चालू भाभी को उसके घर में जाकर चोदा
फ्रेंड्स, मैं शाम सिंह.
मैं एक प्राइवेट जॉब करता हूँ.
जिस स्टोर में मैं काम करता था, वह मध्यम वर्गीय लोगों के रिहायशी इलाके के पास जरूर था … लेकिन मेन मार्केट में था.
आसपास मेरे स्टोर जैसी कोई दूसरी दुकान नहीं थी,इसलिए आसपास के लोगों और दुकानदारों में मेरे स्टोर को लेकर एक खास क्रेज था.
उनमें से एक दुकानदार से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई.
उसका खुद का कॉस्मेटिक्स का स्टोर था और उसकी दुकान पर काफी महिलाएं मतलब भाभियां, आंटियां और लड़कियां आती रहती थीं.
उसकी दुकान उस इलाके में बहुत पुरानी थी जबकि हमारा स्टोर नया था.
एक दिन मेरा वह दोस्त जो कॉस्मेटिक्स का स्टोर चलाता था, मेरे स्टोर पर आया.
मैं अपने स्टोर के छोटे से ऑफिस में रोजाना का काम कर रहा था.
वह मेरे साथ बैठकर दुकान और अन्य लोगों की बातें करने लगा.
तभी उसके फोन पर किसी का कॉल आया.
उसने फोन पर कहा- मैं अपने दोस्त के स्टोर पर बैठा हूँ, तुम यहीं आ जाओ!
थोड़ी देर बाद एक महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ मेरे ऑफिस में आई और उससे बात करने लगी.
उस वक्त मेरे ऑफिस में सिर्फ तीन लोग थे: मैं, मेरा दोस्त और वह महिला (अपने दो छोटे बच्चों के साथ).
उस महिला के बारे में बताऊं तो वह कहीं से भी दो बच्चों की मां नहीं लग रही थी.
मतलब अगर उसके साथ बच्चे न होते, तो कोई नहीं कह सकता था कि वह शादीशुदा है या बच्चों वाली है.
उम्र में वह 20 या 21 साल की एकदम सील-पैक लड़की जैसी लग रही थी.
फूल जैसी खूबसूरत, गुलाबी गाल, उसकी छाती एकदम टाइट … कम से कम 34 साइज की, कमर पतली लगभग 28 या 29 और नितंब शायद 36 साइज के होंगे.
मैं उसे देखकर उसका दीवाना हो गया.
अचानक मेरे दोस्त ने उसे पकड़ा और उसके स्तनों को दबाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा.
उसे इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं थी कि वह ऑफिस में अकेला नहीं है.
दो मिनट तक मेरे दोस्त ने उसकी छातियां दबाईं और खींचकर उसके होंठों पर चुम्मी ली.
उस महिला को भी जरा भी शर्म नहीं आई कि उनके अलावा कोई और भी उन्हें देख रहा है.
बाद में मेरा दोस्त उससे अलग हुआ और उसने उस महिला से मेरा परिचय करवाया.
चूँकि यह सारा वाकिया मेरी आंखों के सामने हुआ था … तो मैं हक्का-बक्का रह गया था.
मैंने उस महिला से हाथ मिलाया और फिर मेरा दोस्त और वह महिला अपने बच्चों के साथ वहां से चली गई.
इसके बाद मैं अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त हो गया.
उस स्टोर पर मैं करीब दो साल रहा.
इस दौरान कई महिलाओं, भाभियों और लड़कियों से मेरी सिर्फ दोस्ती हुई.
उनकी नजरों में मैं एक निहायत शरीफ, सलीकेदार और मजाकिया किस्म का मैनेजर ही था.
दो साल बाद मैंने वह कंपनी छोड़ दी और दूसरी कंपनी जॉइन कर ली.
मेरा नया स्टोर शहर के दूसरे कोने में था.
अब मैं नई जगह नौकरी करने लगा था.
लेकिन मन के किसी कोने में उस ऑफिस वाली भाभी से मिलने की कसक थी.
पुराने स्टोर के पास कॉस्मेटिक्स वाले दोस्त से मेरी दोस्ती वैसी ही बनी रही.
मैं हर हफ्ते या पंद्रह दिन में उससे मिल भी लिया करता था.
एक दिन मजाक में मैंने उसे उस ऑफिस वाली घटना की याद दिलाई.
उसने बताया- उस भाभी को मैं कई बार रगड़ चुका हूँ, मतलब चोद चुका हूँ!
मैंने भी मजाक में कहा- यार, एक बार मेरी भी बात करवा दे उस भाभी से!
इस पर उसने बताया कि वह क्या … उसके स्टोर पर कई महिलाओं और भाभियों से उसके जिस्मानी रिश्ते हैं.
खैर … मेरे जोर देने पर उसने अपने फोन से ही मेरी बात उस भाभी से करवा दी.
उसने मुझे तुरंत पहचान लिया.
आप भी सोच रहे होंगे कि मैं अंतर्वासना पर क्या सुना रहा हूँ. अभी तक किसी के लंड ने तुनका तक नहीं मारा होगा, किसी भाभी ने अपने मम्मे (स्तन) नहीं रगड़े होंगे, न ही किसी ने पैंटी में हाथ डालकर चूत को सहलाया होगा.
लेकिन मेरा यकीन मानिए, आपको खतरनाक लेवल वाला मजा आएगा.
जब मेरे कॉस्मेटिक्स वाले मित्र ने मेरी उस भाभी से अपने फोन पर बात करवाई, तो हम दोनों ने अपने नंबर शेयर कर लिए.
मैंने अपने कॉस्मेटिक्स की दुकान वाले मित्र को आभार जताया तो उसने मुझसे कहा- भाई इस भाभी के अलावा और किसी और भाभी से भी मित्रता करनी हो, तो मुझे बोल देना.
परन्तु मेरे मन में तो एक ही भाभी अटकी हुई थी जो मेरे ऑफिस में इसके साथ चुम्मा-चाटी कर चुकी थी.
इस मित्र ने एक अजीब-सी बात और बताई कि जब मैं इस भाभी से मिलूँ, तो कुछ भी करूँ … बस उसके ब्लाउज में हजार रुपये डाल दूँ.
मैं उसके पास से हट कर अपने फोन से भाभी को फोन लगाया.
उसने एक बार में ही फोन उठा लिया!
थोड़ी-बहुत जानकारी देने के बाद हम दोनों बातें करने लगे.
उसके बारे में बात हुई, फिर मैंने फोन रख दिया.
अब मेरी उससे रोज़ दो-ढाई घंटे बात होने लगी.
धीरे-धीरे मुझे उसके शरीर के साइज़ के बारे में, उसके और उसके पति के साथ शारीरिक संबंधों के बारे में सब कुछ पता चल गया.
उसका साइज़ 34C-29-36 का था. उसकी उम्र भी 31 साल थी. 23 साल की उम्र में उसकी शादी हो गई थी.
शादी के बाद तीन साल तक पति ने उसे खूब चोदा, हर आसन में चोदा, घर के हर कोने में चोदा!
पहले बच्चे के बाद उसकी चूत थोड़ी खुल गई.
कुछ काम-धंधे का बोझ, जो आदमी मौका मिलते ही उसको कहीं भी चोद देता था.
कभी घोड़ी बनाकर, कभी रसोई में खाना बनाते हुए, बच्चे को दूध पिलाते हुए.
वह अब भी उसे चोदता, पर रूटीन में … जैसे अपना खड़ा किया और खुद के फारिग हो जाने के बाद सो जाना.
भाभी को चरमसुख मिला या नहीं, इससे उसे कोई मतलब नहीं था.
इस बीच भाभी अपने लिए कॉस्मेटिक्स लेने मेरे मित्र की दुकान पर आने-जाने लगी, तो मेरे मित्र के साथ वह फँस गई.
एक-दो बार उसकी ही दुकान में वह चुदी,
एक-दो बार किसी होटल में या किसी दूसरे मित्र के घर पर.
इस सबके बाद मेरा मित्र उस भाभी को उसके घर में चोदने लगा.
ये सारी बात उस भाभी ने ही मुझे बताई.
बातों ही बातों में उसने मुझसे मिलने की इच्छा जताई.
तो मैंने टाल दिया.
इसके बाद जब भी बात होती, वह मिलने को कहती और मैं हर बार मना कर देता.
एक दिन बहुत ही गर्मागर्म फोन सेक्स के बाद उसने मुझसे मिलने को कहा.
मैंने और दिनों की तरह उसे मना कर दिया.
तो वह गुस्सा हो गई.
वह बोली- क्या बात है जो तू मुझसे मिलना नहीं चाहता!
मैंने बात टालनी चाही, तो वह फोन पर ही अड़ गई कि या तो तू मुझसे मिल, या बात बता!
फिर मैंने कहा- मन तो मेरा भी है, लेकिन मेरी औकात नहीं है तुमसे मिलने की!
वह इस बात पर चौंक गई और पूछने लगी.
तब मैंने बोला कि जब कॉस्मेटिक्स वाले मित्र ने मुझे तुम्हारा नंबर दिया, तो एक बात कही कि जब मैं तुमसे मिलूँ … तो उसके ब्लाउज में हजार रुपये डाल दूँ!
वह सुनकर चुप रही.
मैंने कहा- मेरे पास पैसे नहीं हैं!
इस बात पर वह बिदक गई और बोली- क्या मैं तुझे धंधे वाली लगती हूँ? क्या मैं रंडी हूँ!
मैंने उसे समझाया कि इसी वजह से मैं मिलने नहीं आ रहा!
अब वह मेरे पीछे पड़ गई और बोली- तुझे अभी आना होगा!
ज़्यादा पीछे पड़ने पर मैं राज़ी हो गया.
मैंने उसके घर का पता लिया तो मेरी फटी!
क्योंकि उसका घर ऐसे मोहल्ले में था, जहां हर वक्त चहल-पहल रहती थी.
मुझे डर लगने लगा कि अगर मैं चूत के चक्कर में उसके घर गया और अगर उसका पति आ गया तो मैं भयंकर पिटूँगा और बेइज़्ज़ती होगी सो अलग!
लेकिन इस लंड-चूत के मिलन में अच्छा-खासा आदमी बावला हो जाता है … फिर मैं किस खेत की मूली हूँ!
खैर … मैंने मोटरसाइकिल पर उसके मोहल्ले की रेकी की और मोहल्ले के बाहर से उसे फोन किया.
उस भाभी को उसके घर के पास पहुंच कर मैंने उसे फोन किया.
उसने फोन उठाकर कहा- मैं बाज़ार की तरफ से चौक के रास्ते गली में आऊंगी! चाय की टपरी से तीसरे मकान के नीचे मेरी आवाज़ का इंतज़ार करो!
साथ ही उसने हिदायत दी कि जैसे ही मुझे उसकी आवाज़ सुनाई दे, मैं दरवाज़ा (जो खुला होगा) धक्का देकर अन्दर घुस जाऊं.
अन्दर घुसते ही उलटे हाथ पर एक जीना होगा, उस पर चढ़कर पहली मंजिल पर पहुंच जाऊं और वहां सामने वाले कमरे में घुसकर अलमारी के पीछे छिप जाऊं.
यह सुनकर मेरी फटी कि बहन का लौड़ा इससे मिलना तो पूरा बवाल है!
तभी उसकी आवाज आई कि बाकी बात बाद में बताऊंगी!
यह कहकर उसने फोन काट दिया.
मैं फुद्दू-सा उसकी बात सुनता रहा और बाइक को मार्केट में सही जगह खड़ी करके, चौक से गली में घुसकर चाय की टपरी से तीसरे मकान तक पहुंचा.
तभी मुझे एक सुरीली-सी आवाज़ सुनाई दी- मम्मी जी, मैं नहाने जा रही हूँ!
आवाज़ सुनते ही … जो मेरे लिए इशारा थी, मैंने दरवाज़ा धक्का दिया.
उलटे हाथ पर जीना था, मैं उस पर चढ़ गया.
पहली मंजिल पर पहुंचा तो सामने दस कदम पर एक कमरा था.
मैं उसमें घुसकर अलमारी के पीछे छिप गया.
अन्दर घुसकर देखा, कमरा अच्छा-खासा बड़ा और साफ-सुथरा था.
अन्दर पहुंच कर मैंने चैन की सांस ली.
परन्तु सोचते ही मेरी हालत खराब होने लगी.
मैं किसी ऐसी महिला के घर में था, जिसके घर में उसकी मां (बाद में पता चला कि वह उसकी सास थी) मौजूद थी.
अगर उसे पता चल गया कि उसकी बहू को कोई गैर मर्द चोद रहा है या चोदने आया है, तो मेरी हालत गली के कुत्ते से भी बदतर हो जाएगी!
फिर दिमाग में आया कि अगर भाभी का पति ही आ गया, तो मेरा कितना भूत बनेगा!
मेरी भयंकर तरीके से फटी पड़ी थी. मैं यही सब सोचने लगा कि एक चूत चोदने के लिए इतना रिस्क क्यों लिया जाए?
अभी मैं यह सब सोच ही रहा था कि दरवाज़ा खुलने की आवाज़ हुई.
मैं घबराया हुआ अलमारी के पीछे ही रहा.
दोबारा आवाज़ हुई, तो महसूस हुआ कि दरवाज़े को बंद कर कुंडी लगने की आवाज़ थी.
फिर कमरे में लाइट जली और भाभी ने अलमारी के पीछे झांका.
मुझे घबराया हुआ देखकर उसने झट से मेरे गले में हाथ डाल दिया.
यहां मैं आपको बता दूँ कि मैं साधारण-सा व्यक्तित्व का मालिक हूँ.
मेरा कद 5 फीट 7 इंच है, शरीर वैसा ही है जैसा आम जन का होता है.
उस कटीली भाभी का कद लगभग 5 फीट 1 या 2 इंच होगा.
गले में हाथ डालने के लिए वह उछली, तो मैंने पहली बार उसके शरीर को छुआ.
क्या मखमली, गुदाज़ शरीर था!
लगभग 5 मिनट तक वह मुझसे होंठों से होंठ मिलाकर कभी मेरी जीभ चूसती, कभी अपनी जीभ चुसाती रही.
फिर दोनों सांस लेने के लिए अलग हुए.
मैंने उससे पूछा- नीचे घर में कौन है?
उसने बताया- मेरी सास है!
मैंने फिर पूछा- अगर उसे पता चल गया, तो तुम्हारे लिए भी कलेश हो जाएगा!
उसने कहा- मेरी सास अपने जोड़ों के दर्द की वजह से कम चलती-फिरती है. वह न तो ऊपर आएगी, न ही कमरे से बाहर निकलेगी. अभी मैंने उसे नहाने की बात बोल दी है, तो उसे पता है कि मैं आधे-पौने घंटे से पहले नहीं निकलूँगी!
फिर मैंने अपने दो और डाउट पूछे- तुम्हारा पति और बच्चे कहां हैं?
उसने बताया- मेरा पति इस वक्त कम से कम 50 किलोमीटर दूर है. उसे आने में 2 से 3 घंटे लगेंगे. ब/च्चों को स्कूल से एक बजे लेने जाऊंगी!
सब सुनने के बाद मेरी जान में जान आई.
मैं वहीं एक सोफे पर बैठकर भाभी से बोला- जल्दी नहा ले!
मैं यहीं बैठा हूँ, दोनों फ्रेश होकर प्यार करेंगे!
उसका जवाब सुनकर मैं चौंक गया.
‘मैं तो कब की नहा चुकी हूँ! मैं तो बस तेरा ही इंतज़ार कर रही थी!
यह सुनकर मैं बड़ा खुश हुआ.
सारी टेंशन दूर हो चुकी थी तो मैं रिलैक्स होकर बैठ गया.
मैंने भाभी को अपने पास आने का इशारा किया.
लगभग 2 साल पहले उसे किसी और के साथ चुम्मी लेते-देते देखा था.
आज देखा, तो जरा भी फर्क नहीं आया, बल्कि वह और खूबसूरत हो गई थी!
बिल्कुल गुलाबी, हल्की-फुल्की, उसके उरोज सूट में ही काफी खूबसूरत दिख रहे थे.
पेट बिल्कुल सपाट, पर हल्की चर्बी से भरा हुआ और चूतड़ टाइट, पर बर्फ के फाहों जैसे मुलायम.
वह धीरे-धीरे चलकर मेरे पास आई.
दोबारा हमारे अधर मिले, मेरे हाथ मचल उठे.
वह मेरे पैरों पर दोनों तरफ पैर फैलाकर बैठ गई.
हम एक-दूसरे को होंठों से टटोल रहे थे.
मेरा हाथ उसकी पीठ पर पहुंचा, तो महसूस हुआ कि उसने ब्रा पहनी थी.
मैं उसकी पीठ पर हाथ फेरता हुआ नीचे उसके नितंबों को सहलाने लगा.
मैं धीरे-धीरे उसके होंठों को, गालों को, कान की लौ को, माथे को, गले को, ठोड़ी को, कंधों को चूमने, चाटने और काटने लगा.
बीच-बीच में मेरे हाथ उसके दोनों कलशों को मींजने और चूतड़ों को सहलाने में लगे थे.
अभी तक मैंने उसके किसी कपड़े को उतारने की कोशिश भी नहीं की थी.
वह उत्तेजित हो रही थी, मेरे सिर को पकड़ कर बाल खींच रही थी.
बदले में उसने भी मुझे चूसना, चाटना और काटना शुरू कर दिया.
अचानक वह रुकी और मेरी गोद से उठ गई.
कमरे के कोने में एक नल था, उसके नीचे बाल्टी लगाकर उसने नल धीरे से चला दिया, ताकि लगे कि वह कमरे में नहा रही है.
मैं उसकी इस हरकत पर हंस पड़ा, तो वह भी हंस पड़ी.
मैं सोफे से उठा और इस फूल को गोद में उठाकर, उसके होंठों का रसपान करते हुए उसे नंगी किया और कमरे में ही एक दीवान पर लिटा दिया.
भाभी को दोबारा देखा, क्या शरीर था उसका!
सांस चढ़ने की वजह से उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे, मैं बयान नहीं कर सकता.
मैंने अपने कपड़े उतारे और उसके ऊपर छा गया.
उसने भी मेरे लौड़े को पकड़ कर अपनी चुत से रगड़ना शुरू कर दिया.
लंड और चुत दोनों पानी से सराबोर थे तो लौड़े ने चुत की फांकों में अपना मुँह फंसाया और उसी वक्त मेरी कमर ने झटका दे दिया.
उसकी आवाज आई ‘आह मर गई … धीरे!’
मैंने कहा- तुम मरोगी नहीं यह जानता हूँ.
वह हंस दी और हम दोनों मस्ती का झूला झूलने लगे.
करीब बीस मिनट तक जोरदार रगड़ में वह दो बार झड़ी और जब मैं झड़ा तो वह पूरी संतुष्ट हो गई.
उसने चुम्मा लेते हुए कहा- हम्म … लंबी रेस के घोड़े हो … मजा आ गया!
मैंने उसके मस्तक पर चूमा और कहा- थैंक्स जान.
वह बोली- अब तो तेरी चड्डी में मुझे हजार रुपए डालने चाहिए!
मैं हंस पड़ा.
कृपया रुकें, कहानी लिखते लिखते वह दृश्य दोबारा आंखों के सामने आ गये है और मेरे पप्पू महाराज कह रहे हैं कि मेरा भी ख्याल करो, तो मुझे अपना हाथ जगन्नाथ करना है. मैं जा रहा हूँ हस्तमैथुन करने … क्योंकि मेरी वामांगनी जी महीने से हो गयी हैं.
जल्द मिलते हैं

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