आंटी की प्यार से मालिश कर के चोदा उसे - I massaged aunty lovingly and then fucked her

 आंटी की प्यार से मालिश कर के चोदा उसे - I massaged aunty lovingly and then fucked her

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सैम है और मैं अजमेर राजस्थान से हूं.

मेरी उम्र 27 साल है. हाइट 5 फुट 9 इंच है. मैं शादीशुदा हूँ.


मैं पेशे से एक बिजली और इलेक्ट्रॉनिक सामान सुधारने वाला टेक्नीशियन हूँ.

मेरा हथियार 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है.


यह आंटी चुदाई वाली बात आज से 5 महीने पहले की है. उस समय मेरी जॉब अभी अजमेर में ही है.

मैं एक बहुत पॉश कॉलोनी में जाकर अपनी जॉब करता हूँ. उधर पर बहुत पैसे वाले और बड़े लोग रहते हैं.


मैं उस दिन किसी बंगले पर एक कम्पलेंट देखने गया था.

वहां मुझे एक आंटी जी मिलीं, जिनका नाम रेखा (बदला हुआ) था. उनकी उम्र कोई 40 साल की रही होगी.


उनके बाथरूम के स्विच में करंट आने की शिकायत मिली थी.

उस वक्त वो शायद नहाने ही जा रही थीं. उनके कपड़े कुछ गीले हो चुके थे.


आंटी को बाथरूम में जाते देख कर मैंने थोड़ा मुस्कुराते हुए उन्हें बाथरूम में जाने से रोका और उनसे बाहर आने को कहा.


उनके बाहर आते ही अन्दर जाकर मैंने उनके बाथरूम के खराब स्विच को सही कर दिया.

इस बीच मैं उनको ही देख रहा था.


जैसा कि मैंने लिखा कि उन आंटी जी के आधे कपड़े गीले हो चुके थे, उससे उनके कपड़े उनके मम्मों पर टाइट चिपके हुए थे और पीछे से कपड़े उनकी गांड में घुसे हुए थे.


मैंने अपना काम किया और उनके बंगले से निकलने लगा.

उन्होंने मुझे एक मीठी मुस्कान के साथ वहां से विदा करते हुए धन्यवाद कहा.


मैंने व्हाट्सएप पर उनकी कम्पलेंट को ठीक करने का मैसेज कर दिया और उनको बता दिया कि ये मेरा नंबर है. आपको कोई भी परेशानी हो तो आप मुझे फोन कर सकती हो.

उन्होंने ओके लिख दिया.


मैं उनका नम्बर भूल गया और ऐसे ही बहुत दिन बीत गए.

एक बार मुझे शाम कल 7 बजे कॉल आया.


उन्होंने अपना नाम रेखा बताया और मुझे बताया कि उनका फ्रिज काम नहीं कर रहा है.


मैं उनके बंगले पर गया.

मैंने बेल बजाई.


अन्दर से वो आंटी ‘आती हूँ …’ की आवाज देती हुई बाहर आईं.


उस दिन आंटी लाल रंग की साड़ी में बाहर आईं और हमने एक दूसरे को नमस्ते की.

मैं अन्दर बंगले में चला गया.


उन्होंने बताया कि उनका फ्रिज नहीं चल रहा है.

मैंने चैक किया तो पाया कि उनके फ्रिज वाले सॉकेट में सप्लाई नहीं आ रही थी,


मुझे ऐसा समझ में आ गया कि किसी ने जानबूझ कर एमसीबी बॉक्स से सप्लाई को बंद कर दिया है.

मैं ऐसे ही थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने लगा.


उस दिन वो आंटी जी बहुत सुंदर लग रही थीं. उनका 38-36-40 का साइज बड़ा ही मस्त लग रहा था.

मैंने उनसे बात करना शुरू की.

तो उन्होंने बताया कि वो ज्यादातर अकेली ही रहती हैं. उनके हस्बैंड का खुद का बिजनेस है, जिसके चलते वो ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं. आंटी जी की 2 लड़कियां हैं, वो अभी दिल्ली में उनकी बहन के घर में रह कर पढ़ रही हैं.


मैंने इधर उधर की बात करना जारी रखी. तब तक उन्होंने मेरे लिए चाय बनाई.

मैं भी चाय पीते हुए उनसे बातें करने में लगा रहा और बार बार उनके बूब्स और गांड को देखता रहा.


वो बार बार मेरे सामने आगे पीछे चलती हुई अपने काम कर रही थीं और अपनी गांड मटकाती हुई मुझे दिखा रही थीं.

कुछ देर बाद मैंने उनका फ्रिज चालू कर दिया और मैं घर आ गया.


मैंने उनके नंबर को सेव किया और मैं खाना खाकर फ़ोन चलाने लगा.

मैंने फेसबुक पर आंटी को सर्च किया और देखा कि उन आंटी जी ने अपनी बहुत सारी फोटोज को प्रोफाइल में लगा रखी थीं.


मैंने रात को उनके व्हाट्सैप पर कमेंट्स करते हुए लिखा कि फेसबुक पर आपकी फ़ोटो बहुत अच्छी हैं.

उस वक्त आंटी ऑनलाइन नहीं थीं. मैं बस लिख कर सो गया.


मैंने उनका मैसेज सुबह पढ़ा, जिसमें उन्होंने मुझे धन्यवाद लिखा था और एक स्माइल का इमोजी भी था.

उन्हें मैंने सुबह गुड मॉर्निंग विश किया और अपने काम पर जाने की तैयारी करने लगा.


दिन के वक्त मेरे पास उनका मैसेज आया- हैलो सैम, मेरी तबियत ठीक नहीं है. क्या तुम मेरे बंगले पर आ सकते हो.

मैंने ओके लिखा और दो बजे उनके बंगले पर पहुंच गया.


मैंने देखा कि आज उन्होंने एक नाइटी पहन रखी थी, जिसका गला बहुत ही ज्यादा खुला हुआ था. उनकी अन्दर से काली ब्रा तक साफ़ दिख रही थी.

वो बहुत ही हॉट माल लग रही थीं.


मैं उनके पास गया तो उन्होंने मुझे बिठा कर दरवाजा बंद कर दिया और बोलीं- मेरे सिर में बहुत तेज़ दर्द हो रहा है, क्या तुम मेरे सिर में थोड़ी देर मालिश कर दोगे. शाम को मेरे पति घर वापस आएंगे, तब मैं डॉक्टर को दिखाने जाऊंगी. तब तक तुम मेरी मालिश कर दो, जिससे मुझे थोड़ा आराम मिल जाएगा.


कब से मैं भी यही चाह रहा था कि कब आंटी जी के सुंदर शरीर को छूने का मौका मिले.

मैंने तुरन्त हामी भर दी. मैंने उनको सोफे पर लेटने को बोला और खुद भी सोफे पर बैठ गया.


उनके सिर को मैंने अपनी जांघों पर रखा और धीरे धीरे उनके सिर को दबाने लगा.

वो बिल्कुल सीधी लेटी हुई थीं और आंखें बंद कर रखी थीं.


मैं सिर को दबाने के साथ साथ उनके बूब्स को भी हल्के हल्के से दबा रहा था जिससे उन्होंने अपने दोनों पैरों को एक दूसरे पर चढ़ा लिया था और वो अपने खुद के ही पैरों को आपस में रगड़ रही थीं.

ऐसा शायद वो अपनी उत्तेजना को दबाने के लिए कर रही थीं.

मैंने उनसे कहा- आंटी, आप कहें, तो मैं आपकी कमर की भी मालिश कर दूँ. आपको बहुत आराम मिलेगा.


उन्होंने हामी भर दी और बहुत ही कातिलना मुस्कान देती हुई बोलीं- रूम में आ जाओ, वहां ठीक रहेगा.

मैंने समझ लिया कि आज काम उठाने का मौका मिल गया समझो.


मैं बाम की शीशी उठा कर उनके पीछे पीछे चलने लगा.

वो गांड मटकाती हुई जाकर पलंग पर लेट गईं.

मैंने अपने हाथ में बाम लगाई और पीछे से नाइटी के बटन खोल दिए.

मैं मालिश करने में लग गया.


मालिश करने में बार बार आंटी जी की ब्रा बीच में आ रही थी तो आंटी ने बोला कि इसको खोल दो.

मैंने ब्रा खोल दी और अब मैं उनकी नंगी पीठ की मालिश करने लगा.


मैं अपनी कोहनी से बार बार उनके कूल्हों को दबा रहा था, इससे उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर बाद वो सीधी लेट गईं और बोलीं- सामने से भी कर दो.


सामने से उनकी ब्रा थोड़ी ऊपर हो गई थी.

मैं मुस्कुराते हुए उनकी ब्रा को सही करने लगा, तो उन्होंने खुद ही अपनी ब्रा को हटा दिया.

आंटी बोलीं- अब आराम से करो.


मैंने अपने एक हाथ से उनका एक दूध पकड़ा और हल्का सा दबा दिया.

आंटी ने हल्की सी मादक आह निकाल दी.

मैं समझ गया कि उन्हें मजा आ रहा है.


फिर मैंने अपने दोनों हाथ से उनके दोनों मम्मों को पकड़ा और मसलने लगा.

उनके मुँह से आह आह की आवाज निकलने लगी.


आंटी ने हाथों की दोनों मुट्ठियों से बिस्तर की चादर को कसके पकड़ लिया और अपने दोनों पैर एक दूसरे के ऊपर चढ़ा लिए.

मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने आंखें बंद कर रखी थीं.


देर ना करते हुए मैंने सीधे अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए.


इतना करते ही आंटी जी ने आंखें खोल दीं और अपने दोनों हाथ मेरे गले में डाल कर बोलने लगीं- प्लीज सैम में बहुत प्यासी हूँ. आज तू मेरी प्यास बुझा दे.

मैंने भी देर ना करते हुए उनके एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और बहुत जोर जोर से चूसने लगा.


आंटी ने भी अपने हाथ को नीचे किया और मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया.

वो कुछ देर लंड को पैंट के ऊपर से ही मसलती रहीं फिर न रहा गया तो वो मेरी पैंट के अन्दर हाथ डालने लगीं.


मैं भी आंटी के ऊपर चढ़ गया और उनको चूमने लगा.

कुछ देर बाद मैंने उन्हें बिठाया और उनके कपड़े खोल दिए.


उन्होंने ब्लैक रंग की मैचिंग की चड्डी पहन रखी थी.

मुझसे रहा नहीं गया और मैं झट से उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को रगड़ने लगा; साथ ही मैं अपने मुँह से उनके दूध पीने लगा.


आंटी जी की सांसें तेज़ होने लगीं और कमरे में उनकी ‘आह आह सीई …’ की आवाजें तेज होने लगीं.


अब मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में डाल दीं और आगे पीछे करने लगा.

उनसे भी रहा नहीं जा रहा था. उन्होंने मुझे पलंग पर लिटा दिया और मेरे कपड़े खोल दिए.


मैं नंगा हुआ तो आंटी ने अपनी पैंटी को भी उतार दिया.

उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.

वो मेरे पास आईं और मेरे मुँह की तरफ गांड करके अपनी चूत को मेरे मुँह पर लगा दिया.

वो बोलीं- चाट मेरे राजा और मुझे भी चूसने दे.


वो मेरे मुँह के ऊपर अपनी चूत को हिलाने लगीं और खुद नीचे होकर मेरे 7 इंच के लंड को मुँह में ले लिया.

दस मिनट की चूत लंड चुसाई के बाद वो सीधा हो गईं और मेरे ऊपर छा गईं.


उन्होंने मुझे चूम कर कहा- तुम लेटे रहो, मैं सब कर लूंगी.

मैं चुपचाप लेटा रहा.


वो मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर घुसने लगीं और मेरे लंड पर बैठ गईं.

लंड अन्दर घुस गया तो आंटी ने एक मीठी आह भरी और ऊपर से गांड हिलाने लगीं.


वो Xxx आंटी चुदाई में बहुत अनुभवी औरत थीं … और बहुत प्यासी थीं.

मगर आंटी का बदन जरा स्थूल था तो दस मिनट में ही वो थक गईं और नीचे आने की कहने लगीं.


वो बोलीं- अब तुम्हारी बारी है.

मैं आंटी जी के ऊपर आ गया और उनकी गांड के नीचे तकिया लगा कर उनकी चूत को चाटा.


चूत एकदम रस से भरी थी बड़ा मस्त स्वाद आ रहा था.

मगर आंटी से रहा नहीं जा रहा था. वो बोलीं- चाट बाद में लेना. अभी लंड पेलो.


मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और सटासट चुदाई करने लगा.

साथ ही मैं उनके चूचे पीने लगा और चूत चोदता रहा.


दस मिनट बाद मैंने उनसे कहा- मेरा निकलने वाला है, कहां गिराऊं?

उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया.


मेरी कमर पर पाँव कस लिए और बोलीं- मेरे अन्दर ही छोड़ दो.

मैंने अन्दर ही अपना माल गिरा दिया और मैं झड़ कर कुछ मिनट तक उनके ऊपर ही पड़ा रहा.


बाद में उठ कर मैं बाथरूम में गया.

वो भी पीछे पीछे आ गईं.


हम दोनों साथ में नहाये और उधर ही एक बार फिर से चुदाई के मजे लिए.

मैंने आंटी को बाथरूम में ही घोड़ी बना कर चोदा … उनकी चूत में लंड ठोक दिया और आंटी के दूध पकड़ कर उन्हें ताबड़तोड़ चोदने लगा.


आंटी को भी लंड के मज़े आ रहे थे.


मैंने उन्हें बीस मिनट तक चोदा और फिर से उनकी चूत में रस छोड़ दिया.


आंटी काफी थक गई थीं.

फिर मैं उन्हें सहारा देकर बाहर आ गया और उन्हें बहुत किस किए.


आंटी को चोद कर मैं अपने घर आ गया.

अब हम दोनों को जब भी टाइम मिलता है, हम दोनों बहुत एन्जॉय करते हैं.


आंटी ने मुझसे अपनी गांड भी मरवाई थी’ वो घटना मैं फिर कभी लिखूँगा.

दोस्त की छिनाल बीवी ने शर्दी मिटाई जंगल में लंड ले के - Friend's whore wife quenched her cold by taking cock in the forest

 दोस्त की छिनाल बीवी ने शर्दी मिटाई जंगल में लंड ले के - Friend's whore wife quenched her cold by taking cock in the forest

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


दोस्तो, मेरा नाम विकास ठाकुर है. आज मैं आपके सामने एक नयी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ.

इस फ्रेंड वाइफ सेक्स कहानी को मैं अपनी एक प्रशंसिका मेघना नामक लड़की की फरमाईश सुनकर लिख रहा हूँ.


मेरे बारे में आप पहले से जानते हैं, तब भी मैं एक बार फिर से बता देता हूँ.


मैं पेशे से एक डॉक्टर हूँ. 

मैं एक 28 साल का युवक हूँ और मेरे लंड की साइज़ भी इतनी मस्त है कि ये किसी भी लड़की या भाबी को चुदाई का पूरा मज़ा दे सके.


हालांकि मुझे लड़कियों से भाबियों की चुदाई करना ज्यादा पसंद है.

मैं अपनी कहानी पर आने से पहले ही कह दूँ कि कोई भी पाठक मुझसे किसी भाबी का नंबर या आइडी ना मांगे.

किसी भी लड़की या भाबी के लिए उसकी प्राइवेसी और गोपनीयता बनाए रखना बहुत ज़रूरी होता है.

इसलिए ये देखते हुए मैंने कहानी में नाम बदल दिए हैं.

इस घटना में मैंने कोई गद्दारी नहीं की. जो भी हुआ, मर्ज़ी से एक बार ही हुआ.


यह कहानी मेरे दोस्त की वाइफ की चुदाई की है.

हम तीनों साथ में ही काम करते हैं.


पहले मैं आपको दोस्त की वाइफ के बारे में बता देता हूँ.

वो एकदम सिंपल लड़की है. उसका फिगर बड़ा ही खास है. उसका पिछवाड़ा देखकर बड़े बड़े चुदक्कड़ों के लंड खड़े हो जाते थे.

उसकी गांड में ऐसा जादू था कि मरीज सिर्फ़ उसकी गांड देखने के लिए बार बार आते थे.


वो साड़ी पहनती थी. उसकी आंखें भूरी और गाल एकदम गुलाबी थे. उसके बूब्स और गांड भी मस्त बाहर निकलती हुई थी.


हम लोगों को एक मेडिकल कैंप के लिए नासिक जाना था.

हम लोग लगभग पन्द्रह लोग थे.


पल्लवी भाबी और मेरा दोस्त सागर भी साथ में थे.

सागर, मैं और भाबी हमेशा साथ में घूमते थे, ड्रिंक करते थे.


मैं उनके घर पर बहुत बार रहा हूँ.


जब हम लोग नासिक आए तो वहां पर हमें जंगल में रहना था.

मतलब टेंट लगा दिए थे, पर दोनों तरफ़ से कोई भी झांक सकता था.

जहां हम गए थे, वहां पर ज्यादातर ग्रामीण लोग ही रहते थे.


दो दिन के बाद सागर के पैर में मोच आने के कारण सागर वापिस आ गया.

उसने कैंप और भाबी की ज़िम्मेदारी मुझे सौंप दी.


सागर के जाने के बाद पल्लवी भाबी ने मुझे बुलाया और कहा कि आज रात को ही अपना कल का प्लान डिसकस कर लेते है.


हमारा काम होने के बाद मैं फ्रेश होकर उनके टेंट में गया.

भाबी अन्दर कपड़े चेंज कर रही थीं. एक पर्दा पड़ा था लेकिन मुझे सब दिख रहा था.


भाबी ने ब्लाउज और ब्रा निकली और टी-शर्ट पहन ली.

उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहना था. भाबी ने अपनी पैंटी भी निकाल दी, सिर्फ़ नाइट पैंट पहन ली.


उनके बूब्स और गांड को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

मेरा मन किया कि अभी जाकर उनकी गांड में लंड पेल दूँ और भाबी को घोड़ी बनाकर शॉट लगाने लगूं, बाद में अपना लंड उनके मुँह में डाल दूँ.


मैंने आवाज़ दी तो पल्लवी भाबी ने अन्दर आने को कहा.

मैं पहले से ही अन्दर था. मैं आ गया तो भाबी को देखता रहा.


भाबी बहुत हॉट माल लग रही थीं.


मैंने ऊपर से नीचे तक भाबी को घूरना शुरू कर दिया. पल्लवी भाबी के कपड़े बहुत टाइट थे, उनके चूचे और चूत का आकार एकदम साफ़ झलक रहा था.


वो मुझसे बात कर रही थीं और मेरी नज़रें उनकी फूली हुई गांड पर थी.

ऐसा पहली बार हुआ था, जब मैंने भाबी के बारे में ग़लत सोचा था.


तभी बाकी लोग आ गए.

हम सब लोगों ने कल का प्लान डिसकस किया.


सभी को सोने की जल्दी थी, बहुत सारी नर्स गांड मरवाने को बेकरार थीं और उन सबने अपना अपना लंड को सिलेक्ट कर लिया था.


थोड़ी देर बाद सब लोग निकल गए, भाबी ने मुझे रुकने को कहा.


भाबी ने कहा कि हमने जिन गामीणों को दवाई दी है. उन लोगों ने उनका पारंपरिक डांस देखने को बुलाया है. बाकी सब नहीं आ रहे हैं. हम लोगों को उधर जरूर जाना चाहिए.

हम लोग उनके यहां जाने के लिए निकल गए. वो लोग पहाड़ों के बीच अपनी कुछ पूजा आदि कर रहे थे.


कुछ देर बाद उनका डांस शुरू हुआ.

बहुत मज़ा आ रहा था.

उन लोगों ने हमें भी नचाया.


फिर बाद में एक बंदे ने मुझे एक ग्लास लाकर दिया जिसमें कुछ पीने का शर्बत जैसा था.


उसे पीने के बाद पता चला वो शराब जैसा कुछ था.

वो लोग बहुत सिंपल थे और उनके यहाँ उस शरबत की बड़ी मान्यता थी.


मैंने और भाबी ने शर्बत पिया और मज़ा लेते रहे.


वो लोग हमें मियां बीवी समझ रहे थे.

उनके डांस के दौरान हम दोनों भी डांस कर रहे थे.

भाबी मेरे आगे नाच रही थीं. मेरा लंड भाबी की मक्खन जैसी गांड में घुस रहा था, पर हम लोग नशे में थे.


काफी देर की मस्ती के बाद उनको बोलकर हम दोनों वहां से अपने टेंट आने के लिए निकल आए.


हम रास्ता भटक गए और कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

मोबाइल में नेटवर्क नहीं था.


हम लोग दो घंटे से भटक रहे थे.

भाबी थक गईं और बोलीं- कहीं पर बैठ जाते हैं और फिर सोचते हैं.


ठंड बहुत ज्यादा थी. हम दोनों ने नॉर्मल कपड़े पहने हुए थे.


उतने में भाबी को सामने एक खाली खंडहर दिखा.

हम दोनों डरते डरते वहां पर गए.


अन्दर खाली कमरे थे.

हमने सोचा कि यहीं पर कुछ देर रुकते हैं.


मैं दूसरे रूम में गया, तभी भाबी के चिल्लाने की आवाज़ आई. मैंने देखा तो भाबी वहां पर टंकी जैसा कुछ था, उसमें गिर गयी थीं.


मैं पानी के अन्दर गया और उनको निकाला. हम दोनों भीग गए थे. एक तो पहले से ही ठंड बहुत लग रही थी और अब पानी से भीगने से और ज्यादा सर्दी लगने लगी थी.


फिर मुझे वहां पर कुछ सूखी घास दिखी.


हम दोनों ठंड के मारे कंप रहे थे. तभी भाबी ने जो कहा, वो सुनकर मैं हैरान हो गया.

भाबी ने कहा- हम दोनों को गीले कपड़े उतार कर बैठना पड़ेगा, नहीं तो हम ऐसे ही मर जाएंगे.


मैंने उनकी तरफ देखा, तो भाबी ने कहा- हम डॉक्टर हैं यार, थोड़ा दिमाग़ से सोचो.


फिर अंधेरे में हम दोनों ने अपने अपने गीले कपड़े उतार दिए और एक दूसरे की तरफ पीठ करके बैठ गए. लेकिन कब तक ऐसे ही रहते. ठंड तो अभी भी थी.


हम दोनों लोग घास बिछा कर उसी पर सो गए. थोड़ी सी घास मैंने हम दोनों के ऊपर से डाल ली.


भाबी का स्पर्श बराबर मिल रहा था, जिससे मेरा लंड खड़ा हो चुका था.


हमारा शरीर एक दूसरे को टच हो रहा था. भाबी थोड़ा पीछे हो गईं. मेरे शरीर की गर्मी की वजह से उनकी सर्दी कम हो गयी.

भाबी ने मुझसे कहा- कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है. एक दूसरे को लिपट कर सोना पड़ेगा.


अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ. मैंने उनकी उनकी गोल और नर्म गांड को अपने हाथों से दबाना शुरू कर दिया.

उनकी गांड काफी बड़ी थी और एकदम मक्खन की तरह थी.


उनकी गांड के दोनों फलकों को हाथों से दबाने और मसलने में काफी ज्यादा मजा आ रहा था.


धीरे धीरे भाबी भी जोश में आने लगी थीं- आ हूँ दबाओ ज़ोर से … कुछ तो करो यार बड़ी सर्दी लग रही है.

ऐसा बोल कर वो अपने दूध मेरे सीने से रगड़ने लगी थीं.


दो मिनट के बाद भाबी बोलने लगीं- यार, ये सही नहीं है.

मगर अब तक मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.


मैंने भाबी को समझाया- हमें ये करना ही होगा भाबी, वरना हम दोनों इस जाड़े से मर जाएंगे.

भाबी ने मुझसे प्रॉमिस लिया कि ये एक ही बार होगा और किसी को पता नहीं चलना चाहिए.


मैंने भाबी को प्रॉमिस किया और किस करना शुरू कर दिया.


मैं पीछे से उनकी गांड और चूचों पर हाथ फेर रहा था और मस्ती से दबा रहा था.

सच में कितनी मुलायम और नर्म चूचियां थीं. मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था.


भाबी भी इतने में काफी गर्म हो गयी थी उनके मुँह से ‘आह … आह …’ की कामुक आवाज निकल रही थी.


कुछ देर बाद भाबी ने मुझसे कहा- मुझे आज अपनी चूत चटवानी है. सागर ने कभी ऐसा नहीं किया है. प्लीज़ चाटो ना!

मैं नीचे आ गया.


मैं 69 पोजीशन में आकर भाबी की चूत के पास पहुंच गया और उनकी चूत जीभ से चाटने लगा.


भाबी को मैं पूरा मजा दे रहा था. मेरी पूरी जीभ चूत के अन्दर थी.

मैं भाबी की चूत में पूरी जीभ डालकर आइसक्रीम की तरह चूत चाट रहा था.

भाबी की चूत का खट्टा पानी मुझे बड़ा मस्त लग रहा था.


फिर भाबी ने मेरा लंड हाथ में ले लिया. वो अपने हाथ से मेरे लंड को हिलाने लगीं.


अब मेरी भी आहें निकलने लगीं. मेरी हालत खराब हो रही थी.


तभी भाबी ने मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगीं.

उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में गले तक ले लिया और बड़ी मस्ती से अन्दर बाहर किए जा रही थीं.

इधर मेरी जीभ उनकी चूत के साथ साथ झांटों के बाल भी खींच रही थी.


इससे उनकी आंह आंह उन्ह उन्ह निकल रही थी.

मैंने पूछा- भाबी, लंड चूसने में मजा आ रहा है?


भाबी ने कहा- हां यार, मुझे लंड चूसना बहुत पसंद है. लेकिन सागर कभी लंड चुसवाता ही नहीं है और न ही मेरी चूत चाटता है.


मैंने कहा- भाबी, मेरा माल निकल सकता है.

वो बोलीं- परवाह मत करो यार … तुम मेरे मुँह में ही वीर्य निकाल दो. मुझे तुम्हारे लंड के माल को पीना है.


भाबी ने मेरे लौड़े को चूस चूस कर और बड़ा कर दिया था और कह रही थीं- यार, बड़ा मस्त लंड है तुम्हारा. मुझे बड़ा ही पसंद आया है.


मैं भी काफ़ी जोश में आ गया था. मैं भाबी का सर दबा रहा था और लंड पूरा अन्दर तक जा रहा था.


भाबी हाथों से मुठ मार मार कर चूस रही थीं और मेरे टट्टे सहला रही थीं.


मेरा लौड़ा एकदम गर्म हो गया था और कुछ ही पलों में मैंने सारा माल निकाल दिया. मेरे लंड का रस भाबी के मुँह में गिर गया.


भाबी ने मेरा सारा माल पी लिया और लंड चाट कर सारा माल साफ कर दिया.


कुछ देर बाद भाबी गर्मा गई और बदहवास होती हुई बोलीं- अब तुम मुझे अपने लंड से चोदो. बस माल अन्दर मत गिराना. मुझे आज तुम हर स्टाइल में चोदो, अब मुझसे रहा नहीं जाता, जल्दी करो चोद दो मुझे. चोदो मेरी चूत फाड़ कर रख दो.


मैंने अपने होंठों से उनके होंठों को चूमना चाटना शुरू कर दिया.

मैं बहुत बेताबी से भाबी को किस कर रहा था और साथ में उनके मम्मों को मसल भी रहा था.


भाबी के गालों पर, गले पर, चूत, गांड, दूध हर जगह मैं भाबी को चूमा चाटा. फिर नीचे से हाथ डाल कर उनकी चूत को सहलाने लगा; चूत के अन्दर उंगली डालने लगा.


मैं भाबी के बड़े और सख्त मम्मों को पिए जा रहा था. उन्हें मसलने में अपनी पूरी ताकत लगा रहा था और मम्मों को जोर जोर से भंभोड़ने लगा था.

भाबी आंह आंह कर रही थीं.


मैंने उनके एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर दबाते हुए खींचा.

अब वो जोर जोर से सिसकने लगीं- उह उह आह विकास … आज मुझे पूरी तरह से चुदाई का मज़ा दे दो. मुझे तेरा लंड अन्दर चाहिए प्लीज़ चूत में पेल दो. चाहो तो माल अन्दर ही डाल दो लेकिन अब सब्र नहीं होता.


मैंने भाबी को सीधा किया और उनके ऊपर चढ़ गया, अपना लंड उनकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा.


भाबी की चूत पूरी गीली हो गयी थी.

उनकी टाईट चूत को चोदने के लिए मैंने पहला झटका ही जोर से दिया पर गीली चूत की वजह से लंड फिसल रहा था.


फिर भाबी ने एक हाथ से लंड पकड़ कर चूत के छेद में सैट किया. मैंने एक मम्मे को मुँह में लिया और एक ज़ोर का शॉट लगा दिया.


भाबी ज़ोर से चिल्लाईं- ओह मर गई … साले कितना बड़ा है तेरा … मुझे दर्द हो रहा है.

मेरा आधा लंड भाबी की चूत में घुस गया था.


मैंने भाबी की बात को अनसुना करते हुए एक शॉट और दे मारा.

भाबी की चूत काफ़ी टाईट थी.


फिर भाबी ने गांड ऊपर की और बोलीं- अब लगाओ शॉट.

मैंने एक बार फिर से जोर के झटके से पेला और अपना पूरा लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया.


भाबी बोल रही थीं- आह धीरे धीरे करो … मुझे मज़ा तो लेने दो. चूत से चप चप की आवाज़ आनी चाहिए.


भाबी मेरी पीठ में नाख़ून के निशान छोड़ रही थीं.


मैं उनके मम्मों को डबाते हुए धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे कर रहा था.

साथ में मैं बीच बीच में ज़ोर ज़ोर से शॉट लगा रहा था.


कुछ देर बाद भाबी का दर्द भी कम हो गया और वो भी चुदाई का मज़ा लेने लगीं.


अब वो कामुक आवाजें निकालने लगीं- ओह ह्म्म … आह और जोर से चोद साले और ज़ोर से पेलो, मुझे तुम्हें अन्दर तक लेना है. आंह मर्द की तरह चोदो. आह विकास प्लीज़ अपनी स्पीड बढ़ाओ, मैं आने वाली हूँ.


मैंने अपने झटकों की रफ्तार बढ़ाई और पॉवर भी.


मैं भाबी को और जोर से उसे चोदने लगा.

मैंने भाबी के पैर अपने गले में ले लिए और चुदाई का आसन बदल दिया.


अब मेरा लंड चूत की जड़ में जाकर चोट मार रहा था और चूत की मलाई के कारण फच फच की आवाज़ से सारा माहौल गर्मा गया था.


थोड़ी देर बाद भाबी झड़ गईं, फिर भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थीं.

उनकी चूत का रस टपकने लगा था.

मुझे उसकी खुशबू आ रही थी.


मुझे और भाबी को चुदाई में काफ़ी मज़ा आ रहा था.


फ़च फ़च की आवाज़ और भी ज्यादा मजा दे रही थी.


थोड़ी देर बाद मुझे लगने लगा कि मैं भी आने वाला हूँ.

मैंने लंड निकाला और उन्हें उल्टा कर दिया.


भाबी को कुतिया बना कर पीछे से उनकी चूत में अपना लंड घुसा कर शॉट लगाना चालू कर दिया.


मैं पीछे से जोर जोर से धक्के लगा रहा था और भाबी गांड पीछे करके मेरा लंड अन्दर ले रही थीं.


अब मेरा लौड़ा रुकने वाला नहीं था, मैंने भाबी से कहा- मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है, मेरा होने वाला है. मैं चूत में निकल रहा हूँ.

उन्होंने कहा- ठीक है निकाल दो, मैं गोली ले लूंगी.


मैं पूरी ताकत से भाबी की टाईट चूत में झटके लगा रहा था … वो भी बेहाल हो गई थीं.

मेरा लंड मानने को तैयार ही नहीं था फिर भाबी ने हाथ पीछे करके मेरे लंड की गोटियां सहलाईं और कुछ तेज झटकों के साथ मैंने अपना पूरा माल भाबी की चूत में डाल दिया.


हम दोनों नंगे ही वहां पर पड़े थे.


हमें अब ठंडी नहीं लग रही थी. पूरा जिस्म पसीना पसीना हो गया था.

भाबी ने मुझे थैंक्स कहा और मेरे लंड को चाट कर साफ करने लगीं.


दस मिनट बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

इस बार भाबी ने कहा- चूत में दर्द हो रहा है. कुछ देर बाद में करते हैं.


भाबी मेरी तरफ गांड करके एकदम चिपक कर सो गईं.

मैं सुबह जागा तो मेरा लंड खड़ा था.


मैंने भाबी की गांड में लंड डालने की कोशिश की.

भाबी ने पहले भी अपनी गांड मरवाई थी.


कुछ देर में भाबी मस्त हो गईं और बोलीं- आखिरी टाइम करने दे रही हूँ.


मैं किसी तरह भाबी की गांड में लग गया.

धकापेल चुदाई होने लगी.


फिर भाबी ने कहा- इस बार मुझे मुँह में लेना था पर गांड से निकला लंड मैं नहीं लूंगी.


मैं उनके दोनों चूचों को पकड़ कर भाबी की गांड मारने लगा.


कुछ पल बाद मैंने सारा माल भाबी की गांड में निकाल दिया.

भाबी ने मुझको किस किया.


अब हम दोनों ने अपने कपड़े पहने.


भाबी ने कहा- ये बात कभी किसी को पता नहीं चलनी चाहिए.

मैंने उन्हें हग किया और प्रॉमिस किया कि कभी किसी को पता नहीं चलेगा और ये दुबारा भी नहीं होगा.


हमने एक दूसरे को हग किया और एक लंबा किस किया.

भाबी ने मेरे लंड की तरफ़ देखा, वो अभी भी खड़ा था.


भाबी ने कहा- हाथ से हिलाओ या कोई और ढूंढ लो.

मैं हंस दिया.


हम लोग दिन के उजाले में रास्ता पूछ कर अपने टेंट में चले आए.

आज भी हम लोग दोस्त हैं और मस्त जी रहे हैं.


कभी कभी भाबी को देखकर मूड होता है. मैं उनको बोलता भी हूँ लेकिन फिर हम लोग कंट्रोल कर लेते हैं.


इस कंट्रोल की वजह मेरा दोस्त और उनका पति सागर है.


दोस्तो, ये मेरी फ्रेंड वाइफ सेक्स कहानी थी जो मैंने एक पाठिका मेघना की इच्छा पर लिखी है.

उससे मैंने एक डॉक्टर भाबी के साथ की चुदाई की बात कही थी. जिसे सुनकर वो मुझसे बार बार जिद करने लगी थी कि इस गर्म सेक्स कहानी को सबके सामने आना चाहिए.


आप मुझे मेल कीजिए और बताएं कि आपको ये कहानी कैसी लगी

जाते जाते एक ही बात कहूँगा कि औरतों कि इज्जत कीजिए, उनको प्यार और सम्मान दीजिए. उनकी प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखें.


अगली सेक्स कहानी लेकर जल्द ही आऊंगा, तब तक लंड हिलाते रहिए, शॉट लगाते रहिए और पाठिकाएं अपनी चूत में उंगली करना कभी मत भूलना.

दोस्त के अंकल से चुद गई सेक्सी बीवी हँसते हँसते - Sexy wife got fucked by friend's uncle while laughing

 दोस्त के अंकल से चुद गई सेक्सी बीवी हँसते हँसते - Sexy wife got fucked by friend's uncle while laughing

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां

आज मैं आपको मेरी बीवी मीनाक्षी की एक गैर मर्द के साथ हुई चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ. ये एकदम सच्ची कहानी है.

मेरा दावा है कि कहानी पढ़कर मर्दों के लौड़ों का पानी निकल जाएगा और जनानियों की पिक्की में से रस बहने लगेगा.


सबसे पहले में आपको मेरे और मीनाक्षी के बारे में बता देता हूँ.

मैं गुजरात से हूँ. ठीक-ठाक कद-काठी वाला एक स्लिम और गोरा 30 साल का युवक हूँ.

मेरी बीवी मीनाक्षी की उम्र 29 साल है.


मीनाक्षी के दूध हाफुस आम जैसे बड़े और रसीले हैं. उसकी गांड बाहर की तरफ निकली हुई बड़ी और गोल गोल है.

उसका फिगर 38-32-40 का है. आपको फिगर से पता चल गया होगा कि मेरी बीवी के दूध कितने बड़े हैं.


जब वो चलती है, तो उसके कूल्हे नृत्य करते हैं. मैं उसे प्यार से मीनू कहता हूँ. कुल मिलाकर मेरी बीवी मीनू एक सेक्स बॉम्ब है.

मीनू को सबसे ज्यादा कोई बात पसंद है तो वो है, बड़े बड़े लंड से चुदना.


हम दोनों कपल स्वैपिंग भी कर चुके हैं और वो मुझे साफ़ बता देती है कि उसे फलां मर्द पसंद आ गया है और उसे उससे चुदवाने का मन है.

मैं भी मान जाता था.


वो अपनी मोटी गांड में भी लंड घुसवाती है. पहलवान टाइप के हट्टे-कट्टे और थोड़ी बड़ी उम्र के मर्द उसे ज्यादा पसंद आते हैं. क्योंकि उसका मानना है कि अनुभवी मर्द चुदाई में ज्यादा मज़ा देता है.


हुआ यूं कि मेरे एक दोस्त की शादी थी. उसका नाम सागर था.

उसका फोन आया कि तुझे भाभी को लेकर शादी के तीन दिन पहले उसके घर आना है.

वो मेरा अच्छा दोस्त था, तो मैंने भी हां कर दी.


शादी के तीन दिन पहले मैं और मीनाक्षी उसके गांव पहुंच गए.

उसके घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं.


रहने के लिए उसने हमें अपने अंकल के घर में भेज दिया.

ये घर उसके घर के बगल में ही था.


एक लड़का हमें सागर के अंकल के घर तक छोड़ गया.

उसके अंकल का नाम बलवीर था.


हम उनके घर में गए. वो सोफे पर बैठे थे.

हमें देख कर खड़े हुए और हमारा स्वागत किया.


मैं और मीनू तो बलवीर अंकल को देखते ही रह गए.

सवा छह फुट का लम्बा ऊंचा कसरती बदन, चौड़ी छाती, हाथी की सूंड जैसी दो मजबूत भुजाएं. ताकतवर पहलवानों जैसा बदन. वज़न लगभग 110 किलो का रहा होगा, पर एकदम फिट.

अंकल 40 की उम्र और रिटायर्ड फौजी थे.

मैं तो उनके सामने एक बच्चे जैसा दिख रहा था.


मीनू की नज़र अंकल के ऊपर से हटने का नाम नहीं ले रही थी. मीनू को जैसा पुरुष चाहिए था, वो सब कुछ उस एक मर्द में था.


अंकल ने हमें घर के अन्दर हमारा कमरा दिखाया.

हम दोनों ने अपना सामान रखा और कपड़े बदल लिए.


दोस्त की शादी में गांव आए थे तो मीनू ने एक लाल कलर की साड़ी पहनी. बैकलैस ब्लाउज पहना. उसकी पीठ पर केवल एक डोरी थी. बाकी नंगी पीठ दिख रही थी. साड़ी नाभि के तीन इंच नीचे कसके बांधी, जिससे उसकी गोल गांड बाहर उभर आई.


तभी सागर का फोन आया.

हम उसके घर जाने लगे.


मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बलवीर अंकल मेरी बीवी मीनू की गांड पर नज़र गड़ाए थे.


हमने सागर के घर आकर दोपहर का खाना खाया. वापस आकर थोड़ी देर आराम किया.

तभी बलवीर अंकल वहां आए और मुझसे कहने लगे- चलो तुम्हें हमारे खेत दिखा लाता हूँ.


मैं भी तैयार हो गया.

अंकल ने जीप निकाली, तभी मीनू वहां आ गई.

मीनू- कहां जा रहे हो?


बलवीर अंकल- तुम्हारे पति को गांव के खेत दिखाने ले जा रहा हूँ. तुम्हें आना है?

मीनू- हां रुकिए, मुझे भी खेत देखना है.


बलवीर अंकल- चलो, बैठ जाओ.

मीनू जीप में बैठ गई. बलवीर अंकल ने जीप चालू की और खेतों की ओर दौड़ा दी.


दस मिनट गाड़ी चलने के बाद खेत आ गया. हम नीचे उतरे और खेत में घूमने लगे.

अंकल मीनू को खेतों के बारे में सब बता रहे थे. मीनू गांड मटका मटका कर चल रही थी.


मैं समझ गया था कि मीनू को अंकल पसंद आ गए हैं इसलिए मैं उन दोनों से थोड़ा हट कर चलने लगा था.


तो मैं थोड़ा आगे निकल गया.

पर मीनू के साथ जो कुछ हुआ था, वो उसी ने मुझे विस्तार से बताया था.


बलवीर अंकल बातों बातों में मीनू को छू लेते थे.

एक बार तो उन्होंने मीनू की गांड पर भी हाथ फेर दिया.

ये देख कर मीनू मुस्कुरा दी.


बलवीर अंकल एक अनुभवी मंजे हुए खिलाड़ी थे.

उन्हें पता चल गया कि मीनू ना नहीं कहेगी.

ये जानते ही उनकी हिम्मत बढ़ गई.


उस वक्त खेत में बाजरे की फसल आयी हुई थी.

फसल इतनी ऊंची ऊंची हो गई थी कि वो दोनों दिखाई नहीं दे रहे थे.


उनके लिए ये अच्छा मौका था.

बलवीर अंकल ने मीनू को पीछे से पकड़ लिया और उसके बड़े बड़े दूध दबा दिए.

मीनू नाटक करती हुई कहने लगी- अरे अंकल ये आप क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे!


अंकल- छोड़ दूंगा, पहले कुछ मज़ा तो कर लेने दे.

मीनू- मैं वैसी लड़की नहीं हूँ अंकल.


अंकल- हां, तुझे देखते ही पता लग गया था कि तू साली चुदी चुदाई रंडी है. तेरी गांड इस बात की गवाही दे रही है.

मीनू- नहीं अंकल मुझे जाने दीजिए. मेरे पति भी यहीं पर हैं.

अंकल- नाटक मत कर रंडी. जल्दी से बैठ जा और मेरा लौड़ा चूस ले.

मीनू अब मुस्कुराने लगी.


उसने अपनी पतली गोरी बांहें अंकल की गर्दन पर रख दीं और आंख मारती हुई बोली- जी मेरे राजा … अभी चूस देती हूँ.


मीनू वहीं पर बाजरे के खेत में घुटनों के बल बैठ गई और अंकल के पैंट की चैन खोलने लगी.

अंकल ने अपने पैंट का हुक खोल दिया उधर चैन भी खुल गई थी.

पैंट नीचे सरक गया.


बलवीर अंकल ने अन्दर चड्डी पहन रखी थी.

मीनू ने वो भी उतार दी.


अंकल का सोया हुआ काला लौड़ा मीनू के मुँह के सामने था.

सोया हुआ भी मेरे खड़े लंड से दो गुना बड़ा था. नीचे के दो आंड भी मोटे मोटे निम्बुओं की तरह बड़े थे.


मीनू- वाउ … कितना बड़ा लौड़ा है.


लंड की चमड़ी मीनू ने पीछे सरकाई तो अंकल के लंड का लाल सुपारा बाहर निकल आया.

ये किसी टमाटर जितना बड़ा था.


मीनू अंकल के सुपारे को चाटने लगी, चूसने लगी.

देखते देखते अंकल का लौड़ा और बड़ा हो गया. वो मोटा भी बहुत था और कड़क तो एकदम लोहे की रॉड जैसा था.


मीनू तो आंख मूंदकर लंड का स्वाद लेने लगी.

आसपास क्या हो रहा है, सब कुछ भूल कर बलवीर अंकल का घोड़े जैसा लौड़ा मुँह में भरकर, वो जी लगाकर चूसने में लगी थी.


तकरीबन आधे घंटे से ये सब चल रहा था.

अंकल अब झड़ने वाले थे. उनके मुँह से कामुक सिसकारियां निकलने लगी थीं.


एक दो पल बाद ही अंकल के लंड ने वीर्य का फुव्वारा मीनू के मुँह में छोड़ दिया.


मीनू खुशी खुशी अपने हाथ से ‘स्वाद मस्त है …’ का इशारा करती हुई अंकल का वीर्य पीने लगी.


अंकल का ताज़ा माल पीकर वो तृप्त हो गई.

फिर अंकल ने उसे खड़ा किया और चड्डी व पैंट चढ़ाते हुए कहा- चलो अब देर हो रही है.


मीनू- नहीं अंकल, मुझे आपके लंड से चुदवाना है. आपका बड़ा लौड़ा मुझे मेरी गांड और पिक्की में लेना है. मुझे अपनी रखैल बना लीजिए. मुझे अभी चोदिए. मेरी फुद्दी का भोसड़ा बना दीजिए.

अंकल- मैं तुम्हें रात को जरूर चोदूंगा. पूरी रात तुझे पेल कर थका दूंगा. अभी चलो.


मीनू- रात को तो मेरे पति साथ होंगे. फिर कैसे करेंगे?

अंकल- उसकी चिन्ता तू मत कर. मैं उसकी व्यवस्था कर दूँगा. तू बस अपनी भोसड़ी तैयार रखना.

मीनू- मैं तो कब से तैयार हूँ.

फिर अंकल ने मेरी बीवी का पेटीकोट उठाया और उसकी काली पैंटी निकाल कर वहीं खेत में फैंक दी और कहा- अब चलो.

तब तक मैं खेत पर बने ट्यूबवेल पर बैठ कर अपनी बीवी और सागर के अंकल के आने का इंतजार कर रहा था.


फिर हम सब खेत से निकले और घर आ गए.

शाम का खाना सागर के घर खाया, थोड़ी देर इधर उधर की बातें की.


रात के दस बजे थे.

सागर, जिसकी शादी थी उसकी मां हमारे पास आयी और मुझसे बोली- बेटा मेरा एक काम कर दे.

मैं- बोलो आंटी.


आंटी (सागर की मां)- ये सामान तुझे शहर में हमारे रिश्तेदार को अभी पहुंचाना है और हां देर हो जाएगी, तो तुम रात को वापस मत आना. वहीं पर सो जाना.

मैं- ठीक है आंटी.


मैं सागर की मम्मी से सामान लेकर चला गया.


मेरे जाने के बाद मीनू के साथ क्या हुआ वो आप खुद मीनू की जुबान से ही सुनिए.


मैं बलवीर अंकल के सामने देख रही थी.

उन्होंने मुझे आंख मार दी.

मैं समझ गई कि ये सब अंकल की ही योजना है. मैं भी मुस्कुरा दी.


साढ़े दस बजे अंकल मुझे लेकर घर आए.

घर पर हम दोनों ही थे क्योंकि अंकल की बीवी उसके मायके में रहने गई थी. उसे शादी के दिन ही आना था.


मीनू- अंकल, एक बात बताओ आपकी बीवी आपको छोड़ कर क्यों चली गई?

अंकल- वो मेरा बड़ा लौड़ा अपनी फुद्दी में नहीं ले पाती थी. मुझे जंगली चुदाई की आदत है. चुदाई के समय में बहुत गालियां देता हूँ. थप्पड़ लगा लगा कर गांड लाल कर देता हूँ. चुदाई के समय मैं बिल्कुल भी रहम नहीं दिखाता हूँ.


मीनू- अंकल, आज आपकी जिस तरह से इच्छा हो, उस तरह मुझे चोद लेना. बहुत गालियां दे लेना. मार मार कर मेरी गांड लाल कर देना. मैं मना करूं तब भी मुझे मत छोड़ना. बिल्कुल रहम मत दिखाना.


अंकल ने गाली देते हुए मेरी साड़ी खींच ली- हाँ भैन की लौड़ी, आज तेरी चूत का भोसड़ा नहीं बनाया तो कहना.


मैं ब्लाउज और पेटीकोट में थी.

अंकल ने अपने मज़बूत हाथों से मेरे पेटीकोट का नाड़ा तोड़ दिया.

पेटीकोट नीचे गिर गया.

अब मैं नीचे से बिल्कुल नंगी थी.

पैंटी तो अंकल ने खेत में ही निकाल कर फैंक दी थी.


अंकल ने मेरा ब्लाउज भी फाड़ दिया.

मैंने खुद ब्रा निकाल कर अंकल के मुँह पर दे मारी.


अंकल ने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर फैंक दिया.

वो भी नंगे हो गए.


अंकल ने मेरी दोनों टांगें फैलाईं और मेरी फुद्दी के होंठ खोल कर चाटने लगे.

मुझे अंकल जैसे सांड से अपनी चूत चटवाने में बहुत मज़ा आने लगा.


मैं गर्म होने लगी. मेरे मुँह से कामुक सिसकारियां निकलने लगीं.

अब अंकल बेड के किनारे खड़े हो गए. मैं उसका घोड़े जैसा लौड़ा चूसने लगी.


मुझे बलवीर अंकल के लंड का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था. मैं चूस चूस कर लंड को निचोड़ लेना चाहती थी.


बलवीर अंकल बहुत ताकतवर मर्द थे.

उन्होंने मुझे खड़े खड़े ही गोदी में उठाया और मेरी फुद्दी अपने मूसल लंड पर रख कर निशाना लगाने लगे.


एक ही बार में मेरी चूत की फांकें अंकल के लंड के सुपारे में सैट हो गईं.

उन्होंने मेरी कमर से मुझे पकड़ा और अपने लंड पर खींच लिया.


‘ओय मां मर गई …’

अंकल का आधा लौड़ा मेरी फुद्दी को चीरता हुआ घुस गया.


मैं दर्द से छटपटाने लगी लेकिन कुछ ना कर सकी क्योंकि बलवीर अंकल खड़े थे और मैं उनकी मजबूत बांहों में पूरी तरह उनसे लिपटी हुई हवा में झूल रही थी.

यदि मैं उन्हें छोड़ती तो जमीन पर आ गिरती.

अब तक मैंने कई बड़े बड़े लंड लिए थे लेकिन बलवीर अंकल का लौड़ा घोड़े के लंड से कम ना था.


अंकल ने दूसरा झटका दिया और अपना पूरा लौड़ा मेरी पिक्की में पेल दिया.

मेरी आंखें बाहर निकल आईं, आंखों के सामने अन्धेरा छा गया, दर्द से आंसू निकल गए.


मीनू- आंह अंकल मुझे छोड़ दो. मैं आपका लौड़ा नहीं ले सकती. बहुत बड़ा है. मेरी फुद्दी फट जाएगी.

तो अंकल बोले- थोड़ी देर रुक जा कुतिया, तुझे मेरे लौड़े से बहुत मज़ा आएगा.


अंकल ने अपना लौड़ा आगे पीछे करना शुरू कर दिया.


करीब दस मिनट बाद मेरा दर्द कम हो गया.

अब अंकल ने मुझे बेड के किनारे घोड़ी बनाया और एक ही झटके में पूरा महाकाय लौड़ा पेल दिया.

मैं फिर से चिल्ला पड़ी.


अंकल अब अपना पूरा लौड़ा बाहर निकालते और एक ही झटके में पूरा पेल देते.

अब मुझे भी मज़ा आने लगा था. मैं किसी रंडी सी सिसिया रही थी- आह और जोर से चोदो अंकल और जोर से … फाड़ दो मेरी पिक्की. भोसड़ा बना दो. मुझे रंडी की तरह चोदो.


बलवीर अंकल- ले भोसड़ी की ले मेरा लौड़ा. बहुत गर्मी है तेरी चूत में. फाड़ दूंगा तेरी भोसड़ी … आह साली भोसड़ा बना दूंगा.


अंकल ने एक ज़ोरदार चमाट मेरे कूल्हे पर लगा दी.

मैं- आ उउउ आह और मारो अंकल मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. मेरी गांड को लाल कर दो.


अंकल- ले रांड ले.

बलवीर अंकल जोर जोर से मेरे कूल्हों पर चमाट पर चमाट लगाने लगे.

मुझे दर्द तो हो रहा था लेकिन मज़ा उससे कई गुना ज्यादा आ रहा था.


अब मैं झड़ने के करीब थी.

आज पहली बार में किसी मर्द के झड़ने से पहले झड़ने वाली थी.


तभी मेरी फुद्दी ने रस छोड़ दिया, मैं निढाल होकर बिस्तर में गिर पड़ी.

अंकल का अब तक नहीं निकला था.


वो बिस्तर पर लेट गए.

उनका खड़ा लौड़ा छत की तरफ देख रहा था.


अंकल- चल साली रांड बैठ जा इस लंड पर.


मैं ‘जी अंकल …’ कहकर उनके मूसल लंड पर बैठ गई और उछलने लगी.

अंकल मेरी चूचियों का भुर्ता बनाने लगे.


करीब बीस मिनट तक अंकल के लंड पर उछल उछल कर चुदवाने के बाद मैं थक गई.

अंकल का लौड़ा वाकयी मजबूत लंड था, वीर्य निकालने का नाम नहीं ले रहा था.


लेकिन मैं भी बहुत बड़ी रंडी हूँ. ऐसे थोड़ी हार मान लेती.


मैं बिस्तर से उतरी और फर्श पर अपने हाथों की उंगलियों से अपने पैर की उंगलियां पकड़ कर झुक गई.

उस वक्त मैं वैसी बनी थी, जैसे कक्षा में शिक्षक बच्चों को अंगूठा पकड़ा कर झुका कर सजा देते हैं, ठीक वैसे.


अंकल तो बहुत अनुभवी खिलाड़ी थे. उन्होंने अपनी दो मोटी उंगलियां मेरी फुद्दी में घुसा दीं और जीभ से चाटने लगे.

मैं फिर से स्वर्ग की सैर करने लगी.


फिर अंकल ने अपना लौड़ा मेरी भोसड़ी में पेल दिया और एकदम से चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी.

करीब बीस मिनट तक इसी पोज में चुदाई चली.

मैं और अंकल दोनों पसीने से लथपथ थे.

कमरे में हम दोनों की कामुक सिसकारियों के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था.


आखिर एक घंटे की चुदाई के बाद वो पल आया जिसका मुझे इंतज़ार था.

अंकल का गाढ़ा और गर्म वीर्य मेरी चूत में बहने लगा.


मैं आंखें मूंदकर अपनी चूत में गिरते गर्म वीर्य का आनन्द लेने लगी.


पांच मिनट उसी तरह रहने के बाद अंकल ने अपना लौड़ा मेरी फुद्दी से बाहर निकाला.

मैं वहीं फर्श पर गिर पड़ी, मैं हांफ रही थी.


अंकल बाहर हॉल में सोफे पर बैठ गए.


बीस मिनट बाद मुझे कुछ होश आया. मैं उठी और बाथरूम जाने लगी.

रात के बारह बजे थे. मुझे जोर से पेशाब लगी थी लेकिन मेरे पैर मेरा साथ नहीं दे रहे थे.


मैं लड़खड़ा रही थी. लंगड़ाती हुई बाथरूम गई.

वापस आकर अंकल के पास बैठ गई.


अंकल- मज़ा आया रंडी?

मैं- बहुत मज़ा आया. आप तो बहुत मजबूत हो. कोई और होता तो अब तक चार बार झड़ गया होता. पर आपका तो निकलने का नाम ही नहीं लेता है. अब मुझे पता लग रहा है कि आपकी बीवी आपको छोड़कर क्यों चली गई.


हम दोनों हंसने लगे.


दस मिनट बाद मैं अंकल का लौड़ा फिर से चूसने लगी.


अंकल- वाह रंडी, बहुत आग है तुझमें. आज तक किसी लड़की या औरत ने एक रात में मुझसे दो बार चुदने की हिम्मत नहीं की. एक रात में तो क्या एक महीने तक दोबारा चुदने की हिम्मत नहीं करती और तू दस मिनट में फिर से तैयार हो गई. तू दिखने में ही छोटी है, तेरे अन्दर ज्वालामुखी के जैसी आग है.


मैं बलवीर अंकल का लौड़ा चूसने लगी.

थोड़ी देर में उनका लंड फिर से खड़ा हो गया. चुदाई का दूसरा राउंड शुरू हो गया. जो पूरे एक घंटे चला.


मेरा अंग अंग दर्द कर रहा था, फिर भी में चुदना चाह रही थी.


अंकल ने उस रात मुझे तीन बार चोदा.

रात के चार बजे हम सो गए.


सुबह नौ बजे सागर की मां मुझे उठाने आयी.

मैं नंगी ही बिस्तर पर पड़ी थी.

अंकल जा चुके थे.

सागर की मां बोली- लगता है बलवीर देवर जी ने तुझे पूरी रात पेला है.

मैं शर्मा गई.


सागर की मां- शर्मा मत. मैं किसी को नहीं बताऊंगी. और हां मैं अगले दो दिनों तक तेरे पति को काम में बिजी रखूंगी. तू मस्ती से चुदवाती रहना.

मैं- ओह आंटी आप कितनी अच्छी हो.


आंटी ने मेरे पूरे बदन को देखा और बोली- देवर जी ने तो पूरा नौंच डाला है … तुझे दर्द तो नहीं हो रहा?

मैं- दर्द तो हो रहा है आंटी, पर मज़ा उससे कई गुना ज्यादा आया. अगले दो दिन तक मैं हर रात अंकल से चुदना चाहती हूँ.


सागर की मां- सिर्फ अंकल का ही नहीं. उसका एक दोस्त भी है. वो भी उसी की तरह रिटायर्ड फौजी है. उससे भी चुद लेना. वो भी बड़ा जालिम मर्द है. मैंने भी उससे चुदवाया है.


ये कहकर मुझे आंख मारकर आंटी चली गईं. मैं नहाकर तैयार हुई. दूसरी रात मेरी किस तरह चुदाई हुई, वो कभी फिर बताऊंगी.

जवान से बीवी ने खुजली मिटाई अपनी - The wife got her itch relieved by the young man

 जवान लंड से बीवी ने खुजली मिटाई अपनी चूत की - The wife got her itch relieved by the young man

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


दोस्तो, यह मेरी बड़ा लंड सेक्स कहानी एकदम सच्ची है, इसमें बस मैं स्थान का नाम बदल रहा हूँ. जिसके लिए मैं माफी चाहता हूँ. मेरा नाम कमर चीमा है और मेरी बीवी का नाम मोना आलम है. मेरी शादी के आज 15 साल हो चुके हैं.


यह बात तब की है, जब 6 साल तक मेरी बीवी मोना गर्भवती नहीं हुई थी. उस समय वह इस बात को लेकर बहुत चिन्तित रहती थी. मैंने उससे कई बार कहा कि हो सकता है कि मुझमें कोई कमी हो. इस पर हम दोनों ने डॉक्टर को चैक करवाया. मगर डाक्टर द्वारा न तो मुझमें कमी बताई गई थी और न ही उसमें.


हम दोनों एकदम ठीक और फिट रहते थे, परन्तु फिर भी बच्चे का सुख नहीं पा रहे थे.

इसी कारण से मेरी बीवी मोना अत्यधिक तनावग्रस्त रहने लगी थी.


फिर मेरी ससुराल में मेरी सासू मां को किसी ने बताया कि एक औरत इसकी दवा देती है, उससे मोना को मिलवा लो.


ये बात मोना के माध्यम से मुझ तक आई, तो मैं तुरंत राजी हो गया और उस महिला से मिलने जाने का पक्का कर लिया.


जब हम दोनों अपनी ससुराल गए, तो सासू मां ने हम दोनों को शाम के समय उस महिला के पास भेजा.


जब हम उस महिला के घर पहुंचे, तो रात हो चुकी थी.

उस औरत ने मुझे बाहर बैठने को बोला और मोना को अन्दर ले गई.


कुछ देर बाद वो औरत बाहर आई और उसने मुझसे कहा कि मोना को सही से देखना होगा, आप चाहो, तो कुछ देर कहीं घूम आओ.


उसकी इस बात से मुझे कुछ शक हुआ, तो मैंने कहा- मैं एक बार मोना से मिल लेता हूँ … फिर चला जाऊंगा.


फिर बिना उसकी सहमति लिए या उसकी कुछ सुने, मैं अन्दर वाले कमरे में आ गया.

मैंने देखा कि मेरी बीवी की सलवार जमीन पर थी और वह बिस्तर पर लेटी थी. उसके पैरों पर एक चादर पड़ी थी.


मैंने कहा- यह अब क्या है?

वो महिला बोली- इसका कुछ ट्रीटमेंट होना है … आप यहां बोर हो जाएंगे और मुझे भी इस काम में किसी की मौजूदगी दिक्कत करेगी. आप एक घंटे बाद आ जाना.


मैंने चारों तरफ देखा तो उसी कमरे के बगल से एक खिड़की थी, जिससे बाहर का हल्का सा दिख रहा था.

उस खिड़की के पीछे दूसरा मकान था और दोनों मकान के बीच में एक फीट की गली जैसी थी.

मैंने कहा- ठीक है.


मैं बाहर निकल गया और कुछ दूर पैदल चलता रहा.


फिर घूमकर उसी नाली से होता हुआ उस खिड़की तक पहुंच गया. अंधेरा होने के कारण मैं किसी को नहीं दिख सकता था, तो मैंने खिड़की के नजदीक आकर अन्दर झांकने का प्रयास किया.


मैंने देखा कि उस कमरे में एक लड़का बैठा था और वह औरत मोना को सेक्स के लिए मना रही थी.


पहले तो मोना मना करती रही.

फिर उस औरत ने कहा- तेरा शौहर नामर्द है. उसमें और इसमें बड़ा अन्तर है. यह अभी 20 साल का ही है … और तेरा शौहर तो 30 के ऊपर हो गया है.


मेरी बीवी कुछ सोचने की मुद्रा में दिख रही थी.


फिर उस महिला ने जल्दी मचाते हुए कहा- जल्दी कर लो, नहीं तो तेरा शौहर आ जाएगा.

मोना फिर भी मना करती रही.


तो वो औरत बोली- देखो तुम्हारी योनि के अन्दर की एक नस रूकी हुई है, इसके हथियार से वो नस खुल जाएगी और तुमको बच्चा अपने शौहर से ही सेक्स करके होगा. बस तुम फिलहाल इससे अपनी वो नस खुलवा लो, उसके लिए तेज सेक्स की जरूरत है, जो यह करेगा.


मगर इस पर जब मोना नहीं मानी, तो उस औरत ने कहा- रूको, मैं तुमको इसका हथियार दिखाती हूँ.


मेरी बीवी ने कहा- मैं अपने शौहर के बीज से ही बच्चा चाहती हूँ.

इस पर उस महिला ने कहा- हां मैं भी तो यही कह रही हूँ. ये कंडोम पहन क्र ही तुम्हारी नस को खोलेगा.


इसके बाद मोना चुप हुई, तो उस महिला ने उस लड़के की तरफ देखा और उसने सामने खड़े लड़के से पैंट उतारने को कहा.


उस लड़के ने बिना कुछ कहे अपना लंड निकाल लिया. मैंने देखा तो सच में उसका लंड कम से कम 9 इंच से कम नहीं होगा और मोटा भी काफी था. मोना भी उस लड़के के लंड को देखती रह गई.


इधर मेरा लंड 6 इंच से ज्यादा का नहीं है, तो 9 इंच का बड़ा लंड हम दोनों को ही बड़ा अजूबा सा दिख रहा था.


उस औरत ने उस लड़के को इशारा किया, तो वो झट से अपने सब कपड़े उतारकर नंगा खड़ा हो गया.


मोना को देखकर लग रहा था कि जैसे वह सब कुछ भूल गई हो. उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था. वह एकटक उस लंड को देखे जा रही थी.


इसी का फायदा उठाते हुए उस औरत ने मोना के पैरों पर पड़ी चादर हटा दी और वह लड़का मोना की जांघों को सहलाने लगा.

उसने मोना का एक हाथ अपने लंड पर रख लिया.


अगले ही पल मोना का हाथ उसके लंड पर अपने आप चलने लगा. वो लड़का अब मोना के बगल में बैठ गया और मोना को लिप किस करने लगा.


मुझे ये सब देख कर बहुत गुस्सा आ रहा था … मगर मैंने सोचा कि अगर ऐसा करने से बच्चा हो जाए, तो मोना की जिन्दगी खुशगवार हो जाएगी.


तब तक उस लड़के ने बड़ी फुर्ती से मोना की कुर्ती उतार दी. अब मोना सिर्फ ब्रा और पैन्टी में ही थी. वह लड़का लगातार मोना के होंठों को किस कर रहा था.


मोना सिर्फ अपने हाथों में उसका लंड ही पकड़े हुई थी और अपना मुँह पीछे कर रही थी. परन्तु लड़का नहीं मान रहा था और मोना के होंठों और गालों पर चुम्बनों की बौछार सी कर रहा था.


अब उसके हाथ मोना की पीठ पर चल रहे थे और उसने मोना की ब्रा खोल कर हटा दी. उस समय मोना के बूब्स का साइज 34-डी था.


उस लड़के ने मेरी बीवी के दोनों मम्मों को अपने हाथों में पकड़ लिए और उसे किस करने लगा.

मोना चुपचाप मजा लेने लगी थी.


उसने मोना का सहयोग देखा, तो उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसके पूरे बदन पर किस करने लगा. वो मेरी बीवी के मम्मों को दबाते हुए उसका एक दूध पीने लगा.


उसकी चूची चूसने से सिरप सिरप की आवाज मेरे कानों तक आ रही थी. फिर उसने मोना की पैन्टी उतार दी और चूत देखने लगा.


तभी उस औरत ने कहा- ज्यादा देखो मत … अब जल्दी से अन्दर करो. इसका शौहर आता ही होगा.


वो लड़का फिर से मेरी बीवी की खुली चूत पर किस करने लगा.

मोना ने अपने पैर नहीं खोले थे, तो उसने जबरदस्ती पैर खोलने की कोशिश की और पैरों को खोल लिया.

अब वो मेरी बीवी की खुली टांगों के बीच में आकर सैट हो गया और दोनों हाथों से मोना के दोनों मम्मों को दबाने लगा.


फिर उसने कन्डोम पहना और दोनों पैरों को पूरा खोलकर चूत के दरवाजे पर लंड रखकर एक जोर का धक्का मारा, जिससे ऐसा लगा कि पहले ही धक्के में उसका पूरा लंड मोना की चूत के अन्दर चला गया.


अभी मोना चिल्ला पाती, तब तक उस औरत ने मोना के मुँह पर अपना हाथ रख दिया, इससे उसकी चीख गले में ही दब गई.


वो लड़का जोर जोर से मेरी बीवी को चोदने लगा. मुझे सिर्फ यही दिख रहा था कि मेरी बीवी मोना लेटी हुई थी और वह लड़का उसके ऊपर चढ़ कर उसे जोर-जोर से चोद रहा था.


कुछ देर बाद मोना भी उसकी पीठ सहलाने लगी.


उस लड़के की चुदाई की स्पीड देखकर लग रहा था कि वह मुझसे कई गुना ज्यादा तेज चुदाई करता है. कुछ मिनट में ही मोना झड़ने लगी … मगर वो लौंडा नहीं झड़ा.


मोना झड़ कर बिल्कुल शान्त हो गई और उसके लंड की मार झेलने लगी.


करीब 10 मिनट बाद वो लड़का भी झड़ गया और मेरी बीवी के ऊपर ही लेट गया.

फिर उसने अपना बड़ा लंड निकाला और कंडोम हटा दिया. अब तक उसका लंड 9 इंच से 4 इंच का हो गया था.


वह लड़का अपनी पैंट पहन कर शर्ट उठा कर वहां से घर के अन्दर चला गया.


इसके बाद उस औरत ने मोना को जूस पिलाया और कहा- अब उठो … और आज रात को अपने शौहर से सेक्स मत करना. कल अपने घर जाकर ही सेक्स करना.


फिर मैं भी वहां से हट गया और घूमते हुए करीब दस मिनट बाद जब मैं उस महिला के घर पहुंचा, तो मोना हॉल में ही बैठी थी.

मैंने उसे देखा, वो बहुत थकी हुई लग रही थी.


मुझे देख कर मोना बोली- मैं आपका 10 मिनट से इन्तजार कर रही थी.

मैंने कुछ नहीं कहा.


उस महिला की तरफ देखा तो उसने कहा कि इसका इलाज हो गया है. कल से तू दोनों सामान्य जीवन बिता सकते हो.


फिर हम दोनों अपने घर आ गए.


रात को मैंने कहा कि कुछ करना है?

मोना मना करने लगी- नहीं, उन्होंने आज के लिए मना किया है.


मैंने कहा- ठीक है. मगर यह तो बताओ वहां पर क्या क्या किया गया. एक घण्टा काफी होता है.

मोना बोली- कुछ नहीं … अन्दर कोई टेबलेट थी, वह उन्होंने मेरी चुत के अन्दर डाली थी. उसी का असर एक घंटे में पता चलता था.


मैंने कुछ नहीं कहा और उस नौ इंच वाली टेबलेट की याद करते हुए चुदाई की कल्पना करने लगा.


मेरी बीवी ने मुझे अपनी बांहों में लिया तो मैं उससे चिपट कर सो गया.


मैंने धीरे से पैन्टी में हाथ डाल दिया, तो देखा कि मेरी बीवी की चूत काफी खुली हुई थी. मगर मैंने कुछ कहा नहीं.


दूसरे दिन हम लोग मोना की मां के घर से अपने घर आ गए.


रात को मैंने बीवी के साथ सेक्स किया तो ऐसा लगा कि मेरा लंड उसकी चूत में आराम से चला जा रहा था.


जब मोना ने चुदाई की बात मुझे नहीं बताई, तो मैंने मन ही मन सोचा कि अगर बच्चा हुआ, तो ठीक है. नहीं तो मैं अब मोना को पूरा खोलकर ही रहूँगा.


फिर मैंने अपने एक सबसे खास दोस्त से यह बात शेयर की … और उससे मोना को पटाने और चोदने के लिए कहा.

पहले तो वह मना करने लगा, फिर मान गया.


मुझे मोना से एक तरह से नफरत होने लगी थी कि अगर वह यह सब काम मेरे सामने करती … तो मुझे दुख नहीं होता.

उस नफरत को प्यार में बदलने के लिए ही मैंने अपने दोस्त की सहायता ली ताकि अब यह काम मेरे सामने हो, तो कम से कम मुझे भी यह लगे कि हां मोना ने मुझसे कुछ नहीं छिपाया.

ट्रक ड्राइवर की प्यासी बीवी - truck driver's thirsty wife

 ट्रक ड्राइवर की प्यासी बीवी -  truck driver's thirsty wife

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



मेरा नाम संजय है, उम्र 24 साल, मैं जिला होशियारपुर पंजाब का रहने वाला हूं. अंतर्वासना पर यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.

मैं अपने बारे में कुछ नहीं बताना चाहता क्योंकि सभी लोग अपने बारे में कुछ ना कुछ बताते रहते हैं. ऐसे कहानी का मजा नहीं आता क्योंकि आधा समय तो उनके बारे में पढ़ते पढ़ते ही निकल जाता है.

तो चलिए आते हैं सीधा मेरी कहानी ‘ट्रक ड्राईवर की बीवी की चुदाई’ पर.

यह मेरी कहानी नहीं है मेरे साथ जो हुआ है मैं वही आपको बताना चाहता हूं. यह मेरी आपबीती है.


बात एक या डेढ़ साल पहले की है मैं चंडीगढ़ में अकेला रहता था और किसी ना किसी को ढूंढता रहता था अकेलेपन से इतना ज्यादा दुखी हो गया था कि किसी ना किसी के साथ रहने के लिए हमेशा ललचाया रहता था.


1 दिन किसी ने मेरे को वॉइस चैट के बारे में बताया. तभी मैंने वॉइस चैट में कॉल किया और पहले तो ऐसे ही कोई ना कोई आता रहा, कभी कोई लड़की कभी कोई लड़की. सभी मतलब ऐसे ही टाइम पास के लिए वॉइस चैट यूज करते रहते हैं.


तभी मेरी बात एक लड़की से हुई. उसका नाम अर्चना था. उससे मेरी काफी लंबी बात हुई. उसको मैंने अपना नंबर दिया. मेरे को उम्मीद नहीं थी कि उसका मैसेज आएगा.


लेकिन एक-दो दिन बाद उसका व्हाट्सएप पर मेरे को मैसेज आया. उसने हाय लिखा.

मैंने उनको पूछा- आप कौन हो?

उन्होंने जवाब दिया कि जिसको आपने अपना नंबर दिया मैं वही हूं.


तो मेरे को कुछ समझ नहीं लग रहा था कि यह है कौन?

मैंने उनसे फिर पूछा कि मैंने किस को अपना नंबर दिया? मैंने तो किसी को अपना नंबर नहीं दिया. आप आप कौन हो?


तभी उसने बताया कि मैं अर्चना हूं. मेरी आपसे बात हुई थी 2 दिन पहले वॉइस चैट पर.

जब मैंने यह सुना तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.


फिर उसने मेरे को कॉल किया. हमने काफी लंबी बात की.

मैंने उसको पूछा कि तुम कहां पर रहती हो?

तो उसने मेरे को बताया कि मैं मोहाली में रहती हूं और मैरिड हूं.

मैंने उसको पूछा कि उसके पति क्या करते हैं?

तो उसने बोला कि उसके पति एक ड्राइवर हैं और ज्यादा टाइम वह बाहर ही रहते हैं.


मैं समझ गया कि बात तो बन ही जाएगी.


मैंने उसकी थोड़ी सी तारीफ की- आप बहुत अच्छे हो. आपकी आवाज बहुत ही अच्छी है. मैं आपसे मिलना चाहता हूं. क्या आप मेरे से मिलने के लिए तैयार हैं?

वह पहले तो थोड़ा हिचकिचाई मगर बाद में वह मान गई.


अगले दिन जब हम लोग मिले तो मैंने उसको देखा वह क़यामत लग रही थी. उसने पंजाबी सूट पहना हुआ था, वह एकदम ही अलग दिख रही थी सबसे. उसका बदन बहुत ही गठीला था.


जब मैं उसको मिला तो मैं उसको देखता ही रह गया. मेरी नजर उसके ऊपर से हटाए भी नहीं हट रही थी.


मैंने उससे उसका हालचाल पूछा. फिर हम लोगों ने इधर-उधर की थोड़ी सी बातें की. उसका चेहरा देखकर लग रहा था कि शायद उसको यह जगह पसंद नहीं है. या शायद फिर वह डर रही थी.

उसकी नजरें झुकी हुई थी. वह मेरे से नजरें मिलाकर बात भी नहीं कर पा रही थी.


मैंने उसको पूछा कि क्या हुआ?

तो उसने बोला- मुझे यहां पर कुछ ठीक नहीं लग रहा है. कहीं और चलते हैं.


हम वहां से उठे और एक पार्क में जाकर बैठ गए.


हम लोग पार्क में पहुंचे तो वहां देखा के प्रेमी जोड़े बैठे हुए हैं. मैंने उसकी ओर देखा. वह भी मेरी तरफ से कर मुस्कुराने लग पड़ी.


हम लोग एक साइड में बैठ गए. थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें की. बातों बातों में मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया. वह थोड़ी सी झिझक गई. उसने मेरा हाथ एकदम से अपने हाथ से ऊपर से हटा दिया और मेरी तरफ देखकर हल्की सी मुस्कुराने लगी.


आसपास में माहौल पूरा बना हुआ था. प्रेमी जोड़े एक दूसरे को चुम्बन कर रहे थे और गले मिल रहे मिल रहे थे.


ऐसे में मैंने उसके साथ थोड़ी शरारती बातें की तो वो भी अब मेरे साथ थोड़ा खुलने लगी.

मैंने अचानक से उसको बोला- वह देखो उधर क्या चल रहा है.

तो जैसे ही उसने उधर देखा तो मैं अपना मुंह उसके मुंह के पास ले आया. उसने जैसे ही मुंह मेरी तरफ घुमाया तो मैंने उससे किस कर ली.


वो अचानक हुई इस हरकत से डर गई और वहां से उठ गई. वह वहां से उठ कर जाने लगी मगर मैंने पीछे से उसका हाथ पकड़ा. लेकिन वह नहीं रुकी. उसने अपना हाथ खींच कर मेरे से छुड़वा दिया और वहां से चली गई.

मैं यह सोचने लगा के अभी हाथ में आई हुई चीज ही मैंने गंवा दी. मैं यह सोच सोच कर बहुत दुखी हो रहा था.

थोड़ी दूर जाकर उसने पीछे मुड़कर देखा लेकिन मैं उसके चेहरे के भाव को समझ ही नहीं पाया कि वह कहना क्या चाह रही है.

वह धीरे-धीरे वहां से चली गई लेकिन मैं उसके पीछे नहीं गया.


मैं वहां से उठकर सीधा अपने घर चला गया और अपने आप को कोसने लगा कि यह मेरे से आज क्या हो गया.


ऐसे ही दो-तीन दिन निकल गए. ना तो मैंने उसको कोई मैसेज किया … ना ही उसने मेरे को मैसेज किया. और ना ही कॉल पर बात हुई.


दो-तीन दिन बाद अर्चना का एक मैसेज आया- हेलो क्या हाल है?

मैंने उसका रिप्लाई देते हुए कहा- मैं ठीक हूं, आप बताओ कैसे हो?

तो उसने मेरे को बोला- आप जैसा छोड़ गए हो, वैसी ही हूं.


मैंने उसको सॉरी बोला. मैंने बोला- मैं उस बात के लिए बहुत शर्मिंदा हूं. कृपया मुझे माफ कर दें.

उसने पूछा- किस बात की माफी?

तो मैं बोला- उस दिन जो पार्क में हुआ था, उस बात के लिए!

अर्चना बोली- ऐसी छोटी-मोटी चीजें तो दोस्तों के बीच चलती रहती हैं.


यह सुनकर मेरी सांस में सांस आई. मेरी थोड़ी सी हिम्मत बढ़ गई.

मैंने उससे पूछा- तो दोस्तों को भी सिर्फ ऐसा ही चलता है या इससे ज्यादा भी कुछ चल सकता है?

उसने हां में जवाब दिया और कहने लगी- जैसा आप चाहें, वैसा चल सकता है.


मैंने उसको फिर से मिलने के लिए कहा लेकिन वह बोली- हम बाहर नहीं मिल सकते क्योंकि बाहर मेरे को अच्छा नहीं लगता.

तो मैंने उसे कहा- हम बाहर नहीं मिलेंगे तो कहां मिलेंगे?


उसने मेरे को कहा कि मैं उसके घर आ जाऊं. उसने मेरे को अपना एड्रेस दिया.

मैंने उसको पूछा कि उसके पति कहां पर हैं तो उसने जवाब दिया कि वे ड्राइवर हैं. वह पता नहीं कब वापस आएंगे. कभी महीना लग जाता है, कभी 2 महीने!


अगले दिन तैयार होकर मैं उसके घर गया. मैंने उसके घर के बाहर जाकर डोरबेल बजाई.

अर्चना ने दरवाजा खोला.

मैंने उसको देखा तो देखता ही रह गया.

उसने सफ़ेद रंग का सूट पहना हुआ था.


मैंने उसकी तारीफ की- आप बहुत ही सुंदर लग रही हो.

वह थोड़ा सा मुस्कुरा दी.


उसने मेरे को अंदर बिठाया और मेरे को चाय पानी पूछा.

तो मैंने उसको कहा- आप थोड़ा सा पानी पिला दीजिए.

वह एक गिलास पानी लेकर आई और वहां पर खड़ी हो गई.

मैंने उसको अपने पास बैठने के लिए कहा तो वह मेरे पास आकर बैठ गई.


ना तो वह कोई बात कर रही थी, ना ही मैं कोई बात कर रहा था.


वो एकदम से उठी, उसने जाकर टीवी ऑन कर दिया और रिमोट मेरे को पकड़ा दिया, बोली- जो आप देखना चाहते हो, देख सकते हो.


मैं टीवी के चैनल चेंज कर रहा था और तभी सोंग्स चल पड़े.

उसने कहा- कि यह चलने दो, अच्छा लग रहा है.

मैंने सॉन्ग चलने दिए और उसने मेरे से रिमोट लेकर थोड़ी सी वॉल्यूम बढ़ा दी.


वह एकदम मेरी तरफ देखे जा रही थी जैसे कि मुझे खा ही जाएगी.

मैंने उसको कहा- मेरे को यह सॉन्ग नहीं सुनना है.

उससे रिमोट लेने के बहाने मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.


वह मुस्कुराने लगी.

मैं समझ गया कि सिग्नल ग्रीन है, मैंने उसके हाथ पर थोड़ा सा अपना हाथ चलाया. उसने आंखें बंद कर ली.


मैं उसके ऊपर गया और उसको किस कर दी. उसने भी मेरा पूरा साथ दिया.


मैं वहां से उठाकर उसको बेडरूम में ले गया, उसको वहां बेड पर लिटाया और वहां उसको 5 मिनट किस किया. फिर मैंने वहां उसके सारे कपड़े खोले.

फिर मैंने उसको कहा- तुम मेरे कपड़े खोलो.


उसने मेरे कपड़े खोले. मेरा लंड पूरा रॉड बना खड़ा था तो जब उसने मेरी चड्डी उतारी तो मेरे लंड ने ऊपर को उठ कर ऐसे झटका मारा जकिसे वो अर्चना को सलामी दे रहा हो.

यह देख कर वह हंसने लग पड़ी.

जवाब में मैं भी हंस दिया.

तब मैंने अपनी पैंट की जेब से कंडोम निकाला और उसे पकडाते हुए कहा- लो इसे मेरे लंड पर चढ़ा दो.

लेकिन उसने मना कर दिया.

मुझे थोड़ा सा अजीब लगा और थोड़ा गुस्सा भी आया और मैंने कंडोम लगाया ही नहीं.


मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया. कभी मैं उसके होंठ चूसता, कभी गर्दन, कभी बूब्स!

ऐसे धीरे धीरे मैं उसके पेट की तरफ बढ़ा और उसकी चूत में अपना मुंह लगा दिया और चूत को चाटने लगा.


कुछ ही पल बाद वो अपने कूल्हे उछालने लगी. उसे बहुत मजा आ रहा था. वो ऐसे कर रही थी जैसे काफी टाइम से उसकी चूत अनछुई पड़ी हो, उसकी चुदाई नहीं हुई हो.


मैंने उसकी टांगें खोली और उसकी जाँघों के बीच में आ गया. मैं लंडे उसकी चूत में डालने ही वाला था कि मुझे ख्याल आया कि अगर मेरा इसकी चूत में डिस्चार्ज हो गया और इसे गर्भ रह गया तो बेचारी परेशान हो जायेगी.

मकिने कंडोम उठा कर खुद ही अपने लंड पर चढ़ा लिया.


तब मैंने धीरे से अपने लंड का सुपारा उसकी चूत के मुंह में लगाया और धीरे से धक्का मारा.

उसकी चूत थोड़ी सी टाइट थी तो मेरा लंड अंदर नहीं गया.

अर्चना फिर हंसने लगी जैसे मुझे अनाड़ी समझ रही हो.


अगला धक्का मैंने जोर से लगाया जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया. उसे शायद कुछ दर्द का अहसास हुआ, उसके मुख से निकला- उम्म्ह… अहह… हय… याह…

व सिसकारियां भर रही थी.

मुझे भी मजा आ रहा था. मैं ऐसे ही धक्के लगाता रहा और वह उफ आह आह उह करती रही.


उस दिन मैंने अर्चना को दो बार चोदा.


उस दिन के बाद जब भी हमें मौका मिलता है, हम दोनों चुदाई करते हैं

बीवी के पुराने आशिक को बुला के थ्रीसम किया - Called wife's old lover and had a threesome

 बीवी के पुराने आशिक को बुला के थ्रीसम किया - Called wife's old lover and had a threesome

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



दोस्तो, मेरा नाम आशीष है. मेरे साथ एक लड़की पढ़ती थी जिसका नाम निभा था. मादरचोद बड़ी ‘झक्कास’ माल थी. एक साल की पढ़ाई के दौरान मैंने उसे पटा लिया और शादी कर ली. जब मादरचोदी को सुहागरात के दिन चोदा तो उसकी सील खुली हुई थी.


‘किसने खोली तुम्हारी सील??’ मैंने पूछा.


साली मादरचोदी.. पहले तो बड़ा नाटक कर रही थी, फिर बड़े मुश्किल से बताया हरामिन ने कि अपने बुआ के लड़के से फंसी थी.


‘तो घर का आदमी ही मेरी मिठाई जूठी कर गया?’


निभा ने ‘हाँ’ में सिर हिलाया.


मैंने सोचा कि जब मादरचोदी.. पहले से ही चुदवा चुकी है तो काहे की बीवी. इसकी इतनी चूत मारो कि फट जाए.


मैं उसकी जमकर चुदाई करने लगा.

उसमें कहीं से भी बीवी वाली बात नहीं थी, मेरे मन में गुस्सा था कि जूठी चूत मारनी पड़ रही है, इसे मैं इज्जत क्यों दूँ.


एक दिन मैं सोचने लगा कि क्यों न निभा के पुराने यार यानी उसकी बुआ के लड़के को बुलाया जाए और दोनों मिल कर इस कुतिया की चुदाई करें, क्यों न उसे रंडी बना कर चोदा जाए.


मेरे डैडी और मम्मी बहुत पहले ही मर चुके थे, घर में सिर्फ मैं और निभा ही रहते थे.


‘क्यों, अपने यार से मिलना है..??’ मैंने एक दिन शरारत करते हुए पूछा.


वो कुछ नहीं बोली, मैं समझ गया कि मादरचोदी अभी भी पुराना लंड खाना चाहती है.


‘शनिवार की रात को उसे फोन करके बुला लेना, दोनों साथ में होंगे तो तुझे रंडी बना देंगे. ऐसा चोदेंगे कि कभी नहीं भूलेगी.’


निभा को तो जैसा मन की मुराद पूरी करने वाला मिल गया था, उसका चेहरा खिल उठा.


मैं जो कर रहा था.. वो क्या था?? क्या ये पाप था?


‘निभा.. तेरी-मेरी शादी हो चुकी है और नियमों के मुताबिक दूसरे के साथ सोना पाप है.. रोकना चाहती है, तो मना कर दे.. मरने के बाद तू अलग जाएगी और मैं अलग.. अभी सोच ले.’


‘अपनी बुआ के लड़के से तो मेरा पहला प्यार हुआ था.. उसे कैसे भूलूँ?’


‘ठीक है….बुला ले.’


रात के 11 बजे का हम दोनों इंतजार करने लगे.


आखिर वो पल्सर से आया. साला मुझसे 1 या 2 इंच लम्बा होगा. देखने में कोई बहुत स्मार्ट भी नहीं था.

तो यह था, जिसने मेरी बीवी की सील तोड़ी है.. मैंने सोचा.


उसका नाम सुनील था. निभा ने उसे सब बता दिया था कि समर को सब पता चल गया है.

दोनों आज साथ में उसे चोदेंगे, यह भी बता दिया था.


‘हाय..’ मैंने हाथ मिलाया.


निभा मादरचोदी उसे देखने ही फूल की तरह खिल गई थी.


मैं और सुनील साथ में बैठ कर बातें करने लगे.

सुनील की शादी हो चुकी थी.


मैं काम की बात करना ठीक समझा.


‘तुम्हारी बीवी की सील बंद थी??’ मैंने पूछा.


‘नहीं, खुली थी.’ उसने कहा.


‘अच्छा..!’ मुझे ताज्जुब हुआ.


‘किसने चोदा था उसे पहली बार??’


‘उसके साथ पढ़ता था…उसी ने..’


‘अरे मादरचोद… आजकल सील बन्द लड़कियाँ तो बड़ी दुर्लभ बात हो गई है.


निभा को साथ में चोदा जाए??’ मैं मुआयना लेते हुए पूछा.


सुनील तो खिल पड़ा.


‘देखो, वैसे तो मैं मिल-बाँट कर खाने वाला आदमी नहीं हूँ, पर तुमने इसकी सील पहले ही तोड़ दी है, इसलिए अब वो नियम इस पर लागू नहीं है.’


तीनों ने चाय पी.


‘सुन निभा… आज तुम्हें रंडी बनाएंगे..’


निभा चुप रही.


जो लड़की एक से ज्यादा से चुद जाती है… वही तो रंडी होती है.


घर का बड़ा हाल खाली थी और बिस्तर तैयार था.


मैंने कमरे की बत्तियाँ बुझा दीं और दो मोमबत्ती जला दीं.


सुनील अपने कपड़े उतारने लगा.


निभा साड़ी में थी.

मैंने भी अपनी शर्ट उतार दी और बनियान अंडरवियर में आ गया.


निभा ने लाल रंग की गोल बड़ी बिन्दी लगा रखी थी, उसे हम लोगों ने बिस्तर में खींच लिया.


‘तू इसे गरम कर..’ मैंने कहा.


सुनील तो साली को पहले ही खा चुका था, मादरचोदी का पेटीकोट उठा दिया और बीच वाली ऊँगली उसकी बुर में डाल दी.

इतनी जोर से अन्दर-बाहर किया कि निभा मादरचोदी चीख उठी.


हाल में हल्की-हल्की दोनों मोबत्तियों की रोशनी बस थी. ज्यादा रोशनी में मुझसे साली की चुदाई न हो पाती.


निभा ने झांटें भी बना ली थीं.


फिर सुनील ने रंडी के मुँह में लौड़ा दे दिया, वो रण्डियों की तरह चूसने लगी.


‘आज ये रंडी बनेगी..’ मैंने कहा.


फिर मैंने अपना लौड़ा उसके मुँह में दे दिया और निभा चूसने लगी.


‘पहले तू चोद ले..’ मैंने कहा.


सुनील ने निभा की तुरन्त ही चुदाई शुरू कर दी.


साली बड़े आराम से लण्ड खा रही थी.


‘देखा….बन गई आज ये रंडी..’ मैंने हँसकर चिल्लाया.


सुनील ने उसकी मस्त चुदाई की और चूत में ही झड़ गया.

मैंने सोचा कि मादरचोदवाली को थोड़ा सांस लेने दो.. कहीं मर-मरा न जाए.


लगभग 15 मिनट बाद मैंने उसकी चुदाई शुरू की.


‘मरेगी तो नहीं साली??’ मैंने एक बार पूछा.


निभा कुछ नहीं बोली.


मैं जान गया रंडी और लण्ड खाना चाहती है.


फिर मैंने उसकी बुर पर लंड रखा और कस कर चोदा.


‘बन गई… बन गई….ये आज रंडी..!’ मैं जीत के स्वर में बोला.


15 मिनट के बाद मैं भी झड़ गया. मोमबत्ती अभी भी जल रही थी.


‘क्यों निभा मजा आया??’ मैंने पूछा


‘हाँ..’ वो बोली.

उस रात उसे मैंने और सुनील ने पूरी रात चोदा था, जब मैं थक जाता सुनील उसे चोदता, जब सुनील थक जाता तो मैं निभा को चोदता, उसके मुँह में लंड भी हमने सैकड़ों बार दिया था.


उसके बाद जब मन करता था हम दोनों सुनील को बुला लेते थे और निभा को रंडी बना देते थे.

शादी के बाद भी बॉयफ्रेंड प्रकाश का लिया - Even after marriage

 शादी के बाद भी बॉयफ्रेंड प्रकाश का लिया - Even after marriage

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


हैलो फ्रेंड्स, मैं जानकी एक बार फिर से उपस्थित हूँ अपनी नई सेक्स कहानी के साथ. मेरी उम्र 25 साल है, नवम्बर में ही मेरी शादी हुई है, मेरे पति अमेरिकन हैं. शादी के बाद ही मैं अमेरिका चली गई थी.




अब मैं मुख्य घटना पर आती हूँ, मेरी शादी को 20 दिन ही हुए थे और हम दोनों हर रात चुदाई का मज़ा भी ले रहे थे. उसी समय मेरे पति को सर्दी और बुखार हो गया, इस वजह से उन्होंने और मैंने सेक्स से थोड़ा दूरी बना ली. पर उनकी तबियत थोड़ी और बिगड़ गई.




लगभग एक महीने में उनकी तबियत ठीक हुई, पर बुखार की वजह से उनमें थोड़ी कमजोरी आ गई थी. हालांकि इस दौरान इन्होंने काम पर जाना बन्द नहीं किया था क्योंकि वो भी बहुत जरूरी है.




इधर दो महीने से हम दोनों ने भी सेक्स नहीं किया था. मैं भी सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी और मेरे हस्बैंड भी. लेकिन अभी पूरी तरह से स्वास्थ्य ठीक न हो पाने के कारण हम दोनों ने अभी सेक्स करना ठीक नहीं समझा.




इस तरह कुछ दिन और निकल गए, अब मुझे भी अपने देश वापस आना था. पर कुछ डाक्यूमेंट्स की प्रॉब्लम हो गई थी, इसलिए वापस आने में समय लग गया. जब डाक्यूमेंट्स प्रॉब्लम सॉल्व हो गई तो उसके बाद मैं इंडिया आ गई.




अभी कुछ ही दिन पहले मैं इंडिया आई हूँ और सबसे पहले मैं अपने पेरेंट्स के पास आई, जहाँ वो रहते हैं.




कुछ दिन बाद मेरे दूसरे घर जहाँ मैं रहती हूँ, वहां गई. घर पर पहुँचते ही मुझे मेरी किरायदार मिली, जो अकेले ही रहती हैं. वो उस वक्त कहीं पर जा रही थी.




उसके बाद मैंने कुछ देर रेस्ट किया और रात प्रकाश के पास गई.. चिंटू भी उनके साथ ही बैठे थे. उन्हें देखते ही मेरे पूरे बदन में आग लग गई, पर खुद को मैंने सम्भाला. प्रकाश भी बहुत हट्टे कट्टे दिख रहे थे. मुझे भी चुदाई की इच्छा हो रही थी. मैंने उनसे चुदाई की बात भी की, पर उन्होंने अगले दिन बताया कि वो 4-5 दिन के लिए गोवा जा रहे हैं, चिंटू का कोई काम है.




मैंने भी साथ चलने के लिए थोड़ी ज़िद की और थोड़ा मनाया भी, उन्होंने भी हाँ कह दिया. चिंटू ने जल्दी ही फोन लगाकर तैयार होने के लिए बोल दिया. उन्हें कोई जल्दी वाला काम था.




मैंने सामान की पैकिंग तो ही कर ली थी, उसके बाद हम घर से गोवा के लिए चल दिए. हमें शाम को ट्रेन से जाना था तो हमने खाने का पूरा बंदोबस्त कर रखा था. ट्रेन में कुछ देर बाद टीसी भी आ गया, टिकट देखने के बाद टीसी चला गया और चिंटू और प्रकाश थकान की वजह से जल्दी सो गए.



मैं भी प्रकाश के ऊपर ही सो गई क्योंकि मेरा लगाव भी प्रकाश से भी ज्यादा है. लेकिन बर्थ छोटी थी, जिस वजह से प्रकाश को थोड़ी सी समस्या हो रही थी. चिंटू ऊपर की बर्थ पर सो रहा था, जो मुझे मिली थी, क्योंकि और कोई भी आने वाला नहीं था तो नीचे की बर्थ मैंने ले ली. पर मुझे अभी नींद नहीं आ रही थी और प्रकाश भी मेरी टी-शर्ट को ऊपर करके मेरी नंगी पीठ को सहला रहे थे. पता नहीं कब प्रकाश को नींद आ गई, जब वो सो गए तो मैं भी मेरी बर्थ पर जाकर सो गई.




सुबह जल्दी ही हमारी नींद खुल गई, जब हम गोवा पहुंचे, उस समय सुबह बज रहे थे. सबसे पहले हम रूम पर पहुंचे जो चिंटू के ही दोस्त का था और जहाँ मैं पहले भी बहुत बार आई हूँ और चुदी भी हूँ.




फ्रेश होने, नहाने और नाश्ता करने के बाद हम तीनों ही चिंटू के काम के लिए निकल पड़े. चिंटू का काम होने के बाद होटल में हम खाना खाने के लिए रुके. खाना खाने के बाद हम तीनों फिर से रूम में पहुंचे. पर सुबह उठने से लेकर ही मुझे तो सिर्फ चुदाई की ही याद आ रही थी, पता नहीं ये दोनों मेरी चुदाई कब करेंगे.




जैसे ही हम रूम में पहुँचे मैं कपड़े बदलने लगी, जब कपड़े बदल लिए तो उन्होंने मुझसे दरवाजा लगाने के लिए बोला. जैसे ही मैं दरवाजा लगाकर आई तो तुरन्त ही प्रकाश ने मुझे कसकर पकड़ा और किस करने लगे.




मैं यह हमला सम्भाल नहीं पाई, तभी चिंटू ने भी मेरी लोअर और पेंटी नीचे कर मेरी गांड को चाटना शुरू कर दिया.




कुछ देर बाद मैं भी नॉर्मल हो गई और मैंने खुद ही मेरी टी-शर्ट और ब्रा निकाल दी. चिंटू को, जो मेरी गांड को चाट रहा था. उनको खड़ा किया और किस करने लगी. इस दौरान मैंने प्रकाश से अपनी चुदासी चूत चटवाई. मैं ये सब खड़े खड़े ही कर रही थी.




मैं कुछ देर में ही बहुत गर्म हो गई, तभी उन्होंने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दिया और दोनों मेरे मम्मों को चूसने लगे.




तभी मैंने दोनों की टी-शर्ट को निकाल दिया और पेंट उन दोनों ने खुद ही निकाल दी.



उन दोनों के लंड को एक साथ मैंने हाथ में ले लिया. लगभग 4 महीने बाद उन दोनों के लंड को देखा और छुआ, जिससे मुझे एक अलग ही सुकून मिल रहा था.




पहले तो मैंने इन दोनों के लंड को चूमा और तुरन्त ही लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी क्योंकि मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था. एक तरफ मैं दोनों के लंड चूस रही थी, तो दूसरी तरफ ये दोनों मेरे दोनों मम्मों को मसल रहे थे. उन्होंने मेरे दोनों मम्मों मसल मसल कर एकदम लाल कर दिए. जब उनके लंड बिल्कुल सख्त हो गए तो उन्होंने खुद ही एक साथ मेरी चूत और गांड में लंड डाल दिया.




प्रकाश ने कहा- आज 4 महीनों की कमी एक बार में ही पूरी करेंगें.




मैं कुछ नहीं बोली और उन्होंने धक्के लगाने शुरू कर दिए. दो महीने बाद मेरी चुदाई हो रही थी तो मेरी चूत और गांड भी थोड़ी सिकुड़ गई थी और थोड़ा दर्द भी हो रहा था, पर मज़ा भी बहुत आ रहा था.




मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सीत्कार कर रही थी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह आहह्ह्ह चोदो मुझे.. और चोदो फाड़ दो.. मेरी चूत और गांड को.. चार महीने से तुम्हारे लंड की प्यासी हूँ.. आहह्ह्ह यईआह.. उह्ह्म्म्माआ..



धीरे धीरे उन्होंने धक्के लगाने तेज कर दिए. तेज धक्कों के साथ मेरा दर्द भी बढ़ रहा था, तो मैंने चिंटू के सीने को बिल्कुल मम्मों की तरह कसकर पकड़ लिया.




उसके मुँह से सीईईईईई की आवाज निकली तो मैंने उन्होंने और भी तेज मसलना शुरू कर दिया.




अब उसने भी तेज धक्के लगाना शुरू कर दिए. मेरा दर्द और मजा दोनों बढ़ रहे थे, पर दर्द होने की वजह से आँसू भी निकल रहे थे.




मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि थोड़ी देर में ही झड़ गई, मेरे झड़ते ही चिंटू ने प्रकाश से जगह बदलने के लिए बोला.




उन दोनों ने मेरी चूत से और गांड से लंड को बाहर निकाला और दोनों ने ही एक एक करके मेरे मुँह को चोदा. पहले प्रकाश ने मेरे मुँह को चोदा और उसके बाद चिंटू ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया. चिंटू का लंड मेरी चूत के रस से गीला हो रहा था तो उसके लंड को चूसने में अलग ही स्वाद आ रहा था, पर मज़ा भी आ रहा था.




कुछ देर बाद प्रकाश ने अपने लंड को मेरी चूत में डाला और फिर चिंटू ने गांड में पेल दिया.




अब एक बार फिर से मेरी चूत और गांड एक साथ चुदने के लिए तैयार थी और दोनों ने ही धक्के लगाने शुरू कर दिए.




मैं एक बार फिर से सीत्कारने लगी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह.. आआ आअह्हह्ह ह्ह चोद दो.. मेरी चूत.. मेरी दो महीनों की प्यास भी बुझा दो, बहुत तड़पी थी तुम दोनों के लंड के लिए.. आअह्ह्ह आहह्ह्ह..




तभी कुछ देर बाद प्रकाश ने चिंटू से धक्के बन्द करने के लिए कहा. चिंटू ने भी वैसा ही किया. तभी प्रकाश और चिंटू ने मुझे कसकर पकड़ लिया और प्रकाश अचानक तेज स्पीड से मेरी चूत को चोदने लगे. मेरी जैसे ही दर्द से चीख निकली, चिंटू ने तुरन्त मेरे मुँह को बन्द कर दिया, जिससे मेरी चीख ज्यादा नहीं निकल पाई.



कुछ देर ऐसे ही मुझे बहुत स्पीड के साथ चोदते रहे, बीच बीच में उनका लंड भी फिसला, पर उन्होंने फिर से मेरी चूत में डालकर मेरी चूत को चोदा.



जब तक मैं दूसरी बार नहीं झड़ी, तब तक प्रकाश मुझे ऐसे ही चोदते रहे. बीच बीच में चिंटू भी मेरी गांड को चोद रहा था.




जब मेरी चूत ने दूसरी बार पानी छोड़ा उसके बाद दोनों ने ही उनके लंड को बाहर निकाल लिया.. अब मुझे भी ठंडक मिल रही थी. उसके बाद प्रकाश मेरी चूत को चाटने लगे, जो मेरी चूत से रस निकल रहा था, इन्होंने उसे भी चाट लिया.




चिंटू मुझे किस करने लगा. पता नहीं क्यों जब भी प्रकाश मेरी चूत को चाटते हैं, मुझे तो जैसे जन्नत मिल जाती है. उनके चूत चाटने के साथ साथ मैं भी एक हाथ से चिंटू के बदन को सहला रही थी और दूसरे हाथ से मेरी चूत को ऊपर से ही मसल रही थी. साथ ही ये दोनों मेरे एक एक चूचे को भी मसल रहे थे.




तभी चिंटू ने मेरे हाथ से अपने लंड को अलग किया और मेरे जिस दूध को वो मसल रहा था, उसे पीना शुरू किया और फिर मुझे किस करने लगा.




तभी अचानक ही मेरी कमर अपने आप ऊपर हो गई और मेरी चूत ने पानी निकाल दिया. मैं सिसकारी भी नहीं निकाल पाई क्योंकि चिंटू ने मुझे और मेरे होंठों को उनके होंठों से अलग ही नहीं होने दिया. मेरे झड़ने के बाद भी प्रकाश मेरी चूत को चाटते रहे और फिर से मेरी चूत का पानी भी पी गए.




उसके बाद चिंटू ने प्रकाश को धक्का देकर अलग किया, यह देखकर मुझे हँसी आ गई और प्रकाश भी मुस्कुरा दिए.




तभी मैंने प्रकाश को मेरी तरफ खींचकर उन्हें किस करने लगी और चिंटू से मेरी चूत को चटवाने लगी.




पर चिंटू मेरी चूत को चूसने और चाटने के साथ साथ अपनी उंगली से मेरी चुत को चोद भी रहा था. चिंटू भी आज मेरी चूत के साथ खेल ज्यादा रहा था.




कुछ ही देर में मैं एक बार और झड़ गई और इस बार चिंटू भी मेरी चूत का सारा रस पी गया. दोनों ही चूत का रस आसानी से पी जाते हैं, ये उनके लिए कोई नई बात नहीं है.




तभी चिंटू ने मेरी चूत को चाटना छोड़ दी और अपने लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया. मैं उसके लंड को सहला रही थी.




तभी मैंने प्रकाश को भी, जो मुझे किस कर रहे थे, उन्हें अपने से अलग किया और उनके भी लंड को सहलाने लगी. उन दोनों के लंड अभी आधे ही खड़े हुए थे तो मैं उनके लंड को बारी बारी मुँह में लेकर चूस रही थी.



तभी चिंटू मेरा मुँह पकड़ कर मेरा मुँह चोदने लगा. उसने अपने लंड से 20-25 धक्के लगाए होंगे कि अपना लंड मेरे मुँह से खींच लिया. इसके बाद प्रकाश भी मेरे मुँह को चोदने लगे.




बहुत देर तक यह सिलसिला चलता रहा. पहले 20-25 धक्के लगाकर चिंटू मेरे मुँह को चोदता, उसके बाद प्रकाश 20-25 धक्के लगाकर मेरे मुँह को चोदने लगते.



बहुत देर तक उनके इस तरह चोदने से मेरा मुँह भी दुखने लगा. मैंने उन्हें लंड को चूत में डालने के लिए कहा, तो उसके बाद वो फिर से मुझे गर्म करने में लग गए और 5 मिनट में ही मेरी चूत में और ज्यादा आग लगने लगी.




उसके बाद मैंने फिर से उनके कहने पर थोड़ी देर उनके लंड को चूसा. फिर उन्होंने भी देर नहीं की और चिंटू ने मुझे उनकी गोदी में उठा कर अपने लंड को मेरी चूत में फंसाने लगा. पर उसका लंड बार बार मेरी चूत से फिसल रहा था, तो फिर मैंने ही उसके लंड को पकड़कर मेरी चूत में डाला और फिर धीरे धीरे पूरे लंड को अपनी चूत के अन्दर तक डाल लिया.




जब चिंटू का लंड मेरी चूत के अन्दर पहुँच गया, उसके बाद प्रकाश ने भी अपने मोटे लंड को मेरी गांड में अन्दर तक पेल दिया और अब दोनों मुझे पकड़कर मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.




यह पहली बार था कि जब इस तरह से दो लंड मेरी चूत और गांड को चोद रहे थे. इस पोजीशन में उनके पूरे लंड भी मेरी चूत और गांड में अन्दर तक जा रहे थे. मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.




कभी वो दोनों मुझे उछाल उछाल कर मेरी चूत और गांड की चुदाई करते, तो कभी मुझे कसकर पकड़कर खुद धक्के लगा कर मेरे दोनों छेदों को ठोकते.




अब मैं भी थोड़ी थक चुकी थी और थोड़ी ही देर में झड़ने वाली भी थी. कुछ पलों बाद मैं झड़ भी गई और मेरी पकड़ भी ढीली हो गई.




तभी चिंटू ने प्रकाश से कहा- मुझे भी तो इसकी गांड का मजा लेने दो, तुम अकेले ही इसकी गांड का मजा ले रहे हो.. जरा तुम भी इसकी चूत को छोड़ कर मजा ले लो.


तभी मैंने भी कहा- हाँ चिंटू सही बोल रहा है. मेरी चूत भी तुम्हारे लंड की प्यासी हो रही है, प्लीज इसकी आप भी प्यास बुझा दो न..!




प्रकाश ने भी बिना कुछ बोले मुझे चिंटू की गोद से उनकी गोद में ले लिया और उनके लंड को मेरी चूत में डाल दिया. मेरी चुत तो भरपूर गीली थी, इस वजह से उनका लंड आसानी से मेरी चूत में अन्दर तक चला गया.




वहीं चिंटू ने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाते ही दो करारे धक्कों में मेरी गांड में पूरा उतार दिया. उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला होने की वजह से इतनी जल्दी मेरी गांड की दीवार को चीरता हुआ अन्दर तक पहुंच गया कि मुझे समझ ही नहीं आया.. बस यूं लगा कि कोई गरम सरिया मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुसता चला गया. मैं भी दर्द से चीखने ही वाली थी कि प्रकाश ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने भी शुरू कर दिए.


इस बार दोनों लंड मेरी चूत और गांड में थे, पर जब एक मेरी चूत में धक्का लगाता, तब दूसरा रुक जाता और उसके बाद दूसरा लंड धक्का मेरी गांड में लगाता. फिर कुछ देर बाद दोनों एक साथ ही धक्का लगा देते. मेरे सुख की सीमा नहीं थी.




अब मैं बहुत ज्यादा थक चुकी थी और मेरी पकड़ लगभग ढीली ही हो चुकी थी, पर चिंटू और प्रकाश ने मुझे कसकर पकड़ रखा था.




जब मैं एक बार और झड़ी, तब मैंने प्रकाश और चिंटू दोनों से उनके रस को बाहर निकालने के लिए बोली, पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया और बिना लंड को मेरी चूत और गांड से बाहर निकाले, मुझे बेड पर ले गए. जैसे तैसे मुझे बेड पर लेटाकर फिर से मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.




पर अब मुझे मजा कम और दर्द ज्यादा हो रहा था और उनसे छोड़ने के लिए बोल रही थी.




अचानक उन्होंने धक्के लगाने की स्पीड बहुत तेज कर दी और प्रकाश ने चिंटू से कहा कि वो अब अपना लंड निकालेंगे तो चिंटू ने भी धक्के लगाना रोक दिया. प्रकाश ने मुझे बिस्तर पर लेटाकर अपने लंड को निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया.




जैसे ही उन्होंने लंड को मेरे मुँह में डाला, तुरन्त ही उन्होंने सारा रस मेरे मुँह में ही निकाल दिया. मैंने भी उनका सारा रस निगल लिया.




तभी चिंटू जो अपना वीर्य मेरे मम्मों पर गिराने को तैयार दिख रहा था, मैंने भी उसके लंड के रस को मुँह में निकालने के लिए कहा.




उसने भी मेरे मुँह में उनका वीर्य निकाल दिया. वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा तो मैंने भी उसे मुस्कुराते हुए उसके गाल पर एक हल्की सी चपत जड़ दी. फिर मैं गांड हिलाते हुए बाथरूम में चली गई.




उसके कुछ देर बाद हमारी चुदाई का दूसरा राउंड शुरू हुआ. यह खेल 4 दिन तक चला.



चार दिन तक तो उन्होंने मेरी चूत और गांड की तो चटनी बना कर रख दी. एक दिन तो दोनों ने सिर्फ मेरी गांड चुदाई का ही मजा लिया. इन 4 दिनों में चिंटू ने भी उनका काम पूरा किया और मेरी चुदाई भी जमकर की.




उसके बाद हम घर पर आ गए. पर 4 दिन की चुदाई ने मेरी चूत और गांड की 2 महीने की प्यास नहीं बुझा पाई थी. अगले 3 दिन रेस्ट करने के बाद मेरी चूत में फिर से आग लगने लगी.


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