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| Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां |
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हेलो दोस्तों, मेरा नाम परवेज़ है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूं, और आज के दिन मेरी उम्र 28 साल है। बात उस वक़्त की है जब मैं कॉलेज फर्स्ट ईयर में पढता था। क्यूंकि में साइंस का विद्यार्थी था, और मेरी मैथ्स थोड़ी ढीली थी, इसलिए मेरी मां मेरे लिए कोई मैथ्स का अच्छा ट्यूटर देख रही थी।
हमारे पड़ोस में कुसुम नाम की एक महिला रहती थी। उनकी उम्र लगभग 32 साल की थी। उनके पति इंजीनियर थे, और कुवैत में जॉब करते थे। मैं उनको कुसुम दीदी कह कर बुलाया करता था। रोज़ाना की बोल चाल में बस दीदी। दीदी MBA थी, और जॉब करती थी। लेकिन कुछ दिनों से घर पर ही थी। क्यूंकि भैया (उनके पति) अब अच्छा कमा रहे थे, और वो नहीं चाहते थे कि दीदी जॉब करें।
दीदी की मेरी मां के साथ अच्छी बनती थी और वो मेरी मां को भाभी कह कर बुलाती थी। दीदी को कोई हेल्प चाहिए होती थी, तो या तो वो मेरी मां से कहती थी, या फिर सीधे मुझसे। मैं उनके काफी काम कर दिया करता था। इसलिए दिन में कई बार उनके घर के चक्कर लग जाया करते थे।
जब मेरी मां ने दीदी से ट्यूशन को लेकर सलाह मांगी, तो दीदी ने कहा कि “ट्यूटर ढूंढने की क्या ज़रुरत है? मैं ही पढ़ा दूंगी।” तो इस तरह अब दीदी मुझे ट्यूशन भी पढ़ाने लगी। मैं ज़्यादा टाइम दीदी के घर रह कर ही पढ़ाई भी करता था, और उनके घर के कई काम भी कर दिया करता था।
हालत ये थी कि अगर मेरी मां को मुझसे कोई काम होता था तो दीदी को फ़ोन करके मुझे भेजने के लिए कहती थी। दीदी इंदौर की रहने वाली थी, और देखने में बहुत सुन्दर और तीखे नैन-नक्श वाली थी। भरा हुआ बदन, 36″ साइज के बड़े-बड़े तने हुए दूध, और गांड ऐसी की देखते ही लंड सलामी देने लगे।
मेरे साथ थोड़ी लापरवाह से रहती थी। उदाहरण के लिए मेरे सामने टी-शर्ट और लेगिंग्स में बिना ब्रा के दूध हिलाते हुए घूमती थी, और अगर कोई आने वाला होता तो या तो उसके आने से पहले ब्रा पहन लेती थी, या फिर दुपट्टा या टॉवल ओढ़ उनसे बात करती थी।
सारा-सारा दिन साथ रहने के कारण मेरे साथ काफी फ्रैंक हो गयी थी, और गर्लफ्रेंड- बॉयफ्रेंड की बातें कर लिया करती थी। मैंने पूछा आपका कोई बॉयफ्रेंड था शादी से पहले तो बोलीं, “पहले पढ़ाई से फुर्सत नहीं मिली, और अब घर से फुर्सत नहीं मिलती, और अब तो शादी भी हो गयी है। वैसे भी तुम्हारे भैया बहुत शक्की मिजाज़ के हैं। सब को शक की निगाह से देखते हैं। बस तुम ही हो जिसकी तारीफ करते नहीं थकते!”
एक दिन की बात है। जून का महीना था। काफी गर्मी थी। मैं दीदी के घर गया तो दीदी पुरानी वीडियो सीडी समेट रही थी। मैंने कहा, “दीदी ये किस चीज़ की सीडी हैं? तो दीदी बोली, “इनमें कुछ तो सॉफ्टवेयर की सीडीज़ हैं, और हमारी शादी की फोटोज़ हैं, और कुछ तुम्हारे भैया की उल्टी-सीधी मूवीज़ की हैं, वही अलग-अलग कर रही हूं।”
मैंने पूछा, “दीदी उल्टी-सीधी का क्या मतलब?” दीदी बोली, “ज़्यादा भोले मत बनो, जैसे तुमको कुछ पता ही नहीं?” मैं झट से समझ गया कि दीदी के कहने का मतलब था कि वो सीडीज़ ब्लू फिल्मस की थी। मैंने कहा, “दीदी इतनी सारी कहां से लाये भैया? कुवैत से लाते हैं क्या?” दीदी बोलीं, “अरे नहीं, यही-कहीं से लाते हैं, और भला तुम क्यों इतनी पूछताछ कर रहे हो? तुम भी देखते हो क्या?”
मैंने सोचा झूठ बोल कर कोई फायदा नहीं है, और सच बोलने में कोई नुक्सान भी नहीं है। दीदी और मैं एक-दूसरे के साथ इतने फ्रैंक तो थे ही, इसलिए मुझे मालूम था कि दीदी मेरी मम्मी को तो ये सब बताने से रहीं। मैंने कह दिया, “हां दीदी देखता हूं। लेकिन छुप-छुप कर देखनी पड़ती है। क्यूंकि मम्मी कमरे का दरवाज़ा तो बंद करने देती नहीं।”
जैसे ही मैंने दीदी को ये बताया दीदी मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी, और पूछने लगीं, “कुछ होता नहीं तुमको देखने के बाद? तुम्हारे भैया तो बहुत परेशान करते हैं ये सब देखने के बाद।”
मैंने कहा, “होता क्यों नहीं है? तभी तो छुप-छुप कर देखनी पड़ती है, वो भी या तो लम्बी टी-शर्ट पहन कर या फिर गोदी में तौलिया रख कर, तांकि किसी को कुछ पता ना चल सके।” दीदी ने पूंछा, “फिर जब देख लेते हो तो फिर क्या करते हो? गर्लफ्रेंड तो है नहीं तुम्हारी।” मैंने सोचा जब दीदी खुल कर पूछ ही रहीं थी, तो मैं भी खुल कर ही जवाब दे देता हूं।
मैंने कहा, “करना क्या है दीदी, बस बाथरूम में जाना पड़ता है, वहां भी जल्दी-जल्दी करना पड़ता है। वरना अगर ज़्यादा देर बाथरूम में रहो तो मम्मी को शक होता है, कहीं मैं सिगरेट या ड्रग्स तो नहीं ले रहा। पता नहीं किसने मम्मी के दिमाग़ में डाल दिया है कि आजकल बच्चे अगर ज़्यादा देर बाथरूम में रहें, तो समझो वो ड्रग्स ले रहे हैं।”
सुन कर दीदी हंसने लगी, और मेरी तरफ तरस खाने वाली निगाहों से देखते हुए बोली, “आव बेबी”। सारा सामान समेट कर एक बॉक्स में भरने के बाद दीदी मेरी तरफ देखते हुए बोलीं, “प्लीज इसे ऊपर रख दो मेरे साथ”। मैंने बॉक्स उठा कर ऊपर रख दिया। रखने के बाद दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए एक लम्बी सांस लेते हुए मुझसे पूछा, “देखनी है?”
मैंने ख़ुशी से मुस्कुराते हुए पुछा, “क्या?” दीदी बोली, “वही जो तुम घर पर देखोगे तो मम्मी से पिटाई होगी।” मैंने हंसते हुए कहा, “ओह दीदी, थैंक यू, लेकिन देखूं कैसे?” दीदी ने एक बॉक्स की तरफ इशारा करते हुए कहां, “इस में सारी वही वाली मूवीज़ हैं। AC ऑन कर दिया है। दरवाज़ा बंद कर देती हूं। लेकिन लॉक मत करना। अगर भाभी (मेरी मां) का फ़ोन आएगा तो बता दूंगी, और हां ये जो कपड़ा पड़ा है, यहीं यूज़ करना। कुछ और गन्दा मत करना। बी ऐ गुड बॉय। और कुछ चाहिए?”
मैंने कहा, “दीदी कोई आयल है?” बोली, “अब आयल क्यों चाहिए तुमको?” मैंने कहा, “दीदी ड्राई हाथ से रैशेज़ हो जाते हैं।” दीदी गयी, और जोंसन बेबी आयल की बोतल लेकर आयी और बोली, “ये मेरे पर्सनल यूज़ की है। प्लीज कुछ गन्दा मत करना। कुछ चाहिए हो तो आवाज़ दे देना। ठीक है, अब तुम देखो आराम से।”
मैं दीदी के ही लैपटॉप पर मूवी लगा कर देखने लगा। 2-3 सीडी जल्दी-जल्दी फ़ास्ट-फारवर्ड करके चेंज की। उसके बाद एक मस्त सीडी हाथ लगी, जिसको देखते ही मेरा लंड टन्न से खड़ा हो गया। जीवन में पहली बार ऐसे बिंदास होकर पोर्न देख रहा था।
जब मुझे लगा की दीदी अपने काम में व्यस्त हो चुकी थी, और उन्होंने सच में मुझे अकेला छोड़ दिया था, तो मुझसे रहा नहीं गया। मेरा मोटा तगड़ा प्यासा लंड मेरी निक्कर के अंदर उछल-कूद मचा रहा था।
मैंने अपनी निक्कर और अंडरवियर को घुटनों तक नीचे सरकाया, और थोड़ा सा तेल अपने हाथ में लेकर अपने लंड की मालिश करते हुए पोर्न का मज़ा लेने लगा।
बहुत मस्त सीन चल रहा था। एक नीग्रो एक कमसिन लड़की की गुलाबी चूत में अपना काला, मोटा, और लम्बा लंड घपा-घप पेल रहा था। मुठ मारने में इससे ज़्यादा मज़ा जीवन में पहले कभी नहीं आया था। मेरे लंड से हल्के-हल्के से चिकना रस बहने लगा था, और तेल के साथ मिल कर और भी चिकना हो गया था।
मेरा हाथ मेरे लंड पर ऐसे फिसल रहा था मानों किसी टाइट चूत के अंदर-बाहर हो रहा हो। मूवी में उस नीग्रो के धक्के तेज़ हो रहे थे, और यहां मेरे हाथ की स्पीड बढ़ती जा रही थी। तभी अचानक दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ हुई। मैं घबरा कर अपनी निक्कर ऊपर करने के बारे में सोच भी पाता, इससे पहले ये देख कर चौंक गया कि दीदी कमरे के अंदर आ चुकी थी।
मुझे देख कर बोली, “अरे मैंने दो बार खटखटाया, लेकिन तुमने कुछ जवाब ही नहीं दिया। मैंने सोचा चेक कर लूं सब ठीक तो है?” तभी उनकी नज़र मेरे पैरों में फंसी मेरी निक्कर और अंडरवियर पर पड़ी, और साथ ही उनकी नज़र मेरे 7 इंच ख़तने वाले (बिना स्किन के टोपे वाले) लंड पर पड़ी। वो देख कर चौंक गयी और बोली, “ओह ये तो देखा ही नहीं मैंने, तेल लगाया है क्या? कितना चमक रहा है।” यह कहते हुए वो थोड़ा नज़दीक आयी, और नज़दीक से मेरे खड़े हुए लंड का निरीक्षण करने लगी।
मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। इसलिए मैं जैसे बैठा था वैसे ही बैठा रहा, और टेबल पर रखे कपड़े से अपने तेल वाले हाथ पोंछने लगा। दीदी मेरे कंधे पर हाथ रख कर मेरे लंड को देखते हुए बोली, “अरे परवेज़, बहुत बड़ा है तुम्हारा तो”। और यह कहते ही उन्होंने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया।
वो बोली: ये तो बिल्कुल पोर्न फिल्मों जैसा है।
दीदी ने मेरी कुर्सी अपनी तरफ घुमा ली जिससे मैं और दीदी आमने-सामने हो गए।
फिर वो बोली: लाओ मैं कर देती हूं।
वो नीचे बैठ कर मेरा लंड सहलाने लगी और बोलीं: जब पीरियड्स चल रहे होते हैं, और तुम्हारे भैया का बहुत मूड होता है, तो मैं उनका भी हाथ से ही करती हूं।
दीदी का हाथ लगने से जैसे मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया था। मेरी सांसे तेज़ चलने लगी, और मुंह से मादक आवाज़ें निकलने लगी।
दीदी ने प्यार से पूछा: कैसा लग रहा है किसी और के हाथ से?
मैंने भी बेशर्मी से जवाब दिया: बता नहीं सकता दीदी बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा है।
मेरे हाथ कुर्सी के हैंडल्स पर कसते देख दीदी ने कहा: अगर तुम्हारा मन करे तो तुम मुझे पकड़ सकते हों, फील फ्री ओके?
मैंने बिना एक मिनट भी गवाये दीदी को कन्धों से पकड़ लिया। जब मेरी नज़र दीदी के बिना ब्रा वाले मम्मों पर पड़ी, जो दीदी के मेरे लंड सहलाने की वजह से खूब ज़ोर से हिल रहे थे, तो मुझसे रहा नहीं गया, और मैंने टी-शर्ट के ऊपर से ही दीदी के भरे हुए जवान दूध पकड़ लिए।
दीदी ने बिल्कुल रोकने की कोशिश नहीं की। और क्यूंकि मैंने कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से मसल दिए थे, तो उन्होंने बस इतना कहा-
दीदी: आह.. धीरे परवेज़, आराम से।
दीदी ने कपड़े से मेरा चिकना लंड साफ़ किया, और बिना समय गवाये मेरे ख़तने वाले लंड का सुपाड़ा अपने मुंह में ले लिया, और मेरी तरफ देखने लगी। उनसे नज़रें मिलते ही मेरे बदन में जैसे बिजली सी कौंध गयी। मैंने दीदी की टी-शर्ट ऊपर उठा दी। टी-शर्ट ऊपर उठते ही दीदी के बड़े-बड़े रसीले दूध उछल कर बाहर आ गए।
मैंने थोड़ा सा आगे झुक कर दीदी के दूध अपने मुंह में लेकर चूसने की कोशिश की, लेकिन क्यूंकि हमारी पोजीशन कुछ ऐसी थी कि दीदी नीचे घुटनों के बल बैठी थी, और मैं कुर्सी पर, इसलिए बात बन नहीं पायी। मेरी झटपटाहट देखते हुए दीदी ने कहा-
दीदी: चलो बेड पर आ जाओ।
और अगले ही पल दीदी और मैं बेड पर घुटनो के बल एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े थे। मैंने तुरंत दीदी की टी-शर्ट उतार दी, उफ़ अद्भुत नज़ारा था। दीदी के दूध एक दम मस्त तने हुए थे, और मुझे घूर रहे थे जैसे कह रहे हों “अरे परवेज़, देख क्या रहे हो? आओ चूसो हमको”। इस वक़्त दीदी सिर्फ अपने लोअर में थी, और मैं सिर्फ अपनी टी-शर्ट में, जो मैंने एक ही पल में उतार कर साइड में फेंक दी।
मैं आगे बढ़ कर किसी भूखे बच्चे की तरह एक के बाद एक दीदी के दूध चूसने लगा। दीदी मेरे बाल सहलाने लगी। मैं कभी दीदी की गर्दन पर किस करता, तो कभी फिर से दूध चूसने लगता। दीदी ने एक हाथ से मेरा फनफनाया हुआ लंड पकड़ रखा था, और दूसरा हाथ मेरी गर्दन में था। दीदी मदहोश सी होकर अपने दूध चुसवाने का आनंद ले रही थी।
जब जब मैं उनके दूध चूसता, उनकी पकड़ मेरे मेरे लंड पर और टाइट हो जाती। मेरे लंड के चिपचिपे पानी से दीदी का हाथ चिकना हो गया था। तभी मैं अपना हाथ नीचे लेजा कर दीदी के लोअर में हाथ डालने की कोशिश करने लगा।
दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली: नहीं परवेज़, प्लीज आज ये रहने दो।
मैंने कहां: दीदी बस टच करूंगा, प्लीज दीदी एक बार टच करने दीजिये, प्लीज।
यह कह कर दूसरे हाथ से मैंने एक बार फिर दीदी का दूध मसल दिया। दीदी एक दम मदहोश हो गयी, और उन्होंने अपने होंठ मेरे कान के पास लाकर कहा-
दीदी: आज रहने दो ना प्लीज। जब से तुम्हारे भैया गए हैं, मैंने शेव नहीं की है।
मैंने कहा: तो क्या हुआ दीदी? मुझे वैसे ही अच्छी लगती है। अभी जो पोर्न देख रहा था, उसमें भी लड़की ने शेव नहीं की थी।
मेरी बात सुन कर दीदी ने मेरे हाथ पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कर दी, जो उन्होंने मुझे लोअर में हाथ डालने से रोकने के लिए पकड़ लिया था। मैंने बिना एक पल भी गवाये अपना हाथ दीदी के लोअर के अंदर डाल दिया, और उनकी चूत के मुलायम बालों के बीच उनकी चूत के छेद को ढूंढने के लिए अपनी उंगलिया घुमाने लगा। दीदी की चूत एक दम गीली हो चुकी थी। चूत का रस दीदी की जांघों तक में लग चुका था। मैंने घप्प से अपनी बीच वाली ऊंगली दीदी गरम और गीली चूत में घुसा दी।
चूत में ऊंगली जाते ही दीदी की सिसकी निकल गयी, और आनद के वजह से उनकी आंखें बंद हो गयी। उनके मुंह से सससस मममम हम्म्म्म जैसी आवाज़ें निकलने लगी। दीदी ने मेरा हाथ फिर से कस के पकड़ लिया, जैसे कि वो कहना चाह रही हों कि बहुत मज़ा आ रहा है, प्लीज ऊंगली बाहर मत निकालना। मेरा दायां हाथ दीदी के लोअर में था, और बाएं हाथ से मैं दीदी के गदराये दूध मसल रहा था।
आनंद की वजह से दीदी की हालत देखने लायक थी। वो ठीक से अपने घुटनों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। वो मेरे ऊपर पूरी तरह झुक गयी थी। उन्होंने अपनी चिन मेरे कंधे पर टिका दी थी, और वो बस लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी। मेरे हाथ को जगह मिल सके इसलिए उन्होंने जितना हो सकता था अपनी टांगों को फैला लिया था।
मैं एक हाथ की ऊंगली से दीदी की गीली नरम चूत की चुदाई कर रहा था, तो दूसरे हाथ से बारी-बारी उनकी दोनों चूचियां मसल रहा था। मैंने दीदी को धीरे से पीछे धकेलते हुए लेट जाने का इशारा किया। दीदी समझदार थी, वो इशारा मिलते ही पीछे लेट गयी। मैंने दीदी के पजामे और कच्छी को एक साथ पकड़ा, और उतारने की कोशिश करने लगा।
मुझे कोई परेशानी ना हो, इसलिए दीदी ने अपने गदराये चूतड़ थोड़े ऊपर को उठा दिए। दीदी का पजामा और मेहरून रंग की कच्छी अगले ही पल बेड के पास फर्श पर थे। दीदी की महीनों से अनचुदी चूत की खुशबू से पूरा कमरा भर गया था। मैंने ब्लू फिल्में तो काफी देखी थी। मालूम था चूत कैसी दिखती है, लेकिन आज जीवन में पहली बार असली गरम चूत वो भी अपने चेहरे के इतना नज़दीक देख रहा था। समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करूं?
मैंने अपनी उंगलियों से दीदी की गीली चूत को खोला, तो उसमें से रस की बूंद बह कर दीदी के चूतड़ों के बीच बह गयी। इतनी रसीली चूत देख कर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने दीदी के मस्त गदराये चूतड़ों को पकड़ कर बेड के किनारे पर खींच लिया, और खुद घुटनों के बल ज़मीन पर बैठ गया।
फिर मैंने दीदी की टांगें खोली, तो देखा की दीदी कि चूत घने बालों से भरी हुई थी। बाल जांघो तक थे, और उनकी चूत के पानी से चिपचिपे हो गए थे। अब मैंने बिना एक मिनट भी गवाएं अपना मुंह दीदी की चूत पर जमा दिया। दीदी के मुंह से सस ससस सस की आवाज़ निकल गयी। उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया, और मेरे बाल कस के पकड़ लिए, और धीमी आवाज़ में बड़बड़ाने लगी-
दीदी: ओह परवेज़, क्या कर रहे हो तुम अपनी प्यारी दीदी की चूत को खा जाओगे क्या?
दीदी की ऐसी बातें सुन का मुझ पर अजीब सा पागलपन सवार हो गया था। मैं लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगा कर दीदी की चूत चाटने लगा। दीदी की चूत की खुशबू बहुत प्यारी थी। मैं कभी दीदी की चूत को चाटता, तो कभी अपनी उंगलियों से दीदी की चूत को खोल कर उसमे अपनी जीभ घुसाने की कोशिश करने लगता, और फिर दीदी के दाने पर अपनी जीभ लपलपाने लगता है। जैसे ही में दीदी के गुलाबी दाने पर अपनी जीभ लपलपाता, दीदी के चूतड़ अपने आप उछलने लगते, और दीदी के मुंह से उह्ह्ह ममममम ससससस की आवाज़ें निकलने लगती।
थोड़ी देर तक चूत चटवाने के बाद दीदी ने मेरे बाल खींचते हुए कहा: अब ऊपर आ जाओ परवेज़। अब तुम्हारी जीभ नहीं कुछ और चाहिए मुझे!
दीदी का आर्डर मिलते ही मैं फ़ौरन बेड पर चढ़ गया, और दीदी ने मुझे पीछे धकेलते हुए लेट जाने का इशारा किया, और मैं बेड पर सीधा लेट गया। मेरा लंड किसी खम्बे की तरह सीधा खड़ा थ। तभी दीदी आगे झुकी और मेरे लंड का टोपा घप्प से अपने मुंह में बार लिया। मेरा लंड दीदी के मुंह में जाते ही ऐसा आनंद आया मानों सर्दी की किसी रात में ठिठुरते हुए किसी ने आपको मखमली रज़ाई ओढ़ा दी हो।
दीदी बड़े प्यार से मेरा मोटा लंड चूस रही थी, और मेरा लंड चूसते-चूसते मेरी तरफ गर्दन घुमा कर मेरे चेहरे के भाव देखने लगती थी।
दीदी के चिकने गोल मटोल गदराये चूतड़ मेरे चेहरे की तरफ थे। मैं उनकी टांग पकड़ कर अपनी तरफ खींचने की कोशिश करने लगा, तो दीदी समझ गयी कि मैं क्या करना चाह रहा था। फिर दीदी फ़ौरन उछल कर मेरे फेस पर अपनी मस्त गांड सेट करके बैठ गयी। मैंने दीदी की मस्त गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने मुंह के पास खींचा, और उनकी चूत चाटने लगा।
कभी मैं उनकी चूत को अपनी उंगलियों से खोल कर जीभ अंदर तक डालता, और कभी उनकी चूत के दाने को अपने होंठों के बीच में दबा कर मसल देता। मैं जब भी ऐसा करता, दीदी मेरा लंड चूसना छोड़ कर एक-दम मदहोश हो जाती थी, और अपनी गीली चूत मेरे फेस पर दबा कर मेरे लंड को कस के पकड़ लेती थी। वो अपना फेस मेरी जांघों के बीच में रख कर निढाल सी पड़ जाती थी, बस उनकी ममममम, आआह जैसी सिसकियां ही सुनाई देती थी!
मेरे दिमाग़ में ना जाने क्या खुराफ़ात आयी, कि मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी के बड़े-बड़े चूतड़ों को फैलाया, और अंगूठे के साथ वाली ऊंगली थोड़ी सी दीदी की गांड के छेद घुसा दी। दीदी एक-दम से उचक पड़ी और उनके मुंह से उई इ इ इ की आवाज़ निकल गयी। मेरी तरफ अपनी गर्दन करते हुए बोली, “क्या करते हो?”
उसके बाद उन्होंने अपनी गांड के छेद को एक दो बार ऐसे सिकोड़ा कि मुझे लगा मेरी ऊंगली टूट ही जायेगी। दीदी के इस तरह गांड को भींचने से मेरे ऊंगली अच्छी तरह दीदी की गांड में सेट हो गयी। शायद दीदी को उसमे मज़ा आने लगा था, और जैसे ही मैं दीदी की गांड के छेद में अपनी ऊंगली का प्रेशर बढ़ाता, वो अपनी चूत मेरे मुंह पर रगड़ देती। मेरा पूरा फेस दीदी की चूत के पानी और मेरी थूक से गीला और चिपचिपा हो गया था।
थोड़ी देर के बाद अचानक दीदी लुढ़क कर मेरे ऊपर से उतर गयी और बोली, “कंट्रोल नहीं हो रहा। मेरे ऊपर आ जाओ”। ऐसा कह कर दीदी बेड पर सीधी लेट गयी, और मेरी तरफ देखने लगी। मैंने घुटनों के बल बैठ कर दीदी की टांगों के बीच में पोजीशन ली। मैंने दीदी की टांगें खोल कर अपनी जांघों के दोनों तरफ फैला दी। फिर उनके चूतड़ों के नीचे अपनी बाहें डाल कर दीदी के चूतड़ों को थोड़ा उठा दिया।
ऐसा करने से दीदी की चूत के घने बालों के बीच से झांकती हुई उनकी गीली चिपचिपी चूत के दर्शन होने लगे थे। मैंने एक हाथ से अपना लंड दीदी की चिकनी चूत पर सेट करके टोपा अंदर डाल दिया, और दीदी के ऊपर चढ़ने के लिए जैसे ही आगे झुका, मेरा 7 इंच मोटा लंड आधा दीदी की चूत में समां गया। लंड चूत में घुसते ही दीदी की चीख़ निकाल गयी। वो उफ्फ्फ्फ़ उई इ इइ… आआह… अहम्म्म्म करने लगी।
मैंने पुछा, “आप ठीक हो?” वो बोली, “तुम्हारा बहुत मोटा है परवेज़, इसलिए हल्का सा दर्द हुआ। लेकिन इस दर्द का अपना मज़ा है”। मैंने पूछा, “भैया के साथ भी तो करती होंगी ना आप?” तो बोली, “तुम्हारे भैया सीधे साधे इंसान हैं। उनका तुम्हारी तरह मोटा तगड़ा नहीं है। और ना हीं वो तुम्हारी तरह बदमाश है। वो बस सिंपल-सिंपल करते हैं”।
मैंने मस्ती में पूछ लिया, “चाटते तो होंगे ना आपकी?” वो बोली, “चाटना तो दूर, उन्होंने आज तक ठीक से देखी भी नहीं है मेरी”। ये सुनते ही मैंने अपने हाथों से दीदी के मस्त चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठाया, और अपना पूरा लंड दीदी की प्यासी चूत पेल दिया। दीदी ने अपनी गर्दन एक तरफ को मोड़ ली, और आंखें बंद करके चुदाई का आनंद लेने लगी। उनके मुंह से लगातार अम्मम्म हम्म्म्म आअह्ह्ह और सीइइइइ की आवाजें निकल रही थी।
मैं थोड़ा और आगे झुक कर दीदी के दूध चूसने लगा। दूध चूसते-चूसते मैं अपना पूरा लंड टोपे तक बाहर खींचता, और फिर पूरी ताक़त और तेज़ी के साथ पूरा लंड दीदी की चूत में ठूस देता। दीदी पागल सी हो गयी थी। उनकी आवाजें और सांसें दोनों तेज़ होने लगी। दीदी ने बिना आंखें खोले ही मुझ से कहा, “कुछ बोलो ना परवेज़ कैसा लग रहा है तुमको? खूब गन्दी-गन्दी बातें करो प्लीज़। ये सोचो अपनी गर्लफ्रेंड को चोद रहे हो। मेरा नाम लेकर गन्दी-गन्दी बातें बोलो ना प्लीज़”।
पहले तो मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ कि दीदी ये सब करने को कह रही थी। फिर मैंने सोचा जब दीदी खुद ही कह रही थी, तो क्यों ना उनकी बात मान ली जाये। मैंने कहा, “ओह कुसुम मेरी जान, तुम्हारी टाइट चूत में जा कर मेरे लंड को जन्नत का मज़ा आ रहा है। ऐसा लग रहा है मेरा लंड किसी गरम भट्टी में चला गया है। उफ्फ्फ तुम्हारे मस्त दूध चूसने में कितना मज़ा आ रहा है कुसुम।
मैंने पूछा, “कुसुम तुम भी कुछ बोलो ना आपको कैसा लग रहा है?” दीदी बोली, “ओह परवेज़, तुम्हारा लंड भी मुझे जन्नत के मज़े दे रहा है। काश तुम्हारे भैया का लंड भी तुम्हारी तरह मोटा तगड़ा और लम्बा होता, और वो भी तुम्हारी तरह मेरी चुदाई कर पाते। प्लीज़ हमेशा मेरा ख़्याल रखना। हमेशा मेरी चूत की प्यास बुझाते रहना परवेज़”। ये सब बोलते-बोलते दीदी एक दम मधमस्त होकर अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर मेरी रिदम से रिदम मिलाने लगी।
मेरा लंड रेल के पिस्टन की तरह दीदी की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, और उनकी चूत से इतना रस बह रहा था कि मेरे आंड भी गीले हो गए थे। मैंने अपना हाथ नीचे लेजा कर दीदी के चूतड़ दबोचे, तो महसूस हुआ कि दीदी की चूत का पानी बह कर उनकी मस्त गांड की दरार में भी घुस गया था। मैंने दीदी का एक दूध अपने मुंह में भर कर लम्बे-लम्बे धक्के मारने शुरू कर दिए।
दीदी ने अपनी टांगे मेरी टांगों पर लपेट ली, और मेरी कमर को अपने हाथों से जकड़ लिया। मैं महसूस कर पा रहा था कि दीदी कभी-कभी अपनी चूत ऐसे सिकोड़ती थी, कि मेरे लंड पर उनकी चूत का कसाव महसूस होता था। दीदी के ऐसा करने से मैं पागल सा हो गया और धका-धक धक्के मारने लगा।
हर धक्के पर पूरा लंड बाहर खींचता, फिर अंदर धकेल देता। दीदी भी अपनी गांड उछाल-उछाल कर बराबर की टक्कर दे रही थी। फिर अचानक दीदी के मुंह से बहुत तेज़ आवाजें आयी, और दीदी ने अपने हाथों की पकड़ मेरी पीठ पर ढीली कर दी। अपनी टांगें जिनसे उन्होंने मेरी टांगों को लपेट रखा था, उनको भी ढीला कर दिया। मैं दीदी के मासूम चेहरे को देखते हुए धक्के मारता रहा, और कुछ लम्बे-लम्बे धक्कों के बाद मेरे लंड ने भी दीदी की चूत में गरम-गरम लावे की पिचकारी छोड़ दी।
दीदी ने एक बार फिर से मुझे जकड़ लिया और मममम की आवाज़ के साथ फिर से निढाल हो गयी। मैं भी निढाल होकर दीदी के ऊपर लेट गया। लगभग 2 मिनट हम इसी पोजीशन में लेटे रहे। फिर मैं धीरे से दीदी के ऊपर से उठा, और धीरे से अपना लंड दीदी की चूत से बाहर खींचा, तो मेरे लंड के चूत से पूरा बाहर आते ही गाढ़ी सफ़ेद क्रीम जिससे मेरे लंड ने दीदी की चूत को डबाडब भरा दिया था, बह कर दीदी की चूत से बाहर आने लगी।
दीदी ने अपने हाथ से अपनी चूत को छू कर देखा तो बोली, “बाप रे, कितना माल निकाला है”। कहते हुए दीदी ने बेड की साइड में रखे हुए टिश्यू पेपर के डब्बे से कुछ टिश्यू पेपर निकाले, और अपनी चूत साफ करने लगी, और एक दो टिश्यू मेरी तरफ बढ़ाते हुए मुस्कुरा कर बोली, “साफ़ कर लो इसको, बहुत मेहनत की है इसने”।
दीदी ने अपनी आंखों से मुझे नज़दीक आने का इशारा किया तो मैं दीदी के चेहरे की तरफ झुक गया। मेरे नज़दीक आने पर दीदी ने मेरी गर्दन में हाथ डाल कर अपनी तरफ़ खींचा, और मेरे होंठों को चूम लिया, और बोली, “बहुत प्यारे हो तुम, प्लीज ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए। अपने किसी बेस्ट फ्रेंड से भी ये बात मत करना, समझे?”
यह कह कर हम दोनों बेड से उठ गए, और अपने-अपने कपड़े पहन लिए। मैंने अपने जूते पहन ही रहा था कि दीदी एक डब्बा लेकर आयी और बोली, “खीर बनायी है, ये भाभी को दे देना!” मैंने दीदी के हाथ से डब्बा लिया और जाने लगा। तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और एक बार फिर से किस किया, और मुस्कुराते हुए बोलीं, “जब भी खीर खाने का दिल हो, बता देना”।

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