इस कहानी में चार दोस्त हैं - There are four friends in this story.

पहला इंटरकोर्स पति के साथ किया एक देसी सेक्सी लड़की ने शादी के बाद. उसका पति शहरी और पैसे वाला था लेकिन उसे देसी सीधी लड़की मिली जिसकी सील उसने तोड़ी सुहाग सेज पर!

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां

यह पहला इंटरकोर्स पति के साथ कहानी मुख्य रूप से मनीष के इर्द-गिर्द घूमती है.


इस कहानी में चार दोस्त हैं.


मनीष और उसकी दुल्हन चित्रा

आदेश और उसकी पत्नी अमिता

राजेश व उसकी पत्नी रीता

और

पंकज व उसकी पत्नी पूर्णिमा.


अभी मनीष की शादी नहीं हुई है लेकिन उसके बाकी दोस्तों की शादी हो चुकी है.

मनीष की माँ का एक वर्ष पहले निधन हो गया था.


अब मनीष के घर में सिर्फ़ उसके पिता और वह स्वयं ही रहते हैं.


घर के कामों के लिए एक कामवाली रखी गई थी.

उसे निर्देश था कि वह सुबह 8 बजे आएगी और 10 बजे तक खाना-पीना, कपड़े धोना, झाड़ू-पौंछा आदि सब करके ही जाएगी.


लेकिन वह कामवाली कामचोर थी, सुबह 9 बजे के बाद आती थी.

जल्दी में दुकान जाने के कारण, मनीष और उसके पिता, उससे खाना बनवा कर जाने को कह देते.


तीज-त्योहारों पर वह कामवाली छुट्टी कर जाती थी.

जब सभी लोग छप्पन व्यंजनों का मज़ा ले रहे होते, तब इनके घर सादा खाना भी नहीं होता.


त्योहारों के कारण होटल बंद रहते, तो बेचारे बाप-बेटे भूखे ही सो जाते.

एक दिन पिता ने मनीष से कहा- बेटा, तू शादी कर ले, घर में एक बहू आ जाएगी, जो इस घर को संभाल लेगी!


मनीष बोला- पापा, आजकल की लड़कियों का कोई भरोसा नहीं है. मुझे तो डर लगता है कि कौन-सी लड़की कैसी आएगी!

पिता ने कहा- बेटा, कोई गांव की सीधी-सादी लड़की देख लेते हैं.

जहां चाह, वहां राह.


प्रयास किया गया तो एक परिचित ने चित्रा नाम की लड़की का रिश्ता मनीष से करवा दिया.


लड़की क्या थी, बला की खूबसूरत! तीखे नैन-नक्श, गोरा रंग, छरहरा बदन, 34 इंच के स्तन, 36 इंच की गांड और 26 इंच की बलखाती कमर!

उफ्फ़ … उसे देखकर अच्छे-अच्छों का लंड खड़ा हो जाता था!


बस एक ही कमी थी कि वह ज़्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी और बेहद ग़रीब घर से थी.


मनीष के पिता बोले- अरे दहेज़ नहीं देंगे तो क्या हुआ … हम लोग भिखारी नहीं हैं! हमें तो बस एक बहू चाहिए, जो इस बिना औरत के घर को संभाल ले. एक औरत से ही घर बनता है!


इसी बात को आधार बना कर रिश्ता पक्का हो गया.


अब सब कुछ अच्छा होने की उम्मीद हो गई थी.

मनीष के सभी दोस्तों ने भी चित्रा को देख लिया.


एक दिन दोस्तों के बीच हँसी-मज़ाक चल रहा था, तभी राजेश बोला- यार मनीष, जो भी हो, तेरी किस्मत शानदार है! क्या पटाखा पत्नी मिल रही है!

आदेश ने कहा- हां यार, उसकी गांड देख कर मेरा तो खड़ा हो गया! मन किया कि साली को अभी पटक कर चोद दूँ!

पंकज बोला- जो भी हो, साली को एक दिन नंगी तो मैं भी करूँगा!


मनीष हँसते हुए बोला- सालो, यह तुम सबकी भाभी है! मेरी पत्नी है!

राजेश ने तपाक से कहा- अब वह तेरी पत्नी हो गई, तो क्या! साले, जब तू हमारी पत्नियों के साथ छेड़छाड़ करता है, तब तुझे नहीं पता कि वे तेरी भाभियां हैं! होली पर तूने रीता का ब्लाउज़ फाड़ दिया, उसकी चूचियां मसल दीं! तब नहीं सोचा!


आदेश बोला- अमिता को तो तूने नंगी ही कर दिया था! उसकी चूत में तूने उंगली तक डाल दी थी, तब यह सब नहीं सोचा था भोसड़ी के!

पंकज ने कहा- बहुत कमीना है तू! अबे, मैं तो समझता था कि तूने सिर्फ़ पूर्णिमा को नंगी किया है, पर साले, तू तो हम तीनों की पत्नियों के साथ यह सब कर चुका है!


मनीष बोला- तुम तीनों भी तो एक-दूसरे की पत्नियों को चोदते रहते हो! मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूँ क्या? मेरा हक़ नहीं है तुम्हारी पत्नियों पर?

पंकज ने तंज़ कसते हुए कहा- तो मादरचोद, फिर अपनी पत्नी के लिए क्यों चिल्ला रहा है? वह तो अब हम सबके सामने पक्के में नंगी होगी! कुछ भी हो जाए, तू ही उसे नंगी करेगा!


उनके बीच अक्सर ऐसी गंदे हँसी-मज़ाक चलते रहते थे.


फिर एक दिन मनीष की चित्रा से शादी हो गई.

आज उनकी सुहागरात थी.


दो कमरों के घर में एक कमरे में मनीष के पिता थे और दूसरा कमरा मनीष और चित्रा का था.


सुहागरात को मनीष कमरे में पहुंचा.

चित्रा लाल लहंगे में सोलह शृंगार किए बिस्तर पर बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी.


मनीष चित्रा के पास गया और उसे एक सोने की चेन देते हुए बोला- चित्रा, मेरी ओर से तुम्हारे लिए यह उपहार है!


चित्रा धीमे से बोली- जी, धन्यवाद! पर मैं कुछ नहीं ला सकी, क्योंकि हमारे पास पैसे ही नहीं थे. मुझे माफ़ कर दीजिए!


मनीष मुस्कराते हुए बोला- अरे हमारे सामने इतना खूबसूरत उपहार बैठा है! अभी हम इसे अनपैक करेंगे, सारे कपड़े खोल देंगे, तो जो दिखेगा, वह किसी उपहार से कम है क्या!


मनीष की बात सुनकर चित्रा शर्मा गई और रोमांच से भर गई.

आने वाले पलों की सोचकर उसकी चूत गीली होने लगी.


एक अनजान लड़के के सामने निर्वस्त्र होने का पहला अनुभव सोचकर उसके दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं.

तभी चित्रा बोली- सुनिए, मेरी माँ ने कहा था कि पहले मैं आपको दूध पिलाऊं, फिर आगे कुछ करना है!

मनीष ने शरारत से उसके ब्लाउज़ की ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा- ठीक है, पहले दूध पी लेता हूँ!


चित्रा ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली- अरे … मेरा मतलब यह नहीं था! आपको यह वाला दूध पीना है!


यह कह कर उसने पास रखा दूध का गिलास मनीष को दे दिया.


मनीष ने शरारत से कहा- अरे, ये वाला पीना है, मैं तो कुछ और ही समझा था यार! चलो ओके इसी को पी लेता हूँ, पर सुनो … मैं अकेले दूध नहीं पिऊंगा! एक घूँट तुम पियो, फिर एक घूँट मैं पिऊंगा!


चित्रा शर्माती हुई बोली- जी, जैसी आपकी मर्ज़ी!


दूध पीते समय चित्रा के होंठों पर दूध लग गया.

मनीष बोला- चित्रा, तुम्हारे होंठ तो मीठे हो गए हैं!

चित्रा ने शर्माते हुए कहा- जी!


जैसे ही उसने जी कहा, मनीष ने अपने होंठ चित्रा के होंठों पर रख दिए और उनका रसास्वादन करने लगा.


कुछ मिनट तक दोनों इसमें खोए रहे, फिर अलग हुए.

चित्रा ने शर्माकर नज़रें नीची कर लीं.


मनीष बोला- अभी इतने में शर्मा गई … जब नंगी होगी, तब क्या करोगी!


चित्रा बुरी तरह शर्माने लगी.

मनीष ने उसे खड़ी कर दिया और उसका घूँघट पूरी तरह से हटा दिया.


उफ्फ़ … चित्रा कितनी खूबसूरत लग रही थी!

गोरा चिकना चेहरा, लिपस्टिक लगे सुर्ख़ लाल होंठ, कजरारी आंखें!


मनीष ने चित्रा की चुनरी, जिसका घूंघट था … उसको अलग कर दिया.

चित्रा की सांसें तेज़ चलने लगीं क्योंकि वह सोच रही थी कि मनीष उसे निर्वस्त्र करने वाला है.


उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे, जो उसकी उत्तेजना को दर्शा रहे थे.


मनीष ने चित्रा के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए, पर शर्म के मारे चित्रा उन्हें ढकने की कोशिश करने लगी.

मनीष ने मौके का फायदा उठाते हुए उसके लहंगे का नाड़ा खींच दिया.


लहंगा एक ही बार में ज़मीन पर गिर पड़ा और अब चित्रा कमर के नीचे केवल पैंटी में थी.


उसकी नंगी गोरी जांघें, जिन पर उसने अपनी गांड तक मेहंदी लगाई थी, साफ दिख रही थीं.

मनीष चित्रा के चारों ओर घूमकर उसकी मेहंदी को निहार रहा था.


वह बोला- ये मेहंदी तो तुमने नंगी होकर लगवाई होगी!


चित्रा शर्म से मुस्कराती हुई बोली- जी, वह मेरी एक सहेली है, बहुत गंदी बातें करती है! उसका ही आइडिया था कि मैं मेहंदी आगे और पीछे वहां तक लगाऊं, जहां केवल आप देख सकें.


मनीष ने कहा- ऐसे नहीं, मुझे उसी की गंदी भाषा में सुनना है कि उसने क्या कहा था?


चित्रा ने अपने होंठ काटे और धीमे स्वर में बोलना शुरू किया- उसने कहा था कि जब आप मुझे चोदेंगे, तो ये मेहंदी देखकर आपको बहुत सेक्सी लगेगा!

मनीष मस्त हो गया और उसने कहा- और?


चित्रा ने आगे बताया- उस कमीनी ने मेहंदी लगाते वक्त उस रात मेरे साथ पहली बार ऐसा किया कि मैं तड़प गई!

मनीष, चित्रा से चिपकते हुए बोला- ऐसा क्या कर दिया!


चित्रा बोली- उसने मुझे अकेले कमरे में बिल्कुल नंगी कर दिया और फिर पूरे शरीर पर मेहंदी लगाई!

‘हम्म …’


‘उफ्फ! दो घंटे तक उसने मुझे बिल्कुल नंगी खड़ी रखा … जब वह मेरी चूत पर मेहंदी लगा रही थी, तो जानबूझ कर उसने अपनी उंगली मेरी चूत में घुसेड़ दी थी.’


मनीष चित्रा को चूमने लगा, इससे चित्रा की हिचक चली गई और वह बिंदास अपने पति को अपनी सहेली की गंदी हरकतों को बताने लगी.


चित्रा- उस रात उस कमीनी ने मुझे इतना बेचैन कर दिया था जी कि आप पूछो ही मत!


चित्रा यह सब बता ही रही थी कि तभी मनीष ने उसकी पैंटी भी खींच दी.

अब चित्रा कमर से नीचे बिल्कुल नंगी खड़ी थी.

वह बोली- ये अच्छी बात नहीं है! मैं कमज़ोर हूँ तो आप मेरी कमज़ोरी का फायदा उठा रहे हो!


ये सुनते ही मनीष ने ब्लाउज के हुक में हाथ फंसाकर एक झटका दिया.

ब्लाउज के सारे हुक एक ही झटके में टूट गए और चित्रा उसे संभालती रह गई.


मनीष ने चित्रा का ब्लाउज भी खींचकर अलग कर दिया.


अब चित्रा के बदन पर केवल एक ब्रा बची थी.


मनीष बोला- ये तुम खुद उतार रही हो, या इसे भी फाड़ दूं?

चित्रा बोली- जी, मैं ही उतार देती हूं! अब बचा ही क्या है, जिसकी शर्म करूं!


यह कहकर चित्रा ने अपनी ब्रा भी उतार दी.

मनीष ने अपने सारे कपड़े उतार दिए.


चित्रा ने मनीष का लंड देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं.

वह बोली- ये मेरी नन्ही सी चूत में कैसे घुसेगा?


मनीष अब पूरी तरह उत्तेजित हो चुका था.

वह बोला- चुप रह साली … अभी देख, कैसे घुसेगा!


यह कहकर उसने नंगी चित्रा को बिस्तर पर लिटा दिया.


मनीष ने उसके एक उरोज को सहलाते हुए दूसरे स्तन के निप्पल को चूसना शुरू कर दिया.


वह बारी-बारी दोनों उरोजों को मसल रहा था और चित्रा के एक निप्पल को चूस रहा था.

फिर वह धीरे-धीरे नीचे सरकता हुआ चित्रा की चिकनी चूत पर आया.

उसने चित्रा के दोनों पैर फैलाए और उसकी चूत को चाटने लगा.


जैसे ही चित्रा की चूत चटना शुरू हुई, वह बुरी तरह छटपटाने लगी.

वह सिसकारियां भर रही थी- उफ्फ! और चाटो! इस साली में बहुत खुजली है, मिटा दो इसकी खुजली … आह जाने कितनों को सोच-सोचकर ये साली फड़कती है, आज इसकी सारी फड़कन निकाल दो!

उसकी ऐसी सेक्सी बातें सुनकर मनीष को और जोश चढ़ने लगा.


उसने चित्रा की चूत में उंगली घुसेड़ दी और फिर उसे चाटने लगा.

चित्रा बुरी तरह उछल रही थी.


कुछ देर चूत चाटने के बाद मनीष अपना लंड चित्रा के मुँह के पास ले आया.


वह बोला- चल साली, मुँह खोल! तेरा मुँह चोदेगा अब मेरा ये लंड!

चित्रा बोली- प्लीज़, इसके लिए ज़िद मत कीजिए! अभी हमें खुल जाने दीजिए, फिर आपकी ये इच्छा भी पूरी कर देंगे!

मनीष बोला- ठीक है, मेरी जान आज तेरा छेद खोल कर रंडी बना दूंगा तुझे!


यह कहकर मनीष ने चित्रा की चूत पर अपना लंड रगड़ना शुरू कर दिया.


चित्रा फिर से सिसकारियां लेने लगी थी.

मनीष ने मौका देखकर अपना लंड चित्रा की चूत में घुसेड़ना शुरू किया.


जैसे-जैसे लंड घुस रहा था, चित्रा दर्द के कारण तड़प रही थी.

जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो चित्रा तड़पते हुए बोली- प्लीज़, इसे बाहर निकालो! बहुत दर्द हो रहा है!


मनीष बोला- बस दो मिनट सहन कर लो मेरी जान, फिर तुम्हें दर्द महसूस नहीं होगा!


चित्रा ने कुछ देर दर्द सहन किया और वास्तव में अब उसे दर्द कम और मज़ा ज़्यादा आने लगा था.

अब वह भी मज़े ले रही थी.


मनीष बहुत धीरे-धीरे चित्रा की चूत चोद रहा था.

चित्रा बोली- यार, थोड़ा तेज़ करो न … आह ऐसे कम मज़ा आ रहा है!


चित्रा की बात सुनते ही मनीष ने धक्के तेज़ कर दिए.

चित्रा की कामुक सिसकारियां निकल रही थीं.


उसे दर्द के साथ-साथ मज़ा भी आ रहा था.

कोई पंद्रह मिनट बाद दोनों एक साथ स्खलित हुए.

चित्रा ने पहली बार सेक्स किया था.

उसे स्वर्गिक आनन्द की प्राप्ति हुई थी.


मनीष बोला- कैसा लगा पहला इंटरकोर्स पति के साथ करके?

चित्रा मुस्करा दी और बोली- पहली बार किया, कैसे कहूँ कि कैसा महसूस हुआ! बस लग रहा था कि चलता रहे!


मनीष ने अपनी मर्दानगी पर अपना सीना चौड़ा कर लिया.


फिर चित्रा ने कहा- अच्छा, मुझे वॉशरूम जाना है!

मनीष बोला- वॉशरूम के लिए तुम्हें बाहर जाना पड़ेगा!


चित्रा बोली- ऐसे कैसे नंगी-नंगी बाहर जाऊंगी! बाहर तो पापाजी होंगे! मेरे इतने हैवी कपड़े अब फिर से पहनना मुश्किल है और मान लो पहन भी लूं, तो वॉशरूम में बहुत दिक्कत होगी!


मनीष बोला- तुम मेरा कुर्ता-पजामा पहन कर चली जाओ!

चित्रा बोली- पर बाहर पापाजी होंगे!


मनीष बोला- वे सो गए होंगे, तुम चली जाओ!

मनीष की बात सुनकर चित्रा ने उसका कुर्ता-पजामा पहना और वॉशरूम चली गई.


इन दोनों पति पत्नी की सेक्स कहानी में अभी आगे भी बहुत रस है, पर अभी के लिए इतना ही.

आपको मेरी सेक्स कहानी का यह भाग कैसा लगा, प्लीज जरूर बताएं और आपके कमेंट्स पर ही मैं यह तय करूंगा कि इसका अगला भाग लिखूँ अथवा रहने दूं!

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई

 Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई हाय . मैं फिर से हाजिर हूं।मैं आपके समक्ष एक नई कहानी बताता हूँ जब कि मै बिलासपुर स...