ऑफिस की नयी माल की पार्किंग लोट में चुदाई - Fucking the new office girl in the parking lot
यहां देखो कि सीनियर सेक्स असल में हुआ कैसे था …
मैं अपनी साइट वर्क के एक लंबे टूर से बहुत दिनों बाद अपने ऑफिस के डेस्क पर लौटी थी.
मगर अदिति की तरह नहीं … वो कुछ ज्यादा ही गांड में घुस रही थी.
अदिति मेरे से एक या दो साल छोटी है, नॉर्मल सी हाइट है उसकी, स्लिम है मगर फिगर बहुत अच्छी है.
उसने कंपनी में एक इंटर्न की तरह ज्वॉइन किया था और वो मेरी ही टीम में काम रही थी.
उसने मेरे कुलीग (सहकर्मी) सिद्धार्थ को पटाने की कोशिश की, जिसे असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया था.
अदिति चाहती थी कि वो भी इस प्रोजेक्ट में एक स्थायी कर्मचारी बन जाए.
ऐसा नहीं है कि मुझे इसकी परवाह थी!
मगर जब भी हम कर सकते थे हमने एक दूसरे की टांग खींची.
एक दिन बोर्डरूम मीटिंग के बाद मैं वाशरूम में चली गयी.
मैं- हम्म … तुझे भी गुड मार्निंग ऑफिस की रंडी, यहां अपनी चूत साफ करने आई है शायद!
अदिति- एक्सक्यूज मी! हम पार्टनर हैं. इतना जलो मत क्योंकि तुम्हारी चूत को उसका लंड नहीं मिला, हुह …
यह सुनकर मैंने उसे सबक सिखाने का फैसला किया.
अदिति को यह नहीं पता था कि जब मैं सिंगल थी तो सिद्धार्थ मेरे साथ फ्लर्ट करता था.
मैं चाहती थी कि अदिति सुने कि सिद्धार्थ वास्तव में उसके बारे में क्या कहता है.
ऐसा करने के लिए, मैंने एक चालू प्लान बनाया और सिद्धार्थ के केबिन में चली गई.
मैं अपने बैठने की पोजीशन को एडजस्ट करते हुए उसके लंड पर गांड को रगड़ते हुए उसके बालों को सहलाने लगी.
सिद्धार्थ- ओह्ह फक … प्लीज कह दो कि ये कोई सपना नहीं है!
मैं- नहीं स्वीटहार्ट, ये तुम्हारी फेंटेसी है जो आज पूरी हो रही है.
मादक धीमी आवाज में ये बोलते हुए मैं अपने होंठ उसके चेहरे के पास ले गयी.
सिद्धार्थ ने मुझे उठाया और केबिन से अगले दरवाजे के अंदर ले गया जहां पर एक सोफा रखा था.
मैंने उसको मेरी गांड को भींचने से रोका.
मैं नहीं चाहती थी कि उसको पूरा मजा मिले.
मैं- मैं उस वक्त इसके लिए तैयार नहीं थी और सच कहूं तो वह मुझे मेरी बेइज्जती लगी थी.
सिद्धार्थ- तो चलो, शुरू करते हैं.
उसने मुझे मेरे होंठों पर किस करने के लिए चेहरा पास लाया मगर मैंने उसे समय रहते रोक दिया.
मैं- रुको … ये ठीक जगह नहीं है, हम यह सब पार्किंग लॉट में लंच टाइम के दौरान करेंगे.
सिद्धार्थ को अपने चंगुल में लेने के बाद मैं अदिति के पास गयी, उसको दूसरे तरीके से चिढ़ाने के लिए.
जब मैं उसके डेस्क पर पहुंची, मैंने देखा कि वो लैपटॉप की ब्लैक स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए थी.
मैं सहज रही और मैंने यह तय किया कि मैं अपनी एक कुलीग के साथ जो बातचीत करूंगी वो उसको जरूर सुनाई दे.
जब मैंने अपनी कुलीग से कहा कि मैं लंच के लिए जा रही हूं तो उसका चेहरा पीला पड़ गया.
लंच से पहले के वो घंटे अदिति के लिए बेचैनी भरे हो गए.
हम नीचे ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचे.
मगर इससे पहले कि मैं आगे जाती मैं ये देखना चाहती थी कि अदिति हमारा पीछा कर रही है या नहीं.
मैं वहीं रुक कर उसको देखने लगी.
जब मुझे इस बात का यकीन हो गया कि उसने हमें देख लिया है तो मैं बेसमेंट की ओर बढ़ने लगी.
सिद्धार्थ मेरे पीछे पीछे आ रहा था.
हम पार्किंग के एक कोने में गए और हमने वहां पर एक एसयूवी के पीछे अपनी जगह ले ली.
सिद्धार्थ ने मुझे मेरी गांड से पकड़ लिया और अपने होठों को मेरी गर्दन पर बेतहाशा रगड़ने लगा.
वह इतना उत्तेजित हो गया कि उसने अपना लंड मेरी जाँघों से कस रगड़ना शुरू कर दिया.
हर समय वह फुसफुसा रहा था कि वह मुझे कितना चाहता है और वह चीजें जो वह मेरे साथ करना चाहता है.
सिद्धार्थ मेरी चूत में अपना लंड डालने के लिए मरा जा रहा था.
जब मैंने उसे रोका तो वह बेचैन हो गया और हताश आदमी की तरह अपने बाल खींचने लगा.
मैं उसके शरीर की गर्मी को महसूस कर सकती थी और उसके व्यवहार से काफी घबराया हुआ था वो!
मुझे डर था कि अगर मैंने उसे कंट्रोल नहीं किया तो वह गुस्से में आ सकता है.
ये शब्द कहते ही मेरी नाक के सिरे से पसीने की बूंदें टपकने लगीं.
सिद्धार्थ- सिमरन, मैं तुम्हारे सभी हुक्म मानूंगा. मुझे बताओ, मुझे बताओ कि तुम मुझसे क्या चाहती हो?
मैं उसके पार्किंग लॉट के दायीं ओर से आने की उम्मीद कर रही थी.
इसके बजाय उस चालू कुतिया ने दूसरा रास्ता अपनाया था.
जैसे ही मैंने उसका उदास सा चेहरा देखा, मैं उत्साहित हो गयी.
उसने मेरे आदेश के अनुसार किया और जमीन पर घुटने टेक दिए.
उसका पसीना लगातार कंक्रीट के फर्श पर टपक रहा था.
लेकिन उस हालत में भी उसका लंड तना हुआ था और उसका तनाव साफ उसके कपड़ों में दिख रहा था.
इसने मुझे बेहतर महसूस कराया और उसके लंड का तनाव भी बढ़ता गया.
फिर मैंने उसे हुक्म दिया कि वह अपने मुंह से मेरी पैंटी खींचे और मेरी पसीने से तर चूत को चाटे.
उसने जोश के साथ अपनी नाक को मेरी स्कर्ट की में धकेल दिया.
मैं धीरे से कराह उठी, जब उसकी नाक के सख्त सिरे ने मेरी उत्तेजित चूत के होंठों को छुआ.
मगर सिद्धार्थ मेरी पैंटी खींचने की बजाय मेरी चूत चाटने लगा.
सिद्धार्थ ने मेरी पैंटी की नोक पर चबाया लेकिन फिर अपने हाथ डाले और मेरे चूतड़ों को सहलाया.
वह मेरी पैंटी खींच रहा था लेकिन मेरी गांड को दबा रहा था और उसका आनंद ले रहा था.
मैंने फिर उसके लंड पर पांव रखा जिससे वह दर्द से चिल्लाने लगा.
मैं- चालाकी मत दिखाओ, तुम एक कमबख्त कुत्ते हो और जैसा मैं कहूँगी वैसा ही करोगे.
उसने आखिरकार मेरी पैंटी निकाली और उसको लंबी-लंबी सांसों से सूंघने लगा.
मैंने उसके सूंघने के तरीके की तारीफ की और उसके हाथों से पैंटी खींच ली.
मेरी पैंटी के बिना मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही थी.
मैं- कैसी है यह चूत? या तुम्हें अदिति की चूत ज्यादा पसंद है?
सिद्धार्थ ने अपने होंठों को मेरी चूत के अंदर धकेल दिया और मेरी जीभ चुदाई करने लगा.
मुझे उसके लिए इसे आसान बनाने के लिए अपने पैरों को अजीब तरीके से फैलाना पड़ा.
सिद्धार्थ से जो मजा मिल रहा था, मैंने तय किया कि वो अदिति को जरूर दिखे.
मैं- अब किसके पास एक बदबूदार चूत है … साली, पागल कुतिया?
मैंने अदिति की ओर देखते हुए आँखों से जताया.
यह सुनकर मुझे इतना अच्छा लगा कि मैंने उसे एक बार फिर अपनी चूत चाटने को कहा.
मेरी टांगें कांप रही थीं जबकि मैंने उसकी गीली जीभ को अपनी चूत की लाइन में तेजी से प्यार किया.
मैंने थोड़ा सीत्कार किया लेकिन जगह और लोगों की वजह से अपनी भावनाओं को कंट्रोल रखा.
मैं- ओह माय! मुझे लगा कि तुम दोनों एक कमिटेड रिलेशनशिप में हो!
जब वह बात कर रहा था तो मैं उत्तेजना को चरम पर बनाए रखने के लिए अपनी चूत को रगड़ रही थी.
लेकिन उसने जो कहा उसे सुनने के बाद, मेरी चूत ने दो छोटी फुहारों में चिपचिपा पानी निकाल दिया.
सिद्धार्थ ने मौका देखा और मेरी गीली लाल चूत में उंगली करने लगा.
मैं- आह! हां हां हां! हम्म, कुत्ते … चोदते रहो … ऐसे ही … आह्ह.
मुझे अपनी चूत के बचे हुए पानी को थोड़ा सा धक्का देकर बाहर निकालना पड़ा.
जैसे ही मैंने अपनी बाँहों को थोड़ा ऊपर उठाया, वह समझ गया कि मैं क्या चाहती हूँ.
सिद्धार्थ ने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपने सख्त लंड को मेरी भीगी हुई चूत से रगड़ने लगा.
उसके पसीने से तर लंड का सिरा मेरी संवेदनशील चूत को छू रहा था.
वह मेरे कोमल गालों को अपने खुरदरे हाथों से भींच रहा था और उत्तेजना से उन्हें अलग कर रहा था.
मैंने उसे अपने से दूर धकेल दिया और उसका लंड पकड़ लिया- क्या? तुम उसे सीधे इग्नोर क्यों नहीं कर देते?
सिद्धार्थ ने अपने धड़कते हुए धड़कते हुए लंड को कसकर पकड़ लिया और मुझसे इसे देखने की भीख माँगी.
मैं उस लंड का स्वाद चखना चाहती थी इसलिए मैंने उसे पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया.
मैंने उसका लंड भींचा जो उत्तेजित हो गया और उसे साथ ही दर्द भी हुआ.
मैं- भौंको हरामी कुत्ते … क्या तुम इसी तरह मेरे दास बने रहोगे?
मैंने उसका लंड अपनी चूत में डलवाया जबकि उसने मेरे चूचों में अपना चेहरा धंसा दिया.
उसने सहारा लेने के लिए मेरी गांड के गाल पकड़ लिए और मेरी चूत को तेज़ तेज चोदने लगा.
मगर जिस तरह से वह शुरू करने के बाद धीमा हो गया, मैंने महसूस किया कि वह खाली होने वाला था.
उसके पास जितना भी माल था उसने सारा बाहर निकाल दिया.
उसका कुछ हिस्सा मेरी पैंटी में गिरा और बाकी का मेरे पेट पर लगा जिसे मैंने मसल दिया.
दूसरी तरफ मैंने उससे और अदिति से सब कुछ निकाल लिया था.
पैंटी पहने बिना ही मैंने अपने कपड़े ऊपर किए और उनको ठीक किया.
जल्दी से मैंने खुद को पूरी ठीक किया और मैं वहां से निकलने लगी.
मैंने सिद्धार्थ को वहीं पर हारे हुए इन्सान की तरह नंगा बैठा छोड़ दिया.
वहां से निकलते हुए मैंने अपनी वीर्य और पसीने से सनी पैंटी को अदिति के मुंह पर फेंक दिया.
पेंटी फेंक कर मैं उसके पास से संतुष्टि भरी स्माइल करती हुई निकल गयी.
दोस्तो, आप सब लौंडों और लौंडियों को मेरी सीनियर सेक्स स्टोरी पसंद आई होगी.

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