आंटी और उसकी दोनों बेटियों को एक साथ चोदा - Fucked aunty and her two daughters together

 आंटी और उसकी दोनों बेटियों को एक साथ चोदा

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



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हाय, मेरा नाम आलोक है, मैं बदायूँ का रहने वाला हूँ.

मैं 21 वर्ष का हूँ.

इस टीनएज वर्जिन फक स्टोरी में मैंने दो कुंवारी लड़कियों को और उनकी मम्मी को चोदा.

मेरे घर के सामने एक माल जैसी आंटी जी रहती हैं.

उनकी उम्र 46 वर्ष है.

उनकी दो बेटियां हैं.

एक का नाम अंजलि है, जो 23 वर्ष की है और दूसरी सुमन है, वह 21 वर्ष की है.

अंजलि और सुमन अलग अलग कॉलेज में पढ़ती हैं.

मैं अलग कॉलेज में पढ़ता हूँ.

अंजलि घर पर रह कर पढ़ाई करती थी, वह कॉलेज नहीं जाती थी.

आंटी का नाम रेखा है, उनके पति दिल्ली में काम करते हैं और केवल त्योहारों पर ही घर आ पाते हैं.

आंटी जी एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं.

आंटी और उनकी दोनों बेटियां देखने में बहुत सुंदर हैं.

मैं रोज रात को खाना खाने के बाद अपने घर के बाहर टहलता था.

उधर ही आंटी, सुमन और अंजलि भी टहलने आती थीं.

चूँकि वे हमारे पड़ोसी हैं, हमारी जान-पहचान पहले से थी. इसलिए मैं सबसे बात करता था लेकिन कभी गलत नजर से नहीं देखता था.

एक दिन जब मैं टहल रहा था और अंजलि से बात कर रहा था.

तभी अचानक से मेरा पैर ठोकर खा गया और मैं गिरते-गिरते बचा.

अंजलि हंस पड़ी और बोली- अभी से ये हाल है, तो आगे क्या करोगे!

मैंने भी मजाक में कह दिया- आगे तो मैं तूफान मचा दूँगा!

वह बोली- सच में … हम भी देखेंगे कि तुम आगे क्या तूफान मचाओगे!

इन बातों में आगे शब्द बड़ा ही अर्थपूर्ण था कि कौन से आगे में तूफान की बात हो रही थी.

हम दोनों ने ही इस बात को समझ लिया था और अन्दर ही अन्दर इस बात को समझ कर हंसने लगे थे.

उस दिन के बाद से हमारी ऐसी बातें होने लगीं.

मैं अंजलि से खुलकर बात करने लगा और वह भी मेरे साथ बिंदास होती गई.

एक दिन अंजलि ने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?

मैंने कहा- नहीं यार … मुझे तो कोई भाव ही नहीं देती!

अंजलि हंस कर बोली- लगता तो नहीं कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड न हो! दिखने में ठीक हो, साढ़े पांच फुट की तुम्हारी लंबाई भी ठीक है और चौड़ाई भी … मतलब एकदम हट्टे कट्टे मर्द हो!

जब मैंने उसके मुँह से एकदम हट्टे कट्टे मर्द सुना, तो मैं समझ गया कि इसके मन में कुछ चल रहा है.

मैंने लंबी सांस लेते हुए कहा- जब मैं तुम्हें इतना हैंडसम लगता हूँ, तो तुम ही बन जाओ न मेरी गर्लफ्रेंड!

मेरी बात पर वह मुस्कुराई और घर चली गई.

अब मेरे मन में उसके बारे में कामुक ख्याल आने लगे.

मैं उसके नाम की मुठ मारने लगा. मैं रोज उसके घर जाने लगा और सबसे बातें करता, लेकिन जब वह अकेली होती, मैं उसे छू लेता.

वह कुछ नहीं बोलती, बस मुस्कुरा देती.


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इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई.

आंटी जी रोज पढ़ाने जाती थीं क्योंकि वे एक प्राइवेट स्कूल की टीचर थीं.

सुमन कॉलेज चली जाती थी और अंजलि घर पर अकेली रह जाती.

मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों न इस अकेले समय का फायदा उठाया जाए.

अगले ही दिन मैं कॉलेज नहीं गया.

आंटी और सुमन के जाने के थोड़ी देर बाद मैं अंजलि के घर आ गया.

मैंने बेल बजाई.

अंजलि ने दरवाजा खोला और पूछा- आज यहां कैसे … कॉलेज नहीं गए?

मैंने उसकी चूचियों को वासना से देखते हुए कहा- आज मन नहीं था!

वह समझ गई कि मैं कुछ गड़बड़ करने वाला हूँ.

मुझसे अब रुका नहीं जा रहा था, ऐसा लग रहा था कि बस इसे यहीं पकड़ कर चोद दूँ.

वह किचन में गई और मेरे लिए चाय बनाने लगी.

मैं बाथरूम गया और मैंने जानबूझ कर दरवाजा लॉक नहीं किया.

वहां तीन पैंटी पड़ी थीं.

मैंने एक पैंटी उठाई और अपना लंड निकाल कर हिलाने लगा.

मेरा लंड अंजलि के बारे में सोचकर कड़क हो गया था.

मैंने पैंट नीचे कर दी.

एक हाथ से पैंटी सूँघ रहा था और दूसरे से मुठ मार रहा था.

मैं धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए बोल रहा था- आह मेरी जान अंजलि, एक बार तुम्हारी चूत मिल जाए, तो मेरे लौड़े को तो मजा ही आ जाए!

उसका नाम जुबान पर आते ही मेरे लौड़े में कड़कपन बढ़ गया.

मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और मुठ मारने में लीन हो गया.

इतने में अंजलि ने बाथरूम का दरवाजा थोड़ा सा खोला क्योंकि मैंने उसे पहले ही हल्का खुला छोड़ा था.

अंजलि छुपकर देखने लगी.

मैं बस दबी जुबान से अंजलि का नाम ले रहा था और मुठ मार रहा था.

फिर मैं झड़ गया.

अंजलि चुपके से किचन में वापस चली गई.

मैं भी बाहर आ गया.

अंजलि ने कहा- काफी समय लगा दिया बाथरूम में!

यह कह कर वह हंसने लगी.

हम दोनों ने चाय पी और मैं उसे छेड़ने लगा.

मुझे लग रहा था कि वह भी काफी गर्म हो चुकी थी और कोई विरोध जैसा नहीं कर रही थी.

मैं बाहर जाने लगा.

तो उसने कहा- कहां जा रहे हो?


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मैंने कहा- कुछ काम है!

वह बोली- थोड़ी देर बाद चले जाना!

लेकिन मैं चला गया और अंजलि से कह दिया- दस मिनट में वापस आ जाऊंगा!

उसने कहा- ओके मैं इंतजार करूंगी.

उसने जब यह कहा तो मैंने उसके चेहरे को नजर भर कर देखा.

देखने से साफ लग रहा था कि उसे भी चुदाई की जल्दी है.

मैं बाजार से 250 ग्राम रबड़ी लेकर वापस आ गया.

मुझे वापस आया देखकर वह बहुत खुश लग रही थी.

मैं उसके पास गया, रबड़ी एक तरफ रखी और उसे किस करने लगा.

वह किस का मजा लेती हुई कह रही थी- ये सब गलत है आलोक … क्या कर रहे हो यार?

लेकिन अन्दर से उसमें भी आग लगी थी.

कुछ ही पलों बाद वह भी मुझे किस करने में मस्त होने लगी.

फिर वह मुझे कमरे में ले गई.

मैंने उसके और उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.

उसे नंगी देखकर मैं पागल हो गया.

उसके टाइट, कड़क बूब्स, सफाचट चूत … झांटों का नामोनिशान नहीं …

चूत से ऊपर उसकी मस्त पतली कमर और गहरी नाभि देख कर मुझसे रुका ही न गया.

मैंने झट से उसे बेड पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया.

पहले मैंने उसके माथे को चूमा … फिर उसके होंठों को 5 मिनट तक चूसा.

इसके बाद मैंने बाजू में रखी रबड़ी की थैली उठाई और उसके गले पर थोड़ी रबड़ी डाल दी.

वह मस्त होकर देख रही थी.

मैंने उसके गले को किस किया, रबड़ी को चाटा और उसके मुँह में जीभ दे दी.

वह भी रबड़ी का स्वाद लेने लगी.

इस तरह से मैंने खूब सारी रबड़ी उसके चेहरे और गर्दन पर टपका और चाट चाटकर … जीभ से जीभ चटवाते हुए मजा लिया.

फिर मैंने उसके बूब्स पर रबड़ी डाली और उन्हें चूस-चूसकर लाल कर दिया.

अंजलि इतनी पागल हो गई थी कि उसके मुँह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं.

उसकी आंखें बंद थीं, जैसे वह कंट्रोल से बाहर हो गई हो.

इसके बाद मैंने रबड़ी उसकी नाभि और पेट पर डाली, उसे भी खूब चाटा.

अब उसकी दोनों जांघों पर रबड़ी डालकर चाटा … फिर टांगों को … फिर उसके पैर के पंजों को खूब चूसा और चाटा.


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इस तरह से मैंने रबड़ी का पूरा स्वाद लिया.

अब मैंने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और उसकी चूत पर रबड़ी लगाई.

इसके बाद मैंने उसकी चूत को खूब चूसा और चाटा, साथ ही उसके दाने को भी जोर-जोर से चूसा.

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर डालकर उसे अच्छे से चाटा और चूसा.

मेरे इस तरह से करने से अंजलि इस कदर पागल हो गई थी कि वह बेड की चादर को कसकर पकड़कर सिसकारियां ले रही थी.

वह चिल्ला रही थी- जानू … आह अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा … प्लीज अपनी रानी को चोद दो!

मैंने कहा- रानी जी क्या आपको इस तरह से रबड़ी खाना पसंद आया है?

उसने जवाब दिया- हां … ऐसे भी मुझे रबड़ी बहुत पसंद है!

मेरा मोटा लंड भी अब कड़क और सख्त हो चुका था.

मैंने पूछा- अंजलि जी, क्या आप मेरे लंड पर रबड़ी लगा कर उसे चूसना पसंद करेंगी?

वह मना करने लगी और बोली- मैंने कभी सेक्स नहीं किया और न ही लंड चूसा है! मुझे इसके टोपे से घिन-सी आ रही है और ये गीला भी है.

मैंने कहा- रानी जी, आपकी चूत भी तो गीली थी … फिर भी मैंने उसे खूब चाटा और चूसा! आपको तो मजा आया, लेकिन आप मुझे मजा नहीं देना चाहतीं!

वह चुप हो गई.

मैंने आगे कहा- अगर आप सेक्स का मजा लेना चाहती हैं, तो आपको किसी भी चीज से घिन नहीं करनी चाहिए!

अब मैंने ड्रामा किया और नाराज हो कर बोला- ओके, मैं घर जा रहा हूँ!

उसने मुझे रोका क्योंकि उसकी चूत में आग लगी थी.

वह चुदने के लिए तड़प रही थी.

वह बोली- जानू रुक जाओ न प्लीज!

फिर उसने मेरा लंड पकड़ा, उसे एक चुम्मी दी और थोड़ा थोड़ा चाटने लगी.

मैंने रबड़ी का पैकेट उठाया और अपने लंड पर अच्छे से रबड़ी लगाई.

मैंने कहा- रानी, आपको रबड़ी तो बहुत पसंद है! अब मेरे लंड को चूस-चूसकर सारी रबड़ी खा लो!

वह हल्के-हल्के मेरे लंड को चूसने लगी.

मैंने उसका सिर पकड़ा और पूरा लंड उसके मुँह में घुसेड़ दिया.

मैं घपाघप उसके मुँह की चुदाई करने लगा.

मुझे भी बहुत मजा आने लगा.

मैंने मदहोश होते हुए कहा- रानी … बहुत मजा आ रहा है … आपने मुझे खुश कर दिया!

इसके बाद मैंने उसके सिर से हाथ हटा लिया.

उसने कहा- राजा जी … अब आप अपनी रानी की चुदाई करके उसे खुश कर दो!

मैंने जवाब दिया- जो हुकुम रानी साहिबा जी!

अंजलि बेड पर लेट गई और मैंने उसकी दोनों टांगें फैलाकर अपना लंड उसकी चूत पर सैट कर दिया.

ये मेरा भी पहला सेक्स था.

मैंने कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था.

मैंने एक जोरदार झटका मारा और मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया.

अंजलि की चीख निकल गई और वह बोली- आह फट गई मेरी … निकालो लंड को … आह दर्द हो रहा है!

मैंने कहा- रानी जी, पहली बार सबको दर्द होता है … इसमें घबराने की कोई बात नहीं!

मैं प्यार से उसके बूब्स चूसता रहा और उसे चूमता रहा.

टीनएज वर्जिन फक शुरू होने के थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हो गया.


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मैंने धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू किया और वह भी आराम से चुदवाने लगी.

मैंने एक बार फिर से झटका मारा.

इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

वह फिर से चिल्लाने लगी- मर गई … मर गई … इसे जल्दी निकालो!

मैंने उसे समझाया, चूमा और उसके बूब्स चूसे.

थोड़ी देर बाद वह सामान्य हो गई और मजे से चूत चुदवाने लगी.

वह कामुक स्वर में बोली- चोदो राजा जी … आह अपनी रानी को पेल दो … आज मेरी प्यास बुझा दो!

वह खूब चूत उठा-उठाकर चुदवाने लगी.

इस तरह मैंने उसे 20 मिनट तक चोदा और कहा- मेरा निकलने वाला है … रबड़ी कहां निकालूँ?

उसने कहा- बाहर निकालो!

मैंने लंड बाहर निकाला और उससे कहा- मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाओ!

वह मेरे लंड के सामने बैठ गई और उसे हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी.

इस तरह मेरा वीर्य उसके मुँह पर गिर गया.

वह नाराज होकर बोली- आपने बताया नहीं कि निकलने वाला है … वरना मैं लंड का मुँह नीचे कर देती!

मैंने कहा- मैं कहने ही वाला था, लेकिन तब तक वीर्य निकल गया!

मैंने उससे सॉरी कहा और उसे मना लिया.

हम दोनों बाथरूम में नहाने चले गए.

मैंने उसके शरीर को खूब धोया और उसने मेरे शरीर को.

इसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और घर चला गया.

इस तरह मैं हफ्ते में एक दिन छुट्टी लेता और अंजलि की चूत को रबड़ी के साथ मारता.

एक दिन मैंने छुट्टी ली, जैसा कि मैं हफ्ते में एक दिन करता हूँ. मैं बाजार गया और रबड़ी के साथ एक सेक्स की गोली लेकर आया.

मैं अंजलि के घर पहुँचा और बोला- आज मैं तुम्हें खूब चोदूँगा क्योंकि आज मैं सेक्स की गोली लेकर आया हूँ!

अंजलि ने कहा- ठीक है आओ कमरे में!

मैंने रबड़ी और गोली उसे दे दी.

उसने उन्हें एक तरफ रख दिया.

फिर हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारे और रबड़ी उठाकर मैंने अंजलि के होंठ, बूब्स और चूत चूसना शुरू कर दिया.

मैं दस मिनट तक चूसता रहा.

तभी एक आवाज आई- तुम ये क्या कर रहे हो?

मैं और अंजलि चौंक गए. देखा तो पता चला कि सुमन आज कॉलेज से जल्दी लौट आई थी.

अंजलि के घर की तीन चाबियां हैं.

एक अंजलि के पास, एक सुमन के पास और एक अंजलि की मम्मी रेखा के पास रहती थी.

सुमन हमें पांच मिनट से देख रही थी.

उसने बाद में मुझे बताया कि वह सब देख रही थी.

सुमन बोली- आलोक तुम क्या कर रहे हो दीदी के साथ … तुम्हें शर्म नहीं आती? और दीदी आपको भी!

अंजलि ने जल्दी से कपड़े पहन लिए.


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फिर जैसे ही मैंने अपने कपड़े उठाए, सुमन ने उन्हें छीन लिया और बोली- मैं आज तुम्हें नंगा सड़क पर घुमाऊंगी और सबके सामने तुम्हारी बेइज्जती करूँगी!

मैं डर गया और उसके पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाने लगा- प्लीज सुमन जी … मुझे माफ कर दो!

अंजलि ने भी कहा- सुमन … प्लीज हमें माफ कर दो!

तब सुमन ने अंजलि से कहा- दीदी, तुम इस कमरे से जाओ … मैं इस आलोक को देखती हूँ!

अंजलि दूसरे कमरे में चली गई.

फिर सुमन ने मुझसे कहा- मैं तुझे माफ तो कर दूँगी, लेकिन मेरी बात माननी पड़ेगी!

मैंने कहा- सुमन जी जो आप कहोगी, मैं वही करूँगा!

सुमन ने कहा- तो चल मेरे पैर चाट!

मैं कुत्ते की तरह उसके पैर चाटने लगा.

फिर उसने अपने सारे कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं चौंक गया कि ये क्या कर रही है.

उसने मेरी तरफ वासना से देखते हुए कहा- जैसे तू अंजलि को चाट रहा था, वैसे ही मुझे भी चूस और चाट. मैं तुम दोनों को 5 मिनट से देख रही थी कि कैसे तुम अंजलि को चूस और चाट रहे थे!

मैंने झट से रबड़ी उठायी और अंजलि की तरह सुमन को भी चूसने और चाटने लगा.

कुछ मिनट बाद उसकी मम्मी आ गईं और उन्होंने मुझे सुमन के साथ यह सब करते हुए देख लिया.

रेखा आंटी बोलीं- ये क्या हो रहा है सुमन!

सुमन झट से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी.

मैंने जैसे ही अपने कपड़े उठाए, वैसे ही आंटी जी ने कपड़े छीन लिए.

उन्होंने कहा- जब यह सब काम कर रहा था, तब तो तुझे शर्म नहीं आयी … अब तुझे शर्म लग रही है!

आंटी जी ने अंजलि को आवाज लगायी और अंजलि कमरे में आ गयी.

आंटी जी ने कहा- देख अंजलि, इन दोनों के काले काम!

मैं आंटी जी के आगे गिड़गड़ाने लगा कि मुझे माफ कर दो.

पर आंटी जी कह रही थीं कि तुम्हें माफ नहीं करूँगी. तुम्हें आज पूरे मोहल्ले में नंगा घुमाऊंगी.

वे भी मुझे माफ करने को तैयार नहीं थीं.

फिर आंटी जी ने अंजलि से कहा- किचन में जाओ और मेरे लिए जूस ले आओ.

तभी अंजलि के मन में एक आइडिया आया और उसने सेक्स की गोली का पत्ता निकाला और लेकर किचन में चली गई.

ये सेक्स दवा में लेकर आया था, पर मैंने दवा अब तक खायी नहीं थी.

अंजलि ने चुपके से दो गोलियां पीसकर जूस में डाल दीं और वह आंटी जी को जूस का गिलास देने आ गयी.

उसने मेरी आंखों में देखते हुए एक छिपा हुआ इशारा दिया और अपनी मम्मी को गिलास देते हुए कहा- लो मम्मी जी, जूस!

आंटी जी ने काफी सारा जूस पी लिया.

गिलास में उन्होंने थोड़ा सा रस छोड़ दिया था.

उन्होंने मुझसे कहा- ले, बाकी का तू पी ले.

मैंने वह जूस पी लिया.

मैं उस वक्त सोच रहा था कि आज ऐसा क्या हो गया था कि ये दोनों जल्दी घर आ गईं.

मुझे बाद में मालूम चला कि उस दिन बदायूँ शहर में कुछ था इसीलिए उस जिले के सारें स्कूल, कॉलेज जल्दी बंद हो गए थे.


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मुझे और अंजलि को इस बात का पता नहीं था और इसीलिए आंटी जी, सुमन जल्दी घर आ गई थीं.

इस वजह से मेरा तमाशा बन गया था.

जूस पीने के 15 मिनट बाद आंटी जी को कुछ होने लगा और आंटी जी ने सुमन और अंजलि को बाजार से कुछ ऐसा लाने को कहा, जिस काम में कम से कम एक घंटा लगे.

अंजलि मामले को समझ चुकी थी कि मम्मी जी पर अब सेक्स की गोली को असर होने लगा है.

अंजलि और सुमन दोनों बाजार चली गईं.

तब आंटी जी ने मुझसे कहा- मैं तुझे माफ तो कर दूंगी, पर मैं जो कहूँगी वह तुझे करना पड़ेगा.

मैं राजी हो गया और मैंने कहा- हां बोलिए!

आंटी ने कहा- अगर तू मुझे खुश कर देगा तो मैं तुझे माफ कर दूंगी!

मैं चौंक गया कि आंटी जी यह क्या कह रही हैं.

मैंने कहा- कैसे खुश करूँ मैं आपको?

उन्होंने कहा- साले लवड़े … ज्यादा बन मत … चल जल्दी से मेरी चूत चोद कर मुझे ठंडी कर दे.

मैंने तुरंत उनके सारे कपड़े उतारे और अंजलि की तरह उन्हें भी चूसने चाटने लगा.

दस मिनट बाद सुमन और अंजलि आ गईं और हम दोनों को सेक्स करते हुए देख लिया.

अंजलि ने भी ये ही सोचा था और वही हो भी गया.

अंजलि केवल बाजार जाने की कह कर यूं ही कुछ देर ठहल कर लौट आयी थी.

उसे तो पता ही था कि उसने मम्मी को सेक्स की गोली खिला दी है और उसका असर जब शुरू हो गया होगा.

उसने अपनी बहन सुमन से कहा कि मम्मी ने हम लोगों को बाजार ऐसे काम के लिए भेज दिया, जिसमें कम से कम 1 घंटा लगे.

सुमन ने कहा- इसका क्या मतलब हुआ?

फिर अंजलि ने उसे सारी कहानी बतायी कि ऐसा किया है उसने!

अब वे दोनों अपनी मां चुदती देखने वापस आ गई थीं.

आंटी जी नंगी होकर मुझसे मजा ले रही थीं.

आंटी जी ने अपनी दोनों लड़कियों को वापस आया देखा तो वे हड़बड़ा गईं.

लेकिन अंजलि ने आंटी जी को सब बताया कि कैसे आलोक ने मुझे चोदा और सुमन के साथ कैसे आलोक ने चुम्मा चाटी की … सुमन के शरीर को भी रबड़ी लगा कर चूसा.

अंजलि और सुमन ने आंटी से कहा- मम्मी, हम दोनों को भी बहुत प्यास लगी है सेक्स करने की!

तब आंटी ने कहा- अंजलि, तेरे पापा तो बहुत कम आते हैं और मुझे भी सेक्स करने की बहुत इच्छा होती है. क्यों न हम लोग आलोक से ही अपनी-अपनी प्यास बुझा लें!

फिर मैंने एक-एक करके दोनों बेटियों और उनकी मम्मी को चोदना चालू कर दिया.

मैंने सबको नंगी कर दिया और सबसे पहले अंजलि को चूसने लगा, फिर उसकी चूत चाट कर उसे चोदने लगा.

उसके बाद मैंने आंटी को चोदा.

फिर मैंने उसी दिन सुमन की सील तोड़ी.

चूंकि उस दिन मैंने भी दो गोली खा ली थीं तो मेरे लौड़े से पानी ही नहीं निकल रहा था.

उस दिन के बाद से दोनों बेटियां और उनकी मम्मी मेरे तगड़े लंड की दीवानी हो गईं.

हफ्ते में एक दिन मैं उन दोनों बेटियों और उनकी मम्मी को एक साथ चोदता था.

पर अब वे लोग दिल्ली चले गए, तो अब उनकी य़ाद आने पर मैं सिर्फ मुठ मार लेता हूँ.


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