भाभी की प्यास उसको मेरे पास लायी - Bhabhi's thirst brought her to me

 भाभी की प्यास उसको मेरे पास लायी


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


भाभी की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि भाभी ने मुझे चाची की चुदाई करते देख लिया था. तब से वो मुझपर नजर रखने लगी थी. घर में मुझे अकेला पाकर भाभी मेरे पास आयी और …


कुछ से दोस्तों ने मुझे पूछा कि हरियाणा में कहाँ से हो.

तो दोस्तो, मैं हरियाणा के हिसार शहर से हूँ.


मेरा नाम दीपक सोनी है, मेरी उम्र 29 साल, हाईट 5 फीट 11 इंच है और रंग गोरा है। दिखने में सुंदर हूँ।

मैं यह नहीं कहूँगा की मेरा लण्ड बहुत बड़ा है, पर मोटा बहुत है. मेरा लंड कितनी भी ढीली चूत हो, उसमें भी फंस कर जाता है. जिसकी वजह से मेरे लण्ड ने अच्छी अच्छी औरतों का पानी निकाला हुआ है।


जो भी भाभी या आंटी अब तक मुझसे चुदी है वो आज भी मुझे याद करती है।


जैसा आपने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा कि कैसे मैंने मेरी प्यारी चाची को चोद कर अपना दीवाना बना लिया था.

उसके बाद तो जैसे चाची को चस्का ही लग गया था मेरे लंड का!


वो लगभग हर रोज मेरे घर आ जाती थी या जब भी मौका मिलता था वो मुझे अपने घर बुला कर चुदवाती थी.

ना जाने कितनी बार मैंने उनकी चूत और गांड मारी है.


अब तो चाची को गांड मरवाने में भी मजा आने लगा है क्योंकि मेरी गांड मारने का तरीका ही ऐसा है कि मैं दर्द की बजाये मजा देता हूँ गांड मारने में भी!

मैंने और चाची ने अपने और मेरे घर का ऐसा कोई कोना नहीं छोड़ा, जहाँ हमने चुदाई ना की हो।

तो दोस्तो, यह भाभी चूत कहानी मेरी और चाची की नहीं बल्कि उस भाभी की है जिसने चाची को रसोई में रंगे हाथों पकड़ लिया था सलवार का नाड़ा बांधते हुए … और वापिस चली गयी थी।


मेरी भाभी का नाम मंजू है (काल्पनिक नाम)

इस कहानी में सिर्फ नाम ही काल्पनिक है. उसके अलावा पूरी कहानी में कुछ भी काल्पनिक नहीं है. जो जो मेरे साथ हुआ है, वही आपको लिख कर बता रहा हूँ।


भाभी तो चाची से भी मस्त शरीर वाली है. भाभी की उम्र 25 साल, हाईट 5 फिट 10 इंच है। उनके चूचे 32 के, कमर 28 की और गांड 36 की है.


उनकी शादी हुए 1 साल ही हुआ है. भईया किसी कम्पनी में अच्छी पोस्ट पर हैं, उनका काम फील्ड का ज्यादा रहता है तो वो हफ्ते में 4 दिन घर से बाहर ही रहते हैं.


भाभी की गांड तो चाची से भी ज्यादा रसीली है. जब वो चलती है तो उनकी गांड के दोनों पलड़े जबरदस्त हिलते हैं जिनको देख कर बूढ़े के लंड में भी जान आ जाए.

उनका जिस्म दूध जैसा है, मख़मली है.


भाभी लगभग साड़ी ही डालती है और इतनी कस कर बांधती है कि उनकी पैंटी की लाइन भी दिखने लगती है.


जैसा मैंने आपको बताया था कि भाभी को हम पर शक हो गया था.

अब वो मुझ पर और भी ध्यान रखने लगी थी. मैं उनको कहीं भी मिल जाऊँ तो बड़ी कातिलाना स्माइल करती हैं।

उनका मेरे घर भी आना जाना ज्यादा हो गया था.

एक दिन मेरे घर कोई नहीं था. मेरी मम्मी मेरी मौसी जी के घर दूसरे शहर गयी हुई थी.

और पापा अपने ऑफिस टूर से आउट ऑफ़ स्टेशन थे.


मैं घर पर अकेला ही बैठा चाची की वेट कर रहा था.

चाची की चूत मारे मुझे बहुत दिन हो गए थे क्योंकि कुछ दिन से चाचा घर पर ही थे.


तो चाची को आने का मौका ही नहीं मिला. और ना मुझे घर बुला सकती थी.

मैं उनके घर तो जरूर जाता था किसी काम के बहाने … पर कुछ कर नहीं सकते थे.


पर आज चाचा बाहर गए हुए थे तो उनके आने की पूरी पूरी उम्मीद थी मुझे.


मैं सिर्फ अंडरवियर में बैठा अन्तर्वासना पर सेक्स स्टोरी पढ़ रहा था और अपना लंड हिला रहा था.


तभी घर की घंटी बजी.

मुझे लगा कि चाची ही होगी.


तो मैंने अपना अंडरवियर भी निकल दिया और ऐसे ही गेट खोलने चला गया उनको सरप्राइज देने!

पर जैसे ही मैंने गेट खोला, सामने वही भाभी खड़ी थी.

मुझे इस अवस्था में देख कर उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया और अपना चेहरा अपने आंचल से ढक लिया.


मेरे तो जैसे एकदम होश ही उड़ गए.

मैं सीधा अंदर भागा.


वो भी मेरे पीछे पीछे अंदर आ गयी और हंसने लगी, बोली- क्या हुआ देवर जी? किसका वेट कर रहे थे इस अवस्था में?

मैंने कहा- किसी का भी नहीं भाभी!


तो उन्होंने कहा- तो क्या फिर आप हर किसी का ऐसे ही स्वागत करते हो क्या बिना कपड़ों के?

अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ.


पर भाभी समझ गयी थी और बोली- मैं समझ सकती हूँ देवर जी. इस उम्र में ऐसा ही होता है. पर थोड़ा बहुत ध्यान हमारा भी रख लिया करो।

मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं भाभी?

तो उन्होंने कहा- अब इतने भी नासमझ ना बनो, तुम्हारी इस हथियार के तो बहुत कारनामे देखे है मैंने!

यह कहते हुए भाभी ने धीरे से मेरे लंड पर कच्छे के ऊपर से ही हाथ फेर दिया और हंसने लगी.


मेरा लंड तो दुगनी स्पीड से खड़ा हो गया और फटने को हो गया।

मैंने कहा- ऐसा क्या कारनामा और कब देख लिया भाभी आपने?

तो उन्होंने एक जबरदस्त सेक्सी स्माइल कर के बोली: बताऊँगी जनाब! इतनी भी क्या जल्दी है?


मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं!


फिर उन्होंने कहा- आप चिंता ना करो, मैं किसी को भी नहीं कहूँगी कि तुमने चाची के साथ क्या क्या किया है.


मेरे तो पसीने ही छुट गए, मैंने कहा- मैंने क्यय क्ययय क्या किया है, बताओ?

उन्होंने कहा- अरे इतना डर क्यों रहे हो और इतना हकला क्यों रहे हो? मैंने तो बहुत दिन से तुम दोनों पर नजर रखी हुई थी. कभी तुम उसके घर … और कभी वो तुम्हारे घर! पूरे मजे लिए हैं तुम दोनों ने! पर मुझे एक बात का दुःख है।


मैंने कहा- किस बात का भाभी जी?

तो उन्होंने कहा- तूने सारा प्यार चाची को ही दे दिया. कुछ ख्याल हमारा भी रख लेते।


मुझे लगा कि अब भाभी को सारी बातों का पता ही लग गया है तो क्यों ना बिल्कुल खुलकर ही बात कर ली जाये.

जिस हिसाब से भाभी खुल कर बात कर रही थी तो मुझे लग भी रहा था कि भाभी चुदने के इरादे से ही आयी हैं.

क्या पता चाची की जगह आज भाभी की चूत मिल जाये!

इस वक़्त तो मुझे सिर्फ चूत और गांड चाहिए थी. मेरा लंड अकड़ कर जो खड़ा था अब वो चाहे वो भाभी की हो या चाची की.


मैंने कहा- क्या करूं भाभी, आपने भी तो कभी लाइन ही नहीं दी. मेरा लंड तो कब से आपके लिए तैयार था।

उन्होंने कहा- अच्छा जी, ये बात है! सच कहुँ दीपू, जब से मैंने तुम्हारा लंड उस दिन कच्छे में खड़ा देखा था, तब से मैं तो यही सोच रही थी कि ये कच्छे में इतना हॉट लग रहा था तो बाहर आने के बाद कैसा लगेगा. तब से मुझे और कुछ दिख ही नहीं रहा.


भाभी आगे बोली- तुम्हारे भाई का तो यार 4 इंच से भी कम है. पर उस दिन तुम्हारा लंड देखते ही मेरी चूत गीली हो गयी थी. मैंने आज तक इतना मोटा और लम्बा लंड कभी नहीं देखा.


अब भाभी बिल्कुल खुल कर बोलने लगी थी. जिसे सुन सुन कर मेरे लंड में और भी जोश आने लग गया था. मेरा लंड झटके मारने लगा था. जिसे भाभी सेक्सी तिरछी नजरों से देख रही थी.


वे बोली- दिल तो कर रहा था कि उसी दिन तुम्हारा पकड़ लूं. पर तुम चाची के साथ ही लगे हुए थे. और उसके बाद मैंने ना जाने कितनी बार तुम्हें हिंट दिए. पर तुम तो चाची के पल्लू से ही चिपके हुए थे. आज सही समय लग रहा है मुझे क्योंकि मुझे पता था आज तुम्हारी मम्मी तुम्हारी मौसी के घर जाएगी और तुम घर पर अकेले होंगे.


भाभी बताती रही- मैं तो आज ये सोच कर आयी थी कि चाहे आज कुछ भी हो जाये, मैं आज तुमसे चुद कर ही जाऊँगी. पर मुझे क्या पता था, तुम यहाँ मुझे ऐसे मिलोगे और मेरा आधा काम आसान कर दोगे. वैसे मैंने तुम्हारी और चाची की चुदाई देखी है यार, क्या मस्त झटके लगाते हो तुम! और क्या मस्त स्टैमिना है तुम्हारा, मैंने तो तुम्हारी पूरी चुदाई देखी थी.

मैंने कहा- अरे भाभी, आपने कब देख ली हमारी चुदाई?

उन्होंने कहा- जिस दिन मैं चीनी लेने आयी थी और थोड़ी देर बाद चाची चली गयी थी.

मैंने कहा- हां चाची तो चली गयी थी।


फिर उन्होंने कहा- थोड़ी देर बाद चाची वापसी आती हुई दिखी मुझे और सीधा तुम्हारे घर आयी. तब मैं भी उनके पीछे पीछे आयी थी और तुम्हारी जबरदस्त चुदाई देखी थी।

तो मैंने कहा- तो भाभी आप भी अंदर आ जाती, मैं आपका भी पानी निकल देता।


उन्होंने कहा- दीपू, मैं तुम्हारा मजा ख़राब नहीं करना चाहती थी. पर मैंने उस दिन तुम्हारी मदमस्त कर देने वाली चुदाई देख कर इतना जरूर सोच लिया था कि अब मुझे भी तुमसे जरूर अपनी चूत की प्यास बुझवानी है।


भाभी कहने लगी- प्लीज दीपू, मेरा इतना काम कर दो. मैं तुम्हारा जिंदगी भर अहसान नहीं भूलूंगी. अगर तुमने मेरी अच्छे से प्यास बुझा दी जैसे चाची की बुझाई थी. तो पक्का प्रॉमिस करती हूँ, मेरे साथ साथ मेरी बहुत सी सहलियाँ को भी तुझसे चुदवा कर तुम्हारा पानी निकलवा दूँगी। मेरी बहुत से दोस्त ऐसी हैं जो अपने अपने पतियों से चुदाई से खुश नहीं है.


मैंने कहा- भाभी नेकी और पूछ पूछ! अगर सच में वो सब अपने पतियों के सेक्स से खुश नहीं हैं तो मैं आपके कहने पर फ्री मैं ही उनकी सेवा कर दूँगा।


भाभी पूरी खुश हो गयी और भाग कर मेरे गले लग गयी. वे मेरी गर्दन को चूमने चाटने लगी.

मेरे शरीर में 440 वाट का करंट सा दौड़ गया।

भाभी का शरीर इतना मुलायम और कोमल था कि मुझसे रहा ना गया और मैंने उनको पूरी अपनी आग़ोश में ले लिया।


तभी भाभी बोली- दीपू, प्लीज अब अपना बना ले यार, अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।

अब मैं भी उनकी गर्दन और कान के पास चूमने लगा और अपने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ ली.

भाभी जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी- आअह आआ इस्स्स्स स्शह्ह, ओह्ह दीपूउउउ … आह आह ओह ओह!

थी और बोली- मैं कब से तरस रही थी इस प्यार के लिए।


मैंने कहा- भाभी अब में हूँ ना आपके लिए, अब आपको कभी इस प्यार की कमी नहीं होने दूँगा।


भाभी ने अपना एक हाथ नीचे लाते हुए मेरे लंड पर रख दिया और दूसरे हाथ से मेरी कमर को सहला रही थी.

फिर बोली- तुम्हारा लंड तो पूरा फौलादी बना हुआ है, चाची कैसे इसे अपनी चूत और गांड में ले लिया?

मैंने कहा- जैसे आप लोगी भाभी!


उन्होंने कहा- दीपू, मेरी चूत बहुत टाइट है. तेरे भाई का लंड तो बहुत छोटा है. मुझे तो उस से ही दर्द होता है, तुम्हारा लंड मैं कैसे लूंगी?

मैंने कहा- भाभी आप टेंशन ना लो, मैं आपको दर्द भी नहीं होने दूँगा और मजे भी दूँगा।


उन्होंने कहा- इसीलिए तो तुम्हारी पास आयी हूँ. और दीपू, प्लीज ये बात किसी को पता ना चले. नहीं तो मेरी बहुत बदनामी होगी।

मैंने कहा- भाभी, आप मेरे पास आये हो तो आपकी इज्जत मेरी इज्जत है. आप टेंशन ना लो।

और भाभी जोर जोर से मेरे लंड को रगड़ने लगी।


मैं भी भाभी को किस करते करते हुए अपने दोनों हाथ भाभी के दोनों चूचों पर ले आया और उनको रगड़ने लगा. मैं भाभी के निप्पल को उंगली और अंगूठे से रगड़ने लगा.


भाभी पूरी तरह तड़पने लगी और मस्त सिसकारियां निकालने लगी.

मैं धीरे धीरे भाभी के शरीर से कपड़े अलग करने लगा.

अब भाभी मेरे सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी.


मैंने उनका ब्लाउज और पेटीकोट भी निकाल दिया.


मैं आपको बता नहीं सकता कि भाभी क्या मस्त लग रही थी.

उन्होंने रेड कलर की ब्रा और रेड कलर की ही जालीदार पैंटी पहनी हुई थी.

और ये दोनों ही उनके दूधिया जिस्म पर मस्त लग रही थी.

मैं तो सिर्फ देखता ही रह गया।


भाभी ने कहा- क्या देख रहे हो देवर जी?

मैंने कहा- भाभी, आपका शरीर तो चाची को भी दूर बिठा रहा है. आपके सामने तो चाची भी पानी ना मांगे!

यह सुन कर भाभी शर्म से लाल हो गयी और मैंने आगे बढ़ कर उनको फिर से गले लगा लिया.


और जब हम दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे से टकराये तो मैं आपको बता नहीं सकता कि मुझे कितना आनंद आया.

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