Gay sex story Hindi – तेरे मम्मे तो औरतों जैसे हैं

 Gay sex story Hindi – तेरे मम्मे तो औरतों जैसे हैं

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां



मेरी गाड़ी एक बार फिर से पटरी पर आ चुकी है, अपनी कड़ी मेहनत से मैंने कुछ नये बॉय-फ्रेंड बनाये हैं।


किसी का वहाँ का फूला हुआ हिस्सा जब दिखता है, तो कुछ-कुछ होने लगता है। किसी को पेशाब करते हुए उसका लंड देख लेता हूँ तो भी कुछ-कुछ होने लगता। इतना तो किसी लड़की को नहीं होता होगा, जो मेरे साथ होता है।


अगर किसी फिल्म थियटर में भीड़ में टिकट लेते वक़्त पिछले बंदे का लंड गांड पर लग जाए, तो मेरे दिमाग में उसी पल अलग किस्म से ख्याल आने लग जाते हैं।

अब जो मैं अपनी एक नई सच्ची चुदाई जो इन्हीं में से किसी एक तरीके से मेरा आकर्षित होना, इसी की वजह से हुई। पहले दिन तो दाल नहीं गली, फिर यह चीज़ मेरे साथ लगातार दो दिन हुई।


आजकल मैं जालंधर की एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रहा हूँ, जिसके चलते मैं वहीं किराए पर एक रूम, उसके साथ रसोई, बाथरूम अटैच आदि है। अकेला हूँ इसलिए मेरे लिए बहुत है, कमरा काफी खुला है। अच्छी जगह पर मिल गया और मैं खाना अभी रात को ढाबे पर खाने जाता हूँ। आज ही एक टिफिन वाले से बात की है। काफी हैण्डसम सा लड़का है। वो कहता है साब, आपका घर सबसे लास्ट है। घर जाते-जाते आपका टिफिन देकर जाया करूँगा।


हो सकता है कि आगे चलकर उस टिफिन वाले हैण्डसम के साथ मेरा टांका फिट हो जाए। मुझे वो बहुत अच्छा लगा है।


पहली बार में देख कर फीलिंग आई है, लेकिन उससे पहले जो ताज़ा वाकया दो दिन पहले हुआ। जालंधर में नया-नया हूँ, अभी सैटिंग नहीं हुई थी। लेकिन मुझे निराशा कम ही हाथ लगती है।

जिस ढाबे में मैं खाना खाने जाता हूँ, वहाँ बहुत भीड़ होती है, क्यूंकि उस एरिया में जॉब के चलते कई लोग किराए पर रहते हैं। उस दिन से पहले कोई ऐसा विचार नहीं आया था कि वहाँ से मुझे लंड मिलेगा। मैंने अपना आर्डर पैक करवाने के लिए दिया। काउंटर पर कुहनियाँ टिका कर, थोड़ा झुक के खड़ा था।


कई लोग मेरे पीछे से हाथ आगे ले जाकर पैसे दे रहे थे। कुछ आर्डर दे रहे थे। मैंने निक्कर पहन रखी थी। मैं काउंटर पर पड़े शीशे के नीचे ढाबे का मीनू पढ़ रहा था। उस दिन ज्यादा ही भीड़ थी, मेरे पीछे काफी लोग हैं। तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरे ठीक पीछे वाला जो था, वो जब पाँव उठाकर देखता कि उसका आर्डर आया कि नहीं, तो उसका लंड बार-बार मेरी गांड पर लग रहा था।



जैसे वो फिर से पाँव उठा कर देखने लगा, मैंने अपनी गांड पीछे सरका दी। उसे मालूम नहीं चला था कि मैंने खुद ऐसा किया है। अब मैंने दुबारा गांड पीछे धकेली, वो जान गया। मैं खुद उसको उकसा रहा हूँ, लेकिन हरामी ने डरते हुए कुछ नहीं बोला। जबकि मैंने तीन बार गांड उसके ‘पोल एरिया’ पर टिका कर पीछे की, लेकिन मेरा दांव नहीं चल सका।

वो उस जगह से ही हट गया, दूसरी साइड खड़ा हो गया। मैंने उसको देखा, मुस्कुराया लेकिन देखना छोड़ दिया। मेरा ऑफ हो गया। घर लौट खाना खाकर मैं सोने लगा। गांड में खुजली थी मैंने मोमबती रसोई से ली, उसको घुसाकर खुजली मिटाई।


अगली रात मैं उसी समय पर गया, ढाबे वाला मुझे जानने लगा है। रोज़ की तरह वैसे ही खड़ा था। मेरे पीछे एक बंदा था, पक्के रंग का। वो पैसे देने के लिए आगे बढ़ा तो मैंने गांड धकेली, शायद उसको कुछ समझ आई। सीधा खड़ा होकर लंड का दबाव आगे डाला, मुझे भी लगा और गांड को दबाया। उसने लंड को दबाया, दोनों समझ गए।


मैं सीधा होकर खड़ा हुआ, भीड़ में नीचे कोई नहीं देख रहा था मैंने धीरे से उसके लंड पर उँगलियाँ फेरीं। वहाँ तक उंगलियां ही पहुँच पाई थीं कि वो बिलकुल कान के पास आकर बोला- कुछ चाहिए क्या?


मैं बोल नहीं सकता था, उसके आगे था इसलिए उसका जवाब मैंने गांड का दबाव उसके लंड पर डाल कर दे दिया।


“लगता है तुझे यह चाहिए !”

मैंने धीरे से सर ‘हिला’ दिया। इतने में मेरा आर्डर पैक होकर आ गया। लेकिन वो पीछे था मुड़ते-मुड़ते मैंने उसके लंड को सहला दिया, लग रहा था पैंट फाड़ बाहर आएगा। उसका भी आर्डर हुआ। मैं बाहर ही रुका रहा। कुल्फी वाले से कुल्फी ली, वो मुझे देखने लगा। मैंने कुल्फी को मुँह में लेकर निकाला उस पर जुबान फेर दी। थोड़ा आगे पार्क था, अँधेरा था, मैं उसके अंदर गया।


दो मिनट बाद वो आया, बोला- लगता है तुझे कुछ चाहिए !


अब मेरी जुबान आज़ाद थी- तेरा पप्पू चाहिए मुझे।


उसने थैली साइड में रखी, जिप खोल दी और आधा खड़ा लंड मेरे सामने था। मैं वहीं बैठ चूसने लगा, पूरा खड़ा हो गया।


उसके लंड में बहुत जान थी, बोला- यहीं गांड मरवाएगा, मेरा कमरा पास में ही है आज अकेला हूँ, साथी घर गया हुआ है।

उसके रूम में जाकर मैं उसकी बाँहों में था। वो होंठ से मेरे गालों को चूमने लगा। मैं बराबर उसका लंड सहलाता गया। दोनों नंगे हो गए। मेरी टाँगें उठा उसने लंड डालना चाहा। मैंने रोका, निक्कर से कंडोम निकाला।


बोला- वाह, तू इसको साथ रखता है, पक्की रंडी है साली, तेरे मम्मे तो औरतों जैसे हैं। यह किस तरह बन गए !


“तेरी औरत बन जाऊँगी, आज की रात सुहागरात मना ले राजा !”


“बोला सच में तेरी चेस्ट की जगह ब्रेस्ट देख में हैरान हूँ !”


“तो चूम ले, चूस ले, दबा ले, खा जा इनको, चाहे मसल डाल।”


उसने कंडोम चढ़ाया और घोड़ी बना कर घुसा दिया। मुझे बहुत मजा आने लगा।

मैंने कहा- मुझे औरत की तरह अपने नीचे लिटा कर चोद।


वो मेरी बातों से हैरान भी था। टाँगें कन्धों पर रख कर मैंने उसका ‘लुल्ला’ ले लिया। एक-एक राऊंड लगाया।


मैंने कहा- चल अपना कमरा लॉक कर और मेरे रूम में चल।


वहाँ आकर मैंने लड़की वाले कपड़े पहने और हमने सुहागरात मनाई। बहुत मजा आया।

जल्दी अपनी अगली मस्त चुदाई जो इसके बाद हुई है, लिख कर हाज़िर हो जाऊँगा।

रूममेट का लुल्ला

 रूममेट का लुल्ला

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


प्रणाम दोस्तो, कैसे हो सभी ! मैं काफी समय बाद आप सबके लंड खड़े करवाने वापस आया हूँ। मैंने गांड मरवानी तो नहीं छोड़ी, मेरा लैपटॉप खराब था, कुछ में नौकरी में वयस्त था।


जब से मेरे पहले वाले रूम पार्टनर ने नौकरी छोड़ी है, तबसे कुछ रातें मैंने कैसे गुजारी, यह मैं ही जानता हूँ, कहाँ उसने मुझे अपनी औरत बना कर रखा हुआ था। एक ही ऑफिस में थे, उसका रैंक मुझसे बड़ा था, मुझे पहले भेज देता था, घर लौटकर मेरे तो हाव भाव बदल जाते थे, उसके खरीदे कामुक कपड़े, मांग में उसके नाम का सिन्दूर आदि करके मैं उसकी प्रतीक्षा करती थी, पत्नी धर्म अच्छे से निभाती थी। सेक्सी सेक्सी ब्रा-पैंटी, आकर्षक नाईटी आदि खरीदे थे, हर रात सेक्स करते थे वो मुझे हक़ से चोदता था, पर मैं उससे चुद चुद कर बोर भी होने लगा था।

खैर उसके जाने के बाद मैंने कंपनी के गार्ड को रख लिया था, उसको भी मैंने अपने ढंग से खुद पटा लिया था, वो बेचारा भी अपने शहर से दूर था, मेरे साथ रहने से उसका किराया बँट गया था, मेरा कमरा भी बड़ा था। एक दिन मैं जल्दी उठकर नहाया और पैन कैमरा गुप्त जगह रख दिया। बस उसके जाने के बाद मैंने लैपटॉप से जोड़ देखा, क्या लंड था, नौ इंच होगा, सांवले रंग का लंड देख मेरे मुँह से लार टपकने लगी, उसके लंड को देख मुझे पहले वाले के लंड की याद भूल गई, उस रात में खुद दारु लेकर आया, खाना भी मस्त वाला पैक करवाया था।


रात को एक एक पैग लगाया, फ़िर मैंने कहा- थोड़ा फ्रेश होकर बैठते हैं !


अपनी अलमारी खुली छोड़ कर मैं नहाने घुस गया, तौलिया खुद नहीं लेकर गया था।


नहाने के बाद उसको कहा- अलमारी से तौलिया निकाल कर पकड़ाना जरा !

सामने मैंने ब्रा-पैंटी आदि लड़की वाला सामान रख रखा था।


तौलिया पकड़ते समय उसको मैंने अपने लड़की जैसे मम्मे दिखा दिए, मुड़ते मुड़ते गांड भी दिखा दी। मैंने लाल रंग की बेहद सेक्सी पैंटी बरमूडा के नीचे पहन ली।


अब जब उसके पास बैठा तो उसकी आँखों में चमक थी, अजीब सी मुस्कान थी।


दो दो पैग खींचने के बाद वो बोला- आज बहुत गर्मी है !



उसने अपना अंडरवियर बनियान छोड़ सारे कपड़े उतार दिए, बार बार मेरी नजर उसके लंड वाली जगह जाने लगी।


दोनों ने देखते देखते बोतल चढ़ा डाली। वो कपड़े पहन कर ठेके से अद्धा और लेने गया। उसके पीछे से मैंने खुद को ऊपर से नंगा किया।


अब जब आमने सामने बैठे, वो बार बार मेरे चूचे देख रहा था।

बहुत गर्मी कहते हुए मैंने बरमूडा उतार दिया। लड़की वाली पैंटी में देख उसके रहते होश उड़ने लगे।


“खाना खाएँ?” मैं बोला।


“हाँ, चलो रसोई में से लेकर आते हैं !”


“आप बैठो सरताज, मैं हूँ ना !”


मैं खाना लगा कर लाया, नशे में धुत दोनों ने खाया और मैं सिंक पर खड़ा अपने बर्तन साफ़ करने लगा। वो भी अपने बर्तन लाया, पीछे से बर्तन रखने लगा तो उसका लंड मेरी गांड से घिस गया।


मैं दीवानी होने लगी, मैंने गांड पीछे धकेली- लाओ, मैं धो देता हूँ।


बोला- नहीं नहीं !


दोनों चुप थे पर हमारे जिस्म मिल रहे थे। रसोई संभाल दोनों बिस्तर पर लेट गए। कुछ देर टी.वी देखा। स्ट्रीट लाइट की रोशनी काफी कमरे में आती है, मैं धीरे धीरे पीछे सरकती गई, मैंने पैंटी भी उतार दी नशे में !

दोनों को नींद नहीं आ रही थी, कुछ मैं सरकती, कुछ वो सरका, मेरी गांड उसके लंड के बेहद करीब थी। मैं पूरी नंगी थी, मैंने अब गांड को पूरा उसके लंड से लगाया, उसने भी हिम्मत करके मेरी गांड पर हाथ फेरा। मेरी नंगी गांड देख वो मस्त हो गया था।


मैंने चुप्पी तोड़ते हुए कहा- क्या बात है सरताज ! बाँहों में लो न मुझे !


वो बोला- तुम बहुत कमसिन हो, गोरी हो, तेरे चुचे लड़की जैसे हैं।


मैं हूँ ही लड़की ! मेरे राजा !”


मुझे अपनी बाँहों में भरते हुए उसने मेरे होंठ में होंठ डाल दिए, मेरे चुचे दबाते दबाते मेरे होंठ चूसता गया और नीचे से जिस्म से जिस्म रगड़ते गए।


मैंने उसका अंडरवियर उतार फेंका और उसके लंड को दबोच लिया- कितना बड़ा लंड है आपका !


“पसंद आया मेरी जान?”

“एक बात कहूँ, मैंने आपका लंड देखा है, नहाते की विडियो से, तभी तो मैंने दूरियां मिटाने के लिए शराब का सहारा लिया है।”नीचे सरक उसकी जांघें फैला बीच में लेट गई, उनके लंड को चाटने लगी।


“हाय मेरी जान, ऐसा आज तक नहीं किसी ने किया !”


मैंने पूरा लंड मुँह में ले लिया, लेकिन जल्दी वो तन गया, तब मुँह में डालना मुश्किल था।


“आज से आप मेरे सरताज हो, मैं आपकी दासी, आपकी बीवी !”


“उफ़ मेरी जान !”


वो लंड हिलाने लगा। कई दिन से उसने किसी को ठोका नहीं था, ऊपर से पहली बार मुंह में दिया था, उसका झड़ने लगा, थोडा रस मुँह में गया, मैंने जल्दी से निकाल अपने चूचों पर माल गिरवा लिया।उठकर बाथरूम गए, एक साथ नहाते नहाते मैंने उसको दुबारा तैयार कर लिया, वापस बिस्तर में आकर लंड चूसने लगा।


वो मेरी गांड का छेद चाटने लगा, कुछ देर स्वाद लेकर उसने मेरी टांगें फैलवा ली, बीच में बैठ गांड के नीचे गद्दी लगा कर उसने लण्ड गीला करके मेरी गांड में डाल दिया।

“औ अह ! सरताज, धीरे धीरे करो !”


“हट साली !”


कहकर उसने पूरा लुल्ला पेल दिया। पूरा आधा घंटा उसने अपने घंटे से मेरी गांड को कई तरीकों से बजाया और आखिर में अपने गर्म रस से मेरी गांड की खुजली, गांड की प्यास, मेरे तन की आग को ठंडी किया।


हम नंगे सो गए। सुबह मेरी आंख तब खुली जब वो मेरे होंठों पर लंड रखे हुए घिस रहा था।

मैंने भी मुँह खोल दिया। मुझे सुबह सुबह बहुत सेक्स चढ़ता है। दस मिनट उसने मुझसे लंड चुसवाया और फिर बीस मिनट मुझे चोदा। मुझे बहुत मजा आया !


फिर हर रात मेरी लैला चुदने लगी, वो दारु पीकर आता और मुझे देर रात तक मसलता, सुबह उसकी आंख नहीं खुलती थी।


वो ड्यूटी से लापरवाह हो गया, उसको निकाल दिया और कुछ दिन मेरे साथ और रुकने के बाद वो अपने शहर लौट गया।


जल्दी लिखूंगा कि उसके जाने के बाद कौन मेरा सरताज बना।

Hindi Gay story – डैड की गांड मारी

 Hindi Gay story – डैड की गांड मारी


Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


हैल्लो दोस्तो. मेरा नाम राजू है और मैं स्लिम और हाईट(5′ 7″) और वेट लगभग 50-55 है। मैं 26 साल का हूँ.मैं देहरादून में रहता हूँ। आज मैं आपको मेरे और मेरे डैड के सेक्स की कहानी सुनाता हूँ। यह बात आज से करीब 6-7 साल पहले की है जब मेरी उमर 20 साल की थी और मेरे डैड 32 के थे . मेरी जवानी शुरु हुई थी उनकी जवानी के शोले भड़कते थे। मेरे डैड बहुत सेक्सी और सुंदर है।

उनका सुडौल गोरा बदन बहुत सेक्सी है। वैसे वो मेरे रीअल डैड नही है. वह मेरे डैड के सेक्रेटरी थे. बाद में माँ ने पिता जी की मृत्यु के बाद उनसे शादी कर ली। मैं पहले उनको श्याम अंकल कहता था पर अब डैड ही कहता हूँ।

मैं डैड को जब भी देखता तो मुझे उनका सेक्सी फिगर देखकर मन मे गुदगुदी होती थी। मैने उनको एक दो बार पापा के ऑफिस में अधनंगा देखा था.जैसे जब वह ऑफिस के जिम में चेंज कर रहे होते थे। एक दो बार मैंने उन्हें ऑफिस के  रेस्ट रूम में छुप कर कपड़े चेंज करते भी देखा था। और मैं उनके चड्डी के नीचे के एरिया को छोड़कर पूरा नंगा देख चुका था। डैड की बॉडी एकदम संगमरमर की तरह थी। उनकी जांघें ऐसी लगती थी जैसे दो मज़बूत खम्भे हो। उनके होंठ एकदम पिंक थे और मज़बूत सीना था।

डैड एकदम टाइट फिटिंग के कपड़े पहनते थे और मैं उनको बहुत नज़दीक से देखकर अपनी आँखो को सुकून दिया करता था। मतलब जबसे मेरा लंड खड़ा होना शुरू हुआ वह बस श्याम (डैड) को ही तलाशता और सोचता था। मैं उनकी बॉडी को देखकर अपने मन और आँखो की प्यास बुझाया करता था। लेकिन पहले जब तक वह श्याम अंकल थे मुझे उनसे नफ़रत थी और मैं सोचता था कि एक दिन इनको तसल्ली से चोदकर अपनी भड़ास निकालूँगा । पर बाद मैं उनके लिये मेरी माँ के प्यार ने और उनके अच्छे व्यवहार ने मुझे चेंज कर दिया।

अब वो हमारे घर पर रहते थे. धीरे धीरे मैं डैड के और करीब आने लगा. वह शायद मेरा इरादा नही समझ पा रहे थे. वह मुझको वही 12-15 साल का बच्चा समझते थे पर अब मैं जवान हो गया था। जैसे ही मैंने कॉलेज मैं एडमिशन लिया तो डैड ने ऑफिस का काम भी मुझको सिखाना शुरू कर दिया और मैं भी फ्री टाइम में रेगुलरली ऑफिस का काम देखने लगा। ज़्यादातर मैं एकाउंट्स का काम देखता हूँ क्योंकि मैं कोम्मेर्स स्टूडेंट था।

मुझे शुरू से ही मर्द अच्छे लगते थे.जबसे मैंने डैड को देखा, मुझे वो भा गए.कॉलेज मैं भी मुझे कोई लड़का डैड से ज्यादा सेक्सी नही लगता था। अब मैं जब मौका मिले डैड को टच करके, जैसे उनकी जाँघों पर हाथ फ़ेर के, उनके चूतड पर रब  करके या कभी जानबूझकर उनका लंड छू लिया करता। डैड पता नही जानबूझकर या अनजाने इग्नोर कर देते थे या वह मेरा मोटिव नही समझ पाते थी।

कभी डैड रात को मुझे अपने बेड रूम में बुलाते थे और ऑफिस के बारे में माँ और मेरे साथ डिस्कस करते। क्योंकि डैड ज़्यादातर सिर्फ बॉक्सर में होते थे और मैं पूरी तसल्ली से उनकी बॉडी का मुआयना करता था। उनके चूतड़ बिलकुल पके हुए आम जैसे मुझे बड़ा ललचाते थे, कई बार डैड को भी मेरा इरादा पता चल जाता था पर वह कुछ नही कहते थे । मुझे मिसा लगा कि उन्हें मेरा देखना अच्छा लगता था.टीवी में भी जब मर्द अंडरवियर में नज़र आते, डैड की नज़रें उनसे चिपक जाती.मैं जब नहाकर सिर्फ फ्रेंची में निकलता, मेरे उभार को देखकर उनके चेहरे पर कामुकता नज़र आती.शायद उन्हें मैं माँ से ज़्यादा भा गया था.या उनके लिए मैं ऐसा फल था जिसे वो झिझक के कारण चख नहीं पा रहे थे.अब तो मेरी बेचैनी बढती जा रहे थी.मैंने डैड की गांड मारने का पक्का इरादा कर लिया और मौके की तलाश करने लगा।

एक दिन जब माँ ने मुझे रात को 11 बजे बुलाया.उन्होंने  बताया कि उनको रात मैं 1 बजे फ्लाइट से 1 वीक के लिये बाहर जाना है। उसके बाद डैड ने मुझसे कहा “तुम्हारी माँ थोड़ी नर्वस है.तुम जरा बाहर जाओ मैं उसको समझाता हूँ।


मैं बाहर आ गया तो डैड ने अंदर से दरवाज़ा बंद कर दिया, लेकिन मुझको शक हुआ कि डैड मेरे पीछे मोम को क्या समझाते हैं। मैं की होल से चुपके से देखने लगा। लेकिन मैंने जो देखा तो मैं सन्न रह गया.

डैड माँ को बाहों में लेकर किस्स कर रहे थे। फ़िर डैड ने माँ के होंठ अपने होंटों पर लेकर दीप किस्स लिया तो माँ भी जवाब देने लगी। फ़िर डैड में माँ का गाउन पीछे से खोल दिया और पीठ पर रब करने लगे। डैड और माँ अभी भी एक दूसरे को किस्स कर रहे थे और दोनो लम्बी साँसें ले रहे थे कि मैं सुन सकता था। फ़िर डैड ने माँ का गाउन पीछे से उठाया और उनकी चड्डी भी नीचे करके चूतड पर रब करने लगे। डैड की पीठ दरवाज़े की तरफ़ थी.

फ़िर अचानक डैड माँ की गांड पर उंगलियाँ फिराने लगे पर मैं कुछ देख नही पाया क्योंकि वह दूसरी तरफ थी। ये मुझे साफ़ नही दिख रहा था पर मैं अंदाज़ा कर सकता था. डैड अब जोर जोर से सिसकियाँ लेकर मज़ा ले रही थी और डैड भी मस्ती में थे।

लेकिन अचानक जाने क्या हुआ कि माँ रुक गयी और उन्होंने डैड को छोड़ दिया और डैड को लिप्स पर किस्स करते हुए कहा ” सॉरी डार्लिंग.देर हो जायेगी.अब रहने दो.”

डैड भी तब तक शांत हो चुके थे पर वह असंतुष्ट लग रहे थे। वह नार्मल होते हुए बोले “इट्स ओक “और उन्होंने अपना बॉक्सर ठीक किया। उसके बाद डैड ने मुझको आवाज़ लगते हुए कहा “राजू बेटा ”

मैं चौकन्ना हो गया और अपने को नार्मल करने लगा क्योंकि मेरा लंड एकदम खम्बे के माफिक खड़ा हो गया था और मेरी  धड़कन भी नार्मल नही थी। लेकिन जब तक डैड दरवाज़ा खोलते मैं नार्मल हो गया था। फ़िर डैड ने दरवाज़ा खोला और बोले “ड्राईवर को बुलाओ.”

मैं और डैड माँ को ड्राप करने जाना चाहते थे पर माँ ने मना कर दिया। डैड को हमने गुड बाय कहा. और माँ ने हमको  किस्स किया।

जब माँ चली गयी तो डैड ने मुझसे कहा “राजू आज तुम मेरे  कमरे में ही सो जाओ. मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा है।”

मैं तो ऐसे मौके की तलाश में ही था. मैं एकदम से थोडा झिझकने का नाटक करते हुए हाँ कहा दिया। डैड और मैं बेड रूम में चले गए .उन्होंने मुझे पूछा “आर यू ओके?”

मैंने कहा “येस।”

वह बोले “दरअसल आई ऍम नोट फ़ीलिनग वेल्ल इसलिये तुमको परेशान किया ”

मैं कहा “इट्स ओके डैड।”

मैं अंदर कुर्सी पर बैठ गया और डैड बेड पर बैठ गए। फ़िर डैड बोले “राजू ठण्ड ज्यादा है. तुम भी बेड पर ही बैठ जाओ। ”

मैंने मना करने का बहाना बनाया पर डैड ने जब दोबारा बोला तो मैं उनके सामने बेड पर बैठ गया और रजाई से आधा कवर कर लिया। अब मैं डैड को तसल्ली से देख रहा था और रजाई के अंदर मैंने पायजामे का नाड़ा थोडा धीला कर लिया था। मैंने डैड से कहा “ऑफिस की बात नही करेंगे. कुछ गप्प शप करते हैं ”

वे बोले “ओक।”

मैंने कहा “डैड तुम बुरा ना मानो तो तुमसे एक बात कहनी थी.”

डैड बोले “कम ओन. खुल कर कहो।”

मैने कहा “डैड उ र मोस्ट सेक्सी गाए आई एवर मेट.आई  रियली मीन इट. मैं गप्प शप नही कर रहा हूँ। मैं आज से नही जबसे तुमको देखा है तुमको अपनी कल्पना अपना प्यार और सब कुछ मानता हूँ।”

मैं ये सब एक ही साथ कह गया. पता नही मुझे क्या हो गया था। डैड मुझे देखते रहे और हसने लगे. बोले “तुम पागल हो .एक बूढे के दीवाने हो गये हो।”

मैने कहा “नो डैड .कोई भी जवान लड़का तुम्हारा मुकाबला नही कर सकता । डैड प्लीज़ अगर तुम मेरे एक बात मान लो तो मैं तुमसे ज़िन्दगी मैं कुछ नही मांगूंगा.”

डैड बोले “अरे बुद्धू, कुछ बोलो भी .ये शायरों की तरह शायरी मत करो .मैं तुम्हारी क्या हेल्प कर सकता हूँ। ”

मैने कहा “डैड प्लीज़ बुरा मत मानना पर मैं तुमको सबसे सेक्सी मानता हूँ इसलिये सबसे सेक्सी आदमी की बॉडी को एक बार पूरी तरह देख लेना चाहता हूँ, डैड प्लीज़ मना मत करना, नही तो…”

डैड एकदम चुप हो गए और सोचने लगे. फ़िर धीरे से बोले “राजू तुम सचमुच दीवाने हो गये हो वह भी अपने डैड के। अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो ओके .लेकिन मेरे साथ कोई शरारत नही करना नही तो तुम्हारी माँ को बोल दूंगा.”और आँख मरते हुए बोले “तुम्हारी पिटाई भी करूंगा। ”

मैने कहा “ओके पर एक शर्त है कि मैं अपने आप देखूँगा आप शांत बैठे रहो।”

डैड बोले “ओके ”

मैं डैड के नज़दीक गया और रजाई हटाई। अब डैड मेरे सामने उपर से नंगे हो गए थे ।


डैड बिलकुल बुत की तरह शांत थे. मैं नही समझ पा रहा था कि उनको क्या हुआ है।

मुझे लगता है कि वह बड़े कन्फ्यूज़न में थे पर मैं बड़ा खुश था और उत्तेजना ने मेरी ख़ुशी को और बढ़ा दिया था। डैड केवल अंडरवियर में बेड पर लेटे थे। उनकी चौड़ी छाती और पिंक निप्पलों को देखकर मैं पागल हो गया और उत्तेजना मैं मैंने उनके निप्पलों को चूम लिया। डैड की सिसकारी निकल गयी पर फिर बोले ” राजू बीहेव योरसेल्फ .तुमने वादा किया था। ”

मैंने कहा “डैड तुम इतने मस्त हो कि मैं अपना वादा भूल गया। ”

फ़िर मैं डैड की अंडरवियर को निकलने लगा और डैड ने भी इसमे मेरे मदद की .पर वह एक बुत से बने थे । उनकी इस हरकत से मैं भी थोडा नर्वस हो गया पर मैंने अपना काम नही रोका। और अंडरवियर के निकलते ही मेरी कल्पना साकार हो गयी.मैंने  डैड का लंड पहली बार देखा था.एकदम केले जैसा लम्बा ,दो अण्डों जैसे टट्टे और एक भी बाल नहीं.मेरे सामने एक 32 साल का आदमी नंगा लेटा था . आप खुद सोचो ऐसे में एक 20 साल के लडके का क्या हाल हो रहा होगा।


फ़िर मैंने कहा “डैड प्लीज़ मैं एक बार तुम्हारी बॉडी को महसूस करना चाहता हूँ “


डैड बोले “तुम अपना वादा याद रखो .सोच लो वादा खिलफ़ि नही होनी चाहिये। मैं उनका सही मतलब नही समझा पाया पर उनकी बॉडी देखकर मैं पहले ही बेसुध हो चुका था .अगर कोई कमी थी तो डैड के रिस्पोंस की और मेरे पहले अनुभव की वजह से झिझक की । फ़िर मैंने डैड के लिप्स का एक डीप किस्स लिया और उनको बाहों में ले लिया और उनकी पीठ पर रब करने लगा। डैड का कोई रिस्पोंस नही आया पर उनके लंड का टच मुझे पागल कर रहा था. ऐसा टच मुझे पहली बार हुआ था.  उसके बाद मैंने डैड को पलटा और अब उनकी पीठ पर किस्स करने लगा और उनके चूतड़ को मसलने लगा। क्या मज़्ज़ा आ रहा था। डैड भी कोई विरोध नही कर रहे थे पर उनका रिस्पोंस बहुत पोसिटिव नही था। पर मुझे अब इस बात का कोई अहसास नही था

कि डैड क्या सोच रहे हैं। मैं तो सचमुच जन्नत के दरवाज़े की तरफ़ बाद रहा था और डैड के लंड का टेस्ट ले रहा था।

डैड के लंड का रस सचमुच रसीला था. मैंने अब उनके निप्पल पर दांतों से काटना शुरू किया तो डैड पहली बार बोले “अरे काट डालेगा क्या, आराम से कर हरामी। ”

मैं समझा गया कि अब वो भी मस्त हो चुके हैं. मैंने अपना पायजामा और बनियान उतार दी .अब मैं केवल अंडरवियर में  था। कुछ देर डैड के लंड को चूसने के बाद मैंने डैड की निप्पलों पर किस्स करना शुरू कर दिया तो डैड बेड पर उछलने लगे और सिसकरिया लेने लगे । मैं हाथों से उनके चूतड़ दबा रहा था और होंटों से उन निप्पल को चूम रहा था। फ़िर मैं और नीचे गया और डैड के लंड के पास के एरिया में किस्स करने लगा। दोस्तों मैं बता नही सकता और आप भी केवल महसूस कर सकते हैं कि क्या मज़्ज़ा आ रहा था।

इसके बाद मैंने डैड की टांगों पर भी हाथ फ़िरना शुरु कर दिया । मुझे लगता है वो अपनी बॉडी का बहुत ख़याल रखते हैं । अब मैंने डैड की टांगों और जाँघों पर अपना कमाल दिखाना शुरु कर दिया और मैं कभी उनको चूमता कभी दबाता और कभी रब करता। डैड भी अब तक मस्त हो चुके थे और मेरा पूरा साथ दे रहे थे पर मैंने अब तक एंट्री गेट पर दस्तक नही दी थी. मैं डैड को पूरा मस्त कर देना चाहता था और मैंने अपने लंड को फ़ुल्ल कण्ट्रोल में रखा था। मैं डैड की बॉडी को अभी भी अपने होंटों और उँगलियों और हाथों से ही रोंद रहा था।

अब तो डैड भी पूरी तरह गरम हो चुके थे और वादे वाली बात भुलकर मस्ती में पूरे जोर से मेरा साथ दे रहे थे। वे चीखने  लगे “अरे राजू अब आ भी जा यार प्लीज़ मत तदपा जलिम जल्दी से मेरे उपर आ जा। ”

मैंने कहा “बस डैड जस्ट वेट ,मैं तैयार हो रहा हूँ.बस एक मिनट रूक जाओ मैं भी आता हूँ।”

तभी डैड ने मेरा अंडरवियर नीचे खिसका दिया और वह बोले “अबे मदरचोद अपने डैड की बात नही मानेगा।”

इतना कहकर उन्होंने अब मेरा लंड पकड़ कर जोर से दबा दिया .मेरी तो चीख निकल गई और अब तक जो मेरा लंड तैयार था बिलकुल बेताब हो गया।

मैंने डैड की दोनो टांगों को चौड़ा करते हुए बीच में बैठ गया और उनके चूतड को दोनो हाथों से धकेलते हुए अपना लंड उनकी गांड के पास ले गया और पूरे जोर का धक्का दिया तो मेरा आधा लंड उनकी गांड में समा गया। मेरी तो चीख निकल गई लेकिन डैड को कुछ तसल्ली हुई और वह मेरे अगले धक्के का इंतज़ार करने लगे।

मैंने एक और ज़ोरदार धक्का लगया तो पूरा लंड अंदर चला गया अब मैंने धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया और डैड की दूसरी जांघ को अपने कंधे की तरफ़ रख दिया । अब तो डैड पूरे मज़े में आ गए और मेरा पूरा सहयोग करने लगे। पूरे कमरे में मेरे और डैड के गांड मारने की आवाजें गूंजने लगी।

डैड भी शह्हह।।अह्हह करने लगे. बोले “अंदर तक घुमा दे अपना लंड,,”

मैं भी जोर से अंदर बाहर करने लगा. बोले “मस्ती आ रही है तुझे भी , मज़ा आ गया. आज बहुत दिन बाद लंड का मज़ा पाया है. कसम से, आज तूने मुझे अपनी जवानी के दिन याद दिला दिये अयययययीईईईइ ईईईईईस्सस्सस्सस्स”

मैं भी बहुत जोश के साथ गांड मार रहा था .

मैं बोला ” आज तेरी गांड की धज्जियान उड़ा दूंगा. अब तू माँ  को चोदना भूल जाएगा.हर वकत मेरा ही लंड अपनी गांड मे डलवाने को तडपा करेगा..डैड – आआआआआह्हह्हह्हह्ह आआआयीईईईइ क्या मज़ा आ रहा है “

डैड बोले “मुझको श्याम के नाम से बुलाओ .कहो श्याम मेरे जान,”

मैंने “ओके श्याम डार्लिंग ये ले मज़्ज़ा आ रहा है ना ?आज मैं भी अपने लंड से तेरी गांड को फाड़ के रख देता हूँ।”

वह चिल्ला रहे थे “आअह गॉड..म्मम्मम्मम्मम्मम आआअह्हह्हह्हह्हह्ह उह्हह्हह्हह्हह्ह म्मम्मम्मम्म।मैं तो कबसे तेरे लंड को अपनी गांड में लेने को बेताब था लेकिन तेरे ही इशारे का इंतज़ार कर रहा था.तेरी माँ से तो मैंने तेरे लंड को पाने की खातिर ही शादी की है मेरी जान. ”

फ़िर अचानक जब मुझे कुछ दबाव सा महसूस होने लगा तो डैड बोले “राजू अब बस एक बार अब धीरे धीरे कर दे मेरा तो पानी निकल दिया तूने। ”

मैंने स्पीड थोडा काम कर दी. अब डैड और मैं थकने भी लगे थे। अचानक मेरा सारा दबाव मेरे लंड के रास्ते डैड की गांड की घाटी में समा गया और डैड भी शांत हो गए। और हम दोनो एक दूसरे के उपर लेट गये। मेरा लंड डैड की गांड के अंदर ही था एक दूसरे से बिना कुछ बोले ही हम दोनो वैसे ही सो गये। सुबह जब नींद खुली तो 6।00 बज गये थे और मेरा लंड डैड की गांड में वैसे ही पड़ा था।


मैंने डैड को जगाया तो वह बोले “राजू तुम तो एकदम जवान हो गये हो. तुमने आज इस 32 साल के बूढे को 16 साल का लड़का बना दिया।”


उन्होंने मुझे अपने उपर लिटा मुझे किस्स किया. मै भी फिर से डैड के माथे पर, निप्पलों पर , लंड पर किस्स कर बगल मे ही लेट गया और सुबह तक एक साथ लिपट कर चिपक कर सोये रहे .7।00 बजे डैड ने उठाया और मुस्कुरा कर बोले “याद रखना इसको राज़ रखना.”

मैं भी बोला “ऐसे ही गंद मरवाते रहना।”

Gay story in Hindi font – नशा, हवस और प्यार

 Gay story in Hindi font – नशा, हवस और प्यार

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


इंडियन गे सेक्स साइट के सभी साथियों को मेरा हेलो !


यहाँ पर पहले ही बहुत से गे साथियों की कहानियाँ हैं, जो मैंने पढ़ी। उन्हें पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपने किस्से भेजने चाहिएँ।


अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली प्रस्तुति है, उम्मीद है आपको पसंद आएगी। यह एक सच्ची आपबीती है, कोई मनघड़ंत नहीं !

यह लगभग एक साल पहले की बात है, जब मैं पढ़ाई के सिलसिले में दूसरे बड़े शहर में रहता था। वहाँ मेरे घर से कुछ ही दूर पर मेरा एक दोस्त जितेन जिससे मैं ऑनलाइन मिला था, रहता था, जो मेरी गांड मारा करता था। जब भी उसका मन होता, हम मिल लेते थे। मैं हमेशा उससे मिलने की राह देखता रहता था।


उसकी एक बड़ी फन्तासी थी, ग्रुप सेक्स करने की ! लेकिन मैं एक अकेला लौड़े लेने वाला, और एक से ज्यादा देने वाले, यह सोच कर मैं डर जाता था और टाल देता था।


लेकिन एक दिन उसने मुझे मना ही लिया, यह कह कर कि यदि मुझे तकलीफ हुई तो वह सब नहीं करेंगे। मैं मान गया।

उसने पहले ही दो लोगों को बुला लिया था, उनमें से एक टॉप( जो गांड मारते हैं) जिसका नाम राज था, और एक वर्सेटाइल (जो मारते भी हैं, और मराते भी हैं) रोहन नाम का लड़का था। मेरा दोस्त जीतेन टॉप था, और मैं रौनक, बॉटम (जो सिर्फ मराते हैं)


वे सब पहले ही मेरे दोस्त के घर पर पहुँच गए थे। जब मैं पहुँचा तो सबने कहा- थोड़ी थोड़ी पी लेते हैं, तब मज़ा आएगा।


मैंने भी सोचा ठीक है।


हमने एक एक बीयर पी, फिर उसके एक दोस्त ने एक सिगरेट जलाई और सब बारी बारी पीने लगे। उन्होंने आपस में कुछ बात की और कहा- बाकी की सिगरेट तू ही ख़त्म कर दे !


सो मैंने कर दी।


फिर हम सब कपड़े उतार कर चड्डी में आ गए।


जितेन 27 साल का, 5’10” ऊँचा, हट्टा कट्टा और काफी सांवला था। उसकी विशाल भरी छाती, कड़क सपाट पेट, बलिष्ठ हाथ और तगड़े पैर थे और बालों से भरे थे, एकदम मुझसे उलट, इसीलिए वो मुझे बहुत आकर्षक लगता था।


राज था तो 5’7″ लम्बा, पर हट्टा कट्टा ! वो काफी हद तक चिकना ही था, उसकी उम्र 25 थी।


रोहन की काया मेरी जैसी ही थी, कद कुछ 5 फुट 8 इंच और कुछ कुछ बाल थे जिस्म पर, जिसे उसने उस्तरे से साफ़ किया हुआ था। वो 28 साल का था।


मैं 5’6″ कद का, 23 साल का, वजन 56 kg, दूध सा गोरा, दुबला-पतला और मेरे पूरे शरीर पर कोई बाल नहीं, सिर्फ बगलों में आते हैं, जिन्हें भी मैं साफ़ करता रहता हूँ। छोटे छोटे से हल्के भूरे निप्पल हैं, ठीक ठाक भरी हुई चिकनी गोरी गांड है, 6″ का गोरा लंड ! कुल मिला कर 23 का होकर भी मैं 18-19 साल का लगता हूँ।


अब जितेन ने मुझे अपने सीने से लगा कर चूमना शुरू कर दिया, मेरे हाथ उसकी भरी भरी छाती के बालों से खेलने लगे, उसका एक हाथ मेरे चूतड़ों पर फिर रहा था और दूसरे हाथ से मेरे निप्पल मसल रहा था।


वहाँ राज और रोहन भी एक दूसरे को चूमने चाटने लगे थे।


धीरे धीरे जितेन के होंठ मेरे होठों से अलग होकर, मेरे गले से होते हुए मेरे निप्पल पर पहुँच गए, वह बारी बारी से एक एक निप्पल को चूमता, चूसता, और कभी कभी हल्के से काट लेता। जब जब वह काटता मेरे मुँह से आह निकल जाती।


तब राज ने रोहन को छोड़ मुझे चूमना शुरू कर दिया, अब मेरे एक निप्पल से जितेन खेल रहा था, और दूसरे पर रोहन लगा पड़ा था। यह सब करते करते पांच मिनट हो गए।


एकाएक मेरा बदन हल्का सा पड़ने लगा, सर कुछ कुछ घूमने सा लगा। जब मैंने उन्हें यह बताया तो वे हंस कर बोले- तूने जो सिगरेट पी थी, वह स्पेशल थी, ताकि तू एक रात में तीन न सही, दो लंड तो ले ही ले।


मैं कुछ कुछ घबरा गया, पर तब तक मैं भी गर्म हो गया था, मैंने सोचा जो होगा देखा जायेगा।


हम फिर शुरू हो गए। मैं बीच में एक मूर्ति की तरह खड़ा कर दिया गया और वो तीनों मुझे जगह जगह चूमने चाटने लगे, कभी कोई होंटों पर चूमता, तो कोई निप्पल चूस रहा था, तो कोई मेरी पतली चिकनी कमर पर हल्के हल्के काट रहा था। नशे के मारे मेरी आँखें नहीं खुल रही थी, कब कौन कहाँ मुँह मार रहा है, पता नहीं चल रहा था।


पता नहीं कब मेरे जिस्म से मेरी चड्डी भी गायब हो गई।

कुछ मिनट बाद जितेन ने दुबारा मुझे चूमना शुरू किया और कहा- आँखें खोल ले, तुझे कुछ नहीं होने दूंगा।


अपने जाने पहचाने यार की आवाज़ सुन कर मेरी आँखें खुली।


उसने मुस्कुरा कर आँख मारते हुए कहा- बहुत मजे ले लिए तूने, अब हमें भी कुछ दे दे।


यह कह कर उसने मुझे घुटनों के बल बिठा दिया और मेरे सामने आकर खड़ा हो गया। उसकी बालों भरी जांघों पर कुछ कुछ पसीना आ गया था जिसे देख कर मैं और जोश में आ गया। मैं बेतहाशा उसकी जांघों को चूमने चाटने लगा, जैसे मैं प्यासा, और उसकी जांघें बर्फ की सिल्ली ! उसके बदन की खुशबू और पसीने की मिलीजुली गंध मुझे मदहोश कर रही थी। अब तक मेरा आधा खड़ा लंड अकड़ कर खड़ा हो गया।


फिर मुझे से रहा न गया और मैंने उसकी चड्डी उतार दी। उसका 8 इंच का लंड मेरे मुँह के आगे सर उठाये खड़ा था। हल्की रोशनी में उसका सांवला लंड किसी चोकलेट की तरह लग रहा था।


उसके सुपारे की नोक पर लिसलिसी बूंदें चमक रही थी।


मैंने अपनी जीभ की नोक से उन बूंदों को चखा, वे कुछ कुछ नमकीन सी थी। फिर मैंने उसका सुपारा मुंह में भर लिया और पागलों के जैसे चूसने लगा।


मैंने सुपारे पर चढ़ी चमड़ी पीछे तक खींच कर जोर शोर से चूसना शुरू किया।


इस पर उसके मुँह से आह निकल पड़ी- आह… आह… आह मेरी जान, बस ऐसे ही, और जोर से चूस, समझ तुझे जिंदगी भर अब लंड नहीं मिलेगा, ऐसा सोच कर चूस !


मैं भी सुपारे से कुछ आगे तक उसका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। उसका लंड मेरे मुँह से काफी बड़ा था सो मैं पूरा पूरा नहीं चूस पा रहा था।


अचानक उसने मेरा सर पीछे से पकड़ा और कहा- जान, एक लम्बी सांस ले, और फिर सांस रोक के रखियो !

जैसे ही मैंने सांस भरी, उसने एक झटके में अपना पूरा लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मैं थोड़ा छटपटाया तो उसने मेरे सर भींच कर अपने पेट से लगा लिया, मेरी मुँह-नाक उसकी भरी भरी, झाटों में छुप गई।


उसने कहा- जान, बस दो मिनट ऐसी ही रह।


मैं भी उसकी झांटों की खुशबू में खो गया। धीरे धीरे, मेरा गला कुछ कुछ फ़ैल गया। तब उसने धीरे धीरे अपना लंड आगे पीछे करना शुरू किया।


वहाँ रोहन और राज जो अभी भी एक दूसरे को चूमने चाटने में लगे थे, यह नज़ारा देख मेरे पास आ गए। रोहन ने नीच लेट कर, मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और राज मेरे निप्पल चूसने लगा।


मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था, मुझे लगा कि मैं हवा में उड़ रहा हूँ।


कुछ 5-10 मिनट मेरा मुँह चोदने के बाद जितेन ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और खुद नीच झुक कर मेरे निप्पल चूसने लगा।


राज जो अब तक मेरे नाजुक निप्पल को काट काट कर लाल कर रहा था, मेरे सामने खड़ा हो गया और रोहन उसके बाजू में, चड्डी के अन्दर दोनों के लंड काफी बड़े लग रहे थे। मैंने सोचा कम से कम 7-7 इंच के तो होंगे।


मेरे मुँह में पानी आ गया, मैंने लपक के रोहन की चड्डी खींच दी, उसका हल्के भूरे रंग का, 7 इंच लम्बा, कुछ 1.5 इंच मोटा लंड मेरे नाक के सामने ऊपर नीचे होने लगा।

मैं उसे मुँह में लेने ही वाला था कि राज ने कहा- लाडो, मैंने क्या बुरा किया जो मुझे पर तेरा ध्यान ही नहीं जाता?


मैंने कहा- ठीक है, रुक, अब तेरा ही चूस चूस के काम तमाम करता हूँ।


वह हँसते हुए बोला- अबे गांडू रानी, तू मुझे नहीं जानता, जब मैं नशे में होता हूँ, तो किसी के गांड-मुँह में दम नहीं कि मेरा पानी निकाल दे, और फिर अभी तक तो तूने दर्शन भी नहीं किये.. देख देख तेरे लिए क्या तोहफा है अन्दर।


मैंने झट से उसकी चड्डी उतार दी, जो मैंने देखा, वह देख कर मेरे होश उड़ गए। मेरे सामने उसका सांवला सा लंड, 7 इंच लम्बा, 2 इंच मोटा, वो भी ढीला हुआ लटक रहा था। मेरी सूरत देख कर राज हँसते हुए बोला- देखा.. अभी तक तो यह पूरा जागा भी नहीं है, अब चूस, और इसको जगा, फिर देख..!


मैंने धीरे धीरे राज का दो इंच मोटा सुपारा मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। एक मिनट के अन्दर उसका सुपारा धीरे धीरे मेरे मुँह में फूलने लगा, साथ साथ उसके लंड का आकार भी बढ़ने लगा।


उसने कहा- अब देख, तेरी गांड में आज रात कौन सैर करेगा !


मैंने चूसना छोड़ जब उसके लंड को देखा तो वह तक कर खड़ा हो चुका था। साढ़े 9 इंच लम्बा, ढाई इंच मोटा ! मेरी फट गई कि इतना बड़ा मैं कैसे लूँगा।


मुझे घबराया देख उसने कहा- डर मत मेरे मीठे, इतने प्यार से दूंगा कि मेरा पानी निकल जाने के बाद भी तेरा मन नहीं भरेगा, चल अब चूस ले मेरी जान !


मैंने किसी तरह अपना मुँह पूरा खोल कर धीरे धीरे चूसना शुरू किया पर उसका लंड था जो 2 इंच भी नहीं समां रहा था। उधर रोहन ने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया जिसे मैं आगे पीछे हिलाने लगा।


कुछ मिनट बाद राज बोला- अरे यार, कुछ मजा नहीं आ रहा ! तू तो सुपारा भी पूरा नहीं ले पा रहा है, एक काम कर, रोहन का चूस, फिर हम एक ट्रिक आजमाते हैं।

मैंने उसे छोड़ रोहन का चूसना शुरू कर दिया, जितेन के लंड ने मेरा गला चौड़ा कर दिया था, सो उसका 7 इंच में बड़े मजे में चूसने लगा।


उधर जितेन ने मेरे निप्पलों के बाद, मेरी नाभि, मेरी कमर को चूमने चाटने और काटने लगा था, बीच बीच में वो मेरी गोरी चिकनी चमकती जांघों को भी चाटता, हल्के से काटता.. कभी कभी मेरी चिकनी गांड पर हल्की सी चपत भी लगा देता था।


उधर मैंने जब राज का लंड पकड़ कर हिलाना चाहा तो उसने कहा- नहीं.. जरा ढीला पड़ जाने दे।


अब राज अलग जा के खड़ा हो गया और एक और सिगरेट सुलगा ली।


जितेन और रोहन दोनों मेरे सामने खड़े हो गए, और मैं बारी बारी दोनों के लंड खींच खींच के चूसने लगा। कई दफा मैंने दोनों के लंड पास पास रख, दोनों को एक साथ मुँह में लेकर चूसा। उस वक़्त तक मुझे नशा खासा चढ़ चुका था, तो जो मैं ऐसे नहीं कर पाता था, वो सब भी कर लिया।


फिर दोनों ने मुझे उठाया, मेरे हाथ अपने अपने कंधे पर लेकर, गोद में उठा कर झुलाते हुए बिस्तर पर ले आये। राज ने मुझे दुबारा सिगरेट दी, मैंने कुछ न न कहा, तो उसने कहा- अबे तेरे लिए ही बड़ी मुश्किल से जुगाड़ कर के लाये हैं.. पी ले मेरे मीठे, तेरी तकलीफ कम करने की दवा है।


ऐसा कह कर उसने एक लम्बा कश खींचा और.. अपने होंठ मेरे होंटों पर लगा दिए, सहज ही मैंने उसे चूमने के लिए होंट खोले तो उसने पूरा धुआं मेरे मुँह में फूँक दिया। मैंने ने भी तब उसके कश का कश लगा लिया। उसकी इस हरकत से मैं और भी गर्म हो गया।


यह देख सब ने बारी बारी यही करना शुरू कर दिया, सब एक एक कर के कश लेते और किसी दूसरे के मुँह में छोड़ देते। मुझे काफी नशा छाने लगा।

यह देख उन्होंने मुझे इस तरह लिटाया कि मैं पूरा बिस्तर पर पीठ के बल, पर मेरा सिर बिस्तर के कोने से बाहर कुछ इस तरह लटक गया कि मेरा गला और मुँह एक सीध में आ गए। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।


तब जितेन ने मेरी टाँगें उठा कर मेरे कंधे तक मोड़ दी जिससे मेरी गांड एकदम ऊपर ऊपर और बाहर खुल के आ गई। उसने मेरी गांड के छेद के आसपास चूमना शुरू किया, उसकी इस हरकत से में एकदम पागल हो गया।


इधर रोहन ने बारी बारी से मेरे निप्पल और मेरा लंड चूसने शुरू कर दिए और अपना लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया.. जिसे मैं हिलाने लगा।


अब राज ने अपनी ट्रिक वाली पोजिशन ले ली, वो ठीक मेरे लटके हुए सर के सामने आकर खड़ा हो गया, उसने पहले मुझे चूमा और फिर थोड़ा झुक कर, अपना ढीला पड़ चुका लंड मेरे मुँह में डाल दिया और कहा- जान… अब जैसे तूने जितेन का लंड धीरे धीरे अन्दर लिया था, वैसे ही मेरा भी ले, लम्बी सांस ले और थोड़ा लंड अन्दर ले, फिर लम्बी सांस ले और थोड़ा अन्दर ले।


मैंने उसके कहे अनुसार थोड़ा थोड़ा लंड अन्दर लेना शुरू किया पर फिर भी लगभग 6 इंच के बाद लंड गले के पास अटक गया।


राज- ठीक है.. अब हल्के हल्के चूस !


मैंने चूसना शुरू किया कि उसके लंड का आकार बढ़ने लगा, मेरा पूरा मुँह लगभग भर सा गया था।


उसने धीरे धीरे अपने कड़क होते लंड को मेरे गले के अन्दर डालना शुरू किया, मैं थोड़ा सा छटपटाया तो उसने उन दोनों से कुछ कहा जो मैं सुन नहीं पाया।


जितेन ने मेरी गांड की गोलाइयों को छोड़ सीधे छेद पर आपनी जुबान फिराना, जोर जोर से चूमना शुरू कर दिया। तो रोहन ने मेरा घबराहट के मारे ढीले पड़ चुके लंड को अन्डूओं के साथ मुँह में भर लिया।

इससे मैं काफी गर्म हो गया और मेरा ध्यान राज पर से हट सा गया। राज ने मौके का फायदा उठा के पूरा लंड दो झटको में मेरे गले में उतार दिया, और मेरा सर पकड़ कर, अपनी दोनों टांगों के बीच दबा लिया।


2 मिनट में मेरा गला चौड़ा हो गया और राज का 9 इंच लम्बा, ढाई इंच मोटा लंड, मेरे गले में बखूबी समां गया। अब मुझे कुछ होश ही न रहा।


एक तो सर नीच लटके होने के कारण नशा और ज्यादा ही लग रहा था, उस पर तीन लड़के मेरे ऊपर अलग अलग पोजिशन में लगे पड़े थे। अब दिमाग ध्यान दे, तो भी किस किस पर दे।


मैंने थोड़ा होश बटोर कर दोनों हाथों से रोहन का सर पकड़ कर उसका सिर अपने लंड पर जोर शोर से ऊपर नीचे करने लगा। पता नहीं कितने मिनटों के बाद जब हम अलग अलग हुए तब राज ने हँसते हुए कहा- क्यूँ कैसी लगी मेरी 9 इंच की आइसक्रीम?


मैंने पूछा- क्या मतलब?


राज- औव् व् व् व् .. मेरे प्यारे मीठे, तुझे पता नहीं, अभी अभी तूने मेरा पूरा लंड कामयाबी से चूसा।


मैं कुछ हैरान और कुछ शरमा गया। इस पर जितेन ने मुझे बड़े प्यार से उठा कर मेरे पैर अपनी कमर के गिर्द कर लिए और मेरे हाथ उसकी गरदन की पर लपेट लिए और मुझे पागलों की तरह चूमने लगा।


फिर मुझे बिस्तर पर कुत्ते की पोजिशन में कर दिया। अब बारी बारी से एक बन्दा मेरी गांड चूमता चाटता और दो सामने खड़े होकर लंड चुसवाते, बीच बीच में रोहन उनका या मेरा लंड चूस लेता।

यह सब काफी देर तक चलता रहा, इतनी देर तक अलग अलग तरह से गांड चटवाने के बाद, मैं चुदने के लिए इतना बैचेन हो गया था कि मेरा लंड बुरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया था, उसमें से रंग-रहित रस निकल निकल कर, नीचे चादर गीली कर रहा था।


मेरी यह हालत देख राज ने शरारत से कहा- देख जितेन, हमारा मीठा गुड्डा कितना बेताब हो रहा है ! इतनी देर से लंड चूस चूस कर बेचारे का मुँह दुःख गया होगा, अब हमें भी उसकी प्यास बुझानी चाहिए।


जितेन- हाँ यार, मेरा तो नहीं दिल भरा, पर एक एक कर के शुरुआत करते हैं, अभी तो सारी रात और 2 सिगरेट और बाकी हैं।


उसने आँख मारी।


उस समय तो मुझे विश्वास नहीं हुआ पर… आगे उस रात और क्या क्या हुआ, कैसे तीनों ने बारी बारी मेरी गांड मारी, और कैसे मेरे जिस्म को उन्होंने नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाया, और जितेन पर इसका असर…. जिस के बारे में मैंने सपने में भी कभी नहीं सोचा था,

वह सब अगले भाग में लिखूंगा।


यदि मेरी अब तक की कहानी आप को पसंद आई हो, तो इसे स्टार रेटिंग दीजिये, मुझे मेल कीजिये।


आपका प्रतिसाद देख क़र मैं अगला भाग लिखूंगा और अपने कई और कई रंगीन किस्से बताऊँगा।

Hindi Gay sex kahani – गांडू का परिवार

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Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां


मै मुंबई से अहमदाबाद आ रहा था , एसी चैर कार मै मेरे पास एक २५ साल का लड़का बैठा था, उसने अपना नाम जतिन पटेल बताया, बोला प्यार से उसे जीतू कह सकते हैं .. बातो बातो में उसने बताया की उसके पिता बड़े अधिकारी हैं और उसका सरकारी मकान गांधीनगर में है. मुझे उस रोज़ अहमदाबाद ही रुकना था और अगले दिन सुबह वह से निकलना था, उसके आग्रह पर मैं उसके साथ उसके घर चल दिया..

उसके पिता का सरकारी घर ठीकठाक सा था . घर में शाम को नौकर आया और खाना बना कर चला गया. हमने खाना खाया फिर छत पैर गप्पे मारने लगे. थोड़ी गर्मी थी, उसने टी शर्ट और निक्कर पहना हुआ था , मैंने भी. ‘ गर्मी बहुत है अशोक, चाहो तो टी शर्ट खोल कर आराम से बैठो, तुम कहो तो मैं तुम्हे अपने पिताजी की लुंगी ला देता हू उसे पहन लो, ‘ मैं हाँ बोलता उस से पहले ही वह निचे से लुंगी ले आया,’ तुम कहते हो तो पहन लेता हू, कह कर मैं नीचे जाने लगा , तो वो बोला,’ अशोक दोस्तों में क्या शर्म यहीं पहन लो,’ ‘ मैं हँसते हुए बोला, यार मैं घर में चड्डी नहीं पहनता, ‘ तो क्या हुआ, पहन लो यार , अँधेरा है वैसे भी छत से कोई देख नहीं सकता..’ मुझे लगा अब पहन ही लेता हूँ, मैंने लुंगी उपर लपेटी और निक्कर सरका दिया और फिर लुंगी लपेट ली,’ ‘ क्या यार तुम तो बड़ा शरमाते हो,’ वो बोला, मैं हसने लगा


‘ अशोक मैं मालिश बहुत अछी करता हूँ, तुम ट्रेन के सफ़र से थके हुए भी हो, कहो तो एक अछी मालिश कर दू? जीतू बोला. अब मालिश के लिए कौन मना करेगा, मैं वही छत पर बिछे बिस्टर पर लेट गया, जीतू तेल ले आया और मेरे पैरों से उसने मालिश शुरू कर दी, अँधेरा था ठंडी हवा थी बड़ा अच्छा लग रहा था, उसने रानो पर मालिश के बाद मेरी जांघों पर मालिश शुरू कर दी , मालिश करते करते उसके हाथ मेरे नितम्बों से टकराने लगे, और उसने थोड़ी देर बाद मेरे नितम्बों से लुंगी उपर कर दी , जांघों के बाद वो मेरे नितम्बों पर भी मालिश करने लगा और बीच के छेद पर भी खूब तेल लगता रहा , मुझे अच्छा लग रहा था , मैं चुपचाप लेटा रहा. मालिश करते करते वो खुद नंगा हो गया था और बिच बिच में उसका लंड मेरी जांघों से टकरा रहा था , पर यह सब मुझे अजीब नहीं लग रहा था न जाने क्यूँ? पहली बार मेरी मालिश कोई नग्न पुरुष कर रहा था और मैं भी तो नग्न ही तो था..

‘ यार अशोक लुंगी की गाँठ खोल दे, तेल से ख़राब हो जाएगी , मैंने भी कपडे इसी लिए उतारे हैं, जीतू बोला. मैंने उसके कहे मुताबिक लुंगी हटा दी, अब मैं उल्टा और नंगा लेटा था.. उसने मेरी पीठ और हाथो पर भी मालिश की , और फिर वापस वो मेरी गांड पर आ गया , गांड के छेद पर उसने खूब सारा तेल डाला और उसको धीरे धीरे सहलाने लगा,’ अशोक बुरा न मनो तो गांड चाट लू ? मुझसे कुछ बोला न गया और मैंने गांड उपर कर दी, जैसे मैं कोई चौपाया जानवर हूँ, उसने अब मेरी गांड के छेद को खोला और अंडर जीभ डाल दी, उसकी जीभ और गहरी जा रही थी , वो गांड ऐसे खा और चाट रहा था जैसे lollypop चूस रहा हो.


मुझे आस्चर्य हो रहा था की इसको घिन नहीं आ रही पर मैं आनंद ले रहा था जीवन मैं पहली बार गांड चटाई का,किसी उस्ताद खिलाडी की तरह वो रुका नहीं और अब उसके हाथ मेरे लटक रहे थेले पर आ गए , मेरे अंडकोष वो अब सहला रहा था और बीच बीच में उनको भी चाट रहा था , लेकिन उसका पूरा जोर गांड पर ही था, गांड में उसकी जीभ कोई एक- डेढ़ इंच जा चुकी थी बीच बीच में वो छेद को थोडा खोलता और जीभ और अन्दर दाल देता , अब मेरी हालत ख़राब थी और उसको इसका अंदाज़ा था, उसने चटाई के साथ साथ एक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़ लिया और उसको हिलाने लगा.

दुसरे हाथ से वो मेरे आंड दबा रहा था, गांड आंड और लंड तीनो को उसने अपने कब्ज़े में कर रखा था , मैं झड़ने को ही था और मेरी गांड अब तेज़ी से उपर नीचे होने लगी थी, उसने जीभ से मेरी गांड को चोदना शुरू कर दिया और हाथ की स्पीड बाधा दी, ‘ओह्ह चूतिये पानी छूट रहा है मेरा , मैं बोला, ‘ हा रजा पानी नहीं अमृत ‘ कह कर उसने ठीक पानी की पिचकारी छूटने से पहले मुह को गांड से हटा कर मेरे लंड के छेद पर रख दिया, मेरी फूट रही वीर्य की बूंदों को वो गटागट पी गया, अशोक तेरा अमृत बड़ा गाढ़ा और रसीला है, वो बोला . मैंने पहली बार किसी आदमी के मुह में पानी छ्होड़ा था, मुझे किस चूत को चोदने का मौका भी नहीं मिला था इसलिए पहली बार किसी और ने मेरे लंड पर हाथ लगाया था और पहली बार किसी ने पानी छुट्वाया था… मैं उत्तेजित तो था लेकिन पूरा रोमांचित नहीं था, मुझे लगा मैं कहीं होमो तो नहीं हूँ या हो रहा हूँ?

एक बार खुलते ही जीतू फॉर्म में आ गया, बोला जब वो 7-8 साल का था तब घर के एक नौकर ने उसको लंड चुसवाने और गांड मरवाने की आदत डाल दी थी, ‘ मैं घर से थोडा दूर एक दूधवाले के यहाँ दूध लेने जाता था,’ वो मुझे दूध के बहाने रोक के रखता फिर अपनी धोती खोल कर मेरा मुह चोदता , 12-13 साल का होते होते जीतू ने कोई 10-15 लोगों से गांड मरवा ली थी.. ‘ उन दिनों मैं अछे स्कूल में पढने सूरत आया , जहाँ पूरा परिवार रहता था, मैं मेरे पिताजी, मेरी मान और मेरी बहिन , यहाँ जीतू के घर उसको और उसकी बहन को पढ़ने एक अध्यापक आता था ,’ उसका नाम था अमीन खान और वो साथ के अस्स्पास था , जीतू ने बताया , ‘ दिन में जब माँ सो जाया करती थीं या कई बार बहार गयी हुई होतीं तब वह बड़ा ज़ालिम बन जाता , जीतू कह रहा था. ‘ मुझे वो नंगा कर के डंडे से मरता , मेरी बहन के सामने मेरी गांड लाल कर देता, कई बार उसी डंडे को मेरी गांड में डालता और मेरी बहन और मुझे दोनों को डराअ धमका कर नंगा कर देता, मेरी बहन की छोटी छोटी चुचियों को वो बड़ी बेरहमी से दबाता और उसकी चूत में ऊँगली करता और कभी डंडा डालने की कोशिश करता, फिर वो नंगा हो कर मेरे मुह पर बैठ जाता , मैं उसकी बदबूदार गांड चाटता और मेरी बहन उसका कटा हुआ लंड चूसती , हालाँकि उसका लंड खड़ा नहीं होता था लेकिन वो नरम लंड से ही मेरे और मेरी बहन के मुह में पानी छोड़ देता था, जीतू ने बताया . ‘ बस तब से ही मेरी गांड चाटने की आदत पड़ गई .

जीतू की बाते सुन कर में फिर से उत्तेजित होने लगा था, अशोक अब तक मैंने कोई 40 से 50 के बीच लोगों की गांड चाटी है और कोई 60 लोगों का लंड चूसा है या गांड मरवाई है,’ वो बोला. ‘ जीतू तुम्हें कभी किसी औरत को चोदने की इच्छा नहीं हुई ? मैंने पूछा . ‘ नहीं कभी नहीं हुई मुझे सिर्फ आदमी ही आकर्षित करते हैं, मैं चाहता हूँ मैं मेरे पापा का लंड भी चूसूं , एक दो बार बहाना कर के उनके साथ भी सोया लेकिन उन्होंने कोई इंटेरेस्ट नहीं लिया , वो बोला. ‘ और कभी माँ या बहिन को चोदने की इच्छा नहीं हुई ? ‘ नहीं कभी नहीं लेकिन अगर तुम उनको चोदोगे तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा ? ‘ मुझे उत्तेजना हुई , मैंने पूछा ,’ कैसे ? ‘ कैसे क्या तुम चोदो मेरी माँ को और बहिन को मैं तुम्हारा लंड चूसूंगा और गांड चाटूंगा ,’ वो बोला,’ अच्छा तुम्हारी माँ और बहिन की गांड चाटने की इच्छा नहीं होगी ? मैंने पूछा . ‘गांड का गू तो मैं किसी का भी चाट लूँ , माँ हो या बहिन , लेकिन अब तक किसी औरत की गांड चाटी नहीं, उसने कहा .

मैंने कपडे पहने नहीं थे इसलिए मेरा फूलता हुआ लंड अब साफ़ दिख रहा था, जीतू ने उसको प्यासी नज़रों से देखा और अपना मुह उसके पास ले आया, अशोक तुम्हारा लंड बहुत मोटा है किसी काले केले के जैसा , वो बोला, ले गांडू अब तू इस केले का छिलका उतर और खा इसको , मैं बोला, जीतू ने अपने होठों से मेरे लंड के आगे की चमड़ी उपर नीचे करना शुरू कर दिया और सुपाड़े को गीला कर के उसको दांतों से हल्का हल्का दबाते हुए चूसने लगा , मेरा सुपाडा फूल कर आलू जैसा हो गया था, ‘ अशोक तू मेरी गांड बाद में मरना अगर तुझे सुसु आ रही हो तो पहले मेरे मुह में मूत ले मुझे प्यास लगी है, मुझे कुछ उल्टा सीधा सोचना पड़ा ताकि उत्तेजना कम हो और लंड सामान्य हो जाए क्यूंकि सुसु तो लंड के छोटे होने पर ही निकलती है , खैर थोड़ी देर में मेरा लंड छोटा हो गया ‘ मेरे मुह पर बैठ जाओ अशोक और मूतो , वो बोला, मैं उसके मुह पर बैठ गया उसने मेरा लंड पकड़ा और उसको होठों से लगा दिया, मेरी धार छूट रही थी, मैं मूत रहा था और वो सांस बंद करके उसको पी रहा था, कोई आधा लीटर मूत वो पी गया, आह अशोक तुमने मेरी प्यास बुझा दी, अब अगर तुमको बाथरूम का कोई भी काम हो टट्टी आये तो भी मेरे मुह में करना , मैं तुम्हारा टोइलेट हू, वो बोला.

‘ तुमको ये अपमान कैसे अच्छा लगता है? मैंने पूछा , ‘ अशोक मुझे अपमान में बहुत आनंद आता है, ‘ एक बार मुझे दो ऑटो रिक्क्षा वाले अपने साथ अपनी चाल में ले गए और मेरा खूब अपमान किया वो रात मुझे अभी तक याद है, वो बोला, ‘ क्या किया उन्होंने ?’ मैंने जिज्ञासा में पूछा ,’ उन्होंने मुझे नंगा कर के एक कुर्सी से बाँध दिया, फिर वो भी नंगे हो गए फिर पहले तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मारे जोर जोर से मुह पर, फिर उन्होंने मेरे मुह में मूता और गन्दी गन्दी गालियाँ दीं , वो बोला,’ क्या गलियां दीं ? बोलते रहे कुत्ते , हरामजादे , कमीने , गांडू , भोसड़ी के, चूतिये , मादरचोद , भेन्चोद , भड़वे वगेरह फिर मुझे कहा अपनी माँ और बहिन को गालियाँ दे भड़वे , तो मैंने मेरी माँ को रंडी कहा लंड चोद कहा भोसड़ी की कहा चूत कहा , बहिन को भाई चोद , बाप चोद रंडी और खूब साडी गालियाँ दीं , फिर उन्होंने मेरे हाथ पांव बाँध कर मुझे घोड़ी बना दिया, एक ने अपना लौड़ा मुह में डाला दुसरे ने गांड में उन्होंने पूरी रात मुझे चोदा मूता गांड चटवाई और गालियाँ दीं और मेरी माँ बहिन को गालियाँ दिलवायीं , जीतू बोला.

” तुम्हारी माँ बहिन को ये सब पता है? मैंने पूछा . ‘ नहीं उनको नहीं पता कि मैं गांडू और गांड चाटू हूँ, बहिन को सिर्फ वो मास्टर वाला किस्सा पता है पर तब हम दोनों छोटे थे , ‘ वो बोला,’ अच्छा जीतू तुम मुझे अपनी माँ और बहिन को चुदवादोगे ? ‘ हा क्यूँ नहीं? लेकिन मैं सिर्फ मदद कर पाउँगा बाकी काम तुमको खुद करना होगा , वो बोला, ‘ मैं कैसे करूँगा ? और तुम क्या करोगे ? ‘ देखो एक साथ तो कुछ होगा नहीं मेरी माँ अगले शनिवार को यहाँ आ जाएगी, मैं उनको कह दूंगा की तुम एक कॉलेज में पढ़ते हो और मेरी पढाई में मदद के लिए यहाँ आ रहे हो, बाकी सब तुमको करना पड़ेगा , वो बोला, इधर उसकी बातें सुनकर मेरा लौड़ा फिर बेकाबू हो चुका था, ‘ जीतू फिर से मेरे लंड की टिप से मेरी गांड के छेद तक अपनी जीभ और उँगलियाँ चला रहा था , जब लंड पूरा कड़क हुआ तो वो घोड़ी बन गया, ‘ अशोक अब मेरी गांड की प्यास बुझाओ , सहन नहीं होता अब, कहके उसने गांड ऊँची कर दी, मैंने उसकी गांड पर कसके थप्पड़ मारे और फिर बिना थूक लगाये सूखा लंड गांड के छेद पर रख के दबाव दिया तो सुपाडा गांड में धंस गया, उसकी हलकी चीख निकली ,’ ये सोच भड़वे मैं तेरी माँ को चोद रहा हूँ, बता तेरी माँ कैसी है? ‘

चुदते चुदते ऊ ओह आह करते करते वो बोलने लगा,’ मेरी माँ का नाम सजल पटेल है , वो 45 साल की है, उसकी लम्बाई 5 फूट 3 इंच है, शादी के वक्त तो दुबली थी अब मोटी है,’ ‘ मैंने जोर से लंड गांड में डाला और बोला,’ कितनी मोटी है भड़वे ? ‘ कोई 80 किलो होगी

मैंने फिर पानी छोड़ दिया , ऐसे करके सुबह तक उसने मुझे कोई 5 बार खाली किया.

Train Mai Mila Chikna Gandu

 

Train Mai Mila Chikna Gandu

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां

राहुल 25 साल का था। मध्य प्रदेश के धार जिले से। उसका बदन देखकर कोई भी लड़का पागल हो जाए – 6 फीट लंबा, मस्कुलर, चौड़ी छाती, बाइसेप्स फटे हुए, पेट पर साफ-साफ सिक्स पैक। और सबसे खतरनाक चीज थी उसकी – 8 इंच लंबी, मोटी, गहरी नीली रगों वाली, हमेशा कड़क खड़ी रहने वाली लंड। ट्रेन में बैठते ही उसकी टाइट जींस में वो उभरकर दिख रहा था।


वो धार से दिल्ली जा रहा था AC 2nd tier में। रात के 10:30 बजे ट्रेन इंदौर से गुजर चुकी थी। राहुल की लोअर बर्थ पर वो लेटा हुआ था। बगल की बर्थ पर एक लड़का बैठा था – नाम था आरव। 23 साल का, बेहद चिकना, गोरा, स्मूद स्किन, पतला लेकिन कसी हुई बॉडी वाला। उसके गाल गुलाबी, होंठ मोटे और आँखें ऐसी कि देखते ही मन में गंदी-गंदी बातें आने लगें। वो एकदम परफेक्ट “गेंदू” टाइप था – नर्म, मुलायम, और बिल्कुल तैयार।

राहुल ने आरव को देखा तो उसका लंड तुरंत हिल गया। “भाई, कहाँ तक जा रहे हो?” राहुल ने मुस्कुराते हुए पूछा। आरव ने शरमाते हुए जवाब दिया, “दिल्ली… आप?” “मैं भी दिल्ली।” राहुल ने अपनी मस्कुलर बाहें ऊपर करके स्ट्रेच किया। उसकी टी-शर्ट ऊपर चढ़ गई और पेट के एब्स दिख गए। आरव की नजरें वहीं अटक गईं।


धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। राहुल: “अकेले ट्रैवल कर रहे हो? डर नहीं लगता रात में?” आरव (मुस्कुराते हुए): “अब तो नहीं… आप जैसे मस्कुलर भैया साथ में हैं तो।”

राहुल समझ गया कि मछली काँटे पर लग गई है। रात के 12:30 बजे लाइट्स डिम हो गईं। पूरा कोच सो चुका था। राहुल ने धीरे से अपना पैर आरव की बर्थ की तरफ बढ़ाया और आरव की जांघ को छू लिया। आरव ने झटके से नहीं हटाया, बल्कि मुस्कुराकर राहुल की तरफ देखा।

राहुल फुसफुसाया, “आरव… आ जा मेरी बर्थ पर… कोई नहीं देखेगा।”


आरव चुपके से उतरकर राहुल की लोअर बर्थ पर आ गया। दोनों एक-दूसरे से सटकर लेट गए। राहुल ने तुरंत आरव को अपनी मजबूत बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठों पर जोरदार किस किया। दोनों की जीभें एक-दूसरे में घुल गईं। आरव की सांसें तेज हो गईं। राहुल ने आरव की शर्ट ऊपर कर दी और उसके निप्पल चूसने लगा। आरव के मुँह से हल्की-हल्की आहें निकल रही थीं – “उम्म्म… राहुल… धीरे…”

राहुल ने आरव का पैंट और अंडरवीयर दोनों एक साथ नीचे किया। आरव का 5 इंच का चिकना, बिना बाल वाला लंड खड़ा था। राहुल ने उसे मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। आरव राहुल के बाल पकड़कर उसके सिर को दबा रहा था। “आह्ह्ह… राहुल… तुम्हारा मुँह बहुत गर्म है…”

फिर राहुल ने अपनी जींस खोली। उसका 8 इंच का मोटा, काला, कड़क लंड बाहर आ गया। आरव की आँखें फैल गईं। “इतना मोटा…?” राहुल मुस्कुराया, “अब लेना पड़ेगा पूरा।”


राहुल ने आरव को कुत्ते की तरह मोड़ा। आरव घुटनों के बल था, गाँड ऊपर। राहुल ने थूक लगाकर अपनी लंड की टिप आरव की टाइट गाँड पर रखी और धीरे-धीरे अंदर डाला। आरव: “आह्ह्ह… धीरे राहुल… बहुत मोटा है…” राहुल ने एक जोरदार धक्का दिया और आधा लंड अंदर चला गया। फिर पूरा 8 इंच तक घुसा दिया। आरव के मुँह से चीख निकलने वाली थी, लेकिन राहुल ने उसके मुँह पर हाथ रख दिया।

फिर शुरू हुआ जोरदार चुदाई। राहुल आरव की कमर पकड़कर पूरे जोर से धक्के लगा रहा था। हर धक्के पर आरव की गाँड हिल रही थी। “पक… पक… पक…” की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी। राहुल बार-बार आरव के कान में फुसफुसा रहा था – “ले मेरी रानी… पूरी ले… तेरी गाँड बहुत टाइट है…”


पहली बार में ही दोनों का झड़ गया। राहुल ने आरव की गाँड के अंदर ही पूरा माल भर दिया।

लेकिन राहुल अभी थका नहीं था। दूसरी बार – राहुल लेट गया, आरव उसके ऊपर बैठ गया। आरव ने राहुल की लंड अपनी गाँड में खुद डाली और ऊपर-नीचे होने लगा। राहुल आरव के स्तन मसल रहा था और नीचे से धक्के दे रहा था। आरव की आहें पूरी बर्थ पर गूंज रही थीं – “हां राहुल… और तेज… फाड़ दो मेरी गाँड…”


तीसरी बार – दोनों 69 पोजीशन में। राहुल आरव का लंड चूस रहा था और आरव राहुल का पूरा 8 इंच गले तक ले रहा था। दोनों एक साथ झड़े।

रात भर तीन बार पूरा सेक्स हुआ। सुबह 5 बजे तक दोनों पसीने से तर-बतर, गले मिलकर सो गए। राहुल ने आरव की गाँड पर हल्का-हल्का थपथपाते हुए कहा, “दिल्ली पहुंचकर भी मिलेंगे ना?” आरव शरमाते हुए बोला, “हां… तुम्हारा ये 8 इंच वाला लंड अब मेरी गाँड का दीवाना हो गया है।”

Hindi Gay sex story – मै वो लोकल ट्रेन और संभोग का आनंद

 Hindi Gay sex story – मै वो लोकल ट्रेन और संभोग का आनंद

Ansuni Kahaniyan || अनसुनी कहानियां




मेरा नाम रमेश है और आज मै आपको अपने साथ हुआ, एक हसीन हादसा या हुई एक घटना सुनाता हु | मै एक छोटे से शहर मे रहता हु, लेकिन ये छोटा सा शहर एक पर्यटन जगह है, तो काफी सारे लोग, देश से और विदेश से इसको देखने आते है | मेरा काम घूमना है और मै रेल मे काफी सफ़र करता हु और अक्सर जिस रेल से मे जाता हु, वो दिन मे अक्सर खाली चलती है और कभी-कभी तो, मै सिर्फ अकेले ही होता हु | एक दिन की बात है, मै किसी दुसरे शहर से आ रहा था | दोपहर का समय था और किस्मत से उस डब्बे मे मै सिर्फ अकेले ही था |


मैने अपने सामान को लगा दिया और अकेले होने की वजह से सोने की तैयारी करने लगा | रेल चलने वाली थी, तभी गार्ड के साथ एक विदेशी आया और गार्ड ने उसे मेरी साथ वाली सीट पर बैठ दिया और मुझे बोलकर चला गया, कि साहब इसको बिलकुल इंग्लिश नहीं आती, तो देख लेना | मैने संकेतो मे कुछ बात करने की कोशिश की और उसका नाम पूछा, वो मेरी बात समझ गया और उसने मुझे अपना अपना मार्टिन बताया | मजेदार बात थी, कि मुझे भी इंग्लिश कुछ ज्यादा नहीं आती थी और जब दो लोगो को एक दुसरे की भाषा का ज्ञान ना हो, तो वो संकेतो की भाषा बहुत जल्दी समझ जाते है |मार्टिन, अपने देश मे एक निजी कंपनी मे काम करता था और काफी समय से इंडिया मे था और काफी हद तक घूम चुका था |


मार्टिन एक बिलकुल सफ़ेद खाल वाला आदमी था और उसकी उचाई और कद-काठी बहुत ही मस्त थी | उसके चहरे की लालिमा बहुत ही मस्त थी | आप लोगो की जानकारी के लिए बता दू, कि मै एक बाई सेक्सुअल आदमी हु और आदमियों के साथ सेक्स उतना ही पसंद करता हु, जितना औरतो के साथ | मार्टिन ने एक स्लीवलेस टी-शर्ट पहनी हुई थी और उसके डोले-शोले नज़र आ रहे थे और एक निकर था, जिसमे से मुझे उसकी मजबूत टाँगे दिख रही थी | हम दोनों आमने सामने बैठे हुए थे, मार्टिन कोई किताब पढ़ रहा था और मै उसको घुर रहा था | मेरे लंड और गांड मे खुजली हो रही थी और मुझे ऐसा कुछ करना था, कि वो मेरे साथ सेक्स कर सके |मार्टिन अपनी किताब मे खोया हुआ था, मैने ही उससे बात करनी शुरू की और उससे उसके बारे मे, उसके परिवार के बारे मे और उसके इंडिया भ्रमण के बारे मे पूछने लगा | बातो ही बातो मे, मै उसके बराबर मे जाकर बैठ गया और उसके पैरो पर हाथ मार के बात करने लगा | बीच-बीच मे, मै उसके लंड को को छु लेता था और एक बार काफी जोर से दबा भी दिया था |



फिर, मैने मार्टिन को पूछकर सारे परदे डाल दिये और सिर्फ हम दोनों ही लोग थे | फिर, मैने एक मैगज़ीन निकाली, जिसमे सम्लेंगिक सेक्स के बारे मे था और थोड़ी देर पढके सोने का नाटक करने लगा और फिर मैने मैगज़ीन को टेबल पर रख दी | कुछ देर बाद, मार्टिन को भी नीद आने लगी और उसने वो मैगज़ीन उठाकर देखी और मुस्कुराने लगा और मेरे सिरहाने आकर बैठ गया और चादर के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगा | मैने भी आँखे खोल ली और ऊपर बैठ गया और मार्टिन को बराबर मे बैठा लिया | फिर, मैने और मार्टिन ने एक दुसरे का चेहरा हाथ मे ले लिया और अपने होठो को जोड़ दिया और किस करने लगे | हमारा किस बहुत ही गरम था और मेरे लंड से रस रिसना शुरू हो गया | मार्टिन ने अपना हाथ नीचे लेजाकर मेरे निकर मे हाथ डाल दिया और मेरे टटटो से खेलने लगा |


मैने भी अपनी चादर हटा दी और उसके लंड को पकड़ लिया और खीचने लगा | फिर, मार्टिन और मैने एक दुसरे को नंगा किया और हम दोनों एक बर्थ पर लेट गये | हम दोनों के शरीर एक दुसरे से चिपके हुए थे और रेल के धक्को की वजह से हमारे लंड एक दुसरे के लंड से टकरा रहे थे और हम दोनों ने एक दुसरे की गांड पर हाथ रखे हुए थे, ताकि हम दोनों के शरीर एकदम चिपक जाये और हम दोनों एक दुसरे को चूम रहे थे | फिर, मै घूम गया और ६९ करके मैने मार्टिन का लंड अपने मुह मे ले लिया और मार्टिन मेरा लंड चूसने लगा | मार्टिन का लंड एक दम गोरा था और उसका सुपाड़ा एक दम गुलाबी |


मै उसको चूम रहा था और अपनी जीभ से चाट रहा था और चूस रहा था | मार्टिन ने एक अपनी ऊँगली मेरे गांड मे करनी शुरू कर दी और वो शायद ऊँगली को बार-बार अपने मुह मे डालकर गीली करके मेरी गांड के छेद को चिकना कर रहा था |फिर, मार्टिन ने मुझे दुसरी बर्थ पकड़कर कुत्ता बनने के लिए बोला और अपने घुटनों पर बैठकर मेरी गांड को चाटने लगा और पूरी तरह से गीला कर दिया और फिर, खड़े होकर अपना लंड रगड़ना शुरू कर दिया और एक तेज झटके के साथ उसका लंड मेरी गांड मे था |


रेल के झटके उसका साथ दे रहा था और वो जोर से अपनी गांड हिलाकर मेरी गांड का बैंड बाजा रहा था | फिर, उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर मेरा हस्त्मथुन करना शुरू कर दिया और कुछ ही देर मे मैने अपना सारा पानी सामने वाली बर्थ पर गिरा दिया | मेरी गांड भी पीछे तेजी से हिल रही थी, ताकि उसका लंड और अन्दर तक जा सके | कुछ देर मे, मार्टिन की गांड तेज हिलनी शुरू हो गयी और उसने अपन गरम पानी मेरी गांड मे छोड़ दिया | उसका गरम पानी मेरी गांड मे सेक दे रहा था और मुझे अच्छा लगा रहा था | फिर, मार्टिन और मै दोनों ही बर्थ पर लेट गये और सो गये |


जब तक स्टेशन आया, तब तक मार्टिन ने मुझे ३ बार चोद दिया और मुझे मज़ा आ गया | मार्टिन ने मुझे अपना नंबर दे दिया और अगले ३-४ दिन तक हम साथ रहे और काफी मस्ती के बाद मैने मार्टिन को विदा कर दिया |

Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई

 Gay sex story Hindi font – ट्रेन में अंकल की गांड मराई हाय . मैं फिर से हाजिर हूं।मैं आपके समक्ष एक नई कहानी बताता हूँ जब कि मै बिलासपुर स...