यह कहानी मेरी जिंदगी का एक कड़वा सच है This story is a bitter truth of my life.

 दोस्तो … मेरा नाम अवी है (बदला हुआ नाम)

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां

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मैं 22 साल का हूँ और मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच है.

मैं सहारनपुर से 26 किलोमीटर दूर एक कस्बे का रहने वाला हूँ.

यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.

मामी फक स्टोरी में अगर मुझसे कोई गलती हो जाए, तो कृपया माफ कर दीजिएगा!

यह कहानी मेरी जिंदगी का एक कड़वा सच है.

मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था और जिसके साथ किया, वे दूर के रिश्ते में मेरी मामी लगती थीं.

उनका नाम रूबी (बदला हुआ नाम) है.

हमारे पास तीन कमरे थे जिनमें किरायेदार रहते थे.

मेरे मामा और मामी हमारे घर में ही रहते थे.

मामा मामी का कमरा मेरे कमरे के बगल में ही था.

उनकी शादी को 5 साल हो गए थे पर उन्हें बच्चा नहीं हो रहा था.

जिसकी वजह से उनके घर के लोग उन्हें ताने मारते थे.

उनका हमारे घर में रहने का यही कारण था.

यह बात उस समय की है जब मैं और मामा (रूबी मामी के पति) हरिद्वार में एक ही कंपनी में काम करते थे.

उधर का काम ठेके पर चल रहा था तो हम दोनों शाम को सहारनपुर वापस आ जाते थे.

उस समय मैं एक लड़की से बात करता था, जो बुलंदशहर के पास की थी.

हमारी बात गलत नंबर लगने से शुरू हुई थी.

मैं उस लड़की से बात करता था तो मामी को बुरा लगता था जो मैंने नोटिस किया था.

एक दिन वे मुझसे खुल कर इस बात को लेकर कहने लगीं- तुम उस लड़की से क्यों बात करते हो?

मैंने कहा- अरे मामी, उससे कोई टेलीफोन से थोड़ी न कुछ कर लूँगा … वह तो बस टाइम पास करने के लिए बात करता हूँ.

यह सुनकर मामी बोलीं- फिर टाइम पास करने के बाद क्या करते हो?

मैं समझ गया कि मामी के कहने का आशय क्या है. वे शायद मुझे मुठ मारते हुए देख चुकी थीं.

हालांकि कुछ समय बाद उस लड़की के घर वालों को भी इस बात का पता चल गया और हमारी बात बंद हो गई.

मैं अकेला सा हो गया था.

कुछ समय बाद मैंने मामी के साथ समय बिताना शुरू किया.

फिर मैंने सोचा, क्यों ना मामी को पटाया जाए … तो मैंने मामी पर लाइन मारना शुरू कर दिया.

मुझे मामी का साइज तो नहीं पता था, पर वे थोड़ी गदरायी हुई थीं तो किसी अप्सरा से कम नहीं लगती थीं.

उनकी गांड इतनी मस्त थी कि जो देख ले, बस उन्हें एक बार चोदना जरूर चाहे … और उनके बूब्स इतने बड़े थे कि मैं तो उन्हें देखकर ही पागल हो गया था.

एक महीने तक मैंने उनकी खूब तारीफ की.

फिर एक दिन मैंने उनसे कहा- मामी, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो … क्या आप मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?

उन्होंने गुस्सा तो नहीं किया लेकिन मना कर दिया.

मुझे लगा कि थोड़ा और जोर लगाऊं, तो बात बन सकती है.

मैंने ऐसा ही किया और अगले दिन फिर से बोला.

इस बार थोड़ा जोर देने पर वह मान गईं!

कुछ समय तक ऐसे ही चलता रहा.

एक दिन मैंने उन्हें किस करने के लिए कहा.

तो उन्होंने मना कर दिया.

मैंने मनाने की कोशिश की, पर वे नहीं मानीं.


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सितंबर में मैं किसी वजह से घर वापस आ गया.

अब साइट पर काम में तेजी आ गई थी तो मैं ज्यादा समय उधर ही गुजारने लगा था.

जब मैं वापस जा रहा था, तो वे बोल रही थीं कि मत जा!

पर मेरा जाना जरूरी था.

जब मैं घर आ गया तब भी उन्होंने मुझे फोन किए पर मैं नहीं जा पाया.

पांच महीने बाद मैं वापस हरिद्वार आ गया.

मैं बहुत ज्यादा खुश था पर मेरे आने से वे उतनी खुश नहीं थीं.

मुझे लगा कि कुछ तो गड़बड़ है.

दस दिन बाद मुझे पता चला कि उनकी मकान मालिक के भतीजे के साथ बात चल रही थी.

मैं जिंदगी में पहली बार इतना रोया था.

जब उन्हें पता चला कि मुझे सब पता चल गया है.

तो वे बोलीं- किसी को मत बताना, तू जो बोलेगा … मैं वह करूँगी!

मैंने सोचा कि छोड़ो ये रोना-धोना … जो होना था, सो हो गया.

तो मैंने उनसे कहा- पहले आपको उसे (मकान मालिक के भतीजे) छोड़ना होगा!

वे मान गईं और बोलीं- आज रात 10 बजे मेरे कमरे में आना … आज तेरे मामा हरिद्वार गए हैं.

मैंने कहा- ठीक है!

रात 10:15 बजे मैं अपने कमरे से बाहर निकला तो देखा कि बाहर कोई नहीं था.

मैं मामी के कमरे में चला गया.

मेरे अन्दर आते ही मामी ने दरवाजा बंद कर दिया और अपनी पायलें निकाल कर साइड में रख दीं ताकि शोर न हो.

मैंने मामी को पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन पर किस करने लगा.

मेरा लंड खड़ा होकर उनकी गांड पर लग रहा था.

फिर चूमते-चाटते मैंने उन्हें सीधा किया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

वे छूटने लगीं तो मैंने उन्हें पकड़ लिया.

वे बोलीं- पहले लाइट बंद कर देती हूँ, कोई दरवाजे से देख लेगा!

उन्होंने लाइट बंद कर दी.

फिर मेरे पास आईं तो मैंने उन्हें चारपाई पर लेटा दिया और उनके ऊपर आकर फिर से किस करने लगा.

किस करते-करते उनकी गर्दन, कान और गले को चूमता-चाटता हुआ उनके बूब्स तक आ गया.

फिर धीरे से मैंने उनका कुर्ता ऊपर करके बूब्स चूसने लगा.

मैं पागलों की तरह उनके बूब्स चूस रहा था.

वे बिना कुछ किए मजा लूट रही थीं.

मामी कामुक सिसकारियां ले रही थीं और मेरे सिर पर हाथ फेर रही थीं.

फिर मैं एक हाथ उनकी चूत पर ले गया पर उन्होंने मेरे हाथ को हटा दिया.

वे मुझे चुत पर हाथ लगाने ही नहीं दे रही थीं.

कुछ मिनट तक बूब्स चूसने के बाद मैं नीचे आ गया और उनकी नाभि को चाटने लगा.

वे सिसकारने लगीं.

मैंने धीरे से उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया.

सलवार को नीचे करके उनकी चूत को रगड़ने लगा और उंगली अन्दर-बाहर करने लगा.

इससे वे बहुत ज्यादा गर्म हो गईं और बोलीं- अब इतना मत तड़पाओ … जल्दी से अन्दर डाल दो.

यह सुनते ही मैं उनकी टांगों के बीच आकर लंड को चूत पर रगड़ने लगा.

उन्होंने आंखें बंद कर लीं और लंड अन्दर लेने की कोशिश करने लगीं.

फिर जैसे ही मैंने लंड अन्दर डाला तो मैं एक अलग ही दुनिया में था.

मुझे इतना ज्यादा मज़ा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता.

फिर 5-6 धक्के लगाते ही मेरा काम तमाम हो गया और मुझे बहुत बुरा लगने लगा.

मुझे लगा कि मेरी ज़िंदगी जैसे झंड हो गई.

उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और मेरे पास बैठ गईं.

मामी- क्या हुआ, ऐसे क्यों बैठ गया है?

मैं- मुझे बहुत बुरा लग रहा है कि मेरा हो गया और आपका नहीं हुआ!

मामी- अरे, कोई बात नहीं … पहली बार में ऐसा हो जाता है … इतना मत सोचो!

उनकी बात सुनकर मुझे कुछ अच्छा लगा, तो मैंने कहा कि एक बार और करते हैं.

उन्होंने हां में सर हिलाते हुए जवाब दिया.


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मामी- फिर कभी कर लेना, अब तो तू यहीं है! अभी मुझे बहुत नींद भी आ रही है!

मैं उन्हें किस करके अपने कमरे में आ गया और सो गया.

अगले दिन सब कुछ सामान्य था.

मामा हरिद्वार से वापस आ गए थे तो हमें मौका ही नहीं मिला.

छह दिन बाद मामा फिर से हरिद्वार चले गए.

मैंने मामी को मना लिया और रात 10:30 बजे उनके कमरे में चला गया.

मामी ने लाइट बंद कर दी.

मैंने उन्हें पीछे से पकड़ा और उनके बूब्स दबाने शुरू किए, उनकी गर्दन पर किस करने लगा.

फिर मैंने उन्हें सीधा किया, चारपाई पर लिटाया और किस करने लगा.

ऐसे ही किस करते-करते मैं उनके बूब्स दबाने लगा.

मैंने धीरे से उनका कुर्ता ऊपर किया और उनके बूब्स पर टूट पड़ा, कभी दबाता, कभी चूसता.

मामी की सांसें तेज़ होने लगीं.

वे बड़े प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरने लगीं और मेरा जोश दुगना हो गया.

फिर मैंने एक हाथ से उनकी सलवार का नाड़ा खोला और उनकी चूत में उंगली करने लगा.

मामी को बहुत मज़ा आ रहा था.

मैं नीचे आया, उनकी नाभि चाटने लगा और उनकी सलवार उनकी टांगों से अलग कर दी.

अब मैं अंधेरे में उनकी चूत पर टूट पड़ा.

जैसे ही मैंने चुत में जीभ लगाई, वे एकदम मूड में आ गईं और मेरे सिर पर हाथ फेरने लगीं.

मैं उनकी चूत का स्वाद लेने लगा.

वाह … क्या मज़ा आ रहा था … सच में यार, गज़ब!

ऐसे ही कुछ देर करने के बाद मामी ने अपना पानी छोड़ दिया.

थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे हटाया और कपड़े सही से हटाने लगीं.

मामी- अब बस बहुत हुआ ये सब … अब जल्दी से अन्दर डालो और चोदना चालू करो.

अब तो भाई मुझसे भी नहीं रुका जा रहा था.

मैंने झट से पोजीशन बनाई, लंड उनकी चूत पर रखा और एक धक्के में पूरा अन्दर कर दिया.

मामी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और मेरे लंड का मज़ा लेने लगीं.

मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए क्योंकि बाहर और लोग भी सो रहे थे.

मैंने उन्हें किस करना शुरू किया और उनके बूब्स दबाने लगा, जिससे सेक्स का मज़ा दुगना हो गया.

लगभग 5-6 मिनट बाद मामी ने मुझे कसकर पकड़ लिया और सिसकारियां लेने लगीं.

मुझे समझ नहीं आया कि मामी ऐसा क्यों कर रही हैं.

मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और धक्के मारता रहा.

फिर मामी मेरी गांड पकड़ कर मुझे अपनी चूत पर दबाने लगीं.

मुझे लगा कि मामी को मज़ा आ रहा है. मैं धक्के लगाता रहा.

मामी बोलीं- अभी रुक!

मैं रुक गया.

मामी ने पूछा- तेरा हो गया क्या?

मैं- नहीं! आपका हो गया?

मामी- हां, हो गया … अब थोड़ा जल्दी कर, वरना कोई उठ जाएगा!

मामी की बात सुनते ही मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और जोर-जोर से करने लगा.

इससे मामी को जलन होने लगी, तो मैं आराम से करने लगा.

मामी फक करते हुए कुछ मिनट बाद मेरा भी होने वाला था.

मैंने स्पीड बढ़ा दी और मामी की चूत में ही झड़ गया.

अब मामी के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कुराहट थी.

मैंने उन्हें किस किया और लंड उनकी चूत से बाहर निकाल कर साफ किया.

इस बार मुझे मर्द होने की फ़ील आ रही थी.

उस दिन तो लग रहा था कि यह लंड फालतू की चीज है, इसके कटवा कर फेंक देना चाहिए.

मैंने चुदाई के बाद कुछ देर मामी से बातें की और उसके बाद अपने कमरे में आ गया.

उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई करते.

यह सिलसिला 5 महीने तक चलता रहा.

फिर मामी प्रेगनेंट हो गईं.

मामा और मामी दोनों बहुत खुश थे लेकिन जब मामी ने मुझे बताया कि वह बच्चा मेरा है तो मुझे बहुत खुशी हुई.

मुझे मामी से बहुत प्यार हो गया.

लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था.

हरिद्वार का काम खत्म होने के बाद मामा मामी को लेकर अपने गांव चले गए.

शायद मामा को समझ आ गया था कि उनकी बीवी ने मेरे साथ सेक्स करके बच्चा पैदा कर दिया है.

उनका मकसद भी हल हो गया था इसलिए उन्हें अपने गांव जाना ही सही लगा.

जब वे गईं, तो मैं बहुत रोया.

कुछ दिनों तक हरिद्वार में मेरा काम में मन नहीं लगा तो मैं भी अपने घर वापस आ गया.

तो ये था मेरा पहला प्यार वाला सेक्स, जो मैंने मामी के साथ किया.


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