपना वीर्य का स्टॉक गांड में खाली कर दिया और जब तक लंड मुरझा नहीं गया, मेरी गांड में अपना लंड, अंदर बाहर करता रहा.

हम दोनों को इस रगड़ाई का आनन्द मिलता रहा।


उसके बाद हम तीनों पस्त होकर बिस्तर पर पड़े तो नींद आने लगी.

एक ने मेरे स्तनों में मुंह दे रखा था, दूसरे ने गांड में!


फिर हम सो गए।


सुबह हमारी नींद खुली तो मेरी चूत फिर से चुदना चाहती थी.


मैंने राजेश से कहा- अब तुम दोनों एक बार और मेरी चुदाई कर दो।

उसने पूछा- एक साथ?

मैंने कहा- नहीं, बारी बारी।


उसके बाद हम दोनों से प्रेरणा लेकर राजेश ने अख़लाक़ के साथ 69 की मुद्रा में एक दूसरे का लंड चूसा।


दोनों लंड रात के रेस्ट के बाद तरोताजा तो थे ही, जल्दी कड़क हो गए।


उसके बाद मैं पलंग के किनारे पर लेटी, कभी पैर जमीन पर टिकाती, कभी घुटनों से मोड़ के ऊपर उठाती।


शुरुआत राजेश ने की.

राजेश और अख़लाक़ ने धक्के लगाने शुरू किए.

जब राजेश के लंड में सरसराहट होने लगती तो वह हट जाता, उसकी जगह अख़लाक़ धक्के लगाने लगता.

ऐसा बहुत देर तक चला, मेरी चूत की जबरदस्त कुटाई हुई।


आखिर में मुझे झड़ाने का श्रेय मिला राजेश को!


मेरी चूत में जैसे अनार छूट रहा था और उसके साथ राजेश के लंड से वीर्य का फव्वारा!


उधर मेरे शौहर अख़लाक़ के लंड से वीर्य की पिचकारी मेरे चेहरे और मेरे स्तनों पर गिर रही थी।


मैं अंदर बाहर से वासना के इस आनन्द-सागर में डूब रही थी।


करीब आधा घंटे सुस्ताने के बाद राजेश उठा, तैयार हुआ.

उसने अपने पर्स से दस के बजाए ग्यारह हजार निकाल के मुझे हॉट रंडी सेक्स के लिए दिए।


हम दोनों को थैंक यू के साथ फिर से सेवा का मौका देने का बोला।


हम तीनों एक साथ गले मिले और बस … वो चला गया कामुक और मस्त यादें छोड़ कर!


मेरी रण्डी बन के चुदने की ख्वाहिश पूरी हुई।


वो ग्यारह हजार रुपए, मेरी चूत की पहली कमाई, मुझे किसी खजाने से कम नहीं लग रहे थे। 😜😜

तो मेरे अनजाने, कामुक, रसिक दोस्तो, कैसी लगी मेरी सहेली की रण्डी बनने की फैंटेसी वाली कामुक गाथा?

मुझे ज़रूर बताएं। हॉट रंडी सेक्स कहानी पर कमेंट्स करें.

बरसात के एक दिन मिली कुंवारी बुर - I got a virgin pussy on a rainy day

 बरसात के एक दिन मिली कुंवारी बुर

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


बुर सेक्स कहानी में मैंने 19 साल की एक कमसिन छोटी लड़की की कुंवारी चूत की सील तोड़ी. वह गरीब परिवार की लड़की मेरे घर के पास लकड़ियां बीन रही थी कि बारिश आ गई.


कैसे हो दोस्तो,

मैं अभि फिर से आपके सामने अपनी एक और कहानी के साथ हाजिर हूं.


अगर आपने मेरी पिछली कहानी

द हाफ वाइफ भाभी आधी घरवाली

पढ़ी होगी तो आपको मेरे परिचय की कोई जरूरत नहीं।


नए पाठकों के लिए बता दूं कि मैं बिहार के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं, एकहरा शरीर है और कोई लंड मापने की जरूरत नहीं लगी क्योंकि मैं मेरे लंड से खुश हूं. साथ ही वे महिलायें भी खुश हैं जिन्होंने इसका स्वाद लिया है।


पहली कहानी में आपने मेरी भाभी और मेरे बीच के बने प्यारे रिश्ते को जाना था.


आज कुछ और … यानि यह बुर सेक्स कहानी:


तो दोस्तो, बात है वर्ष 2017 की!

मैं ग्रेजुएशन करने के बाद गांव में ही बैंक आदि जॉब की तैयारी करता था.

हमारे घर के आसपास बहुत से खेत और जंगल हैं तो इसमें दिन भर गरीब घरों के बच्चे लड़कियां औरतें लकड़ी चुनने आती हैं।

यह कहानी इन्ही में से एक लड़की आयशा की है.

नाम से तो आप समझ ही गए होंगे कि वह एक पर्दानशीं लड़की है।


आयशा के बारे सच बताऊं तो ऐसा कुछ खास नहीं था उसके चेहरे में!

पर 19 साल से ज्यादा की उम्र में भी वह छोटी बच्ची की तरह दिखती थी.

उसकी गांड बहुत प्यारी थी एकदम गोल-गोल!

चूची भी ना अधिक बड़ी ना अधिक छोटी!


वह रोज अपनी बकरियों को चराने के लिए हमारे घर के पीछे आती थी.

उसके साथ 3 और छोटे बच्चे भी होते थे जो लकड़ी बीनते थे।


मैं तो वैसे ही चूत के चक्कर में भटकने वाला पिशाच हूं तो जिस दिन से आयशा पर नजर पड़ी मैं उसके चक्कर में लग गया.

हमेशा उसके भाई बहनों को टॉफी खिलाता बिस्कुट खिलाता.


आयशा ये सब देख कर मुस्कुराती रहती और कहती- भाईजान, लगता है आपको बच्चे बहुत प्यारे लगते हैं.

मैं बस उसकी गांड को घूरता रहता था.


इसी तरह टाइम कट रहा था.

बस उसको याद करके मूठ मारना ही हुआ था अभी तक!


एक दिन की बात है, मम्मी पापा नानी के घर गए थे, मैं घर पर अकेला था और बरसात का मौसम था.


आसमान में बादल थे.

मैं बारिश में नहाने का इंतजार कर रहा था कि कब बारिश आए और मैं नहाऊँ।


तभी मुझे आयशा अपनी बकरियों को हांकती हुई आती दिखी.

आज वह अकेली थी.


मैं घर के पिछले दरवाजे से निकल कर थोड़ा जंगल की तरफ आकर खड़ा हो गया.

उसने मुझे नहीं देखा था.


आयशा जंगल में बकरियों को झाड़ियों से बांध कर लकड़ी चुनने लगी.

उसको अकेली देख कर मेरा लंड बेकाबू होने लगा था.

मैंने अपना लंड निकाल कर हिलाना शुरू किया.

वह ठीक मेरे सामने झुक झुक कर लकड़ी चुन रही थी.


मैं आंख बंद कर के उसकी गांड में लंड चोदने की कल्पना करते हुए तेजी से मुठ मारने लगा.


तभी बूंदाबांदी होने लगी आसमान से!

मैंने जल्दी से लंड पैंट के अंदर किया.


पर अब आयशा वहां नहीं थी.


खैर मैं घर की ओर आने लगा.


तभी तेज बारिश होने लगी और मुझे आयशा बकरियों को हांकते हुए दौड़ कर भागती हुई दिखी.

वह बारिश में भीग रही थी, उसके कपड़े इसके बदन से चिपक रहे थे.


तभी अचानक से उसका पांव फिसला और वह धड़ाम से जमीन पर गिरी.

मैंने मौके का फायदा उठाने का सोचा और उसको उठाने के लिए उसके पास जाने लगा.


मुझे देख कर वह शरमाने लगी और उठने की कोशिश करने लगी.

इस कोशिश में वह फिर से फिसली और दुबारा से गिर पड़ी.


तब तक मैं उसके पास आ कर खड़ा हो चुका था।

मैं कुछ नहीं बोला और उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे उठाने लगा.


मैंने उसका एक हाथ अपने कंधे पर रखा और उसे सीधी खड़ी किया.


उसका गीला बदन मेरे शरीर से चिपका हुआ था.

आयशा की चूची मेरे सीने को छू रही थी.


इतना सब करने पर मेरे लंड ने भी अपना काम करना चालू कर दिया था और वह मेरी निक्कर को फाड़ कर बाहर आने को मचलने लगा।


मैंने पूछा- क्या हुआ? कैसे गिर गई, चोट लगी है क्या?

आयशा– बारिश में पांव फिसल गया इसलिए गिर गई. चोट तो ज्यादा नहीं आई है. बस हाथ की कोहनी में थोड़ी लगी है.


फिर वह बोली- अब आप छोड़ दीजिए, मैं ठीक हूं!

मैं– तुम तो कीचड़ से नहा ली हो, ऐसे ही घर जाओगी क्या?

आयशा– अब और कोई उपाय भी तो नहीं है.


मैं– उपाय क्यों नहीं है, तुम अंदर आ जाओ घर के! मैं बाल्टी मग देता हूं, शरीर साफ कर लो!

आयशा– नहीं … कोई देख लेगा तो गलत समझेगा.

मैं– कोई है ही नहीं … तो देखेगा कौन? चलो साथ!

वह बिना कुछ बोले चुपचाप मेरे पीछे आने लगी.


मैंने नल चालू कर बाल्टी मग दे दिया.

वह हाथ पांव के कीचड़ धोने लगी.


मैं उसके बदन से चिपके हुए कपड़ों से उसके बदन का माप लेने लगा.


कुछ देर में वह हाथ मुंह पैर धो चुकी थी.


मैंने उसे तौलिया दिया और बोला- बाल सुखा लो, सर्दी लग जायेगी.

वह मुस्कुरा दी पर कुछ बोली नहीं और चुपचाप बाल पौंछने लगी।


आयशा– अब मैं जाऊं?

मैं हंसते हुए बोला- भीगते हुए जाओगी, फिर गिरोगी! चाय पियोगी?


आयशा– घर में कोई है नहीं क्या?

मैं– नही, क्यों?

आयशा– कुछ नही, बस सोची इतना बड़ा घर अंदर से कैसा होता है कभी देखा नहीं।

मैं– अरे, चलो मैं दिखाता हूं और चाय भी पी लेंगे दोनों!


इतना बोल कर मैं आगे चल दिया सीढ़ियों की तरफ … वह मेरे पीछे हो ली.


मैंने उसे घर घुमाया, दिखाया.

वह बहुत खुश हुई.


मैं– चाय बना लेती हो?

आयशा– हां!

मैं– बनाओ ना फिर!


इतना बोल कर मैंने उसका हाथ पकड़ा और किचन में ले आया, चाय बनाने की सारी चीजें बता दी.

वह चाय बनाने लगी.


वह अब तक गीले कपड़ों में ही थी.

चिपके हुए कपड़ों के कारण उसके गांड स्पष्ट दिख रही थी.


उसको पीछे से देख कर मुझसे काबू नहीं हुआ मैं धीरे से उसके करीब जा कर खड़ा हो गया.


वह जैसे ही पीछे घूमी, एकदम से मुझसे टकरा गई.


हम दोनों चुप थे.

चाय के साथ मेरी अन्तर्वासना भी उबल रही थी.


मैंने बिना कुछ बोले दोनों हाथों से उसके कमर को थामा और आयशा को अपनी ओर खींचा.

वह डाली से टूटे पत्ते की भांति लहरा कर मेरे सीने से लग गई.


उसने मुझे देखा … मैंने उसको देखा.


हम दोनों ही चुप थे.

पर हमारे हाथ एक दूसरे की पीठ पर धीरे धीरे रेंग रहे थे.


मैंने उसके माथे को चूम लिया.

उसने मुस्कुरा कर आंखें मूंद ली.


अब मुझे सहमति मिल चुकी थी.

मैंने उसके लबों को चूमना और हल्के से चूसना चालू किया.

उसकी आंखों में आंसू आने लगे.


मैंने पूछा- क्या हुआ आयशा?

उसने ना में सर हिलाया और मुझे जोर से बांहों में जकड़ लिया.


मैंने गैस बंद की और आयशा को गोद में उठा कर अपने बेड पर ले आया.


मैं उसके होंठों और जीभ को चूस चूस कर पीने लगा.

वह भी गर्म हो चुकी थी और मेरा पूरा साथ देने लगी.


तभी मैंने उसकी चूची को पकड़ कर दबाया.

उसके मुंह से एक लरजती हुए मादक स्वर निकली- हायाल्ला!


अब मैं और पागल होने लगा.


मैंने उसे उठाया और उसका कमीज उतार दिया.

उसने अंदर घर की बनी बनियान पहनी थी.

था उसके पास ब्रा नहीं थी.


मैंने देर न करते हुए उसकी बनियान भी उतार दी.


हाय … क्या नजारा था!

दो कठोर नंगी चूचियां जिनपर एक सिक्के के साइज का हल्के भूरे रंग का गोल निशान और उस पर छोटे चने के दाने जितना निप्पल!


यह देख कर मैं बेकाबू हो उठा।


उसने अपने दोनों कबूतरों को अपने हाथ से पकड़ कर छुपा लिया.

पर मेरे थोड़ा जोर लगाते ही उसने उन्हें आजाद कर के मेरे सामने खुला छोड़ दिया और दोनों हाथ पीछे को कर के बेड पर पीछे को झुक गई.

ऐसा लगा मानो उसने मुझे खुला निमंत्रण दिया हो इन रसीले आमों के रसपान का!


अब मैंने भला कैसे रुक सकता था.

मैंने बिना देर किया एक चूची को मुट्ठी में भरा और दूसरी के चूचुक को मुंह में भर के जोर जोर से पीना और दबाना चालू कर दिया।


आयशा बेकाबू सी मचलने लगी और ‘हायल्ला अहाल्ला’ करती हुई मेरे सर के बालों से खेलने लगी.


लगभग 5 मिनट बारी बारी दोनों चूचियों को पीने और दबाने से उसके शरीर को झटका लगा और वह शांत हो गई.

इसका मतलब था कि आयशा की जवानी का रस उसकी बुर से बह चुका था.


मैंने आयशा को बांहों में भरा और बेड पर लेट गया और उसे चूमने लगा.


तब मैंने अपना निक्कर उतार दिया.

मैं पूरा नंगा था और मेरा काला लंड पूरे ताव में था.


मैंने आयशा का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.

उसने मुझे देखा और धीरे से मुस्कुरा कर मेरे लंड को हल्के से पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाते हुए मुठ मारने लगी.


मैंने आयशा की सलवार का नाड़ा खोल दिया, एक झटके में घुटनों तक उतार दिया.

उसने अंदर पैंटी नहीं पहनी थी.


घनी झांटें थी उसकी बुर पर!

मैं बुर चाटना चाहता था पर झांट देख कर मेरा मन नहीं हुआ.


इसलिए मैं बस उसे सहलाने लगा.

मेरा हाथ बुर पर लगने के साथ ही आयशा ने मेरे लंड को इतने जोर से पकड़ा जैसे वह इसे तोड़ ही डालेगी.


मैं उठा और उसकी दोनों टांगों के बीच में आकर बैठ गया. अब Xxx बुर सेक्स की बारी थी.


अब तक हम दोनों ने एक शब्द बात नहीं की थी.

जो हुआ था सब मौन सहमति में ही था।


पर जैसे ही मैं उसके टांगों के बीच आकर बैठा, वह बोली- नहीं, यह मत कीजिए. मेरे अब्बा मुझे मार देंगे. मेरे निकाह की बात चल रही है फूफी (बुआ) के लड़के से!

मैं बोला- ठीक है, तुम नहीं कहोगी तो अंदर नहीं डालेंगे. पर ऊपर ऊपर से तो करने दो!


तब उसने हां में सर हिलाया.


मैंने अपनी उंगली में थूक लगाई और बुर को फैला कर उसपर ढेर सारा थूक लगाया फिर उंगली को बुर की फांकों में फंसा कर ऊपर नीचे करके घिसने लगा.


उसकी आंखें बंद थी, मुट्ठी भींची हुई थी.

वह अपने होंठों को दांत में दबाए शरीर को तान कर लेटी हुई थी.


और मैं अपनी दो उंगलियों से उसकी प्यारी कुंवारी बुर को मसल रहा था.

2-3 मिनट बाद ही उसकी बुर ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.

वह हांफने लगी और कमर उठाने लगी.


मैंने मौके का फायदा उठाया और एक उंगली बुर में उतार दी.

“आह हह आः उन्ह्ह् उफ्फ” न जाने ऐसी कितनी ही उत्तेजक आवाज एक साथ उसके मुंह से निकली.


मैं चुपचाप उंगली से उसकी बुर को चोदने लगा.

कुछ ही देर में वह बोलने लगी- और करो, फाड़ दो, पूरा डालो! चोद दो इस नामुराद को!


मैंने देखा कि लोहा गर्म है, अब अगर बुर मारनी है तो कुछ करना ही होगा.


यह सोच कर मैंने एक बार पूरी उंगली बुर में घुसाई और फिर बाहर निकाल लिया.

उसने मुझे गुस्से से देखा.


मैंने बिना कुछ बोले उसके होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसना शुरू किया और उसके ऊपर लेट गया.

अब मेरा लंड उसकी बुर के ठीक ऊपर था.


आयशा मेरे लंड की गर्मी अपनी बुर पर महसूस करने लगी थी.

वह मुझे कस कर बांहों में जकड़े थी और नीचे से कमर उठा उठा कर मेरे लंड को बुर में रगड़ने की कोशिश करने लगी.


मैं फिर उठा और अपने लंड को उसके बुर पर चुभाते हुए मलने लगा.


मेरे ऐसा करने से वह और पागल हो गई और उसने खुद मेरा लंड पकड़ लिया और तेजी से बुर में रगड़ने लगी और बोलने लगी- भाई, डाल दो इसे … अब जो होगा देखा जायेगा! मुझसे रहा नहीं जा रहा। अब डालो ना भाई!


मैं चुप बैठा रहा.

तो वह बोली- डाल ना मादरचोद भड़वे … तब से आग लगा रहा था. जब गर्म हो गई तो भाव खा रहा है रण्डी की औलाद? चोद मुझे वरना तेरा खून कर दूंगी!


मैं मन ही मन हंस रहा था।


उसे और गुस्सा आया उसने मुझे नीचे पटका और खुद मेरे ऊपर आकर बैठ गई और बुर में लंड सेट कर के रगड़ने लगी।


उसकी बुर से लगातार पानी निकल रहा था जिससे बुर अंदर तक गीली हो गई थी.


मैंने हल्के से कमर उठाई तो लंड का सुपारा बुर के मुंह पर जा लगा।

उसने मेरी आंखों में देखा और ऊपर से चूत को लंड पर दबा कर बैठने लगी.


मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी कसी हुई जगह में लंड को जबरन घुसाया जा रहा है.

मेरा लंड छिलने लगा था, मुझे दर्द सा हो रहा था.

पर मेरा दर्द तो कुछ भी नहीं था … जो दर्द आयशा मेरे लंड को चूत में लेने के लिए सह रही थी.


उसकी आंखों में आंसू और चूत में खून निकल आया था.


उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी.

मुझे लगा अब अगर वह डर गई तो ये मौका फिर नहीं मिलेगा.


मैंने उसको अपने ऊपर लिटाया और करवट लेकर चूत में आधा लंड डाले हुए घूम गया.


अब मैं ऊपर था वह नीचे!


मैंने आयशा के होंठों को हाथ से दबाया और एक करारा धक्का लगाया.

जिससे मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर उसके बच्चेदानी से जा टकराया.


बुर सेक्स में उसे बहुत दर्द हुआ, आयशा हाथ पांव पटकने लगी, बेड पर उसकी चूत का खून टपक रहा था.

और वह बेहोश हो गई.

मैं डर गया.


पर मैंने देखा तो वह नीम होश में थी.

मैंने अपना काला लंड आहिस्ते से चूत से बाहर खींचा.


मेरा लंड बंदी की रसीली चूत की मलाई और खून से सना हुआ था.


मैंने थोड़ा और थूक उसकी चूत में मल दिया और एक जोड़दार धक्का दिया.

जिससे मेरा लंड आयशा की चूत को पूरी तरह से चीरता हुआ पूरा अंदर घुस गया.


मैं आयशा के चेहरे को चाट चाट कर गीला करता और साथ ही करारे जोरदार लंड के धक्के उसकी चूत में मारने लगा.


अब तक आयशा को होश आने लगा था।

वह रोने लगी- मुझे नहीं करना … मैं मर जाऊंगी. निकाल लो इसे … मुझे घर जाने दो.


मैं चुपचाप उसकी चूत में लंड पेले हुए उसकी चूचियों को पीते हुए लेटा रहा.


लगभग 5 मिनट में उसे थोड़ी राहत हुई और चूत में लंड होने का अहसास हुआ.

तो अब आयशा धीरे धीरे अपनी कमर हिलाने लगी थी.

मुझे सिग्नल मिल गया कि अब वह नॉर्मल हो रही है.

मैं भी धीरे धीरे चोदने लगा इस प्यारी शहजादी को!

थोड़े देर में आयशा पूरी गर्म हो कर मजे लेने लगी और गालियों के लिए माफी मांगने लगी।


मैं बोला- प्यार में गाली प्यार को बढ़ाती है और मजा भी देती है. बिना गाली के वह मजा कहां! लेकिन तुम मुझे भाई बोलना बंद कर दो अब! मैं अब तुम्हारा कोई भाई नहीं बल्कि जान हूं.

यह बोल कर मैंने लंड बाहर खींचा और एक झटके में पूरा लंड चूत में पेलते हुए बोला- समझी मेरी कुतिया राण्ड!

वह मुस्कुरा दी बस!

फिर वह बोली- हां मेरे चोदू जान!


अब तो मैंने धकापेल चुदाई शुरू कर दी.


उसकी एक टांग अपने कंधे पर रख कर चूची को मुट्ठी में भर के दे दनादन उसकी चूत का थोबड़ा बिगाड़ने लगा.


मेरे हर शॉट आप वह ‘आह आह याल्ला … और जोर से चोद’ बोलने लगी.


मैं भी उसकी चूत का भर्ता बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था.

इसलिए उसकी अम्मी से लेकर उसकी बहनों तक को भद्दी भद्दी गालियों से नवाजते हुए उसकी प्यारी चूत को चोदने लगा.


इस बीच वह एक बार भलभला कर झड़ गई थी.


मैंने उसको अपने ऊपर बिठाया और नीचे से उसकी चूत में लंड पेलने लगा.


इस चुदाई को वह देर तक नहीं झेल पाई और 2 मिनट में ही मेरे लंड को दुबारा अपने रस से नहला दिया.


अब मेरा भी माल निकलने को था इसलिए मैंने उसे कुतिया बनाया और पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा दिया.

गांड पर थप्पड़ मारते हुए मैं तेज धक्के लगाने लगा.


2-3 मिनट बाद ही मेरा माल निकल को था.

मैंने उसकी चूत को लंड से आजाद किया और उसे सीधा लिटाया और उसके सीने पर चढ़ कर बैठ गया और उसके मुंह में लंड डालने लगा.


वह मना करने लगी.

मैंने उसे अपनी कसम दी कि अगर वह मुझसे प्यार करती है तो मेरे लंड को भी प्यार करेगी, उसे अपने मुंह में भर कर चूसेगी.


उसने थोड़ा अजीब सा मुंह तो बनाया पर उसने मुंह खोल दिया.


फिर मैंने अपना लंड उसकी गले तक उतार दिया और उसका मुंह चोदने लगा.


10 15 धक्के में ही मेरे लंड का लावा फूट पड़ा.

मेरे लंड के पानी से उसका मुंह भर गया.

मैंने उसके मुंह में तब तक लंड ठेले रखा जब तक वह सारा माल पी नहीं गई.


इसके बाद वह उठी.

तो उससे चला नहीं जा रहा था.


मैंने उसे सहारा दे कर उठाया और बाथरूम में ले गया.


साथ ही मैं बेड से चादर भी ले आया क्योंकि चादर हम दोनों की घमासान मल्ल युद्ध की गवाही दे रहा था इसलिए वाशिंग मशीन में डालना जरूरी था।


खैर, वह बाथरूम में फ्रेश हुई और अपने गीले कपड़े फिर से पहनने लगी.

मैंने उसे रोका और तब तक मैं चाय बना लाया.


वह नंगी बैठी मुस्कुरा कर चाय पीने लगी.


फिर कुछ देर में वह उठ कर कपडे पहनने जाने लगी तो मैंने उसे गले लगाया और एक जोरदार चुम्बन किया.


मैंने उसे 500 का एक नोट दिया और बोला- अच्छी सी ब्रा पैंटी ले लेना!

वह पैसे लेने से मना करने लगी.

मैंने बोला- प्यार का तोहफा मना नहीं करते!

तब उसने लिया वह पैसा!


इस तरह मेरी और आयशा की आज की कहानी समाप्त हुई।

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